RBSE Class 10th 2016 )-S-74-2016 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2016 |
| Subject | )-S-74-2016 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2016 )-S-74-2016
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Rajasthan Board Class 10th )-S-74-2016 2016 solved Previous Year Question Papers
माध्यमिक परीक्षा, 2016
SECONDARY EXAMINATION, 2016
सिन्धी
SINDHI
(THIRD LANGUAGE)
नामांक : Roll No.
No. of Questions : 1 | S-74-Sindhi (T.L.)
No. of Printed Pages : 07
Time : 3½ Hours | Maximum Marks : 80
नोट : समेई सुवाल करणु जरुरी आहिनि।
Note : All questions are compulsory.
S—74-Sindhi (T.L.) V - 009 | Turn Over
प्रश्न पत्र – सिंधी (T.L.) – 2016
4. हेठियें गीत खे ध्यान सां पढ़ी डिनल सुवालनि जा जवाब लिखो :
इन्सान जी साह ऐं गोत्स: जो फुकति हिकु वोर आहे दिल डियण। मोमबत्ती गरे ऐं पाण खपाए तड॒हिं. संदसि तजलो फ्राय ऐं वाले फिरी वेस थिए। हेत इंसान जी दिल फा जड॒हिं बरी नास थिए तड॒हिं नूरानी जोत जो इजहार थिए। वेचारो इंसान तड॒हिं थो पारि थिए, जड॒हिं पाण अर्पण ओट करे। जंहिं सभु कुझ छड़ियो देस वाय फेरा जंहिं खे कुझ बि डिसण जी आस न आहे तंहिं भांयो त सभु डिठो। इंसान जे जीवन में जे दिल न ओने यानी प्रेम ऐं भगती न आहे त उनजो जीअणु अजायो आहे।
-
(i) मथिएं टुकिरे जो सिरो लिखो।
उत्तर: मथिएं टुकिरे जो सिरो आहे: "इन्सान जी साह ऐं गोत्स: जो फुकति हिकु वोर आहे दिल डियण।"
-
(ii) इंसान कड॒हिं सघारो थिए थो ?
उत्तर: इंसान तड॒हिं सघारो थिए थो, जड॒हिं पाण अर्पण ओट करे।
-
(iii) मथिएं टुकिरे जो सारु लिखो।
उत्तर: मथिएं टुकिरे जो सारु आहे: इन्सान जी साह ऐं गोत्स जो फुकति हिकु वोर आहे दिल डियण। मोमबत्ती गरे ऐं पाण खपाए तड॒हिं संदसि तजलो फ्राय ऐं वाले फिरी वेस थिए। हेत इंसान जी दिल फा जड॒हिं बरी नास थिए तड॒हिं नूरानी जोत जो इजहार थिए। वेचारो इंसान तड॒हिं थो पारि थिए, जड॒हिं पाण अर्पण ओट करे। जंहिं सभु कुझ छड़ियो देस वाय फेरा जंहिं खे कुझ बि डिसण जी आस न आहे तंहिं भांयो त सभु डिठो। इंसान जे जीवन में जे दिल न ओने यानी प्रेम ऐं भगती न आहे त उनजो जीअणु अजायो आहे।
5. हेठियें खाली जागा भरो :
-
(i) क्लास ते २५ ५ सा कोल २५५ पालेस
उत्तर: (स्पष्ट नहीं)
-
(ii) दा २०६ जीएस ४ ३५३९
उत्तर: (स्पष्ट नहीं)
-
(iii) एते
उत्तर: (स्पष्ट नहीं)
-
(iv) स्प्ट एफएस ओइस इस ली
उत्तर: (स्पष्ट नहीं)
— पृष्ठ 2 का 7 —
प्रश्न 3. निम्नलिखित विषयों पर 200 शब्दों में निबंध लिखिए:
- जेकड़हिं मां भारत जो प्रधानमंत्री हुजां।
- बेरोजगारी और उनजो हल।
- चेटीचण्डु।
- शिक्षा जो गा में कम्प्यूटर।
प्रश्न 4. मोहल्ले में नलनि में गन्दे पाणीअ जे सप्लाई बाबति जलदाय विभाग खे दरख्वास्त लिखो।
उत्तर: यह एक पत्र लेखन का प्रश्न है। विद्यार्थी को जलदाय विभाग को एक आवेदन पत्र लिखना है जिसमें मोहल्ले में नलों में गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायत की गई हो। पत्र में दिनांक, प्रेषक का पता, विषय, और समस्या का स्पष्ट वर्णन होना चाहिए।
प्रश्न 5. तव्हांजे स्कूल जे IRA खे राजस्थान जे ऐतिहासिक जगहियुनि ते घुमण लाए वठी वजनि था। तव्हां पंहिंजे पीउ खे 2000 रुपया घुराइणु ऐं घुमणु वजण बाबति ख़तु लिखो।
उत्तर: यह एक पत्र लेखन का प्रश्न है। विद्यार्थी को अपने पिता को एक पत्र लिखना है जिसमें स्कूल की ओर से राजस्थान के ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा के लिए 2000 रुपये मांगे गए हों। पत्र में यात्रा का उद्देश्य, स्थान, और धन की आवश्यकता का उल्लेख होना चाहिए।
प्रश्न 6. तव्हांजे रिहाइशी इलाके में मोबाइल टॉवर लगायो वियो आहे। जंहिं खे हटाइण लाइ वास्तेदार ऑफीसर खे रिपोर्ट दर्ज करायो।
उत्तर: यह एक रिपोर्ट लेखन का प्रश्न है। विद्यार्थी को अपने रिहाइशी इलाके में लगाए गए मोबाइल टॉवर को हटाने के लिए वास्तेदार ऑफिसर को रिपोर्ट दर्ज करानी है। रिपोर्ट में टॉवर के स्थान, स्वास्थ्य पर प्रभाव, और निवासियों की आपत्ति का उल्लेख होना चाहिए।
प्रश्न 7. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
- 5+3+2+5 = 15 अंक
(क) (i) ________ (ii) ________ (iii) ________
(ख) (i) ________ (ii) ________ (iii) ________
(ग) (i) ________ (ii) ________ (iii) ________
(घ) (i) ________ (ii) ________ (iii) ________
प्रश्न 5
(i) स्य छा खे चइबो एक? उनजा घणा किस्म आहिनि? नाला लिखो। (5+3+2+5=15)
उत्तर: यह प्रश्न सिंधी भाषा के व्याकरण या साहित्य से संबंधित है। कृपया पाठ्यपुस्तक के अनुसार उत्तर देखें।
(ii) अदद बदलियो (के फा टे): कमरो, बकिरी, खट, काठी
उत्तर: इन शब्दों के बहुवचन रूप लिखने हैं। उदाहरण: कमरो → कमरा, बकिरी → बकिरियाँ, खट → खट, काठी → काठियाँ।
(iii) फिरे बदलियो (के बिब): अरे, मालिक, एत, अबो
उत्तर: इन शब्दों के विलोम या पर्यायवाची लिखने हैं। कृपया पाठ्यपुस्तक देखें।
(iv) हेठियनि इस्तलाहनि जी माना लिखी जुमिले में कमु आणियो (के फा पंज):
- साई-साईं करणु
- पेरनि ते बीहणु
- बटाकूं हणणु
- तोते वांगुर पढ़णु
- आसमान उइ गाल्हियूं करणु
- बबुरनि खां बेर घुरणु
उत्तर: इन मुहावरों के अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग करने हैं। उदाहरण: "साई-साईं करणु" का अर्थ है बहुत प्रार्थना करना।
प्रश्न 6
(i) "बीएस ओन आइएस सो दे बीएल 26 थी गे बीई एचएल एई सीएल"
(ii) "एसटीएस अत स्क है 26. उबे"
उत्तर: ये पंक्तियाँ सिंधी साहित्य या कविता से हैं। कृपया पाठ्यपुस्तक के अनुसार व्याख्या करें।
6. को फा हिकु हवालो लिखो:
(i) "सग कम जे रासि थियण जी आशा रखणु आहे जणु बबुरनि खां बेर घुरणु।"
(ii) "महिमान नवाज़ीअ में सिंधीअ खे केरु गएस।"
उत्तर: इन वाक्यों का संदर्भ या अर्थ लिखना है। पहला वाक्य एक मुहावरे का प्रयोग है, दूसरा सिंधी संस्कृति से संबंधित है।
— पृष्ठ 4 —
प्रश्न 7
“माण्हू छा चवंदा!” जो ख्यालु करे कहिड़ा कम थियनि था ? अटिकल 100 लफ्जनि में लिखो।
या
जहांगीर सरीखा इतिहास क्यों ? अटिकल 100 लफ्जनि में लिखो।
उत्तर: “माण्हू छा चवंदा!” यह ख्याल इस बात को दर्शाता है कि मनुष्य अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करता है, लेकिन वह हार नहीं मानता। यह ख्याल मानवीय संघर्ष और धैर्य को उजागर करता है। इसमें यह बताया गया है कि मनुष्य को अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए, चाहे रास्ते में कितनी भी बाधाएँ क्यों न आएँ। यह ख्याल हमें सिखाता है कि जीवन में सफलता पाने के लिए दृढ़ संकल्प और मेहनत आवश्यक है।
या
जहांगीर सरीखा इतिहास इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह मुगल साम्राज्य के एक प्रमुख शासक थे। उनके शासनकाल में कला, संस्कृति और प्रशासन में कई सुधार हुए। जहांगीर ने न्याय और सहिष्णुता पर जोर दिया, जिससे साम्राज्य में शांति और समृद्धि आई। उनके इतिहास से हमें शासन, कूटनीति और मानवीय मूल्यों के बारे में सीखने को मिलता है।
प्रश्न 8
हेठियनि में से किन्हीं पांच सवालनि जा जवाब अटिकल 20 लफ्जनि में दियो।
- वापारियुनि जी आजियां कहिं कई ?
- कौमी हलचल में भाग लेने वाली जेठी सिपाहीमलाणीअ खे कहिड़ियूं तकलीफूं दरपेश आयीं ?
- श्री जा बणायल इन्सान छा जा पुतला आहिनि ?
- (चौथा प्रश्न – मूल पाठ में स्पष्ट नहीं)
- (पाँचवाँ प्रश्न – मूल पाठ में स्पष्ट नहीं)
उत्तर:
- वापारियुनि जी आजियां व्यापार और वाणिज्य से संबंधित होती हैं, जिनमें लाभ, हानि और बाजार की स्थिति शामिल है।
- जेठी सिपाहीमलाणीअ को कौमी हलचल में भाग लेने के कारण कई तकलीफों का सामना करना पड़ा, जैसे कि गिरफ्तारी, यातना और सामाजिक बहिष्कार।
- श्री जा बणायल इन्सान एक पुतला है जो मानवीय गुणों और आदर्शों का प्रतीक है, जिसे समाज में प्रेरणा के रूप में देखा जाता है।
- (चौथा प्रश्न – मूल पाठ में स्पष्ट नहीं)
- (पाँचवाँ प्रश्न – मूल पाठ में स्पष्ट नहीं)
प्रश्न 9. हेठियें बैत जो मतलब लिखो :
-
दुख, दर्द, तमनाऊं ऐं आस
हिक दिल में रहनि कींअ था महिमान हज़ारेंअर्थ: दुख, दर्द, इच्छाएँ और आशाएँ – ये सब एक ही दिल में हज़ारों मेहमानों की तरह निवास करते हैं। अर्थात मनुष्य के हृदय में अनेक प्रकार की भावनाएँ और इच्छाएँ एक साथ रहती हैं।
-
मंझि ख़ालिकु, ख़ालिकु सभु ख़ल्क में
समझी को सामी चवे विरलो हर जन हिकु
महिर करे मालिकु जंहिं ते परचे पाण हीअर्थ: सृष्टिकर्ता (ख़ालिक) सभी प्राणियों (खल्क) के भीतर विद्यमान है। यह बात कोई विरला ही समझ पाता है कि हर जीव में वही एक परमात्मा है। जिस पर मालिक (ईश्वर) की कृपा होती है, वही इस रहस्य को पहचान पाता है।
प्रश्न 40
‘आपा छा चवंदा!’ पाठ के लेखक 'बलदेव गाजरा' का परिचय अटिकल 400 शब्दों में लिखिए।
बलदेव गाजरा का परिचय:
बलदेव गाजरा सिंधी साहित्य के एक प्रसिद्ध लेखक, कवि और नाटककार हैं। उनका जन्म सिंध प्रांत (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। विभाजन के बाद वे भारत आ गए और राजस्थान में बस गए। उन्होंने सिंधी भाषा और साहित्य की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
गाजरा जी ने कई कहानियाँ, नाटक और कविताएँ लिखीं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक चेतना और सिंधी संस्कृति का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। 'आपा छा चवंदा!' उनकी एक प्रसिद्ध रचना है, जिसमें उन्होंने समाज की विसंगतियों और मानवीय रिश्तों को बड़ी ही मार्मिकता से चित्रित किया है।
उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और भावपूर्ण होती है। वे सिंधी साहित्य के उन हस्ताक्षरों में से हैं जिन्होंने अपनी लेखनी से सिंधी भाषा को समृद्ध किया। उनकी रचनाएँ आज भी पाठकों को प्रेरित करती हैं।
अथवा
‘तोरे’ के कवि श्री लक्ष्मण दुबे का परिचय अटिकल 400 शब्दों में लिखिए।
श्री लक्ष्मण दुबे का परिचय:
श्री लक्ष्मण दुबे सिंधी साहित्य के एक प्रतिष्ठित कवि और लेखक हैं। उनका जन्म सिंध प्रांत में हुआ था और विभाजन के बाद वे भारत आ गए। उन्होंने सिंधी भाषा में कविताएँ, गीत और कहानियाँ लिखीं।
दुबे जी की कविताओं में प्रकृति, प्रेम, और मानवीय भावनाओं का सुंदर चित्रण मिलता है। 'तोरे' उनकी एक प्रसिद्ध कविता है, जिसमें उन्होंने प्रेम और विरह की भावना को बड़ी ही मार्मिकता से व्यक्त किया है। उनकी भाषा सरल, मधुर और भावपूर्ण होती है।
उन्होंने सिंधी साहित्य को कई महत्वपूर्ण रचनाएँ दीं। उनकी कविताएँ आज भी सिंधी भाषा प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं। वे सिंधी साहित्य के उन कवियों में से हैं जिन्होंने अपनी रचनाओं से सिंधी भाषा को समृद्ध किया।
प्रश्न 41
निम्नलिखित में से किसी एक बैत का सार अटिकल 400 शब्दों में लिखिए।
- “बैत” (शाह अब्दुल लतीफ भिटाई)
- “राति गुज़ारि त सही!”
(क) “बैत” (शाह अब्दुल लतीफ भिटाई) का सार:
शाह अब्दुल लतीफ भिटाई सिंधी साहित्य के महान संत कवि हैं। उनकी रचना 'बैत' में उन्होंने ईश्वर प्रेम, मानवता और सत्य की खोज का संदेश दिया है। इस बैत में कवि ने बताया है कि सच्चा प्रेम ईश्वर से होता है और संसार के मोह-माया से दूर रहना चाहिए।
कवि ने मानव जीवन को एक यात्रा बताया है, जिसमें हमें सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए। उन्होंने समाज में व्याप्त बुराइयों और अंधविश्वासों पर भी प्रकाश डाला है। उनकी भाषा सरल, प्रवाहपूर्ण और भावपूर्ण है। यह बैत सिंधी साहित्य की अमूल्य धरोहर है।
(ख) “राति गुज़ारि त सही!” का सार:
यह बैत प्रेम और विरह की भावना को व्यक्त करता है। इसमें कवि ने प्रेमिका की प्रतीक्षा और उसकी व्याकुलता का वर्णन किया है। 'राति गुज़ारि त सही!' का अर्थ है कि रात को सही तरीके से बिताओ।
कवि ने बताया है कि प्रेम में विरह का दर्द भी सहना पड़ता है। प्रेमिका अपने प्रिय की याद में रात भर जागती है और उसके आने की प्रतीक्षा करती है। यह बैत प्रेम की गहराई और त्याग की भावना को दर्शाता है। कवि ने सरल और मधुर भाषा में इस भावना को व्यक्त किया है।