RBSE Class 12th 2011 Food Science & Nutrition-SS-90-2-2011 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2011 |
| Subject | Food Science & Nutrition-SS-90-2-2011 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2011 Food Science & Nutrition-SS-90-2-2011
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Rajasthan Board Class 12th Food Science & Nutrition-SS-90-2-2011 2011 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2011
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2011
आहार विज्ञान एवं पोषण — द्वितीय पत्र
( FOOD SCIENCE AND NUTRITION — Second Paper )
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 40
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.
SS—90-2—Food Sc. & Nut. II SS-606-II [ Turn over
कब्ज के कोई दो प्रकार लिखिए।
Write any two types of constipation.
कब्ज के दो प्रकार:
- प्राथमिक कब्ज (Primary Constipation): यह आहार में फाइबर की कमी, कम पानी पीने, या शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण होता है।
- द्वितीयक कब्ज (Secondary Constipation): यह किसी अन्य रोग (जैसे थायरॉइड विकार, मधुमेह) या दवाओं के दुष्प्रभाव के कारण होता है।
उच्च प्रोटीन युक्त आहार किस रोग में दिया जाता है?
High protein diet is given in which disease?
उच्च प्रोटीन युक्त आहार जलन रोग (Burns), कुपोषण (Malnutrition), कैंसर (Cancer), और गुर्दे की बीमारी (Kidney disease) में दिया जाता है, जहाँ शरीर को ऊतकों की मरम्मत और प्रतिरक्षा के लिए अधिक प्रोटीन की आवश्यकता होती है।
मधुमेह रोग के कोई दो कारण लिखिए।
Write down any two causes of diabetes.
- आनुवंशिकता (Genetics): परिवार में मधुमेह का इतिहास होना।
- अस्वस्थ जीवनशैली (Unhealthy Lifestyle): अधिक कैलोरी वाला आहार, शारीरिक निष्क्रियता, और मोटापा।
मोटापे की पहचान हेतु तीन विधियाँ लिखिए।
Write down three methods for assessment of obesity.
- बॉडी मास इंडेक्स (BMI): वजन (किग्रा) को ऊँचाई (मीटर²) से भाग देकर गणना की जाती है। BMI ≥ 30 मोटापा दर्शाता है।
- कमर-कूल्हा अनुपात (Waist-Hip Ratio): कमर की परिधि को कूल्हे की परिधि से भाग देकर मापा जाता है। पुरुषों में >0.9 और महिलाओं में >0.85 मोटापे का संकेत है।
- त्वचा की तह मोटाई (Skinfold Thickness): कैलिपर से त्वचा की तह (जैसे ट्राइसेप्स) की मोटाई मापी जाती है।
कम कैल्सियम तथा फास्फोरस युक्त आहार किस रोग में दिया जाता है?
Low calcium and phosphorus containing diet is given in which disease?
कम कैल्सियम तथा फास्फोरस युक्त आहार गुर्दे की पथरी (Kidney Stones) या हाइपरपैराथायरॉइडिज्म (Hyperparathyroidism) में दिया जाता है, जहाँ रक्त में कैल्सियम का स्तर अधिक होता है।
हृदय रोग में कौन-कौन से भोज्य पदार्थ लाभदायक हैं?
What kind of food substances are beneficial in heart diseases?
हृदय रोग में लाभदायक भोज्य पदार्थ:
- ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त खाद्य पदार्थ: मछली (सैल्मन, मैकेरल), अलसी के बीज, अखरोट।
- फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ: साबुत अनाज (जई, जौ), फल (सेब, केला), सब्जियाँ (पालक, ब्रोकोली)।
- एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थ: जामुन (ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी), डार्क चॉकलेट, हरी चाय।
- कम वसा वाले डेयरी उत्पाद: दही, दूध (स्किम्ड)।
यकृत सिरोसिस के कारण लिखिए।
Write down the causes of cirrhosis of liver.
- अत्यधिक शराब का सेवन (Chronic Alcoholism): लंबे समय तक शराब पीने से यकृत कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त हो जाती हैं।
- वायरल हेपेटाइटिस (Viral Hepatitis): हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण।
- फैटी लिवर रोग (Fatty Liver Disease): मोटापा और मधुमेह के कारण यकृत में वसा जमा होना।
- ऑटोइम्यून रोग (Autoimmune Disease): प्रतिरक्षा प्रणाली यकृत कोशिकाओं पर हमला करती है।
ज्वर को तीव्रता के आधार पर कितने भागों में विभाजित किया जा सकता है?
Write down the classification of fever according to its intensity.
ज्वर को तीव्रता के आधार पर चार भागों में विभाजित किया जा सकता है:
- निम्न श्रेणी का ज्वर (Low-grade fever): 37.5°C – 38.3°C
- मध्यम श्रेणी का ज्वर (Moderate-grade fever): 38.4°C – 39.4°C
- उच्च श्रेणी का ज्वर (High-grade fever): 39.5°C – 40.9°C
- अति उच्च श्रेणी का ज्वर (Hyperpyrexia): 41°C या उससे अधिक
आई० डी० डी० एम० रोग के लक्षण लिखिए।
Write down the symptoms of I.D.D.M.
I.D.D.M. (Insulin Dependent Diabetes Mellitus) या टाइप 1 मधुमेह के लक्षण:
- अत्यधिक प्यास लगना (Polydipsia)
- बार-बार पेशाब आना (Polyuria)
- अत्यधिक भूख लगना (Polyphagia)
- अचानक वजन कम होना
- थकान और कमजोरी
- धुंधली दृष्टि (Blurred vision)
- घाव का धीरे-धीरे भरना
दीर्घावधि अतिसार रोग के कारण एवं उपचार लिखिए।
Write down the causes and treatment of chronic diarrhoea.
कारण (Causes):
- संक्रमण (बैक्टीरियल, वायरल, परजीवी)
- खाद्य असहिष्णुता (जैसे लैक्टोज असहिष्णुता)
- सूजन आंत्र रोग (जैसे क्रोहन रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस)
- दवाओं के दुष्प्रभाव (जैसे एंटीबायोटिक्स)
- अंतःस्रावी विकार (जैसे थायरॉइड विकार)
उपचार (Treatment):
- आहार परिवर्तन: फाइबर युक्त आहार (केला, चावल, सेब की चटनी), प्रोबायोटिक्स (दही), और पर्याप्त पानी पीना।
- दवाएँ: एंटीडायरियल दवाएँ (जैसे लोपरामाइड), एंटीबायोटिक्स (यदि संक्रमण हो)।
- अंतर्निहित रोग का उपचार: यदि कारण सूजन आंत्र रोग या अन्य विकार है, तो उसका विशिष्ट उपचार।
- इलेक्ट्रोलाइट संतुलन: ओआरएस (ORS) का सेवन।
प्रश्न 11: अल्पभार को परिभाषित करते हुए इसके कारणों का उल्लेख कीजिए।
Define underweight. Explain its causes. (4 अंक)
अल्पभार (Underweight) की परिभाषा: अल्पभार वह स्थिति है जब किसी व्यक्ति का शारीरिक भार उसकी आयु, ऊंचाई और लिंग के अनुसार सामान्य भार से कम होता है। इसे सामान्यतः बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 18.5 से कम होने पर अल्पभार माना जाता है।
अल्पभार के कारण:
- अपर्याप्त पोषण: भोजन में कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन और खनिजों की कमी।
- रोग: क्षय रोग (टीबी), कैंसर, मधुमेह, अतिसार, कृमि संक्रमण आदि।
- मानसिक कारण: तनाव, अवसाद, एनोरेक्सिया नर्वोसा जैसे खाने के विकार।
- आनुवंशिक कारण: परिवार में दुबले-पतले होने की प्रवृत्ति।
- चयापचय संबंधी विकार: थायरॉइड की समस्या (हाइपरथायरॉइडिज्म) जिससे कैलोरी तेजी से जलती है।
- गरीबी और भोजन की कमी: पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक भोजन उपलब्ध न होना।
प्रश्न 12: गुर्दे के रोगों का वर्गीकरण करते हुए उनमें से किसी एक रोग के कारण, लक्षण एवं उपचार लिखिए।
Write down the classification of kidney diseases. Describe causes, symptoms and treatment of any one of them. (5 अंक)
गुर्दे के रोगों का वर्गीकरण (Classification of Kidney Diseases):
- ग्लोमेरुलर रोग: ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस, नेफ्रोटिक सिंड्रोम।
- ट्यूबलर रोग: तीव्र ट्यूबलर नेक्रोसिस, रीनल ट्यूबलर एसिडोसिस।
- अंतरालीय रोग: पायलोनेफ्राइटिस, इंटरस्टीशियल नेफ्राइटिस।
- संवहनी रोग: उच्च रक्तचाप से गुर्दे की क्षति, रीनल आर्टरी स्टेनोसिस।
- सिस्टिक रोग: पॉलीसिस्टिक किडनी रोग।
- गुर्दे की पथरी (किडनी स्टोन): कैल्शियम, यूरिक एसिड आदि के क्रिस्टल।
- गुर्दे का कैंसर: रीनल सेल कार्सिनोमा।
- अंतिम चरण का गुर्दा रोग (ESRD): गुर्दे की कार्यक्षमता का पूर्ण नष्ट होना।
एक रोग का विवरण: ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस (Glomerulonephritis)
कारण: स्ट्रेप्टोकोकस बैक्टीरिया का संक्रमण, ऑटोइम्यून रोग (जैसे ल्यूपस), वायरल संक्रमण (हेपेटाइटिस बी/सी), मलेरिया।
लक्षण: पेशाब में खून आना (हेमेटुरिया), पेशाब में झाग (प्रोटीन्यूरिया), चेहरे और पैरों में सूजन (एडिमा), उच्च रक्तचाप, थकान, पेशाब की मात्रा में कमी।
उपचार: रक्तचाप नियंत्रण के लिए दवाएं (ACE इनहिबिटर), सूजन कम करने के लिए मूत्रवर्धक, स्टेरॉयड या इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं, प्रोटीन और सोडियम प्रतिबंधित आहार, गंभीर मामलों में डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण।
प्रश्न 13: उपचारात्मक आहार का आयोजन करते समय आहार विशेषज्ञ को किन महत्वपूर्ण बिन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिए?
What important points should be kept in mind by the dietitian before planning the therapeutic diet? (5 अंक)
उपचारात्मक आहार (Therapeutic Diet) की योजना बनाते समय आहार विशेषज्ञ को निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिन्दुओं को ध्यान में रखना चाहिए:
- रोगी की चिकित्सीय स्थिति: रोग का प्रकार, गंभीरता और अवस्था (तीव्र या जीर्ण)।
- पोषण संबंधी आवश्यकताएं: कैलोरी, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिजों की आवश्यक मात्रा।
- आहार प्रतिबंध: किन खाद्य पदार्थों से परहेज करना है (जैसे सोडियम, पोटेशियम, वसा)।
- रोगी की आयु और लिंग: बच्चों, वयस्कों और बुजुर्गों की पोषण आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं।
- रोगी की आर्थिक स्थिति और उपलब्धता: स्थानीय और किफायती खाद्य पदार्थों का चयन।
- सांस्कृतिक और धार्मिक प्राथमिकताएं: शाकाहारी/मांसाहारी, उपवास आदि का ध्यान।
- रोगी की पसंद और नापसंद: आहार को स्वीकार्य बनाने के लिए।
- दवाओं के साथ परस्पर क्रिया: कुछ दवाएं पोषक तत्वों के अवशोषण को प्रभावित करती हैं।
- भोजन की बनावट और रूप: नरम, तरल या ठोस आहार की आवश्यकता।
- रोगी की शिक्षा और परामर्श: आहार योजना को समझाना और पालन करने के लिए प्रेरित करना।
प्रश्न 14: निम्न में से किन्हीं तीन पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:
Write short notes on any three of the following: (9 अंक)
i) STANK आहार के प्रकार (Kinds of therapeutic diet)
उपचारात्मक आहार (Therapeutic Diet) के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:
- तरल आहार (Liquid Diet): स्पष्ट तरल (जैसे शोरबा, जूस) या पूर्ण तरल (जैसे दूध, सूप) - सर्जरी या बुखार के बाद।
- नरम आहार (Soft Diet): आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ (जैसे दलिया, उबली सब्जियां) - पाचन विकारों में।
- उच्च प्रोटीन आहार (High Protein Diet): जलन, संक्रमण या कुपोषण में प्रोटीन की अधिक मात्रा।
- कम प्रोटीन आहार (Low Protein Diet): गुर्दे या यकृत रोगों में प्रोटीन प्रतिबंध।
- कम सोडियम आहार (Low Sodium Diet): उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों में नमक कम।
- मधुमेह आहार (Diabetic Diet): कार्बोहाइड्रेट नियंत्रित, फाइबर युक्त।
- कम वसा आहार (Low Fat Diet): पित्ताशय या अग्नाशय रोगों में वसा कम।
- उच्च फाइबर आहार (High Fiber Diet): कब्ज और बवासीर में।
ii) टायफाइड (Typhoid)
टायफाइड: यह साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi) जीवाणु से होने वाला एक संक्रामक रोग है। यह दूषित भोजन और पानी से फैलता है।
लक्षण: तेज बुखार (जो धीरे-धीरे बढ़ता है), सिरदर्द, पेट दर्द, कब्ज या दस्त, कमजोरी, भूख न लगना, और कभी-कभी शरीर पर गुलाबी दाने।
उपचारात्मक आहार: उच्च कैलोरी और उच्च प्रोटीन वाला नरम या तरल आहार दिया जाता है। भोजन छोटे-छोटे हिस्सों में बार-बार देना चाहिए। तरल पदार्थ (पानी, नारियल पानी, सूप) पर्याप्त मात्रा में दें। फाइबर कम होना चाहिए ताकि आंतों पर दबाव न पड़े। दूध, दही, अंडे, मछली, केला, सेब का गूदा आदि लाभदायक हैं। मसालेदार, तला हुआ और रूखा भोजन वर्जित है।
iii) उच्च रक्तचाप से पीड़ित व्यक्ति का उपचार (Treatment of a patient suffering from hypertension)
उच्च रक्तचाप (Hypertension) का उपचार:
- आहार संबंधी उपाय: सोडियम (नमक) का सेवन कम करें (प्रतिदिन 2-3 ग्राम से कम)। पोटेशियम युक्त खाद्य पदार्थ (केला, संतरा, पालक) बढ़ाएं। संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल कम लें। फल, सब्जियां और साबुत अनाज का सेवन बढ़ाएं। शराब और कैफीन से बचें।
- जीवनशैली में बदलाव: नियमित व्यायाम (जैसे तेज चलना, योग), वजन नियंत्रण, धूम्रपान छोड़ना, तनाव प्रबंधन (ध्यान, गहरी सांस)।
- दवाएं: डॉक्टर द्वारा निर्धारित एंटीहाइपरटेंसिव दवाएं (जैसे ACE इनहिबिटर, बीटा-ब्लॉकर्स, कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स) नियमित रूप से लें।
- नियमित निगरानी: रक्तचाप की नियमित जांच करें और डॉक्टर से परामर्श लेते रहें।
iv) यकृत सिरोसिस के लक्षण (Symptoms of cirrhosis of liver)
यकृत सिरोसिस (Cirrhosis of Liver) के लक्षण: यह यकृत की एक गंभीर बीमारी है जिसमें यकृत कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और उनकी जगह रेशेदार ऊतक बन जाते हैं। प्रमुख लक्षण निम्नलिखित हैं:
- प्रारंभिक लक्षण: थकान, कमजोरी, भूख न लगना, वजन कम होना, मतली और उल्टी।
- त्वचा संबंधी लक्षण: त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया/जॉन्डिस), त्वचा पर खुजली, मकड़ी जैसी रक्त वाहिकाएं (स्पाइडर एंजियोमा)।
- पेट संबंधी लक्षण: पेट में सूजन (जलो