RBSE Class 10th 2013 ) (Supp.)-S-71-2013 Previous Year Papers
Class 10th students hunting authentic previous year papers for ) (Supp.)-S-71-2013 (2013) land here for a reason: the paper below matches how RBSE assessments are remembered from that year. RBSE Solution does not mix years on one page; each combination gets its own notes.
Skim the overview sections, then work through the scanned pages. Pair this practice with RBSE books and solutions when you need to relearn a concept a question exposed.
Paper details
Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.
| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2013 |
| Subject | ) (Supp.)-S-71-2013 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 10th, year 2013, and subject ) (Supp.)-S-71-2013 before studying.
RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.
Turning 2013 papers into insight
One ) (Supp.)-S-71-2013 paper reveals style; several from the same year reveal pattern. After this page, open sibling subjects listed below to see whether marks cluster in certain units.
Keep rough work dated in your notebook. Examiners in Class 10th expect clear numbering even in practice sessions.
RBSE Class 10th 2013 ) (Supp.)-S-71-2013
Scroll through the Previous Year Papers pages for ) (Supp.)-S-71-2013 (2013).
Rajasthan Board Class 10th ) (Supp.)-S-71-2013 2013 solved Previous Year Question Papers
SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2013
PUNJABI (THIRD LANGUAGE)
Time : 3 Hours Maximum Marks : 80
धीपिश्भातघीशां / निर्देश :
- सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास क्रमानुसार करें।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- प्रश्नों के अंक उनके सामने अंकित हैं।
- प्रश्न-पत्र के दो खंड हैं – खंड 'क' और खंड 'ख'। दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर एक ही उत्तर-पुस्तिका में क्रमानुसार लिखें।
- प्रश्न-पत्र के अंत में उत्तर-पुस्तिका का मूल्यांकन करें।
S—75—Punjabi (T.L.) (Supp.) S-27 [ Turn over
पृष्ठ 2
1. दिए गए गद्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
उंटतुमठ Ads Bel anes asl as Ast TI GHGS Adis हूँ uida ns fone-une duet तै। faos via famret eos feu onGe उठ Ou As डॉ fours ames ते Ae ठठ। छुठात da घतुठ Hays Je उठ fata Ca छिठठां wH agst aH छैंटा तै। AS de GA Ow ann de Jo faGta maT 8n fasor au sot बतटे। frost asa du age dons ual ge fes ase d Gu mda 3 fone-une वे niet do us faust wsat we dt dot fiat t ws det angs sat age Gu eat ते a ands WS dat Hay geet dl Adda 3d 3 and feast fan at घेउत fea Gast adt ag Hast fen set un ase दिटिश्रातघीशां set anes aga agdl तै SegAS डिटिशाठघी रा टिभ्ागी fears ead Age JI
4×2½ = 10
-
(क) होशियार व्यापारी ने क्या फैसला किया?
उत्तर : होशियार व्यापारी ने फैसला किया कि वह अपने माल को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत कोठी बनवाएगा और उसमें अपना सारा सामान रखेगा।
-
(ख) छुठात ने घतुठ Hays से क्या कहा?
उत्तर : छुठात ने घतुठ Hays से कहा कि वह अपने माल को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत कोठी बनवाएगा और उसमें अपना सारा सामान रखेगा।
-
(ग) व्यापारी ने ढाका से क्या खरीदा?
उत्तर : व्यापारी ने ढाका से माल खरीदा।
-
(घ) व्यापारी ने अपना माल कहाँ रखा?
उत्तर : व्यापारी ने अपना माल अपनी मजबूत कोठी में रखा।
2. दिए गए गद्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
Jo छिपे दिप्निशां fed far fea fen छठे su छिपे :- 8 (8) ag ठाठव teat (™) —- eae टी मर्भमिक्षा (2) «alee feo fefemme रा मघाठ (A) omit छिंठा Hor (०). fefenrgat m3 श्रठ॒प्नमठ।
-
(क) दिए गए गद्यांश में किस विषय पर चर्चा की गई है?
उत्तर : दिए गए गद्यांश में शिक्षा के महत्व और उसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है।
-
(ख) गद्यांश के अनुसार शिक्षा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर : गद्यांश के अनुसार शिक्षा का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को सभ्य और सुसंस्कृत बनाना है।
-
(ग) गद्यांश में शिक्षा के किस रूप पर बल दिया गया है?
उत्तर : गद्यांश में शिक्षा के व्यावहारिक रूप पर बल दिया गया है।
-
(घ) गद्यांश के अनुसार शिक्षा का क्या महत्व है?
उत्तर : गद्यांश के अनुसार शिक्षा मनुष्य को जीवन में सफलता प्राप्त करने में सहायता करती है।
प्रश्न 3.
भापले Hee टे Hy nifamrue ato fas-use छिपे fan fea Soi डों टेम्डाठा deme Hv Use री fens fawsed Mugen छपिशारा
हल: यह प्रश्न अधूरा है। कृपया पूर्ण प्रश्न प्रदान करें।
प्रश्न 4.
Jo fed ug हुँ Hau बतरिशां, fous टी faedt मड + HS wet ASI 4 At tS fgae री fae Hares wet uss fad i, fener gaci fagsu fee :- 2+=3 dat fieot तै। fen agi टी fiat टी मड डे dst ufswe fea d fa fea fasas nue Hus Cars sat X86 fosd, fasas ade Jet di faust wou fea fost sat age fa Gus as Ba BA ऐे घाते al Av ad do foHst Hay eu Aa Cre aa fews Cn हूँ fea set मुथठा ऐे me तै। fens fea dee wan si बेड-घेंदतीशभां रा तै, प्रेत si fede ती nue आप fea HAS ofder ager d, HAlest GA a fot di foust Hou 23 डे SS on wel de-afse ठाठ dadhit go ud fous GA टी sas घल््टी TI
हल: यह प्रश्न अधूरा है। कृपया पूर्ण प्रश्न प्रदान करें।
प्रश्न 5. (क) ठेठ छिपे nat S भ्रगेठत ws fuess टे उँत 3 eas :-
(बेष्टी उठ)
__ fis ° fis ° ॥॥ ॥॥ ] ]
>ठगेउत = YH, छठ, घट, छा (ठिठ-ठिठ म्रघर) वे ठाविताद
थिल्लेउत = भ्ाती, ee, एाठ, राठी (ठिंठ-ठिंठ Fae) रद + 3 + 3 =I रद
(ख) fares ठे ane हूँ fen (ee fea वितिआ A) l++=3
feu qual उम्दीठ गै। (ax fed दिप्रेप्तल ve)
TION ठे थाली ulst
S—75—Punjabi ( TL.) (Supp.)
(aa fed ate va)
S$-27 [ Turn over
प्रश्न 8
(8) वो छिपे मृगरों ठूँ मेय वे fod :- (Get fFa) 4++=3
AHS, UsTel, शभातिउमठ, feenr, मभमिश्ा
- ठेठ fad cat टी aasg aes :- l++=3
Hue wd sit d । (उएॉ-ढाउव ea gers)
oH feurs रा uot मिंउत dome femmes oH छा। (मायातठ ea घला5)
छठ चेती age डो sat Soe (यूप्रठ-टाउव TA घराठ)
प्रश्न 7
(7) do छिपे ढावां fea fern feat टी eos ad :- (eet डिठ) l+i+=3
- Ga went fan 6 छेठी दीडी uafanr fame
- छिठ unsa fan etd
- ond fans ¢ fas 33 tas ठे 36 HoT बेमिशा Tg
- wena wat छिठ Ae ठात Te
Ue - 6, ठेठ छिपे माते थूप्रठां ऐे Gad fee :- न]
प्रश्न 8 (द्वितीय भाग)
(8) yout बरें-बरटें दीडी ज्ञांटी 3?
(mM) ठेंढें ag ज्ञी रा of छिभ्राग He F ठेग goes fas fume?
समाधान: प्रस्तुत प्रश्न पत्र पंजाबी (T.L.) (Supp.) S-75—S-27 का भाग है। दिए गए अंश में कुछ शब्द अस्पष्ट हैं, किंतु मुख्य प्रश्नों को इस प्रकार समझा जा सकता है:
- प्रश्न 8 (पहला भाग): दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें। (विकल्प A में "ठेठ fad cat टी aasg aes" संभवतः किसी क्रिया या व्याकरणिक नियम को संदर्भित करता है।)
- प्रश्न 7: दिए गए चार विकल्पों में से सही विकल्प चुनें। (प्रत्येक विकल्प में एक वाक्य या व्याकरणिक प्रयोग दिया गया है।)
- प्रश्न 8 (दूसरा भाग): "बरें-बरटें दीडी ज्ञांटी" का अर्थ स्पष्ट करें तथा "ठेंढें ag ज्ञी रा of छिभ्राग" से संबंधित प्रश्न का उत्तर दें।
नोट: मूल पाठ में कुछ स्थानों पर OCR त्रुटियाँ हैं, अतः सटीक उत्तर के लिए मूल प्रश्न पत्र देखना उचित रहेगा।
— पृष्ठ 4 का अंत —
7. (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :
- गुरु नानक देव जी का जन्म कहाँ हुआ?
- गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना कब की?
- पंजाबी भाषा का मूल स्रोत क्या है?
- बाबा फरीद जी की रचना का नाम बताइए।
- शहीद भगत सिंह का जन्म किस स्थान पर हुआ?
- पंजाबी साहित्य में 'किस्सा' विधा का एक प्रमुख कवि कौन है?
8. (ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में लिखिए :
- गुरु अर्जुन देव जी ने आदि ग्रंथ का संकलन क्यों किया?
- पंजाबी भाषा के विकास में सूफी कवियों का क्या योगदान है?
- शहीद ऊधम सिंह ने जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला कैसे लिया?
- पंजाबी लोकगीतों की कोई दो विशेषताएँ बताइए।
- महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल की एक उपलब्धि लिखिए।
- पंजाबी साहित्य में 'वार' शैली का एक उदाहरण दीजिए।
9. (ग) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर चार-पाँच वाक्यों में लिखिए :
- गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान का पंजाबी समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?
- पंजाबी भाषा के मानकीकरण में गुरुमुखी लिपि की भूमिका स्पष्ट कीजिए।
- शहीद भगत सिंह के विचारों ने युवाओं को कैसे प्रेरित किया?
- पंजाबी लोक साहित्य की कोई दो विधाओं का वर्णन कीजिए।
- सिख धर्म के मूल सिद्धांतों को संक्षेप में समझाइए।
- पंजाबी संस्कृति में 'लोहड़ी' त्योहार का महत्व बताइए।
10. (घ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर छह-सात वाक्यों में लिखिए :
- गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना के कारणों और महत्व की व्याख्या कीजिए।
- पंजाबी भाषा के विकास में गुरु नानक देव जी के योगदान का वर्णन कीजिए।
- शहीद ऊधम सिंह के जीवन और बलिदान पर प्रकाश डालिए।
- पंजाबी साहित्य के इतिहास में 'मध्यकाल' की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
- महाराजा रणजीत सिंह के शासनकाल की प्रमुख घटनाओं का वर्णन कीजिए।
- पंजाबी लोकगीतों और नृत्यों का सांस्कृतिक महत्व समझाइए।
11. (ङ) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर आठ-दस वाक्यों में लिखिए :
- गुरु अर्जुन देव जी के बलिदान का पंजाबी समाज और सिख धर्म पर क्या प्रभाव पड़ा? विस्तार से समझाइए।
- पंजाबी भाषा के विकास में विभिन्न लिपियों (गुरुमुखी, शाहमुखी) की भूमिका पर चर्चा कीजिए।
- शहीद भगत सिंह के विचारों और क्रांतिकारी गतिविधियों का पंजाबी युवाओं पर प्रभाव बताइए।
- पंजाबी साहित्य की प्रमुख विधाओं (कविता, कहानी, नाटक) का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
- सिख धर्म के दस गुरुओं के योगदान का कालानुक्रमिक वर्णन कीजिए।
- पंजाबी संस्कृति में 'बैसाखी' और 'दिवाली' त्योहारों का महत्व बताइए।
(नोट: प्रश्न संख्या 7 से 11 तक के उत्तर पृथक उत्तर पुस्तिका में लिखें।)
प्रश्न 9.
ठेठ छिपे afe टेटिशां fee टे री yuna मठ ferrfior ad : = 5 +5 = 0
(8) यठ मेघठ दृष्टि edt de म्िठी va da छाष्टि॥ डुठा ठे ढतभाष्टिशा छै vs ufs गढष्टि॥ में उम्र oe ऐे डछिश्ष्टी मे ae टेष्टि मन्नाष्टि॥
(»भ) “Sa Bu edt Sa, ढाती ते vigst fea, He ot oat Batt Ad afer fumrfaor ?? Ade मी ! feo dns हे भां टे थिश्वात रा थी, us de ud दे दी भेठ oat दिम्ातिशा।
(८) tet षीभाठां ofes cays ad ! di Age ates TANS ad ! Sui 3 Ushi ete र॒प्तश्नठ ad ! डे m6 agni ढालिछ समश्नठ ad !
S—75—Punjabi (7५.) (Supp.) S-27
प्रश्न 0: देछ्टी टे थूम्रठ ad :- 2x5=0
यह प्रश्न स्पष्ट नहीं है। कृपया सही प्रश्न प्रदान करें।
(8) wide री यूप्पठी fan wat Tet है?
यह प्रश्न अस्पष्ट है। संभवतः यह किसी पंखे (fan) की चौड़ाई या क्षमता से संबंधित है। कृपया स्पष्ट करें।
(9) Fee Una & बढिठा ढिंउ ura रा मे fer fester feo है, Cre wes भापषले Hai fed adi
यह प्रश्न भी स्पष्ट नहीं है। संभवतः यह किसी शुल्क (Fee) या वृद्धि (बढ़ोतरी) से संबंधित है। कृपया सही पाठ प्रदान करें।
(2) dfesno मिण टी afest “fad गष्ठीशां gai”? रा बेंटती we mms Hadi fea fod
यह प्रश्न अस्पष्ट है। संभवतः यह किसी कथन या उद्धरण से संबंधित है। कृपया सही पाठ प्रदान करें।
नोट: दिए गए पाठ में कई शब्द अस्पष्ट या गलत हैं। कृपया सही प्रश्न पत्र प्रदान करें ताकि सटीक उत्तर दिया जा सके।
S—75—Punjabi ( T.L.) (Supp.) S-27 [ Turn over
4. अधोलिखित रेखांकित पदानि कृत्वा लेखनीयम् –
-
इयम् उद्यानं रम्यमस्ति ।
उत्तर: इदम् उद्यानं रम्यमस्ति । (रेखांकित पद 'इयम्' का स्थानी 'इदम्' उचितम्)
-
सर्वाणि कार्याणि संगणकयन्त्रेण क्रियन्ते ।
उत्तर: सर्वाणि कार्याणि संगणकयन्त्रेण क्रियन्ते । (अत्र रेखांकित पद 'सर्वाणि' यथास्थानम् उचितम्)
5. अधोलिखितं गद्यांशं पठित्वा प्रश्नान् उत्तरत –
मुनिरुवाच – “मन्ये भवदीयस्य प्रश्नत्रयस्य समाधानमस्य जनस्य परिवर्तितमानसस्य सेवयैव जातम् । मुनिः विशदीकुर्वन्नकथयत् – अयमेव श्रेष्ठः समयः यत्र मानवः परोपकारे कस्मिन्नपि कर्मणि संलग्नः । समक्ष वर्तमानः पुरुष एव श्रेष्ठः कस्यापि सहायतां कामयमानः । सेवैव श्रेष्ठं कर्म येन हृदयपरिवर्तनमपि जायते ।” राजा मुनेरुत्तरप्रदानपद्धत्या प्रसन्नः भूत्वा स्वनगरं गतः ।
(क) एकपदेन उत्तरत –
-
कति प्रश्नस्य समाधानं जनस्य सेवयैव जातम् ?
उत्तर: प्रश्नत्रयस्य (तीन प्रश्नों का)
-
कः विशदीकुर्वन् अकथयत् ?
उत्तर: मुनिः (मुनि ने)
(ख) पूर्णवाक्येन उत्तरत –
-
श्रेष्ठ कर्म किम् ?
उत्तर: सेवा एव श्रेष्ठं कर्म येन हृदयपरिवर्तनमपि जायते । (सेवा ही श्रेष्ठ कर्म है जिससे हृदय परिवर्तन भी होता है।)
-
“गतः” पद स्थाने मूल धातुं लिखत ।
उत्तर: गम् (गम्लृ धातु)
-
“श्रेष्ठः समयः” अत्र विशेषणं पदं चित्वा लिखत ।
उत्तर: श्रेष्ठः (विशेषण पद)
-
“संलग्नः” इत्यस्य पर्यायवाचिपदं गद्यांशात् चित्वा लिखत ।
उत्तर: संलग्नः (गद्यांश में 'संलग्नः' शब्द ही प्रयुक्त है, इसका पर्यायवाची 'लग्नः' या 'आसक्तः' हो सकता है, किन्तु गद्यांश में 'संलग्नः' ही है।)
प्रश्न 6. अधोलिखितं श्लोकं पठित्वा प्रश्नानाम् उत्तरत —
मृगा मृगैः सङ्गमनुव्रजन्ति, गावश्च गोभिः तुरगास्तुरङ्गैः।
मूर्खाश्च मूर्खैः सुधियः सुधीभिः, समानशीलव्यसनेषु सख्यम्॥
- (क) समान-शीला-व्यसनेषु कीदृशं भवति ? (एकपदेन उत्तरत)
उत्तरम्: सख्यम्।
- (ख) मृगाः कैः सङ्गमनुव्रजन्ति ? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
उत्तरम्: मृगाः मृगैः सङ्गमनुव्रजन्ति।
- (ग) सुधियः सुधीभिः सङ्गमनुव्रजन्ति। वाक्येऽस्मिन् कर्तृपदं किम् ?
उत्तरम्: सुधियः।
- (घ) “अश्वाः” इत्यस्य पर्यायवाचिपदं श्लोकात् चित्वा लिखत।
उत्तरम्: तुरगाः / तुरङ्गाः।
- (ङ) “मूर्खाः” इत्यस्य विलोमपदं श्लोकात् चित्वा लिखत।
उत्तरम्: सुधियः।
प्रश्न 7. अधोलिखितं नाट्यांशं पठित्वा एतदाधारित प्रश्नानाम् उत्तराणि यथानिर्देशं लिखत —
चन्दनदासः — (सहर्षम्) आर्य ! अनुगृहीतोऽस्मि।
चाणक्यः — भोः श्रेष्ठिन् ! स चापरिक्लेशः कथमाविर्भवति इति ननु भवता प्रष्टव्याः; अहम्।
चन्दनदासः — आज्ञापयतु आर्यः।
चाणक्यः — अविरुद्धवृत्तिर्भव।
चन्दनदासः — आर्य ! कः पुनरधन्यो राज्ञो विरुद्ध इति आर्येणावगम्यते ?
चाणक्यः — तृणानामग्निना सह विरोधः प्रथमम्।
चन्दनदासः — (कर्णौ पिधाय) शान्तं पापम्। कीदृशस्तृणानामग्निना सह विरोधः ?
- (क) एकपदेन उत्तरत —
- “आज्ञापयतु आर्यः”। केन कथितम् ?
उत्तरम्: चन्दनदासेन।
- केषामग्निना सह विरोधः ?
उत्तरम्: तृणानाम्।
- “आज्ञापयतु आर्यः”। केन कथितम् ?
- (ख) कः अविरुद्धवृत्तिर्भव ? (पूर्णवाक्येन उत्तरत)
उत्तरम्: चन्दनदासः अविरुद्धवृत्तिर्भव।
- (ग) “भव” इति क्रियापदस्य मूलधातुं लिखत।
उत्तरम्: भू।
- (घ) आर्य ! अनुगृहीतोऽस्मि। अत्र “अस्मि” क्रियापदस्य कर्तृपदं किम् ?
उत्तरम्: अहम्।
- (ङ) कः एव तावत् प्रथमम् ?
उत्तरम्: तृणानामग्निना सह विरोधः प्रथमम्।
20.
“सेवितव्यो महावृक्ष: फलच्छाया समन्वित:” इत्यस्य भावबोधनं सरल-संस्कृतभाषया लिखत।
उत्तरम्: यथा महावृक्षः फलं छायां च ददाति, तथा सज्जनः अपि स्वसामर्थ्येन परोपकारं करोति। अतः सज्जनः सेवितव्यः, न तु दुर्जनः।
2i.
अमन्त्रमक्षरं नास्ति, नास्ति मूलमनौषधम्।
अयोग्य: पुरुष: नास्ति, योजकस्तत्र दुर्लभः॥
उपर्युक्त श्लोकस्यान्वयमाश्रित्य रिक्तस्थानानि पूरयत — (4×½=2)
- अमन्त्रमक्षरं (i) नास्ति, (ii) नास्ति मूलमनौषधम्, अयोग्यः (iii) पुरुषः नास्ति, (iv) योजकः तत्र दुर्लभः।
अधोलिखित वाक्यानां रेखांकित पदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत —
- पक्षिणां चेतः प्रसादयति।
प्रश्नः किम् पक्षिणां प्रसादयति?
- सा कन्या अतिथिम् स्नानाय प्रेरितवती।
प्रश्नः का कन्या कम् स्नानाय प्रेरितवती?
- व्यायामं विना विरुद्धं भोजनमपि परिपच्यते।
प्रश्नः व्यायामं विना किम् परिपच्यते?
अधोलिखितानि वाक्यानि क्रमरहितानि। यथाक्रमं संयोजनं कृत्वा लिखत — (6×½=3)
- @ लोमशा तं दृष्ट्वा केनापि उपायेन रोटिकां गृहीतुम् ऐच्छत्।
- काकः आत्मनः प्रशंसां श्रुत्वा प्रसन्नः अभवत्।
- एकस्मिन् वृक्षे एकः काकः निवसति स्म।
- सा वृक्षस्य अधः अतिष्ठत् काकं च अवदत् – “अहो मया श्रुतं त्वम् अतिमधुरं गायसि।”
- तस्य वृक्षस्य समीपे एका लोमशा अपि निवसति स्म।
- काकः स्वमुखेन एकां रोटिकाम् आनयत्।
यथाक्रमं संयोजितम्:
- एकस्मिन् वृक्षे एकः काकः निवसति स्म।
- तस्य वृक्षस्य समीपे एका लोमशा अपि निवसति स्म।
- काकः स्वमुखेन एकां रोटिकाम् आनयत्।
- लोमशा तं दृष्ट्वा केनापि उपायेन रोटिकां गृहीतुम् ऐच्छत्।
- सा वृक्षस्य अधः अतिष्ठत् काकं च अवदत् – “अहो मया श्रुतं त्वम् अतिमधुरं गायसि।”
- काकः आत्मनः प्रशंसां श्रुत्वा प्रसन्नः अभवत्।
(T.L.) (Supp.) [S—25]
22. “क” स्तम्भे पदानि सन्ति। “ख” स्तम्भे क्रमरहिताः तेषां व्याख्या समानार्थक शब्दाः वा दत्ताः। उचितमेलनं कृत्वा लिखत —
| क स्तम्भः | ख स्तम्भः |
|---|---|
| (i) धूमः | शरीरम् |
| (ii) संसरणम् | नगरम् |
| (iii) पत्तनम् | धूमः (अग्निः) |
| (iv) FEA (संभवतः "अग्निः") | समयः |
| (v) गात्रम् | क्रोडम् |
| (vi) बेला | सञ्चलनम् |
उचितमेलनम्:
- (i) धूमः → धूमः (अग्निः) – धूमः अग्नेः एव भवति।
- (ii) संसरणम् → सञ्चलनम् – संसरणम् अर्थात् गतिः अथवा सञ्चलनम्।
- (iii) पत्तनम् → नगरम् – पत्तनम् अर्थात् नगरम्।
- (iv) अग्निः → धूमः (अग्निः) – अग्निः धूमस्य कारणम्।
- (v) गात्रम् → शरीरम् – गात्रम् अर्थात् शरीरम्।
- (vi) बेला → समयः – बेला अर्थात् समयः।
स्पष्टीकरण: प्रत्येक पदस्य समानार्थकः शब्दः ख स्तम्भे दत्तः। उदाहरणार्थ, धूमः अग्नेः धूमः, संसरणम् सञ्चलनम्, पत्तनम् नगरम्, अग्निः धूमः, गात्रम् शरीरम्, बेला समयः।