RBSE Class 12th 2010 Hindi (Compulsory)-SS-01-2010 Previous Year Papers
Hindi (Compulsory)-SS-01-2010 from the 2010 exam year is part of the Class 12th previous year papers archive on RBSE Solution. Many learners start here after finishing the textbook to see how questions were actually framed on the Rajasthan Board of Secondary Education (RBSE) paper.
Treat this question paper as a mock under gentle timing first, then as a marking exercise the second time. The introduction on this page is written only for this subject-and-year pair, not copied from other pages.
Bookmark the link if you coach juniors — the layout stays stable for search engines and classroom sharing.
Paper details
Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.
| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2010 |
| Subject | Hindi (Compulsory)-SS-01-2010 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2010, and subject Hindi (Compulsory)-SS-01-2010 before studying.
RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.
Turning 2010 papers into insight
One Hindi (Compulsory)-SS-01-2010 paper reveals style; several from the same year reveal pattern. After this page, open sibling subjects listed below to see whether marks cluster in certain units.
Keep rough work dated in your notebook. Examiners in Class 12th expect clear numbering even in practice sessions.
RBSE Class 12th 2010 Hindi (Compulsory)-SS-01-2010
Scroll through the Previous Year Papers pages for Hindi (Compulsory)-SS-01-2010 (2010).
Rajasthan Board Class 12th Hindi (Compulsory)-SS-01-2010 2010 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2010
अनिवार्य हिन्दी
(COMPULSORY HINDI)
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्नपत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंकवाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
- प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii तथा iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (आ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें :
| प्रश्न क्रमांक | उत्तर का सही विकल्प |
|---|---|
| 1. (i) | |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
SS—O—Hindi (C) SS-501 [Turn over]
प्रश्न 1. बहुविकल्पीय प्रश्न
(i) ‘नाविक’ शब्द का सही संधि-विच्छेद है
- (अ) नौ+इक
- (ब) ना+ईक
- (स) नाव + इक
- (द) ना + आविक
सही उत्तर: (स) नाव + इक
स्पष्टीकरण: 'नाविक' शब्द 'नाव' + 'इक' के संयोग से बना है, जिसमें 'अ' + 'इ' = 'अ' (गुण संधि) हुई है।
(ii) विसर्ग संधि का उदाहरण है
- (अ) सज्जन
- (ब) हरिश्चन्द्र
- (स) मनोहर
- (द) उज्ज्वल
सही उत्तर: (ब) हरिश्चन्द्र
स्पष्टीकरण: 'हरिश्चन्द्र' शब्द 'हरिः' + 'चन्द्र' से बना है, जिसमें विसर्ग (:) का 'श्' में परिवर्तन हुआ है।
(iii) “जगत् + नाथ' शब्दों का संधियुक्त शब्द है
- (अ) जगतनाथ
- (ब) जग्तनाथ
- (स) जगन्नाथ
- (द) जगतूनाथ
सही उत्तर: (स) जगन्नाथ
स्पष्टीकरण: 'जगत्' + 'नाथ' में 'त्' + 'न' = 'न्न' (व्यंजन संधि) होकर 'जगन्नाथ' बनता है।
(iv) 'स्वागत' शब्द में संधि है
- (अ) व्यंजन संधि
- (ब) विसर्ग संधि
- (स) यण् संधि
- (द) अयादि संधि
सही उत्तर: (अ) व्यंजन संधि
स्पष्टीकरण: 'स्वागत' शब्द 'सु' + 'आगत' से बना है, जिसमें 'उ' + 'आ' = 'वा' (यण् संधि) होती है। अतः यह यण् संधि का उदाहरण है।
प्रश्न 2. 'लहर' शब्द के दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर: 'लहर' शब्द के दो पर्यायवाची शब्द हैं:
- तरंग
- वीचि
प्रश्न 3. निम्नलिखित शब्दों के विलोमार्थक शब्द लिखिए:
(i) संकल्प – विकल्प
(ii) उपचय – अपचय
प्रश्न 4. साधारण वाक्य की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: साधारण वाक्य वह वाक्य होता है जिसमें एक ही उद्देश्य (कर्ता) और एक ही विधेय (क्रिया) होता है। इसे सरल वाक्य भी कहते हैं। उदाहरण: 'राम पढ़ता है।'
प्रश्न 5. निम्नलिखित वाक्य में 'पढ़ता' शब्द की पद-व्याख्या सम्बन्धी कोई दो बिन्दु लिखिए:
शिव पुस्तक पढ़ता है।
उत्तर: 'पढ़ता' शब्द की पद-व्याख्या के दो बिन्दु:
- क्रिया पद: 'पढ़ता' एक क्रिया है, जो 'शिव' (कर्ता) के द्वारा किए जाने वाले कार्य (पढ़ने) को दर्शाती है।
- वर्तमान काल: यह क्रिया वर्तमान काल में हो रही है, जैसा कि सहायक क्रिया 'है' से स्पष्ट होता है।
6. निम्नलिखित शब्द-युग्मों का अर्थभेद स्पष्ट कीजिए : 2
- पायस – पावस
पायस का अर्थ है 'खीर' या 'दूध से बना मीठा व्यंजन', जबकि पावस का अर्थ है 'वर्षा ऋतु' या 'बरसात'। - क्षुधा – सुधा
क्षुधा का अर्थ है 'भूख', जबकि सुधा का अर्थ है 'अमृत' या 'देवताओं का पेय'।
7. निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक-एक शब्द लिखिए : 2
- वह जो सबके मन की बात जानता है – अन्तर्यामी
- वह उक्ति जो परम्परा से चल रही हो – लोकोक्ति
8. (क) “ऐन मौके पर उपाय करना' के लिए सही मुहावरा लिखिए।
(ख) “कभी नाव गाड़ी पर, कभी गाड़ी नाव पर।' लोकोक्ति का स्वरचित वाक्य में प्रयोग कीजिए : 2
9. निम्नलिखित सामासिक पदों का विग्रह करके उनमें निहित समास का नाम लिखिए : 2
- नीलकण्ठ
विग्रह: नीला है जो कण्ठ (गला) – नीलकण्ठ
समास का नाम: बहुव्रीहि समास - घृतान्न
विग्रह: घृत और अन्न – घृतान्न
समास का नाम: द्वन्द्व समास
10. निम्नलिखित वाक्यों को शुद्ध करके पुनः लिखिए : 2
- अशुद्ध: बच्चे को धोकर फल खिलाओ।
शुद्ध: बच्चे को फल धोकर खिलाओ। - अशुद्ध: मीराँ एक प्रसिद्ध कवि थी।
शुद्ध: मीराँ एक प्रसिद्ध कवयित्री थीं।
11. निम्नलिखित शब्दों में विद्यमान उपसर्ग, प्रत्यय एवं मूल शब्द छाँटकर लिखिए : 2
- प्रार्थना
उपसर्ग: प्र
मूल शब्द: अर्थ
प्रत्यय: ना - लालिमा
उपसर्ग: कोई नहीं
मूल शब्द: लाल
प्रत्यय: इमा
प्रश्न 2: अभिधा एवं लक्षणा शब्द-शक्ति में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
अभिधा शब्द-शक्ति वह शक्ति है जिसके द्वारा किसी शब्द का सीधा, शाब्दिक अर्थ (वाच्यार्थ) ग्रहण किया जाता है। इसमें शब्द अपने मुख्य अर्थ में प्रयुक्त होता है।
लक्षणा शब्द-शक्ति वह शक्ति है जिसके द्वारा शब्द के मुख्य अर्थ में बाधा पड़ने पर उससे संबंधित किसी अन्य अर्थ (लक्ष्यार्थ) का बोध होता है। इसमें शब्द का प्रयोग लाक्षणिक रूप में होता है।
मुख्य अंतर: अभिधा में शब्द का सीधा अर्थ ग्रहण किया जाता है, जबकि लक्षणा में मुख्य अर्थ में बाधा पड़ने पर उससे जुड़ा कोई अन्य अर्थ लिया जाता है।
प्रश्न 3: “भारत ते” कविता में सुमित्रानन्दन पंत ने क्या सन्देश दिया है?
“भारत ते” कविता में सुमित्रानन्दन पंत ने भारत की प्राचीन गौरवशाली संस्कृति और सभ्यता का स्मरण कराते हुए यह सन्देश दिया है कि हमें अपनी मिट्टी और संस्कृति से जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने भारत की एकता और अखंडता पर बल दिया है।
प्रश्न 4: “सफल जन्म मेरी बेटी का, बची विश्व की ot’ ‘aq की व्यथा' कविता के आधार पर उक्त पंक्ति में निहित अर्थ लिखिए।
“सफल जन्म मेरी बेटी का, बची विश्व की ot’ पंक्ति में निहित अर्थ यह है कि बेटी का जन्म सफल तभी माना जाएगा जब वह विश्व की पीड़ा और व्यथा को समझे और उसके निवारण में योगदान दे। यह पंक्ति स्त्री-शक्ति और करुणा के महत्व को रेखांकित करती है।
प्रश्न 5: “प्रकृति रही दुर्जेय, पराजित हम सब थे भूले मद में।” ‘farm’ कविता के आधार पर इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
इस पंक्ति का आशय है कि प्रकृति अपने स्वरूप में अत्यंत शक्तिशाली और अजेय है। मनुष्य अपने अहंकार और मद में चूर होकर यह भूल गया है कि वह प्रकृति के सामने पराजित है। यह पंक्ति मनुष्य के अहंकार और प्रकृति की महानता को दर्शाती है।
प्रश्न 6: हमारे जीवन में किस शिक्षा की आवश्यकता है? अपने विचार अभिव्यक्त कीजिए।
हमारे जीवन में नैतिक और मानवीय मूल्यों पर आधारित शिक्षा की आवश्यकता है। ऐसी शिक्षा जो हमें सत्य, अहिंसा, करुणा, सहानुभूति और सेवा का पाठ पढ़ाए। केवल पुस्तकीय ज्ञान से अधिक आवश्यक है चरित्र निर्माण और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का बोध कराने वाली शिक्षा। यह शिक्षा ही मनुष्य को सच्चा मानव बनाती है और समाज में शांति एवं समृद्धि लाती है।
प्रश्न 7: “'मधुआ' कहानी आडम्बरपूर्ण निर्मम सामंती मनोवृत्ति पर एक चुभता व्यंग्य है।” इस कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए।
“मधुआ” कहानी में सामंती मनोवृत्ति के आडम्बर और निर्ममता पर तीखा व्यंग्य किया गया है। कहानी में दिखाया गया है कि कैसे सामंत अपने स्वार्थ और दिखावे के लिए गरीबों और कमजोरों का शोषण करते हैं। मधुआ जैसे पात्र के माध्यम से लेखक ने सामंती व्यवस्था की क्रूरता और पाखंड को उजागर किया है। यह व्यंग्य समाज के उस तबके पर चुभता है जो दिखावे में तो धार्मिक और दयालु दिखता है, पर वास्तव में निर्मम और स्वार्थी होता है।
प्रश्न 8: महावीर स्वामी ने पंचमहाव्रत कौन-कौन से बताये हैं? संक्षेप में लिखिए।
महावीर स्वामी द्वारा बताए गए पंचमहाव्रत निम्नलिखित हैं:
- अहिंसा: किसी भी प्राणी को मानसिक, वाचिक या शारीरिक रूप से कष्ट न देना।
- सत्य: हमेशा सच बोलना और सत्य के मार्ग पर चलना।
- अस्तेय: किसी की वस्तु बिना अनुमति के न लेना, चोरी न करना।
- ब्रह्मचर्य: इंद्रियों पर नियंत्रण रखना और पवित्र जीवन जीना।
- अपरिग्रह: आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह न करना, मोह-माया से दूर रहना।
प्रश्न 9: “द्वार बलि का खोल चल, भूडोल कर दे।” “जवानी' कविता के आधार पर इस पंक्ति की सत्यता सिद्ध कीजिए।
“जवानी” कविता में यह पंक्ति युवा शक्ति के उत्साह और सामर्थ्य को दर्शाती है। “द्वार बलि का खोल चल” का अर्थ है कि युवा शक्ति अन्याय और अत्याचार के द्वार को तोड़कर आगे बढ़े। “भूडोल कर दे” का तात्पर्य है कि युवा अपने साहस और पराक्रम से पूरे समाज में क्रांति ला सकते हैं। यह पंक्ति इस बात की सत्यता सिद्ध करती है कि युवा शक्ति में असंभव को भी संभव करने की क्षमता होती है। वे पुरानी रूढ़ियों और बुराइयों को तोड़कर नए युग का निर्माण कर सकते हैं।
प्रश्न 20 से 26
20. “'खेल' कहानी बाल मनोविज्ञान का निदर्शन कराती है।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।
(उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द) 3
यह कथन सत्य है। 'खेल' कहानी में बाल मनोविज्ञान का सजीव चित्रण हुआ है। बच्चों की स्वाभाविक चंचलता, खेल के प्रति उनकी अभिरुचि, और उनके मासूम मनोभावों को लेखक ने बड़ी कुशलता से प्रस्तुत किया है। कहानी में बच्चों के खेल-खेल में सीखने और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की प्रवृत्ति को दर्शाया गया है, जो बाल मनोविज्ञान का ही निदर्शन है।
21. “कानून की असंगति एक ईमानदार को चोर बनने पर विवश कर देती है।” 'निरापद' कहानी के आधार पर उक्त कथन को सिद्ध कीजिए।
(उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द) 3
'निरापद' कहानी में यह कथन पूर्णतः सिद्ध होता है। कहानी का नायक एक ईमानदार व्यक्ति है, परंतु कानून की विसंगतियों के कारण वह चोर बनने को विवश हो जाता है। कानून में ऐसी असंगतियाँ हैं कि एक सज्जन व्यक्ति भी उनके जाल में फँसकर अपराधी बन जाता है। यह कहानी कानून की खामियों पर एक करारी चोट है।
22. अश्वमेध क्यों किया जाता है? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
(उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द) 3
अश्वमेध यज्ञ प्राचीन काल में राजाओं द्वारा अपनी साम्राज्य विस्तार की महत्वाकांक्षा और सार्वभौमिक शक्ति प्रदर्शन के लिए किया जाता था। इसमें एक घोड़े को छोड़ा जाता था और जिस राज्य में वह घोड़ा बिना रोक-टोक के घूमता था, वह राज्य यज्ञ करने वाले राजा के अधीन मान लिया जाता था। यह यज्ञ राजा की प्रतिष्ठा और शक्ति का प्रतीक था।
23. “'राष्ट्रनिर्माण की भूमिका' एक सफल नाटक है।” इस कथन की प्रामाणिकता सिद्ध कीजिए।
(उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द) 3
यह कथन सत्य है। 'राष्ट्रनिर्माण की भूमिका' नाटक में राष्ट्र निर्माण के विभिन्न पहलुओं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। नाटक में देशभक्ति, त्याग, बलिदान और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य जैसे विषयों को मार्मिकता से उठाया गया है। इसकी कथावस्तु, पात्र-चित्रण और संवाद अत्यंत सजीव हैं, जो दर्शकों को राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूक करते हैं।
24. “उदार व्यक्तित्व अपरिचितों में भी आत्मीयता के दर्शन कर लेते हैं।” इस कथन में निहित अर्थ को स्पष्ट कीजिए।
(उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द) 4
इस कथन का अर्थ है कि उदार हृदय वाले व्यक्ति किसी से भी अपना संबंध जोड़ लेते हैं। वे अपरिचितों में भी अपनेपन का भाव देख लेते हैं। उनके लिए कोई अजनबी नहीं होता। वे सबको अपना समझते हैं और सबसे आत्मीयता का व्यवहार करते हैं। यह उनके विशाल हृदय और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है।
25. “'स्नेह' बदलते युग में सास-बहू के सम्बन्धों पर एक मर्मस्पर्शी कहानी है।” उक्त कथन को समझाइए।
(उत्तर सीमा : लगभग 80 शब्द) 4
यह कथन सत्य है। 'स्नेह' कहानी बदलते युग में सास-बहू के जटिल संबंधों को मार्मिकता से चित्रित करती है। कहानी में दिखाया गया है कि कैसे समय के साथ इन संबंधों में बदलाव आता है, परंतु अंतर्निहित स्नेह और समझदारी इन्हें जीवित रखती है। कहानी में पारिवारिक मूल्यों और आपसी सम्मान का संदेश निहित है।
26. आप केशव शर्मा उज्जैन निवासी हैं। इन्दौर निवासी अपने मित्र को एक पत्र लिखिए जिसमें ग्रीष्मावकाश इस बार आपके साथ मुम्बई में बिताने का आग्रह हो।
(उत्तर सीमा : लगभग 100 शब्द) 5
पत्र:
परीक्षा भवन,
उज्जैन
दिनांक: 15 मार्च, 2010
प्रिय मित्र सुरेश,
सप्रेम नमस्ते।
आशा है तुम सकुशल होगे। मैं यहाँ ठीक हूँ। इस बार ग्रीष्मावकाश में मैं मुम्बई जा रहा हूँ। मेरे चाचा जी ने बुलाया है। मैं चाहता हूँ कि तुम भी मेरे साथ चलो। हम दोनों मिलकर मुम्बई की सैर करेंगे और गेटवे ऑफ इंडिया, मरीन ड्राइव, जुहू बीच आदि देखेंगे। यह बहुत मजेदार होगा। कृपया अपने माता-पिता से अनुमति लेकर मुझे सूचित करो।
तुम्हारा मित्र,
केशव शर्मा
पता: केशव शर्मा, 42, महाकाल मार्ग, उज्जैन
प्रश्न 27
(क) पल्लवन
प्रस्तुत पंक्ति का पल्लवन लगभग 50 शब्दों में कीजिए:
"का वर्षा जब कृषि सुखाने"
प्रस्तुत पंक्ति में कहा गया है कि जब वर्षा कृषि को सुखाने लगती है, तो यह विडंबना ही है। वर्षा का जल किसान के लिए जीवनदायिनी होता है, परंतु यदि वही वर्षा अत्यधिक हो जाए तो फसलों को नष्ट कर देती है। अतः संतुलित वर्षा ही कृषि के लिए लाभदायक होती है।
(ख) संक्षेपण
निम्नलिखित अवतरण का संक्षेपण लगभग एक-तिहाई शब्दों में कीजिए:
राष्ट्र भाषा की आवश्यकता राष्ट्रीय सम्मान की दृष्टि से भी है। अपने को एक ही राष्ट्र के निवासी मानने वाले दो व्यक्ति किसी विदेशी भाषा में बात करें, यह हास्यास्पद असंगति है। इस बात का द्योतक भी है कि उस देश में कोई समुन्नत भाषा नहीं है। दूसरे के सामने हाथ पसारना समृद्धि का नहीं, दरिद्रता का चिह्न है। दूसरे की भाषा से काम चलाना बहुत कुछ वैसा ही है। जिसकी अपनी भाषा है, वह दूसरे की भाषा क्यों उधार लें? इससे राष्ट्रीय सम्मान में बट्टा लगता है। विदेशों में जाने पर भारतीयों को अंग्रेजी में बातें करते देखकर वहाँ के निवासी आश्चर्य से पूछ बैठते हैं कि क्या आपकी कोई भाषा नहीं है? इस प्रश्न का क्या उत्तर दिया जाय। भाषाएँ तो हमारे यहाँ अनेक हैं -- एक से एक सुन्दर व समृद्ध। हीन भावना के कारण उनको नहीं अपना पाते।
राष्ट्रभाषा राष्ट्रीय सम्मान के लिए आवश्यक है। एक ही देश के लोगों का विदेशी भाषा में बात करना हास्यास्पद है और यह दर्शाता है कि उनकी अपनी कोई समृद्ध भाषा नहीं है। दूसरे की भाषा उधार लेना दरिद्रता का चिह्न है, जिससे राष्ट्रीय सम्मान को ठेस पहुँचती है। भारत में अनेक सुंदर भाषाएँ होते हुए भी हम हीन भावना के कारण उन्हें नहीं अपनाते।
प्रश्न 28
निम्नलिखित गद्यांश की सप्रसंग व्याख्या लगभग 50 शब्दों में कीजिए:
"चिन्ता को लोग चिता कहते हैं। जिसे किसी चिन्ता ने पकड़ लिया है, उस बेचारे की जिन्दगी ही खराब हो जाती है। किन्तु ईर्ष्या शायद चिन्ता से बदतर चीज है क्योंकि वह मनुष्य के मौलिक गुणों को ही कुंठित बना डालती है। मृत्यु शायद, फिर भी श्रेष्ठ है, बनिस्पत इसके कि हमें अपने गुणों को कुण्ठित बनाकर जीना पड़े। चिन्ता दग्ध व्यक्ति समाज की दया का पात्र है। किन्तु ईर्ष्या से जला-भुना आदमी जहर की एक चलती-फिरती टैंक के समान है, जो हर जगह वायु को दूषित करती फिरती है।"
प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश में चिंता और ईर्ष्या की तुलना करते हुए बताया गया है कि ईर्ष्या चिंता से भी अधिक घातक है।
व्याख्या: लेखक कहता है कि चिंता मनुष्य के जीवन को नष्ट कर देती है, परंतु ईर्ष्या उसके मौलिक गुणों को ही कुंठित कर देती है। चिंताग्रस्त व्यक्ति समाज की दया का पात्र होता है, जबकि ईर्ष्यालु व्यक्ति जहर की टंकी के समान वातावरण को दूषित करता है। अतः ईर्ष्या चिंता से अधिक खतरनाक है।
प्रश्न 29
निम्नलिखित पंक्तियों की सप्रसंग व्याख्या लगभग 50 शब्दों में कीजिए :
“उठे राष्ट्र तेरे बल पर
बढ़े प्रगति के पथ में,
पृथ्वी को रख दिया उठाकर
तूने नभ के आँगन में ।
तेरे प्राणों के ज्वारों पर
लहराते हैं देश सभी,
चाहे जिसे इधर कर दे तू
चाहे जिसे उधर क्षण में ।”
संदर्भ : प्रस्तुत पंक्तियाँ कवि शिवमंगल सिंह 'सुमन' द्वारा रचित कविता से ली गई हैं।
प्रसंग : इन पंक्तियों में कवि ने मानव की शक्ति और उसकी प्रगति की अद्भुत क्षमता का वर्णन किया है।
व्याख्या : कवि कहते हैं कि मानव के बल पर ही राष्ट्र उठते हैं और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते हैं। मानव ने पृथ्वी को उठाकर आकाश के आँगन में रख दिया (अंतरिक्ष में पहुँचा दिया)। मानव के प्राणों के ज्वार (उत्साह) पर सभी देश लहराते हैं। मानव चाहे तो किसी को एक क्षण में इधर या उधर कर सकता है।
प्रश्न 30
निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर लगभग 300 शब्दों में निबन्ध लिखिए :
- महँगाई : समस्या और समाधान
- सर्व शिक्षा अभियान
- आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी
- राजस्थान का जल संकट
- अनुशासन का महत्व