RBSE Class 12th 2010 Political Science-SS-11-1-2010 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2010 |
| Subject | Political Science-SS-11-1-2010 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2010 Political Science-SS-11-1-2010
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Rajasthan Board Class 12th Political Science-SS-11-1-2010 2010 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2010
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2010
वैकल्पिक वर्ग I — कला (OPTIONAL GROUP I — Arts)
राजनीति विज्ञान — प्रथम पत्र
POLITICAL SCIENCE — First Paper
समय : 3 घण्टे पूर्णाक : 60
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें ।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं । प्रश्न क्रमांक 22 एवं 23 में आन्तरिक विकल्प हैं ।
All the questions are compulsory. Question Nos. 22 and 23 have internal choices. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें ।
For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.
No. of Questions — 23 No. of Printed Pages — 7
855--] [-]--]?6. Sc. I ठ5-हाव [ Turn over
खण्ड - अ / Section - A
अति लघूत्तरात्मक प्रश्न / Very Short Answer Type Questions
6. प्रश्न संख्या 2 से 5 तक अति लघूत्तरात्मक प्रश्न हैं जिनके उत्तर एक पंक्ति में देने हैं।
Question Nos. 2 to 5 are very short answer type. Their answers are to be given in one line each.
बहुविकल्पीय प्रश्न / Multiple Choice Question
7. प्रश्न क्रमांक 1 में चार भाग (i, ii, iii एवं iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (अ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:
There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 1. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below:
| प्रश्न क्रमांक / Question No. | सही उत्तर का क्रमाक्षर / Correct letter of the Answer |
|---|---|
| 1. (i) | |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
प्रश्न 1. (i) / Question 1. (i)
कानून जो दो राज्यों के पारस्परिक सम्बन्धों व उनके आचरण को नियमन करता है, वह है:
The law which determines mutual relation of two states and regulates their behaviour, is:
- (अ) राष्ट्रीय कानून / National law
- (ब) अन्तरराष्ट्रीय कानून / International law (सही उत्तर / Correct Answer)
- (स) प्रशासनिक कानून / Administrative law
- (द) संवैधानिक कानून / Constitutional law
व्याख्या / Explanation: अन्तरराष्ट्रीय कानून (International law) वह कानून है जो दो या दो से अधिक राज्यों के बीच संबंधों और आचरण को नियंत्रित करता है। यह राष्ट्रीय कानून से भिन्न है जो एक राज्य के भीतर लागू होता है।
प्रश्न 1 (i)
एक व्यक्ति द्वारा अपनी इच्छा से वेशभूषा धारण करना उसकी जिस स्वतन्त्रता का परिचायक है, वह है
- प्राकृतिक स्वतन्त्रता (Natural liberty)
- नैतिक स्वतन्त्रता (Moral liberty)
- नागरिक स्वतन्त्रता (Civil liberty)
- निजी स्वतन्त्रता (Personal liberty)
व्याख्या: वेशभूषा चुनने का अधिकार व्यक्ति की निजी स्वतन्त्रता के अंतर्गत आता है, जो उसके व्यक्तिगत जीवन और पसंद से संबंधित है।
प्रश्न 1 (ii)
निम्न में से जो राजनीतिक संस्कृति का लक्षण नहीं है, वह है
- अमूर्तता (Abstractness)
- गतिशीलता (Dynamics)
- स्पष्टता (Clearness)
- समन्वयवादिता (Collectiveness)
व्याख्या: राजनीतिक संस्कृति अमूर्त, गतिशील और समन्वयात्मक होती है, लेकिन स्पष्टता (Clearness) इसका लक्षण नहीं है, क्योंकि यह अस्पष्ट और व्यापक हो सकती है।
प्रश्न 1 (iii)
किसी राज्य में मूल्यों को सीखने और अंगीकार करने की प्रक्रिया को कहा जाता है
- समाजीकरण (Socialisation)
- वैश्वीकरण (Globalisation)
- आधुनिकीकरण (Modernisation)
- अभिमुखीकरण (Orientation)
व्याख्या: समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति अपने समाज के मूल्यों, मानदंडों और व्यवहारों को सीखता और अपनाता है।
2. “अधिकार सामाजिक जीवन की वे परिस्थितियाँ हैं, जिसके बिना साधारणतया कोई व्यक्ति अपने उच्चतम स्वरूप की प्राप्ति नहीं कर सकता ।” कथन किस राजनीतिक विचारक का है?
Name the political thinker whose statement is, “Rights in fact are those conditions of social life without which no man can seek in general to be his best”.
उत्तर: यह कथन टी. एच. ग्रीन (T. H. Green) का है।
Answer: This statement is by T. H. Green.
3. राजनीतिक पद्धतियों या राजनीतिक प्रश्नों से सम्बन्धित अभिवृत्तियों, विश्वासों, भावनाओं तथा समाज के मूल्यों का समन्वित रूप क्या कहलाता है?
What is known as collective form of attitudes, sentiments, cognitions and value of society related to political system or political issues?
उत्तर: इसे राजनीतिक संस्कृति (Political Culture) कहा जाता है।
Answer: It is called Political Culture.
4. अधिकारों से सम्बन्धित उस सिद्धान्त का नाम बताइए जो राजनीतिक एवं नागरिक अधिकारों को आर्थिक एवं सामाजिक अधिकारों की अपेक्षा अधिक महत्व देता है।
Write the name of the theory regarding rights which gives more importance to the political and civil rights than the economic and social rights.
उत्तर: इस सिद्धान्त को उदारवादी सिद्धान्त (Liberal Theory of Rights) कहा जाता है।
Answer: This theory is called the Liberal Theory of Rights.
5. स्वतन्त्रता से सम्बन्धित, वह कौन-सी विचारधारा है, जो व्यक्ति पर किसी भी बन्धन को स्वीकार नहीं करती?
Which ideology of liberty does not accept any restraint on a person?
उत्तर: यह अराजकतावाद (Anarchism) की विचारधारा है, जो व्यक्ति पर किसी भी प्रकार के बन्धन या राज्य के हस्तक्षेप को अस्वीकार करती है।
Answer: This is the ideology of Anarchism, which rejects any restraint or state intervention on the individual.
प्रश्न 6 से 11 तक के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 30 शब्दों में दीजिए।
Note: Answer of each question from Question Nos. 6 to 11 should not exceed 30 words.
प्रश्न 6. कानून और नैतिकता के मध्य तीन अन्तर बताइए।
Mention three differences between law and morality.
- कानून राज्य द्वारा बनाया जाता है, जबकि नैतिकता समाज द्वारा विकसित होती है।
- कानून का उल्लंघन दंडनीय है, नैतिकता का उल्लंघन सामाजिक निंदा का कारण बनता है।
- कानून लिखित और स्पष्ट होता है, नैतिकता अलिखित और अस्पष्ट हो सकती है।
प्रश्न 7. राजनीतिक समाजीकरण को बाधित करने वाले तीन कारणों को स्पष्ट कीजिए।
Explain three hindering causes of political socialisation.
- शिक्षा का अभाव राजनीतिक जागरूकता को कम करता है।
- गरीबी और आर्थिक असमानता राजनीतिक भागीदारी को सीमित करती है।
- सत्तावादी शासन व्यवस्था स्वतंत्र राजनीतिक चर्चा को दबाती है।
प्रश्न 8. सर्वाधिकारवादी एवं लोकतन्त्रात्मक व्यवस्थाओं में होने वाली राजनीतिक सहभागिता की प्रकृति के मुख्य तीन अन्तर बताइए।
Mention three main differences of the political participation between Totalitarian and Democratic systems.
- सर्वाधिकारवाद में भागीदारी अनिवार्य और नियंत्रित होती है, जबकि लोकतंत्र में स्वैच्छिक और स्वतंत्र।
- सर्वाधिकारवाद में भागीदारी केवल शासन के समर्थन तक सीमित होती है, लोकतंत्र में विरोध भी शामिल है।
- सर्वाधिकारवाद में भागीदारी का उद्देश्य शासन को मजबूत करना है, लोकतंत्र में नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना।
प्रश्न 9. राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा की तीन कमियों का उल्लेख कीजिए।
Mention three shortcomings of the concept of Political culture.
- यह अवधारणा अत्यधिक सामान्यीकृत होती है और विविधताओं को नजरअंदाज करती है।
- राजनीतिक संस्कृति को मापना और परिभाषित करना कठिन है।
- यह सामाजिक-आर्थिक कारकों के प्रभाव को कम आंकती है।
प्रश्न 10. समाजवाद के विकास की तीन उप-धाराओं का उल्लेख कीजिए।
Explain three sub-streams for development of socialism.
- यूटोपियन समाजवाद – आदर्श समाज की कल्पना पर आधारित।
- मार्क्सवादी समाजवाद – वर्ग संघर्ष और क्रांति पर बल देता है।
- लोकतांत्रिक समाजवाद – संसदीय मार्ग से समाजवाद की स्थापना चाहता है।
प्रश्न 11. समष्टिवाद के विकास के तीन कारण बताइए।
Mention three causes for development of collectivism.
- पूंजीवाद की विफलताओं और असमानताओं की प्रतिक्रिया।
- औद्योगिक क्रांति के कारण श्रमिक वर्ग की समस्याओं का समाधान।
- सामूहिक निर्णय और संसाधनों के समान वितरण की आवश्यकता।
नोट : प्रश्न संख्या 2 से 21 तक के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 00 शब्दों में दीजिये ।
Note: Answer of each question from Question Nos. 2 to 21 should not exceed 00 words.
-
वैधानिक समानता के तीन लक्षण बताइए ।
Mention three characteristics of legal equality. [3]
उत्तर: वैधानिक समानता के तीन लक्षण निम्नलिखित हैं:
- सभी नागरिक कानून के समक्ष समान हैं और उन्हें समान संरक्षण प्राप्त है।
- कानून में किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, लिंग या वर्ग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता।
- सभी को न्यायालयों तक समान पहुँच और कानूनी उपचार का अधिकार है।
-
स्वतन्त्रता के संरक्षण के लिए आवश्यक तीन परिस्थितियों को स्पष्ट कीजिए ।
Explain three essential conditions to safeguard liberty. [3]
उत्तर: स्वतन्त्रता के संरक्षण के लिए तीन आवश्यक परिस्थितियाँ निम्नलिखित हैं:
- कानून का शासन: सभी व्यक्ति कानून के अधीन हों और कोई भी कानून से ऊपर न हो।
- न्यायपालिका की स्वतंत्रता: न्यायपालिका कार्यपालिका और विधायिका से स्वतंत्र हो ताकि वह निष्पक्ष न्याय कर सके।
- नागरिक स्वतंत्रताओं की सुरक्षा: अभिव्यक्ति, संगठन और विचार की स्वतंत्रता जैसे मौलिक अधिकारों की गारंटी हो।
-
विधि के शासन की तीन विशेषताएँ बताइए ।
Describe three characteristics of the rule of law. [3]
उत्तर: विधि के शासन की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- कानून सर्वोच्च है और सभी व्यक्ति (शासक और शासित) कानून के अधीन हैं।
- कानून स्पष्ट, सार्वजनिक और स्थिर होना चाहिए, ताकि नागरिक अपने आचरण को उसके अनुसार ढाल सकें।
- न्यायपालिका स्वतंत्र और निष्पक्ष होती है, जो कानून के उल्लंघन पर दंड सुनिश्चित करती है।
-
भारत जैसे देश के लिए आप किस उपयुक्त संस्कृति को विकसित करने पर बल देंगे और क्यों ? अपने समर्थन में कोई दो तर्क दीजिए ।
Which type of culture would you like to emphasise for development in a nation like India and why ? Give any two arguments to support your views. [1+2]
उत्तर: मैं भारत जैसे देश के लिए बहुलवादी और समावेशी संस्कृति को विकसित करने पर बल दूंगा। यह संस्कृति विविधता में एकता को बढ़ावा देती है।
समर्थन में दो तर्क:
- भारत में अनेक धर्म, भाषाएँ और जातियाँ हैं; बहुलवादी संस्कृति सभी समूहों को सम्मान और प्रतिनिधित्व देती है, जिससे सामाजिक सद्भाव बना रहता है।
- यह संस्कृति लोकतांत्रिक मूल्यों जैसे सहिष्णुता, संवाद और आपसी सम्मान को मजबूत करती है, जो राष्ट्रीय एकता और विकास के लिए आवश्यक हैं।
-
अधिकारों के प्राकृतिक सिद्धान्त की कोई तीन विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए ।
Explain any three characteristics of natural theory of rights. [3]
उत्तर: अधिकारों के प्राकृतिक सिद्धान्त की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- जन्मजात: ये अधिकार मनुष्य को जन्म से प्राप्त होते हैं, राज्य या किसी सत्ता द्वारा प्रदान नहीं किए जाते।
- अहस्तांतरणीय: इन अधिकारों को किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा छीना नहीं जा सकता; ये मानव स्वभाव का अभिन्न अंग हैं।
- सार्वभौमिक: ये अधिकार सभी मनुष्यों को समान रूप से प्राप्त हैं, चाहे उनका देश, जाति या लिंग कुछ भी हो।
-
राजनीतिक सहभागिता के तीन विभिन्न स्तरों को स्पष्ट कीजिए ।
Explain three different levels of political participation. [3]
उत्तर: राजनीतिक सहभागिता के तीन विभिन्न स्तर निम्नलिखित हैं:
- स्थानीय स्तर: नागरिक गाँव या शहर के स्थानीय निकायों (जैसे पंचायत या नगर निगम) के चुनावों में भाग लेते हैं और स्थानीय मुद्दों पर निर्णय लेते हैं।
- राज्य स्तर: नागरिक राज्य विधानसभा के चुनावों में मतदान करते हैं और राज्य सरकार की नीतियों को प्रभावित करते हैं।
- राष्ट्रीय स्तर: नागरिक लोकसभा और राष्ट्रपति चुनावों में भाग लेते हैं, जो देश की सरकार और कानूनों को आकार देते हैं।
-
गाँधीजी के सच्चे अनुयायी होने के नाते आप सत्याग्रह के किन साधनों को अपनाने का सुझाव देंगे ? किन्हीं तीन को स्पष्ट कीजिए ।
As a true follower of Gandhiji which means of Satyagraha would you like to suggest to adopt ? Explain any three. [3]
उत्तर: गाँधीजी के सच्चे अनुयायी के रूप में मैं सत्याग्रह के निम्नलिखित तीन साधनों को अपनाने का सुझाव दूंगा:
- असहयोग आंदोलन: अन्यायपूर्ण कानूनों और संस्थाओं का शांतिपूर्ण तरीके से बहिष्कार करना, जैसे सरकारी नौकरियों या करों का भुगतान न करना।
- सविनय अवज्ञा: अन्यायपूर्ण कानूनों को जानबूझकर तोड़ना और उसकी सजा स्वीकार करना, जैसे नमक कानून तोड़ना।
- उपवास: आत्मशुद्धि और विरोध के रूप में भूख हड़ताल करना, जो विरोधी के हृदय परिवर्तन के लिए होता है, न कि दबाव डालने के लिए।
-
परम्परागत और आधुनिक उदारवाद के बीच कोई तीन अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
Explain any three differences between Traditional and Modern Liberalism. [3]
उत्तर: परम्परागत और आधुनिक उदारवाद के बीच तीन अन्तर निम्नलिखित हैं:
क्रमांक परम्परागत उदारवाद आधुनिक उदारवाद 1. राज्य का न्यूनतम हस्तक्षेप (रात्रि-प्रहरी राज्य) पर बल देता है। सामाजिक कल्याण के लिए राज्य के सक्रिय हस्तक्षेप का समर्थन करता है। 2. व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नकारात्मक स्वतंत्रता (हस्तक्षेप से मुक्ति) पर जोर। सकारात्मक स्वतंत्रता (अवसर और संसाधनों तक पहुँच) पर बल देता है। 3. मुक्त बाजार और पूंजीवाद का समर्थन करता है। आर्थिक असमानता को कम करने के लिए नियमन और कल्याणकारी नीतियों का समर्थन करता है।
SS—II-I—Pol. Sc. I उ5-ह54
20. एक नवोदित लोकतांत्रिक राज्य में आप किस प्रकार के राजनीतिक समाजीकरण की प्रक्रिया को अपनाने का सुझाव देंगे व क्यों ? कोई दो तर्क दीजिए।
Which type of process of political socialisation would you suggest to adopt for a newly born democratic state and why ? Give any two arguments.
उत्तर: एक नवोदित लोकतांत्रिक राज्य में लोकतांत्रिक राजनीतिक समाजीकरण की प्रक्रिया अपनाने का सुझाव दूंगा। इस प्रक्रिया में नागरिकों को लोकतांत्रिक मूल्यों, अधिकारों, कर्तव्यों और भागीदारी के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाता है।
दो तर्क:
- लोकतांत्रिक संस्कृति का निर्माण: नवोदित लोकतंत्र में अक्सर सत्तावादी या अलोकतांत्रिक परंपराएं होती हैं। लोकतांत्रिक समाजीकरण नागरिकों में सहिष्णुता, संवाद, और शांतिपूर्ण सत्ता-हस्तांतरण जैसे मूल्यों को विकसित करता है, जो लोकतंत्र की नींव को मजबूत करते हैं।
- सक्रिय नागरिकता को बढ़ावा: यह प्रक्रिया नागरिकों को चुनावों में भाग लेने, सरकार की नीतियों पर निगरानी रखने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाती है। इससे राजनीतिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बढ़ता है और लोकतंत्र स्थिर होता है।
21. किसी लोकतांत्रिक समाज में आर्थिक स्वतन्त्रता के तीन लक्षण बताइए।
Mention three characteristics of economic liberty of a democratic society.
उत्तर: लोकतांत्रिक समाज में आर्थिक स्वतंत्रता के तीन प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
- व्यवसाय चुनने की स्वतंत्रता: प्रत्येक नागरिक को अपनी इच्छानुसार कोई भी व्यवसाय, रोजगार या पेशा चुनने का अधिकार है। राज्य इसमें अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करता।
- संपत्ति के अधिकार की सुरक्षा: नागरिकों को निजी संपत्ति रखने, उपयोग करने और उसका निपटान करने का अधिकार है। राज्य केवल कानून द्वारा निर्धारित शर्तों पर ही संपत्ति का अधिग्रहण कर सकता है।
- बाजार में प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता की पसंद: आर्थिक स्वतंत्रता में वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन, वितरण और मूल्य निर्धारण में प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन दिया जाता है। उपभोक्ता को अपनी आवश्यकतानुसार वस्तुएं चुनने की स्वतंत्रता होती है।
नोट: प्रश्न संख्या 22 एवं 23 के प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 500 शब्दों से अधिक में न लिखें।
Note: Answer to the Question Nos. 22 and 23 should not exceed 500 words each.
22. अधिकार की परिभाषा देते हुए उनके लक्षणों का वर्णन कीजिए।
अथवा
कर्त्तव्य के अर्थ बताइए। कर्त्तव्यों के वर्गीकरण का वर्णन कीजिए।
Defining rights and describe their characteristics.
OR
Give the meaning of duties. Describe their classification.
उत्तर (अधिकार): अधिकार वे सामाजिक एवं कानूनी दावे हैं जो व्यक्ति को अपने व्यक्तित्व के विकास के लिए आवश्यक होते हैं और जिन्हें राज्य द्वारा मान्यता एवं संरक्षण प्राप्त होता है।
अधिकारों के लक्षण:
- सामाजिक प्रकृति: अधिकार समाज में ही उत्पन्न होते हैं और समाज के बाहर इनका कोई अर्थ नहीं है।
- राज्य द्वारा मान्यता: केवल वे दावे ही अधिकार कहलाते हैं जिन्हें राज्य कानून द्वारा मान्यता देता है और लागू करता है।
- सार्वभौमिकता: अधिकार सभी नागरिकों के लिए समान रूप से उपलब्ध होते हैं, बिना किसी भेदभाव के।
- अनिवार्यता: अधिकार व्यक्ति के विकास के लिए आवश्यक हैं; इनके बिना व्यक्ति का पूर्ण विकास संभव नहीं है।
- सीमितता: अधिकार पूर्ण नहीं होते; वे दूसरों के अधिकारों और सार्वजनिक हित द्वारा सीमित होते हैं।
अथवा (कर्त्तव्य): कर्त्तव्य का अर्थ है वे नैतिक या कानूनी बाध्यताएं जिनका पालन व्यक्ति को समाज और राज्य के प्रति करना होता है।
कर्त्तव्यों का वर्गीकरण:
- नैतिक कर्त्तव्य: ये विवेक और नैतिकता पर आधारित होते हैं, जैसे सत्य बोलना, दया दिखाना।
- कानूनी कर्त्तव्य: ये राज्य के कानून द्वारा निर्धारित होते हैं, जैसे कर देना, कानून का पालन करना।
- सामाजिक कर्त्तव्य: ये समाज के प्रति होते हैं, जैसे सामाजिक सेवा करना, पर्यावरण की रक्षा करना।
- राजनीतिक कर्त्तव्य: ये राज्य के प्रति होते हैं, जैसे मतदान करना, देश की रक्षा करना।
23. उदारवाद के प्रमुख सिद्धान्तों की विवेचना कीजिए।
अथवा
मार्क्सवाद के द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के सिद्धान्त की विवेचना कीजिए।
Describe the main theories of liberalism.
OR
Describe Marx’s theory of dialectical materialism.
उत्तर (उदारवाद के सिद्धांत): उदारवाद एक राजनीतिक विचारधारा है जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता, समानता और तर्क पर बल देती है। इसके प्रमुख सिद्धांत निम्नलिखित हैं:
- व्यक्तिवाद: उदारवाद व्यक्ति को सर्वोच्च मानता है। व्यक्ति की स्वतंत्रता और अधिकारों की रक्षा राज्य का प्रमुख कर्तव्य है।
- स्वतंत्रता: इसमें विचार, अभिव्यक्ति, धर्म, और संगठन की स्वतंत्रता पर जोर दिया जाता है। व्यक्ति को अपने जीवन के तरीके को चुनने की आजादी होनी चाहिए।
- समानता: उदारवाद सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता और अवसर की समानता प्रदान करता है। यह जाति, लिंग या वर्ग के आधार पर भेदभाव का विरोध करता है।
- सीमित राज्य: राज्य की शक्ति सीमित होनी चाहिए। राज्य का कार्य केवल व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि उनके जीवन में अनावश्यक हस्तक्षेप करना।
- लोकतंत्र: उदारवाद प्रतिनिधि लोकतंत्र में विश्वास करता है, जहां सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है और चुनावों के माध्यम से बदली जा सकती है।
- बाजार अर्थव्यवस्था: यह मुक्त बाजार और निजी संपत्ति के अधिकार का समर्थन करता है, जहां आर्थिक गतिविधियां राज्य के न्यूनतम हस्तक्षेप से संचालित होती हैं।
अथवा (द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद): मार्क्स का द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद इतिहास और समाज को समझने का एक दार्शनिक तरीका है। इसके मुख्य तत्व हैं:
- भौतिकवाद: मार्क्स के अनुसार, समाज का आधार भौतिक परिस्थितियां (उत्पादन के साधन और संबंध) हैं, न कि विचार या आध्यात्मिकता। आर्थिक संरचना ही राजनीति, कानून और संस्कृति को निर्धारित करती है।
- द्वन्द्वात्मकता: यह विचार कि परिवर्तन विरोधी शक्तियों के संघर्ष से होता है। प्रत्येक स्थिति (थीसिस) अपने विपरीत (एंटीथीसिस) को जन्म देती है, और इनके संघर्ष से एक नई स्थिति (सिंथेसिस) उत्पन्न होती है।
- ऐतिहासिक भौतिकवाद: इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है। प्रत्येक युग में उत्पादन के साधनों पर नियंत्रण रखने वाला वर्ग (शोषक) और उनसे वंचित वर्ग (शोषित) के बीच संघर्ष होता है।
- परिवर्तन का नियम: द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद के अनुसार, सामंतवाद से पूंजीवाद और फिर पूंजीवाद से समाजवाद की ओर परिवर्तन अपरिहार्य है, क्योंकि प्रत्येक व्यवस्था अपने आंतरिक विरोधाभासों के कारण नष्ट होती है।