RBSE Class 10th 2013 )-S-75-2013 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2013 |
| Subject | )-S-75-2013 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2013 )-S-75-2013
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Rajasthan Board Class 10th )-S-75-2013 2013 solved Previous Year Question Papers
SECONDARY EXAMINATION, 2013
PUNJABI
( THIRD LANGUAGE )
Time : 3½ Hours
Maximum Marks : 80
निर्देश :
- परीक्षार्थी प्रश्न-पत्र के प्रथम पृष्ठ पर अपना अनुक्रमांक अवश्य लिखें।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- प्रश्न-पत्र के हिंदी भाग का उत्तर हिंदी में तथा पंजाबी भाग का उत्तर पंजाबी में लिखें।
- प्रश्न-पत्र के दो खंड हैं— खंड 'क' और खंड 'ख'। दोनों खंडों के प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
- यथासंभव प्रश्नों के उत्तर क्रमानुसार लिखें।
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पंजाबी (अनिवार्य) – 2013 (S-75)
प्रश्न 1: निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
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-
(क) लेखक के अनुसार मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी समस्या क्या है?
उत्तर: लेखक के अनुसार मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी समस्या अज्ञानता और भ्रम है, जो उसे सही मार्ग से भटका देते हैं।
-
(ख) लेखक ने 'ठंडी बीएस' से क्या अभिप्राय दर्शाया है?
उत्तर: 'ठंडी बीएस' से लेखक का अभिप्राय उस शीतलता या शांति से है जो मनुष्य को सत्य और ज्ञान की प्राप्ति से मिलती है।
-
(ग) लेखक ने 'दात ठा बततठा मतीत' का उल्लेख किस संदर्भ में किया है?
उत्तर: लेखक ने 'दात ठा बततठा मतीत' का उल्लेख उस स्थिति के संदर्भ में किया है जब मनुष्य अपने ज्ञान और अनुभव के बावजूद भ्रमित हो जाता है।
-
(घ) लेखक के अनुसार मनुष्य को सच्चा सुख कैसे प्राप्त हो सकता है?
उत्तर: लेखक के अनुसार मनुष्य को सच्चा सुख आत्मज्ञान और सत्य के मार्ग पर चलने से प्राप्त हो सकता है, न कि भौतिक सुखों से।
प्रश्न 2: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
-
(क) 'आदे सास फ्रू' का क्या अर्थ है?
उत्तर: 'आदे सास फ्रू' का अर्थ है 'आधी सांस फिर' अर्थात जीवन की क्षणभंगुरता को दर्शाने वाला वाक्यांश।
-
(ख) 'होउ ३ फेफेमरा' शब्द का प्रयोग किस संदर्भ में हुआ है?
उत्तर: 'होउ ३ फेफेमरा' शब्द का प्रयोग उस स्थिति के संदर्भ में हुआ है जब मनुष्य अपने कर्तव्यों से विमुख हो जाता है।
-
(ग) 'ताग गधिंट फिव मी' का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: 'ताग गधिंट फिव मी' का आशय है कि व्यक्ति को अपने कर्मों के प्रति सजग रहना चाहिए और निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।
-
(घ) 'टैलीडिणठ २ रूड-ठाठीशां' से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: 'टैलीडिणठ २ रूड-ठाठीशां' से तात्पर्य उन दो मार्गों से है जो मनुष्य को जीवन में सही दिशा दिखाते हैं।
प्रश्न 3: डिटिशातघीशां फी ईए ओट ठप्निशां टी उफेक्स्ट |
उत्तर: इस प्रश्न में डिटिशातघीशां (दिशाओं) के संदर्भ में ठप्निशां (स्थानों) का उल्लेख किया गया है, जिसका अर्थ है कि विभिन्न दिशाओं में स्थित स्थानों का वर्णन करना है।
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प्रश्न 1:
दिए गए गद्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
मानव जीवन में शिक्षा का बहुत महत्व है। शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान है। शिक्षा मनुष्य को सभ्य और सुसंस्कृत बनाती है। शिक्षा से मनुष्य में ज्ञान, विवेक और चरित्र का विकास होता है। शिक्षा ही मनुष्य को सही और गलत का अंतर समझाती है। शिक्षित व्यक्ति समाज में सम्मान पाता है और देश की उन्नति में योगदान देता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए।
- शिक्षा के बिना मनुष्य किसके समान है?
- देवता
- पशु
- राक्षस
- पक्षी
गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि "शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान है।"
- शिक्षा मनुष्य में किन-किन चीजों का विकास करती है?
- ज्ञान, विवेक और चरित्र
- धन, बल और यश
- सुख, शांति और आनंद
- रूप, रंग और आकर्षण
गद्यांश के अनुसार, "शिक्षा से मनुष्य में ज्ञान, विवेक और चरित्र का विकास होता है।"
- शिक्षित व्यक्ति समाज में क्या पाता है?
- धन
- सम्मान
- शक्ति
- सुख
गद्यांश में लिखा है कि "शिक्षित व्यक्ति समाज में सम्मान पाता है।"
प्रश्न 2:
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए:
-
(क) शिक्षा का मानव जीवन में क्या महत्व है?
शिक्षा का मानव जीवन में बहुत महत्व है। शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान है। शिक्षा मनुष्य को सभ्य और सुसंस्कृत बनाती है, उसमें ज्ञान, विवेक और चरित्र का विकास करती है, तथा सही-गलत का अंतर समझाती है। शिक्षित व्यक्ति समाज में सम्मान पाता है और देश की उन्नति में योगदान देता है।
-
(ख) शिक्षा मनुष्य को क्या-क्या सिखाती है?
शिक्षा मनुष्य को सही और गलत का अंतर समझाती है। यह उसे सभ्य और सुसंस्कृत बनाती है, तथा ज्ञान, विवेक और चरित्र का विकास करती है। शिक्षा मनुष्य को समाज में सम्मान दिलाती है और देश की उन्नति में योगदान करने योग्य बनाती है।
प्रश्न 3:
निम्नलिखित शब्दों के अर्थ लिखिए:
- सभ्य - शिष्ट, सुसंस्कृत
- सुसंस्कृत - अच्छे संस्कारों वाला
- विवेक - समझ-बूझ, निर्णय क्षमता
- उन्नति - प्रगति, विकास
प्रश्न 4:
निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए:
-
अशुद्ध: शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान है।
शुद्ध: शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान होता है।
-
अशुद्ध: शिक्षा मनुष्य को सभ्य और सुसंस्कृत बनाती है।
शुद्ध: शिक्षा मनुष्य को सभ्य और सुसंस्कृत बनाती है। (यह वाक्य पहले से शुद्ध है)
प्रश्न 5:
निम्नलिखित शब्दों के विलोम शब्द लिखिए:
- सभ्य - असभ्य
- सुसंस्कृत - असंस्कृत
- उन्नति - अवनति
- ज्ञान - अज्ञान
प्रश्न 6:
निम्नलिखित शब्दों के पर्यायवाची शब्द लिखिए:
- मनुष्य - मानव, इंसान, नर
- शिक्षा - विद्या, ज्ञान, तालीम
- समाज - समुदाय, जनसमूह, लोक
- देश - राष्ट्र, वतन, स्वदेश
प्रश्न 7:
निम्नलिखित शब्दों के वचन बदलिए:
- लड़का (एकवचन) - लड़के (बहुवचन)
- किताब (एकवचन) - किताबें (बहुवचन)
- गाँव (एकवचन) - गाँव (बहुवचन)
- आदमी (एकवचन) - आदमी (बहुवचन)
प्रश्न 8:
निम्नलिखित शब्दों के लिंग बदलिए:
- लड़का (पुल्लिंग) - लड़की (स्त्रीलिंग)
- बेटा (पुल्लिंग) - बेटी (स्त्रीलिंग)
- भाई (पुल्लिंग) - बहन (स्त्रीलिंग)
- पिता (पुल्लिंग) - माता (स्त्रीलिंग)
प्रश्न 9:
निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार बदलिए:
-
वह पढ़ता है। (भविष्य काल में बदलिए)
उत्तर: वह पढ़ेगा।
-
मैं खाना खाता हूँ। (भूतकाल में बदलिए)
उत्तर: मैंने खाना खाया।
-
वे स्कूल जाते हैं। (एकवचन में बदलिए)
उत्तर: वह स्कूल जाता है।
प्रश्न 10:
निम्नलिखित शब्दों के साथ उपसर्ग जोड़कर नए शब्द बनाइए:
- गुरु अर्जुन देव जी ने आदि ग्रंथ का संकलन किया।
- श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में 1430 अंग हैं।
- गुरु तेग बहादुर जी का जन्म स्थान अमृतसर है।
- 1. गुरु नानक देव जी – (ब) सारग्रंथ
- 2. गुरु अंगद देव जी – (अ) गुरुमुखी लिपि
- 3. गुरु अमरदास जी – (द) आनंद साहिब
- गुरु ग्रंथ साहिब जी की भाषा क्या है? – संत भाषा (ब्रज, खड़ी बोली, पंजाबी का मिश्रण)
- गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी स्थान कहाँ है? – दिल्ली (चाँदनी चौक)
- गुरु गोबिंद सिंह जी ने कौन सा ग्रंथ रचा? – दशम ग्रंथ
- गुरु अर्जुन देव जी ने आदि ग्रंथ का संकलन किया। – सत्य
- गुरु ग्रंथ साहिब जी में 1430 अंग हैं। – सत्य
- गुरु तेग बहादुर जी का जन्म अमृतसर में हुआ। – सत्य
- (क) ________
- (ख) ________
- (ग) ________
- (क) ________
- (ख) ________
- (ग) ________
प्रश्न 4 (अ) – रिक्त स्थान भरिए (1+1+1=3)
प्रश्न 4 (आ) – सही जोड़ी मिलाइए (बहुविकल्पीय) (1+1+1=3)
सूची-I (गुरु) – सूची-II (कार्य/स्थान)
व्याख्या: गुरु नानक देव जी ने 'सारग्रंथ' की रचना की, गुरु अंगद देव जी ने गुरुमुखी लिपि का प्रचार किया, और गुरु अमरदास जी ने 'आनंद साहिब' की रचना की।
प्रश्न 4 (इ) – एक वाक्य में उत्तर दीजिए (1+1+1=3)
प्रश्न 4 (ई) – सत्य/असत्य बताइए (1+1+1=3)
व्याख्या: ये सभी कथन सिख इतिहास के अनुसार सत्य हैं। गुरु अर्जुन देव जी ने आदि ग्रंथ का संकलन किया, गुरु ग्रंथ साहिब में 1430 अंग हैं, और गुरु तेग बहादुर जी का जन्म अमृतसर में हुआ।
S—75—Punjabi (TL.) [S-219]
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S—75—Punjabi ( T.L.) [s-9] [ Turn over
पेज 6 का 7
प्रश्न 8. सेट उत्तर लिखिए:
प्रश्न 9. ठेठ छिपे:
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प्रश्न: अफसर ओह मिथ्या अत 3 ट्टिमउतीशां टी ई म्यातठ SAS दी-वी दीठा १ छा. ओम फानू ठे तन 3 फीन फेउ विवद्ञे-विव््धे यू नफेंट 8S औ अलिस्ट ? छुबाठरात उते-उले चिट इनी फेउ अतात मिछाडटां आगे या ? अते टेटिशां फेर गुस गढाष्टी ढिंठ पुस.
हल: फी टे टी उना अफोस फेमरफीमे अद :- 5+5 = 0
23 हस्त विएस स्फौर ठाल थलीडी ए ओहा जदेस ठा अस्त ते फा सात 7 हें ओस यात फेना री ठडी8 सेट अोआ "सू बा एडट 3ए, एडट वे निग्स्ट फी, हे उां सत सत भेते घेचिशा फुमरफनर 2" फी दा हे भां 3 थिश्रात रा छी, उस दे उद दे दी भेठ ओट दिमातिशा। डु ओड 3ह थवि श्ठटात्ि । मी फिस अस सट तामि । 3ह हस फुस्ट जी अफिया 3द । सुएत दिया उफो वे थठेते ।
S—75—Punjabi (TL.)
प्रश्न पत्र – 2013 (पंजाबी – T.L.)
प्रश्न 0. देछ्टी टे yma ad :- 2×5=0
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(…) अभिठा थीउभ्ष टी बढिठा शआ्रविटठभएं छा aedt re शआपले Hadi ढिंठ fod ।
(८) ‘Nes टी गँव-उछद़ीं' रा ढढी faost nad ass थ्ेप्नाठ T १
S—75—Punjabi ( T.L.) [s-I9]