RBSE Class 12th 2011 Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011 Previous Year Papers

You opened the RBSE Class 12th 2011 Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011 Previous Year Papers page — a focused place to read the real previous year question paper for that subject and year. RBSE Solution keeps exam-year sets together so you can practise the same cycle your seniors faced.

Previous year papers reward patience: read instructions, note mark distribution, then attempt questions before peeking at solutions elsewhere on the site. This URL always loads the same free previous year papers content for Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011 (2011).

Use the details table to confirm class and year, then scroll to the paper images or PDF below. More subjects from 2011 are linked later on this page.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2011
Subject Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2011, and subject Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

How to practise with this question paper

Stage one: read the Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011 question paper from 2011 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.

Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.

RBSE Class 12th 2011 Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011

Scroll through the Previous Year Papers pages for Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011 (2011).

RBSE Class 12th 2011 Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2011 Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2011 Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th Human Growth Development & Family Relation-SS-92-2-2011 2011 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2012

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2012

वैकल्पिक वर्ग — गृह विज्ञान (OPTIONAL GROUP — HOME SCIENCE)

मानव वृद्धि, विकास एवं पारिवारिक संबंध — द्वितीय पत्र

(Human Growth, Development & Family Relation - Second Paper)

समय: 3 घण्टे 15 मिनट    पूर्णांक: 40


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश:

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES:

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
  3. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  4. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  5. जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।
    For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.

SS—92-2—Hu. Gr. Dev. & Fam. Rel. II    [55-5ठनता]    [Turn over

समाजीकरण को परिभाषित कीजिए ।

Define socialisation.

समाजीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति अपने समाज के मूल्यों, मानदंडों, परंपराओं और व्यवहार के पैटर्न को सीखता और आत्मसात करता है। यह एक आजीवन प्रक्रिया है जो व्यक्ति को समाज का एक सक्रिय और जिम्मेदार सदस्य बनने में मदद करती है।

Socialisation is the process by which an individual learns and internalizes the values, norms, traditions, and behavioral patterns of their society. It is a lifelong process that helps an individual become an active and responsible member of society.

आदत निर्माण के कोई दो सिद्धांत बताइए ।

Write any two principles of habit formation.

  1. पुनरावृत्ति का सिद्धांत (Principle of Repetition): किसी कार्य को बार-बार करने से वह आदत बन जाती है। जितनी अधिक बार क्रिया दोहराई जाएगी, आदत उतनी ही मजबूत होगी।
  2. निरंतरता का सिद्धांत (Principle of Consistency): आदत निर्माण के लिए क्रिया को नियमित और निरंतर रूप से करना आवश्यक है। बीच-बीच में रुकावट आदत को कमजोर करती है।

एड्स क्या है ?

What is AIDS ?

एड्स (AIDS) का पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम (Acquired Immuno Deficiency Syndrome) है। यह एक जानलेवा बीमारी है जो एचआईवी (HIV) वायरस के संक्रमण से होती है। यह वायरस शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है, जिससे व्यक्ति अन्य संक्रमणों और बीमारियों से लड़ने में असमर्थ हो जाता है।

शालीय अवस्था में बालकों के गत्यात्मक विकास को परिभाषित कीजिए ।

Define cognitive development in school going children.

गत्यात्मक विकास (Cognitive Development) से तात्पर्य बच्चों में सोचने, समझने, तर्क करने, समस्या-समाधान करने और स्मरण करने की क्षमता के विकास से है। शालीय अवस्था (6-12 वर्ष) में बच्चे मूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage) में होते हैं, जहाँ वे तार्किक रूप से सोचना शुरू करते हैं लेकिन केवल ठोस और मूर्त वस्तुओं के संदर्भ में। वे वर्गीकरण, क्रमबद्धता और संरक्षण (conservation) की अवधारणाओं को समझने लगते हैं।

बाल्यावस्था में होने वाले संवेगात्मक विकास का क्या महत्व होता है ? विस्तारपूर्वक लिखिए ।

What is the importance of emotional development that takes place in childhood ? Explain in detail.

बाल्यावस्था में संवेगात्मक विकास का अत्यधिक महत्व है। इसके प्रमुख महत्व निम्नलिखित हैं:

  1. स्वस्थ व्यक्तित्व का निर्माण: संवेगात्मक विकास बच्चे के व्यक्तित्व की नींव रखता है। सकारात्मक संवेग (जैसे प्रेम, खुशी) आत्मविश्वास और सुरक्षा की भावना विकसित करते हैं।
  2. सामाजिक संबंधों का विकास: संवेगों को समझने और नियंत्रित करने से बच्चे दूसरों के साथ स्वस्थ संबंध स्थापित कर पाते हैं। सहानुभूति और सहयोग जैसे गुण विकसित होते हैं।
  3. शैक्षणिक सफलता: संवेगात्मक रूप से स्थिर बच्चे पढ़ाई में बेहतर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और सीखने की प्रक्रिया में अधिक सफल होते हैं।
  4. समस्या समाधान क्षमता: संवेगों को पहचानने और प्रबंधित करने से बच्चे तनावपूर्ण स्थितियों में बेहतर निर्णय ले पाते हैं।
  5. मानसिक स्वास्थ्य: बाल्यावस्था में स्वस्थ संवेगात्मक विकास भविष्य में अवसाद, चिंता जैसी मानसिक समस्याओं से बचाता है।

इस प्रकार, बाल्यावस्था में संवेगात्मक विकास बच्चे के समग्र विकास के लिए आधारभूत है।

किशोरावस्था में नशीली वस्तुओं के सेवन के कारण एवं उपचार बताइए ।

State the reasons for drug addiction during adolescence and mention its treatment.

नशीली वस्तुओं के सेवन के कारण (Reasons for Drug Addiction):

  1. जिज्ञासा और प्रयोग: किशोर नई चीजों को आजमाने की प्रवृत्ति रखते हैं, जो नशे की ओर ले जाती है।
  2. साथियों का दबाव (Peer Pressure): दोस्तों के समूह में शामिल होने या स्वीकार्यता पाने के लिए नशा करना।
  3. तनाव और भावनात्मक समस्याएं: परीक्षा का दबाव, पारिवारिक कलह, या अकेलापन दूर करने के लिए नशे का सहारा लेना।
  4. मनोरंजन और आनंद की चाह: नशे से मिलने वाले अस्थायी सुख की तलाश।
  5. पारिवारिक प्रभाव: परिवार में किसी सदस्य का नशे का आदी होना या माता-पिता की अनदेखी।

उपचार (Treatment):

  1. परामर्श (Counseling): व्यक्तिगत और समूह परामर्श से किशोर को नशे के दुष्प्रभाव समझाए जाते हैं।
  2. चिकित्सा उपचार (Medical Treatment): डिटॉक्सिफिकेशन और दवाओं के माध्यम से शरीर से नशे के प्रभाव को कम किया जाता है।
  3. परिवार का सहयोग: माता-पिता और परिवार के सदस्यों को शामिल करके सहायक वातावरण बनाया जाता है।
  4. सकारात्मक गतिविधियां: खेल, कला, संगीत जैसी रचनात्मक गतिविधियों में शामिल करना।
  5. पुनर्वास केंद्र (Rehabilitation Centers): गंभीर मामलों में विशेष पुनर्वास केंद्रों में उपचार।

संवेग से आपका क्या तात्पर्य है ? आरम्भिक बाल्यावस्था में क्रोध एवं ईर्ष्या के क्या कारण हैं ? इन्हें किस प्रकार नियंत्रित किया जा सकता है ?

What do you mean by emotion ? Discuss the cause of anger and jealousy in early childhood. How can these be controlled ?

संवेग (Emotion) एक मानसिक अवस्था है जो किसी उत्तेजना के प्रति व्यक्ति की प्रतिक्रिया के रूप में उत्पन्न होती है। इसमें शारीरिक परिवर्तन (जैसे हृदय गति बढ़ना), व्यवहारिक अभिव्यक्ति (जैसे रोना या हंसना) और व्यक्तिपरक अनुभव शामिल होते हैं।

आरम्भिक बाल्यावस्था में क्रोध के कारण (Causes of Anger):

  1. इच्छाओं की पूर्ति न होना (जैसे खिलौना न मिलना)
  2. शारीरिक असुविधा (भूख, थकान, नींद)
  3. स्वतंत्रता पर प्रतिबंध (जैसे किसी काम को करने से रोकना)
  4. ध्यान आकर्षित करने का प्रयास विफल होना

आरम्भिक बाल्यावस्था में ईर्ष्या के कारण (Causes of Jealousy):

  1. नए भाई-बहन का जन्म (माता-पिता का ध्यान बंटना)
  2. दूसरे बच्चों को अधिक प्यार या तोहफे मिलना
  3. अपनी तुलना दूसरों से करना
  4. अपनी वस्तुओं पर अधिकार की भावना

नियंत्रण के उपाय (How to Control):

  1. सकारात्मक ध्यान देना: बच्चे को पर्याप्त प्यार और समय दें।
  2. सीमाएं निर्धारित करना: स्पष्ट और सुसंगत नियम बनाएं।
  3. भावनाओं को पहचानना सिखाना: बच्चे को अपनी भावनाओं को शब्दों में व्यक्त करना सिखाएं।
  4. वैकल्पिक गतिविधियां: क्रोध या ईर्ष्या होने पर बच्चे को किसी रचनात्मक कार्य में लगाएं।
  5. स्वयं उदाहरण प्रस्तुत करना: माता-पिता स्वयं संयमित व्यवहार करें।

तूफान एवं तनाव की आयु कौन-सी है और क्यों ? समझाइए ।

What is the age of stress and storm and why ? Explain.

तूफान एवं तनाव की आयु (Age of Stress and Storm) किशोरावस्था (Adolescence) को कहा जाता है, जो लगभग 13 से 19 वर्ष की आयु के बीच होती है। इस अवधि को ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि:

  1. शारीरिक परिवर्तन: यौवनारंभ (puberty) के कारण तीव्र शारीरिक और हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जो भावनात्मक अस्थिरता पैदा करते हैं।
  2. भावनात्मक उथल-पुथल: किशोर अत्यधिक संवेदनशील हो जाते हैं, उनमें मूड स्विंग्स (mood swings) आम हैं।
  3. पहचान का संकट (Identity Crisis): वे अपनी पहचान तलाशते हैं और स्वतंत्रता चाहते हैं, जिससे परिवार से टकराव होता है।
  4. सामाजिक दबाव: साथियों के बीच स्वीकार्यता, शैक्षणिक अपेक्षाएं और भविष्य की चिंता तनाव बढ़ाती है।
  5. निर्णय लेने की क्षमता का विकास: मस्तिष्क का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (निर्णय लेने वाला भाग) अभी पूरी तरह विकसित नहीं होता, जिससे आवेगपूर्ण व्यवहार होता है।

इस प्रकार, यह अवधि शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बदलावों का समय है, जो इसे "तूफान और तनाव" की आयु बनाता है।

किशोरावस्था में संज्ञानात्मक विकास की अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था की विवेचना कीजिए ।

Discuss the informal operational stage of cognitive development during adolescence.

अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage) जीन पियाजे (Jean Piaget) के संज्ञानात्मक विकास के सिद्धांत का चौ

प्रश्न 10

बालकों में शारीरिक व मानसिक अक्षमता के कारण लिखिए। मानसिक रूप से अक्षम बालक की आवश्यकताएँ लिखिए।

What are the reasons of physical and mental disability among children? Write the needs of mentally disabled children. (4 अंक)

शारीरिक व मानसिक अक्षमता के कारण:

  • आनुवंशिक कारण: माता-पिता से वंशानुगत रोग या गुणसूत्रीय असामान्यताएँ (जैसे डाउन सिंड्रोम)।
  • जन्मपूर्व कारण: गर्भावस्था में माँ का संक्रमण (रूबेला), कुपोषण, शराब या नशीली दवाओं का सेवन, विकिरण का प्रभाव।
  • जन्म के समय कारण: प्रसव के दौरान ऑक्सीजन की कमी (श्वासावरोध), सिर में चोट, समय से पहले जन्म।
  • जन्म के बाद कारण: मस्तिष्क ज्वर (मेनिन्जाइटिस), सिर में गंभीर चोट, कुपोषण, विषाक्त पदार्थों का प्रभाव (जैसे सीसा विषाक्तता)।
  • सामाजिक-आर्थिक कारण: गरीबी, शिक्षा का अभाव, स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता।

मानसिक रूप से अक्षम बालक की आवश्यकताएँ:

  • विशेष शिक्षा: उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार अनुकूलित पाठ्यक्रम और शिक्षण विधियाँ।
  • चिकित्सा देखभाल: नियमित स्वास्थ्य जाँच, दवाएँ और फिजियोथेरेपी।
  • व्यावसायिक प्रशिक्षण: आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरल कौशल सिखाना।
  • भावनात्मक सहारा: प्यार, स्नेह और प्रोत्साहन से आत्मविश्वास बढ़ाना।
  • सामाजिक समावेशन: समाज में स्वीकार्यता और सामान्य बच्चों के साथ मेलजोल के अवसर।
  • सुरक्षित वातावरण: दुर्घटनाओं से बचाव के लिए घर और विद्यालय में सुरक्षित व्यवस्था।

प्रश्न 11

एक वृद्ध महिला की शारीरिक व सामाजिक समस्याएँ क्या हैं? इनके निवारण में आपका क्या योगदान रहेगा?

What are the physical and social problems of an old lady? What will be your role in solving these problems? (4 अंक)

शारीरिक समस्याएँ:

  • दृष्टि और श्रवण शक्ति का कम होना।
  • हड्डियों का कमजोर होना (ऑस्टियोपोरोसिस) और जोड़ों का दर्द (गठिया)।
  • उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग जैसी पुरानी बीमारियाँ।
  • चलने-फिरने में कठिनाई और थकान।
  • नींद न आना और पाचन संबंधी समस्याएँ।

सामाजिक समस्याएँ:

  • अकेलापन और उपेक्षा (परिवार से अलगाव)।
  • आर्थिक निर्भरता और असुरक्षा।
  • समाज में अपमानजनक व्यवहार या बेकार समझा जाना।
  • मनोरंजन और सामाजिक गतिविधियों का अभाव।

निवारण में मेरा योगदान:

  • सम्मान और स्नेह: उनके अनुभवों का सम्मान करना और उन्हें परिवार में महत्वपूर्ण स्थान देना।
  • स्वास्थ्य देखभाल: नियमित डॉक्टर के पास ले जाना, दवाओं का ध्यान रखना और पौष्टिक आहार देना।
  • सामाजिक जुड़ाव: उन्हें पड़ोसियों, मित्रों और वृद्धाश्रमों की गतिविधियों से जोड़ना।
  • मनोरंजन: उनकी रुचि के अनुसार संगीत, धार्मिक कार्यक्रम या हल्के खेलों में भागीदारी।
  • आर्थिक सहायता: यदि आवश्यक हो, तो पेंशन या सरकारी योजनाओं की जानकारी देना।
  • सुरक्षा: घर में गिरने से बचाव के लिए उचित व्यवस्था करना।

प्रश्न 12

व्यवसाय चयन को प्रभावित करने वाले कारकों को समझाइए।

Describe the factors affecting the career selection. (4 अंक)

व्यवसाय चयन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक:

  1. व्यक्तिगत रुचि और योग्यता: व्यक्ति को अपनी पसंद और क्षमताओं के अनुसार ही व्यवसाय चुनना चाहिए। जैसे, कला में रुचि रखने वाला चित्रकार बन सकता है।
  2. शैक्षिक योग्यता: किसी व्यवसाय के लिए आवश्यक न्यूनतम शिक्षा और प्रशिक्षण। उच्च शिक्षा से अधिक विकल्प खुलते हैं।
  3. पारिवारिक पृष्ठभूमि: परिवार की आर्थिक स्थिति, पारिवारिक व्यवसाय और माता-पिता की अपेक्षाएँ।
  4. सामाजिक प्रतिष्ठा: समाज में किसी व्यवसाय को दिया गया सम्मान (जैसे डॉक्टर, इंजीनियर)।
  5. आर्थिक लाभ: वेतन, आय की स्थिरता और भविष्य में वृद्धि की संभावना।
  6. रोजगार के अवसर: बाजार में उस व्यवसाय की माँग और नौकरी की उपलब्धता।
  7. भौगोलिक स्थिति: शहर या गाँव में रहने के अनुसार अवसर। कुछ व्यवसाय विशेष क्षेत्रों में ही संभव हैं।
  8. शारीरिक और मानसिक क्षमता: कुछ व्यवसायों में शारीरिक शक्ति (जैसे निर्माण श्रमिक) या मानसिक सहनशक्ति (जैसे शोध) की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 13

हिपेटाइटिस क्या है? इसके कारण, लक्षण एवं उपचार लिखिए।

What is Hepatitis? Write its causes, symptoms and remedies. (4 अंक)

हिपेटाइटिस (पीलिया):

यह लीवर (यकृत) का एक संक्रामक रोग है, जिसमें लीवर में सूजन आ जाती है। यह मुख्यतः वायरस के कारण होता है।

कारण:

  • वायरल संक्रमण: हिपेटाइटिस A, B, C, D और E वायरस।
  • अस्वच्छता: दूषित पानी और भोजन (विशेषकर हिपेटाइटिस A और E)।
  • रक्त संपर्क: संक्रमित रक्त चढ़ाने, सुई साझा करने या असुरक्षित यौन संबंध (हिपेटाइटिस B और C)।
  • माँ से बच्चे: गर्भावस्था या प्रसव के दौरान संक्रमण।
  • अत्यधिक शराब या विषाक्त पदार्थ: लीवर को नुकसान पहुँचाकर हिपेटाइटिस का कारण बन सकते हैं।

लक्षण:

  • त्वचा और आँखों का पीला पड़ना (पीलिया)।
  • गहरे रंग का मूत्र और हल्के रंग का मल।
  • थकान, कमजोरी और भूख न लगना।
  • पेट में दर्द, मतली और उल्टी।
  • बुखार और जोड़ों में दर्द।

उपचार:

  • आराम और पोषण: पर्याप्त आराम, संतुलित आहार और खूब पानी पीना।
  • दवाएँ: एंटीवायरल दवाएँ (हिपेटाइटिस B और C के लिए) और लक्षणों को कम करने वाली दवाएँ।
  • टीकाकरण: हिपेटाइटिस A और B के लिए टीके उपलब्ध हैं।
  • शराब और हानिकारक दवाओं से बचाव: लीवर को और नुकसान से बचाने के लिए।
  • गंभीर मामलों में: अस्पताल में भर्ती होना और कभी-कभी लीवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता।

प्रश्न 14

निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:

Write short notes on any two of the following: (2+2=4 अंक)

  1. नेत्रहीनों के लिए शिक्षा (Education for blind)
  2. किशोरियों में उदासीनता (Depression in adolescent girl)
  3. नैतिक मूल्य (Moral values)

(i) नेत्रहीनों के लिए शिक्षा:

नेत्रहीन बच्चों की शिक्षा के लिए विशेष विधियों और संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसमें ब्रेल लिपि (उभरे हुए बिंदुओं वाली लिपि) का उपयोग करके पढ़ना-लिखना सिखाया जाता है। स्पर्श और श्रवण इंद्रियों पर जोर दिया जाता है। ऑडियो पुस्तकें, टॉकिंग बुक्स और स्पर्शनीय मानचित्र जैसे उपकरण सहायक होते हैं। समावेशी शिक्षा के तहत इन्हें सामान्य विद्यालयों में भी पढ़ाया जा सकता है, जहाँ विशेष शिक्षक और सहायक तकनीक उपलब्ध हो। उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर और समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

(ii) किशोरियों में उदासीनता:

किशोरावस्था में शारीरिक, मानसिक और सामाजिक बदलावों के कारण उदासीनता (डिप्रेशन) आम है। कारणों में हार्मोनल परिवर्तन, शैक्षिक दबाव, परिवार में तनाव, साथियों से तुलना, और सोशल मीडिया का प्रभाव शामिल हैं। लक्षणों में उदासी, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, नींद की समस्या, पढ़ाई में मन न लगना और आत्महत्या के विचार आना शामिल हो सकते हैं। निवारण के लिए परिवार और शिक्षकों का सहयोग, खुला संवाद, मनोवैज्ञानिक परामर्श, और योग-ध्यान जैसी गतिविधियाँ सहायक होती हैं। गंभीर मामलों में चिकित्सकीय सहायता आवश्यक है।

(iii) नैतिक मूल्य:

नैतिक मूल्य वे सिद्धांत हैं जो सही और गलत के बीच अंतर ब