RBSE Class 11th 2023 Physics-220523-2023 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 11th
Exam year 2023
Subject Physics-220523-2023
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 11th 2023 Physics-220523-2023

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Rajasthan Board Class 11th Physics-220523-2023 2023 solved Previous Year Question Papers

वार्षिक परीक्षा — 2022-23

समय : 3.15 घण्टे    कक्षा : 11    पूर्णाक : 70

विषय : भौतिक विज्ञान

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
  2. प्रत्येक प्रश्न के सम्मुख अंक अंकित हैं।
  3. प्रश्न संख्या 25 से 28 में आंतरिक विकल्प है।

खण्ड - अ (बहुविकल्पीय प्रश्न)

  1. सदिश A के परिमाण एवं इसके घटकों Ax तथा Ay के मध्य संबंध होता है-

    • (अ) A² = Ax² + Ay²
    • (ब) Ax = A + Ay
    • (स) Ay = Ax + A²
    • (द) A = (Ax Ay)

    सही उत्तर: (अ) A² = Ax² + Ay²

    व्याख्या: किसी सदिश का परिमाण उसके घटकों के वर्गों के योग के वर्गमूल के बराबर होता है।

  2. शून्य सदिश का गुण नहीं है-

    • (अ) A + 0 = A
    • (ब) 0 + 0 = 0
    • (स) 2 × 0 = 0
    • (द) A + A = 0

    सही उत्तर: (द) A + A = 0

    व्याख्या: शून्य सदिश के साथ जोड़ने पर वही सदिश प्राप्त होता है, लेकिन किसी सदिश का स्वयं से योग शून्य नहीं होता।

  3. तात्क्षणिक शक्ति P, बल F एवं तात्क्षणिक वेग v में संबंध होता है-

    • (अ) P = F · v
    • (ब) F = P · v
    • (स) v = P · F
    • (द) P = F × v

    सही उत्तर: (अ) P = F · v

    व्याख्या: तात्क्षणिक शक्ति बल और वेग के अदिश गुणनफल के बराबर होती है।

  4. घूर्णन गतिज ऊर्जा K, जड़त्व आघूर्ण I एवं कोणीय वेग ω में संबंध होता है-

    • (अ) K = ½ I ω²
    • (ब) K = I ω
    • (स) K = ½ I² ω
    • (द) K = I ω²

    सही उत्तर: (अ) K = ½ I ω²

    व्याख्या: घूर्णन गतिज ऊर्जा का सूत्र K = ½ I ω² होता है।

  5. समान्तर अक्षों के प्रमेय के अनुसार-

    • (अ) I = Icm + Mh²
    • (ब) I = Icm - Mh²
    • (स) I = Icm + h²
    • (द) I = Icm - h²

    सही उत्तर: (अ) I = Icm + Mh²

    व्याख्या: समान्तर अक्ष प्रमेय के अनुसार, किसी अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण, द्रव्यमान केंद्र से गुजरने वाली समान्तर अक्ष के परितः जड़त्व आघूर्ण तथा Mh² के योग के बराबर होता है।

  6. पृथ्वी के पृष्ठ से छोड़े गये पिण्ड की पलायन चाल होती है-

    • (अ) √(2gR)
    • (ब) √(gR)
    • (स) 2√(gR)
    • (द) gR

    सही उत्तर: (अ) √(2gR)

    व्याख्या: पलायन चाल ve = √(2gR) होती है, जहाँ R पृथ्वी की त्रिज्या तथा g गुरुत्वीय त्वरण है।

  7. सरल आवर्त गति में ऊर्जा होती है-

    • (अ) ½ kA²
    • (ब) kA²
    • (स) ¼ kA²
    • (द) 2kA²

    सही उत्तर: (अ) ½ kA²

    व्याख्या: सरल आवर्त गति में कुल ऊर्जा ½ kA² होती है, जहाँ k बल नियतांक तथा A आयाम है।

  8. बेलन के फलकों के सापेक्ष विस्थापन Δx एवं बेलन की लम्बाई L के अनुपात को कहलाता है-

    • (अ) अपरूपण विकृति
    • (ब) अपरूपण प्रतिबल
    • (स) अनुदैर्ध्य प्रतिबल
    • (द) अनुदैर्ध्य विकृति

    सही उत्तर: (अ) अपरूपण विकृति

    व्याख्या: अपरूपण विकृति = Δx / L, जहाँ Δx फलकों का सापेक्ष विस्थापन तथा L बेलन की लम्बाई है।

  9. प्रयुक्त बल के लम्बवत दिशा में होने वाली विकृति है-

    • (अ) अनुदैर्ध्य
    • (ब) अपरूपण
    • (स) आयतन
    • (द) पार्श्विक

    सही उत्तर: (द) पार्श्विक

    व्याख्या: पार्श्विक विकृति बल की दिशा के लम्बवत होती है।


खण्ड - ब (अति लघु उत्तरीय प्रश्न)

  1. प्रकृति के मूल बलों को प्रबलता के बढ़ते क्रम में लिखिए।

    उत्तर: प्रकृति के मूल बलों को प्रबलता के बढ़ते क्रम में निम्न प्रकार लिखा जाता है:

    1. गुरुत्वाकर्षण बल (सबसे कम प्रबल)
    2. दुर्बल नाभिकीय बल
    3. विद्युत-चुम्बकीय बल
    4. प्रबल नाभिकीय बल (सबसे अधिक प्रबल)
  2. भौतिक राशि बल का SI मात्रक एवं विमीय सूत्र लिखिए।

    उत्तर: बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है। बल का विमीय सूत्र [MLT⁻²] है।

  3. निरपेक्ष त्रुटि एवं आपेक्षिक त्रुटि को परिभाषित कीजिए।

    उत्तर:

    • निरपेक्ष त्रुटि: किसी मापन में वास्तविक मान और मापित मान के अंतर को निरपेक्ष त्रुटि कहते हैं।
    • आपेक्षिक त्रुटि: निरपेक्ष त्रुटि और वास्तविक मान के अनुपात को आपेक्षिक त्रुटि कहते हैं। इसे प्रायः प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है।
  4. पथ लम्बाई एवं विस्थापन में दो अन्तर लिखिए।

    उत्तर:

    1. पथ लम्बाई एक अदिश राशि है, जबकि विस्थापन एक सदिश राशि है।
    2. पथ लम्बाई हमेशा धनात्मक होती है, जबकि विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है।
  5. स्थैतिक एवं गतिज घर्षण नियम लिखिए।

    उत्तर:

    • स्थैतिक घर्षण नियम: स्थैतिक घर्षण बल का अधिकतम मान, लम्बवत प्रतिक्रिया बल के समानुपाती होता है। अर्थात fs ∝ N या fs = μsN, जहाँ μs स्थैतिक घर्षण गुणांक है।
    • गतिज घर्षण नियम: गतिज घर्षण बल, लम्बवत प्रतिक्रिया बल के समानुपाती होता है तथा यह स्पर्श सतहों के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करता। अर्थात fk = μkN, जहाँ μk गतिज घर्षण गुणांक है।
  6. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक स्थापित कीजिए।

    उत्तर: पृथ्वी तल से h ऊँचाई पर स्थित m द्रव्यमान के पिण्ड की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा U = mgh होती है। इसे स्थापित करने के लिए, पिण्ड को पृथ्वी तल से h ऊँचाई तक ले जाने में गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध किया गया कार्य = बल × विस्थापन = mg × h = mgh। यह कार्य ही पिण्ड में स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। अतः U = mgh.

  7. यांत्रिक ऊर्जा के संरक्षण को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

    उत्तर: यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण नियम के अनुसार, यदि किसी निकाय पर केवल संरक्षी बल कार्य कर रहे हों, तो निकाय की कुल यांत्रिक

20. न्यूटन की गति के द्वितीय नियम का कथन लिखिए। इसकी सहायता से बल, द्रव्यमान एवं त्वरण के मध्य संबंध स्थापित कीजिए।

कथन: न्यूटन का गति का द्वितीय नियम कहता है कि किसी वस्तु पर आरोपित कुल बल उस वस्तु के संवेग में परिवर्तन की दर के अनुक्रमानुपाती होता है तथा यह परिवर्तन बल की दिशा में होता है।

संबंध स्थापना: मान लीजिए किसी वस्तु का द्रव्यमान m है और उस पर बल F लगाने से उत्पन्न त्वरण a है। न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार,

F ∝ dp/dt, जहाँ p = mv (संवेग)

यदि द्रव्यमान स्थिर है, तो F ∝ m(dv/dt) = ma

अतः F = kma, जहाँ k एक नियतांक है। SI मात्रकों में k = 1 लेने पर,

F = ma

यह बल, द्रव्यमान एवं त्वरण के मध्य संबंध है।

21. मोलर विशिष्ट उष्मा धारिता किसे कहते हैं ? एक परमाणुक गैस के लिए नियत आयतन पर मोलर विशिष्ट उष्मा धारिता CV एवं नियत दाब पर मोलर विशिष्ट उष्मा धारिता CP तथा रुद्धोष्म निष्पत्ति γ परिकलित कीजिए।

मोलर विशिष्ट उष्मा धारिता: किसी पदार्थ के एक मोल का ताप 1°C (या 1 K) बढ़ाने के लिए आवश्यक उष्मा की मात्रा को मोलर विशिष्ट उष्मा धारिता कहते हैं।

एक परमाणुक गैस के लिए:

  • एक परमाणुक गैस के अणु में केवल स्थानांतरीय गति होती है। स्वातंत्र्य कोटि = 3
  • ऊर्जा समविभाजन नियम के अनुसार, प्रति अणु औसत ऊर्जा = (3/2)kT
  • एक मोल गैस की कुल ऊर्जा U = (3/2)RT
  • नियत आयतन पर मोलर विशिष्ट उष्मा: CV = dU/dT = (3/2)R
  • नियत दाब पर मोलर विशिष्ट उष्मा: CP = CV + R = (3/2)R + R = (5/2)R
  • रुद्धोष्म निष्पत्ति: γ = CP/CV = (5/2)R / (3/2)R = 5/3 ≈ 1.67

22. समतापीय प्रक्रम किसे कहते हैं ? आदर्श गैस के समतापीय प्रसार में गैस द्वारा किये गये कार्य का सूत्र स्थापित कीजिए।

समतापीय प्रक्रम: वह प्रक्रम जिसमें निकाय का ताप स्थिर रहता है, समतापीय प्रक्रम कहलाता है।

कार्य का सूत्र: आदर्श गैस के लिए समतापीय प्रसार में, ताप T स्थिर रहता है।

गैस द्वारा किया गया कार्य: W = ∫ P dV

आदर्श गैस समीकरण से: P = nRT/V

अतः W = ∫ (nRT/V) dV = nRT ∫ (dV/V)

यदि आयतन V1 से V2 हो जाता है, तो:

W = nRT ln(V2/V1)

जहाँ n मोलों की संख्या, R गैस नियतांक, T परम ताप है।

23. रैखिक एवं आयतन प्रसार गुणांक को परिभाषित करते हुए इनके मध्य संबंध स्थापित कीजिए।

रैखिक प्रसार गुणांक (α): किसी ठोस की लंबाई में प्रति एकांक ताप वृद्धि पर होने वाली आपेक्षिक वृद्धि को रैखिक प्रसार गुणांक कहते हैं। α = (ΔL/L₀)/ΔT

आयतन प्रसार गुणांक (γ): किसी पदार्थ के आयतन में प्रति एकांक ताप वृद्धि पर होने वाली आपेक्षिक वृद्धि को आयतन प्रसार गुणांक कहते हैं। γ = (ΔV/V₀)/ΔT

संबंध: किसी घन की भुजा L है, तो आयतन V = L³

ताप में ΔT वृद्धि पर, नई भुजा L' = L(1 + αΔT)

नया आयतन V' = L³(1 + αΔT)³ = V(1 + 3αΔT + 3α²ΔT² + α³ΔT³)

चूँकि α बहुत छोटा है, उच्च घातों को छोड़ने पर: V' ≈ V(1 + 3αΔT)

अतः ΔV/V = 3αΔT, या γ = 3α

अतः रैखिक एवं आयतन प्रसार गुणांक में संबंध: γ = 3α

24. निम्न को परिभाषित कीजिए:

(i) पृष्ठ तनाव (ii) पृष्ठीय ऊर्जा (iii) श्यानता (iv) सम्पर्क कोण

  1. पृष्ठ तनाव: द्रव के पृष्ठ पर खींची गई काल्पनिक रेखा की प्रति एकांक लंबाई पर लगने वाला बल जो पृष्ठ को संकुचित करने का प्रयास करता है, पृष्ठ तनाव कहलाता है। इसका SI मात्रक N/m है।
  2. पृष्ठीय ऊर्जा: द्रव के पृष्ठीय क्षेत्रफल में एकांक वृद्धि करने में किया गया कार्य पृष्ठीय ऊर्जा कहलाता है। इसका SI मात्रक J/m² है।
  3. श्यानता: द्रव की वह विशेषता जो उसकी विभिन्न परतों के मध्य आपेक्षिक गति का विरोध करती है, श्यानता कहलाती है।
  4. सम्पर्क कोण: किसी ठोस सतह पर द्रव की बूंद के किनारे पर द्रव के पृष्ठ और ठोस सतह के मध्य बना कोण सम्पर्क कोण कहलाता है।

25. सुमेलित कीजिए:

स्थिति जड़त्व आघूर्ण
(i) वलय का व्यास के परितः (d) MR²/2
(ii) खोखले बेलन का अक्ष के परितः (a) MR²
(iii) वृत्ताकार चकती का व्यास के परितः (c) MR²/4
(iv) ठोस गोले का व्यास के परितः (b) 2MR²/5
(v) पतली छड़ का मध्य बिन्दु से गुजरती लम्बाई के लम्बवत अक्ष के परितः (e) ML²/12

अथवा

निम्न के मध्य संबंध लिखिए:

  1. रेखीय वेग एवं कोणीय वेग: v = rω, जहाँ r त्रिज्या है।
  2. रैखिक संवेग एवं कोणीय संवेग: L = r × p, जहाँ p रैखिक संवेग है।
  3. बलाघूर्ण एवं बल: τ = r × F, जहाँ F बल है।
  4. बलाघूर्ण एवं कोणीय संवेग: τ = dL/dt
  5. बलाघूर्ण, जड़त्व आघूर्ण एवं कोणीय त्वरण: τ = Iα, जहाँ I जड़त्व आघूर्ण और α कोणीय त्वरण है।

26. गुरुत्वीय त्वरण से आप क्या समझते हैं ? पृथ्वी की सतह से ऊंचाई एवं गहराई के साथ यह किस प्रकार परिवर्तित होता है, समझाइए।

गुरुत्वीय त्वरण (g): पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण किसी वस्तु में उत्पन्न त्वरण को गुरुत्वीय त्वरण कहते हैं। पृथ्वी की सतह पर इसका मान लगभग 9.8 m/s² होता है।

ऊंचाई के साथ परिवर्तन: पृथ्वी की सतह से h ऊंचाई पर गुरुत्वीय त्वरण:

g' = g(1 - 2h/R), जहाँ R पृथ्वी की त्रिज्या है। ऊंचाई बढ़ने पर g का मान घटता है।

गहराई के साथ परिवर्तन: पृथ्वी की सतह से d गहराई पर गुरुत्वीय त्वरण:

g' = g(1 - d/R), जहाँ R पृथ्वी की त्रिज्या है। गहराई बढ़ने पर g का मान घटता है और पृथ्वी के केंद्र पर शून्य हो जाता है।

अथवा

केप्लर के ग्रहों की गति संबंधी तीनों नियम सविस्तार समझाइए।

  1. प्रथम नियम (कक्षाओं का नियम): प्रत्येक ग्रह सूर्य के चारों ओर दीर्घवृत्ताकार कक्षा में घूमता है, जिसके एक फोकस पर सूर्य स्थित होता है।
  2. द्वितीय नियम (क्षेत्रफल का नियम): सूर्य से ग्रह को मिलाने वाली रेखा समान समयांतरालों में समान क्षेत्रफल तय करती है। अर्थात् ग्रह सूर्य के निकट तेजी से और दूर धीमी गति से चलता है।
  3. तृतीय नियम (आवर्तकाल का नियम): किसी ग्रह के परिक्रमण काल (T) का वर्ग उसकी सूर्य से औसत दूरी (a) के घन के अनुक्रमानुपाती होता है। T² ∝ a³

27. अनुदैर्ध्य एवं अनुप्रस्थ तरंगें किसे कहते हैं ? तनी हुई डोरी पर अनुप्रस्थ तरंग की चाल एवं किसी माध्यम में अनुदैर्ध्य तरंग की चाल के सूत्र स्थापित कीजिए।