RBSE Class 11th 2024 Hindi Sahitya-AP (XI)-2024 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 11th
Exam year 2024
Subject Hindi Sahitya-AP (XI)-2024
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 11th 2024 Hindi Sahitya-AP (XI)-2024

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Rajasthan Board Class 11th Hindi Sahitya-AP (XI)-2024 2024 solved Previous Year Question Papers

चार्षिक परीक्षा सत्र - 2023-24

विषय : हिन्दी साहित्य  |  कक्षा : XI (ग्यारहवीं)  |  समय : 3¼ घंटे  |  पूर्णांक : 80

निर्देश :

  1. सभी प्रश्नों को हल करना अनिवार्य है।
  2. प्रत्येक प्रश्न के अंक प्रश्न के सामने अंकित हैं।
  3. सर्वप्रथम विद्यार्थी अपने नामांक प्रश्न-पत्र पर अनिवार्यतः लिखें।

खण्ड-अ

निम्नलिखित वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए-

  1. (i) मेले में जाते समय हामिद को दादी ने कितने पैसे दिए?

    • (अ) चार आने
    • (ब) पाँच पैसे
    • (स) तीन पैसे
    • (द) बारह पैसे

    सही उत्तर: (अ) चार आने

    व्याख्या: प्रेमचंद की कहानी 'ईदगाह' में हामिद की दादी अमीना ने उसे मेले में जाने के लिए चार आने (25 पैसे) दिए थे।

  2. (ii) "दोपहर का भोजन" गद्य की कौनसी विधा है?

    • (अ) उपन्यास
    • (ब) कहानी
    • (स) रिपोर्ताज
    • (द) संस्मरण

    सही उत्तर: (ब) कहानी

    व्याख्या: 'दोपहर का भोजन' अमरकांत द्वारा रचित एक प्रसिद्ध कहानी है, जो मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ को दर्शाती है।

  3. (iii) 'गूँगे' कहानी में मंदिर की मूर्ति की तरह बताया गया है?

    • (अ) शकुंतला को
    • (ब) गूँगे को
    • (स) चमेली को
    • (द) चमेली के पति को

    सही उत्तर: (स) चमेली को

    व्याख्या: मोहन राकेश की कहानी 'गूँगे' में चमेली को मंदिर की मूर्ति के समान सुंदर और शांत बताया गया है।

  4. (iv) आदमी की औकात कहाँ पता चलती है?

    • (अ) शादी होने पर
    • (ब) कठिन समस्या का सामना करने पर
    • (स) लड़ाई करने पर
    • (द) घर से बाहर कदम रखने पर

    सही उत्तर: (ब) कठिन समस्या का सामना करने पर

    व्याख्या: यह पंक्ति हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबंध से ली गई है, जिसमें कहा गया है कि मनुष्य की वास्तविक क्षमता और सामर्थ्य का पता कठिन परिस्थितियों में ही चलता है।

  5. (v) कबीर किस काव्यधारा के कवि हैं?

    • (अ) निर्गुण ज्ञानाश्रयी
    • (ब) निर्गुण प्रेमाश्रयी
    • (स) सगुण रामकाव्यधारा
    • (द) सगुण कृष्णकाव्यधारा

    सही उत्तर: (अ) निर्गुण ज्ञानाश्रयी

    व्याख्या: कबीरदास निर्गुण भक्ति धारा के ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं, जिन्होंने निराकार ब्रह्म की उपासना पर बल दिया।

  6. (vi) "मुरली तऊ गुपालहिं भावति" पद में मुरली किसको प्रिय है?

    • (अ) गोपियों को
    • (ब) ग्वालबालों को
    • (स) कृष्ण को
    • (द) राधा को

    सही उत्तर: (स) कृष्ण को

    व्याख्या: सूरदास के इस पद में कहा गया है कि मुरली (बाँसुरी) श्रीकृष्ण को अत्यंत प्रिय है, क्योंकि वे इसे बजाकर सबको मोहित करते हैं।

  7. (vii) "सिसटा पंख साँझ की लाली, जा बैठी अब तरू शिखरों पर।" इन पंक्तियों में संध्या की लालिमा पर किसका आरोप किया गया है?

    • (अ) पक्षी का
    • (ब) दानव का
    • (स) अंधकार का
    • (द) सूरज का

    सही उत्तर: (ब) दानव का

    व्याख्या: ये पंक्तियाँ सुमित्रानंदन पंत की कविता 'संध्या' से हैं, जहाँ संध्या की लालिमा पर दानव के फैले हुए पंखों का आरोप (रूपक) किया गया है।

  8. (viii) "मोम के बंधन संजीले" का आशय है-

    • (अ) मोम की सजावट
    • (ब) सांसारिक आकर्षण
    • (स) जीवन की कठिनाइयाँ
    • (द) दुर्बलता

    सही उत्तर: (ब) सांसारिक आकर्षण

    व्याख्या: 'मोम के बंधन संजीले' का अर्थ है सांसारिक मोह-माया के आकर्षण जो दिखने में सुंदर और कोमल (मोम के समान) होते हैं, लेकिन वास्तव में बंधनकारी होते हैं।

प्रश्न (ix) से (xiv) बहुविकल्पीय प्रश्न

(ix) लेखक के चित्रकला की प्रतिभा कहाँ पर उभर कर सामने आई?

  • (अ) लेखक के घर पर
  • (ब) लेखक की दुकान पर
  • (स) लेखक के बोर्डिंग स्कूल में
  • (द) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: (स) लेखक के बोर्डिंग स्कूल में

व्याख्या: लेखक की चित्रकला की प्रतिभा बोर्डिंग स्कूल में रहते हुए उभर कर सामने आई, जहाँ उन्हें चित्र बनाने का अवसर और प्रोत्साहन मिला।

(x) मकबूल ने ऑयल कलर की ट्यूबें खरीदने के लिए अपनी कौनसी किताबें बेच दी?

  • (अ) हिंदी और अंग्रेजी
  • (ब) उर्दू और हिंदी
  • (स) भूगोल और इतिहास
  • (द) कॉमर्स

उत्तर: (स) भूगोल और इतिहास

व्याख्या: मकबूल ने ऑयल कलर की ट्यूबें खरीदने के लिए अपनी भूगोल और इतिहास की किताबें बेच दीं, क्योंकि उन्हें चित्रकला का शौक था।

(xi) 'आवारा मसीहा' में किसकी जीवनी प्रस्तुत की गई है?

  • (अ) सुभाष चन्द्र बोस
  • (ब) विष्णु प्रभाकर
  • (स) दयानंद सरस्वती
  • (द) शरतचन्द चट्टोपाध्याय

उत्तर: (द) शरतचन्द चट्टोपाध्याय

व्याख्या: 'आवारा मसीहा' विष्णु प्रभाकर द्वारा लिखित शरतचन्द चट्टोपाध्याय की जीवनी है।

(xii) शरत् को जनमेजय की तरह नाग यज्ञ करने की प्रेरणा कहाँ से मिली?

  • (अ) विषाक्त साँप के काटने से
  • (ब) तपोवन से
  • (स) संसार कोश नामक पुस्तक से
  • (द) मृत्युंजय सपेरे से

उत्तर: (स) संसार कोश नामक पुस्तक से

व्याख्या: शरत् को 'संसार कोश' नामक पुस्तक पढ़ने के बाद जनमेजय की तरह नाग यज्ञ करने की प्रेरणा मिली।

(xiii) सम चरणों में 13-13 मात्राएँ और विषम चरणों में 11-11 मात्राएँ कौनसे छंद में होती हैं?

  • (अ) दोहा
  • (ब) सोरठा
  • (स) रोला
  • (द) मालिनी

उत्तर: (ब) सोरठा

व्याख्या: सोरठा छंद में सम चरणों (पहले और तीसरे) में 13-13 मात्राएँ और विषम चरणों (दूसरे और चौथे) में 11-11 मात्राएँ होती हैं।

(xiv) एक गण में वर्णों की संख्या होती है?

  • (अ) दो
  • (ब) तीन
  • (स) चार
  • (द) पाँच

उत्तर: (ब) तीन

व्याख्या: छंदशास्त्र में एक गण में तीन वर्ण होते हैं।


2. निम्नलिखित रिक्त स्थानों की पूर्ति उचित उत्तर से कीजिए — (6×1=6)

  1. भाव के उद्दीप्त होने पर आलंबन द्वारा की जाने वाली चेष्टाएँ अनुभाव कहलाती हैं।

    व्याख्या: अनुभाव वे शारीरिक चेष्टाएँ हैं जो भाव के उद्दीप्त होने पर आलंबन द्वारा प्रकट की जाती हैं।

  2. आचार्य भरत मुनि रस को काव्य की आत्मा माना है।

    व्याख्या: भरत मुनि ने 'नाट्यशास्त्र' में रस को काव्य की आत्मा माना है।

  3. जहाँ शब्द की आवृत्ति हो, किंतु अर्थ भी भिन्न हो, वहाँ यमक अलंकार होता है।

    व्याख्या: यमक अलंकार में एक ही शब्द की बार-बार आवृत्ति होती है, लेकिन हर बार उसका अर्थ भिन्न होता है।

  4. 'मम प्रिय भरतहि सम भाई।' पंक्ति में उपमा अलंकार प्रयुक्त हुआ है।

    व्याख्या: इस पंक्ति में 'सम' शब्द के प्रयोग से उपमा अलंकार है, जहाँ भरत की तुलना भाई से की गई है।

  5. स्वर-व्यंजन के उच्चारण में लगने वाले समय को मात्रा कहते हैं।

    व्याख्या: मात्रा वह समय है जो किसी स्वर या व्यंजन के उच्चारण में लगता है।

  6. मालिनी छंद के प्रत्येक चरण में 15 मात्राएँ होती हैं।

    व्याख्या: मालिनी छंद में प्रत्येक चरण में 15 मात्राएँ होती हैं और इसके चार चरण होते हैं।


3. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए — (8×1=8)

गाँधी जी के अनुसार शिक्षा, शरीर, मस्तिष्क और आत्मा का विकास करने का माध्यम है। वे बुनियादी शिक्षा के पक्षधर थे। उनके अनुसार प्रत्येक बच्चे को अपनी मातृभाषा की नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा मिलनी चाहिए, जो उसके आसपास की जिंदगी पर आधारित हो, हस्तकला एवं काम के जरिए दी जाए, रोजगार दिलाने के लिए बच्चों को आत्मनिर्भर बनाए तथा नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का विकास करने वाली हो। गाँधी जी के उक्त विचारों से स्पष्ट है कि वे व्यक्ति और समाज के संपूर्ण जीवन पर अपनी मौलिक दृष्टि रखते थे। उन्होंने अपने जीवन में सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन में भाग लेकर भारतीय समाज एवं राजनीति में इन मूल्यों को स्थापित किया।

प्रश्न: गाँधी जी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: गाँधी जी के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य शरीर, मस्तिष्क और आत्मा का विकास करना है। वे बुनियादी शिक्षा के पक्षधर थे, जो बच्चों को आत्मनिर्भर बनाए और नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का विकास करे।

गद्यांश पर आधारित प्रश्न

गद्यांश: गाँधी जी की सारी सोच भारतीय परंपरा की सोच है। इसे अपनाकर प्रत्येक व्यक्ति और संपूर्ण राष्ट्र वास्तविक विकास को प्राप्त कर सकता है। जब तक मनुष्य भटकेगा, तब-तक गाँधी जी उसका मार्गदर्शन करने में सक्षम हैं।

  1. गाँधी जी के अनुसार प्रत्येक बच्चे को किसकी अनिवार्य शिक्षा मिलनी चाहिए?

    गाँधी जी के अनुसार प्रत्येक बच्चे को बुनियादी शिक्षा (Basic Education) अनिवार्य रूप से मिलनी चाहिए।

  2. गाँधी जी किस शिक्षा के पक्षधर थे?

    गाँधी जी बुनियादी शिक्षा (वर्धा शिक्षा योजना) के पक्षधर थे, जो हस्तकला और श्रम पर आधारित थी।

  3. बच्चों को आत्मनिर्भर कौनसी शिक्षा बनाती है?

    बुनियादी शिक्षा बच्चों को आत्मनिर्भर बनाती है, क्योंकि इसमें श्रम और कौशल विकास पर जोर दिया जाता है।

  4. बुनियादी शिक्षा में बच्चों को किस परिवेश की शिक्षा देनी चाहिए?

    बुनियादी शिक्षा में बच्चों को ग्रामीण परिवेश और स्थानीय वातावरण की शिक्षा देनी चाहिए, ताकि वे अपने समाज से जुड़ सकें।

  5. बुनियादी शिक्षा से क्या तात्पर्य है?

    बुनियादी शिक्षा से तात्पर्य श्रम-आधारित शिक्षा से है, जिसमें बच्चों को किसी न किसी हस्तकला के माध्यम से ज्ञान दिया जाता है और वे आत्मनिर्भर बनते हैं।

  6. गाँधी जी के अनुसार शिक्षा किनके विकास का माध्यम है?

    गाँधी जी के अनुसार शिक्षा शरीर, मन और आत्मा के सर्वांगीण विकास का माध्यम है।

  7. गाँधी जी ने भारतीय समाज एवं राजनीति में किन मूल्यों को स्थापित करने की कोशिश की?

    गाँधी जी ने सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, सर्वधर्म समभाव, और सामाजिक समानता जैसे मूल्यों को स्थापित करने की कोशिश की।

  8. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक बताइए।

    उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक "गाँधी जी की शिक्षा दर्शन" या "बुनियादी शिक्षा का महत्व" हो सकता है।


पद्यांश पर आधारित प्रश्न

पद्यांश:
वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा सहन को चूम-चूम।
यह धूप, घाम, पानी पत्थर, पांडव आए कुछ और निखर।
सौभाग्य न सब दिन सोता है, देखें आगे क्या होता है।
मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को।
कलह को समझाने को, भीषण विध्वंस बचाने को।
भगवान हस्तिनापुर आए, पांडव का संदेशा लाए।
दो न्याय अगर तो आधा दो, पर इसमें भी यदि बाधा हो।
तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम।
हम वहीं खुशी से रहेंगे, परिजन पर असि न उठाएँगे।
दुर्योधन वह भी दे न सका, आशीष समाज का ले न सका।
उल्टे हरि को बांधने चला, जो था असाध्य, साधने चला।
जब नाश मनुज पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।

  1. कृष्ण पांडवों का संदेश लेकर कहाँ गए थे?

    कृष्ण पांडवों का संदेश लेकर हस्तिनापुर गए थे, जहाँ दुर्योधन और धृतराष्ट्र रहते थे।

  2. कृष्ण ने युद्ध टालने हेतु कितने गाँवों की मांग की थी?

    कृष्ण ने युद्ध टालने हेतु पाँच गाँवों की मांग की थी।

  3. "उल्टे हरि को बाँधने चला" – 'हरि' शब्द का क्या अर्थ है?

    'हरि' शब्द का अर्थ भगवान कृष्ण है। यहाँ दुर्योधन द्वारा कृष्ण को बंदी बनाने के प्रयास की ओर संकेत है।

  4. "जब नाश मनुज पर छाता है" – इस पंक्ति में 'नाश' शब्द का क्या अर्थ है?

    इस पंक्ति में 'नाश' शब्द का अर्थ विनाश या संकट है। यह दुर्योधन के विनाश की ओर इशारा करता है।

  5. कवि के अनुसार न्यायोचित क्या है?

    कवि के अनुसार पाँच गाँव देना न्यायोचित था, क्योंकि पांडवों ने शांति के लिए केवल पाँच गाँव माँगे थे, लेकिन दुर्योधन ने वह भी नहीं दिया।

  6. पद्यांश का उचित शीर्षक बताइए।

    पद्यांश का उचित शीर्षक "कृष्ण का हस्तिनापुर प्रस्थान" या "शांति का संदेश" हो सकता है।

खण्ड-ब (लघुत्तरात्मक प्रश्न)

(उत्तर शब्द सीमा-अधिकतम 40 शब्द)

  1. उलटा पिरामिड शैली की लेखन प्रक्रिया को समझाइए।

    उलटा पिरामिड शैली में समाचार लेखन में सबसे महत्वपूर्ण जानकारी (मुख्य तथ्य) पहले लिखी जाती है, फिर महत्व के क्रम में अन्य विवरण। इसमें निष्कर्ष सबसे ऊपर और विस्तार नीचे होता है, जिससे पाठक शुरुआत में ही पूरी बात समझ सके।

  2. रेडियो के लिए समाचार लेखन की बुनियादी बातें क्या हैं? बताइए।

    रेडियो समाचार लेखन में भाषा सरल, स्पष्ट और संक्षिप्त होनी चाहिए। वाक्य छोटे हों, ध्वनि प्रभावों का उपयोग हो, और समाचार को बोलने की गति के अनुसार लिखा जाए। श्रोता को एक बार में समझ में आए, इसलिए जटिल शब्दों से बचना चाहिए।

  3. श्लेष अलंकार को उदाहरण सहित समझाइए।

    श्लेष अलंकार में एक शब्द के एक से अधिक अर्थ होते हैं। उदाहरण: "मधुर मधुर मुस्कान" - यहाँ 'मधुर' का अर्थ मीठा और सुंदर दोनों है। यह अलंकार शब्दों के बहुअर्थी प्रयोग से चमत्कार उत्पन्न करता है।

  4. लेखक ने जापानियों की संज्ञा किससे की है और क्यों?

    लेखक ने जापानियों को 'बिजली के पुतले' की संज्ञा दी है, क्योंकि वे अत्यधिक अनुशासित, कर्मठ और यांत्रिक जीवन जीते हैं। उनकी दिनचर्या और कार्यशैली बिजली की तरह तीव्र और नियमित होती है, जो उन्हें मशीनों जैसा बना देती है।

  5. मानवीय अधिकारों के संबंध में ज्योतिबा की क्या अवधारणा थी?

    ज्योतिबा फुले का मानना था कि सभी मनुष्यों को समान अधिकार मिलने चाहिए, चाहे वे किसी भी जाति या वर्ग के हों। उन्होंने शिक्षा, सम्मान और सामाजिक न्याय को मानवीय अधिकारों का मूल माना और शोषित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य किया।

  6. कस्तूरी मृग के अपने पर ही चिढ़ने का क्या कारण है?

    कस्तूरी मृग अपनी नाभि से निकलने वाली सुगंध से आकर्षित होकर उसे ढूंढता है, लेकिन उसे नहीं पता कि वह सुगंध उसी के शरीर से आ रही है। यह अज्ञानता उसे अपने ही ऊपर चिढ़ने पर मजबूर करती है, क्योंकि वह बाहर खोजता है जो भीतर है।

  7. शरत् के पिता का क्या शौक था? वह अपने शौक को पूरा क्यों नहीं कर पाते थे?

    शरत् के पिता को कहानियाँ सुनाने और सुनने का शौक था। वे अपने शौक को पूरा नहीं कर पाते थे क्योंकि परिवार की आर्थिक स्थिति खराब थी और उन्हें गृहस्थी की जिम्मेदारियाँ निभानी पड़ती थीं, जिससे उनके पास समय और साधन नहीं बचते थे।

  8. 'रांगेय राघव' अथवा 'सुमित्रानंदन पंत' में से किसी एक का साहित्यिक परिचय लिखिए।

    सुमित्रानंदन पंत: हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि। इनकी रचनाओं में प्रकृति प्रेम और सौंदर्य की प्रधानता है। प्रमुख कृतियाँ: 'पल्लव', 'गुंजन', 'युगांत'। इन्होंने प्रकृति को मानवीय भावनाओं से जोड़कर अद्वितीय काव्य रचा।

खण्ड-ब (दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

(उत्तर शब्द सीमा-अधिकतम 60 शब्द)

  1. अमरकांत की 'दोपहर का भोजन' कहानी का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।

    इस कहानी का उद्देश्य मध्यम वर्गीय परिवारों की आर्थिक विवशता और सामाजिक दबाव को उजागर करना है। यह दिखाती है कि कैसे गरीबी में भी लोग अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए दिखावा करते हैं। कहानी मानवीय संवेदनाओं और यथार्थ के बीच के संघर्ष को चित्रित करती है।

  2. "कोई छींकता तक नहीं।'' इस डर से कि मराध की शांति भंग न हो जाए। पंक्तियों का काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

    इन पंक्तियों में मृत्यु के बाद के मौन और शांति का मार्मिक चित्रण है। 'कोई छींकता तक नहीं' अतिशयोक्ति के माध्यम से शोक की गहराई को दर्शाता है। भाषा सरल किंतु भावप्रवण है, जो मृतक के प्रति सम्मान और जीवितों की संवेदनशीलता को उजागर करती है।

  3. लेखक मकबूल फिदा हुसैन ने ड्राइंग के प्रति अपनी अभिरुचि का वर्णन किस प्रकार किया है? बताइए।

    लेखक ने बताया कि उन्हें बचपन से ही ड्राइंग का शौक था। वे हर जगह - दीवारों, जमीन, कागज पर चित्र बनाते थे। उनकी रुचि इतनी प्रबल थी कि वे पढ़ाई छोड़कर भी चित्रकारी करते रहे। उन्होंने अपनी कला को निखारने के लिए कठोर परिश्रम किया और अंततः प्रसिद्ध चित्रकार बने।

खण्ड-स (निबंधात्मक प्रश्न)

(उत्तर शब्द सीमा-अधिकतम 80 शब्द)

  1. 'भारत के लोगों में नेतृत्व की भावना नहीं और नेतृत्व प्रदान करने वाले अपनी जिम्मेदारी का अनुभव नहीं करते।' उक्त कथन से आप कहाँ तक सहमत हैं? बताइए।

    मैं इस कथन से आंशिक रूप से सहमत हूँ। भारत में नेतृत्व की कमी नहीं है, लेकिन अक्सर नेता अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं लेते। जनता में भी नेतृत्व ग्रहण करने की भावना कमजोर है, क्योंकि वे नेताओं पर अंधविश्वास करती है। हालांकि, ग्रामीण स्तर पर कई उदाहरण हैं जहाँ लोगों ने सकारात्मक नेतृत्व दिखाया है।

    अथवा

    पूरी कहानी में जानकी न तो शासन-तंत्र के समर्थन में है न विरोध में, किंतु लेखक ने उसे केन्द्र में ही नहीं रखा बल्कि कहानी का शीर्षक बना दिया। क्यों?

    लेखक ने जानकी को शीर्षक बनाकर यह दिखाना चाहा कि वह कहानी की केंद्रीय पात्र है, भले ही वह शासन-तंत्र के पक्ष या विपक्ष में न हो। जानकी एक सामान्य महिला का प्रतिनिधित्व करती है जो राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अपने अस्तित्व और संघर्ष को जीती है। उसकी तटस्थता ही उसे विशेष बनाती है।

  2. "मुरली तऊ गुपालहिं भावति।" पद के माध्यम से गोपियों की चित्तवृत्ति का उल्लेख कीजिए।

    इस पद में गोपियाँ कहती हैं कि मुरली (बाँसुरी) ही कृष्ण को प्रिय है। यह गोपियों की ईर्ष्या और विरह वेदना को दर्शाता है। वे मुरली को अपनी प्रतिद्वंद्वी मानती हैं, क्योंकि वह कृष्ण के साथ निरंतर रहती है। गोपियों की चित्तवृत्ति में प्रेम, ईर्ष्या और समर्पण का अद्भुत मिश्रण है।

    अथवा

    "तट पर बगुलों-सी वृद्धाएँ, विधवाएँ जप, ध्यान में मग्न। मंदिर धारा में बहता, जिनका अदृश्य, गति अंतर-रोदन!" पंक्ति का काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए।

    इन पंक्तियों में वृद्ध विधवाओं की दयनीय स्थिति का मार्मिक चित्रण है। 'बगुलों-सी' उपमा उनकी श्वेत वस्त्र और एकरसता को दर्शाती है। 'अंतर-रोदन' उनके आंतरिक दुख को उजागर करता है। भाषा में चित्रात्मकता और संगीतात्मकता है, जो पाठक को भावुक कर देती है।

  3. 'शरत् के व्यक्तित्व पर उसके पिता के स्वभाव की झलक दिखाई देती है।' कथन की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

    शरत् के पिता स्वप्नदर्शी और कल्पनाशील थे, जो कहानियाँ सुनाने के शौकीन थे। यही गुण शरत् में भी विकसित हुए, जो बाद में महान कहानीकार बने। पिता की असफलताओं और संघर्षों ने शरत् को यथार्थवादी बनाया। इस प्रकार, पिता के स्वभाव की संवेदनशीलता और कल्पनाशीलता श

प्रश्न 4: आपके विद्यालय में आयोजित वार्षिकोत्सव का एक प्रतिवेदन तैयार कीजिए।

प्रतिवेदन

दिनांक: 15 दिसम्बर, 2024

विषय: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बाँसवाड़ा का वार्षिकोत्सव प्रतिवेदन

विद्यालय के वार्षिकोत्सव का आयोजन दिनांक 14 दिसम्बर, 2024 को विद्यालय प्रांगण में हर्षोल्लास के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ मुख्य अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी महोदय द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनमें नृत्य, गीत, नाटिका एवं कविता पाठ शामिल थे। प्रधानाचार्य महोदय ने वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। मुख्य अतिथि ने मेधावी छात्रों को पुरस्कार वितरित किए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

धन्यवाद ज्ञापन: आयोजन समिति

प्रश्न 5: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बाँसवाड़ा की विद्यालय विकास एवं प्रबंधन समिति की सत्रारम्भ से पूर्व होने वाली बैठक हेतु कार्यसूची तैयार कीजिए।

कार्यसूची

बैठक दिनांक: 25 मार्च, 2024

समय: प्रातः 11:00 बजे

स्थान: विद्यालय सभागार

  1. सत्रारम्भ हेतु शैक्षणिक कैलेंडर का अनुमोदन।
  2. नवीन सत्र में कक्षाओं के संचालन हेतु शिक्षकों का विभाजन।
  3. पाठ्यपुस्तकों एवं शैक्षिक सामग्री की व्यवस्था।
  4. विद्यालय भवन एवं संसाधनों की मरम्मत हेतु प्रस्ताव।
  5. छात्रवृत्ति एवं शुल्क माफी हेतु आवेदनों पर विचार।
  6. अन्य विषय (यदि कोई हो)।

प्रश्न 6: शासन सचिव, शिक्षा विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, राजस्थान, बीकानेर को विद्यालयों में शैक्षिक वातावरण निर्माण हेतु एक अर्द्धशासकीय पत्र लिखिए।

अर्द्धशासकीय पत्र

दिनांक: 10 जनवरी, 2024

प्रेषक:
शासन सचिव,
शिक्षा विभाग,
राजस्थान सरकार, जयपुर।

प्रति:
निदेशक,
माध्यमिक शिक्षा,
राजस्थान, बीकानेर।

विषय: विद्यालयों में शैक्षिक वातावरण निर्माण हेतु।

महोदय,

राज्य के विद्यालयों में शैक्षिक वातावरण को सुदृढ़ करने हेतु यह आवश्यक है कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को रोचक एवं प्रभावी बनाया जाए। इस हेतु सभी विद्यालयों में पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं एवं खेलकूद सुविधाओं का विकास किया जाए। साथ ही, शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। कृपया इस संबंध में आवश्यक निर्देश जारी करने का कष्ट करें।

धन्यवाद।

भवदीय,
(शासन सचिव)

अथवा

प्रश्न 6 (वैकल्पिक): स्वयं को बाँसवाड़ा निवासी कुमार सुधांशु मानते हुए एक स्ववृत्त तैयार कीजिए।

स्ववृत्त (बायोडाटा)

नाम: कुमार सुधांशु

पता: बाँसवाड़ा, राजस्थान

शैक्षिक योग्यता: कक्षा 11वीं (विज्ञान/कला वर्ग), राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, बाँसवाड़ा

रुचियाँ: पुस्तक पठन, कविता लेखन, खेलकूद

कौशल: हिन्दी एवं अंग्रेजी भाषा में दक्षता, कम्प्यूटर ज्ञान

उद्देश्य: शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर समाज की सेवा करना।


खण्ड-द

प्रश्न 7: निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

"उसके पास न्याय का बल है और नीति की शक्ति। एक ओर मिट्टी है दूसरी ओर लोहा, जो इस वक्त अपने को फौलाद कह रहा है। वह अजेय है, घातक है। अगर कोई शेर आ जाए, तो भिश्ती के वश छूट जाएँ, मियाँ सिपाही मिट्टी की बन्दूक छोड़ कर भागें, बकीौल साहब की नानी मर जाए, चोगे में मुंह छिपाकर जमीन पर लेट जाएँ। मगर यह चिमटा, यह बहादुर, यह रुस्तमे-हिंद लपककर शेर की गर्दन पर सवार हो जाएगा और उसकी आँखें निकाल लेगा।"

सप्रसंग व्याख्या

प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी साहित्य के एक प्रसिद्ध निबंध या कहानी से लिया गया है, जिसमें न्याय और नीति के बल पर अत्याचारी शक्ति का सामना करने का संदेश दिया गया है।

व्याख्या: लेखक कहता है कि जिस व्यक्ति के पास न्याय और नीति का बल है, वह सच्चा शक्तिशाली है। यहाँ मिट्टी (कमजोर) और लोहा (शक्तिशाली) का प्रतीकात्मक उपयोग किया गया है। लोहा स्वयं को फौलाद (अजेय) कहता है, परंतु न्याय के बल पर वह पराजित हो सकता है। यदि कोई बड़ा संकट (शेर) आए, तो कायर लोग डरकर भाग जाएँगे, परंतु न्याय और साहस से युक्त व्यक्ति (चिमटा/रुस्तमे-हिंद) उसका सामना करेगा और उसे पराजित करेगा। यह गद्यांश साहस, न्याय और नीति की विजय का संदेश देता है।

अथवा

"भाइयों और बहनों, डरो मत। जहाँ अन्धकार है वहीं प्रकाश है। अन्धकार में प्रकाश की किरण है, जैसे प्रकाश में अन्धकार की किंचित् कालिमा है। प्रकाश भी है। प्रकाश बाहर नहीं है, उसे अन्तर में खोजो। अन्तर में बुझी उस ज्योति को जगाओ, मैं तुम सबका उस ज्योति को जगाने के लिए आह्वान करता हूँ। मैं तुम्हारे भीतर की बही शाश्वत ज्योति को जगाना चाहता हूँ। हमारे 'साधना-मन्दिर' में आकर उस ज्योति को अपने भीतर जगाओ।"

सप्रसंग व्याख्या

प्रसंग: यह गद्यांश किसी आध्यात्मिक या प्रेरणादायक रचना से लिया गया है, जिसमें आत्मिक जागरण का संदेश है।

व्याख्या: वक्ता श्रोताओं को डर न मनाने की सलाह देता है। वह कहता है कि जहाँ अंधकार है, वहीं प्रकाश भी मौजूद है, क्योंकि दोनों एक-दूसरे में समाहित हैं। सच्चा प्रकाश बाहरी नहीं, बल्कि हमारे अंतर्मन में है। हमें अपने भीतर की बुझी हुई ज्योति (आत्मबल) को जगाना चाहिए। वक्ता इस ज्योति को जगाने का आह्वान करता है और 'साधना-मन्दिर' में आकर ध्यान या साधना द्वारा इसे प्रज्वलित करने का आग्रह करता है। यह गद्यांश आत्मविश्वास और आंतरिक शक्ति की पहचान का संदेश देता है।

प्रश्न 8: निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।

"बाँध लेंगे क्या तुझे यह मोम के बंधन सजीले ?
पंथ की बाधा बनेंगे तितलियों के पर रंगीले ?
विश्व का क्रंदन भुला देगी मधुप की मधुर गुनगुन,
क्या डुबा देंगे तुझे यह फूल के दल ओस-गीले ?
तू न अपनी डगर को अपने लिए कारा बनाना!
जाग तुझको दूर जाना!"

सप्रसंग व्याख्या

प्रसंग: प्रस्तुत पद्यांश हिन्दी साहित्य के एक प्रेरणादायक काव्य से लिया गया है, जिसमें मानव को जीवन में आगे बढ़ने और बाधाओं से न डरने का संदेश दिया गया है।

व्याख्या: कवि कहता है कि क्या ये सजीले मोम के बंधन (आकर्षक लेकिन कमजोर बाधाएँ) तुझे बाँध सकते हैं? क्या तितलियों के रंगीन पंख (क्षणिक सुख) तेरे मार्ग की बाधा बन सकते हैं? क्या भौंरे की मधुर गुनगुन (सांसारिक आकर्षण) तुझे संसार के दुखों को भुला सकती है? क्या ओस से गीले फूलों की पंखुड़ियाँ (नाजुक सुख) तुझे डुबा सकती हैं? कवि उपदेश देता है कि अपने मार्ग को कारागार मत बनाओ, बल्कि जागो और दूर तक जाने का संकल्प करो। यह पद्यांश जीवन में लक्ष्य प्राप्ति के लिए साहस और दृढ़ता का संदेश देता है।

अथवा

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खंड-घ

प्रश्न 24.

लोहसाँय की ठंडी शलाखें हैं
बेटी की आँखें मंदिर में दीवट पर
जलते घी के
दो दीए हैं।

निबंध (उत्तर शब्द सीमा: 300 शब्द)

निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबंध लिखिए:

  1. पर्यटन की अपार संभावनाएँ और भारत
  2. लोकतंत्र और मीडिया
  3. मेरा प्रिय कवि
  4. 21वीं सदी का भारत
  5. विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का महत्व

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