RBSE Class 11th 2025 Hindi Literature-(1117)-2025 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 11th
Exam year 2025
Subject Hindi Literature-(1117)-2025
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 11th 2025 Hindi Literature-(1117)-2025

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Rajasthan Board Class 11th Hindi Literature-(1117)-2025 2025 solved Previous Year Question Papers

अनुक्रमांक (अंकों में) / Roll No. (in figures) : ....................

अनुक्रमांक (शब्दों में) / Roll No. (in words) : ....................


[कुल प्रश्नों की संख्या : 24] [Total No. of Questions: 24] [समय : 3.15 घंटे] [Time: 3.15 Hours]

[कुल मुद्रित पृष्ठ : 09] [Total No. of Printed Pages : 3] [पूर्णांक : 100] [Maximum Marks : 100]


वार्षिक परीक्षा, 2025

कक्षा 11वीं / Class 11th

हिन्दी साहित्य / HINDI LITERATURE (1117)


General Instructions:

  1. Write Roll No. on the first page of the Question Paper.
  2. Marks for every question are indicated alongside.

सामान्य अनुदेश:

  1. अपना अनुक्रमांक प्रश्नपत्र के प्रथम पृष्ठ पर लिखें।
  2. प्रत्येक प्रश्न के सामने अंक अंकित हैं।

प्रश्न 1. निम्नलिखित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

पैरों को एक ही जगह पहुंचाने वाले अलग-अलग रास्ते हैं। यदि पूछो तो जितने मनुष्य हैं उतने ही धर्म भी हैं। हमें सभी धर्मों के प्रति समभाव रखना चाहिए। इसमें अपने धर्म के प्रति उदासीनता आती है। ऐसा कहना गलत है, बल्कि अपने धर्म के प्रति जो प्रेम है उसकी अंधता मिटती है। मेरी सम्मति है कि संसार के धर्म ग्रंथों को सहानुभूतिपूर्वक पढ़ना प्रत्येक सभ्य पुरुष और स्त्री का कर्त्तव्य है और यही प्रत्येक नर-नारी का पवित्र कर्म हो सकता है। दूसरे धर्मों के अध्ययन से मेरी श्रद्धा बढ़ने के साथ ही मेरी जीवन दृष्टि भी विकसित हुई है। इस सिद्धांत "सत्य के अनेक रूप होते हैं" ने मुझे एक ईसाई तथा एक मुसलमान को उसके अपने दृष्टिकोण से समझना सिखाया। जब तक अलग-अलग धर्म मौजूद हैं तब तक प्रत्येक धर्म को किसी विशेष बाह्य चिह्न की आवश्यकता होती है। जब बाह्य चिह्न आडम्बर बने या अपने धर्म को दूसरे धर्मों से बड़ा बताए तब वह त्याज्य हो जाते हैं। हमारे आत्म-मंडल का यह उद्देश्य होना चाहिए कि एक हिन्दू को अधिक अच्छा हिन्दू, एक मुसलमान को अधिक अच्छा मुसलमान तथा एक ईसाई को अधिक अच्छा ईसाई बनने में मदद करें। ईश्वर से हमारी प्रार्थना यह नहीं होनी चाहिए कि तू उन्हें वही प्रकाश दे जो मुझे दिया बल्कि यह होनी चाहिए कि तू उन्हें वह प्रकाश दे जिसकी उन्हें अपने सर्वोच्च विकास के लिए आवश्यकता है।

प्रश्न:

  1. (क) हम धर्मों के प्रति स्वस्थ दृष्टिकोण कैसे अपना सकते हैं? (4)

    हम सभी धर्मों के प्रति समभाव रखकर, उनके ग्रंथों को सहानुभूतिपूर्वक पढ़कर और यह समझकर स्वस्थ दृष्टिकोण अपना सकते हैं कि सत्य के अनेक रूप होते हैं। इससे अपने धर्म के प्रति अंधता मिटती है और दूसरे धर्मों के प्रति सम्मान बढ़ता है।

  2. (ख) धर्म के प्रति समभाव रखने से क्या लाभ है? (1)

    धर्म के प्रति समभाव रखने से अपने धर्म के प्रति प्रेम की अंधता मिटती है और हम दूसरे धर्मों को समझने तथा उनका आदर करने में सक्षम होते हैं।

  3. (ग) अन्य धर्मों के अध्ययन से लेखक की जीवन दृष्टि में क्या बदलाव आया? (1)

    अन्य धर्मों के अध्ययन से लेखक की श्रद्धा बढ़ी और उनकी जीवन दृष्टि विकसित हुई। उन्होंने दूसरे धर्मों के लोगों को उनके अपने दृष्टिकोण से समझना सीखा।

  4. (घ) धर्म के बाह्य चिह्न के बारे में लेखक क्या कहता है? (1)

    लेखक कहता है कि जब तक धर्म मौजूद हैं, बाह्य चिह्न आवश्यक हैं, लेकिन जब वे आडम्बर बन जाएं या अपने धर्म को दूसरों से बड़ा बताने लगें, तब वे त्याज्य हो जाते हैं।

  5. (ड) इस गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए। (1)

    उचित शीर्षक: "धर्मों के प्रति समभाव" या "सत्य के अनेक रूप"

  6. (च) लेखक के अनुसार, हमारी प्रार्थना क्या होनी चाहिए? (1)

    लेखक के अनुसार, हमारी प्रार्थना यह होनी चाहिए कि ईश्वर सभी को वह प्रकाश दे जिसकी उन्हें अपने सर्वोच्च विकास के लिए आवश्यकता है, न कि वही प्रकाश जो हमें मिला है।

  7. (छ) 'निर्मल' तथा 'सहिष्णु' शब्दों के विलोम शब्द लिखिए। (1)

    निर्मल का विलोम: मलिन या अपवित्र
    सहिष्णु का विलोम: असहिष्णु

  8. (ज) 'प्रत्येक' शब्द में उपसर्ग बताइए। (1)

    'प्रत्येक' शब्द में उपसर्ग 'प्रति' है।


प्रश्न 2. निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

नीड़ का निर्माण फिर-फिर,
नेह का आह्वान फिर-फिर!
वह उठी आँधी कि नभ में
छा गया सहसा अँधेरा,
धूलि धूसर बादलों ने
भूमि को इस भाँति घेरा,
रात-सा दिन हो गया, फिर
रात आई और काली,
लग रहा था अब न होगा
इस निशा काल का फिर सवेरा,
रात के उत्पात-भय से
भीत जन-जन, भीत कण-कण |
किन्तु प्राची से उषा की
मोहनी मुस्कान फिर-फिर!

[427-] Page 1 of 3

प्रश्न

(a) 'अट नहीं' और 'बादल' किसके प्रतीक हैं?

(@) कवि निर्माण का आह्वान क्यों करता है?

(7) किस बात से कवि भयभीत है?

(3) उषा की मुस्कान मानव मन को क्या प्रेरणा देती है?

(ड) 'रात आयी और काली' का आशय स्पष्ट कीजिए।

(a) कविता का उचित शीर्षक लिखिए।

(8) 'कण-कण' में कौनसा अलंकार है?

(9) जनसंचार के विभिन्न माध्यम कौन-कौनसे हैं?

(10) जनसंचार माध्यम की दृष्टि से इंटरनेट का महत्त्व बताइए।

निबंध

निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर 300 शब्दों में निबंध लिखिए:

  1. राष्ट्र निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका
  2. जल संरक्षण: एक महती आवश्यकता
  3. राजस्थान के प्रमुख मेले

पत्र लेखन

3.6 ग्राम पंचायत 'क ख ग' के सचिव की ओर से जिला कलेक्टर 'अ ब स' को गर्मी के मौसम में पेयजल की समुचित व्यवस्था हेतु टैंकर भिजवाने के लिए एक कार्यालयी पत्र लिखिए। (5)

अथवा

स्वयं को अनुपम मानते हुए एक निजी विद्यालय में कंप्यूटर अनुदेशक के पद हेतु अपना स्ववृत्त (बायोडाटा) लिखिए।

प्रतिवेदन एवं प्रेस विज्ञप्ति

प्र-4 अपने विद्यालय के वार्षिकोत्सव समारोह का प्रतिवेदन लिखिए। (4)

प्र-5 राजकीय विद्यालय हरिपुरा की ओर से वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, इस विषय पर एक प्रेस विज्ञप्ति लिखिए। (4)

व्यावहारिक व्याकरण

(0) प्राचीन आचार्यों ने रसों की संख्या कितनी मानी है?

(अ) 4 (ब) 8 (स) 6 (द) 44

(ii) तेल छंद के प्रथम और तृतीय चरण में मात्राओं की संख्या होती है:

(अ) 11 (ब) 13 (स) 70 (द) 11

रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए

  1. सोरठा एक ______ छंद है।
  2. काव्य के सौंदर्य में वृद्धि करने वाले तत्त्व ______ कहलाते हैं।
  3. समान वर्ण की आवृत्ति होने पर ______ अलंकार होता है।
  4. 'पानी गये न उबरे, मोती मानुष चून' में ______ अलंकार है।
  5. शृंगार रस का स्थायी भाव ______ है।
  6. जब किसी व्यक्ति, वस्तु आदि का वर्णन बढ़ा-चढ़ा कर किया जाए, तो ______ अलंकार होता है।

अलंकार की परिभाषा

प्र-7 किसी एक अलंकार की परिभाषा लिखते हुए एक उदाहरण लिखिए। (2)

सप्रसंग व्याख्या

प्र-8 निम्नलिखित पद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लिखिए: (5)

अरे इन दोहुन राह न पाई।
हिंदू अपनी जाति बड़ाई गागर छुबन न देई।
वेश्या के पायन-तर पानी यह देखो हिंदुआई।
मुसलमान के पीर-औलिया मुर्गी मुर्गा खाई।
कंजूस की बेटी घरहिं में करे सगाई।

रिश्ते हैं, लेकिन खुलते नहीं हैं
और हम अपने खून में इतना भी लोहा
नहीं पाते,
कि हम उससे एक ताली बनवाते
और भाषा के भुन्ना-सी ताले को खोलते।

खण्ड-ग (व्याख्या एवं प्रश्नोत्तर)

प्रश्न 17. निम्नलिखित गद्यांश की व्याख्या कीजिए:

आँखों में पानी भर आया और वह उसे देखकर इशारों से कुछ समझाने लगा। खेलते-खेलते बसंता ने उसे मार दिया था। उसकी जिंदगी भी अजीब थी। चमेली को चूल्हा छोड़कर आना पड़ा। वह देर तक उससे पूछती रही। उसकी समझ में कुछ न आया। गूँगे का हाथ उठा और वह रोने लगा। उसका रुदन भी अजीब था, क्योंकि अपने-आप रुक गया। उसमें चमेली को चूल्हा छोड़कर आना पड़ा। वह देर तक उससे पूछती रही। उसकी समझ में कुछ न आया।

उसकी जिंदगी भी अजीब थी। उसकी महक से भट्टे की नीरस रोटी के साथ गुड़ था फिर लाल मिर्च। जिंदगी में कुछ देर के लिए ही सही, ताज़गी का अहसास होता था। ज्यादातर घटनी ही खाते, दाल सब्जी तो कभी-कभार ही बनती थी।

व्याख्या: प्रस्तुत गद्यांश में लेखक ने एक गूँगे व्यक्ति की पीड़ा और उसकी दयनीय जीवन स्थितियों का मार्मिक चित्रण किया है। गूँगा व्यक्ति बसंता द्वारा मारे जाने के बाद रोने लगता है, लेकिन उसका रुदन भी अजीब है क्योंकि वह अपने आप रुक जाता है। चमेली उससे पूछती है परंतु वह कुछ बता नहीं पाता। लेखक ने उसकी जिंदगी को अजीब बताया है - जहाँ भट्टे की नीरस रोटी के साथ गुड़ और लाल मिर्च ही खाने को मिलती है, दाल-सब्जी तो कभी-कभार ही बनती है। इस प्रकार गद्यांश में गरीबी, मूक पीड़ा और जीवन की विडंबना को उजागर किया गया है।

अथवा

गाँव-बस्ती का मान बने रहा। झोंपड़ी के बाहर जलते चूल्हे और पकते भोजन का दृश्य सुखद था।

व्याख्या: प्रस्तुत पंक्तियों में ग्रामीण जीवन की सादगी और सौंदर्य का चित्रण है। झोंपड़ी के बाहर जलता चूल्हा और पकता भोजन गाँव-बस्ती की गरिमा को बनाए रखता है। यह दृश्य सुखद और मनोहारी है, जो सादगी में भी जीवन की सुंदरता को दर्शाता है।

प्रश्न 18. भारतेंदु हरिश्चंद्र अथवा सूरदास का साहित्यिक परिचय दीजिए।

भारतेंदु हरिश्चंद्र का साहित्यिक परिचय: भारतेंदु हरिश्चंद्र (1850-1885) हिंदी साहित्य के भारतेंदु युग के प्रवर्तक माने जाते हैं। इनका जन्म वाराणसी में हुआ था। ये एक सफल कवि, नाटककार, निबंधकार और पत्रकार थे। इनकी प्रमुख रचनाएँ हैं - 'अंधेर नगरी', 'भारत दुर्दशा', 'नील देवी', 'सत्य हरिश्चंद्र' आदि। इन्होंने 'कविवचन सुधा', 'हरिश्चंद्र मैगजीन' आदि पत्रिकाओं का संपादन किया। इनके साहित्य में राष्ट्रीय चेतना, सामाजिक सुधार और देशभक्ति की भावना प्रमुख है।

अथवा सूरदास का साहित्यिक परिचय: सूरदास हिंदी साहित्य के भक्तिकाल के प्रमुख कवि हैं। इनका जन्म 1478 ई. के आसपास माना जाता है। ये वल्लभाचार्य के शिष्य थे और पुष्टिमार्गीय भक्ति धारा के प्रमुख कवि हैं। इनकी प्रमुख रचना 'सूरसागर' है, जिसमें श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और भक्ति भावना का सुंदर चित्रण है। इनकी अन्य रचनाओं में 'सूरसारावली', 'साहित्य लहरी' आदि शामिल हैं। सूरदास के पदों में वात्सल्य रस और शृंगार रस का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

प्रश्न 19. हामिद ने अपने तीन पैसों से क्या खरीदा?

हामिद ने अपने तीन पैसों से चिमटा खरीदा।

प्रश्न 20. सन् 1888 में ज्योतिबा फुले को कौन सी उपाधि दी गई?

सन् 1888 में ज्योतिबा फुले को 'महात्मा' की उपाधि दी गई।

प्रश्न 21. 'सूरसागर' का प्रमुख ग्रंथ है?

'सूरसागर' सूरदास का प्रमुख ग्रंथ है।

प्रश्न 22. नागार्जुन का मूल नाम क्या है?

नागार्जुन का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र है।

प्रश्न 23. विद्येश्वरी के छोटे बेटे का नाम क्या था?

विद्येश्वरी के छोटे बेटे का नाम प्रमोद था।

प्रश्न 24. 'ज्योतिबा फुले' पाठ के लेखक कौन हैं?

'ज्योतिबा फुले' पाठ के लेखक सुधा अरोड़ा हैं।

प्रश्न 25. कवि देव के प्रमुख आश्रयदाता का नाम बताइए।

कवि देव के प्रमुख आश्रयदाता औरंगजेब थे।

प्रश्न 26. निम्नलिखित में से कौन सी रचना महादेवी वर्मा की नहीं है?

हंसमाला महादेवी वर्मा की रचना नहीं है। महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ नीहार, रश्मि और यामा हैं।

प्रश्न 27. लेखक ने टॉर्च बेचने वाली कंपनी का नाम 'सूरज छप' ही क्यों रखा?

लेखक ने टॉर्च बेचने वाली कंपनी का नाम 'सूरज छप' इसलिए रखा क्योंकि टॉर्च से प्रकाश मिलता है, जो सूरज के प्रकाश का प्रतीक है। 'सूरज छप' नाम से यह संकेत मिलता है कि यह कंपनी ऐसी टॉर्च बेचती है जो सूरज की तरह रोशनी देती है। यह नाम आकर्षक और यादगार भी है।

प्रश्न 28. 'सपना' कवित्त में नायिका क्यों प्रसन्न थी और उसका सपना क्यों टूट गया?

'सपना' कवित्त में नायिका इसलिए प्रसन्न थी क्योंकि उसने सपने में अपने प्रियतम को देखा था और उससे मिलन हुआ था। उसका सपना इसलिए टूट गया क्योंकि वह जाग गई और वास्तविकता में उसे अपने प्रियतम का वियोग सहना पड़ा। सपने का सुख क्षणिक था और जागने पर उसे अपनी अकेली और वियोगिनी अवस्था का एहसास हुआ।

प्रश्न 29. क्या लाल का व्यवहार सरकार के विरुद्ध षड्यंत्रकारिता था? अपने विचार लिखिए।

नहीं, लाल का व्यवहार सरकार के विरुद्ध षड्यंत्रकारिता नहीं था। लाल एक सामान्य व्यक्ति था जो अपने अधिकारों और न्याय की माँग कर रहा था। वह सरकार के खिलाफ कोई साजिश नहीं रच रहा था, बल्कि अपनी समस्याओं के समाधान की आशा रखता था। उसका व्यवहार एक नागरिक के रूप में अपनी बात रखने का तरीका था, न कि कोई षड्यंत्र। सरकार को ऐसे लोगों की बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।

प्रश्न 30. 'चल! ये लोग म्हारा घर न बणने देंगे।' सुकिया के इस कथन के आधार पर कहानी की मूल संवेदना स्पष्ट कीजिए।

सुकिया के इस कथन के आधार पर कहानी की मूल संवेदना गरीब और शोषित वर्ग की असहायता और उनके सपनों के टूटने की पीड़ा है। सुकिया और उसका परिवार एक छोटा सा घर बनाना चाहता है, लेकिन समाज के शक्तिशाली लोग उन्हें ऐसा करने से रोकते हैं। यह कथन दर्शाता है कि गरीब व्यक्ति अपने छोटे से सपने को भी पूरा नहीं कर सकता क्योंकि समाज में ऊँचे पद पर बैठे लोग उसके विकास में बाधा डालते हैं। कहानी की मूल संवेदना सामाजिक असमानता, शोषण और गरीबों की मजबूरी को उजागर करना है।

प्रश्न 31. 'तुझको दूर जाना' कविता की मूल संवेदना लिखिए।

'तुझको दूर जाना' कविता की मूल संवेदना वियोग और विरह की पीड़ा है। कविता में नायिका अपने प्रियतम से दूर जाने की पीड़ा को व्यक्त करती है। वह जानती है कि उसका प्रियतम उसे छोड़कर दूर जाएगा, लेकिन वह इस वियोग को सहन नहीं कर पाती। कविता में प्रेम, वियोग, और अलगाव की मार्मिक भावना को चित्रित किया गया है। यह कविता मानवीय संबंधों की नाजुकता और वियोग की पीड़ा को उजागर करती है।

प्रश्न 32. देश की सब प्रकार से उन्नति