RBSE Class 10th 2011 Science-S-07-2-2011 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2011 |
| Subject | Science-S-07-2-2011 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2011 Science-S-07-2-2011
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Rajasthan Board Class 10th Science-S-07-2-2011 2011 solved Previous Year Question Papers
माध्यमिक परीक्षा, 2012
SECONDARY EXAMINATION, 2011
विज्ञान — द्वितीय पत्र
SCIENCE - Second Paper
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 40
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
General Instructions to the Examinees:
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - प्रश्न क्रमांक 23 व 24 में आन्तरिक विकल्प हैं।
There are internal choices in Question Nos. 23 & 24. - प्रश्न क्रमांक 2 से 5 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं।
Question Nos. 2 to 5 are Very Short Answer type questions. - जिस प्रश्न के एक से अधिक भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
For questions having more than one part, the answers of those parts are to be written together in continuity.
नामांक / Roll No. : ____________________
No. of Questions — 24 S—07-2—Science II
No. of Printed Pages — 7
S—07-2—Science II | 5 — 05-IT | [ Turn over
प्रश्न संख्या 1 (Question No. 1)
प्रश्न संख्या 1 के चार भाग (i, ii, iii तथा iv) हैं। प्रत्येक भाग के चार विकल्प अ, ब, स और द दिए गए हैं। सही उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर दीजिए:
There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 1. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below:
| प्रश्न क्रमांक (Question No.) | सही उत्तर का क्रमाक्षर (Correct letter of the Answer) |
|---|---|
| 1. (i) | |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
भाग (i) / Part (i)
प्रश्न: "पारिस्थितिकी तंत्र" शब्द का सर्वप्रथम उपयोग करने का श्रेय दिया गया है:
Question: The credit of using the word 'ecosystem' for the first time goes to:
- (अ) ए. जी. टेन्सले को (A) A. G. Tensley
- (ब) ई. पी. ओडम को (B) E. P. Odum
- (स) कार्ल मोबियस को (C) Carl Mobius
- (द) सुकाचेव को (D) Sukaschev
सही उत्तर: (अ) ए. जी. टेन्सले को (A) A. G. Tensley
व्याख्या: 'पारिस्थितिकी तंत्र' (Ecosystem) शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम 1935 में ब्रिटिश वनस्पतिशास्त्री आर्थर जॉर्ज टेन्सले (A. G. Tansley) ने किया था। उन्होंने इसे जीवों और उनके भौतिक पर्यावरण के बीच अंतःक्रिया की एक इकाई के रूप में परिभाषित किया।
भाग (ii) / Part (ii)
प्रश्न: गुणसूत्रीय डी.एन.ए. में निश्चित बिन्दुओं पर चीर लगाकर अलग करने को उत्प्रेरित करने वाला एंजाइम है:
Question: An enzyme that catalyses the cleavage of chromosomal DNA at a specific site is:
- (अ) डी.एन.ए. लाइगेज (A) DNA ligase
- (ब) प्लाज्मिड (B) Plasmid
- (स) रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज (C) Restriction endonuclease
- (द) वाहक (D) Vector
सही उत्तर: (स) रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज (C) Restriction endonuclease
व्याख्या: रेस्ट्रिक्शन एण्डोन्यूक्लिएज (प्रतिबंध एंडोन्यूक्लिएज) एक ऐसा एंजाइम है जो डी.एन.ए. अणु में विशिष्ट अनुक्रमों (निश्चित बिंदुओं) पर पहचान करके उसे काटता है। इसका उपयोग जैव प्रौद्योगिकी में जीन क्लोनिंग के लिए किया जाता है। डी.एन.ए. लाइगेज डी.एन.ए. के टुकड़ों को जोड़ता है, जबकि प्लाज्मिड और वाहक डी.एन.ए. ले जाने के माध्यम हैं।
69) सागवान वृक्ष का वानस्पतिक नाम है
Botanical name of Marwar teak tree is
- प्रोसोपिस सिनेरेरिया (Prosopis Cineraria)
- टेकोमेला अन्डुलेटा (Tecomella undullata)
- डल्बर्जिया सिसू (Dalbergia sisso)
- टेक्टोना ग्रेंडिस (Tectona grandis)
व्याख्या: सागवान (Teak) का वानस्पतिक नाम Tectona grandis है। यह वृक्ष अपनी मजबूत लकड़ी के लिए प्रसिद्ध है।
70) प्रोटीन की कमी से होने वाला रोग है
Disease caused by deficiency of protein is
- क्वॉशिओरकर (Kwashiorkor)
- गलगण्ड (Goitre)
- पेलेग्रा (Pellagra)
- राइबोफ्लेविनोसिस (Riboflavinosis)
व्याख्या: क्वॉशिओरकर प्रोटीन की कमी से होने वाला रोग है, जिसमें बच्चों में सूजन, बालों का पतला होना और विकास रुक जाता है।
2. जनन द्रव्य संग्रह क्या है?
What is germplasm collection?
उत्तर: जनन द्रव्य संग्रह (Germplasm collection) पौधों या जीवों के आनुवंशिक पदार्थ (बीज, ऊतक, पराग, DNA आदि) का संग्रह है, जिसे भविष्य में प्रजनन कार्यक्रमों, संरक्षण और अनुसंधान के लिए सुरक्षित रखा जाता है। यह जैव विविधता को बनाए रखने में सहायक है।
3. दुग्ध उत्पादक पशुओं में किस बीमारी का टीका तीन वर्ष में एक बार लगाया जाता है?
Vaccination of which disease of dairy animals is done once in three years?
उत्तर: दुग्ध उत्पादक पशुओं में गलघोंटू (Black Quarter) रोग का टीका तीन वर्ष में एक बार लगाया जाता है। यह एक जीवाणुजन्य रोग है जो पशुओं की मांसपेशियों को प्रभावित करता है।
4. नाइट्रोजन स्थिरीकरण के उत्तरदायी एक सहजीवी जीवाणु का नाम लिखिए।
Write the name of a symbiotic bacterium responsible for nitrogen fixation.
उत्तर: नाइट्रोजन स्थिरीकरण के लिए उत्तरदायी एक सहजीवी जीवाणु राइजोबियम (Rhizobium) है। यह फलीदार पौधों की जड़ों में ग्रंथिकाएँ बनाकर वायुमंडलीय नाइट्रोजन को अमोनिया में बदलता है, जिसे पौधे उपयोग कर सकते हैं।
5. फसल चक्र किसे कहते हैं?
What is crop rotation?
उत्तर: फसल चक्र (Crop rotation) एक कृषि पद्धति है जिसमें एक ही भूमि पर विभिन्न फसलों को निश्चित क्रम में उगाया जाता है। इससे मृदा की उर्वरता बनी रहती है, कीटों और रोगों का प्रकोप कम होता है, और पोषक तत्वों का संतुलन बना रहता है। उदाहरण: एक वर्ष दलहन, अगले वर्ष अनाज।
6. मेण्डल द्वारा संकरण प्रयोग के लिए चयनित मटर पादप की उपयुक्तता के कोई दो कारण बताइए।
Write any two reasons of suitability for selection of pea plant for hybridization experiment performed by Mendel.
उत्तर: मेण्डल द्वारा मटर पादप के चयन के दो प्रमुख कारण:
- स्पष्ट विपरीत लक्षण: मटर के पौधे में सात जोड़ी स्पष्ट और विपरीत लक्षण (जैसे लंबा-बौना, पीला-हरा बीज) होते हैं, जिन्हें आसानी से पहचाना जा सकता है।
- स्व-परागण और सरल संकरण: मटर स्व-परागण करने वाला पौधा है, जिससे शुद्ध वंशक्रम प्राप्त होता है। साथ ही, इसमें कृत्रिम पर-परागण आसानी से किया जा सकता है।
जन्मजात व अजन्मजात विशेषक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
Give an example each of inherent and non-inherent traits.
जन्मजात विशेषक (Inherent trait): आँखों का रंग (Eye colour) – यह माता-पिता से जीन के माध्यम से प्राप्त होता है।
अजन्मजात विशेषक (Non-inherent trait): बोली जाने वाली भाषा (Language spoken) – यह सीखने और अनुभव से प्राप्त होती है, जीन से नहीं।
खेत की फसल एवं उस पर आश्रित जीवों की संख्या का पिरामिड बनाइए।
Draw the pyramid of field-crop and number of organisms dependent on it.
पिरामिड में सबसे नीचे फसल (उत्पादक) होती है, जिसकी संख्या सबसे अधिक होती है। इसके ऊपर प्राथमिक उपभोक्ता (जैसे कीट) होते हैं, फिर द्वितीयक उपभोक्ता (जैसे पक्षी), और सबसे ऊपर तृतीयक उपभोक्ता (जैसे शिकारी) होते हैं, जिनकी संख्या सबसे कम होती है। यह एक उल्टा पिरामिड होता है जहाँ आधार चौड़ा और शीर्ष संकरा होता है।
रक्त समूहन किसे कहते हैं? रक्त समूहन की क्रिया का कारण क्या है?
What is blood agglutination? What is the cause of the action of blood agglutination?
रक्त समूहन (Blood agglutination): यह वह प्रक्रिया है जिसमें रक्त में उपस्थित लाल रक्त कणिकाएँ (RBCs) आपस में चिपककर समूह बना लेती हैं।
कारण: यह तब होता है जब असंगत रक्त समूह (जैसे A, B, AB, O) का रक्त चढ़ाया जाता है। रक्त में उपस्थित प्रतिजन (antigen) और प्रतिरक्षी (antibody) के बीच प्रतिक्रिया होने से RBCs आपस में चिपक जाती हैं। उदाहरण के लिए, यदि A समूह के रक्त में B समूह का रक्त चढ़ाया जाए, तो A रक्त में उपस्थित anti-B प्रतिरक्षी B प्रतिजन से प्रतिक्रिया करके समूहन उत्पन्न करती है।
एक सामान्य पुरुष (XY) का हीमोफीलिया रोग वाहक स्त्री (XXh) के साथ विवाह होने पर संतति में हीमोफीलिया रोग की संभावित वंशागति का आरेख बनाइए।
Draw a diagram showing possible inheritance of haemophilia in offspring when a normal man (XY) is married with a haemophilia carrier woman (XXh).
आरेख (Checkerboard/Punnett Square):
| X (पिता) | Y (पिता) | |
|---|---|---|
| X (माता) | XX (सामान्य कन्या) | XY (सामान्य पुत्र) |
| Xh (माता) | XXh (वाहक कन्या) | XhY (हीमोफीलिया पुत्र) |
व्याख्या: इस विवाह से संतति में 50% पुत्र हीमोफीलिया रोगी होंगे (XhY), 50% पुत्र सामान्य होंगे (XY), 50% कन्याएँ वाहक होंगी (XXh), और 50% कन्याएँ सामान्य होंगी (XX)। हीमोफीलिया X-गुणसूत्र से जुड़ा अप्रभावी रोग है।
मेण्डल द्वारा एकल संकर संकरण प्रयोग के आधार पर प्रतिपादित नियम समझाइए। इस क्रॉस को चेकर बोर्ड द्वारा प्रदर्शित कीजिए।
Explain the rules formulated by Mendel on the basis of monohybrid cross method. Demonstrate the cross by Checker board.
मेण्डल द्वारा प्रतिपादित नियम: एकल संकर संकरण (monohybrid cross) के आधार पर मेण्डल ने पृथक्करण का नियम (Law of Segregation) प्रतिपादित किया। इस नियम के अनुसार, प्रत्येक लक्षण के लिए दो कारक (जीन) होते हैं, जो युग्मक निर्माण के समय पृथक हो जाते हैं, और प्रत्येक युग्मक में केवल एक कारक पहुँचता है।
चेकर बोर्ड द्वारा प्रदर्शन: मान लीजिए मटर के पौधे में लम्बाई का लक्षण है – लम्बा (T) प्रभावी और बौना (t) अप्रभावी। F1 पीढ़ी (Tt) के स्व-परागण से F2 पीढ़ी:
| T (युग्मक) | t (युग्मक) | |
|---|---|---|
| T (युग्मक) | TT (लम्बा) | Tt (लम्बा) |
| t (युग्मक) | Tt (लम्बा) | tt (बौना) |
F2 पीढ़ी में लम्बे : बौने का अनुपात 3:1 होता है, जो पृथक्करण नियम की पुष्टि करता है।
असुगुणिता किसे कहते हैं? असुगुणिता के कारण उत्पन्न कोई एक विकार को समझाइए।
What is aneuploidy? Explain any one syndrome caused by aneuploidy.
असुगुणिता (Aneuploidy): यह एक आनुवंशिक स्थिति है जिसमें कोशिका में गुणसूत्रों की सामान्य संख्या (डिप्लॉइड) से एक या अधिक गुणसूत्र कम या अधिक हो जाते हैं। यह अर्धसूत्री विभाजन के दौरान गुणसूत्रों के अलग न होने (non-disjunction) के कारण होता है।
उदाहरण: डाउन सिंड्रोम (Down syndrome) – यह गुणसूत्र 21 की त्रिसूत्रता (trisomy 21) के कारण होता है, अर्थात व्यक्ति में सामान्य दो के बजाय तीन गुणसूत्र 21 होते हैं। इसके लक्षणों में मानसिक मंदता, चपटा चेहरा, छोटी गर्दन, और हृदय दोष शामिल हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र के अजैव घटकों के नाम लिखिए। किसी क्षेत्र विशेष की स्थल आकृति का जैव घटकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Write the names of abiotic components of an ecosystem. How does the topography of a particular area influence the biotic components?
अजैव घटक (Abiotic components): प्रकाश, तापमान, जल, वायु, मृदा, खनिज लवण, और pH आदि।
स्थल आकृति का प्रभाव: किसी क्षेत्र की स्थल आकृति (जैसे पहाड़, मैदान, घाटी) जैव घटकों को निम्न प्रकार प्रभावित करती है:
- पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान के कारण सूर्य के प्रकाश की मात्रा और दिशा बदलती है, जिससे पौधों की वृद्धि और वितरण प्रभावित होता है।
- ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता है, जिससे वहाँ ठंडी जलवायु में पनपने वाले जीव (जैसे देवदार, भालू) पाए जाते हैं।
- घाटियों में नमी अधिक होती है, जिससे घने जंगल और विविध जीव-जंतु पाए जाते हैं।
- मैदानी क्षेत्रों में समतल भूमि कृषि और घास के मैदानों के लिए उपयुक्त होती है, जहाँ शाकाहारी और मांसाहारी जीवों की विशेष प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
20. पराजीनी पादप किसे कहते हैं? पराजीनी पादपों के कोई चार लाभ लिखिए।
What is transgenic plant? Write any four advantages of the transgenic plants.
पराजीनी पादप (Transgenic Plant): वे पादप जिनमें किसी अन्य जीव (जैसे जीवाणु, विषाणु, या पशु) से प्राप्त वांछित जीन को प्रयोगशाला में प्रविष्ट कर दिया जाता है, पराजीनी पादप कहलाते हैं। ये आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) पादप होते हैं।
पराजीनी पादपों के चार लाभ:
- फसलों में कीट प्रतिरोधक क्षमता विकसित करना (जैसे Bt कपास), जिससे कीटनाशकों का उपयोग कम होता है।
- फसलों की उत्पादकता बढ़ाना और पोषण मूल्य में सुधार करना (जैसे गोल्डन राइस में विटामिन A)।
- प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों (सूखा, लवणता, तापमान) के प्रति सहनशीलता प्रदान करना।
- औषधीय उत्पादों (जैसे इंसुलिन, वैक्सीन) के उत्पादन में उपयोग करना।
जीवाणुओं से इन्सुलिन उत्पादन किस प्रकार किया जाता है? समझाइए।
How is insulin produced from bacteria? Explain.
जीवाणुओं (Escherichia coli) से इंसुलिन उत्पादन निम्नलिखित चरणों में किया जाता है:
- मानव इंसुलिन जीन का पृथक्करण: मानव कोशिकाओं से इंसुलिन हार्मोन के लिए जिम्मेदार DNA खंड (जीन) को अलग किया जाता है।
- प्लाज्मिड में जीन का प्रवेश: इस जीन को एक जीवाणु प्लाज्मिड (वृत्ताकार DNA) में जोड़ा जाता है, जो एक वाहक (vector) का काम करता है।
- पुनः संयोजक प्लाज्मिड का निर्माण: इस प्रकार बने पुनः संयोजक प्लाज्मिड को जीवाणु कोशिका में प्रविष्ट कराया जाता है।
- जीवाणुओं का किण्वन: इन जीवाणुओं को बड़े पैमाने पर किण्वक (fermenter) में उगाया जाता है, जहाँ वे मानव इंसुलिन का उत्पादन करते हैं।
- शुद्धिकरण: उत्पादित इंसुलिन को जीवाणुओं से अलग करके शुद्ध किया जाता है, जिसका उपयोग मधुमेह के उपचार में किया जाता है।
मसाले किसे कहते हैं? ऐसे पौधे का वानस्पतिक नाम लिखिए, जिसके स्तम्भ से मसाला प्राप्त होता है। मसाले में उपस्थित रसायन का नाम लिखिए।
What do you mean by spices? Write the botanical name of a plant yielding spice from its stem. Write the name of chemical present in the spice.
मसाले (Spices): मसाले वे पादप उत्पाद हैं जिनका उपयोग भोजन को स्वादिष्ट, सुगंधित और रंगीन बनाने के लिए किया जाता है। ये पौधों के विभिन्न भागों (जड़, तना, पत्ती, फल, बीज) से प्राप्त होते हैं।
स्तम्भ से मसाला देने वाला पौधा: दालचीनी (Cinnamon) – इसका वानस्पतिक नाम Cinnamomum verum (या Cinnamomum zeylanicum) है। इसकी छाल (स्तम्भ) से मसाला प्राप्त होता है।
मसाले में उपस्थित रसायन: दालचीनी में उपस्थित प्रमुख रसायन सिनामाल्डिहाइड (Cinnamaldehyde) है, जो इसे विशिष्ट सुगंध और स्वाद प्रदान करता है।
मधुमक्खी में विभिन्न सामाजिक वर्गों के परिवर्धन को समझाइए। मधुमक्खी के छत्ते का नामांकित चित्र बनाइए।
Explain the development of different social groups in honeybees. Draw a labelled diagram of beehive.
मधुमक्खी में विभिन्न सामाजिक वर्गों का परिवर्धन: मधुमक्खी कॉलोनी में तीन प्रमुख सामाजिक वर्ग होते हैं:
- रानी मधुमक्खी (Queen): यह एकमात्र प्रजननक्षम मादा होती है। इसका विकास शाही जेली (royal jelly) के विशेष आहार से होता है। यह अंडे देने का कार्य करती है।
- नर मधुमक्खी (Drone): ये अलैंगिक नर होते हैं, जिनका विकास बिना निषेचन के अंडों से होता है। इनका मुख्य कार्य रानी से संभोग करना होता है।
- श्रमिक मधुमक्खी (Worker): ये बंध्य मादाएँ होती हैं, जो निषेचित अंडों से विकसित होती हैं। ये छत्ते की सफाई, भोजन संग्रह, लार्वा की देखभाल और रक्षा का कार्य करती हैं।
मधुमक्खी के छत्ते का नामांकित चित्र:
+-------------------+
| छत्ते का ढक्कन |
| (Hive Cover) |
+-------------------+
| मधुकोष (Honeycomb) |
| (कोषिकाओं में शहद) |
+-------------------+
| ब्रूड कोष (Brood Cells) |
| (लार्वा और प्यूपा) |
+-------------------+
| प्रवेश द्वार (Entrance) |
+-------------------+
नोट: चित्र में छत्ते के मुख्य भागों को दर्शाया गया है।
तम्बाकू के उपयोग से होने वाली तीन हानियाँ लिखिए।
Write the three harms caused by use of tobacco.
तम्बाकू के उपयोग से होने वाली तीन प्रमुख हानियाँ:
- कैंसर का खतरा: तम्बाकू में निकोटीन और अन्य कार्सिनोजन पदार्थ होते हैं, जो फेफड़ों, मुँह, गले और अन्य अंगों के कैंसर का कारण बनते हैं।
- हृदय रोग: तम्बाकू का सेवन रक्तचाप बढ़ाता है और हृदय गति को प्रभावित करता है, जिससे हृदयाघात और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है।
- श्वसन तंत्र की समस्याएँ: यह क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस, वातस्फीति (emphysema) और फेफड़ों के संक्रमण का कारण बनता है, जिससे साँस लेने में कठिनाई होती है।
फसल को नुकसान पहुँचाने वाले प्रमुख कारकों के नाम एवं किसी एक कारक के द्वारा उत्पन्न एक रोग का नाम व लक्षण लिखिए।
Write the names of factors responsible for crop damage and mention the name of one disease and its character caused by any one factor.
फसल को नुकसान पहुँचाने वाले प्रमुख कारक:
- कीट (Insects) – जैसे टिड्डी, एफिड
- कवक (Fungi) – जैसे रस्ट, स्मट
- जीवाणु (Bacteria) – जैसे ब्लाइट
- विषाणु (Viruses) – जैसे मोज़ेक वायरस
- खरपतवार (Weeds)
एक कारक द्वारा उत्पन्न रोग का उदाहरण:
कारक: कवक (Fungi)
रोग का नाम: गेहूँ का रस्ट रोग (Wheat Rust)
लक्षण: पत्तियों और तनों पर जंग के रंग के धब्बे (पस्टूल) दिखाई देते हैं, जो बाद में काले हो जाते हैं। पौधे की वृद्धि रुक जाती है और अनाज की गुणवत्ता खराब हो जाती है।
दीर्घकालीन कृषि का अर्थ समझाइए। इसमें किन विधियों का उपयोग किया जाता है?
Explain the meaning of sustainable agriculture. Which practices are used for it?
दीर्घकालीन कृषि (Sustainable Agriculture) का अर्थ: यह कृषि की वह प्रणाली है जो पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से संतुलित होती है। इसका उद्देश्य वर्तमान पीढ़ी की खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों (मिट्टी, जल, जैव विविधता) का संरक्षण करना है।
दीर्घकालीन कृषि में उपयोग की जाने वाली विधियाँ:
- फसल चक्र (Crop Rotation): एक ही भूमि पर विभिन्न फसलों को बारी-बारी से उगाना, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और कीटों का प्रकोप कम होता है।
- जैविक खाद का उपयोग (Organic Manure): रासायनिक उर्वरकों के बजाय कम्पोस्ट, गोबर की खाद और हरी खाद का उपयोग करना।
- जल संरक्षण (Water Conservation): ड्रिप सिंचाई, वर्षा जल संचयन और मल्चिंग जैसी तकनीकों से पानी का कुशल उपयोग करना।
- जैविक कीट नियंत्रण (Biological Pest Control): कीटनाशकों के बजाय प्राकृतिक शत्रुओं (जैसे लेडीबर्ड) का उपयोग करना।
- मृदा संरक्षण (Soil Conservation): समोच्च जुताई, मेड़बंदी और वृक्षारोपण द्वारा मिट्टी के कटाव को रोकना।
प्रश्न 22
गुणसूत्र किस अवस्था में स्पष्ट दिखाई देता है ? गुणसूत्र में मिलने वाली प्रमुख रचनाओं का वर्णन कीजिए । प्रारूपिक गुणसूत्र का नामांकित चित्र बनाइए ।
In which stage is chromosome distinctly visible ? Describe the main parts found in a chromosome. Draw a labelled diagram of generalised chromosome.
उत्तर:
गुणसूत्र स्पष्ट दिखाई देने की अवस्था: गुणसूत्र कोशिका विभाजन की मेटाफेज़ (Metaphase) अवस्था में सबसे स्पष्ट दिखाई देते हैं। इस अवस्था में गुणसूत्र अत्यधिक संघनित हो जाते हैं और भूमध्य रेखीय प्लेट पर संरेखित होते हैं, जिससे इन्हें सूक्ष्मदर्शी से आसानी से देखा जा सकता है।
गुणसूत्र में मिलने वाली प्रमुख रचनाएँ:
- बाहु (Arms): गुणसूत्र के दो भुजाएँ होती हैं - छोटी भुजा (p-बाहु) और लंबी भुजा (q-बाहु)।
- सेंट्रोमियर (Centromere): यह गुणसूत्र का संकुचित भाग होता है जो दोनों बाहुओं को जोड़ता है। यह कोशिका विभाजन के दौरान तंतु (स्पिंडल फाइबर) के जुड़ने का स्थान होता है।
- क्रोमैटिड (Chromatids): प्रत्येक गुणसूत्र दो समान क्रोमैटिडों से बना होता है जो सेंट्रोमियर पर जुड़े होते हैं।
- टीलोमियर (Telomere): गुणसूत्र के सिरों पर स्थित संरचना जो गुणसूत्र को क्षरण से बचाती है।
- काइनेटोकोर (Kinetochore): सेंट्रोमियर पर स्थित प्रोटीन संरचना जो स्पिंडल तंतुओं से जुड़ती है।
प्रारूपिक गुणसूत्र का नामांकित चित्र:
टीलोमियर (Telomere)
|
┌───────┴───────┐
│ │
│ p-बाहु │ (छोटी भुजा)
│ (Short Arm) │
│ │
└───────┬───────┘
│
सेंट्रोमियर (Centromere)
(काइनेटोकोर सहित)
│
┌───────┴───────┐
│ │
│ q-बाहु │ (लंबी भुजा)
│ (Long Arm) │
│ │
└───────┬───────┘
|
टीलोमियर (Telomere)
(प्रत्येक बाहु एक क्रोमैटिड का प्रतिनिधित्व करती है)
प्रश्न 23
स्तम्भ कोशिका किसे कहते हैं ? विभिन्न प्रकार की स्तम्भ कोशिकाओं को उदाहरण सहित समझाइए । स्तम्भ कोशिकाओं के विभेदन एवं शक्तता में सम्बंध का आरेखी चित्र बनाइए ।
What is stem cell ? Explain the various types of stem cells with examples. Draw a linear sketch showing relationship between differentiation and potency of stem cells.
उत्तर:
स्तम्भ कोशिका (Stem Cell): स्तम्भ कोशिकाएँ वे अविभेदित कोशिकाएँ होती हैं जिनमें स्वयं को नवीनीकृत करने (self-renewal) और विभिन्न प्रकार की विशिष्ट कोशिकाओं में विभेदित (differentiate) होने की क्षमता होती है। ये शरीर की मूल कोशिकाएँ हैं जो क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत और नई कोशिकाओं के निर्माण में सहायक होती हैं।
विभिन्न प्रकार की स्तम्भ कोशिकाएँ (उदाहरण सहित):
- कुल शक्त (Totipotent) स्तम्भ कोशिकाएँ: ये सबसे अधिक शक्तिशाली होती हैं और किसी भी प्रकार की कोशिका में बदल सकती हैं, जिसमें भ्रूणीय और अतिरिक्त भ्रूणीय ऊतक शामिल हैं। उदाहरण: निषेचित अंडाणु (युग्मनज) और प्रारंभिक भ्रूण की कोशिकाएँ।
- बहु शक्त (Pluripotent) स्तम्भ कोशिकाएँ: ये तीनों भ्रूणीय स्तरों (एक्टोडर्म, मीसोडर्म, एंडोडर्म) से उत्पन्न लगभग सभी प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं, लेकिन पूर्ण जीव नहीं बना सकतीं। उदाहरण: भ्रूणीय स्तम्भ कोशिकाएँ (Embryonic Stem Cells)।
- बहु विभेदी (Multipotent) स्तम्भ कोशिकाएँ: ये सीमित प्रकार की कोशिकाओं में विभेदित हो सकती हैं, जो आमतौर पर एक विशिष्ट ऊतक या अंग से संबंधित होती हैं। उदाहरण: अस्थि मज्जा में पाई जाने वाली हेमेटोपोएटिक स्तम्भ कोशिकाएँ (रक्त कोशिकाएँ बनाती हैं)।
- एक विभेदी (Unipotent) स्तम्भ कोशिकाएँ: ये केवल एक ही प्रकार की कोशिका में बदल सकती हैं, लेकिन स्वयं को नवीनीकृत करने की क्षमता रखती हैं। उदाहरण: त्वचा की बेसल कोशिकाएँ (केवल त्वचा कोशिकाएँ बनाती हैं)।
स्तम्भ कोशिकाओं के विभेदन एवं शक्तता में सम्बंध का आरेखी चित्र:
शक्तता (Potency) बढ़ती है ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ← ←
24. एड्स रोग का निम्नांकित बिन्दुओं के अन्तर्गत वर्णन कीजिए :
(i) रोगजनक का नाम : HIV (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस)
(ii) रोग संचरण के चार कारण :
- संक्रमित व्यक्ति के रक्त या रक्त उत्पादों के संपर्क में आना
- असुरक्षित यौन संबंध
- संक्रमित सुई या सिरिंज का साझा उपयोग
- संक्रमित माँ से गर्भावस्था, प्रसव या स्तनपान के दौरान शिशु में संचरण
(iii) परीक्षण : ELISA (एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एसे) या वेस्टर्न ब्लॉट परीक्षण
(iv) रोकथाम एवं उपचार के चार उपाय :
- सुरक्षित यौन संबंध (कंडोम का उपयोग)
- रक्तदान से पहले HIV परीक्षण अनिवार्य
- डिस्पोजेबल सुई और सिरिंज का उपयोग
- एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) से उपचार
अथवा
रेबीज रोग का निम्नांकित बिन्दुओं के अन्तर्गत वर्णन कीजिए :
(i) रोगजनक का नाम : रेबीज वायरस (लिसावायरस)
(ii) संक्रमण का कारण : संक्रमित जानवर (जैसे कुत्ता, बिल्ली, लोमड़ी) के काटने या खरोंचने से वायरस का शरीर में प्रवेश
(iii) रोग के चार लक्षण :
- बुखार और सिरदर्द
- जलन या झुनझुनी (काटने की जगह पर)
- पानी से डर (हाइड्रोफोबिया)
- मांसपेशियों में ऐंठन और लकवा
(iv) रोकथाम एवं उपचार के चार उपाय :
- संक्रमित जानवर के काटने पर तुरंत घाव को साबुन-पानी से धोना
- एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) का टीका लगवाना
- पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण
- आवारा जानवरों से दूरी बनाए रखना
Explain AIDS disease under the following points :
(i) Name of pathogen : HIV (Human Immunodeficiency Virus)
(ii) Four causes of disease communication :
- Contact with infected blood or blood products
- Unprotected sexual intercourse
- Sharing of infected needles or syringes
- Transmission from infected mother to child during pregnancy, childbirth, or breastfeeding
(iii) Test of disease : ELISA (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay) or Western Blot test
(iv) Four measures for prevention and treatment :
- Safe sexual practices (use of condoms)
- Mandatory HIV testing before blood donation
- Use of disposable needles and syringes
- Antiretroviral therapy (ART) for treatment
OR
Explain Rabies disease under the following points :
(i) Name of pathogen : Rabies virus (Lyssavirus)
(ii) Cause of infection : Entry of virus into the body through bite or scratch of an infected animal (e.g., dog, cat, fox)
(iii) Four symptoms of the disease :
- Fever and headache
- Burning or tingling sensation at the bite site
- Fear of water (hydrophobia)
- Muscle spasms and paralysis
(iv) Four measures for prevention and treatment :
- Immediately wash the wound with soap and water after an animal bite
- Get anti-rabies vaccine (ARV) shots
- Regular vaccination of pet animals
- Avoid contact with stray animals