RBSE Class 12th 2010 Political Science-SS-11-2-2010 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2010 |
| Subject | Political Science-SS-11-2-2010 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2010 Political Science-SS-11-2-2010
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Rajasthan Board Class 12th Political Science-SS-11-2-2010 2010 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2010
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2010
वैकल्पिक समूह — कला (OPTIONAL GROUP I — Arts)
राजनीति विज्ञान — द्वितीय पत्र
POLITICAL SCIENCE — Second Paper
समय : 3 घण्टे 15 मिनट पूर्णांक : 60
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें ।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं । प्रश्न क्रमांक 22 एवं 23 में आन्तरिक विकल्प हैं ।
All the questions are compulsory. Question Nos. 22 and 23 have internal choices. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें ।
For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.
No. of Questions — 23 ss—11—2—Pol. Sc. II No. of Printed Pages — 7
855-1-]-2-?6. Sc. II उ5-हाहना [ Turn over
प्रश्न संख्या 2 से 5 तक अति लघूत्तरात्मक प्रश्न हैं जिनके उत्तर एक पंक्ति में देने हैं।
Question Nos. 2 to 5 are very short answer type. Their answers are to be given in one line each.
प्रश्न क्रमांक 1 (i, ii, iii तथा iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (आ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:
There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 1. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below:
| प्रश्न क्रमांक Question No. |
सही उत्तर का क्रमाक्षर Correct letter of the Answer |
|---|---|
| 1. (i) | |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
1. (i) पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक स्तर प्रदान किया गया
- (अ) 74वें संविधान संशोधन द्वारा
- (ब) 72वें संविधान संशोधन द्वारा
- (स) 61वें संविधान संशोधन द्वारा
- (द) 73वें संविधान संशोधन द्वारा
The constitutional status was accorded to Panchayati Raj Institutions by
- (A) 74th Constitutional Amendment
- (B) 72nd Constitutional Amendment
- (C) 61st Constitutional Amendment
- (D) 73rd Constitutional Amendment
सही उत्तर (Correct Answer): (द) 73वें संविधान संशोधन द्वारा / (D) 73rd Constitutional Amendment
व्याख्या (Explanation): 73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया, जबकि 74वें संशोधन ने नगरपालिकाओं को संवैधानिक स्तर प्रदान किया।
(४) निर्वाचन आयोग का वह कार्य जिसे न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती, वह है
The function of Election Commission which cannot be challenged in Court is
- राजनीतिक दलों को मान्यता देना / recognition to the political parties
- चुनाव चिह्न प्रदान करना / allotment of election symbols
- निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन / delimitation of constituencies
- मतदाताओं की सूची तैयार करना / preparing voters' list
व्याख्या: संविधान के अनुच्छेद 329(क) के अनुसार, निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (delimitation) से संबंधित निर्वाचन आयोग के कार्य को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
(४) योजना आयोग का अध्यक्ष होता है
The Chairman of Planning Commission is
- प्रधानमंत्री / Prime Minister
- राष्ट्रपति / President
- वित्त मंत्री / Finance Minister
- उपराष्ट्रपति / Vice-President
व्याख्या: योजना आयोग (1950-2014) का अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता था। इसका गठन आर्थिक नियोजन के लिए किया गया था, जिसे बाद में नीति आयोग से बदल दिया गया।
(iv) नव मूर द्वीप विवाद का सम्बन्ध है
New Moore Island dispute is related with
- भारत-पाक / India-Pakistan
- भारत-बांग्लादेश / India-Bangladesh
- भारत-चीन / India-China
- भारत-नेपाल / India-Nepal
व्याख्या: नव मूर द्वीप (New Moore Island) बंगाल की खाड़ी में स्थित था, जिस पर भारत और बांग्लादेश के बीच विवाद था। यह द्वीप 2010 में समुद्र में डूब गया, जिससे विवाद समाप्त हो गया।
2. भारतीय संविधान द्वारा राज्यों (संघ की इकाइयों) की सीमाओं में परिवर्तन का अधिकार किसे दिया गया है?
To whom has the power to alter the boundaries of states (units of the Union) been given by the Constitution of India?
उत्तर: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 के अनुसार, राज्यों की सीमाओं में परिवर्तन का अधिकार संसद को दिया गया है।
Answer: According to Article 3 of the Constitution of India, the power to alter the boundaries of states is given to the Parliament.
3. धन विधेयक राज्य विधानमण्डल के किस सदन में प्रस्तुत किया जाता है?
In which house of State Legislature, is Money Bill introduced?
उत्तर: धन विधेयक राज्य विधानमण्डल के विधान सभा (निचले सदन) में प्रस्तुत किया जाता है।
Answer: A Money Bill is introduced in the Legislative Assembly (lower house) of the State Legislature.
4. भारत का प्रथम आतंकवादी संगठन कौन-सा था?
Which was the first terrorist organization of India?
उत्तर: भारत का प्रथम आतंकवादी संगठन अनुशीलन समिति (Anushilan Samiti) था, जिसकी स्थापना 1902 में हुई थी।
Answer: The first terrorist organization of India was the Anushilan Samiti, founded in 1902.
5. सरकार द्वारा आर्थिक असमानता उन्मूलन के लिए चलाए गए कार्यक्रमों में से किसी एक का नाम बताइए।
Mention any one programme launched by the government to eradicate economic inequality.
उत्तर: सरकार द्वारा आर्थिक असमानता उन्मूलन के लिए चलाया गया एक कार्यक्रम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) है।
Answer: One programme launched by the government to eradicate economic inequality is the Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA).
नोट: प्रश्न संख्या 6 से 11 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर अधिकतम 30 शब्दों में दीजिए।
Note: Answer each question from Question Nos. 6 to 11 not exceeding 30 words.
6. भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की आलोचना के कोई दो बिन्दु बताइए।
State any two points of criticism of Fundamental Rights given by the Constitution of India.
उत्तर: (1) मौलिक अधिकारों पर आपातकाल के दौरान अंकुश लगाया जा सकता है, जिससे ये अस्थायी हो जाते हैं। (2) इनमें आर्थिक और सामाजिक अधिकारों को शामिल नहीं किया गया है, जो आलोचना का विषय है।
Answer: (1) Fundamental Rights can be suspended during an emergency, making them temporary. (2) Economic and social rights are not included in them, which is a point of criticism.
7. आप मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में किसी नये राजनीतिक दल को राष्ट्रीय दल की मान्यता किन आधारों पर देना चाहेंगे?
On which bases will you accord recognition to any new political party as a national party as the Chief Election Commissioner?
उत्तर: किसी दल को राष्ट्रीय दल की मान्यता देने के आधार: (1) उसे कम से कम तीन राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में 6% वोट प्राप्त होने चाहिए। (2) उसे कम से कम चार लोकसभा सीटें जीतनी चाहिए।
Answer: Bases for recognition as a national party: (1) The party must secure at least 6% of votes in Lok Sabha or Assembly elections in at least three states. (2) It must win at least four Lok Sabha seats.
प्रश्न 29
ऐसे कोई दो कार्य बताइए जो राष्ट्रीय विकास परिषद् द्वारा किये जाते हैं।
State any two functions which are performed by the National Development Council.
उत्तर / Answer:
राष्ट्रीय विकास परिषद् के दो प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
- राष्ट्रीय योजना आयोग द्वारा तैयार की गई पंचवर्षीय योजनाओं पर विचार करना और उन्हें अनुमोदित करना।
- योजना के क्रियान्वयन में राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय स्थापित करना तथा विकास संबंधी नीतियों पर मार्गदर्शन प्रदान करना।
Two important functions of the National Development Council are:
- To consider and approve the Five-Year Plans prepared by the Planning Commission.
- To coordinate between the Centre and States in the implementation of plans and to provide guidance on development policies.
प्रश्न 30
साम्प्रदायिकता के कोई दो दुष्परिणाम बताइए।
State any two adverse consequences of Communalism.
उत्तर / Answer:
साम्प्रदायिकता के दो दुष्परिणाम निम्नलिखित हैं:
- यह समाज में विभाजन और अविश्वास पैदा करती है, जिससे सामाजिक सद्भाव और एकता बिगड़ती है।
- इससे हिंसा और दंगे भड़कते हैं, जिससे जान-माल की हानि होती है और राष्ट्रीय एकता कमजोर पड़ती है।
Two adverse consequences of communalism are:
- It creates division and distrust in society, harming social harmony and unity.
- It leads to violence and riots, causing loss of life and property and weakening national unity.
प्रश्न 31
क्षेत्रीयता की भावना उत्पन्न होने के कोई दो कारण बताइए।
State any two factors responsible for the rise of feelings of regionalism.
उत्तर / Answer:
क्षेत्रीयता की भावना उत्पन्न होने के दो कारण निम्नलिखित हैं:
- आर्थिक असमानता और विकास का असंतुलित वितरण, जिससे कुछ क्षेत्र उपेक्षित महसूस करते हैं।
- भाषा, संस्कृति और परंपराओं में भिन्नता, जो स्थानीय पहचान को मजबूत करती है और क्षेत्रीय अस्मिता की भावना जगाती है।
Two factors responsible for the rise of regionalism are:
- Economic inequality and uneven distribution of development, making some regions feel neglected.
- Differences in language, culture, and traditions, which strengthen local identity and foster a sense of regionalism.
प्रश्न 32
भारत-पाक सम्बन्धों में लाहौर घोषणा के कोई दो प्रावधानों का उल्लेख कीजिए।
Mention any two provisions of Lahore Declaration in Indo-Pak relations.
उत्तर / Answer:
लाहौर घोषणा (1999) के दो प्रावधान निम्नलिखित हैं:
- दोनों देशों ने आतंकवाद को रोकने और शांति बनाए रखने के लिए सहयोग करने पर सहमति व्यक्त की।
- कश्मीर सहित सभी विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से बातचीत के माध्यम से हल करने का संकल्प लिया गया।
Two provisions of the Lahore Declaration (1999) are:
- Both countries agreed to cooperate in preventing terrorism and maintaining peace.
- They resolved to resolve all disputes, including Kashmir, peacefully through dialogue.
प्रश्न 33
भारतीय संविधान द्वारा संघ एवं राज्यों के मध्य किये गये शक्ति विभाजन का वर्णन कीजिए।
Describe the division of powers between the Union and states by the Constitution of India.
उत्तर / Answer:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 245 से 255 के तहत संघ और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन तीन सूचियों के माध्यम से किया गया है:
- संघ सूची (Union List): इसमें 100 विषय शामिल हैं, जैसे रक्षा, विदेश मामले, परमाणु ऊर्जा, रेलवे, मुद्रा आदि। इन पर केवल संसद कानून बना सकती है।
- राज्य सूची (State List): इसमें 61 विषय हैं, जैसे पुलिस, कृषि, स्थानीय सरकार, स्वास्थ्य आदि। इन पर राज्य विधानमंडल कानून बना सकता है।
- समवर्ती सूची (Concurrent List): इसमें 52 विषय हैं, जैसे शिक्षा, वन, श्रम कल्याण, दीवानी प्रक्रिया आदि। संघ और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं, लेकिन संघ के कानून की प्रधानता होती है।
अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary Powers) संघ के पास रहती हैं।
The Constitution of India divides powers between the Union and States through three lists under Articles 245-255:
- Union List: Contains 100 subjects (e.g., defence, foreign affairs, atomic energy, railways, currency). Only Parliament can legislate on these.
- State List: Contains 61 subjects (e.g., police, agriculture, local government, health). State legislatures can legislate on these.
- Concurrent List: Contains 52 subjects (e.g., education, forests, labour welfare, civil procedure). Both can legislate, but Union law prevails in case of conflict.
Residuary powers rest with the Union.
प्रश्न 34
संघीय मंत्रिपरिषद् की कोई तीन विशेषताएँ स्पष्ट कीजिए।
Explain any three salient features of Union Council of Ministers.
उत्तर / Answer:
संघीय मंत्रिपरिषद् की तीन विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- सामूहिक उत्तरदायित्व (Collective Responsibility): मंत्रिपरिषद् सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है। यदि एक मंत्री पर अविश्वास प्रस्ताव पारित होता है, तो पूरी परिषद् को इस्तीफा देना पड़ता है (अनुच्छेद 75)।
- प्रधानमंत्री का नेतृत्व (Leadership of Prime Minister): प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद् का प्रमुख होता है। वह मंत्रियों की नियुक्ति, विभागों का बंटवारा और बैठकों की अध्यक्षता करता है।
- सदस्यता का आधार (Membership Basis): मंत्रिपरिषद् के सदस्य संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) के सदस्य होने चाहिए। यदि कोई गैर-सदस्य मंत्री बनता है, तो उसे 6 महीने के भीतर संसद का सदस्य बनना होता है।
Three salient features of the Union Council of Ministers are:
- Collective Responsibility: The Council is collectively responsible to the Lok Sabha. A no-confidence motion against one minister leads to resignation of the entire Council (Article 75).
- Leadership of Prime Minister: The Prime Minister is the head, appoints ministers, allocates portfolios, and chairs meetings.
- Membership Basis: Ministers must be members of either House of Parliament. A non-member appointed as minister must become a member within 6 months.
प्रश्न 35
राज्यपाल की कोई तीन स्व-विवेकीय शक्तियाँ बताइए।
State any three discretionary powers of the Governor.
उत्तर / Answer:
राज्यपाल की तीन स्व-विवेकीय शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
- मुख्यमंत्री की नियुक्ति (Appointment of Chief Minister): जब किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो राज्यपाल अपने विवेक से मुख्यमंत्री नियुक्त कर सकता है जो बहुमत साबित कर सके।
- राज्यपाल का विवेकाधीन विधेयक (Discretionary Bill): राज्यपाल किसी विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकता है, भले ही मंत्रिपरिषद् की सलाह हो।
- राष्ट्रपति शासन की सिफारिश (Recommendation for President's Rule): यदि राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल हो जाता है, तो राज्यपाल अपने विवेक से राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश कर सकता है (अनुच्छेद 356)।
Three discretionary powers of the Governor are:
- Appointment of Chief Minister: When no party has a clear majority, the Governor can appoint a Chief Minister who can prove majority.
- Discretionary Bill: The Governor can reserve a bill for the President's consideration, even against ministerial advice.
- Recommendation for President's Rule: If constitutional machinery fails in the state, the Governor can recommend President's Rule (Article 356) at his discretion.
20. “राज्य विधान परिषद् विलम्बकारी सदन है ।” स्पष्ट कीजिए।
“The State Legislative Council is a delaying house.” Explain.
राज्य विधान परिषद् (Legislative Council) को विलम्बकारी सदन (Delaying House) इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह विधान सभा द्वारा पारित विधेयकों को अधिकतम 4 माह (सामान्य विधेयक) या 14 दिन (धन विधेयक) तक रोक सकती है, लेकिन इसे स्थायी रूप से अस्वीकार नहीं कर सकती। इस प्रकार यह सदन केवल विधायी प्रक्रिया में विलम्ब करने का कार्य करता है, न कि निर्णायक भूमिका निभाता है।
21. भारतीय निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने हेतु सांविधानिक प्रावधानों में से कोई तीन प्रावधान बताइए।
State any three constitutional provisions to ensure the independence of Election Commission of India.
- नियुक्ति एवं कार्यकाल: मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, सुरक्षित रहता है।
- पदच्युति की प्रक्रिया: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को केवल उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की तरह महाभियोग द्वारा ही हटाया जा सकता है, जिससे उनकी स्वतंत्रता सुनिश्चित होती है।
- सेवा शर्तों में परिवर्तन नहीं: नियुक्ति के बाद मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सेवा शर्तों में उनके हित में परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
22. अप्रत्यक्ष निर्वाचन के कोई तीन दोष बताइए।
State any three demerits of indirect election.
- जनता से दूरी: अप्रत्यक्ष निर्वाचन में जनता सीधे प्रतिनिधियों का चुनाव नहीं करती, जिससे जनता और शासकों के बीच दूरी बढ़ जाती है।
- भ्रष्टाचार की संभावना: मध्यस्थ (निर्वाचक) मतदाताओं को प्रभावित करना आसान होता है, जिससे धनबल और बाहुबल का प्रभाव बढ़ता है।
- जिम्मेदारी का अभाव: निर्वाचित प्रतिनिधि सीधे जनता के प्रति उत्तरदायी नहीं होते, जिससे उनमें जवाबदेही कम हो जाती है।
23. नियोजन की उपयोगिता के कोई तीन आधार बताइए।
State any three bases of the utility of planning.
- संसाधनों का कुशल उपयोग: नियोजन से देश के सीमित संसाधनों (जैसे पूंजी, श्रम, प्राकृतिक संसाधन) का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित होता है।
- आर्थिक विकास में तीव्रता: नियोजन के माध्यम से विकास की प्राथमिकताएँ निर्धारित की जाती हैं, जिससे आर्थिक वृद्धि दर को बढ़ाया जा सकता है।
- क्षेत्रीय असंतुलन में कमी: नियोजन से पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिससे क्षेत्रीय असमानताएँ कम होती हैं।
24. आरक्षण के विरोध में कोई तीन तर्क दीजिए।
Mention any three arguments against reservation.
- योग्यता का ह्रास: आरक्षण के कारण योग्यता के आधार पर चयन नहीं हो पाता, जिससे शैक्षणिक और व्यावसायिक संस्थानों में दक्षता कम हो सकती है।
- सामाजिक विभाजन: आरक्षण जाति और वर्ग के आधार पर समाज को विभाजित करता है, जिससे सामाजिक एकता कमजोर होती है।
- स्थायी निर्भरता: लंबे समय तक आरक्षण जारी रहने से लाभार्थी वर्गों में आत्मनिर्भरता की भावना कम हो जाती है और वे सरकारी सहायता पर निर्भर रहते हैं।
25. भारत में जाति के राजनीतिकरण की कोई तीन विशेषताएँ बताइए।
State any three characteristics of politicization of caste in India.
- जाति आधारित मतदान: लोग अपनी जाति के उम्मीदवारों को वोट देते हैं, जिससे चुनावों में जातीय समीकरण महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
- जातीय दलों का उदय: विशिष्ट जातियों के हितों का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनीतिक दलों का गठन हुआ है, जैसे बहुजन समाज पार्टी (BSP) दलितों के लिए।
- जाति आधारित आरक्षण की मांग: राजनीतिक दल विभिन्न जातियों को आरक्षण देने की मांग करते हैं, जिससे जाति राजनीति का केंद्र बिंदु बन जाती है।
26. भाषावाद की समस्या के समाधान के कोई तीन सुझाव दीजिए।
Give any three suggestions to solve the problem of linguism.
- तीन-भाषा सूत्र का प्रभावी कार्यान्वयन: स्कूलों में हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषा की शिक्षा को अनिवार्य बनाकर भाषाई विविधता को बढ़ावा दिया जा सकता है।
- राष्ट्रीय एकता पर जोर: शिक्षा और मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और भाषाई सहिष्णुता का प्रचार किया जाना चाहिए।
- भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा: संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी भाषा और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
प्रश्न 22
Note: Answer each of the Question Nos. 22 and 23 not exceeding 500 words.
भारत के उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार और शक्तियों का परीक्षण कीजिए।
अथवा
लोकसभा के गठन तथा शक्तियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर (उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार और शक्तियाँ):
भारत का उच्चतम न्यायालय देश का सर्वोच्च न्यायिक निकाय है। इसके क्षेत्राधिकार और शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
- मूल क्षेत्राधिकार: संघ और राज्यों के बीच, राज्यों के आपसी विवादों तथा मौलिक अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित मामलों में सीधे सुनवाई करता है।
- अपीलीय क्षेत्राधिकार: उच्च न्यायालयों के निर्णयों के विरुद्ध अपील सुनने का अधिकार। इसमें सिविल, आपराधिक और संवैधानिक मामले शामिल हैं।
- सलाहकार क्षेत्राधिकार: राष्ट्रपति किसी भी कानूनी या तथ्यात्मक प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय की राय ले सकते हैं।
- न्यायिक पुनरावलोकन: संसद और राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए कानूनों की संवैधानिकता की जाँच करना।
- अभिलेख न्यायालय: इसके निर्णयों को निचली अदालतों में मिसाल के रूप में माना जाता है।
- अवमानना की शक्ति: न्यायालय की अवमानना करने वालों को दंडित करने का अधिकार।
यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है और संविधान के संरक्षक के रूप में कार्य करता है।
उत्तर (लोकसभा का गठन और शक्तियाँ):
गठन: लोकसभा भारतीय संसद का निचला सदन है। इसके सदस्यों का चुनाव सीधे जनता द्वारा वयस्क मताधिकार के आधार पर किया जाता है। अधिकतम सदस्य संख्या 552 है, जिसमें 530 राज्यों से, 20 केंद्र शासित प्रदेशों से और 2 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। इसका कार्यकाल 5 वर्ष है, जब तक कि इसे पहले भंग न किया जाए।
शक्तियाँ:
- विधायी शक्तियाँ: कानून बनाना, संशोधन करना और निरस्त करना।
- वित्तीय शक्तियाँ: धन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है। यह करों और व्यय को मंजूरी देती है।
- कार्यपालिका पर नियंत्रण: मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी है। अविश्वास प्रस्ताव द्वारा सरकार को गिराया जा सकता है।
- संवैधानिक शक्तियाँ: संविधान संशोधन में भाग लेना।
- निर्वाचन संबंधी शक्तियाँ: राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग लेना।
- न्यायिक शक्तियाँ: महाभियोग द्वारा राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करना।
प्रश्न 23
भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषताओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
अथवा
भारत-चीन सम्बन्धों के मध्य विवाद की प्रमुख समस्याओं का संक्षेप में परीक्षण कीजिए।
उत्तर (भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ):
भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- गुटनिरपेक्षता: शीत युद्ध के दौरान किसी भी सैन्य गुट में शामिल न होना और स्वतंत्र नीति अपनाना।
- पंचशील के सिद्धांत: पाँच सिद्धांतों (पारस्परिक सम्मान, अहस्तक्षेप, समानता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व) पर आधारित।
- शांति और अहिंसा: अंतरराष्ट्रीय विवादों का शांतिपूर्ण समाधान और परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन।
- विकासशील देशों के साथ एकता: दक्षिण-दक्षिण सहयोग और गरीब देशों के हितों की रक्षा।
- राष्ट्रीय हितों की रक्षा: सुरक्षा, आर्थिक विकास और संप्रभुता को प्राथमिकता।
- वैश्विक संस्थाओं में सक्रिय भूमिका: संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन आदि में योगदान।
- पड़ोसी देशों के साथ संबंध: क्षेत्रीय सहयोग (SAARC) और शांति स्थापित करने का प्रयास।
उत्तर (भारत-चीन सम्बन्धों के मध्य विवाद की प्रमुख समस्याएँ):
भारत और चीन के बीच विवाद की प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
- सीमा विवाद: अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन क्षेत्रों को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद। 1962 के युद्ध के बाद भी यह अनसुलझा है।
- तिब्बत मुद्दा: तिब्बत को लेकर भारत की चिंता और चीन का दावा। दलाई लामा को भारत में शरण देना तनाव का कारण है।
- व्यापार असंतुलन: भारत का चीन के साथ भारी व्यापार घाटा और बाजार पहुंच में बाधाएँ।
- रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और भारत की सुरक्षा चिंताएँ।
- जल विवाद: ब्रह्मपुत्र और सिंधु नदियों पर चीन की बाँध परियोजनाओं से भारत को खतरा।
- पाकिस्तान से संबंध: चीन का पाकिस्तान को सैन्य और आर्थिक सहायता देना भारत के लिए चिंता का विषय है।
इन समस्याओं के बावजूद दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध बने हुए हैं।