RBSE Class 10th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-1001-041225 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 10th
Exam year 2026
Subject HALF-YEARLY-HINDI-1001-041225
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 10th 2026 HALF-YEARLY-HINDI-1001-041225

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Rajasthan Board Class 10th HALF-YEARLY-HINDI-1001-041225 2026 solved Previous Year Question Papers

कक्षा 10वीं अर्द्ध वार्षिक परीक्षा, 2025-26
हिन्दी

समय : 3.45 घंटे   |   पूर्णांक : 70


सामान्य निर्देश:

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न-पत्र पर अनुक्रमांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न हल करना अनिवार्य हैं।
  3. प्रश्नों के अंक उनके सामने अंकित हैं।

प्रश्न: निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिन तत्त्वों की आवश्यकता है, उनको प्राप्त करना ही शिक्षा का उद्देश्य होना चाहिए। शिक्षा मानव जीवन के लिए वैसी ही है जैसे संगमरमर के टुकड़े के लिए शिल्पकला। शिक्षा केवल ज्ञान दान ही नहीं करती अपितु संस्कार और सुरुचि के अंकुरों का पोषण भी करती है। वस्तुतः अपने को जीवित रखने के लिए अपने वातावरण तथा उसकी सापेक्षता में निज को समझ कर जीवन के अनुकूल कार्यों को करना और प्रतिकूल का निवारण ही शिक्षा का उद्देश्य है। शिक्षा मनुष्य को संस्कारबद्ध कर उसे मानवीय गुणों से विभूषित करती है, तथा साथ ही स्वाभिमान से जीना सिखाने में सहायता कर मनुष्य को प्रगति के पथ पर अग्रसर करती है।

  1. (i) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए -

    • (अ) शिक्षा का महत्व
    • (ब) जीवन जीने की कला
    • (स) शिल्पकला
    • (द) संस्कार

    सही उत्तर: (अ) शिक्षा का महत्व

    गद्यांश में शिक्षा के उद्देश्य और उसके मानव जीवन में महत्व पर प्रकाश डाला गया है, अतः 'शिक्षा का महत्व' सबसे उपयुक्त शीर्षक है।

  2. (ii) शिक्षा मनुष्य को बनाती है -

    • (अ) संस्कारबद्ध
    • (ब) मानवीय गुणों से विभूषित
    • (स) स्वाभिमान से जीना सिखाना
    • (द) उपर्युक्त सभी

    सही उत्तर: (द) उपर्युक्त सभी

    गद्यांश के अनुसार शिक्षा मनुष्य को संस्कारबद्ध करती है, मानवीय गुणों से विभूषित करती है और स्वाभिमान से जीना सिखाती है, अतः सभी विकल्प सही हैं।

  3. (iii) शिक्षा का उद्देश्य है -

    • (अ) ज्ञान का विकास
    • (ब) मानवता का विकास
    • (स) जीवन जीने की कला सिखाना
    • (द) सद्गुणों का ज्ञान

    सही उत्तर: (स) जीवन जीने की कला सिखाना

    गद्यांश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा का उद्देश्य जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक तत्त्वों को प्राप्त करना है, अर्थात जीवन जीने की कला सिखाना।

  4. (iv) मनुष्य को प्रगति के पथ पर अग्रसर करती है -

    • (अ) शिक्षा
    • (ब) शिल्पकला
    • (स) संस्कार
    • (द) वातावरण

    सही उत्तर: (अ) शिक्षा

    गद्यांश के अंतिम वाक्य के अनुसार शिक्षा ही मनुष्य को प्रगति के पथ पर अग्रसर करती है।


[पृष्ठ 1 का 4]

प्रश्न 2: निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए

चाह नहीं, मैं सुरवाला के गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं सप्नाटों के शव पर
है हरि! डाला जाऊं,
चाह नहीं देवों के सिर पर
मुझे तोड़ लेना बनमाली,
उस पथ पर तुम देना फेंक,
जिस पथ पर जावें वीर अनेक।

  1. (0) उपर्युक्त काव्यांश का उचित शीर्षक क्या है?

    उत्तर: इस काव्यांश का उचित शीर्षक "वीर का पुष्प" या "बलिदान की इच्छा" है।

  2. (9) "इठलाना" का शाब्दिक अर्थ क्या है?

    उत्तर: "इठलाना" का शाब्दिक अर्थ है – नखरे करना, अकड़ना, या घमंड से चलना

  3. (॥) फूल ने क्या चाहा है?

    उत्तर: फूल ने चाहा है कि वह किसी वीर के बलिदान के मार्ग पर फेंका जाए, न कि किसी सजावट या पूजा में प्रयोग किया जाए। वह वीरों के पथ पर अपना बलिदान देना चाहता है।

  4. (iv) इस पद्यांश में निहित संदेश क्या है?

    उत्तर: इस पद्यांश में निहित संदेश है कि सच्चा जीवन वही है जो देश या महान उद्देश्य के लिए बलिदान हो। फूल भी वीरों के पथ पर फेंका जाना चाहता है, न कि सजावट या पूजा में प्रयोग होना। यह त्याग और बलिदान की भावना को दर्शाता है।


प्रश्न 3: संकेत-बिंदुओं के आधार पर निम्न में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए (लगभग 300 शब्दों में)

(0) विद्यार्थी जीवन और खेलकूद

प्रस्तावना: विद्यार्थी जीवन जीवन का सबसे महत्वपूर्ण काल होता है। इस समय शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास होता है। खेलकूद इस विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

खेलकूद का महत्व: खेलकूद से शरीर स्वस्थ रहता है, मन प्रसन्न रहता है और एकाग्रता बढ़ती है। यह विद्यार्थियों में अनुशासन, टीम भावना और नेतृत्व क्षमता विकसित करते हैं।

खेल और स्वास्थ्य: नियमित खेलकूद से शारीरिक फिटनेस बनी रहती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और मानसिक तनाव कम होता है। यह मोटापा, मधुमेह जैसी बीमारियों से बचाता है।

अन्य लाभ: खेलकूद से समय प्रबंधन, आपसी सहयोग और जीत-हार को स्वीकार करने की भावना विकसित होती है। यह विद्यार्थियों को जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

उपसंहार: विद्यार्थी जीवन में खेलकूद का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद को भी उतना ही महत्व देना चाहिए।

(i) भ्रष्टाचार

प्रस्तावना: भ्रष्टाचार समाज का एक गंभीर अभिशाप है जो देश के विकास में बाधक है। यह नैतिक मूल्यों के पतन का प्रतीक है।

भ्रष्टाचार के कारण: लालच, अधिकार का दुरुपयोग, कमजोर कानूनी व्यवस्था, गरीबी और शिक्षा की कमी भ्रष्टाचार के प्रमुख कारण हैं।

भ्रष्टाचार रोकने के उपाय: सख्त कानून, पारदर्शी प्रशासन, जन जागरूकता, नैतिक शिक्षा और सतर्क नागरिकता से भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है।

उपसंहार: भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए हर नागरिक को जिम्मेदारी निभानी होगी। ईमानदारी और नैतिकता को अपनाकर ही हम एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकते हैं।

(॥) बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ

प्रस्तावना: 'बेटी-बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है जो बालिकाओं के अस्तित्व और शिक्षा को सुनिश्चित करती है।

इस योजना के उद्देश्य: लिंगानुपात में सुधार, बालिका भ्रूण हत्या को रोकना, बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देना और उन्हें सशक्त बनाना इस योजना के मुख्य उद्देश्य हैं।

बेटी की शिक्षा का महत्व: शिक्षित बेटी न केवल अपना बल्कि अपने परिवार और समाज का भी विकास करती है। वह आत्मनिर्भर बनती है और देश की प्रगति में योगदान देती है।

उपसंहार: बेटियां किसी से कम नहीं हैं। उन्हें बचाना और पढ़ाना हम सबकी जिम्मेदारी है। एक शिक्षित बेटी पूरे परिवार को शिक्षित कर सकती है।


प्रश्न 4: प्रधानाचार्य को पत्र

अपने विद्यालय के प्रधानाचार्य को खेल सप्ताह आयोजित करने हेतु एक प्रार्थना पत्र लिखिए।

सेवा में,
श्रीमान प्रधानाचार्य जी,
[विद्यालय का नाम],
[स्थान]

दिनांक: [दिनांक]

विषय: खेल सप्ताह आयोजन हेतु प्रार्थना पत्र

महोदय,

सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय में पिछले कई वर्षों से खेल सप्ताह का आयोजन नहीं हुआ है। खेलकूद विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि इस वर्ष [तिथि] से [तिथि] तक खेल सप्ताह आयोजित करने की कृपा करें। हम विद्यार्थी इस आयोजन में पूर्ण सहयोग देंगे।

धन्यवाद।

आपका आज्ञाकारी शिष्य,
[आपका नाम]
कक्षा: [कक्षा]
अनुक्रमांक: [अनुक्रमांक]


प्रश्न 5: पिताजी को पत्र

स्वयं को अनीता मानते हुए अपने पिताजी को एक पत्र लिखिए जिसमें आपकी बोर्ड परीक्षा की तैयारी एवं समय प्रबंधन के बारे में बताया गया हो।

परम पूज्य पिताजी,

सादर प्रणाम। आशा है आप सब स्वस्थ होंगे।

मैं यहाँ अपनी पढ़ाई में व्यस्त हूँ। आपको बताना चाहती हूँ कि मैंने अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी अच्छी तरह से शुरू कर दी है। मैंने एक समय सारणी बनाई है जिसमें हर विषय के लिए समय निर्धारित किया है।

समय प्रबंधन के लिए मैं सुबह जल्दी उठती हूँ और कठिन विषयों को पहले पढ़ती हूँ। शाम को मैं पिछले दिन पढ़े गए विषयों का रिवीजन करती हूँ। मैंने नियमित अंतराल पर छोटे-छोटे ब्रेक लेने का भी नियम बनाया है ताकि मेरी एकाग्रता बनी रहे।

आप चिंता न करें, मैं पूरी मेहनत से पढ़ाई कर रही हूँ और आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करूंगी।

आपका आशीर्वाद बना रहे।

आपकी पुत्री,
अनीता


प्रश्न 6: सूक्तियों या कहावतों का भाषा विस्तार

संगति बैठिए सोई फल दीन

भाषा विस्तार: इस कहावत का अर्थ है कि जैसी संगति में रहोगे, वैसा ही प्रभाव पड़ेगा। अच्छी संगति में रहने से अच्छे गुण आते हैं और बुरी संगति में रहने से बुरी आदतें लगती हैं। इसलिए हमें सदैव अच्छे लोगों की संगति में रहना चाहिए।


अथवा

निम्नलिखित अवतरण या अनुच्छेद का सारांश 'एक-तिहाई शब्दों' में कीजिए

राष्ट्रभाषा की आवश्यकता राष्ट्रीय सम्मान की दृष्टि से भी है। अपने को एक ही राष्ट्र के निवासी मानने वाले दो व्यक्ति किसी विदेशी भाषा में बात करें यह हास्यास्पद असंगति है। इसे याद रखना चाहिए कि उस देश में कोई दूसरे के सामने हाथ पसारना समृद्धि का नहीं, दरिद्रता का चिह्न है। दूसरे की भाषा से क्या लाभ जिसकी अपनी भाषा है वह दूसरे की भाषा क्यों उधार ले? यह राष्ट्रीय सम्मान में कमी है। पर भारतीयों को अंग्रेजी में बातें करते देखकर विदेशों के निवासी आश्चर्य से पूछ बैठते हैं कि क्या आपकी कोई भाषा नहीं है? इस प्रश्न का उत्तर दिया जाना चाहिए कि हमारी भाषाएं तो अनेक

प्र. 7 बहुचयनात्मक प्रश्न (प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक)

  1. “हार” पाठ के लेखक हैं -

    • (अ) स्वयं प्रकाश
    • (ब) यशपाल
    • (स) जयशंकर प्रसाद
    • (द) जयशंकर प्रसाद

    स्पष्टीकरण: "हार" पाठ जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित है।

  2. “यह दंतुरित मुस्कान” कविता का केन्द्रीय पात्र है -

    • (अ) स्वयं लेखक
    • (ब) शिवनाथ
    • (स) शिशु
    • (द) माता

    स्पष्टीकरण: कविता में शिशु की मुस्कान को केन्द्र में रखा गया है।

  3. “माता का आँचल” पाठ में लेखक के बचपन का नाम क्या है?

    • (अ) शिव सहाय
    • (ब) तारक
    • (स) तारकेश्वर
    • (द) कुंदन

    स्पष्टीकरण: पाठ में लेखक का बचपन का नाम तारक बताया गया है।

  4. “साना-साना हाथ जोड़ि” पाठ के लेखक का नाम है -

    • (अ) एल. गण्डारी
    • (ब) मधु कांकरिया
    • (स) राजेश जोशी
    • (द) दिनकर

    स्पष्टीकरण: यह पाठ राजेश जोशी द्वारा लिखा गया है।

  5. “अधिकतर” शब्द में प्रत्यय है -

    • (अ) त्तर
    • (ब) अधिक
    • (स) तर
    • (द) अ

    स्पष्टीकरण: 'अधिक' में 'तर' प्रत्यय जोड़ने से 'अधिकतर' बनता है।

  6. “प्रतिदिन” शब्द में समास है -

    • (अ) अव्ययीभाव
    • (ब) द्विगु
    • (स) बहुव्रीहि
    • (द) तत्पुरुष

    स्पष्टीकरण: 'प्रतिदिन' में अव्ययीभाव समास है, जिसमें पहला पद प्रधान होता है।

  7. कृष्ण ने किसके माध्यम से गोपियों के पास संदेश भेजा था?

    • (अ) सुदामा
    • (ब) कर्ण
    • (स) अर्जुन
    • (द) उद्धव

    स्पष्टीकरण: कृष्ण ने उद्धव को गोपियों के पास संदेश भेजने के लिए भेजा था।

  8. लेखक के पिता किस कार्य से जुड़े थे?

    • (अ) अध्यापक
    • (ब) खेती
    • (स) व्यापारी
    • (द) दुकानदार

    स्पष्टीकरण: पाठ के अनुसार लेखक के पिता खेती का कार्य करते थे।

प्र. 8 रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए -

  1. 'रमेश' शब्द रम धातु से बना है।
  2. 'कामायनी' जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित काव्यकृति है।
  3. अर्थ के आधार पर क्रिया के भेद होते हैं।
  4. सुंदर लड़की नाच रही है वाक्य में सुंदर विशेषण है।

प्र. 9 निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर लिखिए -

पूरी बात तो अब पता नहीं, लेकिन लगता है कि देश के अच्छे मूर्तिकारों की जानकारी के अभाव में स्थानीय कलाकार को मूर्ति बनाने का ठेका दिया गया होगा, जो गहीने भर में मूर्ति बनाकर पटक देने का विश्वास दिला रहे थे।

  1. सरकारी कार्यालयों को किसकी जानकारी नहीं थी?

    उत्तर: सरकारी कार्यालयों को देश के अच्छे मूर्तिकारों की जानकारी नहीं थी।
  2. स्थानीय कलाकार को मूर्ति बनाने का ठेका क्यों दिया गया?

    उत्तर: देश के अच्छे मूर्तिकारों की जानकारी न होने के कारण स्थानीय कलाकार को मूर्ति बनाने का ठेका दिया गया।
  3. मूर्ति बनाने वाले कौन थे?

    • (अ) मास्टर मोतीलाल
    • (ब) स्थानीय कलाकार
    • (स) विदेश के मूर्तिकार
    • (द) उपरोक्त में से कोई नहीं

    स्पष्टीकरण: गद्यांश के अनुसार स्थानीय कलाकार को मूर्ति बनाने का ठेका दिया गया था।

  4. मूर्ति बनाने में कौन-सी परेशानियाँ आई होंगी?

    • (अ) मूर्तिकारों का अभाव
    • (ब) बजट की कमी
    • (स) स्थानीय कलाकार का गुणी न होना
    • (द) (अ) और (ब) दोनों

    स्पष्टीकरण: गद्यांश में मूर्तिकारों की जानकारी के अभाव और बजट की समस्या का उल्लेख है।

अथवा

— ग्राहक और बेचने वाले खीरे के इस्तेमाल का तरीका जानते हैं। ग्राहक के लिए जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च भी हाजिर कर देते हैं। नवाब साहब ने बहुत करीने से खीरे की फाँकों पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी बुरक दी।

  1. (i) खीरे के इस्तेमाल का तरीका कौन जानते हैं?

    बेचने वाले खीरे के इस्तेमाल का तरीका जानते हैं।

  2. (ii) नवाब साहब ने क्या तैयारी की?

    नवाब साहब ने खीरे की फाँकों पर जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च की सुर्खी बुरकने की तैयारी की।

  3. (iii) नवाब साहब जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च कहाँ से लाए?

    नवाब साहब जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च अपने पास से लाए।

  4. (iv) 'इस्तेमाल' शब्द का अर्थ बताइए।

    'इस्तेमाल' शब्द का अर्थ है – उपयोग या प्रयोग करना।


भृगुसुत समुझि जनेउ बिलोकी। जो कछु कहहु करिहउँ रिस रोकी।
घर महिसुर हरिजन अरु गाई। हमरे कुल इन्हें पर न बधाई।।
पाप अपकीर्ति हारे। मारतहु पा परउँ तुम्हारे।।
कोटि कुलिस सम बचन तुम्हारा। व्यर्थ धनु आजु भयउ हमारा।।

  1. (i) उपर्युक्त पद्यांश के कवि का नाम लिखिए।

    उपर्युक्त पद्यांश के कवि तुलसीदास जी हैं।

  2. (ii) लक्ष्मण के अनुसार उनका कुल किस पर आक्रमण नहीं करते?

    लक्ष्मण के अनुसार उनका कुल ब्राह्मणों, हरिजनों और गायों पर आक्रमण नहीं करते।

  3. (iii) 'कोटि कुलिस सम' में प्रयुक्त अलंकार है।

    'कोटि कुलिस सम' में उपमा अलंकार है।

  4. (iv) 'हरिजन' शब्द का अर्थ लिखिए।

    'हरिजन' शब्द का अर्थ है – भगवान के भक्त या दीन-दुखी लोग।


अथवा

“फसल क्या है?
और तो कुछ नहीं – है वह
नदियों के पानी का जादू है वह
हाथों के स्पर्श की महिमा है
काली-संदली मिट्टी का गुण-धर्म है
है वह सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का।”

  1. (i) उपर्युक्त पद्यांश का शीर्षक लिखिए।

    उपर्युक्त पद्यांश का शीर्षक 'फसल' है।

  2. (ii) कवि के अनुसार फसल क्या है?

    कवि के अनुसार फसल नदियों के पानी का जादू, हाथों के स्पर्श की महिमा और मिट्टी का गुण-धर्म है।

  3. (iii) फसल किसका रूपान्तरण है?

    फसल सूरज की किरणों और हवा की थिरकन का रूपान्तरण है।

  4. (iv) 'संदली' शब्द का अर्थ लिखिए।

    'संदली' शब्द का अर्थ है – सुगंधित या खुशबूदार।


भाग – 'द'

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न – (उत्तर सीमा 40 शब्द)

  1. (1) स्मृति को 'पाथेय' बनाने से कवि का क्या आशय है?

    स्मृति को 'पाथेय' बनाने का आशय है कि मनुष्य अपनी यादों को जीवन की राह में सहारा और संबल बना लेता है। ये यादें उसे आगे बढ़ने की शक्ति देती हैं।

  2. (2) उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?

    उद्धव के व्यवहार की तुलना फूलों की माला और चंदन से की गई है, जो बाहरी शोभा तो देते हैं लेकिन आंतरिक भावना को नहीं समझते।

  3. (3) बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक क्यों कहा गया है?

    बिस्मिल्ला खाँ को शहनाई की मंगलध्वनि का नायक इसलिए कहा गया है क्योंकि उन्होंने शहनाई को शुभ अवसरों पर बजाकर इसे मंगल का प्रतीक बना दिया और इसे लोकप्रिय बनाया।

  4. (4) नवाब साहब ने खीरे की फाँकों को बिना खाए ही क्यों फेंक दिया?

    नवाब साहब ने खीरे की फाँकों को बिना खाए इसलिए फेंक दिया क्योंकि वे अपनी गरीबी और लाचारी छिपाना चाहते थे। वे लेखक के सामने अपनी स्थिति प्रकट नहीं करना चाहते थे।

  5. (5) संगतकार किस प्रकार गायक का सहयोग करता है?

    संगतकार गायक की आवाज को सुर में सुर मिलाकर, उसकी थकान को कम करके और उसकी गलतियों को छिपाकर उसका सहयोग करता है।

  6. (6) साना-साना हाथ जोड़ि में भारत के किस क्षेत्र की यात्रा का वर्णन है?

    साना-साना हाथ जोड़ि में भारत के उत्तराखंड क्षेत्र की यात्रा का वर्णन है।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न – (उत्तर सीमा 60 से 80 शब्द)

  1. (1) बच्चे से कवि की मुलाकात का जो शब्द-चित्र उपस्थित हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

    कवि की मुलाकात एक मासूम बच्चे से होती है जो अपनी सादगी और निश्छलता से कवि को प्रभावित करता है। बच्चा अपने सरल प्रश्नों और व्यवहार से कवि के मन में जिज्ञासा और कोमलता जगाता है। यह मुलाकात कवि को जीवन की सच्चाई और सुंदरता का अहसास कराती है।

अथवा

  1. संकलित पदों को ध्यान में रखते हुए सूर के गीतों की विशेषता बताइए।

    सूर के गीतों में भक्ति और श्रृंगार रस की प्रधानता है। वे कृष्ण की बाल लीलाओं और उनकी मधुर छवि का वर्णन करते हैं। उनकी भाषा सरल और भावपूर्ण है, जो सीधे हृदय को छूती है। सूर के पदों में वात्सल्य और प्रेम की गहरी अनुभूति होती है।

  2. (2) 'निबंध संस्कृति में हमारे विचारों' को स्पष्ट कीजिए।

    इस निबंध में लेखक ने संस्कृति को हमारे विचारों और आचरण का प्रतिबिंब बताया है। संस्कृति हमारे रहन-सहन, मूल्यों और परंपराओं को आकार देती है। यह हमें सही और गलत का ज्ञान कराती है और समाज में एकता बनाए रखने में सहायक होती है।

  3. (3) हजारी प्रसाद द्विवेदी के सफल व्यक्तित्व पर उनकी अध्यापिका की भूमिका पर प्रकाश डालिए।

    हजारी प्रसाद द्विवेदी की अध्यापिका ने उन्हें पढ़ने और सीखने की प्रेरणा दी। उन्होंने बालक द्विवेदी को किताबों से जोड़ा और उनमें ज्ञान के प्रति रुचि जगाई। उनकी मार्गदर्शिका ने द्विवेदी जी के व्यक्तित्व को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे वे एक महान विद्वान बने।

निम्न में से किसी एक रचनाकार का जीवन परिचय लिखिए – (उत्तर सीमा 100 शब्द)

  1. (1) यशपाल

    यशपाल का जन्म 3 दिसंबर 1903 को फिरोजपुर, पंजाब में हुआ। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध कहानीकार और उपन्यासकार थे। उनकी रचनाओं में समाजवादी विचारधारा और यथार्थवाद का प्रभाव दिखता है। प्रमुख रचनाएँ हैं – 'दादा कमरेड', 'दिव्या', 'मेरी तेरी उसकी बात'। उनका निधन 26 दिसंबर 1976 को हुआ।

अथवा