RBSE Class 10th 2019 Hindi-S-121-D&D-2019 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2019 |
| Subject | Hindi-S-121-D&D-2019 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 10th 2019 Hindi-S-121-D&D-2019
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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-121-D&D-2019 2019 solved Previous Year Question Papers
माध्यमिक (मूक-बधिर) परीक्षा, 2019
हिंदी
समय : 4 घंटे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य है।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों के क, ख, ग, घ भाग हैं, उन सभी का हल एक साथ सतत् लिखें।
नामांक (Roll No.) : ____________________
प्रश्न पत्र क्रमांक (S.No.) : S-2i-Hindi(D & D) FE
प्रश्नों की संख्या : 30 मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 7
भाग - क
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
स्वतंत्र भारत का संपूर्ण दायित्व आज विद्यार्थियों के ऊपर है क्योंकि आज जो विद्यार्थी हैं वे ही कल स्वतंत्र भारत के नागरिक होंगे। भारत की उन्नति और उत्थान उन्हीं की उन्नति और उत्थान पर निर्भर करती है अतः विद्यार्थियों को अपने भावी जीवन का निर्माण बड़ी सतर्कता और सावधानी से करना चाहिए। उन्हें प्रत्येक क्षण अपने राष्ट्र, अपने समाज, धर्म को बल प्राप्त हो सके। जो विद्यार्थी राष्ट्रीय दृष्टिकोण से अपने जीवन का निर्माण नहीं करते वे राष्ट्र और समाज के लिए भार स्वरूप होते हैं।
-
उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर: विद्यार्थियों का दायित्व
-
भारत का कौनसा दायित्व विद्यार्थियों पर है?
उत्तर: स्वतंत्र भारत का संपूर्ण दायित्व विद्यार्थियों पर है, क्योंकि वे ही कल के नागरिक होंगे और देश की उन्नति उन पर निर्भर करती है।
-
विद्यार्थी को अपने जीवन का निर्माण कैसे करना चाहिए?
उत्तर: विद्यार्थी को अपने जीवन का निर्माण बड़ी सतर्कता और सावधानी से करना चाहिए तथा राष्ट्रीय दृष्टिकोण से अपने जीवन का निर्माण करना चाहिए।
निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
कुदरत हमको रोज सिखाती,
जगहित कुछ करना सीखें,
अपने लिए सभी जीते हैं,
औरों के हित मरना सीखें।
सूरज हमें रोशनी देता,
तारे शीतलता देते,
चाँद बाँटता अमृत सबको,
बादल वर्षा जल दे जाते।
जुगनू ज्यों थोड़ा-थोड़ा ही,
अंधकार हम हरना सीखें।
-
सूरज और बादल हमें क्या-क्या देते हैं?
उत्तर: सूरज हमें रोशनी देता है और बादल वर्षा का जल देते हैं।
-
कुदरत हमें क्या सिखाती है?
उत्तर: कुदरत हमें रोज सिखाती है कि हमें जगहित (संसार के कल्याण) के लिए कुछ करना चाहिए और दूसरों के हित के लिए त्याग करना सीखना चाहिए।
-
'सूरज' का पर्यायवाची है -
- सूर्य
- तारा
- नदी
सही उत्तर: सूर्य। 'सूरज' का अर्थ सूर्य होता है, जबकि तारा और नदी इसके पर्यायवाची नहीं हैं।
भाग - ख
7) दिए गए संकेत बिंदुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर 50 शब्दों में निबंध लिखिए। [8]
(क) हमारे राष्ट्रीय पर्व – स्वतंत्रता दिवस
- प्रस्तावना
- क्यों एवं कब मनाया जाता है
- कैसे मनाया जाता है
- उपसंहार
(ख) स्वच्छता अभियान
- प्रस्तावना
- प्रारंभ एवं आवश्यकता
- बदलता समाज
- उपसंहार
(ग) जल प्रदूषण
- प्रस्तावना
- जल प्रदूषण के कारण, दुष्परिणाम
- बचने के उपाय
- उपसंहार
8) स्वयं को रोहन निवासी सीकर मानते हुए जिला रोजगार अधिकारी को रोजगार शिविर आयोजित करने का आवेदन लिखिए। [4]
सेवा में,
जिला रोजगार अधिकारी,
सीकर (राजस्थान)
विषय: रोजगार शिविर आयोजित करने हेतु आवेदन
महोदय,
मैं रोहन, सीकर निवासी हूँ। हमारे क्षेत्र में बेरोजगार युवाओं की संख्या अधिक है। अतः आपसे निवेदन है कि हमारे क्षेत्र में एक रोजगार शिविर का आयोजन करवाने की कृपा करें, जिससे युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें।
धन्यवाद।
भवदीय,
रोहन
निवासी: सीकर
— अथवा —
स्वयं को नेहा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मोखमपुरा जयपुर की छात्रा मानते हुए शुल्क माफी हेतु प्रार्थना पत्र लिखिए।
सेवा में,
प्रधानाचार्य,
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, मोखमपुरा, जयपुर
विषय: शुल्क माफी हेतु प्रार्थना पत्र
महोदय,
मैं नेहा, आपके विद्यालय की कक्षा 10वीं की छात्रा हूँ। मेरे पिता की आर्थिक स्थिति कमजोर है, जिसके कारण मैं विद्यालय का शुल्क अदा करने में असमर्थ हूँ। अतः आपसे निवेदन है कि मेरी शुल्क माफी की कृपा करें, ताकि मैं अपनी पढ़ाई जारी रख सकूँ।
धन्यवाद।
आपकी आज्ञाकारी शिष्या,
नेहा
कक्षा 10वीं, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, मोखमपुरा, जयपुर
भाग -ग
9) "राम पढ़ता है।" रेखांकित पद में क्रिया बताते हुए उसकी परिभाषा लिखिए। [1+1=2]
उत्तर: रेखांकित पद "पढ़ता है" क्रिया है।
परिभाषा: क्रिया वह शब्द है जो किसी कार्य के होने या करने का बोध कराता है। जैसे: पढ़ना, खाना, दौड़ना आदि।
10) "रावण को मारा था।" वाक्य में कारक एवं काल बताइए। [2+1=3]
उत्तर:
- कारक: "को" कर्म कारक का चिह्न है। (रावण को – कर्म कारक)
- काल: "मारा था" भूतकाल (पूर्ण भूतकाल) है।
11) निम्नलिखित शब्दों का समास विग्रह कर समास का नाम लिखिए। [1+1=2]
(क) माता-पिता
- समास विग्रह: माता और पिता
- समास का नाम: द्वंद्व समास
(ख) (शब्द स्पष्ट नहीं है, संभावित: "राजपुत्र" या अन्य)
कृपया स्पष्ट शब्द प्रदान करें।
12) निम्नलिखित वाक्यों के शुद्ध रूप लिखिए। [1+1=2]
(आ) अशुद्ध: पक्षी पेड़ में बैठे हैं।
शुद्ध रूप: पक्षी पेड़ पर बैठे हैं।
(ब) अशुद्ध: बच्चे को काटकर फल दो।
शुद्ध रूप: बच्चे को काटकर फल दो। (यह वाक्य शुद्ध है, या यदि अर्थ "बच्चे के लिए फल काटकर दो" हो तो: बच्चे के लिए फल काटकर दो।)
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3) निम्नलिखित मुहावरों के अर्थ लिखिए। [1+1=2]
अ) आँख का तारा होना
अर्थ: बहुत प्यारा होना, किसी का अत्यधिक प्रिय या लाड़ला होना।
ब) पेट में चूहे कूदना
अर्थ: बहुत अधिक भूख लगना, भूख के कारण पेट में गुड़गुड़ाहट होना।
4) निम्नलिखित लोकोक्ति का अर्थ लिखिए। [1]
एक पंथ दो काज
अर्थ: एक ही काम या यात्रा से दो उद्देश्यों की पूर्ति होना, एक साथ दो काम सिद्ध होना।
5) निम्नलिखित पद्मांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए। [6]
पद्मांश:
माँ ने कहा पानी में झाँककर
अपने चेहरे पर मत रीझना
आग रोटियाँ dar के लिए है
जलने के लिए नहीं |
वस्त्र और आभूषण शाब्दिक wai cht तरह
बंधन है स्त्री जीवन है
माँ ने कहा लड़की होना
पर लड़की-जैसी दिखाई मत देना |
प्रसंग: प्रस्तुत पद्मांश हिंदी कविता से लिया गया है, जिसमें माँ अपनी बेटी को जीवन के यथार्थ और स्त्री-स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाती है। यह एक माँ का संदेश है जो बेटी को समाज की बंदिशों से ऊपर उठकर आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की प्रेरणा देती है।
व्याख्या: माँ अपनी बेटी से कहती है कि पानी में अपना चेहरा देखकर मत मोहित होना, क्योंकि सुंदरता क्षणिक है। आग रोटियाँ पकाने के लिए है, न कि जलने के लिए—यानी स्त्री का जीवन केवल घरेलू कामों में नहीं बल्कि अपने अस्तित्व को बचाने में है। वस्त्र और आभूषण शब्दों की तरह बंधन हैं, जो स्त्री के जीवन को सीमित करते हैं। माँ का कहना है कि तुम लड़की हो, लेकिन लड़की-जैसी दिखाई मत देना—अर्थात समाज की रूढ़ियों में बंधकर मत रहो, बल्कि अपनी पहचान खुद बनाओ। यह पद्मांश स्त्री-सशक्तिकरण और आत्म-सम्मान का संदेश देता है।
अथवा
पद्मांश:
कानपूर के नाना की, मुँहबोली बहन 'छबीली' थी,
लक्ष्मीबाई नाम, faa की वह संतान अकेली थी,
नाना के संग पढ़ती थी बह, नाना के संग खेली थी,
बरछी, ढाल, कृपाण कटारी उसकी यही सहेली थी
प्रसंग: प्रस्तुत पद्मांश झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई के बाल्यकाल का वर्णन करता है, जो उनके साहस और शौर्य की नींव को दर्शाता है।
व्याख्या: कवि कहता है कि कानपुर के नाना (पेशवा बाजीराव द्वितीय) की मुँहबोली बहन 'छबीली' थी, जिसका नाम लक्ष्मीबाई था और वह अपने पिता की इकलौती संतान थी। वह नाना के साथ पढ़ती और खेलती थी। उसकी सहेलियाँ बरछी, ढाल, कृपाण और कटारी जैसे हथियार थे—यह दर्शाता है कि बचपन से ही वह युद्ध कला में निपुण थी और उसका लालन-पालन वीरता के वातावरण में हुआ। यह पद्मांश लक्ष्मीबाई के बाल्यकाल की वीरता और स्वतंत्रता को उजागर करता है।
6. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लिखिए :
पद्यांश: चिन्ता को लोग चिता कहते हैं। जिसे किसी प्रचंड चिन्ता ने पकड़ लिया है, उस बेचारे की जिंदगी खराब हो जाती है, किन्तु ईर्ष्या शायद फिर चिन्ता से भी बदतर चीज है क्योंकि वह मनुष्य के मौलिक गुणों को ही कुंठित बना डालती है।
सन्दर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक से ली गई हैं। इनमें चिन्ता और ईर्ष्या की तुलना करते हुए ईर्ष्या को अधिक हानिकारक बताया गया है।
प्रसंग: लेखक ने यहाँ चिन्ता और ईर्ष्या के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला है। चिन्ता मनुष्य के जीवन को नष्ट कर देती है, लेकिन ईर्ष्या उसके मूल गुणों को ही समाप्त कर देती है।
व्याख्या: लेखक कहता है कि लोग चिन्ता को चिता कहते हैं, क्योंकि चिन्ता भी चिता की तरह मनुष्य को जला डालती है। जिस व्यक्ति को किसी बड़ी चिन्ता ने घेर लिया हो, उसका जीवन दुखी हो जाता है। लेकिन ईर्ष्या चिन्ता से भी अधिक खतरनाक है, क्योंकि चिन्ता केवल मन को परेशान करती है, जबकि ईर्ष्या मनुष्य के अच्छे गुणों को नष्ट कर देती है। ईर्ष्या व्यक्ति को दूसरों की सफलता देखकर जलने लगता है और उसके मन में कड़वाहट भर जाती है।
अथवा
पद्यांश: वे इतने शान्त स्वभाव के थे कि वे किसी विवाद में उलझे नहीं। स्तुति को उन्होंने समभाव से ग्रहण कर लिया था। उनके शिष्य हिन्दू और मुसलमान दोनों थे। उन्होंने अपने आचरण और उपदेश द्वारा पूरी मानवता के लिए समाज पथ का आविष्कार किया। उन्होंने अपने विरोधियों से बहस कम की और समर्थकों को सलाह ज्यादा दी।
सन्दर्भ: प्रस्तुत पंक्तियाँ हमारी पाठ्यपुस्तक से ली गई हैं। इनमें एक महान व्यक्तित्व के शांत स्वभाव और समदर्शी दृष्टिकोण का वर्णन है।
प्रसंग: यहाँ किसी महापुरुष के जीवन-चरित्र का वर्णन किया गया है, जो शांति, सहिष्णुता और मानवता के पुजारी थे।
व्याख्या: वे इतने शांत स्वभाव के थे कि कभी किसी विवाद में नहीं पड़ते थे। वे प्रशंसा और निंदा दोनों को समान भाव से ग्रहण करते थे। उनके शिष्यों में हिन्दू और मुसलमान दोनों धर्मों के लोग थे। उन्होंने अपने आचरण और उपदेशों से पूरी मानवता के लिए एक नया मार्ग प्रशस्त किया। वे विरोधियों से बहस नहीं करते थे, बल्कि अपने समर्थकों को अधिक सलाह देते थे, जिससे समाज में प्रेम और सद्भाव बना रहे।
7. "लक्ष्मण-परशुराम संवाद" का कथासार अपने शब्दों में लिखिए।
राम-लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुए संवाद का सारांश यह है कि जब परशुराम जी शिव-धनुष भंग होने पर क्रोधित होकर आए, तो लक्ष्मण ने उन्हें विनोदपूर्ण ढंग से उत्तर दिया। लक्ष्मण ने परशुराम के क्रोध को शांत करते हुए कहा कि धनुष तो टूट गया, अब नया धनुष ले आइए। परशुराम ने अपने बल और तप का घमंड दिखाया, लेकिन लक्ष्मण ने उन्हें समझाया कि सच्चा बल क्षमा में है। अंत में राम ने विनम्रता से परशुराम को शांत किया। इस संवाद में लक्ष्मण की वीरता, बुद्धिमत्ता और राम की विनम्रता का सुंदर चित्रण है।
अथवा
"प्रभो" ऋतिता का सार अपने शब्दों में लिखिए।
"प्रभो" ऋतिता का सार यह है कि कवि ने ईश्वर से प्रार्थना की है कि वह हमें सद्बुद्धि दे, हमारे मन से अहंकार और द्वेष को दूर करे। कवि चाहता है कि हम सभी प्राणियों से प्रेम करें और ईश्वर की कृपा से हमारा जीवन सफल हो। यह कविता मानवता, प्रेम और ईश्वर-भक्ति का संदेश देती है।
8. संत पीपा की जीवन-यात्रा का वर्णन कीजिए।
संत पीपा एक राजा थे जो बाद में संत बन गए। उनका जन्म राजस्थान के गागरोण में हुआ था। वे शुरू में अहंकारी थे, लेकिन संत रामानंद के संपर्क में आने के बाद उनका जीवन बदल गया। उन्होंने राज-पाठ त्याग दिया और भक्ति मार्ग अपनाया। वे सभी जाति-धर्म के लोगों से प्रेम करते थे। उन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों का विरोध किया और एक ईश्वर की उपासना पर बल दिया। उनकी वाणी में प्रेम, समानता और भक्ति का संदेश है।
अथवा
हामिद ने अन्य खिलौनों से चिमटे को श्रेष्ठ बताने के लिए क्या तर्क दिए?
हामिद ने चिमटे को श्रेष्ठ बताने के लिए निम्नलिखित तर्क दिए:
- चिमटा उपयोगी वस्तु है, जबकि खिलौने केवल मनोरंजन के लिए होते हैं।
- चिमटा रोटी सेंकने, आग सुलगाने आदि काम आता है, जिससे दादी को मदद मिलेगी।
- खिलौने जल्दी टूट जाते हैं, लेकिन चिमटा लंबे समय तक चलता है।
- चिमटा खरीदने से दादी की सुविधा बढ़ेगी और वे खुश होंगी।
प्रश्न संख्या (9 से 24 तक के प्रश्नों के उत्तर 30 से 40 शब्दों में दीजिए।)
9. राधा श्री कृष्ण को चोर क्यों कह रही है?
राधा श्री कृष्ण को चोर इसलिए कह रही हैं क्योंकि कृष्ण ने उनका मन चुरा लिया है। कृष्ण की मुरली और रूप-सौंदर्य ने राधा को मोहित कर दिया है। राधा कहती हैं कि कृष्ण ने बिना पूछे उनका हृदय चुरा लिया, इसलिए वे चोर हैं। यह प्रेम और छेड़छाड़ का एक सुंदर वर्णन है।
20. कवि कृपाराम खिड़िया के अनुसार किस नगर में नहीं रहना चाहिए?
कवि कृपाराम खिड़िया के अनुसार उस नगर में नहीं रहना चाहिए जहाँ सज्जनों का आदर न हो, जहाँ धर्म का पालन न होता हो, और जहाँ के लोग स्वार्थी हों। ऐसे नगर में रहना व्यर्थ है क्योंकि वहाँ मानवता और सदाचार का अभाव होता है।
21. वर्षा ऋतु के आगमन से प्रकृति में कौन-कौन से बदलाव आए हैं?
वर्षा ऋतु के आगमन से प्रकृति में निम्नलिखित बदलाव आते हैं:
- चारों ओर हरियाली छा जाती है।
- नदी-नाले और तालाब पानी से भर जाते हैं।
- मोर नाचने लगते हैं और मेंढक टर्राने लगते हैं।
- आसमान में काले बादल छा जाते हैं और ठंडी हवा चलने लगती है।
- पेड़-पौधों में नई कोपलें आ जाती हैं और वातावरण सुहावना हो जाता है।
प्रश्न संख्या 22 से 24 तक के उत्तर दीजिए
22) संसार में नाम स्थिर रखने के लिए भारतेंदु के मन में क्या-क्या विचार आए? [2]
भारतेंदु हरिश्चंद्र के मन में संसार में नाम स्थिर रखने के लिए यह विचार आए कि वे सदा सत्य बोलें, दूसरों की भलाई करें, देश और समाज की सेवा करें, तथा अपने कर्मों से ऐसा यश अर्जित करें जो अमर रहे। वे चाहते थे कि उनका नाम अच्छे कार्यों के कारण याद किया जाए।
23) कन्याकुमारी में किन तीन सागरों का संगम होता है? [2]
कन्याकुमारी में तीन सागरों – अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर का संगम होता है।
24) सागरमल गोपा द्वारा रचित पुस्तकें कौन-कौन सी हैं? [2]
सागरमल गोपा द्वारा रचित प्रमुख पुस्तकें हैं: ‘नैतिक शिक्षा’, ‘जीवन की सीख’ और ‘स्वास्थ्य विज्ञान’। (नोट: यह उत्तर पाठ्यक्रम पर निर्भर करता है; यदि भिन्न हों तो संबंधित पुस्तकों का उल्लेख करें।)
प्रश्न संख्या 25 से 28 तक के उत्तर एक पंक्ति में दीजिए
25) शिवधनुष टूटने पर गुस्सा कौन हुए? [1]
शिवधनुष टूटने पर परशुराम गुस्सा हुए।
26) ‘ऋतुराज’ किस ऋतु को कहा गया है? [1]
‘ऋतुराज’ वसंत ऋतु को कहा गया है।
27) संत दादू का जन्म कहाँ हुआ था? [1]
संत दादू का जन्म अहमदाबाद (गुजरात) में हुआ था।
28) संत पीपा के गुरु का क्या नाम था? [1]
संत पीपा के गुरु का नाम रामानंद था।
प्रश्न संख्या 29 से 30 तक के उत्तर दीजिए
29) निम्नलिखित रचनाकारों का परिचय दीजिए: [4]
(अ) तुलसीदास
तुलसीदास (1532-1623) हिंदी साहित्य के महान कवि थे। इनका जन्म राजापुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। ये रामभक्ति शाखा के प्रमुख कवि हैं। इनकी प्रसिद्ध रचना ‘रामचरितमानस’ है। अन्य रचनाओं में ‘विनय पत्रिका’, ‘दोहावली’ आदि शामिल हैं। इन्होंने अवधी और ब्रजभाषा में रचनाएँ कीं।
(ब) भारतेंदु हरिश्चंद्र
भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850-1885) हिंदी साहित्य के ‘भारतेंदु युग’ के प्रवर्तक थे। इनका जन्म वाराणसी में हुआ। ये निबंध, नाटक, कविता और पत्रकारिता में सक्रिय रहे। प्रमुख रचनाएँ: ‘अंधेर नगरी’ (नाटक), ‘भारत दुर्दशा’ (नाटक), ‘प्रेम माधुरी’ (कविता) आदि। इन्होंने हिंदी पत्रिका ‘कविवचन सुधा’ का प्रकाशन किया।
30) सड़क सुरक्षा की दृष्टि से वाहन चालक के कर्त्तव्य बताइए। [4]
सड़क सुरक्षा की दृष्टि से वाहन चालक के निम्नलिखित कर्त्तव्य हैं:
- हमेशा हेलमेट (दोपहिया) या सीट बेल्ट (चारपहिया) पहनें।
- यातायात नियमों का पालन करें, जैसे लाल बत्ती पर रुकना और सिग्नल का पालन करना।
- शराब या नशीली दवाओं के सेवन के बाद वाहन न चलाएँ।
- निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाएँ और तेज गति से बचें।
- मोबाइल फोन का उपयोग न करें और ध्यान भटकाने वाली गतिविधियों से बचें।
- वाहन की नियमित जाँच (ब्रेक, टायर, लाइट) करवाएँ।
- पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों को प्राथमिकता दें।
- सड़क पर सुरक्षित दूरी बनाए रखें और अचानक ब्रेक लगाने से बचें।