RBSE Class 12th 2010 Physics-SS-40-1-2010 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2010 |
| Subject | Physics-SS-40-1-2010 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2010 Physics-SS-40-1-2010
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Rajasthan Board Class 12th Physics-SS-40-1-2010 2010 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2010
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2010
वैकल्पिक II (OPTIONAL GROUP II – SCIENCES)
भौतिक विज्ञान – प्रथम पत्र
(PHYSICS – First Paper)
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 40
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें ।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी संस्करणों में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi and English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - सभी प्रश्न अनिवार्य हैं । प्रश्न क्रमांक 23 व 24 में आन्तरिक विकल्प हैं ।
All questions are compulsory. Question Nos. 23 and 24 have internal choices. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - प्रश्न क्रमांक 2 से 5 तक अति लघूत्तरात्मक प्रश्न हैं ।
Question Nos. 2 to 5 are Very Short Answer type questions.
SS—40-I—Phy. I [ 55 550 ] [ Turn over ]
प्रश्न 1 (i)
जहाँ भी आवश्यक हो, चित्र में विद्युत धारा एवं विद्युत क्षेत्र की दिशा दिखायें।
Wherever necessary, show the direction of the electric current and electric field in the diagram.
जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ लिखें।
For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.
प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii और iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (अ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:
There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 1. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below:
| भाग | सही विकल्प का उत्तराक्षर |
|---|---|
| 1. (i) | |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
प्रश्न 1 (ii)
एक विलगित गोले के विभव (V) एवं आवेश (Q) में लेखाचित्र दर्शाया गया है। गोले की धारिता होगी:
चित्र: V बनाम Q का ग्राफ, जहाँ V अक्ष पर और Q क्षैतिज अक्ष पर है। ग्राफ एक सीधी रेखा है जो मूल बिंदु से होकर जाती है और क्षैतिज से कोण θ बनाती है।
- (अ) sin θ
- (ब) cos θ
- (स) tan θ
- (द) cot θ
सही उत्तर: (स) tan θ
व्याख्या: धारिता C = Q/V है। ग्राफ में, V बनाम Q के लिए, ढलान = V/Q = cot θ है। अतः धारिता C = Q/V = 1/(cot θ) = tan θ।
Question (Graph-based)
A graph between potential (V) and charge (q) of an isolated sphere is shown in the figure. Capacitance of the sphere will be:
(Graph: straight line through origin, slope = tan θ)
- (A) sin θ
- (B) cos θ
- (C) tan θ
- (D) cot θ
Explanation: Capacitance C = q/V. From graph, slope = V/q = tan θ, so C = 1/tan θ = cot θ. Hence correct answer is (D) cot θ.
Question (Potentiometer wire)
(i) विभवमापी में प्रयुक्त तार के पदार्थ का प्रतिरोध ताप गुणांक होना चाहिए:
- (अ) उच्च
- (ब) न्यून
- (स) शून्य
- (द) अनन्त
English: The resistance temperature coefficient of the material used for potentiometer wire should be:
- (A) high
- (B) low
- (C) zero
- (D) infinite
Explanation: Potentiometer wire must have uniform resistance per unit length, which requires zero temperature coefficient of resistance to avoid changes due to heating.
Question (Earth's magnetic field)
(ii) किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक BH और ऊर्ध्वाधर घटक BV परिमाण में बराबर हैं। उस स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र की सम्पूर्ण तीव्रता का मान है:
- (अ) BH
- (ब) 2BH
- (स) √2 BH
- (द) BH/2
English: Magnitude of the horizontal component BH and vertical component BV of the earth’s magnetic field at a place are equal. Value of the total intensity of earth’s magnetic field at that place is:
- (A) BH
- (B) 2BH
- (C) √2 BH
- (D) BH/2
Explanation: Total intensity B = √(BH² + BV²). Given BH = BV, so B = √(BH² + BH²) = √(2BH²) = BH√2.
प्रश्न 5
प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में विभवान्तर V = 20 sin ωt वोल्ट तथा प्रवाहित धारा I = 5 cos ωt ऐम्पियर है, तो शक्ति क्षय का मान वाट में होगा
- (अ) शून्य
- (ब) 0
- (स) 5
- (द) 00
The current passing through an a.c. circuit is I = 5 cos ωt ampere and potential difference is V = 20 sin ωt volt. The power loss in watt will be
- (A) zero
- (B) 0
- (C) 5
- (D) 00
सही उत्तर: (अ) शून्य / (A) zero
व्याख्या: शक्ति क्षय P = Vrms × Irms × cos φ, जहाँ φ वोल्टता और धारा के बीच कलान्तर है। यहाँ V = 20 sin ωt और I = 5 cos ωt = 5 sin (ωt + 90°), अतः कलान्तर φ = 90°, cos 90° = 0, इसलिए शक्ति क्षय शून्य है।
प्रश्न 6
ऐसे दो पदार्थों के नाम लिखिए, जिनकी प्रतिरोधकता ताप बढ़ाने पर घटती है।
Write the names of two substances, whose resistivity decreases on raising temperature.
उत्तर: अर्धचालक (जैसे सिलिकॉन, जर्मेनियम) और कार्बन (ग्रेफाइट)।
Answer: Semiconductors (e.g., silicon, germanium) and carbon (graphite).
प्रश्न 7
Cu - Fe ताप युग्म के लिए उदासीन ताप (Tn) का मान लिखिए।
Write the value of neutral temperature (Tn) for Cu - Fe thermocouple.
उत्तर: Cu-Fe ताप युग्म के लिए उदासीन ताप लगभग 275°C होता है।
Answer: The neutral temperature for Cu-Fe thermocouple is approximately 275°C.
प्रश्न 8
क्यूरी का नियम लिखिए।
Write down Curie’s law.
उत्तर: क्यूरी का नियम: किसी अनुचुम्बकीय पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति (χ) उस पर लगे परम ताप (T) के व्युत्क्रमानुपाती होती है, अर्थात χ = C/T, जहाँ C क्यूरी स्थिरांक है।
Answer: Curie’s law: The magnetic susceptibility (χ) of a paramagnetic material is inversely proportional to its absolute temperature (T), i.e., χ = C/T, where C is the Curie constant.
प्रश्न 9
स्वप्रेरकत्व L की कुण्डली में संग्रहित चुम्बकीय ऊर्जा का सूत्र लिखिए, जबकि I0 धारा प्रवाहित की जाती है।
Write down the formula of magnetic energy stored in a coil of self inductance L, when I0 current is passing through it.
उत्तर: संग्रहित चुम्बकीय ऊर्जा का सूत्र: U = (1/2) L I02
Answer: Formula for stored magnetic energy: U = (1/2) L I02
प्रश्न 10
(क) आपेक्षिक विद्युतशीलता की परिभाषा दीजिए।
(ख) तांबे के परावैद्युतांक का मान लिखिए।
(a) Define relative permittivity.
(b) Write down the value of dielectric constant of copper.
उत्तर (क): आपेक्षिक विद्युतशीलता (या परावैद्युतांक) किसी माध्यम की विद्युतशीलता (ε) और निर्वात की विद्युतशीलता (ε0) का अनुपात है, अर्थात εr = ε/ε0। यह एक विमाहीन राशि है।
Answer (a): Relative permittivity (or dielectric constant) is the ratio of the permittivity of a medium (ε) to the permittivity of free space (ε0), i.e., εr = ε/ε0. It is a dimensionless quantity.
उत्तर (ख): तांबे का परावैद्युतांक (आपेक्षिक विद्युतशीलता) अनन्त (∞) होता है, क्योंकि तांबा एक चालक है।
Answer (b): The dielectric constant (relative permittivity) of copper is infinite (∞), as copper is a conductor.
7. समविभव पृष्ठ किसे कहते हैं ? बिन्दु धनात्मक आवेश के कारण समविभव पृष्ठ का चित्र बनाइए ।
What is an equipotential surface ? Draw diagram to show equipotential surface due to a positive point charge.
समविभव पृष्ठ (Equipotential Surface): वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर विद्युत विभव का मान समान होता है, समविभव पृष्ठ कहलाता है। किसी बिंदु आवेश के कारण समविभव पृष्ठ संकेंद्रित गोले होते हैं।
चित्र: एक धनात्मक बिंदु आवेश (+q) के चारों ओर संकेंद्रित वृत्ताकार (गोलाकार) पृष्ठ बनाएं, जिन पर विभव V₁, V₂, V₃ आदि समान हों।
(चित्र में: केंद्र में +q आवेश, उसके चारों ओर तीन संकेंद्रित वृत्त, प्रत्येक पर V₁, V₂, V₃ अंकित)
8. सेल की टर्मिनल वोल्टता और विद्युत वाहक बल में एक अन्तर लिखिए ।
Write one difference between the terminal voltage and electromotive force of a cell.
| क्रमांक | विद्युत वाहक बल (EMF) | टर्मिनल वोल्टता (Terminal Voltage) |
|---|---|---|
| 1. | यह सेल द्वारा प्रदान की गई कुल ऊर्जा प्रति इकाई आवेश है, जब सेल से कोई धारा नहीं ली जा रही हो (खुले परिपथ में)। | यह सेल के दो सिरों के बीच का विभवांतर है जब सेल से धारा ली जा रही हो (बंद परिपथ में)। |
9. चित्र में एक मीटर ब्रिज को सन्तुलित अवस्था में दर्शाया गया है । अज्ञात प्रतिरोध (X) का मान ज्ञात कीजिए :
In figure, a meter-bridge is shown in its balance position. Find the value of unknown resistance (X).
हल: मीटर ब्रिज के सन्तुलन की स्थिति में, व्हीटस्टोन सेतु के सिद्धांत के अनुसार:
\(\frac{X}{R} = \frac{l_1}{l_2}\)
जहाँ \(l_1\) = बाएँ तार की लंबाई (AC), \(l_2\) = दाएँ तार की लंबाई (CB), और R = ज्ञात प्रतिरोध।
चित्र में दिए गए मानों के अनुसार (मान लीजिए AC = 40 cm, CB = 60 cm, R = 10 Ω):
\(\frac{X}{10} = \frac{40}{60}\)
\(X = 10 \times \frac{2}{3} = \frac{20}{3} \approx 6.67 \, \Omega\)
अतः अज्ञात प्रतिरोध X का मान लगभग 6.67 Ω है।
प्रश्न 10
जब किसी छड़ चुम्बक को उसकी अक्ष के लम्बवत् दो बराबर भागों में काटा जाता है, तो छड़ चुम्बक के (i) ध्रुव सामर्थ्य तथा (ii) चुम्बकीय आघूर्ण में क्या परिवर्तन होगा?
If a bar magnet is divided in two equal parts along perpendicular to its axis then how does (i) pole strength and (ii) magnetic moment of bar magnet change?
उत्तर:
- (i) ध्रुव सामर्थ्य (Pole strength): जब चुम्बक को अक्ष के लम्बवत् काटा जाता है, तो प्रत्येक भाग का ध्रुव सामर्थ्य अपरिवर्तित रहता है। क्योंकि ध्रुव सामर्थ्य चुम्बक के अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल पर निर्भर करता है, जो काटने पर नहीं बदलता।
- (ii) चुम्बकीय आघूर्ण (Magnetic moment): चुम्बकीय आघूर्ण = ध्रुव सामर्थ्य × लम्बाई। चूँकि लम्बाई आधी हो जाती है, इसलिए चुम्बकीय आघूर्ण आधा हो जाता है।
प्रश्न 11
0 सेमी औसत त्रिज्या के एक टोराइड में 1000 फेरे हैं। 0.1 ऐम्पियर की धारा प्रवाहित करने पर टोराइड की अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्ञात कीजिए।
A toroid of mean radius 0 cm has 1000 turns. When 0.1 ampere current is passing through it, calculate magnetic field on its axis.
हल: टोराइड की अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र शून्य होता है। टोराइड के अंदर चुम्बकीय क्षेत्र होता है, अक्ष पर नहीं। अतः अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान 0 टेस्ला होगा।
नोट: यदि प्रश्न में त्रिज्या 0 सेमी दी गई है, तो यह एक विशेष स्थिति है। सामान्यतः टोराइड की अक्ष पर क्षेत्र शून्य होता है।
प्रश्न 12
(i) स्पर्शज्या नियम लिखिए।
(ii) स्पर्शज्या धारामापी के परिवर्तन गुणांक का मात्रक लिखिए।
(i) Write down tangent law.
(ii) Write down the unit of the reduction factor of tangent galvanometer.
उत्तर:
- (i) स्पर्शज्या नियम (Tangent law): जब किसी चुम्बकीय क्षेत्र में किसी चुम्बकीय सुई को रखा जाता है, तो सुई पर लगने वाला बल आघूर्ण चुम्बकीय क्षेत्र की तीव्रता और सुई के विक्षेपण कोण की स्पर्शज्या के समानुपाती होता है। गणितीय रूप: \( B = B_H \tan \theta \), जहाँ \( B_H \) पृथ्वी के क्षैतिज घटक की तीव्रता है।
- (ii) परिवर्तन गुणांक का मात्रक: स्पर्शज्या धारामापी के परिवर्तन गुणांक (K) का मात्रक एम्पियर (A) होता है।
प्रश्न 13
लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण नियम का ही एक रूप है। समझाइए।
Lenz's law is in accordance with the law of conservation of energy. Explain.
व्याख्या: लेंज का नियम कहता है कि प्रेरित धारा की दिशा इस प्रकार होती है कि वह उस कारण का विरोध करे जिससे वह उत्पन्न हुई है। इसका अर्थ है कि प्रेरित धारा द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र, चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन का विरोध करता है। इस विरोध को दूर करने के लिए बाहरी कारक (जैसे चुम्बक को हिलाना) को कार्य करना पड़ता है। यह कार्य ही विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित होता है। यदि लेंज का नियम न होता, तो प्रेरित धारा फ्लक्स परिवर्तन को बढ़ाती, जिससे ऊर्जा बिना कार्य किए उत्पन्न होती, जो ऊर्जा संरक्षण नियम का उल्लंघन है। इस प्रकार लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण नियम की पुष्टि करता है।
प्रश्न 4
एक इलेक्ट्रॉन एक अनन्त धनात्मक रेखीय आवेश के चारों ओर 0.5 मीटर त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाता है। यदि रेखीय आवेश घनत्व 8.2 × 10-19 कूलाम/मीटर है, तो इलेक्ट्रॉन की चाल (मीटर/सेकण्ड में) ज्ञात कीजिए। (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान me = 9 × 10-31 kg)
An electron is orbiting around an infinite positive line charge in a circular orbit of radius 0.5 metre. If the linear charge density is 8.2 × 10-19 coulomb/metre, then calculate the speed of electron (in m/s). (Mass of electron me = 9 × 10-31 kg)
हल:
अनन्त रेखीय आवेश के कारण विद्युत क्षेत्र: E = λ / (2πε₀ r)
जहाँ λ = 8.2 × 10-19 C/m, r = 0.5 m, ε₀ = 8.85 × 10-12 C²/Nm²
इलेक्ट्रॉन पर बल: F = eE = eλ / (2πε₀ r)
यह बल अभिकेंद्रीय बल प्रदान करता है: mv²/r = eλ / (2πε₀ r)
⇒ v² = eλ / (2πε₀ m)
मान रखने पर: v² = (1.6 × 10-19 × 8.2 × 10-19) / (2 × 3.14 × 8.85 × 10-12 × 9 × 10-31)
v² = (13.12 × 10-38) / (500.4 × 10-43) ≈ 2.62 × 105
v ≈ √(2.62 × 105) ≈ 511.9 m/s
अतः इलेक्ट्रॉन की चाल लगभग 512 m/s है।
प्रश्न 5
चित्र में दर्शाए गये प्रतिरोधों की अनन्त लम्बी श्रेणी के विद्युत परिपथ का बिन्दु A और B के मध्य तुल्य प्रतिरोध ज्ञात कीजिए, जबकि R₁ = 1 Ω और R₂ = 2 Ω हैं।
In the following figure, a circuit of an infinitely long series network of resistors is shown. Find the equivalent resistance of network between the points A and B, when R₁ = 1 Ω and R₂ = 2 Ω.
हल:
माना A और B के बीच तुल्य प्रतिरोध Req है। चूँकि नेटवर्क अनन्त लम्बा है, पहले खंड के बाद शेष नेटवर्क का प्रतिरोध भी Req होगा।
परिपथ को इस प्रकार लिख सकते हैं: A — R₁ — (R₂ || Req) — B
अतः Req = R₁ + (R₂ × Req) / (R₂ + Req)
मान रखने पर: Req = 1 + (2 × Req) / (2 + Req)
⇒ Req - 1 = (2Req) / (2 + Req)
⇒ (Req - 1)(2 + Req) = 2Req
⇒ 2Req + Req² - 2 - Req = 2Req
⇒ Req² + Req - 2 = 2Req
⇒ Req² - Req - 2 = 0
⇒ (Req - 2)(Req + 1) = 0
चूँकि प्रतिरोध धनात्मक होता है, Req = 2 Ω
अतः बिन्दु A और B के बीच तुल्य प्रतिरोध 2 Ω है।
प्रश्न 6
Mance विधि से सेल का आन्तरिक प्रतिरोध ज्ञात करने के सूत्र को स्थापना कीजिए। आवश्यक परिपथ चित्र बनाइए।
Derive the formula to determine the internal resistance of a cell by Mance’s method. Draw the necessary circuit diagram.
हल:
Mance विधि: इस विधि में सेल के आन्तरिक प्रतिरोध को ज्ञात करने के लिए एक व्हीटस्टोन सेतु का उपयोग किया जाता है। सेल को सेतु की एक भुजा में रखा जाता है और एक ज्ञात प्रतिरोध (R) को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है।
परिपथ चित्र:
[चित्र: एक व्हीटस्टोन सेतु जिसमें सेल E, प्रतिरोध R, गैल्वेनोमीटर G, और तार AB दिखाया गया है। सेल E को भुजा AC में रखा गया है।]
सूत्र स्थापना:
- माना सेल का आन्तरिक प्रतिरोध r है।
- जब सेल खुला होता है (कोई धारा नहीं), तो सेतु संतुलित होता है जब P/Q = R/S होता है, जहाँ P और Q सेतु की भुजाएँ हैं।
- जब सेल बंद होता है (धारा प्रवाहित होती है), तो सेतु का संतुलन बदल जाता है।
- नए संतुलन के लिए, P/Q = (R + r)/S होता है।
- दोनों समीकरणों से, r = R (S'/S - 1) प्राप्त होता है, जहाँ S और S' क्रमशः खुले और बंद सेल के लिए सेतु की भुजा के मान हैं।
अतः सूत्र: r = R (S'/S - 1)
प्रश्न 7
ताप-विद्युत से आपका क्या अभिप्राय है? ताप-विद्युत वाहक बल का मान ताप के साथ किस प्रकार परिवर्तित होता है? समझाइए एवं ग्राफ बनाइए।
What do you mean by thermo-current? How does the value of thermo e.m.f. change with the temperature? Explain and draw the graph.
हल:
ताप-विद्युत (Thermo-current): जब दो भिन्न धातुओं के जोड़ों को अलग-अलग तापमान पर रखा जाता है, तो उनके बीच एक विद्युत वाहक बल (e.m.f.) उत्पन्न होता है, जिसके कारण परिपथ में धारा प्रवाहित होती है। इस धारा को ताप-विद्युत कहते हैं।
ताप-विद्युत वाहक बल का ताप के साथ परिवर्तन:
- ताप-विद्युत वाहक बल (E) तापमान अंतर (ΔT) के साथ रैखिक रूप से नहीं बदलता है।
- प्रारंभ में, जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, E बढ़ता है, लेकिन एक निश्चित तापमान (तटस्थ तापमान) के बाद यह घटने लगता है।
- अंततः, एक उच्च तापमान (उत्क्रमण तापमान) पर E शून्य हो जाता है और फिर दिशा बदल देता है।
ग्राफ:
[ग्राफ: x-अक्ष पर तापमान (T) और y-अक्ष पर ताप-विद्युत वाहक बल (E)। ग्राफ एक परवलयाकार वक्र है जो तटस्थ तापमान पर अधिकतम होता है और उत्क्रमण तापमान पर शून्य हो जाता है।]
प्रश्न 8
आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता (μr) तथा चुम्बकीय प्रवृत्ति (χ) में सम्बन्ध स्थापित कीजिए।
Establish the relation between relative magnetic permeability (μr) and magnetic susceptibility (χ).
हल:
चुम्बकीय क्षेत्र में, चुम्बकीय प्रेरण (B) और चुम्बकीय क्षेत्र तीव्रता (H) के बीच संबंध:
B = μH, जहाँ μ पदार्थ की चुम्बकीय पारगम्यता है।
आपेक्षिक चुम्बकीय पारगम्यता: μr = μ/μ0, जहाँ μ0 निर्वात की पारगम्यता है।
चुम्बकीय प्रवृत्ति (χ) को M = χH द्वारा परिभाषित किया जाता है, जहाँ M चुम्बकन है।
चुम्बकीय प्रेरण: B = μ0(H + M) = μ0(H + χH) = μ0H(1 + χ)
लेकिन B = μH = μ0μrH
अतः μ0μrH = μ0H(1 + χ)
अतः संबंध: μr = 1 + χ
प्रश्न 9
एक लम्बी परिनालिका के स्वप्रेरकत्व का व्यंजक ज्ञात कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।
Obtain an expression for the self inductance of a long solenoid. Draw the necessary diagram.
हल:
परिनालिका का चित्र:
[चित्र: एक लम्बी परिनालिका जिसमें N फेरे, लंबाई l, अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल A दिखाया गया है।]
व्यंजक:
- माना एक लम्बी परिनालिका में N फेरे हैं, इसकी लंबाई l है, और अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A है।
- जब इसमें धारा I प्रवाहित होती है, तो उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र B = μ0nI, जहाँ n = N/l प्रति इकाई लंबाई में फेरों की संख्या है।
- परिनालिका से गुजरने वाला चुम्बकीय फ्लक्स Φ = NBA = N(μ0nI)A = μ0nNIA
- चूँकि n = N/l, तो Φ = μ0(N/l)NIA = μ0N²IA/l
- स्वप्रेरकत्व L = Φ/I, अतः L = μ0N²A/l
अतः लम्बी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व: L = μ0n²Al या L = μ0N²A/l
20. एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में किसी समय t पर वोल्टता V = 200 sin 57t cos 57t वोल्ट और धारा I = sin (314t + π/6) एम्पियर है। इस स्थिति में गणना कीजिए:
At any time t in an a.c. circuit, potential is V = 200 sin 57t cos 57t volt, and current is I = sin (314t + π/6) ampere. In this case calculate:
- आवृत्ति (frequency)
- वर्ग माध्य मूल वोल्टता (root mean square value of voltage)
- परिपथ की प्रतिबाधा (impedance of circuit)
- शक्ति गुणांक (power factor)
हल (Solution):
(i) आवृत्ति (Frequency):
दिया है: V = 200 sin 57t cos 57t = 100 × 2 sin 57t cos 57t = 100 sin 114t (सूत्र sin 2θ = 2 sin θ cos θ का उपयोग करके)
अतः ωv = 114 rad/s
धारा I = sin (314t + π/6) में ωi = 314 rad/s
चूंकि वोल्टता और धारा की आवृत्ति समान होनी चाहिए, परंतु यहाँ ωv ≠ ωi है। प्रश्न में संभवतः वोल्टता का व्यंजक V = 200 sin 314t cos 314t होना चाहिए। मान लें कि ω = 314 rad/s है।
आवृत्ति f = ω / (2π) = 314 / (2 × 3.14) = 314 / 6.28 = 50 Hz
(ii) वर्ग माध्य मूल वोल्टता (RMS Voltage):
V = 100 sin 114t (या 100 sin 314t) ⇒ V0 = 100 V
Vrms = V0 / √2 = 100 / 1.414 = 70.7 V
(iii) प्रतिबाधा (Impedance):
I = sin (314t + π/6) ⇒ I0 = 1 A
Z = V0 / I0 = 100 / 1 = 100 Ω
(iv) शक्ति गुणांक (Power Factor):
वोल्टता और धारा के बीच कलांतर (phase difference) φ = π/6 (धारा अग्रगामी है)
शक्ति गुणांक cos φ = cos (π/6) = √3/2 = 0.866
21. ज्यावक्रीय प्रत्यावर्ती धारा I = I₀ sin ωt के एक पूर्ण चक्र के लिए धारा का वर्ग माध्य मूल मान (r.m.s. value) ज्ञात कीजिए।
Find the root mean square (r.m.s.) value of sinusoidal alternating current I = I₀ sin ωt for a complete cycle.
हल (Solution):
r.m.s. मान = √(धारा के वर्ग का माध्य)
Irms = √[ (1/T) ∫₀ᵀ I² dt ]
I² = I₀² sin² ωt = I₀² (1 - cos 2ωt)/2
∫₀ᵀ I² dt = (I₀²/2) ∫₀ᵀ (1 - cos 2ωt) dt = (I₀²/2) [ t - (sin 2ωt)/(2ω) ]₀ᵀ
चूंकि T = 2π/ω, sin 2ωT = sin 4π = 0
∫₀ᵀ I² dt = (I₀²/2) × T = I₀²T/2
माध्य = (1/T) × (I₀²T/2) = I₀²/2
Irms = √(I₀²/2) = I₀/√2
अतः ज्यावक्रीय धारा का r.m.s. मान I₀/√2 होता है।
22. संधारित्र का सिद्धान्त समझाइए। गोलीय संधारित्र की धारिता का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए। गोलीय चालक की धारिता और त्रिज्या के मध्य ग्राफ खींचिए।
Explain the principle of capacitor. Derive the expression for capacity of a spherical capacitor. Draw the necessary diagram. Draw a graph between radius and capacity of spherical conductor.
हल (Solution):
संधारित्र का सिद्धान्त (Principle of Capacitor):
जब किसी विद्युतरोधी माध्यम (परावैद्युत) द्वारा पृथक किए गए दो चालकों को किसी बैटरी से जोड़ा जाता है, तो उन पर समान परिमाण के विपरीत आवेश संचित हो जाते हैं। एक चालक पर धन आवेश (+Q) और दूसरे पर ऋण आवेश (-Q) आ जाता है। इन चालकों के बीच विभवांतर (V) उत्पन्न होता है। संधारित्र की धारिता C = Q/V होती है। किसी चालक को दूसरे चालक के समीप लाने से उसकी धारिता बढ़ जाती है, यही संधारित्र का सिद्धान्त है।
गोलीय संधारित्र की धारिता (Capacity of Spherical Capacitor):
माना एक ठोस गोले (त्रिज्या a) को एक खोखले गोले (त्रिज्या b) से घेरा गया है, जहाँ b > a। दोनों के बीच परावैद्युतांक ε का माध्यम है।
आंतरिक गोले पर +Q आवेश देने पर, बाहरी गोले पर -Q आवेश प्रेरित होता है।
आंतरिक गोले पर विभव: Va = Q/(4πε₀εr a) - Q/(4πε₀εr b) (बाहरी गोले के कारण)
बाहरी गोले पर विभव: Vb = Q/(4πε₀εr b) - Q/(4πε₀εr b) = 0 (यदि बाहरी गोला भू-संपर्कित है)
या यदि बाहरी गोला पृथक है, तो विभवांतर:
V = Va - Vb = [Q/(4πε₀εr a) - Q/(4πε₀εr b)] - 0 = Q/(4πε₀εr) [1/a - 1/b]
धारिता C = Q/V = 4πε₀εr / [1/a - 1/b] = 4πε₀εr ab / (b - a)
चित्र (Diagram):
एक छोटा ठोस गोला (त्रिज्या a) और उसके चारों ओर एक बड़ा खोखला गोला (त्रिज्या b)। दोनों संकेंद्रित हैं।
ग्राफ (Graph):
गोलीय चालक की धारिता C = 4πε₀εr r (एकल गोले के लिए) होती है। अतः C ∝ r। ग्राफ एक सरल रेखा होगी जो मूल बिंदु से गुजरती है, जिसमें x-अक्ष पर त्रिज्या (r) और y-अक्ष पर धारिता (C) होती है।
23.
विद्युत द्विध्रुव की परिभाषा दीजिए। एक विद्युत द्विध्रुव के कारण उसकी निरक्ष रेखा पर स्थित किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।
किसी क्षेत्र में यदि विभव नियत हो, तो विद्युत क्षेत्र की तीव्रता कितनी होगी?
अथवा
विद्युत विभव की परिभाषा दीजिए। विद्युत द्विध्रुव के कारण किसी बिन्दु (r, θ) पर विद्युत विभव का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।
विद्युत द्विध्रुव की निरक्ष रेखा पर विद्युत विभव ज्ञात कीजिए।
Define electric dipole. Derive the expression for the electric field intensity at a point on the equatorial line of an electric dipole. Draw the necessary diagram.
If the potential is constant in a field then what will be the electric field intensity?
OR
Define electric potential. Derive an expression for the electric potential at a point (r, θ) due to electric dipole. Draw the necessary diagram.
Find electric potential on equatorial line of electric dipole.
Solution (Part 1: Electric Dipole and Field on Equatorial Line)
विद्युत द्विध्रुव की परिभाषा: जब दो समान परिमाण के विपरीत आवेश (+q और -q) एक-दूसरे से अल्प दूरी (2a) पर स्थित होते हैं, तो इस निकाय को विद्युत द्विध्रुव कहते हैं। द्विध्रुव आघूर्ण p = q × 2a होता है, जो ऋणात्मक से धनात्मक आवेश की ओर दिष्ट होता है।
निरक्ष रेखा पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक:
माना द्विध्रुव के केंद्र O से निरक्ष रेखा पर r दूरी पर एक बिन्दु P है। +q आवेश के कारण P पर विद्युत क्षेत्र E+ = kq/(r² + a²) (दिशा +q से P की ओर) और -q आवेश के कारण E- = kq/(r² + a²) (दिशा P से -q की ओर) होता है। ये दोनों क्षेत्र परिमाण में समान हैं। इनके अभिलंब घटक निरस्त हो जाते हैं और अक्षीय घटक जुड़ जाते हैं।
परिणामी क्षेत्र E = 2 × (kq/(r² + a²)) × cosθ, जहाँ cosθ = a/√(r² + a²)
अतः E = (2kqa)/(r² + a²)3/2
यदि r >> a, तो E = (2kqa)/r³ = (kp)/r³ (दिशा -p के अनुदिश, अर्थात् ऋणात्मक आवेश से धनात्मक आवेश की ओर)।
चित्र: (आवश्यक चित्र में द्विध्रुव को +q और -q के साथ दिखाएँ, निरक्ष रेखा पर बिन्दु P, और E+, E- तथा परिणामी E के घटक दर्शाएँ।)
यदि विभव नियत हो: यदि किसी क्षेत्र में विभव नियत है, तो विद्युत क्षेत्र की तीव्रता शून्य होगी, क्योंकि E = -dV/dr, और नियत विभव के लिए dV/dr = 0।
Solution (Part 2: Electric Potential due to Dipole)
विद्युत विभव की परिभाषा: किसी बिन्दु पर विद्युत विभव वह कार्य है जो एकांक धनात्मक आवेश को अनन्त से उस बिन्दु तक लाने में किया जाता है।
द्विध्रुव के कारण बिन्दु (r, θ) पर विभव का व्यंजक:
माना द्विध्रुव के केंद्र O से r दूरी पर एक बिन्दु P है, जो द्विध्रुव अक्ष से θ कोण बनाता है। +q आवेश से P की दूरी r1 ≈ r - a cosθ और -q से दूरी r2 ≈ r + a cosθ (लगभग)।
P पर कुल विभव V = kq/r1 - kq/r2 = kq[1/(r - a cosθ) - 1/(r + a cosθ)]
V = kq[(r + a cosθ - r + a cosθ)/(r² - a² cos²θ)] = kq[2a cosθ/(r² - a² cos²θ)]
यदि r >> a, तो V = (k p cosθ)/r², जहाँ p = 2aq द्विध्रुव आघूर्ण है।
निरक्ष रेखा पर विभव: निरक्ष रेखा पर θ = 90° होता है, अतः cos90° = 0, इसलिए V = 0। अतः द्विध्रुव की निरक्ष रेखा पर विद्युत विभव शून्य होता है।
चित्र: (आवश्यक चित्र में द्विध्रुव, बिन्दु P, दूरी r, कोण θ, और r1, r2 दर्शाएँ।)
प्रश्न 24
बायो-सावर्ट नियम का कथन कीजिए। वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के अक्ष पर स्थित बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।
अथवा
ऐम्पियर नियम का कथन कीजिए। एक लम्बे ठोस बेलनाकार धारावाही चालक के कारण उसके (i) बाहर तथा (ii) अन्दर स्थित बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक प्राप्त कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।
1+2+1=4
State Biot-Savart’s law. Derive the expression for the magnetic field at an axial point of a circular current carrying coil. Draw the necessary diagram.
OR
State Ampere’s law. Derive the expression for magnetic field due to long solid cylindrical current carrying conductor at a point located (i) outside and (ii) inside the conductor. Draw necessary diagram.
1+1+1+1=4
विकल्प 1: बायो-सावर्ट नियम एवं वृत्ताकार कुण्डली के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र
बायो-सावर्ट नियम का कथन
इस नियम के अनुसार, किसी धारावाही अल्पांश Idl के कारण किसी बिन्दु P पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र dB का परिमाण निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है:
- dB ∝ I (धारा)
- dB ∝ dl (अल्पांश की लम्बाई)
- dB ∝ sinθ (जहाँ θ, dl और स्थिति सदिश r के बीच का कोण है)
- dB ∝ 1/r² (दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती)
अतः गणितीय रूप में: dB = (μ₀/4π) × (Idl sinθ) / r²
जहाँ μ₀ = 4π × 10⁻⁷ Tm/A (निर्वात की चुम्बकशीलता) है।
वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के अक्ष पर चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक
चित्र: मान लीजिए एक वृत्ताकार कुण्डली जिसकी त्रिज्या R है तथा इसमें I धारा प्रवाहित हो रही है। कुण्डली के केंद्र O से x दूरी पर अक्ष पर एक बिन्दु P है।
व्युत्पत्ति:
- कुण्डली के एक अल्पांश dl पर विचार करें। इस अल्पांश से बिन्दु P की दूरी r = √(R² + x²) है।
- बायो-सावर्ट नियम से, इस अल्पांश के कारण P पर चुम्बकीय क्षेत्र:
dB = (μ₀/4π) × (I dl) / r² (यहाँ θ = 90° है, अतः sin90° = 1) - dB की दिशा dl और r दोनों के लम्बवत् होती है। इसे दो घटकों में वियोजित करते हैं:
- अक्ष के अनुदिश घटक: dB cosφ
- अक्ष के लम्बवत् घटक: dB sinφ
- अतः कुल चुम्बकीय क्षेत्र केवल अक्षीय घटकों का योग होगा:
B = ∫ dB cosφ = ∫ (μ₀/4π) × (I dl / r²) × (R/r) - यहाँ cosφ = R/r तथा r = √(R² + x²) है।
- समाकलन करने पर:
B = (μ₀ I R / 4π r³) × ∫ dl = (μ₀ I R / 4π r³) × (2πR) - अतः B = (μ₀ I R²) / [2 (R² + x²)^(3/2)]
यह वृत्ताकार धारावाही कुण्डली के अक्ष पर स्थित किसी बिन्दु पर चुम्बकीय क्षेत्र का व्यंजक है।
विशेष स्थिति: कुण्डली के केंद्र पर (x = 0): B = μ₀ I / (2R)
विकल्प 2: ऐम्पियर नियम एवं बेलनाकार चालक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र
ऐम्पियर नियम का कथन
इस नियम के अनुसार, किसी बन्द पथ (ऐम्पियरी पाश) के परितः चुम्बकीय क्षेत्र B का रेखीय समाकलन, उस पाश से गुजरने वाली कुल धारा का μ₀ गुना होता है।
गणितीय रूप में: ∮ B · dl = μ₀ Ienclosed
लम्बे ठोस बेलनाकार चालक के कारण चुम्बकीय क्षेत्र
चित्र: मान लीजिए एक लम्बा ठोस बेलनाकार चालक जिसकी त्रिज्या R है तथा इसमें I धारा प्रवाहित हो रही है।
(i) चालक के बाहर स्थित बिन्दु (r > R):
- बिन्दु P से r त्रिज्या का एक ऐम्पियरी पाश (वृत्ताकार) खींचते हैं।
- सममिति के कारण, पाश के प्रत्येक बिन्दु पर B का मान समान तथा स्पर्शरेखीय होता है।
- ऐम्पियर नियम से: ∮ B · dl = B × 2πr = μ₀ I (पाश से गुजरने वाली धारा = I)
- अतः B = μ₀ I / (2πr) (बाहर के लिए)
(ii) चालक के अन्दर स्थित बिन्दु (r < R):
- बिन्दु P से r त्रिज्या का ऐम्पियरी पाश खींचते हैं।
- इस पाश से गुजरने वाली धारा: Ienclosed = I × (πr² / πR²) = I × (r²/R²)
- ऐम्पियर नियम से: B × 2πr = μ₀ × I × (r²/R²)
- अतः B = (μ₀ I r) / (2πR²) (अन्दर के लिए)
निष्कर्ष:
- चालक के बाहर (r > R): B ∝ 1/r
- चालक के अन्दर (r < R): B ∝ r
- सतह पर (r = R): B = μ₀ I / (2πR)