RBSE Class 12th 2010 History-SS-13-1-2010 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2010
Subject History-SS-13-1-2010
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th History-SS-13-1-2010 2010 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2010

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2010

वैकल्पिक समूह I — कला (OPTIONAL GROUP I — ARTS)

इतिहास — प्रथम पत्र (HISTORY — First Paper)

समय : 3 घण्टे 15 मिनट   |   पूर्णांक : 60


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
  3. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं। प्रश्न क्रमांक 23 व 24 में आंतरिक विकल्प हैं।
    All the questions are compulsory. There are internal choices in Question Nos. 23 and 24.
  4. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.

No. of Questions — 24   |   No. of Printed Pages — 7

प्रश्न पत्र कोड : Sss—13-1—Hist. I

Note : This is the first page of the question paper. The remaining pages contain the actual questions.

परीक्षा निर्देश (Exam Instructions)

5. जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत्‌ लिखें।

For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.

6. प्रश्न क्रमांक 2 से 6 तक अति लघूत्तरात्मक प्रश्न।

Question Nos. 2 to 6 are very short answer type.

7. प्रश्न क्रमांक 7 से 15 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग पाँच पंक्तियों में दीजिए।

Question Nos. 7 to 15 are to be answered in about five lines each.

8. प्रश्न क्रमांक 16 का उत्तर भारत के रेखा मानचित्र में अंकित कीजिए।

Mark the places on the map of India for answer to Question No. 16.

9. प्रश्न क्रमांक 17 से 21 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग आठ पंक्तियों में दीजिए।

Question Nos. 17 to 21 are to be answered in about eight lines each.

10. प्रश्न क्रमांक 22 से 24 तक का प्रत्येक उत्तर लगभग 5 पृष्ठों में दीजिए।

The Question Nos. 22 to 24 are to be answered in about 5 pages each.

11. प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii एवं iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (आ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:

There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 1. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below:

प्रश्न क्रमांक
Question No.
सही उत्तर का क्रमाक्षर
Correct letter of the Answer
(i)
(ii)
(iii)
(iv)

55–73–7–म्रांछई[. I SS-520

प्रश्न (i)

मुगल काल में जनता के भिन्न-भिन्न आवेदनों की जाँच कर सम्राट तक पहुँचाने वाला अधिकारी था

  • (अ) दारोगा-ए-डाक चौकी
  • (ब) मीर-ए-बहर
  • (स) मीर-ए-आरिज़
  • (द) मीर-ए-बार

The officer to check various applications submitted by the people and forward them to the emperor was

  • (A) Daroga-i-Dak Chowki
  • (B) Mir-i-Bahar
  • (C) Mir-i-Arj
  • (D) Mir-i-Bar

उत्तर: (स) मीर-ए-आरिज़ (Mir-i-Arj)

मीर-ए-आरिज़ मुगल प्रशासन में वह अधिकारी था जो जनता के आवेदनों की जाँच करता था और उन्हें सम्राट तक पहुँचाता था। यह पद मुख्यतः शिकायतों और याचिकाओं के निवारण के लिए था।

प्रश्न (ii)

मुगल काल में पहले भूमि को नाप कर और फिर प्रत्येक फसल की प्रति इकाई उत्पाद का अनुमान लगाकर भूराजस्व निर्धारित की जाने वाली प्रणाली थी

  • (अ) हस्तओबद
  • (ब) कनकूत
  • (स) नस्क व्यवस्था
  • (द) इनमें से सभी

The land revenue system prevalent in Mughal period to first measure the land and then per unit of the produce for each crop was calculated, was called

  • (A) Hastobad
  • (B) Kankut
  • (C) Nask system
  • (D) all of these

उत्तर: (ब) कनकूत (Kankut)

कनकूत प्रणाली में भूमि को नापा जाता था और प्रति इकाई क्षेत्रफल पर फसल की उपज का अनुमान लगाकर राजस्व निर्धारित किया जाता था। यह मुगल काल की एक प्रमुख भू-राजस्व प्रणाली थी।

प्रश्न (iii)

राजा राममोहन राय द्वारा फारसी भाषा में प्रकाशित पत्रिका थी

  • (अ) संवाद कौमुदी
  • (ब) ब्राह्मणीकल
  • (स) मिरातुल अखबार
  • (द) सरस्वती

The magazine published by Raja Rammohan Roy in Persian language was called

  • (A) Sambad Kaumudi
  • (B) Brahmanical
  • (C) Miratul Akhbar
  • (D) Saraswati

उत्तर: (स) मिरातुल अखबार (Miratul Akhbar)

राजा राममोहन राय ने 1822 में फारसी भाषा में 'मिरातुल अखबार' (समाचार का दर्पण) नामक पत्रिका प्रकाशित की थी, जो सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित थी।

प्रश्न (iv)

स्वामी विवेकानन्द को ईश्वरीय अनुभूति करवाने वाले संत थे

  • (अ) स्वामी दयानन्द सरस्वती
  • (ब) राजा राममोहन राय
  • (स) आत्माराम पांडुरंग
  • (द) रामकृष्ण परमहंस

The saint who blessed Swami Vivekananda with divine perception was

  • (A) Swami Dayanand Saraswati
  • (B) Raja Rammohan Roy
  • (C) Atmaram Pandurang
  • (D) Ramakrishna Paramahamsa

उत्तर: (द) रामकृष्ण परमहंस (Ramakrishna Paramahamsa)

रामकृष्ण परमहंस स्वामी विवेकानन्द के गुरु थे, जिन्होंने उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शन दिया और ईश्वरीय अनुभूति करवाई। विवेकानन्द ने उन्हें अपना आध्यात्मिक गुरु माना।

प्रश्न 1

662 ई० में शाहजी की मध्यस्थता से बिजापुर से हुई संधि द्वारा शिवाजी को कौन-से क्षेत्र प्राप्त हुए थे ?

In 662 which area did Shivaji get by mediation of Shahji from treaty concluded with Bijapur ?

उत्तर: इस संधि के तहत शिवाजी को पुणे, सुपा, इंदापुर, चाकण, और बारामती के क्षेत्र प्राप्त हुए थे।

प्रश्न 2

मुगल काल में शासन की सम्पूर्ण शक्तियाँ किसके हाथ में होती थीं ?

During the Mughal period with whom all the powers of the state were vested ?

उत्तर: मुगल काल में शासन की सम्पूर्ण शक्तियाँ सम्राट (बादशाह) के हाथ में होती थीं। वह सर्वोच्च शासक, सेनापति, और न्यायाधीश होता था।

प्रश्न 3

857 ई० की क्रान्ति के परिणाम स्वरूप भारतीय शासन में कौन-सा प्रमुख परिवर्तन आया ?

Which main change was brought about in the Indian administration as a result of revolution of 857 A.D. ?

उत्तर: 1857 ई० की क्रान्ति के परिणामस्वरूप भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से हटाकर ब्रिटिश ताज (क्राउन) के अधीन कर दिया गया। भारत सचिव और वायसराय की नियुक्ति की गई।

प्रश्न 4

4 जुलाई, 942 ई० को भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में कौन-सा आन्दोलन शुरू किया गया था?

Which movement was started on 4th July, 942 during the Indian freedom movement ?

उत्तर: 4 जुलाई, 1942 ई० को भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में 'भारत छोड़ो आन्दोलन' (Quit India Movement) शुरू किया गया था।

प्रश्न 5

लार्ड कार्नवालिस ने भारत में भूमि सुधार हेतु कौन-सी पद्धति प्रारम्भ की थी ?

Which system was introduced by Lord Cornwallis for land reform in India ?

उत्तर: लार्ड कार्नवालिस ने भारत में भूमि सुधार हेतु 'स्थायी बन्दोबस्त' (Permanent Settlement) पद्धति प्रारम्भ की थी।

प्रश्न 6

इब्राहीम लोदी के पराजय के कारण लिखिए।

Write down the causes of the defeat of Ibrahim Lodi.

उत्तर: इब्राहीम लोदी की पराजय के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:

  • इब्राहीम लोदी का कठोर और अलोकप्रिय शासन, जिससे कुलीन वर्ग और सेना में असंतोष था।
  • दौलत खाँ लोदी और आलम खाँ जैसे सरदारों ने बाबर को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण दिया।
  • बाबर के पास आधुनिक तोपखाना और बेहतर युद्धनीति (तुगलमा और अरबा पद्धति) थी।
  • इब्राहीम लोदी की सेना में एकता और अनुशासन का अभाव था।
  • पानीपत के युद्ध (1526) में बाबर ने रणनीतिक कुशलता से लोदी को पराजित किया।

प्रश्न 7

अकबर के स्थान पर आप होते तो असीरगढ़ दुर्ग पर किस प्रकार विजय प्राप्त करते ?

Had you been Akbar, how you would have conquered Asirgarh fort ?

उत्तर: यदि मैं अकबर के स्थान पर होता, तो असीरगढ़ दुर्ग पर विजय प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित रणनीति अपनाता:

  • दुर्ग की घेराबंदी करके आपूर्ति मार्गों को अवरुद्ध करता, जिससे दुर्ग के भीतर भोजन और पानी की कमी हो जाती।
  • दुर्ग के कमजोर बिंदुओं की पहचान कर वहाँ तोपखाने से हमला करता।
  • दुर्ग के रक्षकों में मतभेद पैदा करने के लिए कूटनीति का प्रयोग करता, जैसे कि कुछ सरदारों को रिश्वत या वादों से अपने पक्ष में करना।
  • सुरंग खोदकर या दीवारों को तोड़कर अंदर प्रवेश करने का प्रयास करता।
  • अंत में, यदि आवश्यक होता, तो लंबी घेराबंदी जारी रखता जब तक कि दुर्ग आत्मसमर्पण न कर दे।

प्रश्न 8

खानवा के युद्ध से पूर्व बाबर ने राणा सांगा पर विश्वासघात का आरोप लगाया था। तथ्यों के आधार पर अपने विचार प्रकट कीजिए।

Before the battle of Khanwa, Babar had charged Rana Sanga of treachery. Express your opinion in the light of facts.

उत्तर: खानवा के युद्ध (1527) से पूर्व बाबर ने राणा सांगा पर विश्वासघात का आरोप लगाया था। तथ्यों के आधार पर मेरे विचार निम्नलिखित हैं:

  • बाबर ने पानीपत के युद्ध में इब्राहीम लोदी को हराने के बाद राणा सांगा से मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखने का प्रयास किया था।
  • राणा सांगा ने पहले बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए प्रोत्साहित किया था, लेकिन बाद में वह बाबर के बढ़ते प्रभाव से चिंतित हो गया।
  • बाबर का आरोप था कि राणा सांगा ने उसके साथ किए गए वादों को तोड़ा और एक बड़ी सेना इकट्ठा करके उस पर हमला करने की योजना बनाई।
  • हालांकि, राणा सांगा ने इसे अपनी स्वतंत्रता और राजपूत गौरव की रक्षा के रूप में देखा, न कि विश्वासघात के रूप में।
  • मेरी राय में, यह एक राजनीतिक चाल थी; बाबर ने अपनी सेना को प्रेरित करने और युद्ध को उचित ठहराने के लिए राणा सांगा पर विश्वासघात का आरोप लगाया। वास्तव में, दोनों शासक अपने-अपने हितों के लिए लड़ रहे थे।

प्रश्न 9

गुरु तेगबहादुर की औरंगजेब द्वारा हत्या के बाद आप सिखों के लिए गुरु गोविन्द सिंह की भाँति किस प्रकार की नीति का अनुसरण करते ?

After the execution of Guru Tegh Bahadur by Aurangzeb, what policy would you have adopted for the Sikhs as Guru Govind Singh ?

उत्तर: गुरु तेगबहादुर की हत्या के बाद, यदि मैं गुरु गोविन्द सिंह की भाँति सिखों का नेतृत्व करता, तो निम्नलिखित नीति का अनुसरण करता:

  • सिख समुदाय को संगठित करता और उनमें आत्मरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण की भावना जागृत करता।
  • खालसा पंथ की स्थापना करता, जो सिखों को एकजुट करने और उन्हें आध्यात्मिक और सैन्य दोनों रूप से सशक्त बनाने का माध्यम होता।
  • अत्याचार और धार्मिक उत्पीड़न के खिलाफ खड़ा होता, लेकिन केवल आत्मरक्षा के लिए हथियार उठाता।
  • सिखों में समानता, न्याय और साहस के मूल्यों को बढ़ावा देता, और उन्हें किसी भी प्रकार के अन्याय का सामना करने के लिए तैयार करता।
  • मुगल शासन के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाता, जिससे छोटी सेना भी बड़ी ताकतों को चुनौती दे सके।

प्रश्न 11

मुगल काल में 'खान-ए-सामा' नामक अधिकारी के कर्तव्यों का वर्णन कीजिए।

Write down the duties of the official named 'Khan-i-Saman' during the Mughal period.

उत्तर: खान-ए-सामा मुगल काल में एक महत्वपूर्ण अधिकारी था जो शाही घराने और दरबार की आपूर्ति एवं प्रबंधन का कार्य देखता था। इसके प्रमुख कर्तव्य निम्नलिखित थे:

  • शाही रसोई (खानसामा) का प्रबंधन और भोजन सामग्री की व्यवस्था करना।
  • शाही खजाने से संबंधित वस्तुओं और उपहारों का रखरखाव।
  • दरबार में आने वाले मेहमानों और राजदूतों के स्वागत एवं आतिथ्य की व्यवस्था।
  • शाही अस्तबल, हाथी-घोड़ों और वाहनों की देखरेख।
  • शाही भवनों और बगीचों के रखरखाव का पर्यवेक्षण।

प्रश्न 12

“निश्चित लक्ष्य एवं आदर्श का अभाव भी 1857 ई. की क्रान्ति की असफलता का एक कारण था।” कथन की सत्यता सिद्ध कीजिए।

“Lack of goal and ideal was also one of the reasons of the failure of the revolution of 1857 A.D.” Justify the statement.

उत्तर: यह कथन सत्य है कि 1857 के विद्रोह की असफलता का एक प्रमुख कारण निश्चित लक्ष्य एवं आदर्श का अभाव था। निम्नलिखित तथ्य इसकी पुष्टि करते हैं:

  • स्पष्ट राजनीतिक उद्देश्य का अभाव: विद्रोहियों के पास कोई एकीकृत राजनीतिक कार्यक्रम या भविष्य की योजना नहीं थी। वे केवल अंग्रेजों के शासन को समाप्त करना चाहते थे, लेकिन उसके बाद क्या होगा, इसका कोई स्पष्ट दृष्टिकोण नहीं था।
  • विभिन्न उद्देश्य: विद्रोह में शामिल विभिन्न समूहों (सिपाही, जमींदार, किसान, धार्मिक नेता) के अपने-अपने उद्देश्य थे। सिपाही वेतन और धर्म की रक्षा चाहते थे, जमींदार अपनी जागीरें वापस चाहते थे, जबकि किसान करों से मुक्ति चाहते थे। इन विविध उद्देश्यों के कारण एक सामान्य मंच तैयार नहीं हो सका।
  • राष्ट्रीय भावना का अभाव: यह विद्रोह क्षेत्रीय और स्थानीय हितों तक सीमित रहा। इसमें पूरे भारत का प्रतिनिधित्व नहीं था और राष्ट्रीयता की भावना का अभाव था।
  • कोई वैकल्पिक शासन प्रणाली नहीं: विद्रोहियों के पास अंग्रेजों के स्थान पर कोई वैकल्पिक शासन प्रणाली का प्रस्ताव नहीं था। बहादुर शाह जफर को नाममात्र का नेता बनाया गया, लेकिन उनके पास वास्तविक शक्ति या प्रशासनिक योजना नहीं थी।

इस प्रकार, स्पष्ट लक्ष्य और आदर्श के अभाव ने विद्रोह को एक संगठित और सफल क्रांति बनने से रोका।

प्रश्न 13

वायसराय लिनलिथगो द्वारा बिना भारतीयों से पूछे भारत को द्वितीय विश्व युद्ध में सम्मिलित किया गया था। इसके विरोध में आप एक कांग्रेसी के नाते किस प्रकार की नीति का अनुसरण करते?

Without consulting the Indians the Viceroy Linlithgow dragged them into the Second World War as party. In protest 'as a Congressman' what policy would you have followed?

उत्तर: एक कांग्रेसी के नाते, मैं वायसराय लिनलिथगो के इस एकतरफा फैसले के विरोध में निम्नलिखित नीति का अनुसरण करता:

  • असहयोग आंदोलन: मैं युद्ध प्रयासों में किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं करता। इसमें सरकारी नौकरियों से इस्तीफा देना, करों का भुगतान न करना और सरकारी संस्थानों का बहिष्कार करना शामिल होगा।
  • व्यक्तिगत सत्याग्रह: मैं अहिंसक तरीके से युद्ध के विरोध में व्यक्तिगत सत्याग्रह करता, जैसा कि गांधीजी ने 1940 में शुरू किया था। इसमें युद्ध विरोधी भाषण देना और लोगों को जागरूक करना शामिल होगा।
  • भारत छोड़ो आंदोलन की तैयारी: मैं अंग्रेजों के खिलाफ जन आंदोलन की तैयारी करता, जिसमें जनसभाएं, प्रदर्शन और भूमिगत गतिविधियां शामिल होंगी।
  • जन जागरण: मैं लोगों को यह समझाने का प्रयास करता कि यह युद्ध भारत का नहीं है और अंग्रेजों द्वारा बिना सहमति के भारत को इसमें शामिल करना अन्यायपूर्ण है।

प्रश्न 14

क्रान्तिकारियों का सहयोग करने के लिए राम प्रसाद बिस्मिल की भाँति आप कौन-से कार्य करते?

What would you have done like Ram Prasad Bismil to cooperate with the revolutionaries?

उत्तर: राम प्रसाद बिस्मिल की भाँति मैं क्रान्तिकारियों का सहयोग करने के लिए निम्नलिखित कार्य करता:

  • गुप्त संगठन बनाना: मैं युवाओं को संगठित करके एक गुप्त क्रांतिकारी दल बनाता, जैसे बिस्मिल ने 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' बनाया था।
  • धन संग्रह: मैं क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाने हेतु बैंकों और सरकारी खजानों पर डकैती डालता, जैसे काकोरी कांड में किया गया था।
  • अस्त्र-शस्त्र संग्रह: मैं अंग्रेजों से लड़ने के लिए हथियार और गोला-बारूद इकट्ठा करता।
  • प्रचार-प्रसार: मैं क्रांतिकारी विचारों को फैलाने के लिए पर्चे, पत्रिकाएं और पुस्तकें प्रकाशित करता। बिस्मिल ने 'स्वदेशी' और 'बलिदानी' जैसी रचनाएं लिखीं।
  • युवाओं को प्रशिक्षण: मैं युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित करता, जहां उन्हें हथियार चलाना और गुप्त गतिविधियां सिखाई जातीं।

प्रश्न 15

कैबिनेट मिशन की मुख्य विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

Describe the main features of the Cabinet Mission.

उत्तर: कैबिनेट मिशन (1946) की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित थीं:

  • प्रांतीय विधानसभाओं का गठन: प्रांतों में निर्वाचित विधानसभाएं बनाई जाएंगी, जो केंद्र सरकार के चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल का काम करेंगी।
  • प्रांतीय स्वायत्तता: प्रांतों को व्यापक स्वायत्तता दी जाएगी और वे अपने मामलों में स्वतंत्र होंगे।
  • प्रांतों का समूहीकरण: प्रांतों को तीन समूहों (ग्रुप ए, बी, सी) में बांटा जाएगा। ग्रुप ए में हिंदू बहुल प्रांत, ग्रुप बी में मुस्लिम बहुल प्रांत (पंजाब, सिंध, NWFP) और ग्रुप सी में बंगाल और असम शामिल होंगे।
  • केंद्र सरकार: केंद्र सरकार केवल तीन विषयों (रक्षा, विदेश मामले और संचार) के लिए जिम्मेदार होगी। शेष सभी विषय प्रांतों के अधीन होंगे।
  • अंतरिम सरकार का गठन: एक अंतरिम सरकार बनाई जाएगी जिसमें प्रमुख दलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
  • संविधान सभा का गठन: एक संविधान सभा बनाई जाएगी जो भारत का संविधान तैयार करेगी।
  • पाकिस्तान का विरोध: मिशन ने पाकिस्तान के निर्माण के विचार को खारिज कर दिया, लेकिन मुस्लिम लीग की मांगों को ध्यान में रखते हुए प्रांतों के समूहीकरण का प्रस्ताव रखा।

प्रश्न 16

दिए गए भारत के रेखा मानचित्र में निम्नलिखित स्थानों को अंकित कीजिए:

(अ) आगरा (ब) पटना (स) कलकत्ता (कोलकाता) (द) लखनऊ।

Mark the following places on the given outline map of India: (a) Agra (b) Patna (c) Calcutta (Kolkata) (d) Lucknow.

उत्तर: यह एक मानचित्र-आधारित प्रश्न है। छात्रों को भारत के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित स्थानों को सही ढंग से अंकित करना चाहिए:

  • आगरा: उत्तर प्रदेश में, यमुना नदी के तट पर, दिल्ली के दक्षिण-पूर्व में।
  • पटना: बिहार में, गंगा नदी के दक्षिणी तट पर।
  • कलकत्ता (कोलकाता): पश्चिम बंगाल में, हुगली नदी के पूर्वी तट पर।
  • लखनऊ: उत्तर प्रदेश में, गोमती नदी के तट पर, आगरा के उत्तर-पूर्व में।

नोट: मानचित्र पर इन स्थानों को स्पष्ट रूप से चिह्नित करें और नाम लिखें।

प्रश्न 20

कंधार मुगलों के हाथों से हमेशा के लिए निकल जाने के लिए शाहजादा खुर्रम कहाँ तक उत्तरदायी थे ? तथ्यों सहित उत्तर लिखिए ।

How far was prince Khurram responsible for loss of Kandhar forever to the Mughals ? Write down the answer giving facts.

शाहजादा खुर्रम (बाद में शाहजहाँ) कंधार के स्थायी नुकसान के लिए काफी हद तक उत्तरदायी थे, लेकिन यह पूरी तरह से उनकी एकमात्र गलती नहीं थी। तथ्य इस प्रकार हैं:

  • सैन्य अभियानों में विफलता: 1622 ई. में शाहजादा खुर्रम को कंधार को फारसियों से पुनः प्राप्त करने का आदेश दिया गया, लेकिन उन्होंने अभियान में देरी की और अंततः बिना युद्ध किए वापस लौट गए। इससे फारसियों को कंधार पर मजबूती से कब्जा करने का मौका मिला।
  • विद्रोह और अवज्ञा: खुर्रम ने सम्राट जहाँगीर के खिलाफ विद्रोह कर दिया, जिससे मुगल सेना विभाजित हो गई और कंधार की रक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचे।
  • राजनीतिक अस्थिरता: खुर्रम के विद्रोह ने मुगल दरबार में अराजकता पैदा की, जिससे फारस के शाह अब्बास प्रथम को कंधार पर आक्रमण करने का अवसर मिला।
  • अन्य कारक: हालांकि, कंधार का नुकसान केवल खुर्रम की जिम्मेदारी नहीं थी। मुगल साम्राज्य की कमजोर कूटनीति, फारस की बढ़ती सैन्य शक्ति, और कंधार की दूरस्थ स्थिति भी प्रमुख कारण थे।

निष्कर्षतः, शाहजादा खुर्रम अपने विद्रोह और सैन्य अभियानों में विफलता के कारण कंधार के नुकसान के लिए बड़े पैमाने पर उत्तरदायी थे, लेकिन यह एकमात्र कारण नहीं था।

प्रश्न 21

1857 ई० की क्रान्ति के सामाजिक कारणों का उल्लेख कीजिए ।

Write down the social causes of the revolution of 1857 A.D.

1857 ई. की क्रांति के प्रमुख सामाजिक कारण निम्नलिखित थे:

  • सामाजिक सुधारों का विरोध: अंग्रेजों द्वारा सती प्रथा का उन्मूलन (1829), विधवा पुनर्विवाह कानून (1856), और महिला शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे सुधारों को भारतीय समाज में धर्म में हस्तक्षेप के रूप में देखा गया।
  • जाति व्यवस्था में हस्तक्षेप: अंग्रेजों ने सेना और नौकरशाही में सभी जातियों को समान अवसर दिए, जिससे उच्च जातियों में असंतोष फैल गया।
  • धार्मिक भावनाओं को ठेस: नई एनफील्ड राइफल में गाय और सूअर की चर्बी वाले कारतूसों के उपयोग ने हिंदू और मुस्लिम दोनों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
  • ईसाई मिशनरियों की गतिविधियाँ: अंग्रेजों द्वारा ईसाई धर्म के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने से भारतीयों में भय व्याप्त हो गया कि उन्हें जबरन धर्मांतरित किया जाएगा।
  • सामाजिक असमानता: अंग्रेजों ने भारतीयों के साथ नस्लीय भेदभाव किया, उन्हें निम्न दर्जा दिया और सार्वजनिक स्थानों पर अपमानित किया।

प्रश्न 22

सामाजिक क्षेत्र में प्रचलित वे कुरीतियाँ जिनको स्वामी दयानंद सरस्वती ने सुधारने का प्रयास किया आज भी भारतीय समाज में काफी मात्रा में व्याप्त हैं । उनको सुधारने के उपाय बताइए ।

The social evils which Swami Dayanand Saraswati tried to reform are still prevalent in Indian society. Suggest ways to reform them.

स्वामी दयानंद सरस्वती ने जिन कुरीतियों का विरोध किया, वे आज भी व्याप्त हैं। उनके सुधार के उपाय इस प्रकार हैं:

  • जातिवाद और छुआछूत: शिक्षा और जागरूकता अभियानों के माध्यम से जातिगत भेदभाव को समाप्त किया जा सकता है। सरकारी नीतियों को सख्ती से लागू करना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना आवश्यक है।
  • बाल विवाह: कानूनी प्रावधानों को मजबूत करना, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता शिविर लगाना, और लड़कियों की शिक्षा को अनिवार्य बनाना।
  • दहेज प्रथा: दहेज विरोधी कानूनों को सख्ती से लागू करना, सामाजिक दबाव बनाना, और सादगीपूर्ण विवाह को प्रोत्साहित करना।
  • मूर्तिपूजा और अंधविश्वास: वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना, तर्कसंगत शिक्षा प्रदान करना, और धार्मिक कट्टरता के खिलाफ जागरूकता फैलाना।
  • महिलाओं की दयनीय स्थिति: महिला शिक्षा को बढ़ावा देना, आर्थिक स्वतंत्रता के लिए रोजगार के अवसर प्रदान करना, और घरेलू हिंसा के खिलाफ कड़े कानून बनाना।

प्रश्न 23

एक उद्योगपति के नाते ब्रिटिश काल में भारत में सूती वस्त्र उद्योग के विकास में आपके सामने कौन-कौन सी बाधाएँ आतीं ?

As an industrialist during the British period which hurdles would you have faced in the field of cotton industry ?

ब्रिटिश काल में सूती वस्त्र उद्योग के विकास में निम्नलिखित बाधाएँ आतीं:

  • ब्रिटिश नीतियाँ: अंग्रेजों ने भारतीय वस्त्र उद्योग को कमजोर करने के लिए कच्चे माल (कपास) का निर्यात ब्रिटेन को किया और तैयार माल (ब्रिटिश वस्त्र) को भारत में शुल्क मुक्त आयात करने की अनुमति दी।
  • प्रतिस्पर्धा: ब्रिटेन के मशीन निर्मित सस्ते वस्त्रों से प्रतिस्पर्धा करना कठिन था, क्योंकि भारतीय हथकरघा उद्योग तकनीकी रूप से पिछड़ा हुआ था।
  • पूंजी की कमी: भारतीय उद्योगपतियों के पास बड़े पैमाने पर कारखाने स्थापित करने के लिए पर्याप्त पूंजी नहीं थी, और ब्रिटिश बैंक भारतीयों को ऋण देने में अनिच्छुक थे।
  • तकनीकी पिछड़ापन: आधुनिक मशीनरी और तकनीक तक पहुंच सीमित थी, और ब्रिटिश सरकार भारतीय उद्योगों को तकनीकी सहायता प्रदान नहीं करती थी।
  • बाजार तक पहुंच: ब्रिटिश सरकार ने भारतीय वस्त्रों के निर्यात पर भारी शुल्क लगाया, जबकि ब्रिटिश वस्त्रों को भारत में प्रवेश की सुविधा दी गई।
  • कच्चे माल की कमी: अच्छी गुणवत्ता वाली कपास का अधिकांश भाग ब्रिटेन निर्यात कर दिया जाता था, जिससे भारतीय उद्योगों को निम्न गुणवत्ता वाली कपास से काम चलाना पड़ता था।

प्रश्न 24

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इंग्लैण्ड की दुर्बल स्थिति हो जाना भी भारत की स्वतन्त्रता प्राप्ति का एक कारण था । इसके समर्थन में तथ्य लिखिए ।

The weak position of England after the Second World War was also responsible for Indian independence. Write facts in its support.

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद इंग्लैंड की दुर्बल स्थिति भारत की स्वतंत्रता का एक प्रमुख कारण थी। इसके समर्थन में निम्नलिखित तथ्य हैं:

  • आर्थिक कमजोरी: युद्ध में इंग्लैंड को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। उसका राष्ट्रीय कर्ज बढ़ गया और वह भारत जैसे उपनिवेश को बनाए रखने का खर्च वहन करने में असमर्थ था।
  • सैन्य कमजोरी: युद्ध के बाद ब्रिटिश सेना कमजोर हो गई थी और वह भारत में बढ़ते राष्ट्रवादी आंदोलन को दबाने में सक्षम नहीं थी।
  • अंतर्राष्ट्रीय दबाव: अमेरिका और सोवियत संघ जैसी शक्तियों ने उपनिवेशवाद के खिलाफ आवाज उठाई और भारत को स्वतंत्रता देने के लिए ब्रिटेन पर दबाव डाला।
  • राजनीतिक अस्थिरता: युद्ध के बाद ब्रिटेन में लेबर पार्टी सत्ता में आई, जो उपनिवेशों को स्वतंत्रता देने के पक्ष में थी। प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने भारत को स्वतंत्रता देने की प्रक्रिया तेज कर दी।
  • भारतीय राष्ट्रवाद का दबाव: भारत में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और नौसेना विद्रोह (1946) ने ब्रिटिश शासन को हिला दिया था, और कमजोर ब्रिटेन इसे नियंत्रित नहीं कर सका।

प्रश्न 25

बाल गंगाधर तिलक की भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भूमिका पर प्रकाश डालिए ।

Throw light on the role of Bal Gangadhar Til

23. प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (First Anglo-Maratha War)

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध रघुनाथ राव द्वारा की गई सूरत की संधि का परिणाम था। इस संदर्भ में प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध पर प्रकाश डालिए। इसके कारण, घटनाएँ एवं परिणामों पर प्रकाश डालिए।

कारण (Causes):

  • मराठा साम्राज्य में आंतरिक कलह: पेशवा माधवराव की मृत्यु के बाद रघुनाथ राव (रघोबा) ने पेशवा पद का दावा किया, जबकि नारायण राव के पुत्र माधवराव द्वितीय को पेशवा बनाया गया।
  • रघुनाथ राव ने अंग्रेजों से मदद मांगी और 1775 में सूरत की संधि की, जिसमें उन्होंने अंग्रेजों को सालसेट और बस्सीन के द्वीप देने का वादा किया।
  • अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति: ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी मराठा शक्ति को कमजोर करना चाहती थी।

घटनाएँ (Events):

  • 1775: सूरत की संधि के बाद अंग्रेजों ने रघुनाथ राव का समर्थन किया।
  • 1775-1779: युद्ध की प्रमुख घटनाएँ:
    • अरास की लड़ाई (1775): अंग्रेजों की जीत।
    • वडगाँव की लड़ाई (1779): मराठों ने अंग्रेजों को घेर लिया और उन्हें वडगाँव की संधि करने पर मजबूर किया।
    • बाद में अंग्रेजों ने संधि का उल्लंघन किया और युद्ध जारी रखा।
  • 1782: सालबाई की संधि के साथ युद्ध समाप्त हुआ।

परिणाम (Consequences):

  • सालबाई की संधि (1782): अंग्रेजों और मराठों के बीच 20 वर्षों की शांति स्थापित हुई।
  • रघुनाथ राव को पेंशन देकर हटा दिया गया।
  • अंग्रेजों ने सालसेट द्वीप पर नियंत्रण बनाए रखा, लेकिन मराठा क्षेत्रों में हस्तक्षेप न करने का वादा किया।
  • यह युद्ध अंग्रेजों के लिए सीख था कि मराठों को पूरी तरह हराना आसान नहीं है।

अथवा (OR)

"जिन आंग्ल-मैसूर सम्बन्धों की शुरुआत हैदर अली के समय हुई वे टीपू सुल्तान के समय भी जारी रहे थे।" व्याख्या कीजिए।

यह कथन सत्य है कि आंग्ल-मैसूर संबंधों की शुरुआत हैदर अली के समय हुई और वे टीपू सुल्तान के समय भी जारी रहे। दोनों शासकों ने अंग्रेजों के विस्तार का विरोध किया और मैसूर की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया।

  • हैदर अली का काल: हैदर अली ने 1761 में मैसूर पर शासन किया और अंग्रेजों के खिलाफ पहला आंग्ल-मैसूर युद्ध (1767-1769) लड़ा। उन्होंने मद्रास की संधि (1769) की, जिसमें अंग्रेजों ने मैसूर पर हमला न करने का वादा किया, लेकिन बाद में इसका उल्लंघन किया।
  • टीपू सुल्तान का काल: टीपू सुल्तान ने अपने पिता की नीति को जारी रखा और अंग्रेजों के खिलाफ दूसरा (1780-1784), तीसरा (1790-1792) और चौथा (1799) आंग्ल-मैसूर युद्ध लड़ा। उन्होंने फ्रांसीसियों से मदद ली और अंग्रेजों के खिलाफ गठबंधन बनाने का प्रयास किया।
  • समानता: दोनों ने अंग्रेजों की बढ़ती शक्ति को चुनौती दी, लेकिन अंततः टीपू सुल्तान की मृत्यु (1799) के साथ मैसूर अंग्रेजों के नियंत्रण में आ गया।

इस प्रकार, आंग्ल-मैसूर संबंधों की निरंतरता हैदर अली से टीपू सुल्तान तक बनी रही, जो अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक थी।

24. स्वतन्त्रता आन्दोलन में महाराष्ट्र के क्रान्तिकारियों की भूमिका पर प्रकाश डालिए।

महाराष्ट्र ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में क्रांतिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान दिया। इन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष और जनजागरण में अग्रणी भूमिका निभाई।

  • वासुदेव बलवंत फड़के: उन्होंने 1879 में पहली सशस्त्र क्रांति का नेतृत्व किया और अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ा।
  • चापेकर बंधु (दामोदर और बालकृष्ण): 1897 में उन्होंने पूना में अंग्रेज अधिकारी रैंड की हत्या की, जिससे क्रांतिकारी गतिविधियों को बढ़ावा मिला।
  • विनायक दामोदर सावरकर: उन्होंने 'अभिनव भारत' नामक क्रांतिकारी संगठन बनाया और 1909 में अंग्रेज अधिकारी कर्जन वायली की हत्या में भूमिका निभाई।
  • अनंत लक्ष्मण कान्हेरे: उन्होंने 1909 में नासिक में अंग्रेज कलेक्टर जैक्सन की हत्या की।
  • भगत सिंह और चंद्रशेखर आज़ाद: हालांकि पंजाब से थे, महाराष्ट्र के क्रांतिकारियों ने उनके साथ सहयोग किया और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) में योगदान दिया।

इन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ साहसिक कार्य किए और जनता में राष्ट्रीय चेतना जगाई, जिससे स्वतंत्रता आंदोलन को गति मिली।

अथवा (OR)

"पूर्वोत्तर भी क्रान्तिकारी की गतिविधियों से अछूता नहीं था।" तथ्यों के साथ सिद्ध कीजिए।

यह कथन सत्य है कि पूर्वोत्तर भारत भी क्रांतिकारी गतिविधियों से प्रभावित था। यहाँ के लोगों ने अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह और आंदोलनों में भाग लिया।

  • असम में क्रांतिकारी गतिविधियाँ: 1905 में बंगाल विभाजन के बाद असम में स्वदेशी आंदोलन तेज हुआ। कुशल कोंवर और लक्ष्मीराम बरुआ जैसे क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।
  • मणिपुर में विद्रोह: 1891 में मणिपुर में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह हुआ, जिसमें टिकेंद्रजीत सिंह और कुलचंद्र सिंह ने नेतृत्व किया।
  • नागालैंड और मिजोरम: नागा और मिजो जनजातियों ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किए, जैसे 1879-80 का नागा विद्रोह और 1890 का लुशाई विद्रोह।
  • त्रिपुरा: त्रिपुरा के राजा बीरेंद्र किशोर माणिक्य ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया और स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया।
  • बंगाल से प्रभाव: पूर्वोत्तर में क्रांतिकारी गतिविधियाँ बंगाल के क्रांतिकारियों से प्रेरित थीं, जैसे सूर्य सेन और युगांतर दल के सदस्यों ने यहाँ सक्रिय भूमिका निभाई।

इस प्रकार, पूर्वोत्तर भारत क्रांतिकारी गतिविधियों का केंद्र था, जहाँ स्थानीय नेताओं और जनजातियों ने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।