RBSE Class 10th 2022 Hindi-S-01-2022 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 10th
Exam year 2022
Subject Hindi-S-01-2022
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-2022 2022 solved Previous Year Question Papers

माध्यमिक परीक्षा, 2022
SECONDARY EXAMINATION, 2022

हिंदी

समय : 2 घण्टे 45 मिनट     पूर्णांक : 80

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
  5. प्रश्न का उत्तर लिखने से पूर्व प्रश्न का क्रमांक अवश्य लिखें।

[ 709 ]
S-01-Hindi

S-01-Hindi     [Turn Over

अपठित गद्यांश

निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

तुलसी का काव्य लोक संस्कृति का अभिन्न अंग बन गया है। उनके नाम के साथ कोई संस्था नहीं जुड़ी है। 'रामचरितमानस' को लोकप्रिय बनाने के लिए कोई संघबद्ध प्रयास नहीं किया गया। अपने आप मिथिला के गाँवों से लेकर मालवा की भूमि तक जनता ने इस ग्रन्थ को अपनाया। करोड़ों हिन्दी भाषियों के लिए धर्म ग्रन्थ, नीति ग्रन्थ, काव्य ग्रन्थ यदि कोई है तो 'रामचरितमानस' है। इसका एक अप्रत्यक्ष सामाजिक फल यह हुआ है कि हिन्दी भाषी जनता को संगठित करने में, उसमें जातीय एकता का भाव उत्पन्न करने में 'रामचरितमानस' ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आश्चर्य की बात है कि जिन जनपदों में गाँवों में तुलसी और सूर की रचनाओं का पाठ शताब्दियों से होता रहा है, उनके कुछ अभिनव नेता और बुद्धिजीवी अपने को हिन्दी भाषी क्षेत्र से अलग मानते हैं।

भक्ति आन्दोलन और तुलसी-काव्य का राष्ट्रीय परिणाम यह है कि उनसे भारतीय जनता की भावात्मक एकता दृढ़ हुई।

  1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक है:

    • अ) विविधता में एकता
    • ब) तुलसी के काव्य की उपयोगिता
    • स) सूरदास के काव्य की उपयोगिता
    • द) जीवन और धर्म

    व्याख्या: गद्यांश में तुलसी के काव्य और 'रामचरितमानस' के महत्व, लोकप्रियता और सामाजिक प्रभाव पर चर्चा की गई है, अतः 'तुलसी के काव्य की उपयोगिता' सबसे उपयुक्त शीर्षक है।

  2. करोड़ों हिन्दी भाषियों के लिए धर्म ग्रन्थ, नीति ग्रन्थ, काव्य ग्रन्थ है:

    • अ) गीता
    • ब) महाभारत
    • स) रामायण
    • द) रामचरितमानस

    व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट कहा गया है कि करोड़ों हिन्दी भाषियों के लिए धर्म, नीति और काव्य ग्रन्थ 'रामचरितमानस' है।

  3. रामचरितमानस की महत्वपूर्ण भूमिका क्या रही:

    • अ) जातीय एकता का भाव उत्पन्न करने में
    • ब) भक्ति की महिमा में डूबने में
    • स) कर्मकाण्डों की स्वीकृति में
    • द) समाज का मनोविज्ञान बदलने में

    व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, 'रामचरितमानस' ने हिन्दी भाषी जनता को संगठित करने और उसमें जातीय एकता का भाव उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  4. गाँवों में तुलसी और सूर की रचनाओं का पाठ होता रहा है:

    • अ) कुछ वर्षों से
    • ब) दशकों से
    • स) शताब्दियों से
    • द) कुछ महीनों से

    व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है कि गाँवों में तुलसी और सूर की रचनाओं का पाठ शताब्दियों से होता रहा है।

  5. भक्ति आन्दोलन और तुलसी काव्य का राष्ट्रीय परिणाम है:

    • अ) भारतीय जनता की भावात्मक एकता दृढ़ हुई
    • ब) जन-जीवन में राम भक्ति का रस घोलने में
    • स) हिन्दी भाषी क्षेत्र का महत्त्व बढ़ाने में
    • द) मत-पंथ, भाव, भाषा की एकता दृढ़ हुई

    व्याख्या: गद्यांश के अंतिम वाक्य के अनुसार, भक्ति आन्दोलन और तुलसी-काव्य का राष्ट्रीय परिणाम यह है कि उनसे भारतीय जनता की भावात्मक एकता दृढ़ हुई।

निम्नलिखित अपठित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए - [5×1=5]

प्रभुजी तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी।
प्रभुजी तुम घन बन हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।
प्रभुजी तुम दीपक हम बाती, जाकी जोति बरै दिन राती।
प्रभुजी तुम मोती हम धागा, जैसे सोनहिं मिलत सोहागा।
प्रभुजी तुम स्वामी हम दासा, ऐसी भक्ति करे तुलसीदासा।

  1. उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक है -

    • अ) दास का समर्पण भाव
    • ब) दीपक का जीवन
    • स) तुलसी का काव्य
    • द) भक्ति आन्दोलन

    सही उत्तर: अ) दास का समर्पण भाव

    व्याख्या: काव्यांश में कवि तुलसीदास ने स्वयं को दास और ईश्वर को स्वामी बताते हुए पूर्ण समर्पण का भाव व्यक्त किया है।

  2. तुलसीदास जी ने भगवान को चंदन कहकर स्वयं को क्या कहा है -

    • अ) पानी
    • ब) पत्थर
    • स) अनाथ
    • द) मोर

    सही उत्तर: अ) पानी

    व्याख्या: काव्यांश की पहली पंक्ति में कवि कहते हैं कि प्रभु चंदन हैं और वे पानी हैं, जिससे चंदन की सुगंध फैलती है।

  3. 'चितवत' शब्द का अर्थ है -

    • अ) दुश्मनी होना
    • ब) तीव्र गति होना
    • स) जलना
    • द) चारों ओर देखना

    सही उत्तर: द) चारों ओर देखना

    व्याख्या: 'चितवत' का अर्थ है देखना या निहारना। यहाँ चकोर पक्षी चंद्रमा को एकटक देखता है, उसी प्रकार भक्त ईश्वर को।

  4. उपर्युक्त काव्यांश में कवि तुलसीदास ने ईश्वर के किस रूप का वर्णन किया है -

    • अ) निराकार रूप का
    • ब) साकार रूप का
    • स) चतुर्भुज रूप का
    • द) लौकिक रूप का

    सही उत्तर: ब) साकार रूप का

    व्याख्या: कवि ने ईश्वर को चंदन, घन (बादल), दीपक, मोती और स्वामी जैसे साकार रूपों में वर्णित किया है, जो भक्ति भावना को दर्शाता है।

  5. 'सोने में सुहागा' होने का अर्थ है -

    • अ) प्रथम वस्तु से द्वितीय वस्तु का अधिक महत्त्व होना
    • ब) सोने का सुहागा से अधिक महत्त्व होना
    • स) किसी विशेष वस्तु में दूसरी वस्तु के मेल से उसमें विशिष्ट गुण का समावेश हो जाना
    • द) जीवन में भगवान की प्राप्ति हो जाना

    सही उत्तर: स) किसी विशेष वस्तु में दूसरी वस्तु के मेल से उसमें विशिष्ट गुण का समावेश हो जाना

    व्याख्या: 'सोने में सुहागा' मुहावरे का अर्थ है कि जब दो वस्तुएँ मिलती हैं तो उनका मूल्य और गुण बढ़ जाता है, जैसे सोने में सुहागा (एक धातु) मिलाने से वह और चमकीला हो जाता है।


  1. "देहाती दुनिया" उपन्यास से लिया गया पाठ है -

    • अ) जॉर्ज पंचम की नाक से
    • ब) पाठ का अँचल से
    • स) साना-साना हाथ जोड़ि से
    • द) इनमें से कोई नहीं

    सही उत्तर: ब) पाठ का अँचल से

    व्याख्या: 'देहाती दुनिया' उपन्यास शिवपूजन सहाय द्वारा रचित है, जिसका एक अंश 'पाठ का अँचल' नाम से पाठ्यपुस्तक में शामिल है।

  2. "साना-साना हाथ जोड़ि" पाठ में वर्णन है -

    • अ) अरावली पर्वत माला का
    • ब) तिब्बत पठार का
    • स) रेगिस्तान की पिटूटी का
    • द) हिमालय की यात्रा का

    सही उत्तर: द) हिमालय की यात्रा का

    व्याख्या: यह पाठ लेखिका मृदुला गर्ग द्वारा हिमालय की यात्रा के अनुभवों पर आधारित है, जिसमें प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय जीवन का वर्णन है।

3.2) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए। [6 × 1 = 6]

  1. जिस संज्ञा शब्द से किसी एक व्यक्ति या वस्तु के नाम का बोध होता हो उसे “व्यक्तिवाचक संज्ञा' कहते हैं।
  2. जो सर्वनाम निकटस्थ अथवा दूरस्थ व्यक्ति या पदार्थ की ओर निश्चयपूर्वक संकेत करते हैं, उन्हें निश्चय वाचक सर्वनाम कहते हैं।
  3. विशेषण चार प्रकार के होते हैं।
  4. ऐसे शब्द जिनके स्वरूप में लिंग, वचन, काल आदि के प्रभाव से कोई परिवर्तन नहीं होता अविकारी शब्द या अव्यय कहलाते हैं।
  5. संस्कृत में कुल 22 उपसर्ग होते हैं। ये सभी उपसर्ग तत्सम शब्दों के साथ हिन्दी में प्रयुक्त होते हैं।
  6. वे प्रत्यय जो धातु अथवा क्रिया के अन्त में लगकर नए शब्दों की रचना करते हैं उन्हें कृत प्रत्यय कहते हैं।

3.3) निम्नलिखित अति लघूत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर लिखिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर सीमा लगभग 20 शब्द। [12 × 1 = 12]

  1. प्रश्न: संधि की परिभाषा लिखते हुए स्वर संधि के प्रकार लिखिए।
    उत्तर: संधि का अर्थ है 'मेल'। दो वर्णों के मेल से होने वाले विकार को संधि कहते हैं। स्वर संधि के चार प्रकार हैं: दीर्घ संधि, गुण संधि, वृद्धि संधि, यण संधि।
  2. प्रश्न: कर्मधारय और बहुव्रीहि समास में अन्तर लिखिए।
    उत्तर: कर्मधारय समास में पहला पद विशेषण और दूसरा विशेष्य होता है (जैसे: नीलकमल = नीला है जो कमल)। बहुव्रीहि समास में समस्त पद किसी अन्य वस्तु का बोध कराता है (जैसे: चक्रपाणि = जिसके हाथ में चक्र है, अर्थात विष्णु)।
  3. प्रश्न: 'आकाश टूटना' मुहावरे का अर्थ लिखिए।
    उत्तर: 'आकाश टूटना' मुहावरे का अर्थ है – अचानक कोई बहुत बड़ी विपत्ति या संकट आ पड़ना।
  4. प्रश्न: 'अब बाँटे रेवड़ी फिर-फिर अपने को देय' लोकोक्ति का अर्थ लिखिए।
    उत्तर: इस लोकोक्ति का अर्थ है – स्वार्थी व्यक्ति दूसरों को कुछ देकर भी अपना लाभ ही देखता है, अर्थात दिखावे की उदारता।
  5. प्रश्न: 'नेताजी का चश्मा' पाठ किसके योगदान को दर्शाता है?
    उत्तर: यह पाठ नेताजी सुभाषचंद्र बोस के योगदान और उनके प्रति लोगों के सम्मान को दर्शाता है।
  6. प्रश्न: मन्नू भंडारी के पिता की सबसे बड़ी दुर्बलता क्या थी?
    उत्तर: मन्नू भंडारी के पिता की सबसे बड़ी दुर्बलता उनकी बेटी (मन्नू) के प्रति अत्यधिक मोह और चिंता थी।
  7. प्रश्न: 'नौबतखाने में इबादत' पाठ किसके बारे में है?
    उत्तर: यह पाठ प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका बेगम अख्तर के जीवन और उनकी कला के बारे में है।
  8. प्रश्न: 'रहिमन, तुम हो अति बड़भागी' – गोपियों ने ऐसा क्यों कहा?
    उत्तर: गोपियों ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि रहीम जी को श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति का अवसर मिला, जो उनके लिए सौभाग्य की बात थी।
  9. प्रश्न: परशुराम जी का गुस्सा कैसे शांत हुआ?
    उत्तर: परशुराम जी का गुस्सा श्रीराम के विनम्र व्यवहार और उनके द्वारा धनुष की प्रशंसा सुनकर शांत हुआ।
  10. प्रश्न: 'आत्मकथ्य' कविता में किसकी अभिव्यक्ति है?
    उत्तर: 'आत्मकथ्य' कविता में कवि की आत्म-व्यथा और उसके मन की पीड़ा की अभिव्यक्ति है।
  11. प्रश्न: 'माता का अँचल' पाठ में किसका चित्रण किया गया है?
    उत्तर: इस पाठ में माँ के स्नेह और बच्चे के प्रति उसके निस्वार्थ प्रेम का चित्रण किया गया है।
  12. प्रश्न: 'यमुनाधांग' का अर्थ लिखिए, यह कहाँ स्थित है?
    उत्तर: 'यमुनाधांग' का अर्थ है यमुना का किनारा। यह वृंदावन में स्थित है।

खण्ड - व

प्रश्न संख्या 4 से 6 तक के लिए प्रत्येक प्रश्न के लिए अधिकतम उत्तर सीमा 40 शब्द है।

  1. प्र.4) हालदार साहब ने पान वाले से क्या पूछा और पान वाले ने क्या उत्तर दिया? [2]

    उत्तर: हालदार साहब ने पान वाले से पूछा कि कैप्टन (सेनानी) की मूर्ति पर चश्मा कौन लगाता है। पान वाले ने उत्तर दिया कि वह स्वयं ही चश्मा लगाता है, और यह काम वह कैप्टन के प्रति सम्मान के कारण करता है।

  2. प्र.5) बालगोबिन भगत रेखाचित्र के माध्यम से किसके चरित्र का उद्घाटन किया गया है? [2]

    उत्तर: बालगोबिन भगत रेखाचित्र के माध्यम से एक सच्चे, ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और ईश्वर में अटूट आस्था रखने वाले भक्त का चरित्र उद्घाटित किया गया है। वे सादा जीवन और उच्च विचारों के प्रतीक हैं।

  3. प्र.6) नवाब साहब ने खीरे की फांकों को बिना खाये ही क्यों फेंक दिया? [2]

    उत्तर: नवाब साहब ने खीरे की फांकों को बिना खाए इसलिए फेंक दिया क्योंकि वे दिखावटी शान-शौकत के पुजारी थे। वे लेखक के सामने अपनी ऊँची हैसियत दिखाना चाहते थे, लेकिन असल में वे खीरा खाने के अभ्यस्त नहीं थे, इसलिए उन्होंने बहाना बनाकर उन्हें फेंक दिया।

  4. प्र.7) काशी में मरण भी मंगल क्यों माना गया है? 'नौबतखाने में इबादत' पाठ के आधार पर लिखिए। [2]

    उत्तर: काशी में मरण भी मंगल माना गया है क्योंकि यहाँ मरने पर मोक्ष की प्राप्ति होती है। 'नौबतखाने में इबादत' पाठ के अनुसार, काशी को मोक्षदायिनी नगरी माना जाता है, जहाँ मृत्यु के बाद आत्मा को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।

  5. प्र.8) गोपियों ने राजधर्म किसे कहा और क्यों? [2]

    उत्तर: गोपियों ने राजधर्म को 'सत्य बोलना' कहा। उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि उनके अनुसार, एक राजा का सबसे बड़ा धर्म सत्य का पालन करना और प्रजा के प्रति ईमानदार रहना होता है।

  6. प्र.9) क्रिया को परिभाषित करते हुए कर्म के आधार पर क्रिया को उदाहरण सहित समझाइए। [2]

    उत्तर: क्रिया वह शब्द है जो किसी कार्य के होने या करने का बोध कराता है। कर्म के आधार पर क्रिया के दो भेद हैं:

    • सकर्मक क्रिया: जिसमें कर्म की आवश्यकता होती है। जैसे: राम ने फल खाया। (यहाँ 'फल' कर्म है)
    • अकर्मक क्रिया: जिसमें कर्म की आवश्यकता नहीं होती। जैसे: बच्चा हँसता है। (यहाँ कोई कर्म नहीं है)
  7. प्र.10) 'लड़की होना पर लड़की जैसी दिखाई मत देना।' ऐसा कवि ने क्यों कहा? आशय स्पष्ट कीजिए। [2]

    उत्तर: कवि ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि समाज में लड़कियों को कमजोर और असहाय समझा जाता है। कवि का आशय है कि लड़की को अपनी पहचान बनाए रखनी चाहिए, लेकिन उसे दब्बू या कमजोर नहीं बनना चाहिए। उसे आत्मनिर्भर और साहसी बनना चाहिए, ताकि वह समाज में अपना स्थान बना सके।

  8. प्र.11) 'उत्साह' कविता के माध्यम से कवि ने क्या संदेश दिया है? [2]

    उत्तर: 'उत्साह' कविता के माध्यम से कवि ने संदेश दिया है कि जीवन में उत्साह और जोश बनाए रखना चाहिए। कवि बादलों को आमंत्रित करता है, जो विप्लव और परिवर्तन के प्रतीक हैं। वह कहता है कि निराशा और ठहराव को छोड़कर नवनिर्माण और सकारात्मक बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए।

  9. प्र.12) ग्रामीण अंचल में बच्चों के खेल कैसे होते थे? 'माता का अंचल' पाठ के आधार पर लिखिए। [2]

    उत्तर: 'माता का अंचल' पाठ के अनुसार, ग्रामीण अंचल में बच्चों के खेल सरल और प्राकृतिक होते थे। वे गिल्ली-डंडा, कंचे, पतंग उड़ाना, नदी-नालों में नहाना, और पेड़ों पर चढ़ना जैसे खेल खेलते थे। ये खेल उन्हें प्रकृति के करीब रखते थे और उनमें सामूहिकता की भावना विकसित करते थे।

  10. प्र.13) 'जॉर्ज पंचम की नाक' पाठ सत्ता से जुड़े लोगों की किस मानसिकता को दर्शाता है? [2]

    उत्तर: 'जॉर्ज पंचम की नाक' पाठ सत्ता से जुड़े लोगों की चापलूसी और अंधभक्ति की मानसिकता को दर्शाता है। यह पाठ बताता है कि कैसे लोग अपने स्वार्थ के लिए सत्ता के आगे झुकते हैं और बिना तर्क के उसकी पूजा करते हैं, भले ही वह कितनी भी बेतुकी क्यों न हो।

  11. प्र.14) तिस्ता नदी कहाँ बहती है, इसकी विशेषताएँ लिखिए। [2]

    उत्तर: तिस्ता नदी भारत के सिक्किम राज्य और पश्चिम बंगाल के उत्तरी भागों में बहती है। इसकी विशेषताएँ हैं: यह हिमालय से निकलती है, इसका पानी बहुत साफ और ठंडा होता है, यह तेज बहाव वाली नदी है, और इसके किनारे हरे-भरे जंगल और चाय के बागान पाए जाते हैं।

  12. प्र.15) 'यशपाल' का जीवन परिचय एवं कृतित्व संक्षेप में लिखिए। [2]

    उत्तर: यशपाल (1903-1976) हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कहानीकार और उपन्यासकार थे। उनका जन्म फिरोजपुर (पंजाब) में हुआ। वे स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े रहे। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं: 'दादा कॉमरेड', 'दिव्या', 'मेरी तेरी उसकी बात', 'झूठा सच' (उपन्यास), और 'वो दुनिया' (कहानी संग्रह)। उन्होंने समाजवादी विचारधारा को अपनाया और सामाजिक विसंगतियों पर करारा व्यंग्य किया।

  13. प्र.16) निम्नलिखित में से किसी एक का उत्तर दीजिए:

    • (क) चतुरीदत्त मिश्र का व्यक्तित्व व कृतित्व संक्षेप में लिखिए। [2]

      उत्तर: चतुरीदत्त मिश्र हिंदी साहित्य के एक प्रसिद्ध लेखक थे। उनका व्यक्तित्व सरल और सहज था। उन्होंने कई कहानियाँ और उपन्यास लिखे। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'बेला के फूल', 'पहली रात', और 'दो बहनें' शामिल हैं। उनकी लेखनी में ग्रामीण जीवन और सामाजिक समस्याओं का चित्रण मिलता है।

    • (ख) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का व्यक्तित्व एवं कृतित्व संक्षेप में लिखिए। [2]

      उत्तर: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (1899-1961) हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि थे। उनका व्यक्तित्व विद्रोही और स्वतंत्र विचारों वाला था। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं: 'राम की शक्ति पूजा', 'सरोज स्मृति', 'अनामिका' (काव्य), और 'बिल्लेसुर बकरिहा' (उपन्यास)। उन्होंने कविता में नए प्रयोग किए और सामाजिक रूढ़ियों पर प्रहार किया।

    • (ग) तुलसीदास के व्यक्तित्व एवं कृतित्व संक्षेप में लिखिए। [2]

      उत्तर: तुलसीदास (1532-1623) हिंदी साहित्य के महान कवि और भक्त थे। उनका व्यक्तित्व सरल, भक्तिमय और समर्पित था। उनकी प्रमुख रचना 'रामचरितमानस' है, जो अवधी भाषा में लिखी गई है। इसके अलावा उन्होंने 'विनय पत्रिका', 'दोहावली', और 'कवितावली' जैसी रचनाएँ भी लिखीं। उन्होंने रामभक्ति का प्रचार किया और समाज में धार्मिक एकता का संदेश दिया।

खण्ड - 4

प्रश्न 7. पठित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश 'बार-बार सोचते...' पाठ्यपुस्तक के गद्य भाग से लिया गया है। इसमें लेखक ने देशभक्तों के प्रति समाज की उदासीनता और व्यंग्यात्मक रवैये पर चिंता व्यक्त की है।

व्याख्या: लेखक सोचता है कि उस व्यक्ति का क्या होगा जो अपने देश के लिए घर-गृहस्थी, जवानी और जिंदगी तक कुर्बान करने वालों पर हँसता है और अपने स्वार्थ के लिए बिकने के मौके ढूँढ़ता है। लेखक दुखी हो जाता है। पंद्रह दिन बाद जब वह उसी कस्बे से गुजरता है, तो सोचता है कि हृदयस्थली में सुभाष की प्रतिमा अवश्य होगी, लेकिन उसकी आँखों पर चश्मा नहीं होगा, क्योंकि मास्टर बनाना भूल गया और कैप्टन मर गया। वह तय करता है कि आज वहाँ नहीं रुकेगा, पान नहीं खाएगा, मूर्ति की तरफ नहीं देखेगा और सीधे निकल जाएगा।

अथवा

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश 'शहनाई के इसी मंगलध्वनि के नायक...' पाठ्यपुस्तक के गद्य भाग से लिया गया है। इसमें बिस्मिल्ला खाँ की शहनाई और सुर के प्रति समर्पण का वर्णन है।

व्याख्या: शहनाई की मंगलध्वनि के नायक बिस्मिल्ला खाँ अस्सी साल से सच्चे सुर की तलाश में हैं। वे पाँचों वक्त की नमाज़ इसी सुर को पाने की प्रार्थना में बिता देते हैं। लाखों सजदे इसी एक सच्चे सुर की इबादत में खुदा के आगे झुकते हैं। वे नमाज़ के बाद सजदे में गिड़गिड़ाते हैं कि मेरे मालिक एक सुर बख्श दे, जिसमें ऐसा असर हो कि आँखों से सच्चे मोती जैसे आँसू निकल आएँ। उन्हें यकीन है कि कभी खुदा उन पर मेहरबान होगा और अपनी झोली से सुर का फल निकालकर उनकी ओर उछालेगा और कहेगा, ले जा, इसे खा ले और अपनी मुराद पूरी कर ले।

प्रश्न 8. निम्नलिखित पठित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश 'गुरु हारे हारिल की लकरी...' सूरदास जी द्वारा रचित है। इसमें गोपियों द्वारा श्रीकृष्ण के प्रति अपने प्रेम और समर्पण को व्यक्त किया गया है।

व्याख्या: गोपियाँ कहती हैं कि जिस प्रकार हारिल पक्षी अपनी लकड़ी को कभी नहीं छोड़ता, उसी प्रकार नंद-नंदन श्रीकृष्ण ने उनके हृदय को पकड़ लिया है। वे जागते, सोते, दिन-रात हर समय कृष्ण का ही ध्यान करती हैं। योग सुनने पर भी उन्हें वैसा ही लगता है जैसे ककड़ी खाने पर। गोपियाँ कहती हैं कि यह प्रेम उन्होंने कहीं से सीखा या सुना नहीं, बल्कि यह तो उन्हें उन्हीं के हवाले कर दिया गया है जिनका मन चकरी की तरह घूमता रहता है (अर्थात् जो सदा कृष्ण में लीन रहते हैं)।

अथवा

प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश 'लड़की अभी सयानी नहीं थी...' कवयित्री द्वारा रचित है। इसमें एक मासूम लड़की की भोली-भाली मानसिकता का चित्रण किया गया है।

व्याख्या: लड़की अभी बड़ी नहीं हुई थी, वह इतनी भोली और सरल थी कि उसे सुरक्षा का आभास तो होता था, लेकिन दुख को समझना नहीं आता था। वह धुंधले प्रकाश की पाठिका थी, यानी उसे जीवन की वास्तविकताओं का स्पष्ट ज्ञान नहीं था। वह कुछ तुकों और लयबद्ध पंक्तियों में ही रची-बसी थी, जो उसकी मासूमियत और सादगी को दर्शाता है।

प्रश्न 9. 'एक कहानी यह भी' पाठ में मनु भंडारी के साधारण लड़की के असाधारण बनने के प्रारंभिक पड़ावों को प्रकट किया है। स्पष्ट कीजिए। (उत्तर सीमा लगभग 60 शब्द)

मनु भंडारी के जीवन में साधारण लड़की से असाधारण बनने के प्रारंभिक पड़ाव इस प्रकार हैं: पहला, उनकी माँ का साहित्यिक रुचि होना और उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करना। दूसरा, पिता का उन्हें लड़कों की तरह स्वतंत्रता देना और शिक्षा पर जोर देना। तीसरा, स्कूल में अध्यापिकाओं का प्रोत्साहन और चौथा, स्वयं की लेखन प्रतिभा को पहचानना और आगे बढ़ाना।

अथवा

प्रश्न 9. 'भगत का निर्णय अटल था।' 'नहीं तो मैं ही इस घर को छोड़कर चल दूँगा।' ऐसा बात गोबिन भगत ने क्यों कहा? (उत्तर सीमा लगभग 60 शब्द)

गोबिन भगत ने यह बात इसलिए कही क्योंकि उनका निर्णय अटल था कि वे अपनी बेटी की शादी में दहेज नहीं लेंगे और न ही देंगे। जब परिवार के अन्य सदस्य उनके इस फैसले का विरोध कर रहे थे और दहेज लेने पर जोर दे रहे थे, तब गोबिन भगत ने स्पष्ट कर दिया कि यदि घर में दहेज की प्रथा चलेगी तो वे स्वयं इस घर को छोड़ देंगे।

खण्ड - द्

प्र.2) निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर लगभग 300-350 शब्दों में एक निबंध लिखिए |

अ) जीवन में खेलों का महत्त्व

प्रस्तावना: खेल मानव जीवन का एक अनिवार्य अंग हैं। ये न केवल शारीरिक विकास में सहायक होते हैं, बल्कि मानसिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। खेल हमें अनुशासन, टीम वर्क और नेतृत्व क्षमता सिखाते हैं।

खेलों के प्रकार: खेल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं – आउटडोर खेल (जैसे क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी) और इनडोर खेल (जैसे शतरंज, कैरम, टेबल टेनिस)। दोनों ही प्रकार के खेलों के अपने-अपने लाभ हैं।

खेलों से स्वास्थ्य लाभ: खेल शरीर को स्वस्थ और फुर्तीला बनाते हैं। नियमित खेलने से मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं, रक्त संचार बेहतर होता है और मोटापा कम होता है। यह मानसिक तनाव को भी दूर करता है और आत्मविश्वास बढ़ाता है।

खेल भावना से सौहार्द: खेल हमें जीत और हार को समान भाव से स्वीकार करना सिखाते हैं। खेल भावना से प्रतिद्वंद्वी के प्रति सम्मान और मित्रता की भावना विकसित होती है, जिससे सामाजिक सौहार्द बढ़ता है।

उपसंहार: खेल जीवन को संतुलित और सुखद बनाते हैं। इन्हें अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर हम शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रह सकते हैं।

ब) वैश्विक महामारी कोरोना

प्रस्तावना: कोरोना वायरस (COVID-19) एक वैश्विक महामारी थी जिसने पूरी दुनिया को प्रभावित किया। यह एक संक्रामक बीमारी थी जो श्वसन तंत्र को प्रभावित करती थी।

महामारी का फैलाव: यह महामारी चीन के वुहान शहर से शुरू हुई और तेजी से पूरी दुनिया में फैल गई। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से यह वायरस हवा में फैलता था और दूसरों को संक्रमित करता था।

महामारी की भयावहता: इस महामारी ने लाखों लोगों की जान ली और अरबों लोगों को प्रभावित किया। अस्पतालों में बिस्तरों की कमी, ऑक्सीजन की किल्लत और लॉकडाउन ने लोगों के जीवन को कठिन बना दिया।

बीमारी से बचने के उपाय: मास्क पहनना, सामाजिक दूरी बनाए रखना, बार-बार हाथ धोना और टीकाकरण इस बीमारी से बचने के मुख्य उपाय थे। सरकारों ने लॉकडाउन और कंटेनमेंट जोन जैसे कदम उठाए।

उपसंहार: कोरोना महामारी ने हमें स्वास्थ्य और स्वच्छता के महत्व को समझाया। इसने यह भी सिखाया कि वैश्विक संकट से निपटने के लिए एकजुटता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक है।

स) राजस्थान के त्योहार

प्रस्तावना: त्योहार हमारे जीवन में उल्लास और उमंग लाते हैं। राजस्थान, अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है, यहाँ विभिन्न प्रकार के त्योहार मनाए जाते हैं।

राजस्थान में मनाए जाने वाले त्योहार: राजस्थान में दीपावली, होली, गणगौर, तीज, मकर संक्रांति, और दशहरा जैसे प्रमुख त्योहार मनाए जाते हैं। इसके अलावा, पुष्कर मेला, मारवाड़ महोत्सव और बूंदी उत्सव जैसे स्थानीय मेले भी आयोजित होते हैं।

त्योहारों में भाईचारे की भावना: त्योहारों के दौरान लोग आपस में मिलते-जुलते हैं, एक-दूसरे को मिठाई और उपहार देते हैं। इससे सामाजिक एकता और भाईचारे की भावना मजबूत होती है।

त्योहारों से मानव प्रेम: त्योहार हमें प्रेम और सद्भावना का संदेश देते हैं। ये जाति, धर्म और वर्ग के भेदभाव को मिटाकर मानवता को एक सूत्र में बांधते हैं।

उपसंहार: राजस्थान के त्योहार इसकी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं। इन्हें संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है।

द) मेरा प्रिय महापुरुष

प्रस्तावना: महापुरुष वे होते हैं जो अपने कार्यों और विचारों से समाज को प्रभावित करते हैं। मेरे प्रिय महापुरुष महात्मा गांधी हैं, जिन्होंने भारत को स्वतंत्रता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

महापुरुष के द्वारा किए गए कार्य: महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलकर भारत को अंग्रेजों से आजाद कराया। उन्होंने असहयोग आंदोलन, दांडी मार्च और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे कई आंदोलनों का नेतृत्व किया।

जीवन दर्शन व शिक्षा: गांधी जी का जीवन दर्शन सत्य, अहिंसा, सादगी और सेवा पर आधारित था। उन्होंने हमें सिखाया कि बुराई से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका अहिंसा है।

समाज में महत्त्व: गांधी जी ने छुआछूत, जातिवाद और महिलाओं के प्रति भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं और समाज को प्रेरित करते हैं।

उपसंहार: महात्मा गांधी का जीवन और शिक्षाएं हमेशा हमारा मार्गदर्शन करेंगी। वे सच्चे अर्थों में एक महापुरुष थे।

प्र.22) आप राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय स्टेशन नगर के सुरेश हैं | आपके विद्यालय के पुस्तकालय में बालोपयोगी पुस्तकें हेतु प्रधानाचार्य को एक प्रार्थना पत्र लिखिए | (शब्द सीमा लगभग 300 शब्द)

सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य जी,
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय,
स्टेशन नगर

विषय: पुस्तकालय में बालोपयोगी पुस्तकों की व्यवस्था हेतु प्रार्थना पत्र

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय का कक्षा दसवीं का छात्र सुरेश हूँ। हमारे विद्यालय के पुस्तकालय में अध्ययन सामग्री तो उपलब्ध है, परंतु बालोपयोगी पुस्तकों का अभाव है। बालोपयोगी पुस्तकें जैसे कहानियाँ, उपन्यास, विज्ञान कथाएँ, और नैतिक शिक्षा की पुस्तकें छात्रों के मानसिक विकास और ज्ञानवर्धन में सहायक होती हैं।

इन पुस्तकों के अभाव में छात्रों को पढ़ने का उचित अवसर नहीं मिल पाता है। अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि कृपया पुस्तकालय में बालोपयोगी पुस्तकों की व्यवस्था करने की कृपा करें, ताकि छात्रों का सर्वांगीण विकास हो सके।

आपकी अति कृपा होगी।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,
सुरेश
कक्षा दसवीं
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, स्टेशन नगर

दिनांक: [तिथि]

अथवा

स्वयं को हिम्मत नगर का मोहन मानते हुए अपने छोटे भाई देवेश को स्वास्थ्य सुधार हेतु एक पत्र लिखिए |

हिम्मत नगर
[दिनांक]

प्रिय देवेश,

स्नेहपूर्ण पत्र। आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्न होगे। मैं यहाँ कुशल हूँ।

मैंने सुना है कि तुम्हारी तबीयत ठीक नहीं रहती और तुम पढ़ाई में भी मन नहीं लगा पाते। इसलिए मैं तुम्हें कुछ स्वास्थ्य सुधार के उपाय बताना चाहता हूँ।

सबसे पहले, अपने खान-पान पर ध्यान दो। ताजे फल, हरी सब्जियाँ और पौष्टिक भोजन खाओ। जंक फूड और बाहर का खाना कम करो। रोज सुबह जल्दी उठो और कम से कम 30 मिनट व्यायाम या योग करो। इससे शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी।

पर्याप्त नींद लेना भी बहुत जरूरी है। रात को जल्दी सोने की आदत डालो। पढ़ाई के बीच में छोटे-छोटे ब्रेक लो और आँखों को आराम दो।

स्वस्थ रहोगे तो पढ़ाई में भी मन लगेगा। अपना ध्यान रखना और माता-पिता की बात मानना।

तुम्हारा बड़ा भाई,
मोहन

प्र.23) राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय नमनपुर के चित्र कला छात्रों द्वारा बनाये गए चित्रों की बिक्री हेतु एक विज्ञापन लिखिए | (उत्तर सीमा 25-50 शब्द)

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राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, नमनपुर के चित्र कला छात्रों द्वारा बनाए गए सुंदर चित्रों की बिक्री हेतु एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है।

दिनांक: 15 जनवरी 2022
समय: सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक
स्थान: विद्यालय प्रांगण

सभी कला प्रेमियों से सादर निमंत्रण।

अथवा

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'कला गृह' संस्था द्वारा बनाई गई सुंदर मूर्तियों की बिक्री हेतु एक प्रदर्शनी