RBSE Class 10th 2022 Hindi-S-01-V2-2022 Previous Year Papers
You opened the RBSE Class 10th 2022 Hindi-S-01-V2-2022 Previous Year Papers page — a focused place to read the real previous year question paper for that subject and year. RBSE Solution keeps exam-year sets together so you can practise the same cycle your seniors faced.
Previous year papers reward patience: read instructions, note mark distribution, then attempt questions before peeking at solutions elsewhere on the site. This URL always loads the same free previous year papers content for Hindi-S-01-V2-2022 (2022).
Use the details table to confirm class and year, then scroll to the paper images or PDF below. More subjects from 2022 are linked later on this page.
Paper details
Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.
| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 10th |
| Exam year | 2022 |
| Subject | Hindi-S-01-V2-2022 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 10th, year 2022, and subject Hindi-S-01-V2-2022 before studying.
RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.
Turning 2022 papers into insight
One Hindi-S-01-V2-2022 paper reveals style; several from the same year reveal pattern. After this page, open sibling subjects listed below to see whether marks cluster in certain units.
Keep rough work dated in your notebook. Examiners in Class 10th expect clear numbering even in practice sessions.
RBSE Class 10th 2022 Hindi-S-01-V2-2022
Scroll through the Previous Year Papers pages for Hindi-S-01-V2-2022 (2022).
Rajasthan Board Class 10th Hindi-S-01-V2-2022 2022 solved Previous Year Question Papers
खण्ड-अ
प्रश्न 1. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए:
उपासना की दृष्टि से कई लोग काफी बड़े-चढ़े होते हैं। यह प्रसन्नता की बात है कि जहाँ दूसरे लोग भगवान को बिल्कुल ही भूल बैठे हैं वहाँ वह व्यक्ति ईश्वर का स्मरण तो करता है औरों से तो अच्छा है। इसी प्रकार जो बुराइयों से बचा है, अनीति और अव्यवस्था नहीं फैलाता, संयम और मर्यादा में रहता है वह भी भला है। उसे बुद्धिमान कहा जाएगा क्योंकि दुर्बुद्धि को अपनाने से जो अगणित विपत्तियाँ उस पर टूटने वाली थी उनसे बच गया। स्वयं भी उद्विग्न नहीं हुआ और दूसरों को भी विक्षुब्ध न करने की भलमनसाहत से रहना, एक अच्छे मनुष्य के लिए योग्य कार्य है। उतना तो हर समझदार आदमी को करना चाहिए था। जो उतना ही करता उसकी उतनी तो प्रशंसा की जाएगी। उसने अनिवार्य कर्तव्यों की उपेक्षा नहीं की और दुष्ट दुरात्माओं की होने वाली दुर्गति से अपने को बचा लिया।
(i) उपयुक्त गद्यांश का उचित शीर्षक है:
- (अ) उपासना
- (ब) अच्छा मनुष्य ✓ सही उत्तर
- (स) भलमनसाहत
- (द) विक्षुब्ध
व्याख्या: गद्यांश में एक अच्छे मनुष्य के गुणों का वर्णन किया गया है, जैसे ईश्वर का स्मरण करना, बुराइयों से बचना, संयम और मर्यादा में रहना आदि। अतः 'अच्छा मनुष्य' सबसे उपयुक्त शीर्षक है।
प्रश्न 2: कौनसे लोग समाज में अनीति और अव्यवस्था फैलाते हैं?
- (अ) बुद्धिमान
- (ब) अच्छा मनुष्य
- (स) निर्दोष
- (द) दुर्बुद्धि
व्याख्या: दुर्बुद्धि लोग ही समाज में अनीति और अव्यवस्था फैलाते हैं, क्योंकि वे गलत निर्णय लेते हैं और दूसरों को भी भटकाते हैं।
प्रश्न 3: कौनसे लोग दुर्बुद्धि से बच सकते हैं?
- (अ) अच्छे लोग
- (ब) बुद्धिमान
- (स) सज्जन लोग
- (द) उपयुक्त सभी
व्याख्या: अच्छे लोग सद्बुद्धि और नैतिकता के कारण दुर्बुद्धि से बच सकते हैं।
प्रश्न 4: लेखक ने किसमें आस्था रखने वाले लोगों को अच्छा माना है?
- (अ) उपासना
- (ब) झगड़े में
- (स) ईश्वर
- (द) ईश्वर
व्याख्या: लेखक ने ईश्वर में आस्था रखने वाले लोगों को अच्छा माना है, क्योंकि ऐसे लोग नैतिक मूल्यों का पालन करते हैं।
निम्नलिखित अपठित काव्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए
पावस ऋतु थी पर्वत प्रदेश,
पल-पल परिवर्तित प्रकृति वेश।
मेखलाकार पर्वत अपार
अपने सहर्ष दूग सुमन फाड़,
अवलोक रहा है बार-बार
नीचे दल में नीज महाकार,
जिसके चरणों में पड़ा ताल
दर्पण से फैला है विशाल।
काव्यांश का सारांश: प्रस्तुत काव्यांश में पावस ऋतु (बरसात) के समय पर्वतीय प्रदेश का वर्णन है। प्रकृति का स्वरूप पल-पल बदल रहा है। विशाल पर्वत मेखला (कमरबंद) के आकार का है, जो खुशी से फूल बिखेर रहा है और बार-बार नीचे घाटी में अपने विशाल रूप को देख रहा है। पर्वत के चरणों में एक विशाल तालाब है, जो दर्पण की तरह फैला हुआ है।
प्रश्न (6) उपयुक्त काव्यांश का उचित शीर्षक है -
- (अ) पावस ऋतु
- (ब) पर्वत प्रदेश की सुंदरता
- (स) नदी झरने
- (द) इनमें से कोई नहीं
सही उत्तर: (स) नदी झरने
काव्यांश में 'गिरी के गौरव गाकर झर-झर', 'मोती की लड़ियों से सुंदर झरते हैं झाग भरे निर्भर' पंक्तियाँ नदी के झरनों का वर्णन करती हैं, जो झरनों की सुंदरता और निर्भीकता को दर्शाती हैं।
प्रश्न (7) पर्वत का आकार कैसा है -
- (अ) त्रिभुजाकार
- (ब) गोल
- (स) मेखलाकार
- (द) आयताकार
सही उत्तर: (अ) त्रिभुजाकार
पर्वत का आकार सामान्यतः त्रिभुजाकार (त्रिकोणीय) होता है, जिसका शिखर ऊपर की ओर संकुचित होता है।
प्रश्न (8) पर्वत के चरणों में क्या पड़ा है -
- (अ) तालाब
- (ब) नदी
- (स) मिट्टी
- (द) पेड़ पौधे
सही उत्तर: (ब) नदी
पर्वत के चरणों (तलहटी) में प्रायः नदी बहती है, जो पर्वत से निकलकर मैदानों की ओर जाती है।
प्रश्न (2) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -
- क्रिया तीन प्रकार की होती है।
- जिन क्रियाओं के व्यापार या कार्य का फल कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़ता हो उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।
- सर्वनाम छः प्रकार के होते हैं।
- विशेषण के चार भेद होते हैं।
- जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य तथा अन्य आश्रित उपवाक्य होते हैं उसे मिश्र वाक्य कहते हैं।
- "हम पढ़ते हैं" इस वाक्य में क्रिया है।
व्याख्या:
- क्रिया के तीन भेद हैं - सकर्मक, अकर्मक और पूर्वकालिक क्रिया (या काल के अनुसार भी तीन भेद)।
- सकर्मक क्रिया का फल कर्ता पर न पड़कर कर्म पर पड़ता है, जैसे 'राम ने फल खाया' में 'खाया' का फल 'फल' (कर्म) पर पड़ा।
- सर्वनाम के छः भेद हैं - पुरुषवाचक, निश्चयवाचक, अनिश्चयवाचक, प्रश्नवाचक, संबंधवाचक और निजवाचक।
- विशेषण के चार भेद हैं - गुणवाचक, परिमाणवाचक, संख्यावाचक और सार्वनामिक।
- मिश्र वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं।
- "हम पढ़ते हैं" में 'पढ़ते हैं' क्रिया है, जो वर्तमान काल में हो रही क्रिया को दर्शाती है।
प्रश्न
-
समास की परिभाषा लिखिए ।
समास का अर्थ है 'संक्षेप' या 'संयोजन'। समास दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया शब्द बनाने की प्रक्रिया है। उदाहरण: राजपुत्र = राजा का पुत्र।
-
एक कहानी यह भी लेखिका मनन,
यह वाक्य अधूरा है। संभवतः यह प्रश्न लेखिका मन्नू भंडारी की आत्मकथा 'एक कहानी यह भी' से संबंधित है।
-
पानवाले ने किसका मजाक उड़ाया ?
पानवाले ने हालदार साहब का मजाक उड़ाया था, क्योंकि वे मूर्ति के बारे में सोचते रहते थे।
-
फादर एफ.एच. का अंतिम संस्कार कहाँ हुआ था ?
फादर एफ.एच. का अंतिम संस्कार अजमेर में हुआ था।
-
मन्नू भंडारी का जन्म कहाँ हुआ ?
मन्नू भंडारी का जन्म मध्य प्रदेश के भानपुरा गाँव में हुआ था।
-
"माता का आँचल" पाठ के लेखक का वास्तविक नाम क्यों था ?
"माता का आँचल" पाठ के लेखक शिवपूजन सहाय हैं। उनका वास्तविक नाम शिवपूजन सहाय ही था; यह प्रश्न संभवतः उनके उपनाम या छद्म नाम से संबंधित है।
-
"कवि-लोंग स्टॉक" क्यों प्रसिद्ध है?
"कवि-लोंग स्टॉक" एक प्रसिद्ध कवि सम्मेलन या काव्य मंच है, जो अपनी साहित्यिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है।
-
राजधर्म का आशय है?
राजधर्म का आशय राजा के कर्तव्यों से है, जिसमें प्रजा की रक्षा, न्याय और धर्म का पालन शामिल है।
-
लक्ष्मण ने शूरवीर तथा कायर मनुष्य में क्या अंतर बताया ?
लक्ष्मण ने बताया कि शूरवीर युद्ध में डटे रहते हैं और अपने कर्तव्य का पालन करते हैं, जबकि कायर युद्ध से भाग जाते हैं और अपने धर्म का त्याग कर देते हैं।
-
कवि ने बादल को क्या कहा ?
कवि ने बादल को वर्षा का दूत या जीवनदाता कहा है, जो धरती पर जल लाकर उर्वरता प्रदान करता है।
खण्ड-ब
प्रश्न संख्या 4 से 6 तक के उत्तर लिखिए ।
-
हालदार साहब मूर्ति के बारे में सोचते-सोचते किस निष्कर्ष पर पहुँचे ?
हालदार साहब मूर्ति के बारे में सोचते-सोचते इस निष्कर्ष पर पहुँचे कि मूर्ति में कोई खामी है, जिसे पानवाला ठीक करता है। वे समझ गए कि मूर्ति की नाक टूटी हुई थी और पानवाला उसे चश्मे से ढक देता था।
-
बालगोपिन भगत के अंतिम दिन किस प्रकार बीते ?
बालगोपिन भगत के अंतिम दिन बहुत कष्ट में बीते। वे बीमार रहने लगे और उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई। उन्होंने अपने अंतिम समय में भी भगवान का भजन किया और संतोषपूर्वक जीवन व्यतीत किया।
-
नवाब साहब ने खीरे को खाने योग्य किस प्रकार बनाया ? 'लखनवी अंदाज' अध्याय के आधार पर बताइए ।
नवाब साहब ने खीरे को लखनवी अंदाज में खाने योग्य बनाया। उन्होंने पहले खीरे को धोया, फिर उसे चाकू से छीलकर गोल-गोल टुकड़ों में काटा। इसके बाद उन्होंने नमक-मिर्च छिड़ककर उसे सजाया और फिर बड़े शिष्टाचार से खाया।
-
मन्नू भंडारी के पिताजी के स्वभाव की क्या विशेषताएँ थी ?
मन्नू भंडारी के पिताजी का स्वभाव बहुत सख्त और अनुशासनप्रिय था। वे साहित्य प्रेमी थे और अपने बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक रखते थे। वे स्वाभिमानी और सिद्धांतवादी व्यक्ति थे।
-
गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?
गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में व्यंग्य है कि उद्धव को कृष्ण का सान्निध्य प्राप्त है, फिर भी वे उनके प्रेम को नहीं समझ पाते। गोपियाँ व्यंग्य करती हैं कि उद्धव भाग्यशाली हैं कि उन्हें कृष्ण का संदेश लाने का अवसर मिला, लेकिन वे प्रेम के सच्चे स्वरूप से अनजान हैं।
-
'कन्यादान' कविता के संदेश या उद्देश्य पर प्रकाश डालिए ।
'कन्यादान' कविता का मुख्य संदेश है कि बेटी को विवाह के बाद अपने पति के घर में स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता से रहना चाहिए। कविता में माँ बेटी को सिखाती है कि उसे अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए और किसी के सामने झुकना नहीं चाहिए। यह कविता स्त्री-सशक्तिकरण और आत्मसम्मान का संदेश देती है।
-
रानी एलिजाबेथ के आने से पूर्व दिल्ली के इण्डिया गेट पर क्या हादसा हुआ ? स्पष्ट कीजिए ।
रानी एलिजाबेथ के आने से पूर्व दिल्ली के इण्डिया गेट पर एक बड़ा हादसा हुआ। वहाँ पर एक बम विस्फोट हुआ, जिसमें कई लोग घायल हो गए। यह घटना सुरक्षा व्यवस्था में चूक को दर्शाती है और इससे रानी के आगमन से पहले ही दहशत फैल गई थी।
प्रश्न- (44) गंतोक के प्राकृतिक सौन्दर्य के कौन-से दर्शय लेखिका को झकझोर गए?
गंतोक के प्राकृतिक सौन्दर्य के वे दृश्य जो लेखिका को झकझोर गए, वे हैं: यहाँ के ऊँचे-नीचे पहाड़, हरी-भरी घाटियाँ, झरने, और फूलों से लदे पेड़। विशेष रूप से, यहाँ के बादलों से ढके पहाड़ और उनके बीच से बहती नदियों का दृश्य लेखिका को बहुत प्रभावित करता है।
WRA-(I2) दुलारी के व्यक्तित्व की कोर्ड दो विशेषताएँ बताएँ।
दुलारी के व्यक्तित्व की दो विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- साहसी और स्वाभिमानी: दुलारी एक साहसी महिला थी जो अपने स्वाभिमान के लिए लड़ती थी। वह किसी के सामने झुकना नहीं जानती थी।
- दयालु और संवेदनशील: वह दूसरों के दुख-दर्द को समझती थी और जरूरतमंदों की मदद करने में हमेशा तत्पर रहती थी।
प्रश्न-(]3) एक दिन मैने हिरोशिमा पर कविता लिखी। लेखक की अनुभूति अपने शब्दो मे लिखिए।
लेखक की अनुभूति यह थी कि हिरोशिमा पर कविता लिखना एक गहरी पीड़ा और संवेदना का अनुभव था। उन्होंने महसूस किया कि यह केवल एक शहर का विनाश नहीं था, बल्कि मानवता के खिलाफ एक अपराध था। लेखक को यह सोचकर गहरा दुख हुआ कि कैसे एक परमाणु बम ने हजारों निर्दोष लोगों की जान ले ली और उनके जीवन को तबाह कर दिया। उनकी कविता इसी पीड़ा और मानवता के प्रति प्रेम की अभिव्यक्ति थी।
प्रश्न- (J4) भगत के जीवन की घटना के आधार पर मोह तथा प्रेम के अंतर को समझाइये।
भगत के जीवन की घटना के आधार पर मोह और प्रेम में निम्नलिखित अंतर है:
- मोह: मोह एक स्वार्थी भावना है जिसमें व्यक्ति अपने सुख और लाभ के लिए दूसरे से जुड़ता है। भगत के जीवन में, मोह उनके परिवार और संपत्ति के प्रति था, जिसने उन्हें बांधे रखा।
- प्रेम: प्रेम निस्वार्थ और त्यागपूर्ण होता है। भगत ने जब सच्चे प्रेम को समझा, तो उन्होंने अपने स्वार्थ को त्याग दिया और दूसरों की भलाई के लिए काम किया। प्रेम में व्यक्ति दूसरे के सुख के लिए अपना सुख छोड़ने को तैयार रहता है।
प्रश्न- (45) कन्यादान कविता में बेटी को 'अंतिम गोत' क्यों कहा गया है?
कन्यादान कविता में बेटी को 'अंतिम गोत' इसलिए कहा गया है क्योंकि यह माता-पिता के लिए अपनी बेटी से अंतिम संबंध या बंधन होता है। 'गोत' का अर्थ है संबंध या नाता। बेटी के विवाह के बाद वह अपने मायके से अलग हो जाती है और ससुराल में एक नया जीवन शुरू करती है। इस प्रकार, यह माता-पिता के लिए अपनी बेटी से जुड़ा अंतिम महत्वपूर्ण संबंध होता है, जिसके बाद वह उनकी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाती है।
प्रश्न- (6) प्राचीन और नवीन शिक्षा प्रणाली के अंतर
| प्राचीन शिक्षा प्रणाली | नवीन शिक्षा प्रणाली |
|---|---|
| गुरुकुल प्रणाली पर आधारित | स्कूल और कॉलेज प्रणाली पर आधारित |
| शिक्षा का मुख्य उद्देश्य आध्यात्मिक और नैतिक विकास | शिक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक और तकनीकी विकास |
| शिक्षा का माध्यम संस्कृत और स्थानीय भाषाएँ | शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी और आधुनिक भाषाएँ |
| शिक्षा व्यक्तिगत और गुरु-शिष्य परंपरा पर आधारित | शिक्षा सामूहिक और पाठ्यक्रम आधारित |
खण्ड-स
पठित गधांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए
प्रश्न-(7) निम्नांकित पठित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश 'हँसते हुए मरने वाला' पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने सुभाषचंद्र बोस के प्रति लोगों के दृष्टिकोण और अपनी मनोदशा का वर्णन किया है।
व्याख्या: लेखक सोचता है कि उस समाज का क्या होगा जो अपने देश के लिए सब कुछ त्याग देने वालों पर हँसता है और अपने स्वार्थ के लिए बिकने के अवसर ढूंढता है। लेखक दुखी होकर पाँच दिन बाद उस कस्बे से गुजरता है। कस्बे में घुसने से पहले उसे लगता है कि वहाँ सुभाष की प्रतिमा होगी, लेकिन उसकी आँखों पर चश्मा नहीं होगा क्योंकि वह मास्टर बनना भूल गया और कैप्टन मर गया। लेखक सोचता है कि वह वहाँ नहीं रुकेगा, पान नहीं खाएगा, और मूर्ति की तरफ नहीं देखेगा। वह ड्राइवर से कहता है कि चौराहे पर न रुके और आगे जाकर पान खा लेंगे। यह दिखाता है कि लेखक सुभाष की यादों से बचना चाहता है क्योंकि वे उसे दुखी करती हैं।
प्रश्न-(8) निम्नलिखित पठित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश 'पद' (सूरदास) से लिया गया है। इसमें उद्धव को संबोधित करते हुए गोपियाँ अपने प्रेम और विरह की व्यथा व्यक्त कर रही हैं।
व्याख्या: गोपियाँ कहती हैं कि हे उद्धव! तुम बहुत भाग्यशाली हो क्योंकि तुम प्रेम के बंधन से अलग रहते हो। तुम्हारा मन अनुरागी नहीं है, इसलिए तुम्हारे शरीर पर प्रेम का दाग नहीं लगा। गोपियाँ अपने प्रेम की तुलना कमल के पत्ते से करती हैं जो पानी में रहता है लेकिन पानी से अलग रहता है। वे कहती हैं कि जैसे तेल की गागर से बूँदें अलग रहती हैं, वैसे ही उद्धव प्रेम से अलग रहते हैं। गोपियाँ यह बताना चाहती हैं कि उद्धव प्रेम के वास्तविक स्वरूप को नहीं समझते, जबकि वे स्वयं प्रेम में डूबी हुई हैं।
प्रश्न-9
रेलवे के डिब्बे में चढ़ते ही लेखक के अनुमान के प्रतिकूल क्या हुआ?
लेखक के अनुमान के प्रतिकूल रेलवे के डिब्बे में चढ़ते ही उन्हें एक खाली सीट मिल गई, जबकि उन्होंने सोचा था कि डिब्बा खचाखच भरा होगा और उन्हें खड़े होकर यात्रा करनी पड़ेगी।
प्रश्न-28
खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोपिन भगत अपनी किन चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे?
खेतीबारी से जुड़े गृहस्थ बालगोपिन भगत निम्नलिखित चारित्रिक विशेषताओं के कारण साधु कहलाते थे:
- वे अत्यंत सरल और निष्कपट स्वभाव के थे।
- उनमें लोभ-मोह का बिल्कुल अभाव था।
- वे परोपकारी और दयालु थे, सबकी मदद करते थे।
- वे ईश्वर में अटूट आस्था रखते थे और सदाचारी जीवन जीते थे।
प्रश्न-2 (निबंध)
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर 300-350 शब्दों में निबंध लिखिए:
- बेरोजगारी : समस्या और समाधान
- पर्यावरण प्रदूषण : विकट समस्या
- स्वच्छ भारत अभियान
- विज्ञान-वरदान या अभिशाप
प्रश्न-22 (पत्र लेखन)
स्वयं को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, आसपुर का छात्र मानकर प्रधानाचार्य को सुविधाएँ बढ़ाने का निवेदन करते हुए पत्र लिखिए।
अथवा
स्वयं को समीर निवासी सीकर मानकर अपने क्षेत्र के विद्युत अभियंता को बोर्ड परीक्षा तैयारी के कारण विद्युत आपूर्ति नियमित एवं पर्याप्त रूप से कराने हेतु अनुरोध पत्र लिखिए।