RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-2-2011 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2011 |
| Subject | History-SS-13-2-2011 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2011 History-SS-13-2-2011
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Rajasthan Board Class 12th History-SS-13-2-2011 2011 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2011
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2011
वैकल्पिक वर्ग I — कला (OPTIONAL GROUP I — ARTS)
इतिहास — द्वितीय पत्र (HISTORY — Second Paper)
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - इस पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity. - प्रश्न क्रमांक 23 व 24 में आंतरिक विकल्प हैं।
Roll No. _______________
No. of Questions — 24 | SS—13—2—Hist. II
No. of Printed Pages — 7
SS—522—II [ Turn over ]
निर्देश (Instructions)
प्रश्न क्रमांक 23 और 24 में आंतरिक विकल्प हैं।
प्रश्न प्रकार एवं शब्द सीमा
-
प्रश्न क्रमांक 2 से 5 तक अति लघूत्तरात्मक प्रश्न हैं।
Question Nos. 2 to 5 are very short answer type. -
प्रश्न क्रमांक 6 से 14 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग पाँच पंक्तियों में दीजिए।
Question Nos. 6 to 14 are to be answered in about five lines each. -
प्रश्न क्रमांक 15 से 20 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग आठ पंक्तियों में दीजिए।
Question Nos. 15 to 20 are to be answered in about eight lines each. -
प्रश्न क्रमांक 21 का उत्तर राजस्थान के रेखा मानचित्र में अंकित कीजिए।
Question No. 21 is to be marked in the outline map of Rajasthan. -
प्रश्न क्रमांक 22 से 24 तक प्रत्येक प्रश्न का उत्तर लगभग 5 पृष्ठों में दीजिए।
Question Nos. 22 to 24 are to be answered in about 5 pages each.
बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) निर्देश
प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii तथा iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (अ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें:
There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 1. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below:
| प्रश्न क्रमांक (Question No.) | सही उत्तर का क्रमाक्षर (Correct letter of the Answer) |
|---|---|
| 1. (i) | |
| 1. (ii) | |
| 1. (iii) | |
| 1. (iv) |
उदाहरण प्रश्न
1. (i) 'अन्नल्स एण्ड एंटीक्विटीज़ ऑफ़ राजस्थान' ग्रन्थ के रचयिता हैं:
- (अ) सर थॉमस रो
- (ब) कर्नल जेम्स टॉड
- (स) गौरीशंकर हीराचन्द ओझा
- (द) सूर्यमल्ल मिश्रण
55-73-2- Hist. II [88-522-ा]
प्रश्न 1 (बहुविकल्पीय प्रश्न)
1. 'Travels in Western India' के लेखक हैं
- (A) सर थॉमस रो (Sir Thomas Roe)
- (B) कर्नल जेम्स टॉड (Col. James Todd)
- (C) गौरीशंकर हीराचंद ओझा (Gaurishankar Hirachand Ojha) ✓ सही उत्तर
- (D) सूर्यमल्ल मिश्रण (Suryamalla Mishran)
व्याख्या: 'Travels in Western India' पुस्तक गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा लिखित है, जो राजस्थान के इतिहास और संस्कृति पर एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
2. तुर्कों की आरम्भिक राजनीतिक गतिविधियों का केन्द्र था
- (अ) जालौर (Jalore)
- (ब) नागौर (Nagaur) ✓ सही उत्तर
- (स) उदयपुर (Udaipur)
- (द) जयपुर (Jaipur)
व्याख्या: तुर्कों की प्रारंभिक राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र नागौर था, जहाँ से उन्होंने राजस्थान में अपना प्रभाव बढ़ाया।
3. कुम्भलगढ़ दुर्ग को मूर्तिकला में जिस देवता के 24 रूपों की प्रतिमायें हैं, वह देवता हैं
- (अ) विष्णु (Vishnu)
- (ब) शिव (Shiva) ✓ सही उत्तर
- (स) इन्द्र (Indra)
- (द) ब्रह्मा (Brahma)
व्याख्या: कुम्भलगढ़ दुर्ग में शिव के 24 रूपों की मूर्तियाँ पाई गई हैं, जो इस किले की कलात्मक और धार्मिक महत्ता को दर्शाती हैं।
4. मीराबाई पुत्री थी
- (अ) राठौड़ रतन सिंह की (Rathore Ratan Singh)
- (ब) राणा सांगा की (Rana Sanga)
- (स) राव दुदा की (Rao Duda) ✓ सही उत्तर
- (द) राणा विक्रमादित्य की (Rana Vikramaditya)
व्याख्या: मीराबाई राव दुदा की पुत्री थीं, जो मेड़ता के शासक थे। वे भक्ति आंदोलन की प्रमुख संत-कवयित्री थीं।
प्रश्न 2 (लघु उत्तरीय प्रश्न)
महाराणा कुम्भा की 'हालगुरु' की उपाधि से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर: महाराणा कुम्भा को 'हालगुरु' की उपाधि उनकी विद्वता और कला प्रेम के कारण प्रदान की गई थी। 'हालगुरु' का अर्थ है 'हल के गुरु' या 'कृषि के आचार्य'। यह उपाधि इस बात का प्रतीक है कि महाराणा कुम्भा न केवल एक महान योद्धा और शासक थे, बल्कि वे कृषि, साहित्य और संगीत के भी गहरे ज्ञाता थे। उन्होंने राज्य में कृषि सुधारों को बढ़ावा दिया और कला-संस्कृति को संरक्षित किया। इस उपाधि से उनकी बहुमुखी प्रतिभा और जनकल्याणकारी दृष्टिकोण का पता चलता है।
खण्ड – द (Section – D)
प्रश्न 1.
आरम्भिक काल में स्त्रियों की स्थिति में सुधार करने का प्रयास करने वाले किन्हीं दो समाज-सुधारकों के नाम बताइये।
Name any two social reformers of the early period, who tried to improve the condition of women.
उत्तर: आरम्भिक काल में स्त्रियों की स्थिति में सुधार के लिए प्रयास करने वाले दो प्रमुख समाज-सुधारक थे:
- राजा राममोहन राय – इन्होंने सती प्रथा के उन्मूलन और विधवा पुनर्विवाह के लिए आवाज उठाई।
- ईश्वरचंद्र विद्यासागर – इन्होंने विधवा पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 2.
लोक देवता गोगांजी की पूजा किस उपचार के लिए की जाती है ?
For the treatment of what is the folk deity Goganji invoked ?
उत्तर: लोक देवता गोगांजी की पूजा मुख्यतः सर्पदंश (साँप के काटने) के उपचार के लिए की जाती है। इन्हें 'गोगा नवमी' के अवसर पर विशेष रूप से पूजा जाता है और ये सर्पों के देवता माने जाते हैं।
प्रश्न 3.
ऐसे दुर्ग, जिनके मार्ग खाई, पत्थरों तथा रक्षात्मक दीवारों से दुर्गम बने हों, क्या कहलाते हैं ?
What are called the forts made unapproachable by trenches, rocks and defensive walls ?
उत्तर: ऐसे दुर्ग "गिरि दुर्ग" (Hill Forts) कहलाते हैं। ये प्राकृतिक या कृत्रिम बाधाओं जैसे खाई, पत्थरों और रक्षात्मक दीवारों से सुरक्षित होते हैं, जिन्हें भेदना अत्यंत कठिन होता है।
प्रश्न 4.
मुहणोत नैणसी द्वारा रचित ग्रन्थों के नाम बताइये। मारवाड़ राज्य के प्रति उनकी सेवाओं का मूल्यांकन कीजिए।
Name the literary works of Muhanot Nensi. Evaluate his services to the State of Marwar.
उत्तर:
मुहणोत नैणसी द्वारा रचित ग्रन्थ:
- मारवाड़ रा परगना री विगत – यह मारवाड़ के विभिन्न परगनों का ऐतिहासिक और भौगोलिक विवरण है।
- नैणसी री ख्यात – यह राजस्थानी भाषा में लिखा गया एक प्रमुख ऐतिहासिक ग्रन्थ है, जिसमें मारवाड़ के इतिहास का वर्णन है।
- विगत – यह भी एक ऐतिहासिक ग्रन्थ है।
मारवाड़ राज्य के प्रति सेवाओं का मूल्यांकन:
- नैणसी मारवाड़ के महाराजा जसवंत सिंह के प्रधानमंत्री थे।
- उन्होंने मारवाड़ के प्रशासनिक और राजस्व प्रबंधन को सुव्यवस्थित किया।
- उनकी रचनाएँ मारवाड़ के इतिहास, भूगोल और संस्कृति के अमूल्य स्रोत हैं, जो आज भी इतिहासकारों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- उन्होंने राज्य की सीमाओं की सुरक्षा और आंतरिक शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 5.
महाराणा कुम्भा के शासन की जानकारी देने वाले कोई तीन ऐतिहासिक स्रोतों के नाम लिखिये।
Write the names of any three historical sources of the reign of Maharana Kumbha.
उत्तर: महाराणा कुम्भा के शासन की जानकारी देने वाले तीन प्रमुख ऐतिहासिक स्रोत हैं:
- कुम्भलगढ़ प्रशस्ति – यह एक शिलालेख है जो कुम्भा के शासनकाल की उपलब्धियों का वर्णन करता है।
- राजप्रशस्ति – यह एक संस्कृत ग्रन्थ है जिसमें मेवाड़ के शासकों का इतिहास मिलता है।
- कीर्ति स्तम्भ – चित्तौड़गढ़ में स्थित यह स्तम्भ कुम्भा के शासनकाल की स्थापत्य कला और ऐतिहासिक घटनाओं का प्रमाण है।
प्रश्न 6.
हल्दीघाटी युद्ध के महत्त्व पर प्रकाश डालिये।
Throw light on the importance of the war of Haldighati.
उत्तर: हल्दीघाटी युद्ध (1576 ई.) का राजस्थान और भारतीय इतिहास में अत्यधिक महत्त्व है:
- राजपूत वीरता का प्रतीक: यह युद्ध महाराणा प्रताप और मुगल सम्राट अकबर के बीच हुआ, जिसमें महाराणा प्रताप ने अद्वितीय वीरता और स्वाभिमान का परिचय दिया।
- स्वतंत्रता संग्राम: यह युद्ध मेवाड़ की स्वतंत्रता और अस्मिता की रक्षा के लिए लड़ा गया, जो राजपूताना में मुगल विस्तार के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण संघर्ष था।
- रणनीतिक महत्त्व: यद्यपि युद्ध का परिणाम अनिर्णायक रहा, लेकिन इसने मुगलों को मेवाड़ पर पूर्ण नियंत्रण नहीं दिया और महाराणा प्रताप ने गुरिल्ला युद्ध जारी रखा।
- प्रेरणा स्रोत: यह युद्ध बाद की पीढ़ियों के लिए देशभक्ति और बलिदान का प्रतीक बना, जिसने राजस्थानी संस्कृति और गौरव को मजबूत किया।
प्रश्न 7.
अजमेर-मेरवाड़ा के राजस्थान में विलय प्रक्रिया का परीक्षण कीजिए।
Examine the process of merger of Ajmer-Merwara into Rajasthan.
उत्तर: अजमेर-मेरवाड़ा का राजस्थान में विलय एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रक्रिया थी:
- पृष्ठभूमि: अजमेर-मेरवाड़ा ब्रिटिश शासन के अंतर्गत एक प्रांत था, जो सीधे ब्रिटिश नियंत्रण में था। 1947 में स्वतंत्रता के बाद, यह भारत का एक भाग बना।
- विलय की प्रक्रिया: 1949 में, राजस्थान के गठन के समय, अजमेर-मेरवाड़ा को राजस्थान में शामिल करने का निर्णय लिया गया। यह विलय 1 नवम्बर 1956 को राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के तहत पूरा हुआ।
- प्रमुख चरण: सर्वप्रथम, अजमेर-मेरवाड़ा को एक अलग राज्य के रूप में रखा गया, फिर 1956 में इसे राजस्थान में मिला दिया गया। इस प्रक्रिया में स्थानीय जनता और नेताओं की सहमति ली गई।
- मूल्यांकन: यह विलय राजस्थान के एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसने प्रशासनिक सुविधा और क्षेत्रीय एकता को बढ़ावा दिया। हालाँकि, कुछ स्थानीय विरोध भी हुआ, लेकिन अंततः यह सफल रहा।
प्रश्न 8.
स्टेट्स मंत्रालय किसके नेतृत्व में बनाया गया ? इसका प्रमुख उद्देश्य क्या था ?
Under whose leadership was the State Mantralaya formed ? What was its primary objective ?
उत्तर:
नेतृत्व: स्टेट्स मंत्रालय (States Ministry) का गठन सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में किया गया था। वे भारत के पहले गृह मंत्री थे और उन्होंने रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रमुख उद्देश्य: इस मंत्रालय का प्रमुख उद्देश्य देशी रियासतों का भारतीय संघ में विलय करना था। इसके अंतर्गत रियासतों को भारत में शामिल करने, उनके प्रशासनिक पुनर्गठन और एकीकरण की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित किया गया।
खण्ड – स
-
‘कीर्ति स्तम्भ’ का निर्माण किस घटना की स्मृति में करवाया गया ?
To commemorate which event was ‘Kirti Stambh’ constructed ?
उत्तर: ‘कीर्ति स्तम्भ’ का निर्माण महाराणा कुम्भा ने मालवा के शासक महमूद खिलजी पर विजय प्राप्त करने की स्मृति में करवाया था। यह स्तम्भ चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित है और विजय के प्रतीक के रूप में स्थापित किया गया था।
-
राजस्थान का इतिहास लिखने के लिए ख्यात साहित्य के महत्त्व का परीक्षण कीजिये।
Examine the importance of Khyat literature as a source for writing the history of Rajasthan.
उत्तर: ख्यात साहित्य राजस्थान के इतिहास लेखन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह राजपूत शासकों के शासनकाल, युद्धों, प्रशासनिक व्यवस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। मुहणोत नैणसी की ‘नैणसी री ख्यात’ और ‘बाँकीदास री ख्यात’ जैसी रचनाएँ ऐतिहासिक घटनाओं की प्रामाणिक जानकारी देती हैं। ये ग्रंथ समकालीन घटनाओं पर प्रकाश डालते हैं और राजस्थान के मध्यकालीन इतिहास को समझने में सहायक होते हैं।
-
राजस्थान के इतिहास लेखन में आधुनिक साहित्य के महत्त्व को रेखांकित कीजिये।
Underline the importance of modern literature in the writing of history of Rajasthan.
उत्तर: आधुनिक साहित्य राजस्थान के इतिहास लेखन में नवीन दृष्टिकोण और विश्लेषण प्रस्तुत करता है। इसमें अभिलेखों, पुरातात्विक साक्ष्यों और विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों का वैज्ञानिक उपयोग किया गया है। डॉ. गोपीनाथ शर्मा, डॉ. दशरथ शर्मा और डॉ. एल.पी. तेस्सीटोरी जैसे विद्वानों ने आधुनिक शोध पद्धतियों से राजस्थान के इतिहास को पुनर्लिखित किया। यह साहित्य पूर्वाग्रहों से मुक्त होकर तथ्यात्मक इतिहास प्रस्तुत करने में सहायक है।
-
खतोली एवं बाड़ी के युद्ध किनके मध्य लड़े गये ? इन युद्धों के महत्व पर प्रकाश डालिये।
Who fought the battles of Khatoli and Badi ? Throw light on the significance of these battles.
उत्तर: खतोली का युद्ध (1518 ई.) और बाड़ी का युद्ध (1519 ई.) मेवाड़ के महाराणा सांगा और मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी द्वितीय के मध्य लड़े गये। खतोली के युद्ध में महाराणा सांगा ने महमूद खिलजी को पराजित किया और उसे बंदी बना लिया। बाड़ी के युद्ध में भी सांगा की विजय हुई। इन युद्धों का महत्व यह है कि इन्होंने मेवाड़ की सैन्य शक्ति को सुदृढ़ किया और राजस्थान में राजपूत शक्ति के पुनरुत्थान का मार्ग प्रशस्त किया।
-
उन परिस्थितियों का उल्लेख कीजिए जिनसे विवश होकर 1818 ई. में बूंदी को अंग्रेजों का संरक्षण स्वीकार करना पड़ा।
Mention the circumstances which forced the Bundi State to seek British protection in 1818.
उत्तर: बूंदी राज्य को 1818 ई. में अंग्रेजों का संरक्षण स्वीकार करने के लिए निम्नलिखित परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं:
- मराठों और पिंडारियों के लगातार आक्रमणों से राज्य की आर्थिक और सैन्य स्थिति कमजोर हो गई थी।
- आंतरिक उत्तराधिकार विवादों ने राज्य को अस्थिर कर दिया था।
- अंग्रेजों की बढ़ती शक्ति को देखते हुए बूंदी के शासक ने सुरक्षा के लिए अंग्रेजों से संधि करना उचित समझा।
- अन्य राजपूत राज्यों (जैसे जयपुर, जोधपुर) के अंग्रेजों से संधि करने का दबाव भी था।
-
जोधपुर के मानसिंह द्वारा जोधपुर में अंग्रेजी वर्चस्व के प्रतिरोध का वर्णन कीजिये।
Describe the resistance of Man Singh of Jodhpur to the British Supremacy in Jodhpur.
उत्तर: जोधपुर के महाराजा मानसिंह (1803-1843 ई.) ने अंग्रेजी वर्चस्व का कड़ा प्रतिरोध किया। उन्होंने 1818 ई. की संधि के बावजूद अंग्रेजों के हस्तक्षेप का विरोध किया। मानसिंह ने अंग्रेजों की अधीनता स्वीकार नहीं की और अपनी स्वतंत्रता बनाए रखने का प्रयास किया। उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध मराठों और पिंडारियों से संबंध बनाए रखे। अंग्रेजों ने उन्हें नियंत्रित करने के लिए सैन्य अभियान चलाया, लेकिन मानसिंह ने लगातार विरोध जारी रखा। अंततः अंग्रेजों ने उन्हें पदच्युत कर दिया, लेकिन उनका प्रतिरोध राजस्थान में अंग्रेजी विरोधी भावना का प्रतीक बना।
-
अंग्रेजों की अफीम व्यापार नीति से अफीम की तस्करी को कैसे प्रोत्साहन मिला ?
How did the British Opium Trade Policy encourage the smuggling of opium ?
उत्तर: अंग्रेजों की अफीम व्यापार नीति ने अफीम की तस्करी को निम्नलिखित प्रकार से प्रोत्साहन दिया:
- अंग्रेजों ने अफीम के उत्पादन और व्यापार पर एकाधिकार स्थापित कर लिया था, जिससे वैध व्यापार की तुलना में तस्करी अधिक लाभदायक हो गई।
- अंग्रेजी सरकार द्वारा अफीम पर लगाए गए उच्च करों और शुल्कों ने तस्करों को प्रोत्साहित किया, क्योंकि वे करों से बचकर अधिक लाभ कमा सकते थे।
- चीन में अफीम की भारी मांग और अंग्रेजों द्वारा अवैध व्यापार को नियंत्रित करने में असमर्थता ने तस्करी को बढ़ावा दिया।
- राजस्थान के रियासतों में अंग्रेजी नियंत्रण की कमी ने तस्करों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किए।
-
1857 ई. के स्वतंत्रता संग्राम के पश्चात् देशी रियासतों के प्रति ब्रिटिश नीति का उल्लेख कीजिये।
Write about the British policy towards the native States after the Freedom Struggle of 1857.
उत्तर: 1857 ई. के स्वतंत्रता संग्राम के पश्चात् ब्रिटिश सरकार ने देशी रियासतों के प्रति निम्नलिखित नीति अपनाई:
- व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse) को समाप्त कर दिया गया: लॉर्ड डलहौजी द्वारा लागू यह नीति रद्द कर दी गई, जिससे रियासतों में उत्तराधिकार के अधिकार को मान्यता मिली।
- रियासतों को सुरक्षा का आश्वासन दिया गया: अंग्रेजों ने रियासतों को आश्वस्त किया कि वे उनकी आंतरिक स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे, बशर्ते वे अंग्रेजों के प्रति वफादार रहें।
- सैन्य नियंत्रण बढ़ाया गया: रियासतों में अंग्रेजी सेना की उपस्थिति बढ़ा दी गई और उन्हें अपनी सेना कम करने के लिए कहा गया।
- राजनीतिक एजेंटों की नियुक्ति: प्रत्येक महत्वपूर्ण रियासत में एक ब्रिटिश राजनीतिक एजेंट नियुक्त किया गया, जो शासक की गतिविधियों पर नजर रखता था।
- वफादार रियासतों को पुरस्कृत किया गया: जिन रियासतों ने 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों का साथ दिया, उन्हें भूमि और सम्मान प्रदान किए गए।
9. जाम्भोजी की शिक्षाओं का वर्णन कीजिये और समकालीन समाज पर इसके प्रभावों का परीक्षण कीजिये।
Describe the teaching of Jambhoji and examine its impacts on the contemporary society.
जाम्भोजी की शिक्षाएँ: जाम्भोजी (1451-1536) राजस्थान के लोकदेवता और विष्णोई संप्रदाय के संस्थापक थे। उनकी शिक्षाओं में 29 नियम (बीसी-नोई) शामिल हैं, जो पर्यावरण संरक्षण, अहिंसा, और सामाजिक समानता पर केंद्रित हैं। मुख्य शिक्षाएँ:
- पेड़ों को न काटें और वन्यजीवों की रक्षा करें।
- सभी प्राणियों के प्रति दया और अहिंसा का पालन करें।
- सत्य बोलें और ईमानदारी से जीवन जिएं।
- जाति-पाति और सामाजिक भेदभाव का विरोध करें।
- एक ईश्वर की उपासना करें और मूर्तिपूजा से दूर रहें।
समकालीन समाज पर प्रभाव: जाम्भोजी की शिक्षाओं ने राजस्थान के ग्रामीण समाज में गहरा प्रभाव डाला। उनके अनुयायी (विष्णोई) आज भी पर्यावरण संरक्षण के लिए जाने जाते हैं, जैसे चिपको आंदोलन में उनकी भूमिका। उन्होंने सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया और निम्न जातियों को आत्मसम्मान दिया। उनके नियमों ने स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने में मदद की, जो आज भी प्रासंगिक है।
20. मेवाड़ चित्रकला शैली पर प्रकाश डालिये।
Throw light on the Mewar style of painting.
मेवाड़ चित्रकला शैली राजस्थानी लघु चित्रकला की एक प्रमुख शैली है, जो 16वीं-19वीं शताब्दी में विकसित हुई। इसकी विशेषताएँ:
- विषय: मुख्यतः रामायण, महाभारत, कृष्ण लीला, और राजदरबार के दृश्य।
- रंग: चमकीले और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग, विशेषकर लाल, नीला, और सोने का उपयोग।
- चेहरे: चेहरे गोल और अभिव्यक्तियाँ सरल होती हैं, आँखें बड़ी और बादाम के आकार की।
- पृष्ठभूमि: प्राकृतिक दृश्य, महल, और बगीचे चित्रित किए जाते हैं।
- प्रमुख केंद्र: उदयपुर, चित्तौड़गढ़, और नाथद्वारा।
- प्रसिद्ध चित्रकार: साहिबदीन, मनोहरदास, और देवीदास।
यह शैली मुगल चित्रकला से प्रभावित हुई लेकिन अपनी मौलिकता बनाए रखी। मेवाड़ शैली ने राजस्थानी कला को समृद्ध किया और आज भी संग्रहालयों में संरक्षित है।
2. राजस्थान के रेखा मानचित्र पर निम्नांकित स्थान अंकित कीजिए :
(i) भीलवाड़ा (ii) बीकानेर (iii) जैसलमेर (iv) उदयपुर
Mark the following places on the outline map of Rajasthan: (i) Bhilwara (ii) Bikaner (iii) Jaisalmer (iv) Udaipur.
निर्देश: राजस्थान के रेखा मानचित्र पर निम्नलिखित स्थानों को सही स्थान पर अंकित करें:
- भीलवाड़ा: राजस्थान के दक्षिण-पूर्वी भाग में, उदयपुर के उत्तर-पूर्व में स्थित।
- बीकानेर: राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी भाग में, जैसलमेर के पूर्व में स्थित।
- जैसलमेर: राजस्थान के पश्चिमी भाग में, पाकिस्तान सीमा के पास स्थित।
- उदयपुर: राजस्थान के दक्षिणी भाग में, अरावली पर्वतमाला के पास स्थित।
नोट: मानचित्र पर अंकित करने के लिए छात्रों को राजस्थान के भौगोलिक ज्ञान का उपयोग करना चाहिए।
22. अलाउद्दीन खिलजी के रणथम्भौर अभियान का संक्षिप्त विवरण दीजिये।
Give a brief account of Alauddin Khalji’s conquest of Ranthambhor.
अलाउद्दीन खिलजी ने 1301 ई. में रणथम्भौर दुर्ग पर आक्रमण किया। यह दुर्ग चौहान वंश के शासक हम्मीर देव के अधीन था। अलाउद्दीन ने अपने सेनापति उलूग खान को भेजा, लेकिन हम्मीर ने उसे पराजित किया। इसके बाद अलाउद्दीन स्वयं सेना लेकर गया। उसने दुर्ग को घेर लिया और आपूर्ति मार्ग काट दिए। हम्मीर ने वीरतापूर्वक रक्षा की, लेकिन अंततः विश्वासघात के कारण दुर्ग पर कब्जा हो गया। हम्मीर देव और उसके साथियों ने आत्मसमर्पण के बजाय मृत्यु को चुना। इस विजय ने अलाउद्दीन के साम्राज्य को मजबूत किया और राजपूताना में उसके प्रभाव को बढ़ाया।
23. मारवाड़ के उत्थान में राव मालदेव के योगदान का मूल्यांकन कीजिये।
Evaluate the contribution of Rao Maldev in the rise of Marwar.
राव मालदेव (1532-1562) मारवाड़ के राठौर वंश के प्रमुख शासक थे। उनके योगदान:
- सैन्य विस्तार: उन्होंने मारवाड़ की सीमाओं का विस्तार किया और जोधपुर, बीकानेर, और आसपास के क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित किया।
- प्रशासनिक सुधार: उन्होंने कुशल प्रशासनिक व्यवस्था लागू की और राजस्व संग्रह को सुदृढ़ किया।
- सांस्कृतिक योगदान: उन्होंने कला और साहित्य को संरक्षण दिया, जिससे मारवाड़ी संस्कृति का विकास हुआ।
- मुगलों से संघर्ष: उन्होंने शेरशाह सूरी और हुमायूँ के खिलाफ सफल अभियान चलाए, जिससे मारवाड़ की स्वतंत्रता बनी रही।
- सामरिक कौशल: उन्होंने सुमेल के युद्ध (1544) में शेरशाह को कड़ी चुनौती दी, हालांकि वे पराजित हुए।
राव मालदेव के प्रयासों ने मारवाड़ को एक शक्तिशाली राज्य के रूप में स्थापित किया, जो बाद में मुगलों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिद्वंद्वी बना।
अथवा
मुगल साम्राज्य के लिए बीकानेर के रायसिंह की सेवाओं का मूल्यांकन कीजिये।
Evaluate the services of Rai Singh of Bikaner for the Mughal Empire.
राजा रायसिंह (1571-1612) बीकानेर के राठौर शासक थे, जिन्होंने मुगल साम्राज्य के लिए महत्वपूर्ण सेवाएँ दीं:
- सैन्य सेवा: उन्होंने अकबर के अधीन कई अभियानों में भाग लिया, जैसे गुजरात, बंगाल, और कश्मीर विजय में।
- प्रशासनिक योगदान: उन्होंने मुगल प्रशासन में उच्च पदों पर कार्य किया और राजस्थान में मुगल प्रभाव को मजबूत किया।
- सांस्कृतिक सेतु: उन्होंने मुगल और राजपूत संस्कृति के बीच समन्वय स्थापित किया, जिससे साम्राज्य में स्थिरता आई।
- निर्माण कार्य: उन्होंने बीकानेर में कई भवन और किले बनवाए, जो मुगल वास्तुकला से प्रभावित थे।
- वफादारी: वे अकबर के विश्वासपात्र थे और उन्होंने मुगल साम्राज्य के प्रति निष्ठा बनाए रखी।
रायसिंह की सेवाओं ने मुगल साम्राज्य को राजस्थान में मजबूत पकड़ बनाने में मदद की और उन्हें अकबर द्वारा 'राजा' की उपाधि से सम्मानित किया गया।
24. राजस्थान में राजनैतिक जागृति के कारणों को समीक्षा कीजिए। गोविन्द गुरु के नेतृत्व में मेवाड़ में हुए जनजातीय आन्दोलन की विवेचना कीजिए।
राजस्थान में राजनैतिक जागृति के कारण
राजस्थान में राजनैतिक जागृति के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
- शिक्षा का प्रसार: अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार से जनता में राजनीतिक चेतना जागी।
- समाचार पत्रों का योगदान: 'राजस्थान गजट', 'नवीन राजस्थान' आदि पत्रों ने जनता को जागरूक किया।
- सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन: आर्य समाज, ब्रह्म समाज जैसे आंदोलनों ने सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाई।
- ब्रिटिश शोषण नीति: अंग्रेजों की आर्थिक शोषण नीति और दमनकारी कानूनों ने असंतोष बढ़ाया।
- देशी रियासतों का अत्याचार: रियासतों में प्रजा पर अत्याचार और करों के बोझ ने विद्रोह की भावना पैदा की।
- राष्ट्रीय आंदोलन का प्रभाव: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और स्वतंत्रता संग्राम के प्रभाव से राजस्थान में भी राजनीतिक चेतना फैली।
गोविन्द गुरु के नेतृत्व में मेवाड़ में जनजातीय आंदोलन
गोविन्द गुरु (1858-1931) एक आध्यात्मिक और सामाजिक सुधारक थे, जिन्होंने मेवाड़ क्षेत्र में भील और गरासिया जनजातियों को संगठित किया। उनके आंदोलन की मुख्य विशेषताएं:
- धार्मिक आधार: गोविन्द गुरु ने 'सम्प सभा' की स्थापना की और लोगों को मूर्ति पूजा, अंधविश्वास और नशे से दूर रहने का उपदेश दिया।
- सामाजिक सुधार: उन्होंने जाति-पांति के भेदभाव को समाप्त करने और शिक्षा के प्रसार पर जोर दिया।
- राजनीतिक चेतना: उन्होंने जनजातियों को ब्रिटिश शासन और स्थानीय जागीरदारों के अत्याचारों के विरुद्ध संगठित किया।
- 1913 का विद्रोह: गोविन्द गुरु के नेतृत्व में भीलों ने मेवाड़ के मांगरवाड़ा क्षेत्र में विद्रोह किया, जिसे अंग्रेजों ने बेरहमी से कुचल दिया।
- परिणाम: यद्यपि आंदोलन दबा दिया गया, लेकिन इसने जनजातीय समाज में राजनीतिक चेतना जगाई और बाद में राजस्थान के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया।
अथवा
निम्नांकित क्रान्तिकारियों के योगदान का परीक्षण कीजिए :
(i) पं० अर्जुनलाल सेठी
पंडित अर्जुनलाल सेठी (1880-1941) राजस्थान के प्रमुख क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका योगदान:
- वे बीकानेर राज्य के प्रजामंडल आंदोलन के अग्रणी नेता थे।
- उन्होंने 'राजस्थान केसरी' नामक समाचार पत्र निकालकर जनता में राष्ट्रीय चेतना जगाई।
- वे असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन में सक्रिय रहे।
- उन्होंने बीकानेर में महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक सुधारों के लिए कार्य किया।
(ii) केसरी सिंह बारहठ
केशरी सिंह बारहठ (1872-1941) राजस्थान के महान क्रांतिकारी और देशभक्त कवि थे। उनका योगदान:
- वे राजस्थान में क्रांतिकारी गतिविधियों के प्रमुख केंद्र थे और उन्होंने युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में प्रेरित किया।
- उन्होंने 'चेतावनी रा चूंगटिया' जैसी कविताओं के माध्यम से राष्ट्रीय भावना जगाई।
- वे क्रांतिकारी रासबिहारी बोस और श्यामजी कृष्ण वर्मा के संपर्क में थे।
- उन्होंने मेवाड़ में जनजागरण और राजनीतिक चेतना फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(iii) राव गोपाल सिंह खरवा
राव गोपाल सिंह खरवा (1872-1939) राजस्थान के एक प्रमुख क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे। उनका योगदान:
- वे ब्रिटिश शासन के विरुद्ध सशस्त्र क्रांति के समर्थक थे।
- उन्होंने राजस्थान में क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना में योगदान दिया।
- वे देशी रियासतों में प्रजा के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे।
- उन्होंने युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने के लिए प्रेरित किया और ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई।
55-73-9-- Hist. IT [Ss-522-II]
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