RBSE Class 10th 2013 -S-01-2013 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2013 |
| Subject | -S-01-2013 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2013 -S-01-2013
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Rajasthan Board Class 10th -S-01-2013 2013 solved Previous Year Question Papers
माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2013
SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2013
हिन्दी
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
No. of Questions — 3 S—01—Hindi (Supp.)
No. of Printed Pages — 1
5-07 — मॉडल (Supp.) [ S—20 ] [ Turn over
1. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
प्रशंसा निश्चित रूप से सदगुण पर आश्रित रहती है, भले ही वह वास्तविक हो या कल्पित। चोर भी यह सुनना नहीं चाहता कि वह चोरों का सिरमौर है। कायर और डरपोक की प्रशंसा इसमें नहीं है कि उससे बढ़कर कोई कायर या डरपोक नहीं मिलेगा। चोर को प्रसन्नता तभी होती है जब आप उसे साधुओं में अग्रणी कहें; कायर को प्रसन्न करना हो, तो उसे वीरों का आदर्श-स्तम्भ बतायें। इसी प्रकार मूढ़ को विद्वान, निर्धन को धनी और नृशंस को दया का अवतार कहकर ही आप प्रशंसा कर सकते हैं। जिस तरह प्रशंसा सदगुण पर आश्रित रहती है, उसी प्रकार वह दुर्गुणों पर निर्भर नहीं होती। बुराई को लेकर प्रशंसा हो ही नहीं सकती। प्रशंसा के लिए प्रेम जितनी अनुकूल वृत्ति है, ईर्ष्या उतनी ही प्रतिकूल। जिससे प्रेम है उसकी प्रशंसा करते समय मनुष्य अविद्यमान दोषों की उद्भावना कर लेता है। प्रशंसा के लिए ईर्ष्या बड़ी घातक होती है। जहाँ ईर्ष्या है वहाँ प्रशंसा टिक नहीं सकती।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: प्रशंसा का आधार : सदगुण
(ख) प्रियजन की प्रशंसा करते समय प्रशंसक क्या करता है?
उत्तर: प्रियजन की प्रशंसा करते समय प्रशंसक उनमें अविद्यमान (न होने वाले) दोषों की भी उद्भावना (कल्पना) कर लेता है, अर्थात वह उनमें न होने वाले गुणों को भी बढ़ा-चढ़ाकर बताता है।
(ग) प्रशंसा करने में सहायक और विरोधी भावों का नामोल्लेख कीजिए।
उत्तर: प्रशंसा करने में सहायक भाव प्रेम है, जो अनुकूल वृत्ति है। विरोधी भाव ईर्ष्या है, जो प्रशंसा के लिए घातक और प्रतिकूल है।
(घ) “ईर्ष्या विद्यमान गुणों पर भी पर्दा डाल देती है” का भावार्थ लिखिए।
उत्तर: इस कथन का भावार्थ यह है कि ईर्ष्या के कारण व्यक्ति दूसरे के वास्तविक गुणों को भी नहीं देख पाता या स्वीकार नहीं करता। ईर्ष्या उसकी दृष्टि को इतना संकुचित कर देती है कि वह सामने वाले के सभी अच्छे गुणों को अनदेखा कर देता है, मानो उन पर पर्दा पड़ गया हो।
5-07 – य्वां (Supp.) [S-20]
2. निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
ऊँची हुई मशाल हमारी
आगे कठिन डगर है
शत्रु हट गया लेकिन उसकी
छायाओं का डर है
शोषण से मृत है समाज
कमजोर हमारा घर है
किन्तु आ रही नई जिन्दगी
यह विश्वास अमर है
जनगंगा में ज्वार,
लहर तुम प्रवहमान रहना
पहरुए सावधान रहना |
-
उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: काव्यांश का उचित शीर्षक "नई जिन्दगी का विश्वास" या "जनगंगा का ज्वार" हो सकता है।
-
"लहर तुम प्रवहमान रहना" पंक्ति का क्या आशय है?
उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि जनता (लहर) को निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। 'प्रवहमान' का अर्थ है बहता हुआ या गतिशील। कवि कहता है कि जनगंगा (समाज) में ज्वार आया है, अतः लहर (जनता) को रुकना नहीं चाहिए, बल्कि निरंतर प्रवाहित रहकर बदलाव लाना चाहिए।
-
कवि का 'हमारा घर' से क्या आशय है और उसके कमजोर होने का क्या कारण है?
उत्तर: कवि का 'हमारा घर' से आशय हमारे समाज या देश से है। इसके कमजोर होने का कारण शोषण है। कवि के अनुसार, शोषण के कारण समाज मृतप्राय हो गया है, जिससे हमारा घर (समाज/देश) कमजोर हो गया है।
-
"शोषण" में कौन-सा अलंकार है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: "शोषण" शब्द में अनुप्रास अलंकार है। स्पष्टीकरण: यहाँ 'श' वर्ण की आवृत्ति हुई है (शोषण, शोषण में 'श' ध्वनि बार-बार आ रही है), जो अनुप्रास अलंकार का लक्षण है।
5-07 --शवां (Supp.) [ S-20] | [ Turn over
प्रश्न (क)
उपर्युक्त कविता का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: उपर्युक्त कविता का उचित शीर्षक "बीज" या "सच्ची ममता के बीज" हो सकता है।
प्रश्न (ख)
कवि पैसे बोकर क्या सोच रहा था?
उत्तर: कवि पैसे बोकर यह सोच रहा था कि पैसों के पेड़ उगेंगे, रुपयों की कलदार मधुर फसलें खनकेंगी, और फूल-फलकर वह मोटा सेठ बन जाएगा।
प्रश्न (ग)
मानवता की फसल उगाने के लिए किस प्रकार के बीज बोने की आवश्यकता है?
उत्तर: मानवता की फसल उगाने के लिए सच्ची ममता के दाने, जन की क्षमता के दाने, और मानव ममता के दाने बोने की आवश्यकता है।
प्रश्न (घ)
निम्नलिखित शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए:
- मानव – मनुष्य, इंसान
- वसुधा – पृथ्वी, धरती
खण्ड - A
3. दिए गए बिन्दुओं के आधार पर निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिए :
(क) भारतीय नारी : कल और आज
- समाज और परिवार में नारी का स्थान
- पुराने समय की नारी
- आज की नारी
- भविष्य की नारी
- उपसंहार
(ख) स्वस्थ तन : सुखी जीवन
- शरीर का महत्व
- स्वस्थ शरीर की कार्यक्षमता
- स्वस्थ शरीर और सुख की अनुभूति
- अस्वस्थ शरीर और दुख की अनुभूति
- शरीर को स्वस्थ रखने के उपाय
- उपसंहार
(ग) विज्ञापनों की दुनिया
- विज्ञापन का अर्थ
- विज्ञापनों का उद्देश्य
- विज्ञापनों का वर्तमान स्वरूप
- विज्ञापनों से लाभ
- विज्ञापनों से हानियाँ
- विज्ञापनों से सावधान रहने की आवश्यकता
- उपसंहार
4. पत्र लेखन
अथवा (दो विकल्पों में से एक का चयन करें)
विकल्प 1: बहन को पत्र
परीक्षा भवन,
मेरठ
दिनांक: 15 अगस्त, 2013
प्रिय बहन सीमा,
स्नेहपूर्वक पत्र लिख रहा हूँ। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर मैं तुम्हारे पास आ रहा हूँ। कृपया मेरे आगमन की सूचना देते हुए बता रहा हूँ कि मैं 18 अगस्त को सुबह 10 बजे की ट्रेन से मेरठ से चलूँगा और शाम तक तुम्हारे पास पहुँच जाऊँगा। तुम मुझे स्टेशन पर लेने आना।
तुम्हारा भाई,
प्रकाश शर्मा
विकल्प 2: जिला कलेक्टर को पत्र (पेड़ों की कटाई रुकवाने हेतु)
सेवा में,
जिला कलेक्टर महोदय,
कानपुर
दिनांक: 15 अगस्त, 2013
विषय: क्षेत्र में हरे पेड़ों की कटाई रुकवाने हेतु निवेदन
महोदय,
मैं कमल वर्मा, निवासी कानपुर, आपके ध्यान में लाना चाहता हूँ कि हमारे क्षेत्र में कुछ अवैध तत्वों द्वारा हरे पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई की जा रही है। इससे पर्यावरण को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। कृपया इस मामले में तत्काल कार्रवाई करें और पेड़ों की कटाई रुकवाएँ।
धन्यवाद,
भवदीय,
कमल वर्मा
पता: 123, गाँधी नगर, कानपुर
5. व्याकरण प्रश्न
(क) “यह खिलौना किसने तोड़ा?” वाक्य में क्रिया पद है: तोड़ा।
परिभाषा: क्रिया वह शब्द है जो किसी कार्य के होने या करने का बोध कराता है। यह वाक्य में मुख्य क्रिया होती है और इसके रूप से काल, वचन, लिंग आदि का पता चलता है।
(ख) “मोहन छत पर पतंग उड़ा रहा है” वाक्य के रेखांकित पदों के पद-परिचय के दो-दो बिंदु:
- मोहन: (i) संज्ञा पद, (ii) व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- पतंग: (i) संज्ञा पद, (ii) जातिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्म कारक।
(ग) मिश्र वाक्य और संयुक्त वाक्य का अंतर:
- मिश्र वाक्य: इसमें एक मुख्य उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं। आश्रित उपवाक्य मुख्य उपवाक्य पर निर्भर होता है। जैसे: "जो लड़का कल आया था, वह मेरा मित्र है।"
- संयुक्त वाक्य: इसमें दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य समुच्चयबोधक अव्ययों (और, या, लेकिन आदि) से जुड़े होते हैं। जैसे: "राम ने खाना खाया और सो गया।"
(घ) (i) “तुक्का लगना” मुहावरे का अर्थ और प्रयोग:
अर्थ: बिना सोचे-समझे या संयोग से काम बन जाना।
वाक्य प्रयोग: परीक्षा में उसने बिना पढ़े ही तुक्का लगा दिया और उत्तर सही निकल आया।
(घ) (ii) “रामजी की चिरई रामजी का गाँव” लोकोक्ति का अर्थ:
अर्थ: जिस वस्तु या व्यक्ति का स्वामी एक ही हो, उसकी देखभाल भी वही करता है। अर्थात् हर चीज़ अपने मालिक के पास ही सुरक्षित रहती है।
(ड) “लखन उतर आहुति सदिस मृगबर कोप कृसानु” पंक्ति में अलंकार:
अलंकार का नाम: उपमा अलंकार
परिभाषा: जहाँ किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी दूसरी वस्तु या व्यक्ति से की जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। यहाँ लक्ष्मण की तुलना आहुति (हवन में डाली गई वस्तु) से की गई है।
खण्ड-ग
6. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
कभी-कभी वह यों ही दे देता है उसका साथ
यह बताने के लिए कि वह अकेला नहीं है
और यह कि फिर से गाया जा सकता है
गाया जा चुका राग
और उसकी आवाज में जो हिचक साफ सुनाई देती है
या अपने स्वर को ऊँचा न उठाने की जो कोशिश है
उसे विफलता नहीं
उसकी मनुष्यता समझा जाना चाहिए।
(क) संगतकार क्या करने में हिचकता है? (2 अंक)
संगतकार अपने स्वर को ऊँचा उठाने या मुख्य गायक के सामने अपनी आवाज को पूरी तरह से प्रकट करने में हिचकता है। वह अपनी आवाज में हिचक महसूस करता है और ऊँचा स्वर न उठाने की कोशिश करता है।
(ख) कवि ने संगतकार की किस भावना को मनुष्यता कहा है? (2 अंक)
कवि ने संगतकार की विनम्रता, सहयोग और मुख्य गायक को महत्व देने की भावना को मनुष्यता कहा है। संगतकार जानबूझकर अपनी आवाज को ऊँचा नहीं उठाता ताकि मुख्य गायक की कला में कोई बाधा न आए। यह त्याग और सहयोग की भावना ही मनुष्यता है।
अथवा
फसल क्या है?
और तो कुछ नहीं है वह
नदियों के पानी का जादू है वह
हाथों के स्पर्श की महिमा है
भूरी-काली-संदली मिट्टी का गुण धर्म है
रूपांतर है सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!
(क) कवि ने फसल को, हाथों के स्पर्श की महिमा क्यों बताया है? (2 अंक)
कवि ने फसल को हाथों के स्पर्श की महिमा इसलिए बताया है क्योंकि फसल उगाने में किसान के हाथों का महत्वपूर्ण योगदान होता है। किसान अपने हाथों से बीज बोता है, पौधों की देखभाल करता है और फसल काटता है। इस प्रकार फसल किसान के परिश्रम और स्पर्श का परिणाम है।
(ख) हवा के संकोच त्याग कर जोर-जोर से चलने का फसल पर क्या प्रभाव पड़ेगा? (2 अंक)
यदि हवा संकोच त्याग कर जोर-जोर से चलेगी तो वह तूफान का रूप ले लेगी। इससे फसल को नुकसान पहुँचेगा, फसलें गिर जाएँगी या उखड़ जाएँगी। इसलिए फसल के लिए हवा का संकोच (हल्की गति) आवश्यक है, जो परागण में मदद करती है और फसल को सुरक्षित रखती है।
7. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा 40 शब्द)
-
(क) “एक दास तिनहि लै सौंपा, जिनके मन चकरी” कहकर गोपियाँ उद्धव की योग शिक्षा को अपने लिए अनुपयोगी क्यों बताती हैं? [2]
गोपियाँ कहती हैं कि उनका मन तो कृष्ण के प्रति प्रेम में ऐसा लीन है जैसे चकरी (भँवर) घूमती रहती है। ऐसे चंचल मन को योग की शिक्षा देकर वे उसे कृष्ण-प्रेम से हटाना चाहते हैं, जो असंभव है। इसलिए वे योग को अपने लिए अनुपयोगी बताती हैं। -
(ख) “आप सो जो करै सेवकाई | अरिकरनी करिअ लराई ||” परशुरामजी ने यहाँ 'अरिकरनी' किस कार्य को बताया है और उसे क्या आदेश दिया है? [2]
परशुरामजी ने 'अरिकरनी' शत्रु के साथ युद्ध करने के कार्य को बताया है। वे कहते हैं कि जो व्यक्ति सेवकाई (दासता) करता है, उससे युद्ध करना उचित नहीं है, बल्कि शत्रुता करने वाले से ही लड़ाई करनी चाहिए। इस प्रकार वे शत्रु से युद्ध करने का आदेश देते हैं। -
(ग) 'वसन्त' के माध्यम से ऋतुराज ने लड़कियों को क्या सन्देश दिया है? [2]
ऋतुराज (वसन्त ऋतु) ने लड़कियों को सन्देश दिया है कि वे अपने जीवन में नवीनता और उल्लास लाएँ। वसन्त ऋतु की तरह उनका जीवन भी खिलखिलाहट और सौन्दर्य से भरा होना चाहिए, और वे प्रकृति के समान मुक्त भाव से जीवन का आनन्द लें। -
(घ) देव कवि ने 'व्रजलीला' में भगवान कृष्ण का 'श्री ब्रजदूलह' कहकर जो सौन्दर्य चित्रण किया है उसे लिखिए। [2]
देव कवि ने कृष्ण को 'श्री ब्रजदूलह' (ब्रज के दूल्हे) कहकर उनका मनोहर सौन्दर्य चित्रित किया है। उनके मुख पर मुस्कान, नेत्रों में प्रेम, और वस्त्रों में ब्रज की संस्कृति झलकती है। वे ऐसे सुन्दर हैं मानो ब्रज की शोभा ही उनमें समा गई हो।
8. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
छोटे से जीवन की कैसे बड़ी कथाएँ आज कहूँ ?
क्या यह अच्छा नहीं कि औरों की सुनता मैं मौन रहूँ ?
सुनकर क्या तुम भला करोगे मेरी भोली आत्म कथा ?
अभी समय भी नहीं, थकी सोई है मेरी मौन व्यथा ।
- (क) प्रस्तुत पद्यांश की भाषा कौन-सी है? [1]
उत्तर : खड़ी बोली हिंदी। - (ख) कवि ने इस अंश में कौन-सी कथन शैली को अपनाया है? [1]
उत्तर : आत्मकथात्मक शैली (स्वयं से संवाद या पाठक से प्रश्नोत्तर शैली)। - (ग) “थकी सोई है मेरी मौन व्यथा” में निहित अलंकार लिखिए। [1]
उत्तर : मानवीकरण अलंकार (व्यथा को थककर सोने वाली मानवीय अवस्था दी गई है)। - (घ) इस अंश में कवि की कौन-सी मनोभावनाएँ व्यक्त हुई हैं? [1]
उत्तर : कवि की मनोभावनाएँ हैं – अपनी पीड़ा को व्यक्त करने में संकोच, दूसरों की सुनने की इच्छा, और अपनी व्यथा को समय से पहले न कहने का भाव। - (ङ) तीसरी पंक्ति में प्रयुक्त कौन-से दो शब्दों ने रोचकता पैदा कर दी है? [1]
उत्तर : 'भोली आत्म कथा' – इन शब्दों ने रोचकता पैदा की है, क्योंकि 'भोली' शब्द सरलता और मासूमियत को दर्शाता है, जबकि 'आत्म कथा' गंभीरता को।
अथवा
विकल, विकल, 334 थे सब
विश्व के निदाघ के सकल जन
आये अज्ञात दिशा से अनंत के घन !
तप्त धरा, जल से फिर
शीतल कर दो -- बादल ! गरजो !
- (क) प्रस्तुत पंक्तियों में किसको सम्बोधित किया गया है? [1]
उत्तर : बादलों को सम्बोधित किया गया है। - (ख) यह किस प्रकार का गीत है? [1]
उत्तर : यह मेघगीत (बादलों को संबोधित गीत) है। - (ग) उक्त पंक्तियों में आये ध्वनिवाचक शब्दों को लिखिए। [1]
उत्तर : 'गरजो' (गर्जना की ध्वनि)। - (घ) पद्यांश में प्रयुक्त भाषा कौन सी है? [1]
उत्तर : खड़ी बोली हिंदी (संस्कृतनिष्ठ शब्दों के साथ)। - (ङ) काव्य में गेयता किस कारण से आ गयी है? [1]
उत्तर : लयात्मकता, अनुप्रास (जैसे 'विकल, विकल'), और आवाहनात्मक शैली ('बादल ! गरजो !') के कारण गेयता आ गई है।
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
सचमुच हैरान करती है काशी -- पक्का महाल से जैसे मलाई बरफ गया, संगीत, साहित्य और अदब की बहुत सारी परम्पराएँ लुप्त हो गईं । एक सच्चे सुर साधक और सामाजिक की भाँति बिस्मिलला खाँ साहब को इन सब की कमी खलती है । काशी में जिस तरह बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ एक दूसरे के पूरक रहे हैं उसी तरह मुहर्रम-ताजिया और होली-अबीर, गुलाल की गंगा-जमुनी संस्कृति भी एक दूसरे के पूरक रहे हैं । अभी जल्दी ही बहुत कुछ इतिहास बन चुका है, अभी आगे बहुत कुछ इतिहास बन जायेगा । फिर भी कुछ बचा है जो सिर्फ काशी में है, काशी आज भी संगीत के स्वर पर जगती है और उसी की थापों पर सोती है ।
(क) काशी से क्या-क्या लुप्त हो गया है ?
काशी से संगीत, साहित्य और अदब (सभ्यता/संस्कृति) की बहुत सारी परम्पराएँ लुप्त हो गई हैं।
(ख) काशी में क्या-क्या एक दूसरे के पूरक हैं ?
काशी में बाबा विश्वनाथ और बिस्मिल्ला खाँ एक दूसरे के पूरक हैं, तथा मुहर्रम-ताजिया और होली-अबीर, गुलाल की गंगा-जमुनी संस्कृति भी एक दूसरे के पूरक हैं।
अथवा
वह संकल्प से गए थे | कभी-कभी लगता है वह मन से गए नहीं थे । रिश्ता बनाते थे तो तोड़ते नहीं थे । दसियों साल बाद मिलने के बाद भी उसकी गंध महसूस होती थी । वह जब भी दिल्ली आते ज़रूर मिलते -- खोजकर, समय निकालकर, गर्मी, सर्दी, बरसात झेलकर मिलते, चाहे दो मिनट के लिए ही सही । यह कौन करता है ? उनकी चिंता हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में देखने की थी । हर मंच से इसकी तकलीफ बयान करते, इसके लिए तर्क देते । बस इसी एक सवाल पर उन्हें झुंझलाते देखा है और हिन्दी वालों द्वारा ही हिन्दी की उपेक्षा पर दुख करते उन्हें पाया है ।
(क) वह संकल्प से गए थे, मन से नहीं । क्यों ?
वह संकल्प से गए थे, मन से नहीं, क्योंकि वे रिश्ता बनाते थे तो तोड़ते नहीं थे और दसियों साल बाद मिलने पर भी उसकी गंध महसूस होती थी। वे दिल्ली आने पर हर बार खोजकर, समय निकालकर, मौसम की परवाह किए बिना मिलते थे, जो दर्शाता है कि उनका मन वहाँ नहीं था, बल्कि वे केवल संकल्पवश गए थे।
(ख) हिन्दी के लिए फादर के मन में क्या भाव थे ?
फादर के मन में हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में देखने की चिंता थी। वे हर मंच से इसकी तकलीफ बयान करते और इसके लिए तर्क देते थे। वे हिन्दी वालों द्वारा ही हिन्दी की उपेक्षा पर दुखी होते थे और इसी सवाल पर उन्हें झुंझलाते देखा गया।
खण्ड-ग
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा 40 शब्द)
-
(क) “लखनवी अंदाज़” पाठ के लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों खरीदा?
लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट इसलिए खरीदा क्योंकि वह एक साधारण यात्री था और उसके पास फर्स्ट क्लास के टिकट का खर्च वहन करने के लिए पर्याप्त धन नहीं था। वह सामान्य यात्रियों की तरह यात्रा करना चाहता था।
-
(ख) मन्नू भंडारी के पिता को इंदौर क्यों छोड़ना पड़ा?
मन्नू भंडारी के पिता को इंदौर इसलिए छोड़ना पड़ा क्योंकि वहाँ उनका व्यवसाय ठीक से नहीं चल पाया और आर्थिक तंगी के कारण उन्हें दूसरे स्थान पर जाकर रोजगार की तलाश करनी पड़ी।
-
(ग) “प्राचीन समय में स्त्रियों को शिक्षा देने का चलन नहीं था” के पक्ष में स्त्री शिक्षा के विरोधियों ने क्या तर्क दिए हैं?
स्त्री शिक्षा के विरोधियों ने तर्क दिया कि प्राचीन काल में स्त्रियों को शिक्षा देने की परंपरा नहीं थी, इसलिए अब भी उन्हें शिक्षित करने की आवश्यकता नहीं है। उनका मानना था कि स्त्रियों का मुख्य कार्य घर-गृहस्थी संभालना है।
-
(A) भदंत आनंद कौसल्यायन ने कूड़े-करकट का ढेर किसे बताया है?
भदंत आनंद कौसल्यायन ने कूड़े-करकट का ढेर उन पुरानी और बेकार मान्यताओं तथा रीति-रिवाजों को बताया है जो समाज में व्याप्त हैं और जिनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
खण्ड-घ
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
-
(क) देश प्रेम के अनेक रूप हो सकते हैं, 'नेताजी का चश्मा' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 40 शब्द)
'नेताजी का चश्मा' पाठ में देश प्रेम के अनेक रूप दिखाए गए हैं। एक रूप है नेताजी की मूर्ति पर चश्मा लगाने वाले व्यक्ति का, जो अपने तरीके से देशभक्ति व्यक्त करता है। दूसरा रूप है हालदार साहब का, जो इस कार्य की सराहना करते हैं। इस प्रकार देश प्रेम विभिन्न कार्यों और भावनाओं में प्रकट हो सकता है।
-
(ख) “पुत्र-मृत्यु की घटना ने सिद्ध कर दिया कि बालगोबिन भगत सच्चे ज्ञानी थे।” स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 60 शब्द)
बालगोबिन भगत के पुत्र की मृत्यु के बाद उन्होंने शोक नहीं मनाया, बल्कि उसे ईश्वर की इच्छा मानकर शांतिपूर्वक स्वीकार किया। उन्होंने अपने पुत्र के शव को खुले मैदान में रख दिया और कहा कि जो लेने आया है वह ले जाएगा। इस घटना ने सिद्ध कर दिया कि वे सांसारिक मोह-माया से परे थे और सच्चे ज्ञानी थे।
खण्ड-ङ
12. “सूरदास पंचम की नाक” पाठ सरकारी दफ्तरों की कार्य प्रणाली पर व्यंग्य है।” समझाइए। (उत्तर सीमा 80 शब्द)
“सूरदास पंचम की नाक” पाठ में सरकारी दफ्तरों की कार्य प्रणाली पर तीखा व्यंग्य किया गया है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक छोटी सी समस्या को सुलझाने के लिए अधिकारियों को कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल पर जाती हैं, लेकिन कोई निर्णय नहीं होता। यह व्यंग्य सरकारी कार्यालयों की लालफीताशाही, भ्रष्टाचार और अक्षमता पर किया गया है, जहाँ काम करने की बजाय बहानेबाजी और टालमटोल की जाती है।
अथवा
“मेरे लिए यह यात्रा सचमुच ही एक खोज-यात्रा थी।” मधु कांकरिया ने ऐसा क्यों माना है? (उत्तर सीमा 80 शब्द)
मधु कांकरिया ने अपनी यात्रा को खोज-यात्रा इसलिए माना क्योंकि इस यात्रा में उन्होंने न केवल नए स्थानों को देखा, बल्कि वहाँ के लोगों, संस्कृति और इतिहास के बारे में भी गहराई से जाना। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से अपने अतीत और वर्तमान को समझने का प्रयास किया। यह यात्रा उनके लिए आत्म-खोज और ज्ञान प्राप्ति का माध्यम बनी, जिसने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया।
निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) भोलानाथ और उसके पिता किस प्रकार खेला करते थे?
भोलानाथ और उसके पिता मिट्टी के खिलौने बनाकर खेला करते थे। पिता भोलानाथ को गोद में बिठाकर उसे तरह-तरह की कहानियाँ सुनाते और साथ में खिलौने बनाने का काम करते थे।
(ख) रात की रोशनी में गंतोक की मोहकता के दृश्य के बारे में लिखिए।
रात की रोशनी में गंतोक बहुत सुंदर दिखता है। पहाड़ियों पर बिखरी रोशनियाँ तारों जैसी चमकती हैं, जिससे पूरा शहर एक जादुई नगरी का आभास देता है। यह दृश्य अत्यंत मोहक और मनमोहक होता है।
(ग) 'झुलनी हेरानी हो रामा' पाठ में दुलारी का क्या पेशा बताया गया है?
दुलारी का पेशा मछली बेचने का बताया गया है। वह प्रतिदिन मछलियाँ लेकर बाजार जाती है और उन्हें बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती है।
(घ) प्रत्यक्ष अनुभव से अनुभूति को अज्ञेय ने कैसे भिन्न बताया है?
अज्ञेय के अनुसार, प्रत्यक्ष अनुभव बाहरी इंद्रियों से होता है जबकि अनुभूति आंतरिक भावनाओं और मन की गहराई से जुड़ी होती है। अनुभव तात्कालिक होता है, जबकि अनुभूति स्थायी और गहरी होती है।