RBSE Class 10th 2011 Hindi-S-01-2011 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 10th
Exam year 2011
Subject Hindi-S-01-2011
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2011 2011 solved Previous Year Question Papers

माध्यमिक परीक्षा, 2012

हिन्दी (HINDI)

समय : 3 घण्टे      पूर्णांक : 80


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंकवाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
  5. प्रश्न क्रमांक 2 व 3 अति लघु उत्तरात्मक हैं।
  6. प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii तथा iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (क, ख, ग एवं घ) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें :
प्रश्न क्रमांक सही उत्तर का क्रमाक्षर
1. (i)
1. (ii)
1. (iii)
1. (iv)

[ Turn over ]

प्रश्न 1 (i)

“पशु बलि हिंसा है, अतः यह घृणित, गर्हित, त्याज्य कर्म है ।” यह कथन है

  • (क) वल्लभ सेन का
  • (ख) अग्रसेन का
  • (ग) भीमसेन का
  • (घ) रलसेन का

उत्तर: (ख) अग्रसेन का

यह कथन राजा अग्रसेन का है, जो अहिंसा के पक्षधर थे और पशु बलि को घृणित कर्म मानते थे।

प्रश्न 1 (ii)

सीधे-सादे किसानों का धन काम आता है

  • (क) भोग-विलास के लिए
  • (ख) अहंकार के लिए
  • (ग) धर्म और कीर्ति के लिए
  • (घ) ज्ञान के लिए

उत्तर: (ग) धर्म और कीर्ति के लिए

किसानों की सादगी और ईमानदारी से कमाया गया धन धार्मिक कार्यों और यश प्राप्ति में सहायक होता है।

प्रश्न 1 (iii)

“अब तक मानो मैं भ्रम में था, तुमने आज मिटा दी” इस पंक्ति में भ्रम में थे

  • (क) गुरु नानक
  • (ख) गुरु गोविन्द सिंह
  • (ग) भाई मर्दाना
  • (घ) देशभक्त

उत्तर: (ग) भाई मर्दाना

यह पंक्ति गुरु नानक देव जी के साथी भाई मर्दाना के भ्रम को दर्शाती है, जो गुरु के उपदेश से दूर होता है।

प्रश्न 1 (iv)

“धरती घूमती आई, हीयो कांप्यो सिर चकरायो” निहित पंक्ति में ऐसा अनुभव हुआ

  • (क) देवलदे का
  • (ख) ता देव का
  • (ग) रंगादे का
  • (घ) खिलजी का

उत्तर: (क) देवलदे का

यह पंक्ति देवलदे (देवल देवी) के भावनात्मक अनुभव को व्यक्त करती है, जो पृथ्वी के घूमने और हृदय के कांपने का वर्णन करती है।

प्रश्न 2

“उमेश” शब्द का संधि-विच्छेद कीजिए।

उत्तर: उमेश = उमा + ईश

यह गुण संधि का उदाहरण है, जहाँ 'उमा' (पार्वती) और 'ईश' (स्वामी) के मेल से 'उमेश' (शिव) शब्द बनता है।

प्रश्न 3

जयशंकर प्रसाद की दो काव्य-कृतियों का नामोल्लेख कीजिए।

उत्तर: जयशंकर प्रसाद की दो प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं:

  1. कामायनी
  2. आँसू

ये दोनों रचनाएँ हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर हैं, जिनमें 'कामायनी' महाकाव्य और 'आँसू' गीतिकाव्य है।

4. “जरूरत है ऐसे नौजवानों की ।' लेखक बेनीपुरी कैसे नौजवानों की जरूरत महसूस कर रहे हैं ?

लेखक बेनीपुरी ऐसे नौजवानों की जरूरत महसूस कर रहे हैं जो देश और समाज के प्रति समर्पित हों, जिनमें आदर्शों के प्रति निष्ठा हो और जो स्वार्थ त्यागकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।

5. निम्नलिखित सामासिक पदों का विग्रह कर उनमें निहित समास का नाम लिखिए :

  1. वचनामृत – विग्रह: वचन रूपी अमृत, समास: कर्मधारय समास
  2. फल-फूल – विग्रह: फल और फूल, समास: द्वंद्व समास

6. विशेषण शब्द के पद परिचय हेतु कोई चार बिन्दु लिखिए।

  1. विशेषण का भेद (गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक, सार्वनामिक) बताना।
  2. विशेष्य (जिस शब्द की विशेषता बताई जाए) का उल्लेख करना।
  3. लिंग, वचन और कारक के अनुसार विशेषण का रूप बताना।
  4. वाक्य में प्रयोग के अनुसार विशेषण का कार्य (विशेषण या विधेय) स्पष्ट करना।

7. “वह तो बचपन में ही शहर गया।” उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित पदों के पद-परिचय से सम्बन्धित दो-दो बिन्दु लिखिए।

वह – (1) सर्वनाम (पुरुषवाचक), (2) एकवचन, पुल्लिंग, कर्ता कारक।
बचपन में – (1) संज्ञा (भाववाचक), (2) अधिकरण कारक, एकवचन, पुल्लिंग।
शहर – (1) संज्ञा (जातिवाचक), (2) द्वितीया कारक (गति का अर्थ), एकवचन, पुल्लिंग।

8. (i) “मोहन पढ़ता है और सोहन खेलता है” – उपर्युक्त वाक्य रचना की दृष्टि से किस प्रकार का है ? उसकी परिभाषा लिखिए।

यह वाक्य संयुक्त वाक्य है। परिभाषा: जिस वाक्य में दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य किसी समुच्चयबोधक अव्यय (जैसे 'और', 'पर', 'इसलिए') से जुड़े हों, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं।

(ii) “संत के सदोपदेश” – उपर्युक्त वाक्य को शुद्ध कर पुन: लिखिए।

शुद्ध वाक्य: संत के सदुपदेश। (शब्द 'सदोपदेश' अशुद्ध है; सही रूप 'सदुपदेश' है।)

9. (i) ‘अन्न’ और ‘सूत’ शब्दों का अर्थ-भेद स्पष्ट कीजिए।

अन्न – अनाज, भोजन (जैसे गेहूँ, चावल)।
सूत – धागा, तंतु (जैसे कपास का सूत)।

(ii) “वह जो व्यर्थ खर्च करता है” का अर्थद्योतक एक शब्द लिखिए।

एक शब्द: अपव्ययी (या फिजूलखर्च)।

10. (i) ‘नेकी और पूछ-पूछ’ लोकोक्ति का आशय लिखिए।

आशय: भलाई करने में बहुत सोच-विचार नहीं करना चाहिए; नेक काम बिना देर किए करने चाहिए।

(ii) “आरम्भ होना” का अर्थद्योतक मुहावरा लिखिए।

मुहावरा: श्रीगणेश करना (या आरम्भ करना)।

11. “व्यंजना शब्द शक्ति” को सोदाहरण परिभाषित कीजिए।

व्यंजना शब्द शक्ति वह शक्ति है जिसके द्वारा शब्द के अभिधा (शाब्दिक) और लक्षणा (संकेतित) अर्थ से भिन्न कोई विशेष भाव या रहस्य प्रकट होता है। उदाहरण: “सूरज डूब गया” – यहाँ अभिधा अर्थ सूर्य का अस्त होना है, लेकिन व्यंजना से किसी महान व्यक्ति के निधन या युग के अंत का भाव व्यक्त होता है।

12. “जय हे मातृभूमि” कविता का आशय लगभग 35 शब्दों में लिखिए।

इस कविता में कवि मातृभूमि की महिमा का गान करते हैं। वे भूमि को जीवनदायिनी, शक्ति और शांति का स्रोत बताते हैं। कवि देशवासियों से आह्वान करते हैं कि वे मातृभूमि की सेवा में अपना सर्वस्व अर्पित करें और उसकी रक्षा के लिए सदा तत्पर रहें।

13. “तेरे चरण शरण में आहत / जग आश्वासन श्वास लेता” – पंक्तियों का निहितार्थ स्पष्ट कीजिए।

इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि संसार में पीड़ित और आहत लोग ईश्वर या गुरु के चरणों की शरण में आकर शांति और आश्वासन प्राप्त करते हैं। यहाँ 'चरण शरण' का अर्थ है सुरक्षित स्थान, जहाँ दुखी मानव को सांत्वना मिलती है और वह राहत की साँस लेता है।

14. रामधारी सिंह दिनकर का संक्षिप्त जीवन परिचय लगभग 35 शब्दों में दीजिए।

रामधारी सिंह दिनकर (1908-1974) हिंदी के प्रसिद्ध कवि और निबंधकार थे। उनकी रचनाओं में राष्ट्रीयता, वीरता और मानवीय मूल्यों का चित्रण मिलता है। प्रमुख कृतियाँ: 'रश्मिरथी', 'परशुराम की प्रतीक्षा', 'उर्वशी'। उन्हें 'भारत कोकिल' और 'युग-चारण' की उपाधियाँ प्राप्त हैं।

15. विधाता ने मानव पुतले की मौलिक सृष्टि कर किन गुण-दोषों से विभूषित किया ?

विधाता ने मानव को गुणों से विभूषित किया: बुद्धि, विवेक, प्रेम, करुणा, और सृजनशीलता। दोषों से: अहंकार, लोभ, क्रोध, ईर्ष्या और स्वार्थ। ये गुण-दोष मानव को अन्य प्राणियों से भिन्न बनाते हैं और उसके जीवन को संघर्षपूर्ण एवं अर्थपूर्ण बनाते हैं।

20. 'अर्ध शिक्षण' कहानी में जैनेन्द्र जी ने "किशोर मनोविज्ञान का बड़ा ही स्वाभाविक चित्रण किया है"। कहानी के आधार पर इस कथन को स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा लगभग 25 शब्द)

जैनेन्द्र जी ने किशोर की जिज्ञासा, विद्रोह, और भावनात्मक उथल-पुथल को यथार्थ रूप में चित्रित किया है, जो किशोर मनोविज्ञान का स्वाभाविक चित्रण है।

2. "संसार का ऐसा कटु अनुभव मुझे अब तक नहीं हुआ" – 'प्रेरणा' कहानी में मास्टर साहब के कटु अनुभव को स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा लगभग 25 शब्द)

मास्टर साहब को अपने ही शिष्य द्वारा अपमानित होने का कटु अनुभव हुआ, जिससे उन्हें शिक्षा और सम्मान की वास्तविकता का आभास हुआ।

22. "मर्यादा' एकांकी का उद्देश्य 'पारिवारिक स्नेह और सहयोग की भावना को सतत् जागरूक रखना है'"। उक्त एकांकी के इस कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं? (उत्तर सीमा लगभग 50 शब्द)

मैं इस कथन से पूर्णतः सहमत हूँ। 'मर्यादा' एकांकी में पारिवारिक संबंधों की मर्यादा और आपसी स्नेह को महत्व दिया गया है। यह दर्शाता है कि परिवार में सहयोग और सम्मान से ही सुख-शांति संभव है। एकांकी पारिवारिक मूल्यों को जागरूक रखने का संदेश देती है।

4. "मुझे खुशी और रंज दोनों एक साथ हुए।" शिवाजी की खुशी और रंज का कारण बताइए। (उत्तर सीमा लगभग 35 शब्द)

शिवाजी को खुशी इसलिए हुई क्योंकि उनके पुत्र संभाजी उनसे मिलने आए। रंज इसलिए हुआ क्योंकि संभाजी ने उनकी आज्ञा के विरुद्ध कार्य किया था, जिससे उन्हें दुख हुआ।

5. पं० प्रताप नारायण मिश्र ने 'दाँत' नामक निबंध में किन लोगों की जिंदगी को निर्लज्ज व व्यर्थ बताया है? (उत्तर सीमा लगभग 35 शब्द)

पं० प्रताप नारायण मिश्र ने उन लोगों की जिंदगी को निर्लज्ज और व्यर्थ बताया है जो अपने सिद्धांतों और आदर्शों को छोड़कर स्वार्थ और लोभ के वशीभूत हो जाते हैं, तथा जिनमें आत्मसम्मान नहीं होता।

6. "सीता ने अपने पुत्रों को मनोवैज्ञानिक रीति से उचित अनुचित का ज्ञान कराया।" सीता की अपने पुत्रों को ज्ञान कराने की कौन-सी मनोवैज्ञानिक रीति थी? समझाइए। (उत्तर सीमा लगभग 50 शब्द)

सीता ने अपने पुत्रों को डांट-फटकार या दंड देने के बजाय प्रेम और समझाइश से उचित-अनुचित का ज्ञान कराया। उन्होंने उनकी भावनाओं को समझा और उदाहरण देकर समझाया, जिससे बच्चे स्वयं सही-गलत का निर्णय कर सकें। यह मनोवैज्ञानिक रीति बाल मनोविज्ञान पर आधारित है।

7. "देवलदे रो आत्मोत्सर्ग' काव्यांश के माध्यम से नारी विषयक आधुनिक मान्यताओं की प्रस्तुती है"। आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं? (उत्तर सीमा लगभग 50 शब्द)

मैं इस कथन से आंशिक रूप से सहमत हूँ। काव्यांश में नारी के त्याग और बलिदान को दर्शाया गया है, जो पारंपरिक मान्यता है। आधुनिक मान्यताएँ नारी को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर देखती हैं, जबकि यह काव्यांश नारी के आत्मोत्सर्ग पर केंद्रित है। अतः यह पूर्णतः आधुनिक नहीं, बल्कि पारंपरिक और आधुनिक का मिश्रण है।

23. निम्नलिखित अवतरण का संक्षेपण लगभग एक-तिहाई शब्दों में कीजिए : 3

संक्षेपण: स्वराज्य मिलने के बाद भी सुराज्य सुखद स्वप्न बना हुआ है, क्योंकि हमने देश की समृद्धि के लिए कठोर परिश्रम नहीं सीखा। श्रम के महत्व को न जानते हुए हम आरामतलब हैं और कम काम में अधिक जीविका चाहते हैं। इस दूषित मनोवृत्ति से मुक्त हुए बिना स्वराज्य सुराज्य में नहीं बदल सकता।

24. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकारों का नाम लिखते हुए उनके लक्षण लिखिए :

(क) मनो नीलमणि सैल पर आतप परयो प्रभात। (2)

अलंकार: उपमा अलंकार

लक्षण: जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी दूसरी प्रसिद्ध वस्तु या व्यक्ति से की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। यहाँ प्रभात के आतप (धूप) की तुलना नीलमणि सैल (नीलमणि पर्वत) से की गई है।

(ख) कानन कुण्डल कुंचित केशा। (2)

अलंकार: अनुप्रास अलंकार

लक्षण: जब किसी काव्य पंक्ति में एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति हो, तो वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है। यहाँ 'क' वर्ण की आवृत्ति हुई है (कानन, कुण्डल, कुंचित, केशा)।

25. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों का उत्तर दीजिए :

न्यायोचित अधिकार मांगने
से न मिले, तो लड़के,
तेजस्वी छीनते समर को
जीत या कि खुद मरके।
किसने कहा पाप है समुचित
स्वत्व-प्राप्ति हित लड़ना ?
उठा न्याय का GST समर में
अभय मारना मरना ।

(i) उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। (1)

शीर्षक: अधिकारों के लिए संघर्ष

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए। (2)

व्याख्या: रेखांकित अंश 'तेजस्वी छीनते समर को जीत या कि खुद मरके' का अर्थ है कि तेजस्वी (साहसी) व्यक्ति न्यायोचित अधिकार मांगने पर न मिलने पर युद्ध में उसे छीन लेते हैं, चाहे वे जीतें या स्वयं मर जाएँ। यह संघर्ष और बलिदान की भावना को दर्शाता है।

(iii) पाप क्या नहीं है ? (1)

उत्तर: पाप समुचित स्वत्व-प्राप्ति (अपने अधिकारों को पाने) के लिए लड़ना नहीं है।

(iv) उपर्युक्त पद्यांश का भावार्थ स्पष्ट कीजिए। (2)

भावार्थ: इस पद्यांश में कवि कहता है कि यदि न्यायोचित अधिकार मांगने पर न मिलें, तो तेजस्वी व्यक्ति उन्हें युद्ध में छीन लेते हैं, चाहे जीतें या मरें। वह प्रश्न करता है कि किसने कहा कि अपने अधिकारों के लिए लड़ना पाप है? न्याय के लिए युद्ध में निडर होकर मारना या मरना ही सही मार्ग है।

26.

आप अपने आपको राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सोमगढ़ का छात्र गणेश मानते हुए अपने प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना पत्र लिखिए जिसमें पुस्तकालय एवं वाचनालय की अव्यवस्था को व्यवस्थित करने का निवेदन हो ।

(उत्तर सीमा लगभग 100 शब्द) 4

प्रार्थना पत्र

सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य जी,
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, सोमगढ़।

विषय: पुस्तकालय एवं वाचनालय की अव्यवस्था को व्यवस्थित करने हेतु प्रार्थना।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा दसवीं का छात्र गणेश हूँ। हमारे विद्यालय का पुस्तकालय एवं वाचनालय अत्यंत अव्यवस्थित है। पुस्तकें बिखरी रहती हैं, कई पुस्तकें फटी हुई हैं और वाचनालय में बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। इससे पढ़ने में बाधा आती है। अतः आपसे निवेदन है कि पुस्तकालय एवं वाचनालय को व्यवस्थित करने की कृपा करें, जिससे छात्रों को लाभ हो सके।

आपकी अति कृपा होगी।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,
गणेश
कक्षा दसवीं

दिनांक: ..............

27.

“इस वीर प्रसूता भूमि ने ऐसे श्रेष्ठ पुरुषों को जन्म दिया है, जो शस्त्र और शास्त्र दोनों में निष्णात थे ।” “राजस्थान के” पाठ के आधार पर इस कथन के समर्थन में अपने विचार व्यक्त कीजिए ।

(उत्तर सीमा लगभग 100 शब्द) 3

प्रस्तुत कथन “राजस्थान के” पाठ के अनुसार पूर्णतः सत्य है। राजस्थान की भूमि ने अनेक ऐसे वीर पुरुषों को जन्म दिया है जो शस्त्र और शास्त्र दोनों में निपुण थे। महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान, और राणा सांगा जैसे योद्धा युद्ध कला में अद्वितीय थे, वहीं वे विद्या और ज्ञान में भी पारंगत थे। महाराणा प्रताप ने न केवल वीरता दिखाई, बल्कि अपने राज्य के लिए शास्त्र का भी उपयोग किया। पृथ्वीराज चौहान को अनेक भाषाओं का ज्ञान था। इस प्रकार, राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि ने ऐसे श्रेष्ठ पुरुषों को जन्म दिया जो शस्त्र और शास्त्र दोनों में निष्णात थे।

28.

निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 50 शब्दों में कीजिए : 5

जब बाड़ ही खेत को खाये तो खेत की रक्षा कौन करे । भारतीय इतिहास का यह भी एक पीड़ादायी पहलू है । संगठित और सुसम्बद्ध समाज ही संकटकाल में हर मोर्चे पर संकटों का सामना कर सकता है | अत्यधिक समृद्धशाली, विकट वीर, रणकुशल, हर क्षेत्र में अग्रणी होते हुए भी समाज के ही कुछ अंग सत्ता प्राप्ति, धन सम्पदा या मान सम्मान के लोभ में ऐसी कमजोरी दिखा देते हैं कि उसका परिणाम सम्पूर्ण समाज एवं राष्ट्र को भुगतना पड़ता है ।

अथवा

मैंने अनेक कुत्ते देखे पाले हैं, किन्तु कुत्ते के दैन्य से रहित और उसके लिए अलकभ्य दर्प से युक्त मैंने केवल नीलू को ही देखा है । उसके प्रिय से प्रिय खाद्य को भी यदि उसे अवज्ञा के साथ फेंककर दिया जाता हो वह उसकी ओर देखता भी नहीं, खाना दूर की बात है । यदि उसे किसी बात पर झिड़क दिया जाता तो बिना बहुत मनाये वह मेरे सामने ही नहीं आता ।

प्रथम गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या:

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश 'राजस्थान के' पाठ से लिया गया है, जिसमें भारतीय इतिहास की एक पीड़ादायी स्थिति का वर्णन है।

व्याख्या: लेखक कहता है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो रक्षा कौन करेगा। भारतीय इतिहास में ऐसे उदाहरण हैं जब समाज के कुछ अंग स्वार्थवश कमजोरी दिखाते हैं, जिसका परिणाम पूरे राष्ट्र को भुगतना पड़ता है। संगठित समाज ही संकटों का सामना कर सकता है।

द्वितीय गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या:

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश 'कुत्ते की कहानी' या संबंधित पाठ से लिया गया है, जिसमें नीलू नामक कुत्ते के स्वाभिमान का वर्णन है।

व्याख्या: लेखक कहता है कि उसने अनेक कुत्ते पाले हैं, लेकिन नीलू अद्वितीय है। वह दीनता से रहित और गर्व से युक्त है। यदि उसे अनादर से खाना दिया जाए तो वह नहीं खाता, और झिड़कने पर बिना मनाए सामने नहीं आता। यह उसके स्वाभिमान को दर्शाता है।

29. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 50 शब्दों में कीजिए :

पद्यांश :
बद्ध-दासता के बंधन में,
पड़े करोड़ों भाई बन्द,
लेने जाते हो एकाकी,
कौन मुक्ति का तुम आनन्द |
क्या उन बहिन बेटियों को तुम,
इसीलिए आये हो छोड़,
हर ले जाएँ अधर्मी उनको,
हँस हँस कर, कर करके होड़ ॥

सप्रसंग व्याख्या :

प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश कवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'भारत-भारती' से लिया गया है। इसमें कवि ने समाज में व्याप्त दासता और असमानता पर चिंता व्यक्त की है।

व्याख्या : कवि कहते हैं कि करोड़ों भाई-बहन दासता के बंधनों में जकड़े हुए हैं। ऐसे में तुम अकेले मुक्ति का आनंद लेने जा रहे हो, यह उचित नहीं है। तुमने अपनी बहनों और बेटियों को इसलिए छोड़ दिया क्या कि अधर्मी लोग उन्हें हँसते-हँसाते छीन ले जाएँ? कवि सामाजिक एकता और सबकी मुक्ति का संदेश देते हैं।


अथवा

पद्यांश :
सहे वार पर वार अन्त तक,
बढ़ी वीर बाला सी ।
आहुति-सी गिर पड़ी चिता पर,
चमक उठी ज्वाला सी ॥
बढ़ जाता है मान वीर का,
रण में बलि होने से ।
मूल्यवती होती सोने की
भस्म यथा सोने से ॥

सप्रसंग व्याख्या :

प्रसंग : प्रस्तुत पद्यांश कवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित 'भारत-भारती' से लिया गया है। इसमें वीरता और बलिदान की महिमा का वर्णन है।

व्याख्या : कवि कहते हैं कि वीर बाला ने अंत तक वार सहे और चिता पर आहुति की तरह गिरकर ज्वाला की तरह चमक उठी। वीर का मान रण में बलिदान होने से बढ़ता है, जैसे सोने की भस्म (राख) भी सोने से मूल्यवान होती है। अर्थात् बलिदान वीरता को और अधिक गौरवान्वित करता है।


30. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिए :

विषय :

  1. जल ही जीवन है ।
  2. शिक्षित नारी-देश समृद्धिकारी ।
  3. यातायात के साधनों में क्रान्ति ।
  4. पर्यावरण प्रदूषण, कारण और निवारण ।

निबन्ध (विषय : जल ही जीवन है) :

जल पृथ्वी पर जीवन का आधार है। इसके बिना मनुष्य, पशु-पक्षी, वनस्पति सभी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। जल को 'जीवनदायिनी' कहा जाता है क्योंकि यह शरीर की हर कोशिका को पोषण देता है। पृथ्वी का लगभग 71% भाग जल से ढका है, लेकिन पीने योग्य मीठा जल केवल 2.5% ही है।

जल का महत्व केवल पीने तक सीमित नहीं है। कृषि, उद्योग, ऊर्जा उत्पादन, परिवहन और स्वच्छता सभी में जल की आवश्यकता होती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में मानसून पर निर्भरता जल के महत्व को और बढ़ा देती है।

आज जल संकट एक गंभीर समस्या बन गया है। बढ़ती जनसंख्या, औद्योगीकरण, जल स्रोतों का प्रदूषण और भूजल का अत्यधिक दोहन इसके प्रमुख कारण हैं। कई क्षेत्रों में पानी की कमी से लोगों को किलोमीटर दूर जाना पड़ता है।

जल संरक्षण के लिए हमें वर्षा जल संचयन, नदियों की सफाई, जल का पुन: उपयोग और जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। हर व्यक्ति को पानी बचाने की आदत डालनी होगी। जल ही जीवन है, इसे समझना और बचाना हमारी जिम्मेदारी है।