RBSE Class 10th 2014 Hindi-S-01-2014 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2014 |
| Subject | Hindi-S-01-2014 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2014 Hindi-S-01-2014
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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2014 2014 solved Previous Year Question Papers
माध्यमिक परीक्षा, 2014
SECONDARY EXAMINATION, 2014
हिन्दी
समय : 3 घण्टे 15 मिनट पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
5-07-मावां [ 5 - 116 ] | Turn over
खण्ड-क
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
जीना भी एक कला है । लेकिन कला ही नहीं, तपस्या है । जियो तो प्राण ढाल दो जिंदगी में, ढाल दो जीवन-रस के उपकरणों में । ठीक है ! लेकिन क्यों ? क्या जीने के लिए जीना ही बड़ी बात है ? सारा संसार अपने मतलब के लिए ही तो जी रहा है | याज्ञवल्क्य बहुत बड़े ब्रह्मवादी ऋषि थे । उन्होंने अपनी पत्नी को विचित्र भाव से समझाने की कोशिश की कि सब कुछ स्वार्थ के लिए है । पुत्र के लिए पुत्र प्रिय नहीं होता, पत्नी के लिए पत्नी प्रिया नहीं होती -- सब अपने मतलब के लिए प्रिय होते हैं -- आत्मनस्तु कामाय सर्वप्रिय भवति | विचित्र नहीं है यह तर्क ? संसार में जहाँ कहीं प्रेम है सब मतलब के लिए । सुना है, पश्चिम के हॉब्स और हेल्वेशियस जैसे विचारकों ने भी ऐसी ही बात कही है । सुन के हैरानी होती है । दुनिया में त्याग नहीं है, प्रेम नहीं है, परार्थ नहीं है, परमार्थ नहीं है -- केवल प्रचण्ड स्वार्थ । भीतर की जिजीविषा - जीते रहने की प्रचण्ड इच्छा ही अगर बड़ी बात हो, तो फिर यह सारी बड़ी-बड़ी बोलियाँ, जिनके बल पर दल बनाये जाते हैं, शत्रु-मर्दन का अभिनय किया जाता है, देशोद्धार का नारा लगाया जाता है, साहित्य और कला की महिमा गाई जाती है, झूठ है । इसके द्वारा कोई न कोई अपना बड़ा स्वार्थ सिद्ध करता है । लेकिन किन सरल से कोई कह रहा है, ऐसा सोचना गलत ढंग से सोचना है । स्वार्थ से भी बड़ी कोई-न-कोई बात अवश्य है, जिजीविषा से भी बड़ी कोई-न-कोई शक्ति अवश्य है । क्या है ?
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए ।
उत्तर : जीवन : एक कला और तपस्या
(या) जीवन और स्वार्थ का द्वंद्व
प्रश्न 1 (गद्यांश पर आधारित)
(ख) याज्ञवल्क्य ने अपनी पत्नी को क्या समझाने की कोशिश की ?
याज्ञवल्क्य ने अपनी पत्नी मैत्रेयी को यह समझाने की कोशिश की कि आत्मा अमर है और उसे पति, धन या संसारिक वस्तुओं से नहीं, बल्कि आत्मज्ञान से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पति के प्रति प्रेम आत्मा के कारण है, न कि पति के शरीर के कारण।
(ग) लेखक को किस बात पर हैरानी होती है ?
लेखक को इस बात पर हैरानी होती है कि मनुष्य अपने जीवन में सुख-सुविधाओं और भौतिक वस्तुओं के पीछे इतना भागता है, जबकि वास्तविक सुख और शांति तो आत्मज्ञान और संतोष में निहित है।
(घ) उपर्युक्त गद्यांश में किस तरह से जीने की बात कही गई है ?
गद्यांश में सादगी, संतोष और आत्मज्ञान के साथ जीने की बात कही गई है। इसमें बताया गया है कि मनुष्य को भौतिक सुखों के मोह में नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि आत्मा की शाश्वतता को समझकर जीवन जीना चाहिए।
प्रश्न 2 (काव्यांश पर आधारित)
(क) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उचित शीर्षक: "कैकेयी का पश्चाताप" या "रानी कैकेयी की विनती"
(ख) सभा में सभी किसका स्वर सुनकर चौंक गए ?
सभा में सभी लोग कैकेयी के स्वर को सुनकर चौंक गए। कैकेयी ने अटल स्वर में राम से घर लौटने का आग्रह किया।
(ग) सभा में रानी कैसी दिखाई दे रही थी ?
सभा में रानी कैकेयी वैधव्य-तुषारावृता यथा विधु-लेखा अर्थात विधवा होने के दुःख से ढकी हुई चंद्रमा की कला के समान दिखाई दे रही थी। वह अचल बैठी थी, लेकिन उसके मन में असंख्य भावनाओं की तरंगें उठ रही थीं।
(घ) रानी ने राम से क्या कहा ?
रानी कैकेयी ने राम से कहा कि यदि यह सच है कि भरत ने राज्य स्वीकार नहीं किया, तो वे (राम) वापस घर लौट आएं। उन्होंने स्वयं को अपराधिन बताया और कहा कि वे दुर्बलता के कारण शपथ लेने को मजबूर हुईं, लेकिन अबला (स्त्री) के लिए कोई दूसरा मार्ग नहीं है।
काव्यांश
विषम
षम श्रृंखलाएँ टूटी हैं
खुली समस्त दिशाएँ
आज प्रभंजन बनकर चलती
युग-बंदिनी हवाएँ
प्रश्न-चिह्न बन खड़ी हो गईं
यह सिमटी सीमाएँ
आज पुराने सिंहासन की
टूट रही प्रतिमाएँ
उठता है तूफान, इंदु तुम
दीप्तिमान रहना
पहरुए, सावधान रहना
ऊँची हुई मशाल हमारी
आगे कठिन डगर है
शत्रु हट गया, लेकिन उसकी
छायाओं का डर है
शोषण से मृत है समाज
कमजोर हमारा घर है
किन्तु आ रही नई जिन्दगी
यह विश्वास अमर है
जनगंगा में ज्वार
लहर तुम ब्रवहमान रहना
पहरुए, सावधान रहना
प्रश्न
-
उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: इस काव्यांश का उचित शीर्षक "पहरुए, सावधान रहना" या "जनगंगा में ज्वार" हो सकता है। यह कविता स्वतंत्रता के बाद भी सतर्क रहने और नए समाज के निर्माण की प्रेरणा देती है।
-
कवि 'पहरुए' से क्या कह रहा है?
उत्तर: कवि 'पहरुए' (प्रहरी/रक्षक) से कह रहा है कि वह सावधान रहे। यद्यपि शत्रु हट गया है, लेकिन उसकी छायाओं (बुराइयों) का डर अभी भी है। समाज शोषण से मृत है और घर कमजोर है, इसलिए पहरुए को जागरूक रहना चाहिए ताकि नई जिंदगी आ सके।
-
कवि ने समाज को कैसा बताया है?
उत्तर: कवि ने समाज को "शोषण से मृत" और "कमजोर" बताया है। उनके अनुसार, समाज शोषण के कारण मृतप्राय हो गया है और हमारा घर (देश/समाज) कमजोर है।
-
कविता के अन्त में क्या विश्वास व्यक्त हुआ है?
उत्तर: कविता के अन्त में कवि ने विश्वास व्यक्त किया है कि "नई जिन्दगी आ रही है" और यह विश्वास "अमर" है। अर्थात्, शोषण और कमजोरी के बावजूद एक नए युग का आगमन निश्चित है, और यह आशा कभी समाप्त नहीं होगी।
3. दिए गए बिन्दुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिए :
(क) चुनाव का एक दृश्य
- आशय – लोकतंत्र में चुनाव का महत्व
- चुनाव के दिनों में दिखाई देने वाले दृश्य
- राजनीतिक दल एवं मतदान दिवस
- उपसंहार
(ख) नारी सशक्तिकरण
- नारी सशक्तिकरण से आशय
- वर्तमान समाज में नारी की स्थिति
- नारी सशक्तिकरण हेतु किये जा रहे प्रयास
- देश की प्रमुख सशक्त नारियों का परिचय
- उपसंहार
(ग) भ्रष्टाचार की समस्या
- भ्रष्टाचार से आशय
- विभिन्न क्षेत्रों में भ्रष्टाचार की स्थिति
- भ्रष्टाचार का समाज पर प्रभाव
- भ्रष्टाचार उन्मूलन के लिए सुझाव
- उपसंहार
4. पत्र लेखन
निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर पत्र लिखिए:
विकल्प (क): मित्र को क्रिकेट प्रतियोगिता में ट्रॉफी जीतने की सूचना
पत्र:
अलसीगढ़
दिनांक: 15 फरवरी 2014
प्रिय मित्र मनन,
सप्रेम नमस्ते।
आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। मैं यहाँ अलसीगढ़ में अच्छा हूँ। आज मैं तुम्हें एक बहुत ही खुशखबरी सुनाने के लिए पत्र लिख रहा हूँ।
हाल ही में हमारे विद्यालय में आयोजित अंतर-विद्यालयी क्रिकेट प्रतियोगिता में हमारी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ट्रॉफी जीत ली है। यह हमारे लिए गर्व का क्षण है। फाइनल मैच बहुत रोमांचक रहा। हमने पहले बल्लेबाजी करते हुए 200 रन बनाए, और फिर विपक्षी टीम को 180 रन पर रोक दिया। मैंने भी 45 रनों का योगदान दिया। पूरी टीम ने मिलकर बहुत अच्छा खेल दिखाया।
तुम्हें इस प्रतियोगिता में अवश्य आना चाहिए था। अगली बार जब कोई प्रतियोगिता हो, तो तुम जरूर आना।
अपने माता-पिता को मेरा प्रणाम कहना।
तुम्हारा मित्र,
ऋषि
विकल्प (ख): प्रधानाचार्य को खेल सुविधाएँ बढ़ाने का निवेदन
पत्र:
सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य जी,
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, आसपुर
दिनांक: 15 फरवरी 2014
विषय: विद्यालय में खेल सुविधाएँ बढ़ाने हेतु निवेदन।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा दसवीं का छात्र हूँ। हमारे विद्यालय में पढ़ाई के साथ-साथ खेलों पर भी ध्यान दिया जाता है, लेकिन वर्तमान में खेल सुविधाएँ पर्याप्त नहीं हैं।
हमारे विद्यालय में क्रिकेट, फुटबॉल और वॉलीबॉल के लिए उचित मैदान नहीं है। खेल के उपकरण भी पुराने हो गए हैं। छात्रों में खेलों के प्रति उत्साह है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में वे अपनी प्रतिभा नहीं दिखा पाते।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि विद्यालय में खेल सुविधाएँ बढ़ाने की कृपा करें, जैसे कि नए खेल उपकरण खरीदना और मैदान की मरम्मत करवाना। इससे छात्रों का शारीरिक और मानसिक विकास होगा।
आपकी अति कृपा होगी।
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
Wo So Mo
कक्षा दसवीं, आसपुर
5. व्याकरण प्रश्न
(क) “राजेश पुस्तक पढ़ रहा है।” वाक्य में कौन-सी क्रिया है? उसकी परिभाषा लिखिए।
उत्तर: इस वाक्य में संयुक्त क्रिया है।
परिभाषा: जिस क्रिया में दो या दो से अधिक धातुओं का योग होता है, उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं। यहाँ 'पढ़' (मुख्य क्रिया) और 'रहा है' (सहायक क्रिया) मिलकर संयुक्त क्रिया बनाते हैं।
(ख) रुचिका कहती है कि वह विद्यालय जाएगी।
रेखांकित पदों के पद परिचय के दो-दो बिन्दु लिखिए।
उत्तर:
रुचिका:
- यह एक संज्ञा पद है।
- यह व्यक्तिवाचक संज्ञा है तथा वाक्य में कर्ता के रूप में प्रयुक्त हुआ है।
विद्यालय:
- यह एक संज्ञा पद है।
- यह जातिवाचक संज्ञा है तथा वाक्य में कर्म के रूप में प्रयुक्त हुआ है।
(ग) वाक्य कितने प्रकार के होते हैं? उदाहरण देकर समझाइये।
उत्तर: वाक्य मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं:
- सरल वाक्य: जिसमें एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय हो।
उदाहरण: राम पुस्तक पढ़ता है। - संयुक्त वाक्य: जो दो या दो से अधिक सरल वाक्यों के योग से बनता है।
उदाहरण: राम पुस्तक पढ़ता है और श्याम खेलता है। - मिश्र वाक्य: जिसमें एक प्रधान वाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों।
उदाहरण: जब राम आया, तब मैं सो रहा था।
(घ) (i) “हवा से बातें करना” मुहावरे का अर्थ बताते हुए वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर:
अर्थ: बहुत तेज़ दौड़ना या बहुत तेज़ी से काम करना।
वाक्य प्रयोग: ओलंपिक में धावक हवा से बातें करते हुए दौड़ रहे थे।
(ii) “अट दिन चले अढ़ाई कोस” लोकोक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
अर्थ: जब काम करने की शक्ति या सामर्थ्य न हो, तो काम बहुत धीमी गति से होता है। यह लोकोक्ति किसी कार्य में अत्यधिक विलंब या असमर्थता को दर्शाती है।
(iii) अलंकार किसे कहते हैं? ये कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर:
अलंकार: काव्य में शोभा बढ़ाने वाले तत्वों को अलंकार कहते हैं। ये काव्य की सुंदरता को बढ़ाते हैं।
प्रकार: अलंकार मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:
- शब्दालंकार: जहाँ शब्दों के प्रयोग से चमत्कार उत्पन्न होता है, जैसे अनुप्रास, यमक, श्लेष।
- अर्थालंकार: जहाँ अर्थ के माध्यम से चमत्कार उत्पन्न होता है, जैसे उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा।
खण्ड-ग
6. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना ।
दुविधा-हत साहस है, दिखता है पंथ नहीं
देह सुखी हो पर मन के दुख का अंत नहीं ।
दुख है न चाँद खिला शरद-रात आने पर,
क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर ?
जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण,
छाया मत छूना
मन, होगा दुख दूना ।
(क) उपर्युक्त पद्यांश में किसे सम्बोधित किया गया है, और क्यों ?
उत्तर: इस पद्यांश में 'मन' को सम्बोधित किया गया है। कवि मन को समझाता है कि भूतकाल की असफलताओं (छाया) को पकड़ने का प्रयास मत करो, क्योंकि इससे दुख दोगुना हो जाएगा। मन को वर्तमान और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी गई है।
(ख) “क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर” पंक्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि यदि वसंत ऋतु बीत जाने के बाद भी फूल खिला है, तो इसका कोई विशेष महत्व नहीं है। समय बीत जाने के बाद मिलने वाली वस्तु या सुख का कोई अर्थ नहीं रह जाता। कवि यहाँ यह समझाना चाहता है कि अतीत में खोई हुई चीजों पर शोक करने के बजाय वर्तमान और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।
अथवा
बिहसि लखनु बोले मृदु बानी । अहो मुनीसु महाभट मानी ॥
पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारु । चहत उड़ावन फूँकि पहारु ॥
इहाँ कुम्हड़बतियाँ कोउ नाहिं । जे तरजनी देखि मरि जाहीं ॥
इहाँ कुठारु सरासन बाना । मैं कछु कहा सहित अभिमाना ॥
भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी । जो कहुँ सहाँ रिस रोकी ॥
(क) पद्यांश में वर्णित वार्तालाप क्या है और किनके बीच चल रहा था? (उत्तर सीमा 40 शब्द)
उत्तर: यह वार्तालाप लक्ष्मण और परशुराम के बीच चल रहा है। लक्ष्मण व्यंग्यपूर्वक परशुराम से कहते हैं कि आप बार-बार अपना कुल्हाड़ा दिखाकर मुझे डराना चाहते हैं, परंतु मैं कुम्हड़े (कद्दू) की तरह नहीं हूँ जो उँगली देखकर मर जाऊँ।
(ख) “इहाँ कुम्हड़बतियाँ कोउ नाहिं, जे तरजनी देखि मरि जाहीं” पंक्ति का भावार्थ लिखिए। (उत्तर सीमा 40 शब्द)
उत्तर: इस पंक्ति का भावार्थ है कि लक्ष्मण परशुराम से कहते हैं कि यहाँ कोई कद्दू की तरह कमजोर व्यक्ति नहीं है, जो उँगली देखकर ही डरकर मर जाए। लक्ष्मण स्वयं को शक्तिशाली और निडर बताते हुए परशुराम के डराने-धमकाने का उपहास कर रहे हैं।
7. निम्नलिखित प्रश्नों में से तीन के उत्तर लिखिए : (उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?
गोपियों के अनुसार राजा का धर्म प्रजा की रक्षा करना और उनके दुखों को दूर करना होना चाहिए। राजा को न्यायप्रिय और करुणामयी होना चाहिए, ताकि प्रजा सुखी रहे।
(ख) चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है? कवि देव की कविता के आधार पर उत्तर दीजिए।
कवि देव ने चाँदनी रात की सुंदरता को विभिन्न रूपों में देखा है – जैसे चाँदनी में नहाती प्रकृति, तारों की चमक, और वातावरण में फैली शीतलता। उन्होंने इसे सौंदर्य और शांति का प्रतीक बताया है।
(ग) बच्चे की दंतुरित मुस्कान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
बच्चे की दंतुरित मुस्कान कवि के मन पर गहरा प्रभाव डालती है। यह मुस्कान कवि को आनंदित करती है और उसके मन में कोमल भावनाएँ जगाती है, जिससे वह जीवन की सरलता और मासूमियत का अनुभव करता है।
(घ) "उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की" – कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
इस कथन के माध्यम से कवि यह कहना चाहता है कि चाँदनी रातों की सुंदरता और मिठास का वर्णन करना अत्यंत कठिन है। वह इस अद्भुत अनुभव को शब्दों में बाँधने में असमर्थता व्यक्त करता है, क्योंकि यह सौंदर्य अवर्णनीय है।
8. निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
तार सप्तक में जब बैठने लगता है उसका गला
प्रेरणा साथ छोड़ती हुई उत्साह अस्त होता हुआ
आवाज़ में राख जैसा कुछ गिरता हुआ
तभी मुख्य गायक को ढाँढ़स बंधाता हुआ
कहीं से चला आता है संगतकार का स्वर।
-
(क) पद्यांश में प्रयुक्त भाषा कौन-सी है?
पद्यांश में प्रयुक्त भाषा खड़ी बोली हिंदी है।
-
(ख) गायक का गला कब बैठने लगता है?
गायक का गला तार सप्तक में बैठने लगता है, जब वह ऊँचे स्वर में गाने का प्रयास करता है और उसकी आवाज़ थक जाती है।
-
(ग) तार सप्तक का अर्थ बताइए।
तार सप्तक का अर्थ है संगीत में सबसे ऊँचे स्वरों का समूह, जिसमें गाना कठिन होता है और गायक की आवाज़ पर दबाव पड़ता है।
-
(घ) "आवाज़ में राख जैसा कुछ गिरता हुआ" पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
इस पंक्ति में उपमा अलंकार है, क्योंकि आवाज़ की कर्कशता की तुलना राख से की गई है।
-
(ङ) उत्साह एक तत्सम शब्द है। इसका तद्भव रूप बताइए।
उत्साह का तद्भव रूप "उच्छाह" है।
अथवा
5-.-077--मावां [ 5 - ॥॥ठ] |
पद्यांश पर आधारित प्रश्न
पद्यांश: मधुप गुनगुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी,
मुरझाकर गिर रही पत्तियाँ देखो कितनी आज घनी ।
इस गंभीर अनंत नीलिमा में असंख्य जीवन इतिहास,
यह लो करते ही रहते हैं अपना व्यंग्य मलिन उपहास ।
-
प्रश्न (क): पद्यांश में प्रयुक्त भाषा कौन-सी है ?
उत्तर: पद्यांश में प्रयुक्त भाषा खड़ी बोली हिंदी है।
-
प्रश्न (ख): मधुप क्या कह रहा है और कैसे ?
उत्तर: मधुप (भौंरा) गुनगुना कर अपनी कहानी कह रहा है। वह अपने जीवन की व्यथा और अनुभवों को मधुर ध्वनि में व्यक्त करता है।
-
प्रश्न (ग): उपर्युक्त पद्यांश किस शैली में लिखा गया है ?
उत्तर: यह पद्यांश गीत शैली में लिखा गया है, जिसमें भावनाओं और प्रकृति के चित्रण के साथ संगीतात्मकता है।
-
प्रश्न (घ): पद्यांश की प्रथम पंक्ति में कौन-सा अलंकार प्रयुक्त हुआ है ?
उत्तर: प्रथम पंक्ति "मधुप गुनगुना कर कह जाता कौन कहानी यह अपनी" में अनुप्रास अलंकार है, क्योंकि 'क' वर्ण की आवृत्ति हुई है (कह जाता, कौन कहानी)।
-
प्रश्न (ड): कवि के अनुसार व्यंग्य मलिन उपहास करने वाले कौन हैं ?
उत्तर: कवि के अनुसार, असंख्य जीवन इतिहास (अर्थात् संसार के अनेक प्राणी और घटनाएँ) व्यंग्य और मलिन उपहास करते रहते हैं।
गद्यांश पर आधारित प्रश्न
गद्यांश: मान लीजिए कि पुराने ज़माने में भारत की एक भी स्त्री पढ़ी-लिखी न थी । न सही । उस समय स्त्रियों को पढ़ाने की जरूरत न समझी गई होगी । पर अब तो है । अतएव पढ़ाना चाहिए । हमने सैकड़ों पुराने नियमों, आदेशों और प्रणालियों को तोड़ दिया है या नहीं ? तो, चलिए स्त्रियों को अपढ़ रखने की इस पुरानी चाल को भी तोड़ दें । हमारी प्रार्थना तो यह है कि स्त्री-शिक्षा के विपक्षियों को क्षणभर के लिए भी इस कल्पना को अपने मन में स्थान न देना चाहिए कि पुराने ज़माने में यहाँ की सारी स्त्रियाँ अपढ़ थीं तथा उन्हें पढ़ने की आज्ञा न थी । जो लोग पुराणों में पढ़ी लिखी स्त्रियों के हवाले माँगते हैं उन्हें श्रीमद्भागवत दशम स्कंध के उत्तरार्ध का उन्नीसवाँ अध्याय पढ़ना चाहिए । उसमें रुक्मिणी हरण की कथा है ।
-
प्रश्न (क): “स्त्रियों को अपढ़ रखने की इस पुरानी चाल को भी तोड़ दें' कथन का क्या अभिप्राय है ? (उत्तर सीमा 40 शब्द)
उत्तर: इस कथन का अभिप्राय है कि समाज में स्त्रियों को अशिक्षित रखने की पुरानी परंपरा को समाप्त कर देना चाहिए। जिस प्रकार अन्य पुरानी कुरीतियों को तोड़ा गया, उसी प्रकार स्त्री-शिक्षा के विरोध को भी समाप्त करना आवश्यक है।
(ख) Tai के अनुसार पुराने जमाने में स्त्री शिक्षा की क्या स्थिति थी ? (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2
Tai के अनुसार पुराने जमाने में स्त्री शिक्षा की स्थिति अच्छी नहीं थी। स्त्रियों को पढ़ने-लिखने का अधिकार नहीं था और उन्हें केवल घरेलू कामों तक सीमित रखा जाता था। समाज में उनकी शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता था।
अथवा
एक संस्कृत व्यक्ति किसी नयी चीज की खोज करता है; किन्तु उसकी संतान को वह अपने पूर्वज से अनायास ही प्राप्त हो जाती है। जिस व्यक्ति की बुद्धि ने अथवा उसके विवेक ने किसी भी नए तथ्य का दर्शन किया वह व्यक्ति ही वास्तव में संस्कृत व्यक्ति है और उसकी संतान जिसे अपने पूर्वज से वह वस्तु अनायास ही प्राप्त हो गई है वह अपने पूर्वज की भाँति सभ्य भले ही बन जाए, संस्कृत नहीं कहला सकता। एक आधुनिक उदाहरण लें। 'न्यूटन' ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। वह संस्कृत मानव था। आज के युग का भौतिक विज्ञान का विद्यार्थी गुरुत्वाकर्षण से तो परिचित है ही; लेकिन उसके साथ उसे और भी अनेक बातों का ज्ञान प्राप्त है जिनसे शायद न्यूटन अपरिचित ही रहा। ऐसा होने पर भी हम आज के भौतिक विज्ञान के विद्यार्थी को न्यूटन की अपेक्षा अधिक सभ्य भले ही कह सकें; पर न्यूटन जितना संस्कृत नहीं कह सकते।
(क) उपर्युक्त गद्यांश के अनुसार सभ्य और संस्कृत में क्या अन्तर है ? (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2
गद्यांश के अनुसार, संस्कृत व्यक्ति वह है जो स्वयं नए तथ्यों की खोज करता है और उनका दर्शन करता है। सभ्य व्यक्ति वह है जो अपने पूर्वजों से प्राप्त ज्ञान को ग्रहण कर लेता है, लेकिन वह संस्कृत नहीं कहला सकता। संस्कृत व्यक्ति मौलिक खोजकर्ता होता है, जबकि सभ्य व्यक्ति केवल उस ज्ञान का उपयोग करता है।
(ख) न्यूटन के सिद्धान्त का परिचय दीजिए। (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2
न्यूटन ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त का आविष्कार किया। इस सिद्धान्त के अनुसार, ब्रह्मांड में प्रत्येक वस्तु एक-दूसरे को आकर्षित करती है। यह आकर्षण बल वस्तुओं के द्रव्यमान और उनके बीच की दूरी पर निर्भर करता है। न्यूटन इस सिद्धान्त के मूल खोजकर्ता थे, इसलिए वे संस्कृत मानव थे।
0. निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर लिखिए: (प्रत्येक प्रश्न की उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) मुहर्रम से बिस्मिल्ला खां के जुड़ाव को बताइये। 2
बिस्मिल्ला खां का मुहर्रम से गहरा जुड़ाव था। वे मुहर्रम के अवसर पर शहनाई बजाते थे और इस पर्व को बहुत श्रद्धा से मनाते थे। उनके लिए मुहर्रम केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संगीत और भक्ति का संगम था, जिसमें वे पूरी तन्मयता से भाग लेते थे।
(ख) प्राचीन और नवीन शिक्षा प्रणाली के अन्तर को समझाइये। 2
प्राचीन शिक्षा प्रणाली में गुरुकुल में रहकर शिक्षा दी जाती थी, जहाँ नैतिकता और आध्यात्मिकता पर जोर था। नवीन शिक्षा प्रणाली में स्कूलों और कॉलेजों में औपचारिक शिक्षा दी जाती है, जिसमें विज्ञान और तकनीकी ज्ञान को प्राथमिकता दी जाती है। प्राचीन शिक्षा व्यक्तिगत और समग्र विकास पर केंद्रित थी, जबकि नवीन शिक्षा करियर और व्यावसायिकता पर अधिक ध्यान देती है।
(ग) “एक कहानी यह भी” पाठ के आधार पर बताइये कि लेखिका के अपने पिता से क्या वैचारिक मतभेद थे। 2
लेखिका के पिता रूढ़िवादी विचारों के थे और वे स्त्री शिक्षा के विरोधी थे। वे चाहते थे कि लेखिका घर के कामों में व्यस्त रहे और पढ़ाई न करे। लेखिका आधुनिक विचारों वाली थीं और शिक्षा को महत्व देती थीं। इस कारण उनके बीच वैचारिक मतभेद थे, जहाँ पिता परंपरा पर जोर देते थे और लेखिका प्रगति पर।
(घ) “डॉ. बुल्के की छवि अलग है” कथन पर अपने विचार व्यक्त कीजिए। 2
डॉ. बुल्के की छवि एक विद्वान और समर्पित व्यक्ति के रूप में है। वे भारतीय संस्कृति और हिंदी साहित्य के प्रति गहरी आस्था रखते थे। उन्होंने हिंदी-अंग्रेजी शब्दकोश बनाकर अमूल्य योगदान दिया। उनकी सादगी, मेहनत और भारतीयता के प्रति प्रेम उन्हें अन्य विदेशियों से अलग बनाता है। वे एक सच्चे भारतीय की तरह जीवन जीते थे।
खण्ड-ग
11. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(क) “लखनवी अंदाज' पाठ के आधार पर नवाब साहब के व्यक्तित्व का परिचय दीजिए । (उत्तर सीमा 40 शब्द) 2
नवाब साहब शालीन, सभ्य और मिज़ाजी व्यक्ति थे। वे दिखावटी ठाठ-बाट पसंद करते थे। उनका अंदाज़ लखनवी था, जिसमें वे गरीबी छिपाकर अपनी हैसियत से अधिक दिखाने का प्रयास करते थे। वे मिलनसार और मेहमाननवाज़ भी थे।
(ख) भगत के जीवन की घटना के आधार पर मोह तथा प्रेम के अन्तर को समझाइये । (उत्तर सीमा 60 शब्द) 3
भगत के जीवन में मोह और प्रेम का अंतर स्पष्ट है। मोह स्वार्थी और आसक्ति से भरा होता है, जबकि प्रेम निस्वार्थ और त्यागमय होता है। भगत ने अपने पुत्र के प्रति मोह न दिखाकर उसे गुरु के पास भेजा, जो प्रेम का उदाहरण है। मोह में व्यक्ति अपने सुख की चिंता करता है, प्रेम में दूसरे के कल्याण की।
खण्ड-घ
12. “और देखते ही देखते दिल्ली का काया पलट होने लगा” -- नई दिल्ली के काया पलट के लिए क्या-क्या प्रयत्न किए गए होंगे ?
(उत्तर सीमा 80 शब्द) 4
नई दिल्ली के काया पलट के लिए अनेक प्रयत्न किए गए। पुरानी इमारतों को तोड़कर नई सड़कें और चौड़े रास्ते बनाए गए। बिजली, पानी और संचार की आधुनिक व्यवस्था की गई। पार्क, उद्यान और सरकारी भवनों का निर्माण हुआ। शहर को साफ-सुथरा और सुंदर बनाने के लिए योजनाबद्ध विकास किया गया, जिससे दिल्ली का स्वरूप पूरी तरह बदल गया।
अथवा
भारत के स्वाधीनता आंदोलन में गांधी और टुन्नू के त्याग को बताएँ । (उत्तर सीमा 80 शब्द) 4
गांधी और टुन्नू ने स्वाधीनता आंदोलन में अद्वितीय त्याग किया। गांधी ने अपना सब कुछ देश के लिए समर्पित कर दिया और सत्याग्रह का मार्ग अपनाया। टुन्नू ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की आज़ादी के लिए बलिदान दिया। दोनों ने निस्वार्थ भाव से देश सेवा की, जो आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
13. निम्नलिखित प्रश्नों में से तीन के उत्तर लिखिए : (प्रत्येक की उत्तर सीमा 40 शब्द)
(क) गंतोक के प्राकृतिक सौंदर्य के कौन-से दृश्य लेखिका को झकझोर गए ? 2
गंतोक के प्राकृतिक सौंदर्य में बर्फ से ढके पहाड़, हरे-भरे जंगल और झरनों के दृश्य लेखिका को झकझोर गए। वहाँ की शांत और मनोरम वादियाँ, फूलों से लदी घाटियाँ और साफ आसमान ने उन्हें अभिभूत कर दिया।
(ख) नाक मान-सम्मान व प्रतिष्ठा का द्योतक है । पाठ के आधार पर समझाइये । 2
पाठ के अनुसार, नाक मान-सम्मान और प्रतिष्ठा का प्रतीक है। जब किसी की नाक कटती है तो उसका अपमान होता है। नाक को ऊँचा रखने का अर्थ है सम्मान बनाए रखना। इस प्रकार नाक व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी है।
(ग) भोलानाथ और उसके साथियों के खेल व खेल सामग्री किस प्रकार भिन्न थे ? समझाइये । 2
भोलानाथ और उसके साथियों के खेल व खेल सामग्री में भिन्नता थी। भोलानाथ गाँव के बच्चों के साथ मिट्टी, पत्थर और डंडे जैसी साधारण चीज़ों से खेलता था, जबकि शहरी बच्चे महँगे खिलौनों और आधुनिक खेलों में व्यस्त रहते थे।
(घ) लेखक ने हिरोशिमा की कविता किस मानसिक स्थिति में लिखी ? 2
लेखक ने हिरोशिमा की कविता अत्यंत दुख और पीड़ा की मानसिक स्थिति में लिखी। वह हिरोशिमा पर हुए परमाणु हमले के भयानक परिणामों से व्यथित थे। उनके मन में मानवता के प्रति करुणा और युद्ध की निंदा का भाव था, जिसने उन्हें यह कविता लिखने के लिए प्रेरित किया।
5--27--यमातवां