RBSE Class 10th 2020 -S-01-2020 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 10th
Exam year 2020
Subject -S-01-2020
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 10th -S-01-2020 2020 solved Previous Year Question Papers

माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2020

समय : 3¼ घण्टे    पूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।

No. of Questions — 30    No. of Printed Pages — 8

S-01-Hindi (Supp.)


5-0-1-प्रा कं (Supp.)   [ Turn over ]

प्रश्न—

निम्नांकित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

साविद्या या विमुक्तये' अर्थात्‌ विद्या अथवा शिक्षा वही है जो हमें मुक्ति दिलाती है। यह मुक्ति अज्ञान से, अंधकार से तथा अकर्मण्यता से है। बालक जन्म से लेकर जीवन-पर्यन्त कुछ न कुछ सीखता है किन्तु औपचारिक शिक्षा प्राप्ति का उद्देश्य उसके सामने स्पष्ट होना आवश्यक है। आज हमारी शिक्षा-नीति केवल जीवन-निर्वाह की शिक्षा-व्यवस्था ही दे रही है जबकि होना यह चाहिए कि शिक्षा जीवन-निर्वाह की अपेक्षा जीवन निर्माण का उद्देश्य पूर्ण करे। शिक्षा किसी भी राष्ट्र का मेरुदण्ड कही जा सकती है जो संस्कारवान, स्वस्थ, श्रमनिष्ठ, संस्कृतनिष्ठ, साहसी तथा कुशल नागरिकों का निर्माण कर सके। इसलिए शिक्षा एक तरफ व्यक्ति निर्माण का कार्य करती है तो दूसरी तरफ राष्ट्र-निर्माण का भी कार्य अप्रत्यक्ष रूप से करती है।

  1. उपर्युक्त गद्यांश का शीर्षक लिखिए।

    उत्तर: शिक्षा का उद्देश्य / शिक्षा : मुक्ति का मार्ग / साविद्या या विमुक्तये (कोई भी उपयुक्त शीर्षक)

  2. शिक्षा हमें किससे मुक्ति दिलाती है?

    उत्तर: शिक्षा हमें अज्ञान, अंधकार और अकर्मण्यता से मुक्ति दिलाती है।

  3. शिक्षा किसी भी राष्ट्र का मेरुदण्ड कही जा सकती है। क्यों?

    उत्तर: शिक्षा राष्ट्र का मेरुदण्ड इसलिए कही जा सकती है क्योंकि यह संस्कारवान, स्वस्थ, श्रमनिष्ठ, संस्कृतनिष्ठ, साहसी तथा कुशल नागरिकों का निर्माण करती है। यह व्यक्ति निर्माण के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्र-निर्माण का भी कार्य करती है।


निम्नलिखित पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

लुटा दूँ राज मैं अपना दलित के प्राण की खातिर |
झुका दूँ ताज मैं अपना व्यथित के प्राण की खातिर |
लगा दूँ पार लहरों से छुड़ा के नाव निर्बल की |
भले भिड़ना पड़े तूफान से इस आन की खातिर |
बड़प्पन आ नहीं जकड़े निहारे जब मुझे कोई |
बढ़ा दूँ बाँह मैं अपनी विहँस पहचान की खातिर |

मिलाऊँ मुस्कराकर दिल, मिलाए आँख जो मुझसे |
करूँ TACT न्योछावर तनिक अहसान की खातिर ||
लगा दूँ जान अपनी और की बिगड़ी बनाने में |
वही इंसान है बस, जो मरे इंसान की खातिर ||

(पद्यांश पर आधारित प्रश्नों के उत्तर यहाँ दिए जाएँगे।)

4. उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

उत्तर: काव्यांश का उचित शीर्षक 'त्याग और प्रेम' या 'प्रेम की महिमा' हो सकता है। (नोट: यह काव्यांश के भाव पर निर्भर करता है।)

5. कवि किसके लिए राज्य लुटा देने की बात कहता है?

उत्तर: कवि प्रियतम या प्रेमी के लिए राज्य लुटा देने की बात कहता है।

6. उपर्युक्त काव्यांश का मूल भाव लिखिए।

उत्तर: काव्यांश का मूल भाव प्रेम की सर्वोपरिता और त्याग की भावना है। कवि कहता है कि प्रेम के आगे सांसारिक वैभव और राज्य भी तुच्छ हैं।


खण्ड-2

7. दिए गए बिंदुओं के आधार पर निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर लगभग 300 शब्दों का सारगर्भित निबंध लिखिए : (8 अंक)

(क) मेरी अविस्मरणीय यात्रा
  1. यात्रा का जीवन में महत्त्व।
  2. यात्रा के समय ध्यान रखने योग्य बातें।
  3. यात्रा का स्थान व घटित घटनाएँ।
  4. उपसंहार।
(ख) स्वच्छता-अभियान
  1. प्रस्तावना : स्वच्छता अभियान का सामान्य परिचय।
  2. स्वच्छता का महत्त्व।
  3. सरकार एवं आम जन द्वारा किए गए प्रयास।
  4. उपसंहार।
(ग) आधुनिक जीवन में इंटरनेट
  1. प्रस्तावना : इंटरनेट का सामान्य परिचय।
  2. इंटरनेट का दैनिक जीवन में उपयोग।
  3. इंटरनेट के विविध क्षेत्र।
  4. उपसंहार।

खण्ड-3

प्रश्न 9. क्रिया की परिभाषा देते हुए काल के आधार पर क्रिया के भेद बताइए।

क्रिया की परिभाषा: वह शब्द जिससे किसी कार्य के करने या होने का पता चले, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे- पढ़ना, खाना, जाना आदि।

काल के आधार पर क्रिया के तीन भेद होते हैं:

  1. वर्तमान काल: जिस क्रिया से कार्य का वर्तमान समय में होना पता चले। जैसे- वह पढ़ता है।
  2. भूतकाल: जिस क्रिया से कार्य के बीते हुए समय में होने का पता चले। जैसे- वह पढ़ता था।
  3. भविष्यत काल: जिस क्रिया से कार्य के आने वाले समय में होने का पता चले। जैसे- वह पढ़ेगा।

प्रश्न 10. 'तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना की।' उक्त वाक्य में निहित कारक, काल और वाच्य लिखिए।

कारक: 'ने' चिह्न के कारण यह कर्ता कारक है।

काल: 'की' क्रिया से भूतकाल का बोध होता है।

वाच्य: यह कर्तृवाच्य है, क्योंकि कर्ता (तुलसीदास) प्रधान है।

प्रश्न 11. तत्पुरुष समास की उदाहरण सहित परिभाषा लिखिए।

परिभाषा: जिस समास में उत्तरपद प्रधान होता है और पूर्वपद तथा उत्तरपद के बीच विभक्ति का लोप होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।

उदाहरण: राजपुत्र = राजा का पुत्र (संबंध कारक)

प्रश्न 12. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए:

(क) अजय को खाना दो। → अजय को खाना दो। (यह वाक्य पहले से शुद्ध है।)

(ख) बचे से गुस्सा मत करो। → बच्चे से गुस्सा मत करो।

प्रश्न 13. निम्नलिखित मुहावरों का अर्थ लिखिए:

(क) आँचल पसारना – भीख माँगना या याचना करना।

(ख) बालू से तेल निकालना – असंभव कार्य करना या बहुत कठिन काम करना।

प्रश्न 14. 'खग ही जाने खग की भाषा' लोकोक्ति का अर्थ लिखिए।

अर्थ: अपनी बात या दशा को वही व्यक्ति समझ सकता है जो उस अवस्था से गुज़रा हो। अर्थात् दुखी की पीड़ा को दुखी ही समझ सकता है।

खण्ड- 4

5. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

पद्यांश:
हुई बीरता की वैभव के साथ सगाई झाँसी में,
ब्याह हुआ रानी बन आयी लक्ष्मीबाई झाँसी में,
राजमहल में बजी बधाई खुशियाँ छायी झाँसी में,
सुभट बुन्देलों की विरुदावलि-सी वह आई झाँसी में,
चित्रा ने अर्जुन को पाया शिव से मिली भवानी थी।

सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कवि श्री मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित कविता 'झाँसी की रानी' से लिया गया है। इसमें रानी लक्ष्मीबाई के झाँसी आगमन और उनके वैभवपूर्ण स्वागत का वर्णन है।

प्रसंग: कवि ने रानी लक्ष्मीबाई के झाँसी में आने पर हुई खुशियों और उनके शौर्य का चित्रण किया है। वीरता और वैभव का मिलन एक सगाई के रूप में दर्शाया गया है।

व्याख्या: कवि कहते हैं कि झाँसी में वीरता का वैभव के साथ सगाई हुई, अर्थात् रानी लक्ष्मीबाई के रूप में वीरता और वैभव का अद्भुत संगम हुआ। वे रानी बनकर झाँसी आईं, जहाँ राजमहल में बधाई बजी और चारों ओर खुशियाँ छा गईं। उनका आगमन बुन्देलों के वीरों की विरुदावली (प्रशस्ति) के समान था। कवि ने उनकी तुलना चित्रा (द्रौपदी) से की है, जिसने अर्जुन को पाया, और शिव से मिली भवानी (पार्वती) से, जो शक्ति का प्रतीक हैं। यह रानी के शौर्य और दिव्यता को दर्शाता है।

अथवा

पद्यांश:
माँ ने कहा पानी में झाँककर
अपने चेहरे पर मत रीझना
आग रोटियाँ सेंकने के लिए है
जलने के लिए नहीं |
आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह
बंधन हैं अपने ही
माँ ने कहा लड़की होना
पर लड़की-जैसा दिखाई मत देना |

सन्दर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हिंदी की प्रसिद्ध कवयित्री श्रीमती मृदुला गर्ग द्वारा रचित कविता से लिया गया है। इसमें माँ द्वारा बेटी को दी गई सीखों के माध्यम से स्त्री-जीवन की वास्तविकताओं को उजागर किया गया है।

प्रसंग: कवयित्री ने माँ के माध्यम से बेटी को सशक्त और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है, साथ ही पारंपरिक बंधनों से मुक्त रहने का संदेश दिया है।

व्याख्या: माँ बेटी से कहती है कि पानी में अपना चेहरा देखकर मत मोहित होना, क्योंकि बाहरी सौंदर्य क्षणिक है। आग का उपयोग रोटियाँ सेंकने के लिए है, न कि खुद को जलाने के लिए—यह आत्म-सम्मान और उपयोगिता का संदेश है। आभूषण शाब्दिक भ्रमों की तरह बंधन हैं, जो स्त्री को सीमित करते हैं। माँ कहती है कि लड़की होना स्वाभाविक है, पर लड़की-जैसा दिखाई देना (अर्थात् कमजोर या परंपराओं में बंधा) आवश्यक नहीं है। यह स्त्री-सशक्तिकरण और आत्म-स्वतंत्रता का संदेश है।

6. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :

गद्यांश:
पढ़ने-लिखने में स्वयं कोई बात ऐसी नहीं जिससे अनर्थ हो सके। अनर्थ का बीज उसमें हरगिज नहीं। अनर्थ पुरुषों से भी होते हैं। अपढ़ों और पढ़े-लिखों, दोनों से। अनर्थ, दुराचार और पापाचार के कारण और ही होते हैं और वे व्यक्ति-विशेष का चाल-चलन देखकर जाने भी जा सकते हैं। अतएव स्त्रियों को अवश्य पढ़ाना चाहिए। जो लोग यह कहते हैं कि पुराने जमाने में यहाँ स्त्रियाँ न पढ़ती थीं अथवा उन्हें पढ़ने की मुमानियत थीं, वे या तो इतिहास से अभिज्ञता नहीं रखते या जान-बूझकर लोगों को धोखा देते हैं।

सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हिंदी साहित्य के महान निबंधकार श्री महावीर प्रसाद द्विवेदी के निबंध 'स्त्री-शिक्षा' से लिया गया है। इसमें स्त्री-शिक्षा के महत्व और उससे जुड़ी भ्रांतियों पर प्रकाश डाला गया है।

प्रसंग: लेखक ने स्त्री-शिक्षा के विरोधियों के तर्कों का खंडन करते हुए यह सिद्ध किया है कि पढ़ने-लिखने से कोई अनर्थ नहीं होता, बल्कि यह समाज के लिए लाभदायक है।

व्याख्या: लेखक कहते हैं कि पढ़ने-लिखने में स्वयं कोई ऐसी बात नहीं है जिससे अनर्थ (बुराई) हो सके। अनर्थ का बीज शिक्षा में बिल्कुल नहीं है। अनर्थ तो पुरुषों से भी होते हैं—चाहे वे अपढ़ हों या पढ़े-लिखे। अनर्थ का कारण दुराचार और पापाचार है, जो व्यक्ति के चाल-चलन पर निर्भर करता है, न कि शिक्षा पर। इसलिए स्त्रियों को अवश्य पढ़ाना चाहिए। जो लोग कहते हैं कि पुराने जमाने में स्त्रियाँ नहीं पढ़ती थीं या उन्हें पढ़ने से मना किया जाता था, वे या तो इतिहास नहीं जानते या जानबूझकर लोगों को धोखा देते हैं। लेखक का उद्देश्य स्त्री-शिक्षा के प्रति समाज में व्याप्त अज्ञानता और पाखंड को दूर करना है।

अथवा

गद्यांश:
मध्यकालीन भक्ति साहित्य में महान समाज सुधारक संत पीपा ने अपनी वाणी और विचारों से जहाँ एक ओर बाह्याडम्बरों का विरोध, रूढ़ि-परम्पराओं का विरोध, दुर्व्यसनों का विरोध इत्यादि किया, वहीं दूसरी ओर निर्गुण निराकार परम ब्रह्म की भक्ति कर संत काव्य धारा में अपनी उपस्थिति से हिंदी साहित्य के पूर्व मध्यकाल को गौरवान्बित किया। ये एक ऐसे संत कवि थे जिन्होंने भक्ति और समाज सुधार का अद्भुत रूप सामने रखा है। कबीर की परम्परा का अनुसरण करते हुए इन्होंने कबीर की मान्यताओं को भक्ति-प्रतिष्ठा के लिए सार्थक बताया है। अपनी वाणी में संत कबीर को ये झूठी सांसारिकता और कलियुग की अंधविश्वासी रीतियों के खण्डन के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश हिंदी साहित्य के इतिहास से संबंधित है, जिसमें मध्यकालीन भक्ति साहित्य के महान संत कवि पीपा के योगदान का वर्णन किया गया है।

प्रसंग: लेखक ने संत पीपा के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए बताया है कि उन्होंने भक्ति और समाज सुधार को एक साथ आगे बढ़ाया।

व्याख्या: लेखक कहते हैं कि मध्यकालीन भक्ति साहित्य में संत पीपा एक महान समाज सुधारक थे। उन्होंने अपनी वाणी और विचारों से बाह्याडम्बरों (दिखावटी धार्मिक क्रियाओं), रूढ़ि-परम्पराओं और दुर्व्यसनों (बुरी आदतों) का विरोध किया। साथ ही, उन्होंने निर्गुण निराकार परम ब्रह्म (बिना गुण और आकार के ईश्वर) की भक्ति करके संत काव्य धारा को समृद्ध किया और हिंदी साहित्य के पूर्व मध्यकाल को गौरवान्वित किया। वे एक ऐसे संत कवि थे जिन्होंने भक्ति और समाज सुधार का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। उन्होंने कबीर की परम्परा का अनुसरण करते हुए कबीर की मान्यताओं को भक्ति की प्रतिष्ठा के लिए सार्थक बताया। अपनी वाणी में उन्होंने संत कबीर को झूठी सांसारिकता और कलियुग की अंधविश्वासी रीतियों के खण्डन के रूप में प्रस्तुत किया, जिससे समाज में जागरूकता आई।

7. “मातृ-वंदना” कविता में निराला का राष्ट्र प्रेम मुखरित हुआ है।” कथन को स्पष्ट करते हुए 'मातृ-वंदना' कविता की मूल संवेदना लिखिए। (उत्तर सीमा 20 शब्द)

निराला की 'मातृ-वंदना' में मातृभूमि के प्रति गहरा प्रेम और समर्पण भाव मुखरित है। कवि भारत माता की महिमा का गान करते हुए उनके प्रति अपनी श्रद्धा और आस्था व्यक्त करता है। मूल संवेदना राष्ट्र प्रेम और मातृभूमि के प्रति अनन्य भक्ति है।

अथवा

“वर्षा ऋतु का आगमन परिवर्तन का संकेत है।” नागार्जुन रचित “कल और आज” कविता के आधार पर उक्त कथन को स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 20 शब्द)

नागार्जुन की 'कल और आज' कविता में वर्षा ऋतु का आगमन सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन का प्रतीक है। यह पुरानी व्यवस्थाओं के अंत और नई चेतना के जागरण का संकेत देता है, जो समाज में बदलाव लाती है।

8. सागरमल गोपा को बंदीगृह में दी गई अमानवीय यातनाओं का विस्तारपूर्वक वर्णन कीजिए। (उत्तर सीमा 20 शब्द)

सागरमल गोपा को बंदीगृह में भूखा-प्यासा रखा गया, उन्हें बेड़ियों से जकड़ा गया और शारीरिक प्रताड़ना दी गई। उन्हें अंधेरी कोठरी में बंद कर रखा गया और मानसिक यातनाएँ दी गईं, जो अमानवीय थीं।

अथवा

“ईर्ष्या, तू न गई मेरे मन से” पाठ के आधार पर ईर्ष्यालु मनुष्य के चरित्र की कमजोरियों को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा 20 शब्द)

ईर्ष्यालु मनुष्य दूसरों की सफलता से जलता है, उनकी बुराई करता है और स्वयं को दुखी रखता है। उदाहरण: वह किसी के उन्नति पर खुश नहीं होता, बल्कि उसे नीचा दिखाने का प्रयास करता है। यह उसकी मानसिक कमजोरी है।

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर 40 से 50 शब्दों में दीजिए:

20. “मधुकर स्याम हमारे चोर |” गोपियाँ श्रीकृष्ण को चोर क्यों बता रही हैं?

गोपियाँ श्रीकृष्ण को चोर इसलिए बता रही हैं क्योंकि उन्होंने उनके मन और हृदय को चुरा लिया है। श्रीकृष्ण ने गोपियों के प्रेम और भक्ति को अपने वश में कर लिया है, इसलिए वे उन्हें 'मधुकर' (भँवरा) और 'चोर' कहकर अपने प्रेम का वर्णन करती हैं।

21. सेनापति द्वारा रचित कविता “ऋतु वर्णन” के आधार पर बसंत ऋतु की विशेषताएँ लिखिए।

सेनापति की 'ऋतु वर्णन' कविता में बसंत ऋतु की विशेषताएँ हैं: प्रकृति का खिलना, पेड़ों पर नई कोपलें आना, फूलों का बिखरना, कोयल का कूकना, और वातावरण में सुगंध का फैलना। यह ऋतु प्रेम और उल्लास का प्रतीक है।

22. देव द्वारा रचित पद के आधार पर बताइए कि नायिका कौन सा स्वप्न देख रही थी और उसका स्वप्न कैसे टूटा?

देव के पद में नायिका स्वप्न देख रही थी कि उसका प्रियतम उससे मिलने आया है और वे प्रेमालाप कर रहे हैं। उसका स्वप्न तब टूटा जब अचानक कोई आवाज या हलचल हुई, जिससे वह जाग गई और उसे अपने प्रियतम का वियोग महसूस हुआ।

23. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने 'एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न' पाठ में पण्डित शीलदावानल की क्या विशेषता बताई है?

भारतेन्दु हरिश्चन्द्र ने पण्डित शीलदावानल को एक विद्वान, तर्कशील और समाज सुधारक के रूप में चित्रित किया है। वे रूढ़ियों के विरोधी थे और नए विचारों को अपनाने में विश्वास रखते थे। उनकी विशेषता थी कि वे सत्य की खोज में निर्भय थे।

24. “अमीना का मन हामिद के प्रति गद्गद हो गया”, क्यों?

अमीना का मन हामिद के प्रति गद्गद हो गया क्योंकि हामिद ने अपनी छोटी सी बचत से उसके लिए चिमटा खरीदा था। यह उसकी निस्वार्थ प्रेम और त्याग का प्रतीक था, जिससे अमीना को उसकी सच्ची भावना का एहसास हुआ और वह भावुक हो गई।

25. “आखिरी चट्टान” पाठ में तट की रेत ने लेखक को आकर्षित क्यों किया?

“आखिरी चट्टान” पाठ में तट की रेत ने लेखक को इसलिए आकर्षित किया क्योंकि वह बहुत मुलायम, सुनहरी और चमकीली थी। उस पर पैर रखने से सुखद अनुभूति होती थी और वह समुद्र की लहरों के संग एक अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करती थी, जो लेखक को मोहित कर गया।

७-0]-प्रातं (Supp.)

25. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक पंक्ति में दीजिए :

  1. तुलसीदासजी कौन सी दो भाषाओं के पण्डित माने गए हैं ?

    तुलसीदासजी संस्कृत और अवधी भाषाओं के पण्डित माने गए हैं।
  2. “कृपाराम खिड़िया' ने रसना का क्या गुण बताया है ?

    कृपाराम खिड़िया ने रसना (जीभ) का गुण 'रस ग्रहण करना' बताया है।
  3. संत दादू दयाल के अनुसार कौन सा व्यक्ति निंदा करता है ?

    संत दादू दयाल के अनुसार वह व्यक्ति निंदा करता है जो दूसरों के दोष देखता है।
  4. लोक संत पीपा के गुरु का नाम लिखिए |

    लोक संत पीपा के गुरु का नाम संत रामानंद है।

26. निम्न रचनाकारों का संक्षिप्त परिचय लिखिए :

  1. जयशंकर प्रसाद

    जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि, नाटककार और कहानीकार थे। इनका जन्म 1889 ई. में वाराणसी में हुआ। प्रमुख रचनाएँ: 'कामायनी' (महाकाव्य), 'चंद्रगुप्त' (नाटक), 'आँसू' (काव्य संग्रह)।
  2. महावीर प्रसाद द्विवेदी

    महावीर प्रसाद द्विवेदी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार, आलोचक और संपादक थे। इनका जन्म 1864 ई. में उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में हुआ। ये 'सरस्वती' पत्रिका के संपादक रहे और हिंदी गद्य को सरल बनाने में योगदान दिया।

27. निम्नांकित यातायात संकेतों का क्या अर्थ है ?

  1. © (लाल घेरे में सफेद पट्टी)

    यह संकेत 'प्रवेश निषेध' या 'नो एंट्री' का है, जिसका अर्थ है कि इस ओर वाहनों का प्रवेश वर्जित है।
  2. 50 (नीले घेरे में सफेद अंक)

    यह संकेत 'गति सीमा' का है, जिसका अर्थ है कि इस मार्ग पर अधिकतम गति 50 किलोमीटर प्रति घंटा है।
  3. @ (लाल त्रिभुज में काला चिह्न)

    यह संकेत 'सावधान' या 'खतरे का संकेत' है, जो आगे आने वाले संभावित खतरे की चेतावनी देता है।

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