RBSE Class 11th 2017 Physics-BJ-XI-3-2017 Previous Year Papers
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 11th |
| Exam year | 2017 |
| Subject | Physics-BJ-XI-3-2017 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 11th 2017 Physics-BJ-XI-3-2017
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Rajasthan Board Class 11th Physics-BJ-XI-3-2017 2017 solved Previous Year Question Papers
वार्षिक परीक्षा, 2076-77
Yearly Examination 2016-17
विषय – भौतिक विज्ञान
Subject – Physics
समय : 3¼ घंटे कक्षा – 11
Time: 3¼ Hrs. Class – XI
पूर्णांक : 70
M.M. : 70
निर्देश (Instructions):
- सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं। (All the questions are compulsory.)
-
विस्थापन-समय वक्र का ढाल क्या प्रदर्शित करता है?
What does the slope of displacement-time graph represent?विस्थापन-समय वक्र का ढाल वेग (velocity) प्रदर्शित करता है।
The slope of displacement-time graph represents velocity.
-
50 न्यूटन व 60 न्यूटन के दो बल किसी बिन्दु पर एक-दूसरे के विपरीत दिशा में कार्य कर रहे हैं। इनके परिणामी बल का मान ज्ञात कीजिए।
50 N and 60 N forces are acting in opposite directions at a point. Find out their resultant force.चूँकि बल विपरीत दिशा में कार्य कर रहे हैं, परिणामी बल = बड़ा बल – छोटा बल = 60 N – 50 N = 10 N (बड़े बल की दिशा में)।
Since forces act in opposite directions, resultant = larger force – smaller force = 60 N – 50 N = 10 N (in the direction of the larger force).
-
कार्य-ऊर्जा प्रमेय लिखिए।
Write the work-energy theorem.कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किसी वस्तु पर किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
Work-energy theorem states that the net work done on an object equals the change in its kinetic energy.
-
पास्कल का नियम लिखिए।
Write Pascal's law.पास्कल के नियम के अनुसार, विरामावस्था में किसी तरल में किसी बिन्दु पर लगाया गया दाब तरल के सभी भागों में समान रूप से संचरित होता है।
Pascal's law states that pressure applied to an enclosed fluid at rest is transmitted equally in all directions throughout the fluid.
-
मोलर विशिष्ट ऊष्माधारिता किन-किन पर निर्भर करती है?
Molar specific heat capacity depends on what factors?मोलर विशिष्ट ऊष्माधारिता निम्न पर निर्भर करती है:
- पदार्थ की प्रकृति (प्रकार)
- तापमान
- दाब (गैसों के लिए)
- प्रक्रिया की प्रकृति (स्थिर आयतन या स्थिर दाब)
Molar specific heat capacity depends on: nature of substance, temperature, pressure (for gases), and the type of process (constant volume or constant pressure).
-
कोई व्यक्ति कलाई घड़ी बाँधे किसी मीनार की चोटी से गिरता है। क्या मुक्त रूप से गिरते समय उसकी घड़ी यथार्थ समय बताती है?
A man with a wristwatch on his hand falls from the top of a tower. Does the watch give correct time during the free fall?हाँ, घड़ी यथार्थ समय बताती है क्योंकि कलाई घड़ी यांत्रिक या क्वार्ट्ज होती है जो गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित नहीं होती। मुक्त पतन में भी इसकी कार्यप्रणाली सामान्य रहती है।
Yes, the watch gives correct time because a wristwatch (mechanical or quartz) is not affected by gravity. Its mechanism works normally during free fall.
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कोणीय आवृत्ति (ω), कोणीय तरंग संख्या (k) तथा तरंग वेग (v) में संबंध लिखिए।
Write the relation between angular frequency (ω), angular wave number (k) and wave velocity (v).संबंध: v = ω / k
जहाँ v = तरंग वेग, ω = कोणीय आवृत्ति, k = कोणीय तरंग संख्या।
Relation: v = ω / k, where v = wave velocity, ω = angular frequency, k = angular wave number.
-
विस्पंद की परिभाषा दीजिए।
Define beats.विस्पंद वह परिघटना है जिसमें दो निकट आवृत्तियों की तरंगों के अध्यारोपण से ध्वनि की तीव्रता में आवर्ती उतार-चढ़ाव होता है।
Beats are the periodic variation in sound intensity produced by the superposition of two waves of nearly equal frequencies.
-
किसी संबंध Z = Cp Dq / Er Fs में C, D, E व F में प्रतिशत त्रुटि क्रमश: 1%, 3%, 2% व 4% है तो Z के मान में प्रतिशत त्रुटि ज्ञात कीजिए।
दिया है: Z = Cp Dq / Er Fs
प्रतिशत त्रुटि सूत्र: ΔZ/Z × 100 = p(ΔC/C) + q(ΔD/D) + r(ΔE/E) + s(ΔF/F)
यहाँ p, q, r, s के मान नहीं दिए गए हैं। मान लेते हैं p = 1, q = 1, r = 1, s = 1 (यदि सभी घातांक 1 हों):
ΔZ/Z × 100 = 1(1%) + 1(3%) + 1(2%) + 1(4%) = 1% + 3% + 2% + 4% = 10%
अतः Z में प्रतिशत त्रुटि 10% होगी। (नोट: घातांकों के मान दिए जाने पर तदनुसार गणना करें।)
प्रश्न 39
प्रक्षेप्य गति की परिभाषा दीजिए एवं इसका एक उदाहरण दीजिए। एक प्रक्षेप्य की अधिकतम ऊँचाई H तथा उड़्डयन काल T हो तो सिद्ध करो कि 8H = gT²।
Define projectile motion and give one example of it. Prove that 8H = gT², where H is maximum height attained by a projectile and T is Time of flight of a projectile.
परिभाषा: प्रक्षेप्य गति वह गति है जिसमें कोई वस्तु पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के अंतर्गत क्षैतिज से किसी कोण पर फेंकी जाती है और वायु के प्रतिरोध को नगण्य माना जाता है।
उदाहरण: एक फुटबॉल को किक मारना, एक गेंद को फेंकना।
सिद्ध करना: 8H = gT²
माना प्रक्षेप्य को प्रारंभिक वेग u से क्षैतिज से θ कोण पर फेंका जाता है।
- अधिकतम ऊँचाई: H = (u² sin²θ) / (2g)
- उड़्डयन काल: T = (2u sinθ) / g
अब, T² = (4u² sin²θ) / g²
gT² = g × (4u² sin²θ) / g² = (4u² sin²θ) / g
8H = 8 × (u² sin²θ) / (2g) = (4u² sin²θ) / g
अतः, 8H = gT² सिद्ध होता है।
प्रश्न 40
एक समान त्वरित एक विमीय गति के लिये गति के तीनों समीकरणों को गणितीय विधि से व्युत्पन कीजिए।
Derive mathematically, the three equations of motion for a particle under constant acceleration in one dimension motion.
प्रथम समीकरण: v = u + at
त्वरण की परिभाषा से, a = (v - u) / t ⇒ v - u = at ⇒ v = u + at
द्वितीय समीकरण: s = ut + ½ at²
औसत वेग = (u + v)/2, विस्थापन s = औसत वेग × समय = [(u + v)/2] × t
v = u + at रखने पर, s = [(u + u + at)/2] × t = [(2u + at)/2] × t = ut + ½ at²
तृतीय समीकरण: v² = u² + 2as
v = u + at से t = (v - u)/a, s = ut + ½ at² में t रखने पर:
s = u[(v - u)/a] + ½ a[(v - u)/a]² = (uv - u²)/a + (v² - 2uv + u²)/(2a)
⇒ 2as = 2uv - 2u² + v² - 2uv + u² = v² - u² ⇒ v² = u² + 2as
प्रश्न 41
न्यूटन की गति के द्वितीय एवं तृतीय नियम समझाइए।
Explain the Newton's second and third law of motion.
द्वितीय नियम: किसी वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर आरोपित बल के अनुक्रमानुपाती होती है और बल की दिशा में होती है। गणितीय रूप में, F = ma, जहाँ F बल, m द्रव्यमान और a त्वरण है।
तृतीय नियम: प्रत्येक क्रिया के बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है। अर्थात, यदि वस्तु A, वस्तु B पर बल लगाती है, तो वस्तु B भी वस्तु A पर समान परिमाण का लेकिन विपरीत दिशा में बल लगाती है।
प्रश्न 42
जड़त्व आघूर्ण क्या है? इसका भौतिक महत्व समझाइए।
What is moment of inertia? Explain its physical significance.
जड़त्व आघूर्ण: किसी दृढ़ पिंड का जड़त्व आघूर्ण उसके द्रव्यमान के वितरण का माप है जो घूर्णन गति में परिवर्तन का विरोध करता है। इसे I = Σ mᵢ rᵢ² द्वारा व्यक्त किया जाता है, जहाँ mᵢ द्रव्यमान अवयव है और rᵢ घूर्णन अक्ष से उसकी दूरी है।
भौतिक महत्व: जड़त्व आघूर्ण घूर्णन गति में वह भूमिका निभाता है जो रैखिक गति में द्रव्यमान निभाता है। यह बताता है कि किसी पिंड को घूर्णन में लाने या रोकने के लिए कितने बल आघूर्ण की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 43
किसी तार को खींचने में किये गये कार्य का सूत्र व्युत्पन कीजिये।
Derive an expression for work done in stretching a wire.
माना तार की लंबाई L, अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A है। तार को खींचने पर उत्पन्न प्रतिबल σ = F/A और विकृति ε = ΔL/L है।
यंग गुणांक Y = σ/ε = (F/A) / (ΔL/L) ⇒ F = (YA/L) ΔL
तार को ΔL लंबाई तक खींचने में किया गया कार्य:
dW = F d(ΔL) = (YA/L) ΔL d(ΔL)
समाकलन करने पर: W = ∫₀^{ΔL} (YA/L) ΔL d(ΔL) = (YA/L) [ΔL²/2]₀^{ΔL} = ½ (YA/L) (ΔL)²
या W = ½ × (बल) × (विस्तार) = ½ F ΔL
प्रश्न 44
वीन-विस्थापन नियम लिखिए। कृष्णिका द्वारा विभिन्न तापों पर उत्सर्जित ऊर्जा तथा तरंगदैर्ध्य के मध्य वक्र बनाइए।
State Wien's displacement law. Draw a curve between radiated energy and wave length for a black body at different temperature.
वीन-विस्थापन नियम: कृष्णिका विकिरण के स्पेक्ट्रम में, अधिकतम उत्सर्जन के संगत तरंगदैर्ध्य (λₘ) कृष्णिका के परम ताप (T) के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात, λₘ T = स्थिरांक (b), जहाँ b = 2.898 × 10⁻³ m·K है।
वक्र: विभिन्न तापों (T₁ < T₂ < T₃) पर, तरंगदैर्ध्य (λ) के साथ उत्सर्जित ऊर्जा (E) का वक्र नीचे दर्शाया गया है। प्रत्येक वक्र का शिखर अलग-अलग तरंगदैर्ध्य पर होता है, और ताप बढ़ने पर शिखर छोटी तरंगदैर्ध्य की ओर विस्थापित होता है।
E (ऊर्जा) ↑ | T₃ | / \ | / \ T₂ |/ \ / \ | / \ T₁ | / \ / \ | / / \ | / / \ | / / \ | / / \ | / / \ |/_______/_____________\___→ λ (तरंगदैर्ध्य)
प्रश्न 45
सिद्ध करो कि आयतन प्रसार गुणांक, रैखिक प्रसार गुणांक का तीन गुणा होता है।
Prove that volume expansion coefficient is three times of linear expansion coefficient.
माना किसी घन की प्रारंभिक लंबाई L, आयतन V = L³ है। ताप में ΔT वृद्धि करने पर:
रैखिक प्रसार: L' = L(1 + αΔT), जहाँ α रैखिक प्रसार गुणांक है।
नया आयतन: V' = (L')³ = L³(1 + αΔT)³ = L³(1 + 3αΔT + 3α²ΔT² + α³ΔT³)
चूँकि α बहुत छोटा है, α² और α³ पदों को नगण्य माना जा सकता है।
V' ≈ L³(1 + 3αΔT) = V(1 + 3αΔT)
आयतन प्रसार गुणांक γ = (V' - V)/(VΔT) = [V(1 + 3αΔT) - V]/(VΔT) = 3α
अतः, γ = 3α सिद्ध होता है।
प्रश्न 46
मेयर का सम्बन्ध लिखिए। Cₚ का मान Cᵥ से अधिक होता है क्यों?
Write Mayer's relation. Why Cₚ is greater than Cᵥ?
मेयर का सम्बन्ध: Cₚ - Cᵥ = R, जहाँ Cₚ स्थिर दाब पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा, Cᵥ स्थिर आयतन पर मोलर विशिष्ट ऊष्मा, और R सार्वत्रिक गैस स्थिरांक है।
Cₚ > Cᵥ का कारण: स्थिर दाब पर गैस को गर्म करने पर, गैस फैलती है और बाह्य कार्य करती है। इसलिए, ताप को समान मात्रा में बढ़ाने के लिए अतिरिक्त ऊष्मा की आवश्यकता होती है जो बाह्य कार्य में उपयोग होती है। स्थिर आयतन पर कोई कार्य नहीं होता, इसलिए Cₚ, Cᵥ से बड़ा होता है।
प्रश्न 47
27°C ताप पर 1 मोल नाइट्रोजन की कुल गतिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
Find the total kinetic energy of one mole of nitrogen at 27°C.
गैस की कुल गतिज ऊर्जा: K = (3/2) nRT
यहाँ, n = 1 मोल, R = 8.314 J/mol·K, T = 27°C = 27 + 273 = 300 K
K = (3/2) × 1 × 8.314 × 300 = (3/2) × 2494.2 = 3741.3 J
अतः, 1 मोल नाइट्रोजन की कुल गतिज ऊर्जा 3741.3 J है।
प्रश्न 48
डॉप्लर प्रभाव एवं अप्रगामी तरंग को परिभाषा दीजिए।
Define Doppler effect and stationary wave.
डॉप्लर प्रभाव: जब तरंग स्रोत और प्रेक्षक के बीच आपेक्षिक गति होती है, तो प्रेक्षक द्वारा ग्रहण की गई तरंग की आवृत्ति, स्रोत की वास्तविक आवृत्ति से भिन्न प्रतीत होती है। इसे डॉप्लर प्रभाव कहते हैं।
अप्रगामी तरंग: जब दो समान आवृत्ति, समान आयाम और विपरीत दिशा में गतिमान तरंगें अध्यारोपित होती हैं, तो उत्पन्न तरंग को अप्रगामी तरंग कहते हैं। इसमें ऊर्जा का स्थानांतरण नहीं होता और निस्पंद एवं प्रस्पंद बनते हैं।
प्रश्न 49
सिद्ध करो कि समान द्रव्यमान के पिण्डों को पूर्णत: प्रत्यास्थ एकविमीय संघट्ट में टक्कर के बाद उनके व
21. Prove that in a head-on elastic collision, the velocities of the bodies of equal masses are mutually interchanged.
Proof: Consider two bodies of equal mass \( m \) moving with initial velocities \( u_1 \) and \( u_2 \) along the same straight line. After a head-on elastic collision, let their velocities be \( v_1 \) and \( v_2 \).
By conservation of linear momentum:
\[ m u_1 + m u_2 = m v_1 + m v_2 \]
\[ u_1 + u_2 = v_1 + v_2 \quad \text{(1)} \]
By conservation of kinetic energy (elastic collision):
\[ \frac{1}{2} m u_1^2 + \frac{1}{2} m u_2^2 = \frac{1}{2} m v_1^2 + \frac{1}{2} m v_2^2 \]
\[ u_1^2 + u_2^2 = v_1^2 + v_2^2 \quad \text{(2)} \]
From (1): \( v_2 = u_1 + u_2 - v_1 \). Substitute in (2):
\[ u_1^2 + u_2^2 = v_1^2 + (u_1 + u_2 - v_1)^2 \]
\[ u_1^2 + u_2^2 = v_1^2 + u_1^2 + u_2^2 + v_1^2 + 2u_1u_2 - 2u_1v_1 - 2u_2v_1 \]
Simplifying: \( 0 = 2v_1^2 + 2u_1u_2 - 2u_1v_1 - 2u_2v_1 \)
\[ 0 = v_1^2 + u_1u_2 - u_1v_1 - u_2v_1 \]
\[ 0 = (v_1 - u_1)(v_1 - u_2) \]
Thus either \( v_1 = u_1 \) (no collision) or \( v_1 = u_2 \). For collision, \( v_1 = u_2 \). Then from (1): \( v_2 = u_1 \). Hence velocities are interchanged.
सदिश गुणनफल की परिभाषा दीजिए। एक बल \( \vec{F} = (6\hat{i} - 4\hat{j} + 5\hat{k}) \, \text{N} \) किसी बिंदु \( \vec{r} = (2\hat{i} + \hat{j} - 3\hat{k}) \, \text{m} \) पर कार्य कर रहा है। मूल बिंदु के प्रति बल आघूर्ण का मान ज्ञात कीजिए।
परिभाषा: दो सदिशों \( \vec{A} \) और \( \vec{B} \) का सदिश गुणनफल \( \vec{A} \times \vec{B} \) एक सदिश है जिसका परिमाण \( |\vec{A}||\vec{B}|\sin\theta \) (जहाँ \( \theta \) उनके बीच का कोण है) और दिशा दाएँ हाथ के नियम द्वारा दी जाती है, जो \( \vec{A} \) और \( \vec{B} \) दोनों के लंबवत होती है।
बल आघूर्ण: \( \vec{\tau} = \vec{r} \times \vec{F} \)
\[ \vec{\tau} = \begin{vmatrix} \hat{i} & \hat{j} & \hat{k} \\ 2 & 1 & -3 \\ 6 & -4 & 5 \end{vmatrix} \]
\[ \vec{\tau} = \hat{i}(1 \times 5 - (-3) \times (-4)) - \hat{j}(2 \times 5 - (-3) \times 6) + \hat{k}(2 \times (-4) - 1 \times 6) \]
\[ \vec{\tau} = \hat{i}(5 - 12) - \hat{j}(10 + 18) + \hat{k}(-8 - 6) \]
\[ \vec{\tau} = (-7\hat{i} - 28\hat{j} - 14\hat{k}) \, \text{Nm} \]
अतः बल आघूर्ण \( \vec{\tau} = -7\hat{i} - 28\hat{j} - 14\hat{k} \, \text{Nm} \) है।
22. पृथ्वी की सतह से गहराई के साथ गुरुत्वीय त्वरण के मान में परिवर्तन का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। पृथ्वी सतह से कितनी गहराई पर गुरुत्वीय त्वरण का मान शून्य होगा?
व्युत्पत्ति: माना पृथ्वी का द्रव्यमान \( M \) और त्रिज्या \( R \) है। पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण \( g = \frac{GM}{R^2} \).
पृथ्वी की सतह से \( d \) गहराई पर, प्रभावी द्रव्यमान केवल त्रिज्या \( (R-d) \) के गोले का होता है। यदि पृथ्वी का घनत्व \( \rho \) समान है, तो:
\[ M' = \rho \cdot \frac{4}{3}\pi (R-d)^3 \]
गहराई पर गुरुत्वीय त्वरण \( g' = \frac{GM'}{(R-d)^2} = G \cdot \frac{4}{3}\pi \rho (R-d) \)
सतह पर \( g = \frac{GM}{R^2} = G \cdot \frac{4}{3}\pi \rho R \)
अतः \( g' = g \left(1 - \frac{d}{R}\right) \)
शून्य गुरुत्वीय त्वरण: \( g' = 0 \) तब \( 1 - \frac{d}{R} = 0 \) ⇒ \( d = R \). अर्थात पृथ्वी के केंद्र पर गुरुत्वीय त्वरण शून्य होता है।
23. द्रव की गोल बूंद एवं साबुन के बुलबुले में दाब आधिक्य का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए।
द्रव की गोल बूंद: माना बूंद की त्रिज्या \( R \) और पृष्ठ तनाव \( T \) है। बूंद के अंदर दाब \( P_i \) और बाहर \( P_o \) है। दाब आधिक्य \( \Delta P = P_i - P_o \).
बूंद को दो भागों में काटने पर, पृष्ठ बल = \( T \times 2\pi R \) (दो सतहें नहीं, केवल एक सतह)। संतुलन के लिए:
\[ \Delta P \times \pi R^2 = T \times 2\pi R \]
\[ \Delta P = \frac{2T}{R} \]
साबुन के बुलबुले: बुलबुले की दो सतहें होती हैं (अंदर और बाहर)। पृष्ठ बल = \( T \times 2 \times 2\pi R = 4\pi R T \).
संतुलन: \( \Delta P \times \pi R^2 = 4\pi R T \)
\[ \Delta P = \frac{4T}{R} \]
24. एक कार्नो इंजन 400 K ताप वाले स्रोत से 400 कैलोरी उष्मा शोषित करता है तथा सिंक में 80 कैलोरी उष्मा विसर्जित करता है। सिंक का ताप एवं इंजन की दक्षता ज्ञात कीजिए।
दिया है: स्रोत ताप \( T_1 = 400 \, \text{K} \), शोषित उष्मा \( Q_1 = 400 \, \text{cal} \), विसर्जित उष्मा \( Q_2 = 80 \, \text{cal} \).
कार्नो इंजन की दक्षता: \( \eta = 1 - \frac{Q_2}{Q_1} = 1 - \frac{80}{400} = 1 - 0.2 = 0.8 \) या 80%.
सिंक का ताप \( T_2 \): \( \frac{Q_2}{Q_1} = \frac{T_2}{T_1} \)
\[ \frac{80}{400} = \frac{T_2}{400} \]
\[ T_2 = 80 \, \text{K} \]
अतः सिंक का ताप 80 K और दक्षता 80% है।
25. ऊर्जा समविभाजन का नियम लिखिए। एक परमाणुक एवं द्वि परमाणुक गैस की मोलर ऊष्मा धारिताओं का अनुपात ज्ञात कीजिए।
ऊर्जा समविभाजन का नियम: किसी तापीय साम्यावस्था में गैस के अणुओं की कुल ऊर्जा प्रति स्वातंत्र्य कोटि पर समान रूप से वितरित होती है, और प्रति स्वातंत्र्य कोटि की औसत ऊर्जा \( \frac{1}{2} k_B T \) होती है, जहाँ \( k_B \) बोल्ट्ज़मान स्थिरांक और \( T \) परम ताप है।
मोलर ऊष्मा धारिताओं का अनुपात:
- एक परमाणुक गैस: स्वातंत्र्य कोटि = 3 (तीन स्थानांतरीय)। \( C_V = \frac{3}{2}R \), \( C_P = \frac{5}{2}R \), अनुपात \( \gamma = \frac{C_P}{C_V} = \frac{5}{3} \).
- द्वि परमाणुक गैस (कम ताप पर, कंपन नगण्य): स्वातंत्र्य कोटि = 5 (3 स्थानांतरीय + 2 घूर्णी)। \( C_V = \frac{5}{2}R \), \( C_P = \frac{7}{2}R \), अनुपात \( \gamma = \frac{7}{5} = 1.4 \).
अतः अनुपात \( \frac{\gamma_{\text{एक}}}{\gamma_{\text{द्वि}}} = \frac{5/3}{7/5} = \frac{25}{21} \).
26. एक पिण्ड निम्न सम्बन्ध के अनुसार सरल आवृत गति करता है: \( y = 10 \sin\left(2\pi t + \frac{\pi}{4}\right) \) मीटर। \( t = 2 \) सेकण्ड पर पिण्ड के विस्थापन, वेग व त्वरण ज्ञात कीजिए।
दिया है: \( y = 10 \sin\left(2\pi t + \frac{\pi}{4}\right) \) मीटर।
\( t = 2 \) सेकण्ड पर:
विस्थापन: \( y = 10 \sin\left(2\pi \times 2 + \frac{\pi}{4}\right) = 10 \sin\left(4\pi + \frac{\pi}{4}\right) = 10 \sin\left(\frac{\pi}{4}\right) = 10 \times \frac{1}{\sqrt{2}} = 5\sqrt{2} \, \text{m} \)
वेग: \( v = \frac{dy}{dt} = 10 \times 2\pi \cos\left(2\pi t + \frac{\pi}{4}\right) = 20\pi \cos\left(2\pi t + \frac{\pi}{4}\right) \)
\( t = 2 \) पर: \( v = 20\pi \cos\left(4\pi + \frac{\pi}{4}\right) = 20\pi \cos\left(\frac{\pi}{4}\right) = 20\pi \times \frac{1}{\sqrt{2}} = 10\sqrt{2}\pi \, \text{m/s} \)
त्वरण: \( a = \frac{d^2y}{dt^2} = -10 \times (2\pi)^2 \sin\left(2\pi t + \frac{\pi}{4}\right) = -40\pi^2 \sin\left(2\pi t + \frac{\pi}{4}\right) \)
\( t = 2 \) पर: \( a = -40\pi^2 \sin\left(\frac{\pi}{4}\right) = -40\pi^2 \times \frac{1}{\sqrt{2}} = -20\sqrt{2}\pi^2 \, \text{m/s}^2 \)
अतः विस्थापन \( 5\sqrt{2} \) मीटर, वेग \( 10\sqrt{2}\pi \) मीटर/सेकण्ड, त्वरण \( -20\sqrt{2}\pi^2 \) मीटर/सेकण्ड²।
27. सिद्ध करो कि खुले पाइप की मूल आवृत्ति समान लम्बाई के बन्द पाइप की मूल आवृत्ति की दुगुनी होती है।
प्रमाण: माना पाइप की लम्बाई \( L \) है और ध्वनि की चाल \( v \) है।
खुला पाइप: दोनों सिरे खुले होते हैं, अतः दोनों सिरों पर प्रस्पंद बनते हैं। मूल आवृत्ति के लिए, पाइप में एक अर्ध तरंगदैर्ध्य होता है: \( L = \frac{\lambda_o}{2} \) ⇒ \( \lambda_o = 2L \).
मूल आवृत्ति \( f_o = \frac{v}{\lambda_o} = \frac{v}{2L} \).
बन्द पाइप: एक सिरा बन्द (निस्पंद) और दूसरा खुला (प्रस्पंद)
सिद्ध कीजिए कि खुले ऑर्गन पाइप की मूल आवृत्ति, समान लम्बाई के बंद ऑर्गन पाइप की मूल आवृत्ति की दुगुनी होती है। आवश्यक चित्र बनाइए। हल: माना कि ऑर्गन पाइप की लम्बाई L है। बंद ऑर्गन पाइप: इसमें एक सिरा बंद (निस्पंद) तथा दूसरा सिरा खुला (प्रस्पंद) होता है। मूल स्वरक (प्रथम हार्मोनिक) के लिए: λ₁/4 = L ⇒ λ₁ = 4L मूल आवृत्ति n₁ = v/λ₁ = v/(4L) खुला ऑर्गन पाइप: इसमें दोनों सिरे खुले (प्रस्पंद) होते हैं। मूल स्वरक के लिए: λ₂/2 = L ⇒ λ₂ = 2L मूल आवृत्ति n₂ = v/λ₂ = v/(2L) अतः n₂/n₁ = [v/(2L)] / [v/(4L)] = 2 ⇒ n₂ = 2n₁ अतः खुले ऑर्गन पाइप की मूल आवृत्ति, बंद ऑर्गन पाइप की मूल आवृत्ति की दुगुनी होती है। चित्र: (बंद पाइप में λ/4 = L, खुले पाइप में λ/2 = L दर्शाते हुए तरंग आकृति) (a) टोरीसेली का सिद्धान्त लिखिए। प्रवाह का वेग का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। (b) मैग्नस प्रभाव एवं हार्टअटैक को समझाइए। (a) टोरीसेली का सिद्धान्त: किसी टंकी की दीवार में छेद से निकलने वाले द्रव का वेग उतना ही होता है जितना कि उस ऊँचाई तक स्वतंत्रतापूर्वक गिरने वाले पिंड का वेग होता है। प्रवाह के वेग का सूत्र: माना टंकी में द्रव का स्तर h ऊँचाई पर है तथा छेद टंकी के तल पर है। बरनौली प्रमेय से: P + ρgh + ½ρv² = स्थिरांक द्रव के मुक्त पृष्ठ पर: P = P₀ (वायुमंडलीय दाब), v = 0 (लगभग), ऊँचाई = h छेद पर: P = P₀, ऊँचाई = 0, वेग = v ⇒ P₀ + ρgh + 0 = P₀ + 0 + ½ρv² ⇒ ρgh = ½ρv² ⇒ v = √(2gh) यही प्रवाह के वेग का सूत्र है। (b) मैग्नस प्रभाव: जब कोई घूर्णन करती हुई गेंद वायु में गति करती है, तो उस पर एक पार्श्व बल लगता है जो गेंद के मार्ग को वक्रित कर देता है। यह बरनौली सिद्धांत के कारण होता है - घूर्णन के कारण गेंद के एक ओर वायु का वेग बढ़ जाता है (दाब कम) और दूसरी ओर घट जाता है (दाब अधिक), जिससे दाबांतर उत्पन्न होता है। हार्टअटैक: हृदयाघात में हृदय की धमनियों में रुकावट (जैसे कोलेस्ट्रॉल जमा होना) के कारण रक्त प्रवाह बाधित होता है। बरनौली सिद्धांत के अनुसार, संकरे स्थान पर रक्त का वेग बढ़ जाता है और दाब कम हो जाता है, जिससे धमनी और अधिक संकरी हो सकती है या पूरी तरह बंद हो सकती है। बरनौली का सिद्धान्त लिखिए। बरनौली का समीकरण व्युत्पन्न कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए। बरनौली का सिद्धान्त: किसी अश्यान, असंपीड्य द्रव के धारारेखीय प्रवाह में, द्रव के प्रति एकांक आयतन में दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग स्थिर रहता है। बरनौली का समीकरण व्युत्पन्न: माना एक अश्यान, असंपीड्य द्रव धारारेखीय प्रवाह में है। द्रव के एक धारा-नलिका पर विचार करें जिसके एक सिरे A पर अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A₁, दाब P₁, वेग v₁ तथा ऊँचाई h₁ है तथा दूसरे सिरे B पर A₂, P₂, v₂, h₂ है। कार्य-ऊर्जा प्रमेय से: द्रव पर किया गया कार्य = गतिज ऊर्जा में परिवर्तन + स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन दाब के कारण कार्य = P₁A₁v₁Δt - P₂A₂v₂Δt = (P₁ - P₂)ΔV (जहाँ ΔV = A₁v₁Δt = A₂v₂Δt) गतिज ऊर्जा में परिवर्तन = ½ρΔV(v₂² - v₁²) स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन = ρΔVg(h₂ - h₁) अतः (P₁ - P₂)ΔV = ½ρΔV(v₂² - v₁²) + ρΔVg(h₂ - h₁) ⇒ P₁ + ½ρv₁² + ρgh₁ = P₂ + ½ρv₂² + ρgh₂ ⇒ P + ½ρv² + ρgh = स्थिरांक यही बरनौली का समीकरण है। चित्र: (धारा-नलिका दर्शाते हुए A और B बिंदुओं पर चिह्नित मापदंड) उष्मागतिकी के प्रथम नियम का कथन दीजिए। समतापी प्रक्रम की परिभाषा एवं दो उदाहरण दीजिए। समतापी प्रक्रम में किये गये कार्य का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। उष्मागतिकी का प्रथम नियम: ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है, इसे केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित किया जा सकता है। गणितीय रूप: ΔQ = ΔU + ΔW, जहाँ ΔQ निकाय को दी गई ऊष्मा, ΔU आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि, ΔW निकाय द्वारा किया गया कार्य। समतापी प्रक्रम: वह प्रक्रम जिसमें निकाय का ताप स्थिर रहता है। उदाहरण: (1) किसी गैस को धीरे-धीरे संपीडित करना ताकि ताप स्थिर रहे। (2) बर्फ का पिघलना (स्थिर ताप पर)। समतापी प्रक्रम में कार्य का सूत्र: समतापी प्रक्रम में PV = स्थिरांक (बॉयल का नियम)। कार्य W = ∫PdV (प्रारंभिक आयतन V₁ से अंतिम आयतन V₂ तक) समतापी प्रक्रम के लिए PV = nRT (T स्थिर) ⇒ P = nRT/V ⇒ W = ∫(nRT/V)dV = nRT ∫(dV/V) = nRT [ln V] ⇒ W = nRT ln(V₂/V₁) या W = 2.303 nRT log(V₂/V₁) यही समतापी प्रक्रम में किये गये कार्य का सूत्र है। रुद्धोष्म प्रक्रम की परिभाषा एवं दो उदाहरण दीजिए। रुद्धोष्म प्रक्रम में किये गये कार्य का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। रुद्धोष्म प्रक्रम: वह प्रक्रम जिसमें निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता (ΔQ = 0)। उदाहरण: (1) साइकिल पंप द्वारा हवा भरने पर पंप गर्म हो जाता है। (2) डीजल इंजन में संपीडन स्ट्रोक। रुद्धोष्म प्रक्रम में कार्य का सूत्र: रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए PV^γ = स्थिरांक (K), जहाँ γ = Cp/Cv कार्य W = ∫PdV (V₁ से V₂ तक) P = K/V^γ ⇒ W = ∫(K/V^γ)dV = K ∫V^(-γ)dV ⇒ W = K [V^(1-γ)/(1-γ)] (V₁ से V₂) ⇒ W = [K/(1-γ)] [V₂^(1-γ) - V₁^(1-γ)] चूँकि K = P₁V₁^γ = P₂V₂^γ ⇒ W = [1/(1-γ)] [P₂V₂^γ V₂^(1-γ) - P₁V₁^γ V₁^(1-γ)] ⇒ W = [1/(1-γ)] [P₂V₂ - P₁V₁] या W = (P₁V₁ - P₂V₂)/(γ - 1) यही रुद्धोष्म प्रक्रम में किये गये कार्य का सूत्र है। सरल आवर्त गति में कण की गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा व कुल ऊर्जा के व्यंजक व्युत्पन्न कर यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण की पुष्टि कीजिए। ऊर्जा-विस्थापन एवं ऊर्जा-समय आलेख बनाइए। हल: माना सरल आवर्त गति करने वाले कण का विस्थापन y = A sin(ωt + φ) है, जहाँ A आयाम, ω कोणीय वेग, t समय, φ प्रारंभिक कला है। वेग v = dy/dt = Aω cos(ωt + φ) गतिज ऊर्जा (K): K = ½mv² = ½m A²ω² cos²(ωt + φ) चूँकि ω² = k/m (जहाँ k बल स्थिरांक), तो K = ½kA² cos²(ωt + φ) या K = ½k(A² - y²) [क्योंकि cos² = 1 - sin² = 1 - y²/A²] स्थितिज ऊर्जा (U): U = ½ky² = ½k A² sin²(ωt + φ) कुल ऊर्जा (E): E = K + U = ½kA² [cos²(ωt + φ) + sin²(ωt + φ)] = ½kA² अतः कुल ऊर्जा E = ½kA² = ½mω²A² = स्थिरांक। यह यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण को दर्शाता है - गतिज और स्थितिज ऊर्जा परस्पर परिवर्तित होती रहती हैं, लेकिन कुल ऊर्जा नियत रहती है। ऊर्जा-विस्थापन आलेख: (परवलयाकार: K = ½k(A² - y²) नीचे की ओर खुला, U = ½ky² ऊपर की ओर खुला, E = ½kA² क्षैतिज रेखा) ऊर्जा-समय आलेख: (K और U ज्यावक्रीय रूप से बदलते हैं, E स्थिर रेखा) सरल लोलक के आवर्तकाल का सूत्र व्युत्पन्न कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।प्रश्न 28
प्रश्न 29
अथवा
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अथवा
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