RBSE Class 11th 2018 Chemistry-2018 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 11th
Exam year 2018
Subject Chemistry-2018
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 11th 2018 Chemistry-2018

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Rajasthan Board Class 11th Chemistry-2018 2018 solved Previous Year Question Papers

वार्षिक परीक्षा, 2077-78

Yearly Examination 2077-78

विषय – रसायन विज्ञान (Subject – Chemistry)

समय (Time): 3¼ घंटे  |  कक्षा (Class): XI  |  पूर्णांक (M.M.): 70

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश:

  1. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  2. जिन प्रश्नों में आंतरिक विकल्प है, उन सभी के उत्तर एक साथ लिखें।
  3. प्रश्न 1 से 8 तक – 1 अंक, 9 से 20 तक – 2-2 अंक, 21 से 26 तक – 3-3 अंक तथा 27 से 30 तक – 5-5 अंक के हैं।
  4. प्रश्न संख्या 29 तथा 30 में वैकल्पिक प्रश्न दिए गए हैं, जिनमें से एक प्रश्न करना अनिवार्य है।

1. जब n+l=5 हो, तो उपकोशों की कुल संख्या क्या होगी?

When n+l=5, then what is the total number of subshells?

उत्तर: n+l = 5 के लिए संभावित उपकोश: 5s (n=5, l=0), 4p (n=4, l=1), 3d (n=3, l=2), 4f (n=4, l=3) संभव नहीं क्योंकि l ≤ n-1। अतः कुल उपकोश = 3 (5s, 4p, 3d)।

2. आधुनिक आवर्त नियम का आधार क्या है?

What is the basis of modern periodic rule?

उत्तर: आधुनिक आवर्त नियम का आधार तत्वों का परमाणु क्रमांक (atomic number) है।

3. संयोजकता बंध सिद्धांत किसने दिया?

Who gave valence bond theory?

उत्तर: संयोजकता बंध सिद्धांत (Valence Bond Theory) लिनस पॉलिंग (Linus Pauling) ने दिया।

4. हरित गृह प्रभाव उत्पन्न करने वाली दो गैसों के नाम लिखिए।

Write the name of any two gases which create greenhouse effect.

उत्तर: कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) और मीथेन (CH₄)।

5. निम्नलिखित के मोलर द्रव्यमान का परिकलन कीजिए –

Calculate the molecular weight of the following compound –

(i) H₂SO₄

उत्तर: H₂SO₄ का मोलर द्रव्यमान = (2×1) + 32 + (4×16) = 2 + 32 + 64 = 98 g/mol

6. तापमान में वृद्धि करने पर मोलरता पर क्या प्रभाव पड़ता है?

What is the effect on molarity with increase in temperature?

उत्तर: तापमान बढ़ने पर विलयन का आयतन बढ़ता है, जिससे मोलरता (molarity) घट जाती है।

7. क्षार धातुओं के द्वितीय आयनन विभव का मान प्रथम आयनन विभव से अधिक होता है। एक कारण लिखिए।

The second ionization potential of alkali metals is more than the first ionization potential. Write one reason only.

उत्तर: प्रथम इलेक्ट्रॉन निकलने के बाद धनायन का आकार छोटा हो जाता है और प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है, जिससे दूसरा इलेक्ट्रॉन निकालना अधिक कठिन होता है।

8. पोटैशियम की तुलना में सोडियम कम क्रियाशील है। कारण दीजिए।

Sodium is less reactive than potassium. Give reason.

उत्तर: पोटैशियम का परमाणु आकार सोडियम से बड़ा होता है, जिससे संयोजी इलेक्ट्रॉन नाभिक से कम आकर्षित होता है और अधिक आसानी से निकल जाता है, अतः पोटैशियम अधिक क्रियाशील है।

9. सेल विभव क्या है? डेनियल सेल का सेल विभव ज्ञात कीजिए।

What is cell potential? Calculate the cell potential of Daniel cell.

उत्तर: सेल विभव (Cell potential) वह विद्युत वाहक बल है जो किसी विद्युत रासायनिक सेल के दो इलेक्ट्रोडों के बीच उत्पन्न होता है। डेनियल सेल में एनोड (Zn) और कैथोड (Cu) होते हैं। मानक इलेक्ट्रोड विभव: E°(Zn²⁺/Zn) = -0.76 V, E°(Cu²⁺/Cu) = +0.34 V। सेल विभव = E°(कैथोड) – E°(एनोड) = 0.34 – (-0.76) = 1.10 V।

10. निम्नलिखित कक्षकों की सभी चारों क्वांटम संख्याएँ लिखिए –

Write all four quantum numbers of following orbitals:

(i) 4s²    (ii) 5d²

उत्तर:

(i) 4s² के लिए: n=4, l=0, m=0, s=+½ या -½ (दो इलेक्ट्रॉनों के लिए)

(ii) 5d² के लिए: n=5, l=2, m = -2, -1, 0, +1, +2 (कोई भी दो मान), s=+½ या -½

प्रश्न पत्र – रसायन विज्ञान (2018) – कक्षा 11

खंड – 2

2. निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए:

(i) पृष्ठ तनाव (Surface Tension): यह द्रव के पृष्ठ पर अणुओं के बीच लगने वाला बल है जो पृष्ठ को न्यूनतम क्षेत्रफल में रखने का प्रयास करता है। इसका मात्रक न्यूटन/मीटर (N/m) होता है।

(ii) श्यानता (Viscosity): यह द्रव की वह प्रवृत्ति है जो उसकी परतों के बीच आपेक्षिक गति का विरोध करती है। इसे आंतरिक घर्षण भी कहते हैं। इसका मात्रक पॉइज़ (Poise) होता है।

3. नाइट्रोजन की आयनिक विभव ऑक्सीजन से अधिक होती है। कारण स्पष्ट कीजिए।

नाइट्रोजन (N) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p³ है, जिसमें 2p कक्षक आधे भरे हुए हैं (अर्ध-पूर्ण कक्षक)। अर्ध-पूर्ण कक्षक अधिक स्थायी होते हैं। इसलिए नाइट्रोजन से एक इलेक्ट्रॉन निकालने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऑक्सीजन (O) का विन्यास 1s² 2s² 2p⁴ है, जिसमें 2p कक्षक में एक युग्मित इलेक्ट्रॉन होता है, जो अपेक्षाकृत कम स्थायी है और आसानी से निकल जाता है। इस कारण नाइट्रोजन की आयनन एन्थैल्पी (आयनिक विभव) ऑक्सीजन से अधिक होती है।

4. (i) pH को समझाइए।

pH किसी विलयन में हाइड्रोजन आयन (H⁺) सांद्रता का माप है। इसे निम्न प्रकार परिभाषित किया जाता है:

pH = -log₁₀[H⁺]

pH पैमाना 0 से 14 तक होता है। 7 का pH उदासीन, 7 से कम अम्लीय और 7 से अधिक क्षारीय विलयन को दर्शाता है।

(ii) 0.001 M HCl विलयन का pH मान ज्ञात कीजिए।

HCl एक प्रबल अम्ल है, जो पूर्णतः आयनित होता है।

[H⁺] = 0.001 M = 10⁻³ M

pH = -log₁₀(10⁻³) = 3

अतः विलयन का pH मान 3 है।

5. एथेन के निम्नलिखित संरूपण के न्यूमैन प्रक्षेपण को चित्रित कीजिए:

(अ) विपाटित संरूपण (Staggered Conformation): इसमें एक कार्बन पर उपस्थित हाइड्रोजन परमाणु दूसरे कार्बन पर उपस्थित हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच में स्थित होते हैं। यह सबसे स्थायी संरूपण है।

(ब) ग्रसित संरूपण (Eclipsed Conformation): इसमें एक कार्बन पर उपस्थित हाइड्रोजन परमाणु दूसरे कार्बन पर उपस्थित हाइड्रोजन परमाणुओं के ठीक सामने (एक रेखा में) स्थित होते हैं। यह सबसे कम स्थायी संरूपण है।

(न्यूमैन प्रक्षेपण में, पीछे के कार्बन को एक वृत्त और सामने के कार्बन को एक बिंदु द्वारा दर्शाया जाता है।)

6. ऑर्थो तथा पैरा हाइड्रोजन में कोई दो अंतर लिखिए।

गुण ऑर्थो हाइड्रोजन पैरा हाइड्रोजन
नाभिकीय प्रचक्रण (Spin) दोनों प्रोटॉनों के प्रचक्रण समान दिशा में (समानांतर) होते हैं। दोनों प्रोटॉनों के प्रचक्रण विपरीत दिशा में (प्रतिसमानांतर) होते हैं।
स्थायित्व उच्च ताप पर अधिक स्थायी। निम्न ताप पर अधिक स्थायी।

7. (i) CO₂ गैस है जबकि SiO₂ ठोस है। कारण स्पष्ट कीजिए।

CO₂ में कार्बन और ऑक्सीजन के बीच द्विबंध (C=O) होते हैं, जो अणु को रैखिक और अलग-अलग अणुओं के रूप में रखते हैं। इन अणुओं के बीच केवल दुर्बल वान्डर वाल्स बल होते हैं, जिससे यह गैस है।

SiO₂ में सिलिकॉन और ऑक्सीजन के बीच एकल बंध (Si-O) होते हैं, जो एक त्रिविमीय जालक (3D network) का निर्माण करते हैं। इस जालक में प्रत्येक सिलिकॉन चार ऑक्सीजन से और प्रत्येक ऑक्सीजन दो सिलिकॉन से जुड़ा होता है। यह प्रबल सहसंयोजक बंधों का जालक SiO₂ को एक कठोर ठोस बनाता है।

(ii) जिओलाइट क्या है?

जिओलाइट एलुमिनोसिलिकेट खनिज हैं जिनमें त्रिविमीय जालक संरचना होती है। इनमें सूक्ष्म छिद्र (pores) होते हैं जो अणुओं को आकार के आधार पर अलग कर सकते हैं, इसलिए इन्हें आण्विक छलनी (molecular sieves) भी कहा जाता है। इनका उपयोग जल मृदुकरण, उत्प्रेरक और गैस पृथक्करण में किया जाता है।

8. ΔH तथा ΔE के मध्य सम्बन्ध ज्ञात कीजिए।

एन्थैल्पी परिवर्तन (ΔH) और आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन (ΔE) में निम्नलिखित संबंध है:

ΔH = ΔE + ΔngRT

जहाँ:

  • Δng = गैसीय उत्पादों के मोलों की संख्या - गैसीय अभिकारकों के मोलों की संख्या
  • R = गैस स्थिरांक
  • T = परम ताप (केल्विन में)

यदि Δng = 0, तो ΔH = ΔE होता है।

9. अम्ल वर्षा क्या है? यह पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करती है?

अम्ल वर्षा: जब वायुमंडल में सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) और नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOₓ) जैसी गैसें जलवाष्प के साथ अभिक्रिया करके सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) और नाइट्रिक अम्ल (HNO₃) बनाती हैं, तो ये अम्ल वर्षा के रूप में पृथ्वी पर गिरती हैं। सामान्य वर्षा का pH लगभग 5.6 होता है, जबकि अम्ल वर्षा का pH 5.6 से कम होता है।

पर्यावरण पर प्रभाव:

  • मिट्टी की उर्वरता कम कर देती है।
  • जल स्रोतों (नदियों, झीलों) को अम्लीय बनाकर जलीय जीवन को नुकसान पहुँचाती है।
  • भवनों, विशेषकर संगमरमर (मूर्तियों) को क्षति पहुँचाती है।
  • वनस्पति और फसलों को नुकसान पहुँचाती है।

10. N₂ + 3H₂ ⇌ 2NH₃ अभिक्रिया ताप व दाब द्वारा किस प्रकार प्रभावित होगी?

यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (exothermic) है (ΔH = -92 kJ/mol) और इसमें गैसीय मोलों की संख्या घटती है (4 मोल से 2 मोल)।

  • दाब का प्रभाव (ले-शातेलिए सिद्धांत): दाब बढ़ाने पर साम्य उस दिशा में विस्थापित होगा जिसमें मोलों की संख्या कम हो। अतः उच्च दाब NH₃ के निर्माण को बढ़ावा देता है।
  • ताप का प्रभाव: ताप बढ़ाने पर साम्य उष्माशोषी (endothermic) दिशा (विपरीत दिशा) में विस्थापित होगा, जिससे NH₃ का वियोजन बढ़ेगा। अतः निम्न ताप NH₃ के निर्माण के लिए अनुकूल है।

11. स्वत: प्रक्रम क्या है? गिब्स हेल्महोल्ट्ज समीकरण ज्ञात कीजिए।

स्वत: प्रक्रम (Spontaneous Process): वह प्रक्रम जो बिना किसी बाह्य हस्तक्षेप के अपने आप होता है, स्वत: प्रक्रम कहलाता है। उदाहरण: बर्फ का पिघलना, लोहे में जंग लगना।

गिब्स हेल्महोल्ट्ज समीकरण:

ΔG = ΔH - TΔS

जहाँ:

  • ΔG = गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन
  • ΔH = एन्थैल्पी परिवर्तन
  • T = परम ताप
  • ΔS = एन्ट्रॉपी परिवर्तन

किसी प्रक्रम के स्वत: होने के लिए ΔG का मान ऋणात्मक (ΔG < 0) होना आवश्यक है।

12. निम्नलिखित यौगिकों में केन्द्रीय परमाणु

प्रश्न 24

(i) मार्कोनिकॉफ नियम (Markonicoff rule) को समझाइए।

(ii) प्रेरणिक प्रभाव (Inductive Effect) को परिभाषित कीजिए।

(iii) निम्नलिखित अभिक्रिया की मुक्त मूलक प्रतिस्थापन क्रियाविधि को स्पष्ट कीजिए:

CH₄ + Cl₂ → CH₃Cl + HCl

हल:

(i) मार्कोनिकॉफ नियम: जब कोई असममित अभिकर्मक (जैसे HX) किसी असममित एल्कीन से जुड़ता है, तो हाइड्रोजन उस कार्बन पर जुड़ता है जिस पर पहले से अधिक हाइड्रोजन परमाणु उपस्थित हों।

(ii) प्रेरणिक प्रभाव: यह एक स्थायी प्रभाव है जिसमें किसी अणु में इलेक्ट्रॉनों का σ-बंधों के माध्यम से एक परमाणु से दूसरे परमाणु की ओर स्थानांतरण होता है, जो विद्युत-ऋणात्मकता में अंतर के कारण होता है।

(iii) मुक्त मूलक प्रतिस्थापन क्रियाविधि:

  1. श्रृंखला प्रारंभ (Initiation): Cl₂ अणु UV प्रकाश या ऊष्मा से दो क्लोरीन मुक्त मूलकों (Cl•) में विभाजित होता है: Cl₂ → 2Cl•
  2. श्रृंखला प्रसार (Propagation): Cl• मीथेन (CH₄) से H परमाणु निकालकर HCl और मिथाइल मूलक (CH₃•) बनाता है: CH₄ + Cl• → CH₃• + HCl। फिर CH₃• Cl₂ से अभिक्रिया करके CH₃Cl और एक नया Cl• बनाता है: CH₃• + Cl₂ → CH₃Cl + Cl•
  3. श्रृंखला समाप्ति (Termination): दो मुक्त मूलक आपस में जुड़कर उत्पाद बनाते हैं, जैसे: Cl• + Cl• → Cl₂, CH₃• + Cl• → CH₃Cl, CH₃• + CH₃• → C₂H₆

प्रश्न 25

(i) AlCl₃ का अणु सहसंयोजी होता है जबकि AlF₃ आयनिक होता है, क्यों?

(ii) अष्टक नियम को परिभाषित कीजिए तथा इसकी सीमाएँ लिखिए।

(iii) अतिव्यापन किसे कहते हैं? H₂ अणु बनने की क्रिया का केवल चित्र द्वारा समझाइए।

हल:

(i) AlCl₃ में Al³⁺ आयन छोटा होता है और Cl⁻ आयन बड़ा होता है, जिससे ध्रुवण अधिक होता है और सहसंयोजी बंध बनता है। जबकि AlF₃ में F⁻ आयन छोटा होता है, जिससे ध्रुवण कम होता है और आयनिक बंध बनता है।

(ii) अष्टक नियम: यह नियम कहता है कि परमाणु अपने संयोजकता कोश में 8 इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके स्थायी विन्यास (नोबल गैस विन्यास) प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। सीमाएँ: (a) H, He, Li जैसे छोटे परमाणुओं पर लागू नहीं होता। (b) PCl₅, SF₆ जैसे यौगिकों में विस्तारित अष्टक पाया जाता है। (c) BeCl₂, BF₃ जैसे यौगिकों में अपूर्ण अष्टक होता है।

(iii) अतिव्यापन: जब दो परमाणुओं के परमाणु कक्षक एक-दूसरे पर आंशिक रूप से अध्यारोपित होते हैं, तो इसे अतिव्यापन कहते हैं। H₂ अणु में दो H परमाणुओं के 1s कक्षक अतिव्यापित होकर एक σ बंध बनाते हैं।

चित्र: [H(1s) + H(1s) → H₂ (σ बंध)]

प्रश्न 26

(i) एरोमैटिकता की आवश्यक शर्तें लिखिए।

(ii) निम्नलिखित में से एरोमैटिक तथा नॉन-एरोमैटिक यौगिकों को वर्गीकृत कीजिए:

(a) बेंजीन (b) साइक्लोहेक्सेन (c) पाइरीडीन (d) साइक्लोब्यूटाडाइन

हल:

(i) एरोमैटिकता की आवश्यक शर्तें: (a) अणु चक्रीय और समतल होना चाहिए। (b) प्रत्येक परमाणु sp² संकरित होना चाहिए। (c) इसमें (4n+2) π इलेक्ट्रॉन होने चाहिए (हकल का नियम, जहाँ n = 0, 1, 2, ...)। (d) पूर्ण संयुग्मन होना चाहिए।

(ii) वर्गीकरण:

  • एरोमैटिक: बेंजीन (6π इलेक्ट्रॉन), पाइरीडीन (6π इलेक्ट्रॉन)
  • नॉन-एरोमैटिक: साइक्लोहेक्सेन (कोई π इलेक्ट्रॉन नहीं), साइक्लोब्यूटाडाइन (4π इलेक्ट्रॉन, 4n नियम का पालन)

प्रश्न 27

(i) ला-शातिलिये का नियम लिखिए।

(ii) बफर विलयन से क्या तात्पर्य है? इसकी दो विशेषताएँ लिखिए।

(iii) लुइस की अवधारणा के अनुसार अम्ल तथा क्षार को स्पष्ट कीजिए।

हल:

(i) ला-शातिलिये का नियम: यदि किसी साम्यावस्था में स्थित निकाय पर कोई बाह्य परिवर्तन (जैसे सांद्रता, दाब, ताप) लागू किया जाता है, तो निकाय उस परिवर्तन के प्रभाव को कम करने की दिशा में साम्यावस्था को स्थानांतरित करता है।

(ii) बफर विलयन: यह एक ऐसा विलयन है जो तनुकरण या अल्प मात्रा में अम्ल/क्षार मिलाने पर अपने pH को लगभग स्थिर रखता है। विशेषताएँ: (a) यह दुर्बल अम्ल और उसके लवण या दुर्बल क्षार और उसके लवण का मिश्रण होता है। (b) इसका pH मान बहुत कम बदलता है।

(iii) लुइस की अवधारणा: लुइस अम्ल वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकता है (जैसे BF₃, AlCl₃), और लुइस क्षार वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान कर सकता है (जैसे NH₃, H₂O)।

प्रश्न 28

(i) निम्न के IUPAC नाम लिखिए:

(A) CH₃–CH=CH–CH₂–CH₂–C≡CH

(B) CH₃–CH(Cl)–CH₂–CH₂–C(CH₃)₂–CH₃

(ii) निम्न पर टिप्पणी लिखिए:

(A) अतिसंयुग्मन (Hyperconjugation)

(B) कार्बन मुक्त मूलक (Carbon Free radical)

हल:

(i) IUPAC नाम:

  • (A) हेप्ट-3-ईन-1-आइन (Hept-3-en-1-yne)
  • (B) 2-क्लोरो-5,5-डाइमिथाइलहेक्सेन (2-Chloro-5,5-dimethylhexane)

(ii) टिप्पणी:

(A) अतिसंयुग्मन: यह एक प्रकार का स्थायीकरण प्रभाव है जिसमें C–H σ बंध के इलेक्ट्रॉन π बंध या खाली p कक्षक के साथ अतिव्यापन करते हैं। यह एल्किल समूहों की उपस्थिति में कार्बोकैटायन, मुक्त मूलक और एल्कीन को स्थायी बनाता है।

(B) कार्बन मुक्त मूलक: यह एक ऐसा स्पीशीज है जिसमें कार्बन परमाणु पर एक अयुग्मित इलेक्ट्रॉन होता है (जैसे CH₃•)। यह अत्यधिक अभिक्रियाशील होता है और मुक्त मूलक प्रतिस्थापन अभिक्रियाओं में भाग लेता है। इसकी स्थायित्व तृतीयक > द्वितीयक > प्राथमिक होती है।

प्रश्न 28 (iii)

किन यौगिकों में नाभिक स्नेही योगात्मक अभिक्रिया सम्पन्न होती है? समझाइए।
In which compound nucleophilic addition reaction occurs? Explain.

नाभिक स्नेही योगात्मक अभिक्रिया (Nucleophilic Addition Reaction) उन यौगिकों में होती है जिनमें कार्बोनिल समूह (C=O) उपस्थित होता है, जैसे एल्डिहाइड और कीटोन। इन यौगिकों में कार्बन पर आंशिक धनावेश (δ+) होता है, जो नाभिक स्नेही (न्यूक्लियोफाइल) को आकर्षित करता है। उदाहरण: फॉर्मेल्डिहाइड (HCHO) में HCN का योग।

प्रश्न 29

(i) सहसंयोजक बंध के लिए MOT को स्पष्ट कीजिए।
Explain the covalent bond by MOT.

आण्विक कक्षक सिद्धांत (MOT) के अनुसार, सहसंयोजक बंध तब बनता है जब दो परमाणुओं के परमाणु कक्षक आपस में अतिव्यापन करके आण्विक कक्षक बनाते हैं। ये आण्विक कक्षक दो प्रकार के होते हैं: बंधन कक्षक (आबंधी) और प्रतिबंधन कक्षक (प्रतिआबंधी)। बंधन कक्षक में इलेक्ट्रॉन भरने से बंध स्थायी होता है, जबकि प्रतिबंधन कक्षक में इलेक्ट्रॉन भरने से बंध कमजोर होता है। बंध क्रम = (बंधन कक्षक में इलेक्ट्रॉन - प्रतिबंधन कक्षक में इलेक्ट्रॉन) / 2।

(ii) MOT के द्वारा N₂ का बंध क्रम, चुम्बकीय प्रकृति तथा स्थायित्व को समझाइए।
Explain the bond order, magnetic properties and stability of N₂ by M.O.T.

N₂ अणु में कुल 14 इलेक्ट्रॉन होते हैं। MOT के अनुसार, इलेक्ट्रॉन विन्यास: σ1s², σ*1s², σ2s², σ*2s², π2px² = π2py², σ2pz²।

  • बंध क्रम: (10 - 4) / 2 = 3। तीन बंध (एक सिग्मा और दो पाई बंध) होते हैं।
  • चुम्बकीय प्रकृति: सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित होते हैं, अतः N₂ प्रतिचुम्बकीय (diamagnetic) है।
  • स्थायित्व: उच्च बंध क्रम (3) के कारण N₂ अत्यधिक स्थायी और अक्रियाशील है।

(iii) बंध लम्बाई को प्रभावित करने वाले कारक लिखिए।
Write the factors affecting the bond length.

बंध लम्बाई को प्रभावित करने वाले कारक:

  • बंध क्रम: बंध क्रम बढ़ने पर बंध लम्बाई घटती है।
  • परमाणु आकार: परमाणु का आकार बढ़ने पर बंध लम्बाई बढ़ती है।
  • संकरण: sp संकरण में बंध लम्बाई सबसे कम, sp² में मध्यम, sp³ में सबसे अधिक होती है।
  • आवेश: धनावेश बंध लम्बाई घटाता है, ऋणावेश बढ़ाता है।

अथवा

(92) संकरण किसे कहते हैं? XeF₄ में पाये जाने वाले संकरण तथा आकृति को स्पष्ट कीजिए।
What is hybridization? Explain the hybridization and structure of XeF₄.

संकरण: परमाणु के अलग-अलग ऊर्जा स्तरों के कक्षकों के मिश्रण से समान ऊर्जा के नए कक्षक बनने की प्रक्रिया को संकरण कहते हैं।

XeF₄ का संकरण और आकृति: XeF₄ में Xe का संकरण sp³d² होता है। इसमें Xe के केंद्रीय परमाणु पर 4 बंध युग्म और 2 एकाकी युग्म होते हैं। VSEPR सिद्धांत के अनुसार, इसकी आकृति वर्ग समतलीय (square planar) होती है, जहाँ एकाकी युग्म विपरीत दिशाओं में स्थित होते हैं।

(wv) V.S.E.P.R. सिद्धान्त को समझाइए।
Explain the V.S.E.P.R. Theory.

VSEPR (Valence Shell Electron Pair Repulsion) सिद्धांत के अनुसार, केंद्रीय परमाणु के चारों ओर उपस्थित इलेक्ट्रॉन युग्म (बंध युग्म और एकाकी युग्म) आपस में प्रतिकर्षण करते हैं और अधिकतम दूरी पर रहने का प्रयास करते हैं, जिससे अणु की ज्यामिति निर्धारित होती है। एकाकी युग्म का प्रतिकर्षण बंध युग्म से अधिक होता है।

(is) CO₃²⁻ की अनुनादी संरचना लिखिए।
Write the resonance structure of CO₃²⁻.

कार्बोनेट आयन (CO₃²⁻) की तीन अनुनादी संरचनाएँ होती हैं, जहाँ एक C=O द्विबंध और दो C-O⁻ एकल बंध होते हैं। द्विबंध तीनों ऑक्सीजन परमाणुओं के बीच विस्थानीकृत (delocalized) होता है।

O⁻ — C = O ↔ O = C — O⁻ ↔ O⁻ — C = O (तीनों संरचनाएँ समतुल्य)

प्रश्न 30

(i) निम्नलिखित अभिक्रिया की केवल रासायनिक समीकरण दीजिए-
Give only chemical equation of following reaction:

(A) वुर्टज अभिक्रिया (Wurtz Reaction)

2CH₃Br + 2Na → CH₃—CH₃ + 2NaBr

(B) फ्रीडल क्राफ्ट अभिक्रिया (Friedel-Crafts Reaction)

C₆H₆ + CH₃Cl → C₆H₅CH₃ + HCl (AlCl₃ उत्प्रेरक)

(C) कोल्बे वैद्युत अपघटनीय संश्लेषण (Kolbe's Electrolytic Synthesis)

2CH₃COOK + 2H₂O → CH₃—CH₃ + 2CO₂ + H₂ + 2KOH (वैद्युत अपघटन)

(iv) कैसे प्राप्त करेंगे (How to get):

(A) एथीलीन से बेंजीन (Ethylene to Benzene)

एथीलीन (CH₂=CH₂) को 873 K ताप पर उत्प्रेरक की उपस्थिति में गर्म करने पर बेंजीन प्राप्त होता है:
3CH₂=CH₂ → C₆H₆ + 3H₂

(B) प्रोपेन-2-ऑल से प्रोप-1-ईन (Propan-2-ol to Prop-1-ene)

प्रोपेन-2-ऑल को सांद्र H₂SO₄ के साथ गर्म करने पर निर्जलीकरण होता है, जिससे प्रोपीन मिलती है। प्रोप-1-ईन प्राप्त करने के लिए विशेष परिस्थितियाँ आवश्यक हैं; सामान्यतः प्रोपेन-2-ऑल से प्रोपीन (प्रोप-1-ईन) ही बनती है:
CH₃—CH(OH)—CH₃ → CH₃—CH=CH₂ + H₂O (सांद्र H₂SO₄, 443 K)

अथवा

(i) (A) तथा (B) लिखिए [Write (A) and (B)]:

(i) CH₃—CH—CH₃ → (A) → (B) (ROOR, HBr)

यह अभिक्रिया प्रोपीन (CH₃—CH=CH₂) से शुरू होती है। ROOR की उपस्थिति में HBr का योग एंटी-मार्कोवनिकोव नियम से होता है।

(A) = CH₃—CH₂—CH₂Br (1-ब्रोमोप्रोपेन)
(B) = CH₃—CH₂—CH₂OH (प्रोपेन-1-ऑल) [NaOH/H₂O द्वारा जल अपघटन]

(ii) 3CH≡CH → (A) (Sunlight, 873 K)

एसिटिलीन के तीन अणु लाल तप्त लोहे की नली (873 K) में से गुजरने पर बेंजीन बनाते हैं:
(A) = C₆H₆ (बेंजीन)

(iii) CH₃—CH₂—Cl → (A) (Na/ether)

यह वुर्टज अभिक्रिया है:
(A) = CH₃—CH₂—CH₂—CH₃ (ब्यूटेन)

(iv) CH₄ समावयवी संरचना लिखिए। Write the structure of C₄H₁₀ isomers.

C₄H₁₀ के दो समावयवी हैं:

  • n-ब्यूटेन: CH₃—CH₂—CH₂—CH₃
  • आइसोब्यूटेन (2-मिथाइलप्रोपेन): CH₃—CH(CH₃)—CH₃