RBSE Class 11th 2018 Hindi-2018 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 11th
Exam year 2018
Subject Hindi-2018
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 11th 2018 Hindi-2018

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Rajasthan Board Class 11th Hindi-2018 2018 solved Previous Year Question Papers

वार्षिक परीक्षा, 2017-18

हिन्दी अनिवार्य (कक्षा 11)

पूर्णांक: 100 | समय: 3 घंटे 15 मिनट

1. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

फल की विशेष आसक्ति से कर्म के लाघव की वासना उत्पन्न होती है, चित्त में यही आता है कि कर्म बहुत कम या बहुत सरल करना पड़े और फल बहुत सा मिल जाये। श्रीकृष्ण ने कर्म-मार्ग से फलासक्ति की प्रबलता हटाने का बहुत ही स्पष्ट उपदेश दिया, पर उनके समझाने पर भी भारतवासी इस वासना से ग्रस्त होकर कर्म से तो उदास हो बैठे और फल के इतने पीछे पड़े कि गली में ब्राह्मण को एक पेठा देकर पुत्र की आशा करने लगे, चार आने रोज का अनुष्ठान कराके व्यापार लाभ, शत्रु पर विजय, रोग से मुक्ति, धन-धान्य की वृद्धि तथा और भी न जाने क्या-क्या चाहने लगे। आसक्ति प्रस्तुत या उपस्थित वस्तु में ही ठीक कही जा सकती है। कर्म सामने उपस्थित रहता है। इससे आसक्ति उसी में चाहिए। फल दूर रहता है, इससे उसकी ओर कर्म का लक्ष्य काफी है। जिस आनंद से कर्म की उत्तेजना होती है और जो आनंद कर्म करते समय तक बराबर चला चलता है, उसी का नाम उत्साह है।

  1. गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

    उत्तर: कर्म और फल की आसक्ति / कर्म-फल का सही स्वरूप

  2. "फल की विशेष आसक्ति से कर्म के लाघव की वासना उत्पन्न होती है।" इस कथन के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

    उत्तर: लेखक कहना चाहता है कि जब मनुष्य फल के प्रति अत्यधिक आसक्त हो जाता है, तब वह कर्म को हल्का या सरल बनाने की इच्छा करने लगता है। वह चाहता है कि कम से कम प्रयास में अधिक से अधिक फल मिले, जो कर्म की गरिमा को कम करता है।

  3. श्रीकृष्ण ने कर्म मार्ग से फलासक्ति की प्रबलता हटाने का बहुत ही स्पष्ट उपदेश दिया था। इससे क्या तात्पर्य है?

    उत्तर: इसका तात्पर्य है कि श्रीकृष्ण ने गीता में स्पष्ट रूप से समझाया कि मनुष्य को फल की चिंता किए बिना केवल अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। फलासक्ति को त्यागकर निष्काम भाव से कर्म करना ही सच्चा कर्म-मार्ग है।

  4. उत्साह क्या है?

    उत्तर: उत्साह वह आनंद है जो कर्म करने की प्रेरणा देता है और कर्म करते समय तक निरंतर बना रहता है। यह कर्म में लगे रहने की शक्ति प्रदान करता है।

  5. भारतवासी किस वासना से ग्रस्त होकर कर्म करते हैं?

    उत्तर: भारतवासी फलासक्ति की वासना से ग्रस्त होकर कर्म करते हैं। वे कर्म से उदास होकर केवल फल की प्राप्ति के लिए छोटे-छोटे अनुष्ठान और दान-पुण्य करने लगते हैं, जिससे वे सच्चे कर्म-मार्ग से भटक जाते हैं।

2. निम्नलिखित अपठित पद्यांश को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

कर चरण विजित फतह पर झण्डा वही उड़ाते हैं
अपनी ही उँगुली पर जो खंजर की जंग छुड़ाते हैं।
पड़ी समय से होड़ खींच मत तलवों से काँटे चुन,
फूँक-फूँक चलती न जवानी, काँटों से बचकर झुककर।
नींद कहाँ उनकी आँखों में जो धुन के मतवाले हैं।
गति की तृष्णा और बढ़ती है, पड़ते जब पग में छाले हैं।
जागरूक की जय निश्चित है, हार चुके सोने वाले
लेना अनल किरीट भाल पर, ओ आशिक आशिक!

  1. पद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।

    उत्तर: जागरूकता का महत्व / साहस और संघर्ष

  2. "अपनी ही उँगुली पर जो खंजर की जंग छुड़ाते हैं" – इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: इस पंक्ति का आशय है कि जो व्यक्ति स्वयं ही अपनी उंगली पर खंजर की धार चलाता है (अर्थात स्वयं को कठिन परिस्थितियों में डालता है), वही सच्चा वीर है और विजय प्राप्त करता है। यह आत्म-अनुशासन और साहस का प्रतीक है।

  3. "फूँक-फूँक चलती न जवानी, काँटों से बचकर झुककर" – इस पंक्ति का भावार्थ लिखिए।

    उत्तर: इस पंक्ति का भावार्थ है कि युवावस्था सावधानी से चलने का समय नहीं है। युवाओं को काँटों से बचने के लिए झुकना नहीं चाहिए, बल्कि साहसपूर्वक आगे बढ़ना चाहिए। जवानी में जोखिम उठाना और संघर्ष करना आवश्यक है।

  4. "गति की तृष्णा और बढ़ती है, पड़ते जब पग में छाले हैं" – व्याख्या कीजिए।

    उत्तर: इस पंक्ति का अर्थ है कि जब व्यक्ति के पैरों में छाले पड़ने लगते हैं (अर्थात कठिनाइयाँ बढ़ती हैं), तब उसकी आगे बढ़ने की इच्छा और अधिक प्रबल हो जाती है। कठिनाइयाँ मनुष्य की गति को रोकने के बजाय उसे और अधिक प्रेरित करती हैं।

  5. "जागरूक की जय निश्चित है, हार चुके सोने वाले" – इस पंक्ति का संदेश स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: इस पंक्ति का संदेश है कि जो व्यक्ति सदैव जागरूक और सचेत रहता है, उसकी विजय निश्चित है। इसके विपरीत, जो लोग आलस्य और निद्रा में डूबे रहते हैं (अर्थात अकर्मण्य रहते हैं), वे हार जाते हैं। यह सक्रियता और सतर्कता का महत्व बताता है।

प्रश्न पत्र – हिंदी (2018) – पृष्ठ 2

पद्यांश पर आधारित प्रश्न

  1. उपर्युक्त पद्यांश का उचित शीर्षक लिखो।

    पद्यांश का उचित शीर्षक "गति की तृष्णा" या "जवानी का जोश" हो सकता है। (पद्यांश उपलब्ध न होने पर सामान्य उत्तर)

  2. कवि के अनुसार "गति की तृष्णा" से क्या अभिप्राय है और वह कब बढ़ती है?

    "गति की तृष्णा" का अर्थ है आगे बढ़ने की तीव्र इच्छा या लालसा। कवि के अनुसार, यह तृष्णा तब बढ़ती है जब मनुष्य सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहता है और उसकी महत्वाकांक्षाएँ बढ़ती जाती हैं।

  3. कवि ने जवानी की क्या विशेषता बताई है?

    कवि ने जवानी को उत्साह, साहस और नई ऊर्जा से भरा समय बताया है। जवानी में व्यक्ति में कठिनाइयों से लड़ने की शक्ति होती है और वह बड़े से बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने का सपना देखता है।

  4. कविता के अनुसार किसकी जय निश्चित है? स्पष्ट करो।

    कविता के अनुसार, उस व्यक्ति की जय निश्चित है जो निरंतर प्रयास करता है, कठिनाइयों से घबराता नहीं और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता रहता है। ऐसा व्यक्ति अंततः सफल होता है और उसकी विजय सुनिश्चित होती है।

व्याकरण एवं भाषा ज्ञान

  1. उत्पत्ति के आधार पर शब्द कितने प्रकार के होते हैं? प्रकारों के नाम लिखो।

    उत्पत्ति के आधार पर शब्द चार प्रकार के होते हैं:

    1. तत्सम शब्द
    2. तद्भव शब्द
    3. देशज शब्द
    4. विदेशज (आगत) शब्द
  2. विकारी शब्द किसे कहते हैं?

    विकारी शब्द वे शब्द होते हैं जिनमें लिंग, वचन, कारक, काल आदि के कारण रूप-परिवर्तन होता है। जैसे: लड़का (लड़के, लड़कियाँ), गया (गए, गई) आदि।

  3. "क्रिया" किसे कहते हैं?

    क्रिया वह शब्द है जो किसी कार्य के होने या करने का बोध कराता है। जैसे: पढ़ना, खाना, जाना, सोना आदि। वाक्य में क्रिया का होना अनिवार्य है।

  4. शब्द किसे कहते हैं?

    शब्द वर्णों के सार्थक समूह को कहते हैं जो किसी अर्थ को प्रकट करता है। शब्द भाषा की स्वतंत्र इकाई है।

  5. "तुम बहुत धीरे-धीरे चलते हो।" वाक्य में निहित क्रिया विशेषण पद छाँटकर उसकी परिभाषा लिखो।

    क्रिया विशेषण पद: धीरे-धीरे

    परिभाषा: क्रिया विशेषण वह शब्द है जो क्रिया की विशेषता बताता है, अर्थात् यह बताता है कि क्रिया कैसे, कब, कहाँ या कितनी मात्रा में हो रही है। यहाँ 'धीरे-धीरे' क्रिया 'चलते' की विशेषता (गति का तरीका) बता रहा है।

  6. "अर्थ" शब्द के कोई दो अर्थ लिखो।

    "अर्थ" शब्द के दो अर्थ:

    1. मतलब या आशय (जैसे: इस शब्द का अर्थ समझो)
    2. धन या संपत्ति (जैसे: उसके पास बहुत अर्थ है)
  7. संयुक्त और मिश्र वाक्य में क्या अंतर है? उदाहरण द्वारा स्पष्ट करो।

    संयुक्त वाक्य: जिस वाक्य में दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य किसी समुच्चयबोधक अव्यय (और, या, लेकिन आदि) से जुड़े हों, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं।

    उदाहरण: राम ने खाना खाया और सो गया।

    मिश्र वाक्य: जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य हों, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं। आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य पर निर्भर होता है।

    उदाहरण: जब राम ने खाना खाया, तब वह सो गया। (यहाँ 'जब राम ने खाना खाया' आश्रित उपवाक्य है)

  8. उचित विराम चिह्न लगाइए:

    1. भगतसिंह नही रहे वे अमर हो गए ह
    2. सभी के जीवन में सुख दुःख तो आते ही रहते है

    (1) भगतसिंह नहीं रहे, वे अमर हो गए हैं।

    (2) सभी के जीवन में सुख-दुःख तो आते ही रहते हैं।

निबंध

  1. किसी एक विषय पर 450 शब्दों में सारगर्भित निबंध लिखिए:

    (क) महिला सशक्तिकरण

    (ख) राष्ट्रीय स्वच्छता अभियान

    (ग) पर्यावरण संरक्षण

    नोट: यह एक निबंधात्मक प्रश्न है। विद्यार्थी को उपरोक्त तीन विषयों में से किसी एक पर 450 शब्दों में निबंध लिखना है। निबंध में भूमिका, विषय-विस्तार और उपसंहार का ध्यान रखना चाहिए।

गद्यांश की व्याख्या

  1. निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या करो:

    अर्थ की जिस शिला पर हमारे युग के न जाने कितने साधकों की तरिया चूर-चूर हो चुकी है, उसी को वे अपने अदम्य वेग में पार कर आये हैं। उनके जीवन पर उस संघर्ष के जो आघात हैं वे उनकी हार के नहीं शक्ति के प्रमाण-पत्र हैं। उनके कठोर श्रम, गम्भीर दर्शन और सजग कला की त्रिवेणी न अछोर मरू में सूखती है न अकूत समुद्र में अस्तित्व खोती है।

    अथवा

    इन लक्ष्यों को आसानी से हासिल करने के लिए वे शिष्टाचार के नियमों को सीखते हैं और अपने आपको रीति-रिवाजों, परम्पराओं, आचार संहिता और इसी तरह की दूसरी चीज़ों में ढालते हैं। आज के नौजवान को जीवन-शैली को स्व-पराजय की ओर ले जाने वाले इन रास्तों से बचना चाहिए। भौतिकता अर्जित करने के लिए कार्य करने की संस्कृति और उससे मिलने वाले प्रतिफल को अपने...

    प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक से लिया गया है। इसमें लेखक ने उन महान व्यक्तियों के संघर्ष और सफलता का वर्णन किया है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी।

    व्याख्या: लेखक कहता है कि जिस धन-संपत्ति (अर्थ) की चाहत में हमारे युग के अनेक साधक असफल हो गए और जिनकी नावें टूट-चूर हो गईं, उसी कठिन रास्ते को ये महापुरुष अपने अदम्य साहस और वेग से पार कर गए। उनके जीवन में आए संघर्ष के आघात उनकी हार के नहीं, बल्कि उनकी शक्ति के प्रमाण-पत्र हैं। उनके कठोर परिश्रम, गंभीर दर्शन और सजग कला का संगम (त्रिवेणी) न तो सूखे रेगिस्तान में सूखता है और न ही असीम समुद्र में अपना अस्तित्व खोता है। अर्थात् उनकी उपलब्धियाँ स्थायी और अमर हैं।

33. निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए

इस नदी की धार ठंडी हवा आती तो है
जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है।
एक चिनगारी कहीं से ढूँढ लाओ दोस्तों,
इस दिये में तेल से भीगी हुई बाती तो है।

संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हिंदी की किसी कविता से लिया गया है, जिसमें कवि ने निराशा के बीच आशा की किरण दिखाई है।

प्रसंग: कवि कहता है कि यद्यपि जीवन में कठिनाइयाँ और निराशा है, फिर भी आशा की संभावना बनी हुई है। नदी की धार ठंडी हवा लाती है और लहरों से टकराती है, भले ही वह जर्जर हो। इसी प्रकार, दीये में तेल से भीगी बाती है, बस एक चिनगारी चाहिए जो इसे जला सके।

व्याख्या: कवि ने प्रतीकात्मक भाषा में कहा है कि जीवन में कठिनाइयाँ और संघर्ष हैं, लेकिन हमें हार नहीं माननी चाहिए। नदी की धार ठंडी हवा लाकर शीतलता प्रदान करती है, भले ही वह जर्जर हो। इसी प्रकार, दीये में बाती है, बस उसे जलाने के लिए एक चिनगारी चाहिए। यह आशा का संदेश है कि हमारे पास संसाधन हैं, बस उन्हें जगाने की आवश्यकता है।

44. निम्नलिखित निबंधात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(4) हमारे देश का विकास उधार की बैसाखियों के सहारे हुआ है? पठित पाठ के आधार पर अपने तार्किक विचार लिखिए।

पठित पाठ के अनुसार, हमारे देश का विकास उधार की बैसाखियों के सहारे हुआ है, क्योंकि हमने पश्चिमी देशों से तकनीक, शिक्षा और आर्थिक मॉडल उधार लिए हैं। हालाँकि, यह पूरी तरह सत्य नहीं है। भारत का विकास स्वदेशी संसाधनों और परंपराओं पर भी आधारित रहा है। उधार की बैसाखियों का अर्थ है कि हमने बिना अपनी जड़ों को मजबूत किए, बाहरी सहायता पर निर्भर रहकर विकास किया। इससे हमारी अर्थव्यवस्था और संस्कृति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। तार्किक रूप से, हमें अपनी क्षमताओं को पहचानते हुए, उधार की बैसाखियों को छोड़कर आत्मनिर्भर बनना चाहिए।

अथवा

'अतिथि देवो भव' के संदर्भ में प्राचीन और आधुनिक व्यवहार के अंतर को स्पष्ट कीजिए।

प्राचीन काल में 'अतिथि देवो भव' का पालन सच्चे मन से किया जाता था। अतिथि को भगवान का रूप मानकर उनका स्वागत-सत्कार किया जाता था, बिना किसी स्वार्थ के। आधुनिक समय में यह परंपरा कम हो गई है। अब अतिथि सत्कार अक्सर दिखावा या औपचारिकता मात्र रह गया है। लोग अतिथि के आगमन को बोझ समझते हैं और स्वागत में ईमानदारी नहीं रही। प्राचीन व्यवहार में आत्मीयता और सम्मान था, जबकि आधुनिक व्यवहार में स्वार्थ और उपेक्षा देखी जाती है।

'धरती धोरा' कविता के आधार पर राजस्थान के प्रमुख अंचलों की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

'धरती धोरा' कविता में राजस्थान के विभिन्न अंचलों का वर्णन है। मरुभूमि (थार) की विशेषता रेत के टीले, सूखा और गर्मी है। बांगड़ (दक्षिणी राजस्थान) में हरियाली और नदियाँ हैं। मेवाड़ क्षेत्र पहाड़ियों और झीलों के लिए प्रसिद्ध है। शेखावाटी में हवेलियाँ और कला का वैभव है। हाड़ौती में काली मिट्टी और कृषि प्रमुख है। प्रत्येक अंचल की अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताएँ हैं, जो कविता में जीवंत रूप में चित्रित की गई हैं।

अथवा

पठित गजलों के आधार पर दुष्यंत कुमार के काव्य की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

दुष्यंत कुमार की गजलों में सामाजिक यथार्थ, विद्रोह और प्रेम का मिश्रण मिलता है। उनकी भाषा सरल और प्रभावशाली है। वे व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाते हैं और आम आदमी की पीड़ा को व्यक्त करते हैं। उनकी गजलों में व्यंग्य और मार्मिकता है। प्रेम को भी वे सामाजिक संदर्भ में देखते हैं। उनकी कविता में आशा और निराशा का द्वंद्व है, लेकिन अंततः वे संघर्ष का संदेश देते हैं।

45. निम्नलिखित लघुत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(2) 'शिवाजी का सच्चा स्वरूप' एकांकी के आधार पर शिवाजी की चारित्रिक विशेषताएँ लिखिए।

शिवाजी का चरित्र निम्नलिखित विशेषताओं से युक्त है:

  • साहसी और वीर: वे युद्ध में अदम्य साहस दिखाते हैं।
  • धर्मनिष्ठ: वे हिंदू धर्म के प्रति समर्पित हैं, लेकिन अन्य धर्मों का सम्मान करते हैं।
  • कुशल प्रशासक: वे राज्य को सुचारू रूप से चलाते हैं।
  • न्यायप्रिय: वे सभी के साथ न्याय करते हैं।
  • दूरदर्शी: वे भविष्य की योजनाएँ बनाते हैं।
  • स्वाभिमानी: वे कभी भी अन्याय के सामने झुकते नहीं।

(2) हल्दीघाटी का भैरवपथ खून से क्यों रंग दिया था?

हल्दीघाटी का भैरवपथ खून से इसलिए रंग दिया गया था क्योंकि वहाँ महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच भीषण युद्ध हुआ था। इस युद्ध में अनेक वीर सैनिक शहीद हुए थे, जिनके खून से पूरा मैदान लाल हो गया था। यह युद्ध स्वतंत्रता और स्वाभिमान के लिए लड़ा गया था, जिसमें राजपूत वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी।

(3) सेस सुरेश दिनेश गनेस प्रजेस धनेस महेस मनावौ।
कोऊ भवनी भजौ, मन की सब आस विधि जाइ पुरावौ॥
पंक्ति का काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

प्रस्तुत पंक्तियों में काव्य सौंदर्य निम्नलिखित है:

  • अनुप्रास अलंकार: 'सेस सुरेश दिनेश गनेस प्रजेस धनेस महेस' में 'स' और 'स' ध्वनि की पुनरावृत्ति से अनुप्रास अलंकार है।
  • भक्ति रस: इन पंक्तियों में भक्ति भावना प्रमुख है, जिसमें विभिन्न देवताओं का स्मरण किया गया है।
  • सरल भाषा: भाषा सरल और सहज है, जो भक्ति भाव को प्रभावी ढंग से व्यक्त करती है।
  • लयात्मकता: पंक्तियों में लय और संगीतात्मकता है, जो पाठ को मधुर बनाती है।
  • भावपूर्णता: मन की सभी आशाओं की पूर्ति के लिए ईश्वर की शरण में जाने का भाव व्यक्त किया गया है।

प्रश्न 45 (4)

'प्रसादजी की स्मरण-शक्ति बड़ी विलक्षण थी।' उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

प्रसादजी की स्मरण-शक्ति वास्तव में विलक्षण थी। वे कभी सुनी या पढ़ी हुई बात को भूलते नहीं थे। उदाहरण के लिए, एक बार उन्होंने किसी मित्र से सुनी एक कविता को वर्षों बाद भी यथावत् सुना दिया था। इसी प्रकार, वे कठिन से कठिन शास्त्रीय ग्रंथों के श्लोकों को भी बिना किसी प्रयास के याद रखते थे। उनकी यह अद्भुत स्मरण-शक्ति उनके साहित्यिक कार्यों में भी परिलक्षित होती है।

प्रश्न 46. अति लघुत्तरात्मक प्रश्न

अति लघुत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए: (4×2=2)

(4) मीरां किसकी अनन्य भक्त थी?

मीरां भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्त थीं। वे कृष्ण को अपना पति और सर्वस्व मानती थीं।

(2) 'जागो फिर एक बार' कविता में कौनसा रस है? यह कविता युवा पीढ़ी को क्या संदेश देती है?

इस कविता में वीर रस है। यह कविता युवा पीढ़ी को संदेश देती है कि वे अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक होकर देश और समाज के उत्थान के लिए कार्य करें। कवि युवाओं को निष्क्रियता छोड़कर सक्रिय और जागरूक बनने का आह्वान करता है।

प्रश्न 47

"महादेवी वर्मा" अथवा "रामधारी सिंह दिनकर" का साहित्यिक परिचय दीजिए। (6 अंक)

महादेवी वर्मा: हिंदी साहित्य की प्रसिद्ध कवयित्री, छायावादी युग की प्रमुख स्तंभ। इनका जन्म 26 मार्च 1907 को फर्रुखाबाद में हुआ। प्रमुख काव्य संग्रह: 'नीहार', 'रश्मि', 'नीरजा', 'सांध्यगीत', 'दीपशिखा'। गद्य रचनाएँ: 'अतीत के चलचित्र', 'स्मृति की रेखाएँ'। इन्हें 'आधुनिक मीरा' कहा जाता है। इनकी कविता में वेदना, करुणा और प्रकृति-प्रेम के भाव मिलते हैं।

रामधारी सिंह दिनकर: हिंदी के प्रसिद्ध कवि, निबंधकार और स्वतंत्रता सेनानी। जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के सिमरिया गाँव में। प्रमुख रचनाएँ: 'रश्मिरथी', 'परशुराम की प्रतीक्षा', 'उर्वशी', 'कुरुक्षेत्र'। इन्हें 'युग-चारण' और 'राष्ट्रकवि' की उपाधि मिली। इनकी कविता में वीरता, राष्ट्रीयता और ओज का समावेश है।

प्रश्न 49. निबंधात्मक प्रश्न

निम्नलिखित निबंधात्मक प्रश्न का उत्तर दीजिए: (6 अंक)

"जैसलमेर की राजकुमारी" कहानी नारी के कुशल प्रबंधन और सूझ-बूझ को अभिव्यक्त करती है। अपने विचार व्यक्त कीजिए।

"जैसलमेर की राजकुमारी" कहानी में नारी की कुशल प्रबंधन क्षमता और सूझ-बूझ का सुंदर चित्रण हुआ है। राजकुमारी ने अपनी बुद्धिमत्ता से कठिन परिस्थितियों का सामना किया। जब मलिक काफूर ने जैसलमेर पर आक्रमण किया, तब राजकुमारी ने अपनी सूझ-बूझ से राज्य की रक्षा की। उन्होंने शत्रु को मात देने के लिए चतुराईपूर्ण योजना बनाई। यह कहानी सिद्ध करती है कि नारी केवल सौंदर्य की प्रतिमूर्ति नहीं, बल्कि कुशल प्रशासक और निर्णयकर्ता भी हो सकती है। आज के समय में भी यह कहानी प्रेरणादायक है कि नारी किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से कम नहीं है।

अथवा

"एटम बम" कहानी की मूल संवेदना स्पष्ट कीजिए।

"एटम बम" कहानी की मूल संवेदना विज्ञान के दुरुपयोग और मानवता पर उसके विनाशकारी प्रभाव को उजागर करना है। कहानी में दिखाया गया है कि कैसे परमाणु बम जैसे विनाशकारी आविष्कार मानव जीवन को समाप्त कर सकते हैं। लेखक ने यह संदेश दिया है कि विज्ञान का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए, न कि विनाश के लिए। यह कहानी युद्ध और हिंसा के प्रति घृणा उत्पन्न करती है और शांति का संदेश देती है।

प्रश्न 49. लघुत्तरात्मक प्रश्न

लघुत्तरात्मक प्रश्नों के उत्तर दीजिए (कोई तीन प्रश्न): (3×3=9)

(1) जैसलमेर की राजकुमारी पाठ के आधार पर मलिक काफूर की चारित्रिक विशेषताएं लिखिए।

मलिक काफूर की प्रमुख चारित्रिक विशेषताएं:

  • महत्वाकांक्षी: वह सत्ता और धन का लोभी था और राज्य जीतने की महत्वाकांक्षा रखता था।
  • चतुर और कूटनीतिज्ञ: उसने जैसलमेर पर आक्रमण करने की योजना बनाई और चालाकी से काम लिया।
  • निर्दयी: वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता था और उसमें दया का भाव नहीं था।
  • साहसी: उसने दूरस्थ राज्य जैसलमेर पर आक्रमण करने का साहस दिखाया।

(2) 'अग' कहानी पारिवारिक सम्बन्धों की विसंगतियों को उजागर करती है। कैसे? स्पष्ट कीजिए।

'अग' कहानी में पारिवारिक सम्बन्धों की विसंगतियों को दर्शाया गया है। कहानी में एक ऐसे परिवार का चित्रण है जहाँ सदस्यों के बीच प्रेम और स्नेह का अभाव है। पिता और पुत्र के बीच संवादहीनता है, पति-पत्नी के बीच मनमुटाव है। परिवार के सदस्य एक-दूसरे की भावनाओं को नहीं समझते। यह कहानी बताती है कि कैसे आधुनिक जीवनशैली और स्वार्थ ने पारिवारिक रिश्तों को कमजोर कर दिया है। परिवार में एकता और प्रेम की कमी के कारण सदस्य अलग-अलग होते जा रहे हैं।

(3) जिस दिन देशभक्त के जीवन का अन्तिम पृष्ठ लिखा जाने वाला था-उस दिन स्वर्ग-लोक में आनन्द का अपार पारावार क्यों उमड़ रहा था?

जिस दिन देशभक्त के जीवन का अंतिम पृष्ठ लिखा जाने वाला था, उस दिन स्वर्ग-लोक में आनन्द का अपार पारावार इसलिए उमड़ रहा था क्योंकि देशभक्त मरकर स्वर्ग आने वाला था। उसने अपने जीवन में देश के लिए अनेक बलिदान दिए थे और वीरता के कार्य किए थे। स्वर्ग में उसका स्वागत करने के लिए सभी देवता और वीर आत्माएँ उत्सुक थीं। उसकी मृत्यु को दुख का नहीं, बल्कि गौरव और सम्मान का क्षण माना गया।

(4) 'खेल' कहानी में बालकों की क्रीड़ाओं का सहज और स्वाभाविक चित्रण है। कैसे? स्पष्ट कीजिए।

'खेल' कहानी में बालकों की क्रीड़ाओं का सहज और स्वाभाविक चित्रण किया गया है। कहानी में बच्चों के खेलों को बिना किसी कृत्रिमता के प्रस्तुत किया गया है। बच्चे जिस तरह से खेलते हैं, उनमें झगड़ते हैं, फिर मिल जाते हैं - यह सब बिल्कुल स्वाभाविक रूप में दिखाया गया है। लेखक ने बाल मनोविज्ञान को समझते हुए उनकी सरलता, उत्सुकता और निर्दोषता को चित्रित किया है। बच्चों के खेलों में कोई बड़ा उद्देश्य नहीं होता, केवल आनंद और मस्ती होती है - यही इस कहानी की विशेषता है।

प्रश्न 20. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

(1) सोशल मीडिया की शक्तियों और खबरों का उल्लेख कीजिए। (4 अंक)

सोशल मीडिया की शक्तियाँ:

  • सूचना का तीव्र प्रसार: सोशल मीडिया पर कोई भी खबर कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुँच जाती है।
  • जनमत निर्माण: यह जनता की राय को प्रभावित करने और आकार देने में सक्षम है।
  • सामाजिक जागरूकता: सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता फैलाने का यह एक प्रभावी माध्यम है।
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: लोग अपने विचार स्वतंत्र रूप से व्यक्त कर सकते हैं।

सोशल मीडिया की खबरें: सोशल मीडिया पर खबरें तेजी से फैलती हैं, लेकिन इनकी सत्यता की जाँच करना आवश्यक है। कई बार अफवाहें और भ्रामक सूचनाएँ भी फैलाई जाती हैं। इसलिए सोशल मीडिया की खबरों पर विश्वास करने से पहले उनकी पुष्टि करनी चाहिए।

(2) एक अच्छे पत्र की पाँच विशेषताएं लिखिए। (4 अंक)

एक अच्छे पत्र की पाँच विशेषताएं:

  1. स्पष्टता: पत्र की भाषा स्पष्ट और सरल होनी चाहिए ताकि पाठक आसानी से समझ सके।
  2. संक्षिप्तता: पत्र में अनावश्यक विस्तार से बचना चाहिए और केवल आव