RBSE Class 12th 2010 History-SS-13-2-2010 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2010 |
| Subject | History-SS-13-2-2010 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2010 History-SS-13-2-2010
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Rajasthan Board Class 12th History-SS-13-2-2010 2010 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2010
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2010
वैकल्पिक वर्ग I — कला
OPTIONAL GROUP I — ARTS
इतिहास — द्वितीय पत्र
HISTORY — Second Paper
Time : 3 Hours पूर्णांक : 60
Max. Marks : 60
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें ।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं ।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें ।
For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.
No. of Questions — 24 55-..] 3-2—Hist. II
No. of Printed Pages — 7
परीक्षा निर्देश (Exam Instructions)
6. प्रश्न क्रमांक 23 व 24 में आंतरिक विकल्प हैं।
There are internal choices in Question Nos. 23 and 24.
7. प्रश्न क्रमांक 2 से 5 तक अति लघूत्तरात्मक प्रश्न हैं।
Question Nos. 2 to 5 are very short answer type.
8. प्रश्न क्रमांक 6 से 11 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग पाँच पंक्तियों में दीजिए।
Question Nos. 6 to 11 are to be answered in about five lines each.
9. प्रश्न क्रमांक 12 से 20 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग आठ पंक्तियों में दीजिए।
Question Nos. 12 to 20 are to be answered in about eight lines each.
10. प्रश्न क्रमांक 21 का उत्तर राजस्थान के रेखा मानचित्र में अंकित कीजिए।
Question No. 21 is to be marked in the outline map of Rajasthan.
11. प्रश्न क्रमांक 22 से 24 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 5 पृष्ठों में दीजिए।
Question Nos. 22 to 24 are to be answered in about 5 pages each.
12. प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii तथा iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (A, B, C एवं D) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:
There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 1. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below:
| प्रश्न क्रमांक Question No. |
सही उत्तर का क्रमाक्षर Correct letter of the Answer |
|---|---|
| 1. (i) | |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
855–73–2–ममाजऊा, II SS-522-I
प्रश्न 4
“राणासांगा के दरबार में सात राजा, नौ राव और एक सौ चार सरदार सेवा हेतु उपस्थित रहते थे।” यह कथन है
- (अ) फरिश्ता का
- (ब) गौरीशंकर ओझा का
- (स) बदायूँनी का
- (द) कर्नल टॉड का
“Seven Kings, nine Ravs and 104 feudal Vassals presented themselves for services at the court of Rana Sanga.” This statement is of
- (A) Farishta
- (B) Gourishankar Ojha
- (C) Badayuni
- (D) Colonel Tod
सही उत्तर: (द) कर्नल टॉड का / (D) Colonel Tod
यह कथन कर्नल टॉड का है, जिन्होंने अपनी पुस्तक 'एनल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान' में राणा सांगा के दरबार की भव्यता का वर्णन किया है।
प्रश्न 5
अलाउद्दीन की सेना को अपने राज्य की सीमा में से नहीं गुजरने देने वाला शासक था
- (अ) शीतलदेव
- (ब) हम्मीरदेव
- (स) कान्हड़देव
- (द) वीरमदेव
The ruler, who did not allow the army of Alauddin to pass through his kingdom, was
- (A) Sheetaldev
- (B) Hammirdev
- (C) Kanhaddeva
- (D) Veeramdev
सही उत्तर: (स) कान्हड़देव / (C) Kanhaddeva
गुजरात के शासक कान्हड़देव ने अलाउद्दीन खिलजी की सेना को अपने राज्य से गुजरने की अनुमति नहीं दी थी, जिसके कारण अलाउद्दीन ने उस पर आक्रमण किया।
प्रश्न 6
पृथ्वीराज तृतीय की सबसे बड़ी भूल, जिसके कारण उसे अपने प्राण व साम्राज्य दोनों ही गँवाने पड़े, थी
- (अ) संयोगिता का अपहरण
- (ब) चंदेलों से दुश्मनी
- (स) पड़ोसी राज्यों से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध न बनाना
- (द) तराइन के प्रथम युद्ध में पराजित तुर्क सेना को सुरक्षित निकल जाने देना
The blunder committed by Prithviraj, due to which he lost both his empire and life was
- (A) abduction of Samyogita
- (B) enmity with the Chandelas
- (C) not having friendly relations with the neighbouring states
- (D) allowing safe retreat of Turk army after its defeat in the first battle of Tarain
सही उत्तर: (द) तराइन के प्रथम युद्ध में पराजित तुर्क सेना को सुरक्षित निकल जाने देना / (D) allowing safe retreat of Turk army after its defeat in the first battle of Tarain
पृथ्वीराज चौहान की सबसे बड़ी भूल यह थी कि उन्होंने तराइन के प्रथम युद्ध में पराजित मुहम्मद गोरी की सेना को सुरक्षित वापस जाने दिया, जिससे गोरी पुनः संगठित होकर दूसरे युद्ध में विजयी हुआ और पृथ्वीराज को अपने प्राण व साम्राज्य दोनों गँवाने पड़े।
प्रश्न 1 (1 अंक)
कालीबंगा राजस्थान के जिस जिले में है, वह है
- (अ) हनुमानगढ़
- (ब) गंगानगर
- (स) कोटा
- (द) झालावाड़
English: The district in which Kalibanga is situated, is
- (A) Hanumangarh
- (B) Ganganagar
- (C) Kota
- (D) Jhalawar
उत्तर: (अ) हनुमानगढ़ / (A) Hanumangarh
कालीबंगा हनुमानगढ़ जिले में स्थित एक प्राचीन सभ्यता स्थल है, जो सिंधु घाटी सभ्यता से संबंधित है।
प्रश्न 2 (1 अंक)
विश्नोई समाज द्वारा पर्यावरण की रक्षा के अनुकरणीय प्रयास के पीछे आप किस संत की प्रेरणा मानते हैं?
English: Which saint do you think is the source of inspiration behind the appreciable efforts made by the Vishnois for the protection of environment?
उत्तर: संत जम्भेश्वर (जम्भोजी)
संत जम्भेश्वर ने विश्नोई समाज की स्थापना की और उन्हें 29 नियम दिए, जिनमें पेड़ों की रक्षा और वन्यजीवों की देखभाल शामिल है।
प्रश्न 3 (1 अंक)
933 ई. में अपने राज्य के मन्दिरों के द्वार हरिजनों के लिए खोलने का श्रेय किस शासक को है?
English: Which ruler is credited for opening the doors of temples of his state for Harijans in 933 A.D.?
उत्तर: महाराजा गंगासिंह (बीकानेर)
बीकानेर के महाराजा गंगासिंह ने 933 ई. (संवत्) में हरिजनों के लिए मंदिरों के द्वार खोलने का आदेश दिया था।
प्रश्न 4 (1 अंक)
खानवा युद्ध के दौरान राणा सांगा को घायलावस्था में कहां ले जाया गया था?
English: To which place was the wounded Rana Sanga shifted during the battle of Khanwa?
उत्तर: बसवा (Baswa)
खानवा युद्ध (1527 ई.) में घायल राणा सांगा को उनके सरदार बसवा (दौसा जिले) ले गए थे, जहाँ उनकी मृत्यु हुई।
प्रश्न 5 (1 अंक)
‘भारतीय मूर्तिकला का शब्दकोष’ किसे कहा जाता है?
English: Who is called the ‘Encyclopedia of Indian Sculpture’?
उत्तर: रामकिंकर बैज
रामकिंकर बैज (1910-1980) एक प्रसिद्ध भारतीय मूर्तिकार थे, जिन्हें उनकी विविध और अभिनव मूर्तियों के लिए यह उपाधि दी गई।
प्रश्न 6 (4 अंक)
राजस्थानी चित्रकला की तीन विशेषताएँ लिखिए।
English: Write three salient features of Rajasthani painting.
उत्तर: राजस्थानी चित्रकला की तीन प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- रंगों का प्रयोग: इसमें चमकीले और जीवंत रंगों (जैसे लाल, पीला, नीला) का प्रयोग किया जाता है, जो प्राकृतिक खनिजों से बनाए जाते हैं।
- विषय-वस्तु: इसमें मुख्यतः धार्मिक (कृष्ण-लीला, रामायण), ऐतिहासिक (शासकों के चित्र) और प्रकृति (वन, पशु-पक्षी) के दृश्य चित्रित किए जाते हैं।
- शैली: इसमें सपाट रेखाएँ, सजावटी पैटर्न और चेहरों पर भावनाओं का स्पष्ट चित्रण होता है, जैसे मेवाड़, मारवाड़ और किशनगढ़ शैलियाँ।
प्रश्न 7 (5 अंक)
कत्थक नृत्य की संक्षिप्त जानकारी दीजिए।
English: Give a brief account of the Katthak dance.
उत्तर: कत्थक भारत के आठ शास्त्रीय नृत्यों में से एक है, जिसकी उत्पत्ति उत्तर भारत में हुई। इसकी संक्षिप्त जानकारी निम्नलिखित है:
- उत्पत्ति: यह नृत्य प्राचीन काल में कथाकारों (कहानी सुनाने वालों) द्वारा विकसित किया गया, जो मंदिरों और दरबारों में कहानियाँ सुनाते थे।
- विशेषताएँ: इसमें तेज़ गति के घूमने (चक्कर), पैरों की जटिल ताल (ताली बजाना), और चेहरे के भावों (अभिनय) का प्रयोग होता है।
- शैलियाँ: इसकी दो प्रमुख शैलियाँ हैं – जयपुर घराना (तेज़ ताल और वीरता) और लखनऊ घराना (भावपूर्ण और सुंदर अभिनय)।
- वाद्य: इसमें तबला, पखावज, सारंगी और हारमोनियम का प्रयोग होता है।
- प्रसिद्ध नर्तक: बिरजू महाराज, सितारा देवी, और दमयंती जोशी इस नृत्य के प्रमुख कलाकार हैं।
— पृष्ठ 4 का अंत —
8. एक पर्यटक गाइड के रूप में आप राजस्थान के दुर्ग स्थापत्य की कौन-सी तीन विशेषताओं की ओर पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करेंगे ?
As a tourist guide, towards which three salient features of fort architecture of Rajasthan would you draw the attention of tourists?
उत्तर: राजस्थान के दुर्ग स्थापत्य की तीन प्रमुख विशेषताएँ जिनकी ओर पर्यटकों का ध्यान आकर्षित किया जाएगा:
- भव्य प्रवेश द्वार (Pols): दुर्गों में कई विशाल और सुरक्षित द्वार होते हैं, जैसे मेहरानगढ़ दुर्ग का जयपोल, जो स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना हैं।
- जल संरक्षण प्रणाली: दुर्गों में बावड़ियाँ, तालाब और वर्षा जल संग्रहण की उन्नत व्यवस्था होती थी, जो लंबे समय तक जल आपूर्ति सुनिश्चित करती थी।
- रक्षात्मक संरचना: ऊँची प्राचीरें, बुर्ज, खाइयाँ और गुप्त मार्ग दुर्गों को अभेद्य बनाते थे, जो युद्ध कला और स्थापत्य का अद्भुत संगम हैं।
9. “वीर विनोद” ग्रंथ की रचना किसने की थी ? इसमें किस राज्य का इतिहास है ?
Who wrote the book 'Vir Vinod' ? The book contains the history of which state ?
उत्तर: 'वीर विनोद' ग्रंथ की रचना महाराजा श्याम सिंह (मेवाड़ के महाराणा) ने की थी। इस ग्रंथ में मेवाड़ राज्य का इतिहास वर्णित है। यह ग्रंथ राजस्थान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।
10. हिन्दू व मुसलमानों द्वारा समान रूप से पूजा जाने वाला लोक देवता किसे माना जाता है ? उस लोक देवता की दो शिक्षाओं का उल्लेख कीजिए।
Which folk god (Lok devata) is worshipped by the Hindus as well as the Muslims ? Write two teachings of that folk god.
उत्तर: हिन्दू और मुसलमानों द्वारा समान रूप से पूजा जाने वाला लोक देवता रामदेव जी (रामदेव पीर) को माना जाता है। उनकी दो प्रमुख शिक्षाएँ हैं:
- धार्मिक एकता: रामदेव जी ने सभी धर्मों के प्रति सम्मान और भाईचारे का संदेश दिया। वे हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाले संत थे।
- सेवा और समानता: उन्होंने जाति-पाति के भेदभाव को नकारते हुए सभी मनुष्यों को समान समझने और निस्वार्थ सेवा करने की शिक्षा दी।
11. समाज सुधारक के रूप में आप नारी उत्थान के लिए कौन से तीन सुधार आवश्यक समझते हैं?
As a social reformer, which three reforms you feel necessary for the upliftment of women ?
उत्तर: नारी उत्थान के लिए तीन आवश्यक सुधार:
- शिक्षा का अधिकार: महिलाओं को उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण तक समान पहुँच सुनिश्चित करना, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
- कानूनी अधिकार और सुरक्षा: दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ सख्त कानून बनाना और उनका प्रभावी क्रियान्वयन करना।
- आर्थिक स्वतंत्रता: महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, उन्हें उद्यमिता में प्रोत्साहित करना और संपत्ति में समान अधिकार देना।
12. एकीकृत राजस्थान में सिरोही के विलय की समस्या के बारे में आप क्या जानते हैं ?
What do you know about the problem of the integration of Sirohi in integrated Rajasthan ?
उत्तर: सिरोही के विलय की समस्या राजस्थान के एकीकरण के दौरान एक जटिल मुद्दा थी। सिरोही रियासत के शासक महारावल ने शुरू में राजस्थान में विलय का विरोध किया और वे गुजरात या मध्य प्रदेश में विलय चाहते थे। इसके अलावा, सिरोही के कुछ क्षेत्रों (जैसे अबूरोड) को लेकर राजस्थान और गुजरात के बीच विवाद था। अंततः, जनमत और केंद्र सरकार के दबाव के कारण सिरोही को 1950 में राजस्थान में मिला लिया गया, लेकिन यह विलय कुछ विशेष शर्तों और क्षेत्रीय समायोजन के साथ हुआ।
13. हुरडा-सम्मेलन का संक्षिप्त विवरण दीजिए।
Give a brief account of the Hurda conference.
उत्तर: हुरडा-सम्मेलन (1934) राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी। यह सम्मेलन राजस्थान के विभिन्न रियासतों के शासकों और जनप्रतिनिधियों के बीच हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य राजस्थान के एकीकरण और प्रजामंडल आंदोलनों को मजबूती देना था। सम्मेलन में रियासतों में लोकतांत्रिक सुधारों, प्रजा के अधिकारों और ब्रिटिश शासन के खिलाफ एकजुट होने पर चर्चा हुई। हालाँकि यह सम्मेलन तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों के कारण पूरी तरह सफल नहीं हो सका, लेकिन इसने राजस्थान के एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया।
14. नगर की योजना बनाते समय आप कालीबंगा नगर योजना की कौन-सी तीन विशेषताओं का उपयोग करेंगे ?
While making a city plan which three salient features of Kalibanga city plan would you like to utilize ?
उत्तर: कालीबंगा (हड़प्पा सभ्यता का एक प्रमुख स्थल) की नगर योजना की तीन विशेषताएँ जिनका उपयोग आधुनिक नगर योजना में किया जा सकता है:
- ग्रिड प्रणाली (Grid System): कालीबंगा की सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जिससे नगर व्यवस्थित और सुगम यातायात के लिए आदर्श था। इस प्रणाली को अपनाकर शहरों में ट्रैफिक प्रबंधन बेहतर किया जा सकता है।
- जल निकासी व्यवस्था (Drainage System): यहाँ ढकी हुई नालियाँ और कुशल जल निकासी प्रणाली थी, जो स्वच्छता और बाढ़ नियंत्रण में सहायक थी। आधुनिक शहरों में इसी तरह की भूमिगत जल निकासी योजना बनाई जा सकती है।
- क्षेत्रीय विभाजन (Zoning): कालीबंगा में आवासीय, औद्योगिक और सार्वजनिक क्षेत्रों को अलग-अलग रखा गया था। इससे प्रदूषण और भीड़भाड़ को नियंत्रित किया जा सकता है, जो आधुनिक नगर नियोजन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है।
राजस्थान का इतिहास (History of Rajasthan) – प्रश्नोत्तर
प्रश्न 20: राजस्थान का इतिहास लिखने के लिए एक इतिहासकार प्रासंगिक सूचनाओं का संकलन किन-किन स्रोतों से करता है?
From which sources does a historian collect relevant information for writing history of Rajasthan?
उत्तर: एक इतिहासकार राजस्थान का इतिहास लिखने के लिए निम्नलिखित स्रोतों से सूचनाओं का संकलन करता है:
- प्राथमिक स्रोत: शिलालेख, ताम्रपत्र, अभिलेख, सिक्के, मुद्राएँ, और समकालीन दस्तावेज (जैसे राज्यों के अभिलेखागार)।
- द्वितीयक स्रोत: इतिहासकारों द्वारा लिखित पुस्तकें, शोध पत्र, और यात्रा वृत्तांत (जैसे कर्नल टॉड की 'एनल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान')।
- मौखिक परंपराएँ: लोकगीत, किंवदंतियाँ, और बुजुर्गों के अनुभव।
- पुरातात्विक स्रोत: खुदाई से प्राप्त अवशेष, किले, महल, और मंदिर।
प्रश्न 21: राजस्थान में 1857 के स्वतंत्रता संघर्ष के परिणामों का विवरण दीजिए।
Give description of the results of the freedom struggle of 1857.
उत्तर: राजस्थान में 1857 के स्वतंत्रता संघर्ष के निम्नलिखित परिणाम हुए:
- ब्रिटिश नियंत्रण में वृद्धि: विद्रोह के दमन के बाद अंग्रेजों ने राजस्थान की रियासतों पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर लिया।
- रियासतों की वफादारी: कई रियासतों (जैसे जयपुर, जोधपुर) ने अंग्रेजों का साथ दिया, जिससे उन्हें पुरस्कृत किया गया।
- सैन्य पुनर्गठन: अंग्रेजों ने सेना में भारतीय सैनिकों की संख्या कम कर दी और यूरोपीय सैनिकों की संख्या बढ़ा दी।
- प्रशासनिक सुधार: विद्रोह के बाद भारत सरकार अधिनियम 1858 लागू हुआ, जिससे ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त होकर ब्रिटिश क्राउन का प्रत्यक्ष शासन शुरू हुआ।
- सामाजिक-राजनीतिक जागृति: इस संघर्ष ने राजस्थान में राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता की भावना को जन्म दिया।
प्रश्न 22: आपकी दृष्टि में उन्नीसवीं सदी में राजस्थान में जन-जागृति के कौन-कौन से कारण उत्तरदायी थे?
In your opinion which causes were responsible for the public awakening in Rajasthan in the nineteenth century?
उत्तर: उन्नीसवीं सदी में राजस्थान में जन-जागृति के निम्नलिखित कारण उत्तरदायी थे:
- शिक्षा का प्रसार: अंग्रेजी शिक्षा और मिशनरी स्कूलों की स्थापना से लोगों में जागरूकता बढ़ी।
- समाचार पत्र और पत्रिकाएँ: 'राजस्थान गजट', 'आर्य समाज' आदि के प्रकाशनों ने सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई।
- सामाजिक सुधार आंदोलन: आर्य समाज, ब्रह्म समाज और जैन सुधार आंदोलनों ने जातिवाद, बाल विवाह और सती प्रथा के खिलाफ अभियान चलाया।
- आर्थिक शोषण: ब्रिटिश नीतियों (जैसे भू-राजस्व और व्यापार नियंत्रण) ने किसानों और कारीगरों को बर्बाद कर दिया, जिससे असंतोष बढ़ा।
- राजनीतिक आंदोलन: 1857 के विद्रोह और बाद में कांग्रेस की स्थापना (1885) ने राजनीतिक चेतना को बढ़ावा दिया।
प्रश्न 23: 'लोहागढ़ घेरा' के घटनाक्रम का विवरण दीजिए।
Give description of the events of the ‘Lohagarh siege’.
उत्तर: 'लोहागढ़ घेरा' भरतपुर रियासत के किले लोहागढ़ पर अंग्रेजों द्वारा किया गया एक सैन्य अभियान था। घटनाक्रम इस प्रकार है:
- पृष्ठभूमि: 1805 में भरतपुर के महाराजा रणजीत सिंह ने अंग्रेजों की संधि शर्तों को मानने से इनकार कर दिया।
- घेरा: जनवरी 1805 में लॉर्ड लेक के नेतृत्व में अंग्रेजी सेना ने लोहागढ़ किले को घेर लिया। किले की मजबूत दीवारों और जाट सैनिकों की वीरता के कारण अंग्रेजों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
- असफलता: कई हमलों के बावजूद अंग्रेज किले पर कब्जा नहीं कर सके। अप्रैल 1805 में अंग्रेजों को घेरा हटाना पड़ा और संधि वार्ता करनी पड़ी।
- परिणाम: यह घटना अंग्रेजों की सैन्य शक्ति के लिए एक बड़ी चुनौती थी और इसने राजस्थान में जाट शक्ति का गौरव बढ़ाया।
प्रश्न 24: राजस्थान में राजनैतिक चेतना हेतु मोतीलाल तेजावत के प्रयासों का मूल्यांकन कीजिए।
Evaluate the efforts made by Motilal Tejawat for the political awakening in Rajasthan.
उत्तर: मोतीलाल तेजावत (1889-1963) राजस्थान में राजनीतिक चेतना जगाने वाले एक प्रमुख नेता थे। उनके प्रयासों का मूल्यांकन इस प्रकार है:
- किसान आंदोलन: उन्होंने मेवाड़ और दक्षिणी राजस्थान में किसानों को संगठित करके बेगार प्रथा और अत्यधिक लगान के खिलाफ आंदोलन चलाया।
- बिजौलिया किसान आंदोलन: वे बिजौलिया आंदोलन (1916-1922) से जुड़े और किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
- राजनीतिक जागृति: उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में सभाएँ आयोजित करके लोगों को ब्रिटिश शोषण और रियासती अत्याचारों के खिलाफ जागरूक किया।
- सामाजिक सुधार: उन्होंने छुआछूत, शराबबंदी और महिला शिक्षा पर जोर दिया।
- मूल्यांकन: मोतीलाल तेजावत को 'राजस्थान का गांधी' कहा जाता है। उनके प्रयासों ने राजस्थान में राष्ट्रीय आंदोलन की नींव रखी और जनता में राजनीतिक चेतना का संचार किया।
प्रश्न 25: राजस्थान में 1857 के स्वतंत्रता संघर्ष में ठाकुर खुशाल सिंह की भूमिका का वर्णन कीजिए।
Describe the part played by Thakur Khushal Singh in the freedom struggle of 1857 in Rajasthan.
उत्तर: ठाकुर खुशाल सिंह आउवा (पाली) के एक जागीरदार थे, जिन्होंने 1857 के विद्रोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
- विद्रोह का नेतृत्व: उन्होंने आउवा में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया और स्थानीय लोगों को संगठित किया।
- अंग्रेजों से संघर्ष: उन्होंने अंग्रेजी सेना के खिलाफ कई लड़ाइयाँ लड़ीं, जिसमें उन्होंने बहादुरी दिखाई।
- गुरिल्ला युद्ध: उन्होंने गुरिल्ला रणनीति अपनाकर अंग्रेजों को काफी नुकसान पहुँचाया।
- बलिदान: अंततः अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ लिया और 1858 में फाँसी दे दी। उनका बलिदान राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम का प्रेरणास्रोत बना।
प्रश्न 26: राजस्थान के रेखा मानचित्र में निम्नांकित स्थान अंकित कीजिए:
Mark the following places in the outline map of Rajasthan:
- (i) नसीराबाद (Nasirabad)
- (ii) आऊवा (Auwa)
- (iii) चित्तौड़ (Chittore)
- (iv) झालावाड़ (Jhalawar)
उत्तर: यह एक मानचित्र-आधारित प्रश्न है। छात्रों को राजस्थान के रेखा मानचित्र में निम्नलिखित स्थानों को सही ढंग से अंकित करना चाहिए:
- नसीराबाद: अजमेर जिले में, अजमेर शहर के पश्चिम में स्थित है।
- आऊवा: पाली जिले में, जोधपुर के दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
- चित्तौड़: चित्तौड़गढ़ जिले में, उदयपुर के पूर्व में स्थित है।
- झालावाड़: झालावाड़ जिले में, कोटा के दक्षिण-पूर्व में स्थित है।
नोट: मानचित्र में स्थानों को स्पष्ट रूप से चिह्नित करें और नाम लिखें।
प्रश्न 22
अलाउद्दीन के रणथम्भौर आक्रमण के कारणों का उल्लेख कीजिए। क्या अलाउद्दीन की रणथम्भौर विजय छल-कपट का परिणाम थी? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
Describe the causes of Alauddin's attack on Ranathambhore. Was the conquest of Ranathambhore by Alauddin a result of stratagem? Give answer with arguments.
(6 अंक)
अलाउद्दीन के रणथम्भौर आक्रमण के कारण:
- राजनीतिक महत्वाकांक्षा: अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत का विस्तार करना चाहता था। रणथम्भौर एक सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण दुर्ग था, जो राजपूताना के मध्य में स्थित था। इस पर अधिकार करके वह मालवा और गुजरात के मार्गों को नियंत्रित कर सकता था।
- हमीर देव का विरोध: रणथम्भौर का शासक हमीर देव चौहान अलाउद्दीन के अधिकार को स्वीकार नहीं करता था। उसने मंगोल आक्रमणकारियों को शरण दी थी, जो अलाउद्दीन के लिए एक चुनौती थी।
- धन और संपत्ति की लालसा: रणथम्भौर दुर्ग अपनी अपार संपत्ति और खजाने के लिए प्रसिद्ध था। अलाउद्दीन इस धन को हथियाना चाहता था ताकि वह अपनी सेना को मजबूत कर सके और अन्य अभियानों को वित्तपोषित कर सके।
- साम्राज्यवादी नीति: अलाउद्दीन ने 'दो आग के बीच' की नीति अपनाई थी, जिसके तहत वह पहले मंगोलों से निपटना चाहता था और फिर राजपूत राज्यों को अपने अधीन करना चाहता था। रणथम्भौर इस नीति का पहला लक्ष्य था।
क्या यह विजय छल-कपट का परिणाम थी?
इस प्रश्न पर इतिहासकारों में मतभेद है। कुछ स्रोतों के अनुसार, अलाउद्दीन ने हमीर देव को धोखा देकर दुर्ग पर कब्जा किया था। उसने हमीर देव को शांति वार्ता के लिए बुलाया और फिर उसे बंदी बना लिया। हालांकि, अधिकांश इतिहासकार इस बात से सहमत हैं कि यह विजय मुख्य रूप से सैन्य शक्ति और रणनीति का परिणाम थी। अलाउद्दीन ने दुर्ग को घेर लिया और लंबे समय तक संघर्ष के बाद हमीर देव को आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया। छल-कपट के आरोपों का कोई ठोस प्रमाण नहीं है। इसलिए, यह कहना अधिक उचित होगा कि रणथम्भौर की विजय अलाउद्दीन की सैन्य क्षमता और दृढ़ संकल्प का परिणाम थी, न कि केवल छल-कपट का।
प्रश्न 23
“दुर्गादास राठौड़ ने जीवन भर मातृभूमि तथा अपने स्वामी के हितों की रक्षा की।” विवेचना कीजिए।
“Durgadas Rathore protected the interests of motherland and his master throughout his life.” Discuss.
(6 अंक)
अथवा
“मालदेव ने राणा सांगा के अधूरे कार्य को पूरा करने का प्रयास किया।” विवेचना कीजिए।
“Maldeo tried to complete the unfinished work of Rana Sanga.” Discuss.
(6 अंक)
दुर्गादास राठौड़ के संदर्भ में विवेचना:
दुर्गादास राठौड़ मारवाड़ के एक महान योद्धा और रणनीतिकार थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन मातृभूमि और अपने स्वामी (महाराजा जसवंत सिंह) के हितों की रक्षा में समर्पित कर दिया। जब औरंगजेब ने जसवंत सिंह की मृत्यु के बाद मारवाड़ पर कब्जा करने का प्रयास किया, तो दुर्गादास ने राजपूताना की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। उन्होंने औरंगजेब के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध छेड़ा और मारवाड़ की रक्षा की। उन्होंने जसवंत सिंह के पुत्र अजीत सिंह को दिल्ली से सुरक्षित निकालकर मारवाड़ लाया और उसे सिंहासन पर बिठाया। इस प्रकार, उन्होंने अपने स्वामी के वंश और मातृभूमि दोनों की रक्षा की। उनकी वीरता और निष्ठा राजपूत इतिहास में अमर है।
मालदेव के संदर्भ में विवेचना:
मालदेव मारवाड़ के एक शक्तिशाली शासक थे। राणा सांगा ने मुगलों के खिलाफ एक संयुक्त राजपूत मोर्चा बनाने का प्रयास किया था, लेकिन वह अपने जीवनकाल में इसे पूरा नहीं कर सके। मालदेव ने इस अधूरे कार्य को पूरा करने का प्रयास किया। उन्होंने अपने शासनकाल में मारवाड़ को एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित किया। उन्होंने मुगल सम्राट हुमायूँ और शेरशाह सूरी दोनों का सामना किया। हालांकि, वह राणा सांगा की तरह एक बड़ा संघ बनाने में सफल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने राजपूत स्वतंत्रता की भावना को जीवित रखा। उनका शासन मारवाड़ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें उन्होंने राणा सांगा के सपने को साकार करने का प्रयास किया।
प्रश्न 24
महाराणा कुम्भा की सांस्कृतिक उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए।
Evaluate the cultural contributions of Maharana Kumbha.
(6 अंक)
अथवा
महाराणा सांगा के मालवा के साथ संघर्ष के कारणों का उल्लेख करते हुए, गागरोन युद्ध का विस्तृत विवरण दीजिए।
While describing the causes of Maharana Sanga's struggle with Malwa, give details of the battle of Gagaron.
(6 अंक)
महाराणा कुम्भा की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ:
महाराणा कुम्भा (1433-1468 ई.) मेवाड़ के एक महान शासक थे, जिन्होंने न केवल सैन्य क्षेत्र में बल्कि सांस्कृतिक क्षेत्र में भी अमूल्य योगदान दिया। उनकी प्रमुख सांस्कृतिक उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
- स्थापत्य कला: उन्होंने कई भव्य किलों और मंदिरों का निर्माण करवाया। इनमें कुम्भलगढ़ का किला, चित्तौड़गढ़ का कीर्ति स्तंभ और रणकपुर का जैन मंदिर प्रमुख हैं। कीर्ति स्तंभ भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे राजपूत स्थापत्य कला का उत्कृष्ट उदाहरण माना जाता है।
- साहित्यिक योगदान: महाराणा कुम्भा स्वयं एक विद्वान और लेखक थे। उन्होंने 'संगीतराज', 'रसिकप्रिया' और 'सूड़प्रबंध' जैसे ग्रंथों की रचना की। उन्होंने संगीत और नाट्य कला पर भी गहन अध्ययन किया।
- संगीत और कला का संरक्षण: उन्होंने अपने दरबार में कलाकारों और संगीतकारों को संरक्षण दिया। उनके शासनकाल में मेवाड़ी शैली की चित्रकला और संगीत का विकास हुआ।
- धार्मिक सहिष्णुता: वे स्वयं हिंदू थे, लेकिन उन्होंने जैन धर्म और अन्य धर्मों को भी संरक्षण दिया। रणकपुर का जैन मंदिर इसका प्रमाण है।
महाराणा कुम्भा की सांस्कृतिक उपलब्धियाँ मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का अभिन्न अंग हैं। उन्होंने कला, साहित्य और स्थापत्य के क्षेत्र में जो योगदान दिया, वह आज भी प्रेरणादायक है।
महाराणा सांगा के मालवा के साथ संघर्ष के कारण और गागरोन युद्ध का विवरण:
संघर्ष के कारण:
- क्षेत्रीय विस्तार की महत्वाकांक्षा: महाराणा सांगा मेवाड़ के साम्राज्य का विस्तार करना चाहते थे। मालवा उनके विस्तार के मार्ग में बाधा था।
- मालवा के शासक का कमजोर होना: मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय कमजोर था, जिससे सांगा को हमला करने का अवसर मिला।
- राजपूत एकता का प्रयास: सांगा एक संयुक्त राजपूत मोर्चा बनाना चाहते थे और मालवा पर विजय प्राप्त करके वह इस दिशा में एक कदम बढ़ा सकते थे।
- पुरानी प्रतिद्वंद्विता: मेवाड़ और मालवा के बीच लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद चल रहे थे।
गागरोन युद्ध का विवरण:
गागरोन का युद्ध 1519 ई. में महाराणा सांगा और मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय के बीच लड़ा गया था। यह युद्ध गागरोन के किले के पास हुआ था। महाराणा सांगा ने अपनी सेना का नेतृत्व स्वयं किया। उन्होंने मालवा की सेना को चारों ओर से घेर लिया। युद्ध में मालवा की सेना को भारी हार का सामना करना पड़ा। सुल्तान महमूद खिलजी को बंदी बना लिया गया। महाराणा सांगा ने उसे उदारता से छोड़ दिया, लेकिन उससे क्षतिपूर्ति के रूप में बड़ी राशि और क्षेत्र प्राप्त किए। इस युद्ध ने महाराणा सांगा की सैन्य शक्ति को स्थापित किया और उन्हें उत्तर भारत का सबसे शक्तिशाली शासक बना दिया।