RBSE Class 10th 2019 Health Care-V-103-2019 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2019 |
| Subject | Health Care-V-103-2019 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2019 Health Care-V-103-2019
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Rajasthan Board Class 10th Health Care-V-103-2019 2019 solved Previous Year Question Papers
व्यावसायिक शिक्षा (कक्षा – X) परीक्षा, 2019
लेवल – द्वितीय
विषय – स्वास्थ्य देखभाल
समय : 2 घण्टे 5 मिनट | पूर्णांक : 30
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्द सीमा में लिखें।
- प्रश्न संख्या 1 से 10 तक (बहुविकल्पीय प्रश्नों) के उत्तर तालिका बनाकर उत्तर-पुस्तिका में लिखें।
- प्रश्न संख्या 11 से 30 तक के उत्तर रिक्त स्थानों की पूर्ती कर उत्तर-पुस्तिका में तालिका बनाकर लिखें।
- प्रश्न संख्या 31 से 36 तक के उत्तर 4 से 6 पंक्तियों में लिखें।
- प्रश्न संख्या 37 एवं 38 के उत्तर दो पृष्ठों तक लिखें।
प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें
यहाँ से काटिए
खण्ड - अ
सही विकल्प चुनें : [027%८-5]
-
यह विभाग विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा लिखी गई card रोगियों को प्रदान करने के लिए जिम्मेदार हैं।
- (अ) वित्त विभाग
- (ब) जनसंपर्क विभाग
- (स) फिजियोथेरेपी विभाग
- (द) फार्मेसी विभाग
व्याख्या: फार्मेसी विभाग डॉक्टरों द्वारा लिखे गए नुस्खों (card) के अनुसार रोगियों को दवाइयाँ प्रदान करने के लिए जिम्मेदार होता है।
-
शिक्षण और रेफरल अस्पताल में बिस्तर की संख्या होती हैं।
- (अ) 6-10
- (ब) 30-50
- (स) 50-200
- (द) 200-300
व्याख्या: शिक्षण और रेफरल अस्पतालों में आमतौर पर 50 से 200 बिस्तर होते हैं, जो उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करने के लिए पर्याप्त होते हैं।
-
इस प्रयोगशाला में बैक्टीरिया और उनसे उत्पन्न जहर की जाँचे की जाती है -
- (अ) जीवाणु विज्ञान प्रयोगशाला
- (ब) रूधिर प्रयोगशाला
- (स) परजीवी विज्ञान प्रयोगशाला
- (द) क्लिनिकल बायोकैमिस्ट्री प्रयोगशाला
व्याख्या: जीवाणु विज्ञान प्रयोगशाला (बैक्टीरियोलॉजी लैब) में बैक्टीरिया और उनके द्वारा उत्पन्न विषाक्त पदार्थों की जाँच की जाती है।
-
खराब पोषण का संकेत है -
- (अ) पर्याप्त भूख
- (ब) सक्रिय और सतर्क
- (स) मानसिक - भ्रम, कमजोर मस्तिष्क
- (द) दृढ और स्वस्थ त्वचा
व्याख्या: खराब पोषण के कारण मानसिक भ्रम और मस्तिष्क की कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, जबकि पर्याप्त भूख, सक्रियता और स्वस्थ त्वचा अच्छे पोषण के संकेत हैं।
प्रश्न 5
रोगी को एनीमा देने हेतु स्थिति देते हैं -
- प्रोन
- सुपाइन
- हाई फोलर्स
- बायीं करवट
सही उत्तर: बायीं करवट (Left Lateral Position)
एनीमा देते समय रोगी को बायीं करवट (लेफ्ट लेटरल पोजीशन) में लिटाया जाता है ताकि गुरुत्वाकर्षण के कारण तरल पदार्थ आसानी से मलाशय और बड़ी आंत में प्रवेश कर सके।
प्रश्न 6
शरीर में उत्पन्न ध्वनि का पता लगाने और अध्ययन करने का एक उपकरण है -
- स्टेथेस्कोप
- एनेरॉइड मॉनिटर
- डिजीटल मॉनिटर
- थर्मामीटर
सही उत्तर: स्टेथेस्कोप
स्टेथेस्कोप एक चिकित्सा उपकरण है जो शरीर के आंतरिक अंगों (जैसे हृदय, फेफड़े) द्वारा उत्पन्न ध्वनियों को सुनने और उनका अध्ययन करने के लिए उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 7
उच्च रक्तचाप कहलाता है -
- हाइपोटेंशन
- हाइपरटेंशन
- हाइपरथर्मिया
- हाइपोथर्मिया
सही उत्तर: हाइपरटेंशन (Hypertension)
उच्च रक्तचाप को चिकित्सा भाषा में हाइपरटेंशन कहा जाता है। हाइपोटेंशन निम्न रक्तचाप, हाइपरथर्मिया अत्यधिक शरीर ताप, और हाइपोथर्मिया अत्यधिक कम शरीर ताप को दर्शाता है।
प्रश्न 8
बैक्टीरिया जनित रोग है -
- रेबिज
- मीजल्स
- टिटनस
- डेंगू बुखार
सही उत्तर: टिटनस (Tetanus)
टिटनस एक जीवाणु (बैक्टीरिया) जनित रोग है, जो क्लॉस्ट्रिडियम टिटानी नामक जीवाणु के संक्रमण से होता है। रेबिज (वायरस), मीजल्स (वायरस), और डेंगू बुखार (वायरस) वायरस जनित रोग हैं।
प्रश्न 9:
यकृत में होने वाला संक्रमण जो वायरस से होता है और आम तौर पर संक्रमित पानी या भोजन से फैलता है -
- हिपेटाइटिस - ए
- हिपेटाइटिस - बी
- हिपेटाइटिस - सी
- टाइफॉइड बुखार
सही उत्तर: (अ) हिपेटाइटिस - ए
हेपेटाइटिस ए एक वायरल संक्रमण है जो मुख्यतः दूषित पानी या भोजन के माध्यम से फैलता है और यकृत को प्रभावित करता है।
प्रश्न 10:
एलर्जी में निम्न दवा का उपयोग किया जाता है -
- एस्पिरिन
- पैरासिटामोल
- सेट्रीजाइन
- ओ. आर. एस
सही उत्तर: (स) सेट्रीजाइन
सेट्रीजाइन एक एंटीहिस्टामाइन दवा है जो एलर्जी के लक्षणों जैसे छींक, खुजली और नाक बहने को कम करने के लिए उपयोग की जाती है।
खण्ड - अ
रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:
-
एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टर ऑपरेशन के लिए एनेस्थेटिक्स देते हैं।
उत्तर: एनेस्थीसिया
-
संक्रामक रोगों से पीड़ित व्यक्तियों का इलाज .................. अस्पताल में किया जाता है।
उत्तर: संक्रामक रोग
-
एक आबादी, समुदाय या क्षेत्र में एक समय पर मौजूद अप्रारूपिक रूप से बड़ी संख्या में होने वाला प्रभाव .................. कहलाता है।
उत्तर: महामारी
-
आमाशय और आंत की अंदरूनी झिल्ली में जलन .................. कहलाती है।
उत्तर: गैस्ट्रोएंटेराइटिस
-
देखभाल योजना का द्वितीय चरण .................. करना है।
उत्तर: योजना बनाना
-
भोजन साफ और .................. हुए कंटेनरों में दिया जाना चाहिए।
उत्तर: कीटाणुरहित
रिक्त स्थान भरें (Fill in the Blanks)
- श्वसन दर प्रति मिनट व्यक्ति द्वारा ली जाने वाली साँसों की संख्या है।
- सांस लेने में कठिनाई (दमा) से राहत हेतु अर्ध-बैठने (सिटिंग) स्थिति दी जाती है।
- पोलियो वायरस से होने वाला संक्रमण है।
- महामारी विज्ञान के त्रिकोण में तीन कोने अभिकारक, मेजबान और पर्यावरण हैं।
- सीने को पेट से अलग करने वाला डायाफ्राम सांस लेने में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
- स्फिगमो मैनोमीटर (रक्तदाब मापी) रक्तचाप मापने के काम आता है।
- शरीर का तापमान 104 डिग्री फे. और अधिक बुखार (पायरेक्सिया) कहलाता है।
- हड्डियों का अध्ययन ऑस्टियोलॉजी कहलाता है।
- सभी कोशिकाओं को कार्य करने के लिए भोजन, पानी और ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
- अंतः स्रावी ग्रंथियों में नलिकाएँ या ट्यूब नहीं होती हैं और खून में सीधे ही हार्मोन स्रावित करती हैं।
- एक औसत वयस्क में रक्त लगभग 5-6 लीटर होता है।
खण्ड - a
चार से छ: पंक्तियों में उत्तर दीजिए :
28) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में .................- और रीढ़ की हड्डी आती है।
उत्तर: केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी आती है।
29) आयरन की कमी ....................- में परिणामी हो सकती है।
उत्तर: आयरन की कमी एनीमिया (रक्ताल्पता) में परिणामी हो सकती है।
30) आयोडीन ...............----* ग्रंथि के कार्य को प्रभावित कर सकता है।
उत्तर: आयोडीन थायरॉइड ग्रंथि के कार्य को प्रभावित कर सकता है।
31) उद्देश्यों के आधार पर अस्पतालों को वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर: उद्देश्यों के आधार पर अस्पतालों को निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
- सामान्य अस्पताल: जो सभी प्रकार की बीमारियों और चोटों का उपचार प्रदान करते हैं।
- विशेष अस्पताल: जो किसी विशेष रोग या अंग (जैसे हृदय, नेत्र, कैंसर) के उपचार पर केंद्रित होते हैं।
- शिक्षण अस्पताल: जो चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान से जुड़े होते हैं।
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र: ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वाले।
- रुग्णालय (क्लिनिक): छोटे स्तर पर बाह्य रोगी सेवाएं देने वाले।
32) बिस्तर पर रोगियों की स्थिति को बदलने के कारण लिखिए।
उत्तर: बिस्तर पर रोगियों की स्थिति बदलने के निम्नलिखित कारण हैं:
- दबाव घावों (बेडसोर) को रोकने के लिए।
- रक्त संचार को बेहतर बनाने के लिए।
- मांसपेशियों की जकड़न और संकुचन को कम करने के लिए।
- श्वसन में सुधार और फेफड़ों में संक्रमण से बचाव के लिए।
- रोगी को आरामदायक स्थिति प्रदान करने के लिए।
- शरीर के विभिन्न अंगों पर दबाव कम करने के लिए।
33) सूक्ष्म जीवों के हमारे शरीर में प्रवेश के चार प्रमुख मार्ग लिखिए।
उत्तर: सूक्ष्म जीवों के हमारे शरीर में प्रवेश के चार प्रमुख मार्ग निम्नलिखित हैं:
- श्वसन मार्ग: नाक और मुंह के माध्यम से हवा में मौजूद जीवाणु या वायरस फेफड़ों में प्रवेश करते हैं।
- पाचन मार्ग: दूषित भोजन या पानी के सेवन से जीव मुंह और आंतों में प्रवेश करते हैं।
- त्वचा मार्ग: कट, घाव या कीड़े के काटने से त्वचा के माध्यम से जीव शरीर में प्रवेश करते हैं।
- श्लेष्मा झिल्ली मार्ग: आंख, नाक, मुंह या जननांगों की श्लेष्मा झिल्ली के माध्यम से जीव प्रवेश करते हैं।
34) संयोजी ऊतक के मुख्य प्रकार लिखिए।
उत्तर: संयोजी ऊतक के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
- ढीला संयोजी ऊतक: त्वचा के नीचे और अंगों के बीच पाया जाता है, जो सहारा और लचीलापन प्रदान करता है।
- घना संयोजी ऊतक: टेंडन और लिगामेंट में पाया जाता है, जो मजबूती और खिंचाव प्रदान करता है।
- वसा ऊतक: शरीर में वसा संग्रह करता है और इन्सुलेशन प्रदान करता है।
- रक्त: तरल संयोजी ऊतक जो पोषक तत्वों और ऑक्सीजन का परिवहन करता है।
- अस्थि ऊतक: कठोर संयोजी ऊतक जो शरीर को ढांचा प्रदान करता है।
- उपास्थि ऊतक: लचीला संयोजी ऊतक जो जोड़ों में पाया जाता है।
35) कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सी.पी.आर.) से आप क्या समझते हैं? लिखिए।
उत्तर: कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सी.पी.आर.) एक आपातकालीन जीवन रक्षक प्रक्रिया है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति का दिल धड़कना बंद कर दे या वह सांस लेना बंद कर दे। इसमें छाती को दबाना (चेस्ट कंप्रेशन) और कृत्रिम सांस देना (रेस्क्यू ब्रीदिंग) शामिल होता है। इसका उद्देश्य मस्तिष्क और अन्य महत्वपूर्ण अंगों तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का प्रवाह बनाए रखना है, जब तक कि चिकित्सा सहायता न पहुंच जाए। सी.पी.आर. से हृदयाघात या डूबने जैसी स्थितियों में जीवन बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
36) एक अच्छे श्रोता बनने के सुझाव बताओ।
उत्तर: एक अच्छे श्रोता बनने के लिए निम्नलिखित सुझाव हैं:
- वक्ता पर पूरा ध्यान केंद्रित करें और आंखों से आंखें मिलाकर सुनें।
- बीच में टोकने से बचें और वक्ता को अपनी बात पूरी करने दें।
- सुनते समय सकारात्मक शारीरिक भाषा अपनाएं, जैसे सिर हिलाना या मुस्कुराना।
- समझने के लिए प्रश्न पूछें, लेकिन उचित समय पर।
- वक्ता की भावनाओं को समझने का प्रयास करें और सहानुभूति दिखाएं।
- ध्यान भटकाने वाली चीजों (जैसे मोबाइल) से दूर रहें।
- सुनने के बाद संक्षेप में दोहराएं कि आपने क्या समझा, ताकि गलतफहमी न हो।
दो पृष्ठों में उत्तर दीजिए :
-
महामारी विज्ञान (एपिडेमियालॉजी) के त्रिकोण का वर्णन कीजिए।
महामारी विज्ञान त्रिकोण (Epidemiological Triangle) एक मॉडल है जो रोग के प्रसार को समझने में मदद करता है। इसमें तीन मुख्य घटक होते हैं:
- कर्ता (Agent): रोग उत्पन्न करने वाला कारक, जैसे वायरस, बैक्टीरिया, कवक या परजीवी।
- पोषक (Host): वह व्यक्ति या जीव जो रोग से प्रभावित होता है। पोषक की प्रतिरोधक क्षमता, आयु, लिंग और आनुवंशिकता रोग के प्रति संवेदनशीलता को प्रभावित करते हैं।
- पर्यावरण (Environment): वे बाहरी कारक जो कर्ता और पोषक के बीच संपर्क को प्रभावित करते हैं, जैसे जलवायु, स्वच्छता, भीड़भाड़ और सामाजिक-आर्थिक स्थितियाँ।
ये तीनों घटक आपस में संतुलन में रहते हैं। यदि इनमें से किसी एक में परिवर्तन होता है, तो रोग का प्रकोप बढ़ या घट सकता है। उदाहरण के लिए, मच्छर जनित रोगों में कर्ता (प्लाज्मोडियम), पोषक (मनुष्य) और पर्यावरण (जलवायु और जल संचय) तीनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
-
जलने के विभिन्न कारण लिखिए, प्राथमिक, द्वितीय और तृतीय स्तर पर जलने के लक्षण व प्राथमिक उपचार लिखिए।
जलने के कारण: आग, गर्म तरल पदार्थ (उबलता पानी, तेल), भाप, बिजली का झटका, रासायनिक पदार्थ (एसिड, बेस), सूर्य की किरणें (सनबर्न) और विकिरण।
प्रथम स्तर (प्राथमिक) जलना:
- लक्षण: त्वचा लाल हो जाती है, हल्की सूजन और दर्द होता है। छाले नहीं बनते।
- प्राथमिक उपचार: जले हुए स्थान को 10-15 मिनट तक ठंडे बहते पानी से धोएं। साफ, सूखी पट्टी बांधें। दर्द निवारक दवा ले सकते हैं। क्रीम या मक्खन न लगाएं।
द्वितीय स्तर (मध्यम) जलना:
- लक्षण: त्वचा लाल, छाले बन जाते हैं, तीव्र दर्द और सूजन होती है। त्वचा नम दिखती है।
- प्राथमिक उपचार: ठंडे पानी से धोएं, छालों को न फोड़ें। साफ, नम पट्टी (एंटीबायोटिक क्रीम लगाकर) बांधें। चिकित्सक से संपर्क करें।
तृतीय स्तर (गंभीर) जलना:
- लक्षण: त्वचा सफेद, काली या जली हुई दिखती है। दर्द नहीं होता (नसें नष्ट हो जाती हैं)। गहरे ऊतक प्रभावित होते हैं।
- प्राथमिक उपचार: तुरंत आपातकालीन सेवा (108) को कॉल करें। जले हुए स्थान को साफ, सूखी पट्टी से ढकें। पानी न डालें। व्यक्ति को गर्म रखें और झटका (शॉक) से बचाएं। कपड़े न हटाएं।
श-व0 433
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