RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011 Previous Year Papers

You opened the RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011 Previous Year Papers page — a focused place to read the real previous year question paper for that subject and year. RBSE Solution keeps exam-year sets together so you can practise the same cycle your seniors faced.

Previous year papers reward patience: read instructions, note mark distribution, then attempt questions before peeking at solutions elsewhere on the site. This URL always loads the same free previous year papers content for History-SS-13-1-2011 (2011).

Use the details table to confirm class and year, then scroll to the paper images or PDF below. More subjects from 2011 are linked later on this page.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2011
Subject History-SS-13-1-2011
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2011, and subject History-SS-13-1-2011 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

Turning 2011 papers into insight

One History-SS-13-1-2011 paper reveals style; several from the same year reveal pattern. After this page, open sibling subjects listed below to see whether marks cluster in certain units.

Keep rough work dated in your notebook. Examiners in Class 12th expect clear numbering even in practice sessions.

RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011

Scroll through the Previous Year Papers pages for History-SS-13-1-2011 (2011).

RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-1-2011 Previous Year Papers 7
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th History-SS-13-1-2011 2011 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2011
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2011

वैकल्पिक वर्ग I — कला
OPTIONAL GROUP I — ARTS

इतिहास — प्रथम पत्र
HISTORY — First Paper

समय : 3 घण्टे   |   पूर्णांक : 60

No. of Questions — 24   |   No. of Printed Pages — 7

Roll No. : ____________________

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
  3. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं। प्रश्न क्रमांक 23 एवं 24 में आंतरिक विकल्प हैं।
    All the questions are compulsory. There are internal choices in Question Nos. 23 and 24.
  4. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  5. जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
    For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.

SS—13-1—Hist I    [ Turn over

निर्देश / Instructions

6. प्रश्न क्रमांक 2 से 7 तक अति लघूत्तरात्मक प्रश्न हैं।

Question Nos. 2 to 7 are very short answer type.

7. प्रश्न क्रमांक 8 से 11 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग पाँच पंक्तियों में दीजिए।

Question Nos. 8 to 11 are to be answered in about five lines each.

8. प्रश्न क्रमांक 12 का उत्तर भारत के रेखा मानचित्र में अंकित कीजिए।

Mark the places on the map of India for answer to Question No. 12.

9. प्रश्न क्रमांक 13 से 27 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग आठ पंक्तियों में दीजिए।

Question Nos. 13 to 27 are to be answered in about eight lines each.

10. प्रश्न क्रमांक 22 से 24 तक का प्रत्येक उत्तर लगभग 5 पृष्ठों में दीजिए।

The Question Nos. 22 to 24 are to be answered in about 5 pages each.

11. प्रश्न क्रमांक 4 के चार भाग (i, ii, iii तथा iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (अ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:

There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 4. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below:

प्रश्न क्रमांक (Question No.) सही उत्तर का क्रमाक्षर (Correct letter of the Answer)
(i)
(ii)
(iii)
(iv)

प्रश्न / Question

(i) चाँद बीबी जिस राज्य का शासन करती थी वह है –

  • (अ) अहमदाबाद
  • (ब) आगरा
  • (स) अहमदनगर
  • (द) बीजापुर

सही उत्तर / Correct Answer: (स) अहमदनगर

व्याख्या / Explanation: चाँद बीबी अहमदनगर सल्तनत की शासिका थीं। उन्होंने 1595-1600 के दौरान मुगलों के विरुद्ध अहमदनगर की रक्षा का नेतृत्व किया था।


5&9-7ऊ-+-- Hist. I Ss-520

प्रश्न 1 (i)

चंद बीबी ने किस राज्य पर शासन किया था?

  • (A) अहमदाबाद
  • (B) आगरा
  • (C) अहमदनगर
  • (D) औरंगाबाद

व्याख्या: चंद बीबी अहमदनगर सल्तनत की प्रसिद्ध शासिका थीं। उन्होंने 1596-1600 के दौरान मुगलों के विरुद्ध अहमदनगर की रक्षा का नेतृत्व किया था।

प्रश्न 1 (ii)

“कूका आन्दोलन” का सम्बन्ध किस राज्य से था?

  • (A) राजस्थान
  • (B) पंजाब
  • (C) बंगाल
  • (D) मणिपुर

व्याख्या: कूका आन्दोलन (1872) पंजाब में सिखों द्वारा चलाया गया एक धार्मिक-राजनीतिक आन्दोलन था, जिसका नेतृत्व बाबा राम सिंह ने किया था।

प्रश्न 1 (iii)

अस्थायी गवर्नर जनरल जो प्रेस पर प्रतिबन्ध का विरोधी था, वह है:

  • (A) लॉर्ड लिटन
  • (B) लॉर्ड केनिंग
  • (C) लॉर्ड डलहौजी
  • (D) चार्ल्स मेटकॉफ

व्याख्या: चार्ल्स मेटकॉफ (1835-1836) ने प्रेस पर लगे प्रतिबंधों को हटाया और प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन किया।

प्रश्न 1 (iv)

विधान सभाओं में “विरोधी नीति” अपनाने वाला दल था:

  • (A) स्वराज पार्टी
  • (B) कांग्रेस
  • (C) मुस्लिम लीग
  • (D) फॉरवर्ड ब्लॉक

व्याख्या: स्वराज पार्टी (1923) ने विधान सभाओं में प्रवेश कर सरकार का विरोध करने की नीति अपनाई, जिसे 'वॉक-आउट' या विरोधी नीति कहा गया।

प्रश्न 2

किस विजय के उपलक्ष्य में जहाँगीर ने खुर्रम को 'शाहजहाँ' की उपाधि प्रदान की?

उत्तर: जहाँगीर ने खुर्रम (बाद में शाहजहाँ) को 'शाहजहाँ' की उपाधि मेवाड़ विजय (1615) के उपलक्ष्य में प्रदान की थी। खुर्रम ने राणा अमर सिंह प्रथम को पराजित कर मेवाड़ को मुगल साम्राज्य में मिलाया था।

प्रश्न 3

भारतीय राष्ट्रवाद का जनक और अग्रदूत किसे माना जाता है?

उत्तर: राजा राममोहन राय को भारतीय राष्ट्रवाद का जनक और अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने सामाजिक सुधारों (जैसे सती प्रथा का अंत) और शिक्षा के प्रसार के माध्यम से राष्ट्रीय चेतना जगाई।

प्रश्न पत्र – इतिहास (SS-13-1-2011) – पृष्ठ 4

  1. किस अधिनियम से ईस्ट इण्डिया कम्पनी द्वारा भारत में शिक्षा के प्रचार के लिए एक लाख रु० वार्षिक खर्च करने का प्रावधान किया गया?

    In which Act the provision was made that the East India Company will spend one lakh rupees yearly for the spread of education in India?

    उत्तर: चार्टर अधिनियम, 1813 (Charter Act of 1813) में यह प्रावधान किया गया था कि कम्पनी भारत में शिक्षा के प्रसार के लिए प्रतिवर्ष एक लाख रुपये खर्च करेगी।

  2. बाल गंगाधर तिलक द्वारा मराठी भाषा में कौन-सा अखबार प्रकाशित किया जाता था?

    Which newspaper was published by Bal Gangadhar Tilak in Marathi Language?

    उत्तर: बाल गंगाधर तिलक ने मराठी भाषा में 'केसरी' (Kesari) नामक समाचार पत्र प्रकाशित किया था।

  3. होम रूल आन्दोलन का नेतृत्व किसके द्वारा किया गया था?

    Who was the leader of Home Rule Movement?

    उत्तर: होम रूल आन्दोलन का नेतृत्व बाल गंगाधर तिलक (महाराष्ट्र में) और एनी बेसेंट (अन्य भागों में) द्वारा किया गया था।

  4. भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस में प्रथम विभाजन किस स्थान पर हुआ?

    Where did the first split in the Indian National Congress take place?

    उत्तर: भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस में प्रथम विभाजन सूरत (Surat) अधिवेशन (1907) में हुआ था।

  5. आप मेवाड़ के शासक महाराणा प्रताप के रूप में, अकबर की समझौता वार्ताओं के सन्दर्भ में किस नीति का अनुगमन करते और क्यों?

    Describe the policy which you had followed as Maharana Pratap, the king of Mewar with reference to Akbar’s missions for compromise and why?

    उत्तर: महाराणा प्रताप के रूप में, मैं स्वतंत्रता और प्रतिरोध की नीति का अनुगमन करता। अकबर ने कई बार (जैसे मानसिंह, भगवानदास, टोडरमल आदि के माध्यम से) समझौते के प्रस्ताव भेजे, लेकिन मैं मेवाड़ की स्वतंत्रता और अपनी गरिमा को बनाए रखने के लिए अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं करता। मैं गुरिल्ला युद्ध नीति अपनाकर और जनसमर्थन से संघर्ष जारी रखता, क्योंकि मेवाड़ की परंपरा में स्वतंत्रता सर्वोपरि थी और मुगल साम्राज्य में विलय से क्षेत्रीय अस्मिता खतरे में पड़ जाती।

  6. मुगलकालीन भू-राजस्व निर्धारण प्रणाली को स्पष्ट कीजिए।

    Explain the method of determination of land revenue in Mughal period.

    उत्तर: मुगलकालीन भू-राजस्व निर्धारण प्रणाली मुख्यतः राजा टोडरमल द्वारा विकसित की गई थी। इसके प्रमुख तत्व थे:

    • भूमि का वर्गीकरण: भूमि को उपजाऊपन के आधार पर चार श्रेणियों – पोलज (सदैव खेती योग्य), परौती (कुछ समय परती), चचर (तीन-चार वर्ष परती) और बंजर – में बांटा गया।
    • पैमाइश: भूमि की माप की जाती थी और उपज का औसत निकाला जाता था।
    • राजस्व दर: उपज का लगभग एक-तिहाई (1/3) भाग राजस्व के रूप में लिया जाता था, जो नकद या अनाज के रूप में हो सकता था।
    • दहसाला प्रणाली: अकबर के शासनकाल में दस वर्षों (1556-1565) के औसत उत्पादन के आधार पर नकद राजस्व निर्धारित किया गया, जिसे 'दहसाला' कहा गया।

    यह प्रणाली किसानों और राज्य दोनों के लिए न्यायसंगत थी और मुगल साम्राज्य की आर्थिक मजबूती का आधार बनी।

  7. “अकबर ने धार्मिक उदारता एवं सहिष्णुता की नीति का अनुसरण किया।” इस कथन की पुष्टि में उदाहरण दीजिए।

    “Akbar adopted the policy of religious liberality and tolerance.” Give examples in favour of this statement.

    उत्तर: अकबर की धार्मिक उदारता और सहिष्णुता के निम्नलिखित उदाहरण हैं:

    • जजिया कर समाप्त: 1564 में अकबर ने गैर-मुस्लिमों पर लगने वाला जजिया कर हटा दिया, जो धार्मिक सहिष्णुता का बड़ा कदम था।
    • तीर्थयात्रा कर समाप्त: हिंदुओं के तीर्थयात्रा कर को भी समाप्त किया गया।
    • इबादतखाना: 1575 में फतेहपुर सीकरी में इबादतखाना (प्रार्थना गृह) बनवाया, जहाँ विभिन्न धर्मों (हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, जैन, पारसी) के विद्वानों के बीच धार्मिक चर्चा होती थी।
    • दीन-ए-इलाही: 1582 में अकबर ने 'दीन-ए-इलाही' नामक एक नया धर्म चलाया, जो विभिन्न धर्मों के अच्छे तत्वों का सम्मिश्रण था, हालाँकि इसका प्रभाव सीमित रहा।
    • हिंदुओं को उच्च पद: अकबर ने हिंदुओं को राज्य के उच्च पदों पर नियुक्त किया, जैसे राजा मानसिंह, राजा टोडरमल, बीरबल आदि।
    • सुलह-ए-कुल: अकबर ने 'सर्वधर्म समभाव' (सुलह-ए-कुल) की नीति अपनाई, जिससे सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार मिले।

    इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि अकबर ने धार्मिक उदारता और सहिष्णुता की नीति का पालन किया।


Hist. I Ss-520

प्रश्न 11

बंग भंग विरोधी आन्दोलन के प्रमुख परिणाम लिखिए।

Write the main consequences of the movement against the partition of Bengal.

बंग भंग विरोधी आन्दोलन के प्रमुख परिणाम:

  • इस आन्दोलन ने भारतीय राष्ट्रीयता की भावना को प्रबल किया और जनता को राजनीतिक रूप से जागरूक किया।
  • स्वदेशी आन्दोलन को बढ़ावा मिला, जिससे विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार हुआ और देशी उद्योगों को प्रोत्साहन मिला।
  • राष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति हुई और कई राष्ट्रीय विद्यालयों की स्थापना हुई।
  • हिन्दू-मुस्लिम एकता को बल मिला, हालांकि बाद में यह एकता कमजोर पड़ी।
  • ब्रिटिश सरकार को 1911 में बंगाल का विभाजन रद्द करना पड़ा, जो आन्दोलन की सबसे बड़ी सफलता थी।
  • आन्दोलन ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अधिक जनाधार प्रदान किया और उसे एक जन आन्दोलन में बदल दिया।

प्रश्न 12

दिए गए भारत के रेखा मानचित्र में निम्नलिखित स्थानों को अंकित कीजिए:

(अ) अमृतसर (ब) कॉकोरी (स) मद्रास (द) जूनागढ़।

Mark the following places on the given outline map of India:

(A) Amritsar (B) Kakori (C) Madras (D) Junagarh.

मानचित्र में स्थानों की स्थिति:

  • अमृतसर (Amritsar): पंजाब राज्य में, भारत के उत्तर-पश्चिमी भाग में स्थित है।
  • कॉकोरी (Kakori): उत्तर प्रदेश में, लखनऊ के निकट स्थित है।
  • मद्रास (Madras): तमिलनाडु राज्य में, भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित है (वर्तमान चेन्नई)।
  • जूनागढ़ (Junagarh): गुजरात राज्य में, भारत के पश्चिमी भाग में स्थित है।

नोट: छात्रों को दिए गए रेखा मानचित्र पर इन स्थानों को सही ढंग से अंकित करना आवश्यक है।

प्रश्न 13

665 ई. की पुरन्दर की संधि के कारण एवं प्रमुख शर्तों का वर्णन कीजिए।

Describe the cause and main conditions of the treaty of Purandar of 665 A.D.

पुरन्दर की संधि (665 ई.) के कारण:

  • यह संधि चालुक्य वंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय और पल्लव वंश के शासक नरसिंहवर्मन प्रथम के बीच हुई थी।
  • पुलकेशिन द्वितीय ने पल्लव क्षेत्रों पर आक्रमण किया था, जिससे दोनों राज्यों के बीच संघर्ष बढ़ गया।
  • नरसिंहवर्मन प्रथम ने चालुक्यों को हराकर उनकी राजधानी वातापी पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद यह संधि हुई।

प्रमुख शर्तें:

  • चालुक्यों को पल्लवों की अधीनता स्वीकार करनी पड़ी।
  • पुलकेशिन द्वितीय को अपने खोए हुए क्षेत्र वापस मिल गए, लेकिन उन्हें पल्लवों की सर्वोच्चता माननी पड़ी।
  • दोनों राज्यों के बीच शांति स्थापित हुई और सीमाओं का निर्धारण किया गया।
  • चालुक्यों को पल्लवों को वार्षिक कर देना स्वीकार करना पड़ा।

प्रश्न 14

ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने दूरदृष्टि व कुटनीतिज्ञता के द्वारा भारत में अंग्रेजी शासन को स्थापित व सुदृढ़ किया। परीक्षण कीजिए।

The East India Company established British rule in India and strengthened it by far sightedness and diplomacy. Examine.

परीक्षण: ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने अपनी दूरदृष्टि और कुटनीति के माध्यम से भारत में अंग्रेजी शासन को स्थापित और सुदृढ़ किया। इसके प्रमुख पहलू निम्नलिखित हैं:

  • विभाजन और शासन की नीति: कम्पनी ने भारतीय राज्यों के बीच मतभेदों का लाभ उठाकर 'फूट डालो और राज करो' की नीति अपनाई।
  • सहायक संधि प्रणाली: लॉर्ड वेलेजली ने सहायक संधि प्रणाली लागू की, जिससे भारतीय राज्य कम्पनी के अधीन हो गए और उनकी सेनाएं कम्पनी के नियंत्रण में आ गईं।
  • व्यपगत सिद्धांत: लॉर्ड डलहौजी ने व्यपगत सिद्धांत लागू किया, जिससे बिना उत्तराधिकारी वाले राज्य कम्पनी के अधिकार में आ गए।
  • सैन्य शक्ति: कम्पनी ने प्लासी (1757) और बक्सर (1764) जैसे युद्धों में जीत हासिल कर अपनी सैन्य श्रेष्ठता स्थापित की।
  • प्रशासनिक सुधार: कम्पनी ने कानून, न्याय और राजस्व प्रणाली में सुधार किए, जिससे शासन को मजबूती मिली।
  • कूटनीतिक चालें: कम्पनी ने भारतीय शासकों के आपसी झगड़ों में हस्तक्षेप करके अपने प्रभाव का विस्तार किया।

इस प्रकार, कम्पनी की दूरदृष्टि और कुटनीति ने भारत में अंग्रेजी शासन की नींव मजबूत की, हालांकि इसके लिए भारतीय जनता को भारी कीमत चुकानी पड़ी।

प्रश्न 15

यदि आप टीपू सुल्तान होते तो मैसूर राज्य को बचाने के लिए क्या कदम उठाते? स्पष्ट कीजिए।

Had you been Tipu Sultan what steps would you have taken to safeguard the state of Mysore? Explain.

यदि मैं टीपू सुल्तान होता, तो मैसूर राज्य को बचाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाता:

  • मजबूत गठबंधन बनाना: मैं फ्रांसीसियों के साथ मजबूत गठबंधन करता और अन्य भारतीय राज्यों (जैसे मराठा, हैदराबाद) के साथ एक संयुक्त मोर्चा बनाने का प्रयास करता, ताकि अंग्रेजों का सामना किया जा सके।
  • सैन्य सुधार: मैं अपनी सेना को आधुनिक बनाता, विशेषकर तोपखाने और नौसेना को मजबूत करता, और यूरोपीय प्रशिक्षकों की मदद से सैनिकों को प्रशिक्षित करता।
  • आर्थिक आत्मनिर्भरता: मैं व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देता, विशेषकर रेशम, कपास और हथियार उद्योग को, ताकि राज्य आर्थिक रूप से मजबूत हो और युद्ध के लिए संसाधन जुटा सके।
  • कूटनीतिक चालें: मैं अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय शासकों के बीच एकता बनाने का प्रयास करता और उनके आपसी मतभेदों को दूर करता।
  • गुरिल्ला युद्ध: मैं अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनाता, जिससे उनकी आपूर्ति लाइनों को नुकसान पहुंचाया जा सके।
  • जनता का समर्थन: मैं जनता का विश्वास जीतने के लिए करों में कमी और सामाजिक सुधार करता, ताकि वे राज्य की रक्षा में सहयोग करें।

इन कदमों से मैसूर राज्य को अंग्रेजों के खिलाफ अधिक प्रभावी ढंग से लड़ने और अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने में मदद मिल सकती थी।

प्रश्न 16

विवेकानन्द के उन सिद्धान्तों व सुधारों का उल्लेख कीजिए जो सभी भारतीयों के लिए सदैव प्रासंगिक रहेंगे।

Mention those principles and reforms of Vivekananda which would be relevant forever to all Indians.

विवेकानन्द के सिद्धान्त और सुधार जो सभी भारतीयों के लिए सदैव प्रासंगिक रहेंगे:

  • आध्यात्मिक एकता: विवेकानन्द ने सभी धर्मों की एकता पर बल दिया और कहा कि सभी धर्म सत्य के विभिन्न मार्ग हैं। यह सिद्धांत आज भी सांप्रदायिक सद्भाव के लिए महत्वपूर्ण है।
  • सेवा का महत्व: उन्होंने 'दरिद्र नारायण' की सेवा पर जोर दिया, यानी गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा करना। यह सामाजिक न्याय और मानवता के लिए आज भी प्रासंगिक है।
  • शिक्षा का प्रसार: विवेकानन्द ने शिक्षा को सशक्तिकरण का माध्यम माना और महिलाओं व पिछड़े वर्गों की शिक्षा पर बल दिया। यह आज भी सामाजिक समानता के लिए आवश्यक है।
  • आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता: उन्होंने भारतीयों को अपनी संस्कृति और क्षमताओं पर विश्वास करने की प्रेरणा दी, जो आज भी राष्ट्रीय गौरव और आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण है।
  • धर्मनिरपेक्षता: विवेकानन्द ने धर्म और राजनीति को अलग रखने की वकालत की, जो आज के लोकतांत्रिक समाज में प्रासंगिक है।
  • युवा शक्ति: उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया और उनमें ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर दिया।

ये सिद्धान्त और सुधार आज भी भारतीय समाज को मार्गदर्शन प्रदान करते हैं और सभी भारतीयों के लिए सदैव प्रासंगिक रहेंगे।

प्रश्न 21

ब्रिटिशकालीन शिक्षा पद्धति के उन दोषों का उल्लेख कीजिए जो वर्तमान शिक्षा पद्धति में भी दिखाई देते हैं। उनके सुधार के उपाय बताइए।

Mention those defects of education system in British India which afflict today’s education system also. Suggest ways to reform them.

उत्तर: ब्रिटिशकालीन शिक्षा पद्धति के निम्नलिखित दोष आज भी विद्यमान हैं:

  • रटने की प्रवृत्ति: परीक्षा केंद्रित शिक्षा के कारण छात्र केवल रटने पर जोर देते हैं, समझने पर नहीं।
  • व्यावहारिक ज्ञान का अभाव: शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना रह गया है, कौशल विकास पर ध्यान नहीं दिया जाता।
  • भाषा की समस्या: अंग्रेजी माध्यम पर अत्यधिक जोर, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र पिछड़ जाते हैं।
  • सृजनात्मकता का अभाव: पाठ्यक्रम में नवाचार और आलोचनात्मक सोच को प्रोत्साहन नहीं मिलता।

सुधार के उपाय:

  • शिक्षा को रोजगारोन्मुखी और कौशल आधारित बनाया जाए।
  • स्थानीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए।
  • परीक्षा प्रणाली में सुधार कर समझ और प्रयोग पर जोर दिया जाए।
  • शिक्षा में तकनीकी और व्यावसायिक प्रशिक्षण को शामिल किया जाए।

प्रश्न 22

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अंग्रेजी सरकार का राष्ट्रीय स्तर पर राजनैतिक रूप से विरोध करनेवाला भारतीयों का प्रथम संगठन नहीं था। व्याख्या कीजिए।

The Indian National Congress was not the first organisation of Indians which politically opposed the British Government at the national level. Explain.

उत्तर: यह कथन सत्य है कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1885) से पहले भी कई संगठन थे जिन्होंने अंग्रेजी सरकार का राजनीतिक रूप से विरोध किया। इनमें प्रमुख हैं:

  • ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन (1851): दादाभाई नौरोजी और रंगनाथ राव द्वारा स्थापित, इसने आर्थिक शोषण का विरोध किया।
  • इंडियन लीग (1875): शिशिर कुमार घोष द्वारा स्थापित, इसने राजनीतिक जागरूकता फैलाई।
  • इंडियन एसोसिएशन (1876): सुरेंद्रनाथ बनर्जी द्वारा स्थापित, इसने सिविल सेवा परीक्षा की आयु सीमा के विरोध में आंदोलन किया।
  • बॉम्बे प्रेसीडेंसी एसोसिएशन (1885): फिरोजशाह मेहता और बदरुद्दीन तैयबजी द्वारा स्थापित।

ये सभी संगठन कांग्रेस से पहले राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक विरोध कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस ने इन सभी को एक मंच पर लाकर व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप दिया।


प्रश्न 23

आप अपने गाँव में सविनय अवज्ञा आन्दोलन के सन्दर्भ में क्या कार्यक्रम करते? वर्णन कीजिए।

What programmes would you have organised in your village under the Civil Disobedience Movement? Discuss them.

उत्तर: सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) के तहत गाँव में निम्नलिखित कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते थे:

  • नमक कानून तोड़ना: गाँव के समुद्र तट या नमक के मैदान पर नमक बनाकर सरकारी कानून का उल्लंघन किया जाता।
  • विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार: गाँव में सार्वजनिक स्थान पर विदेशी कपड़ों की होली जलाई जाती और खादी को बढ़ावा दिया जाता।
  • शराब की दुकानों पर धरना: गाँव की शराब की दुकानों के सामने शांतिपूर्ण धरना देकर लोगों को शराब न पीने के लिए प्रेरित किया जाता।
  • कर न चुकाने का आंदोलन: किसानों को लगान और अन्य कर न चुकाने के लिए प्रेरित किया जाता।
  • जागरूकता रैलियाँ: गाँव-गाँव जाकर लोगों को आंदोलन के उद्देश्यों के बारे में बताया जाता और स्वतंत्रता का महत्व समझाया जाता।

प्रश्न 24

रास बिहारी बोस अत्यन्त बुद्धिमान एवं प्रखर देशभक्त थे। तथ्य द्वारा सिद्ध कीजिए।

Rash Behari Bose was a very intelligent and a great patriot. Give facts to prove it.

उत्तर: रास बिहारी बोस की बुद्धिमत्ता और देशभक्ति को निम्नलिखित तथ्यों से सिद्ध किया जा सकता है:

  • दिल्ली षड्यंत्र (1912): उन्होंने वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर बम हमले की योजना बनाई, जिसमें वे बच गए लेकिन यह घटना ब्रिटिश सत्ता के लिए बड़ा झटका थी।
  • गदर पार्टी से जुड़ाव: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने गदर पार्टी के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना में विद्रोह की योजना बनाई।
  • जापान में सक्रियता: ब्रिटिश पुलिस से बचने के लिए वे जापान गए और वहाँ भारतीय स्वतंत्रता के लिए काम किया। उन्होंने जापानी सरकार का समर्थन प्राप्त किया।
  • आजाद हिंद फौज की नींव: उन्होंने सिंगापुर में भारतीय राष्ट्रीय सेना (आजाद हिंद फौज) की स्थापना की, जिसे बाद में नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आगे बढ़ाया।
  • बुद्धिमत्ता: वे कई भाषाओं के ज्ञाता थे और उन्होंने जापान में रहते हुए भी भारतीय स्वतंत्रता के लिए कूटनीतिक प्रयास किए।

प्रश्न 25

भगत सिंह की भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में भूमिका पर प्रकाश डालिए।

Throw light on the role of Bhagat Singh in the Independence Movement of India.

उत्तर: भगत सिंह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक महान क्रांतिकारी थे। उनकी भूमिका निम्नलिखित है:

  • लाला लाजपत राय की मृत्यु का बदला: 1928 में लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज में मृत्यु के बाद, भगत सिंह और उनके साथियों ने सहायक पुलिस अधीक्षक जे.पी. सांडर्स की हत्या कर बदला लिया।
  • असेंबली बम कांड (1929): 8 अप्रैल 1929 को उन्होंने बटुकेश्वर दत्त के साथ केंद्रीय विधान सभा में बम फेंका, जिससे कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन यह ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विरोध का प्रतीक था।
  • आदर्श और विचारधारा: वे समाजवाद और साम्यवाद से प्रभावित थे। उन्होंने 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा दिया और युवाओं को क्रांति के लिए प्रेरित किया।
  • बलिदान: 23 मार्च 1931 को उन्हें फांसी दी गई, लेकिन उनका बलिदान पूरे देश में स्वतंत्रता की लौ जलाने का कारण बना।
  • लेखन और विचार: जेल में रहते हुए उन्होंने 'मैं नास्तिक क्यों हूँ' जैसे लेख लिखे, जो उनकी बौद्धिक गहराई को दर्शाते हैं।

प्रश्न 26

“भारतीयों के मन में उत्पन्न असन्तोष के बारूद में एनफिल्ड राइफल ने आग लगा दी।” प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के सन्दर्भ में इस कथन का परीक्षण कीजिए।

“An Enfield rifle ignited the gunpowder of discontent in the hearts of the Indians.” Examine this statement with reference to the first war of Independence in India.

उत्तर: यह कथन 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में सत्य है। एनफील्ड राइफल ने उस असंतोष को भड़काने का काम किया जो पहले से ही भारतीयों के मन में मौजूद था।

असंतोष के कारण:

  • राजनीतिक कारण: डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स) और अवध का विलय।
  • आर्थिक कारण: भारी कर, भू-राजस्व प्रणाली और ब्रिटिश नीतियों से किसानों और कारीगरों का शोषण।
  • सामाजिक-धार्मिक कारण: ईसाई मिशनरियों की गतिविधियाँ, सती प्रथा पर प्रतिबंध, विधवा पुनर्विवाह कानून जैसे सुधार जिन्हें भारतीय अपनी परंपराओं पर हमला मानते थे।
  • सैन्य कारण: भारतीय सिपाहियों के साथ भेदभाव, कम वेतन, और विदेश जाने पर आपत्ति।

एनफील्ड राइफल की भूमिका:

  • नई एनफील्ड राइफल में कारतूस को मुँह से खोलना पड़ता था, जिसमें गाय और सुअर की चर्बी का प्रयोग होने की अफवाह फैल गई।
  • इससे हिंदू और मुस्लिम दोनों सिपाहियों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं।
  • मेरठ में 85 सिपाहियों ने कारतूस का प्रयोग करने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कड़ी सजा दी गई।
  • इस घटना ने 10 मई 1857 को मेरठ में विद्रोह की चिंगारी को भड़का दिया, जो जल्द ही पूरे उत्तर भारत में फैल गया।

इस प्रकार, एनफील्ड राइफल ने उस असंतोष के बारूद में आग लगा दी जो पहले से ही भारतीयों के मन में मौजूद था, और यह 1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण बना।

23. कन्धार के सम्बन्ध में मुगल शासकों की नीति का उल्लेख कीजिए।

अथवा

मुगल शासकों की दक्षिण भारत में साम्राज्य विस्तार की नीति का उल्लेख कीजिए।

Describe the Kandahar Policy of the Mughal rulers. (6×1=6)

OR

Describe the policy of expansion of the Mughal rulers in the Deccan. (4×1.5=6)

उत्तर (कन्धार नीति): मुगल शासकों की कन्धार नीति मुख्यतः रणनीतिक और व्यापारिक थी। कन्धार उत्तर-पश्चिमी सीमा पर एक महत्वपूर्ण किला था, जो मध्य एशिया और भारत के बीच व्यापार मार्ग पर स्थित था। अकबर ने 1595 ई. में कन्धार पर कब्जा किया और इसे साम्राज्य का हिस्सा बनाया। शाहजहाँ के शासनकाल में फारस (सफवी वंश) ने 1649 ई. में कन्धार पर पुनः कब्जा कर लिया। मुगलों ने इसे वापस पाने के लिए कई प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हो सके। मुगल नीति का उद्देश्य कन्धार को एक सैन्य चौकी और व्यापारिक केंद्र के रूप में बनाए रखना था, ताकि मध्य एशिया से आक्रमणों को रोका जा सके और व्यापार को नियंत्रित किया जा सके।

अथवा (दक्षिण भारत में साम्राज्य विस्तार नीति): मुगल शासकों की दक्षिण भारत में साम्राज्य विस्तार की नीति धीरे-धीरे विकसित हुई। अकबर ने खानदेश और अहमदनगर के कुछ भागों पर कब्जा किया। जहाँगीर और शाहजहाँ ने अहमदनगर, बीजापुर और गोलकुंडा के विरुद्ध अभियान जारी रखे। औरंगजेब ने दक्षिण नीति को सबसे अधिक आक्रामक रूप दिया। उसने 1686-87 ई. में बीजापुर और गोलकुंडा को मुगल साम्राज्य में मिला लिया। उसकी नीति का उद्देश्य दक्षिण के सभी स्वतंत्र राज्यों को समाप्त करना और पूरे भारत पर मुगल आधिपत्य स्थापित करना था। हालाँकि, इस नीति ने मुगल साम्राज्य को अत्यधिक विस्तृत कर दिया, जिससे प्रशासनिक और सैन्य कठिनाइयाँ बढ़ गईं और अंततः साम्राज्य के पतन में योगदान दिया।


24. “विश्व की अनूठी फौज एवं उसका सेनापति यद्यपि निर्णायक युद्ध नहीं जीत पाए, परन्तु भारतीयों का दिल जीतकर देशभक्ति और राष्ट्रीयता की जो भावना उनमें पैदा की, वह चिरस्मरणीय रहेगी।” स्पष्ट कीजिए।

अथवा

निम्नलिखित पर विस्तृत टिप्पणी कीजिए :

(अ) भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 ई.
(ब) नौसेना विद्रोह
(स) प्रत्यक्ष कार्यवाही।

"Although the unique army of the world and its commander could not succeed in its mission, but they won the heart of Indians and the kind of nationalistic sentiment and patriotic fervour it aroused among the countrymen is unforgettable." Explain. (6×1=6)

OR

Write detailed notes on the following :

(A) Indian Independence Act, 1947 A.D.
(B) Naval Mutiny
(C) Direct Action. (3+2+1=6)

उत्तर (कथन की व्याख्या): यह कथन आज़ाद हिन्द फौज (Indian National Army - INA) और उसके सेनापति नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को संदर्भित करता है। INA का गठन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन से भारत को मुक्त कराने के लिए किया गया था। यह फौज मुख्यतः युद्धबंदियों और दक्षिण-पूर्व एशिया में रहने वाले भारतीयों से बनी थी। यद्यपि INA कोई बड़ा सैन्य अभियान जीत नहीं पाई और 1945 में उसे आत्मसमर्पण करना पड़ा, लेकिन इसने भारतीयों के मन में देशभक्ति और राष्ट्रीयता की भावना को प्रबल किया। INA के सैनिकों पर 1945-46 में दिल्ली के लाल किले में चलाए गए मुकदमों ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया। इससे ब्रिटिश विरोधी भावना और तीव्र हुई और स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा मिली। INA के बलिदान और नेताजी के नेतृत्व ने भारतीयों को एकजुट किया और यह भावना चिरस्मरणीय बनी रही।

अथवा (विस्तृत टिप्पणियाँ):

(अ) भारतीय स्वतन्त्रता अधिनियम, 1947 ई.: यह ब्रिटिश संसद द्वारा पारित एक अधिनियम था जिसने भारत को स्वतंत्रता प्रदान की। इसके प्रमुख प्रावधान थे: (1) भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र प्रभुत्वों की स्थापना। (2) ब्रिटिश सरकार का भारत में शासन समाप्त होना। (3) गवर्नर-जनरल का पद समाप्त होना और प्रत्येक प्रभुत्व के लिए एक गवर्नर-जनरल की नियुक्ति। (4) संविधान सभा को दोनों देशों के लिए संविधान बनाने का अधिकार। (5) रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने या स्वतंत्र रहने का विकल्प। यह अधिनियम 15 अगस्त 1947 से लागू हुआ।

(ब) नौसेना विद्रोह: फरवरी 1946 में बम्बई (अब मुम्बई) में रॉयल इंडियन नेवी के नाविकों द्वारा किया गया विद्रोह। इसके कारण थे: खराब भोजन, नस्लीय भेदभाव, और INA के सैनिकों के प्रति सहानुभूति। नाविकों ने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह किया और 'जय हिन्द' का नारा लगाया। यह विद्रोह तीन दिन चला और पूरे देश में फैल गया। हालाँकि, कांग्रेस और मुस्लिम लीग के नेताओं ने इसे शांत करने का आग्रह किया, और अंततः नाविकों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इस विद्रोह ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी और स्वतंत्रता की प्रक्रिया को तेज कर दिया।

(स) प्रत्यक्ष कार्यवाही: 16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान की मांग के समर्थन में आयोजित एक दिवसीय हड़ताल और प्रदर्शन। मुहम्मद अली जिन्ना ने इसे 'प्रत्यक्ष कार्यवाही दिवस' घोषित किया। इस दिन कोलकाता में हिंदू-मुस्लिम दंगे भड़क उठे, जिसमें हजारों लोग मारे गए। यह घटना भारत के विभाजन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई, क्योंकि इसने सांप्रदायिक तनाव को चरम पर पहुंचा दिया और अंततः विभाजन का मार्ग प्रशस्त किया।

Page content could not be transcribed.