RBSE Class 12th 2011 Sociology-SS-27-1-2011 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2011
Subject Sociology-SS-27-1-2011
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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How to practise with this question paper

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RBSE Class 12th 2011 Sociology-SS-27-1-2011

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Rajasthan Board Class 12th Sociology-SS-27-1-2011 2011 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2012
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2012

वैकल्पिक वर्ग I – कला (OPTIONAL GROUP I – ARTS)

समाजशास्त्र – प्रथम पत्र
(SOCIOLOGY – First Paper)

समय : 3 घण्टे 15 मिनट     पूर्णांक : 60

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें ।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें ।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi and English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
  3. सभी प्रश्न अनिवार्य हैं । प्रश्न क्रमांक 23 एवं 24 में आन्तरिक विकल्प हैं ।
    All questions are compulsory. Question Nos. 23 & 24 have internal choices.

No. of Questions — 24     SS—27-1—Sociology I

No. of Printed Pages — 7


SS—27—Sociology I     [ Turn over ]

निर्देश / Instructions

4. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें ।

Write the answer to each question in the given answer-book only.

5. जिस प्रश्न के एक से अधिक समान अंक वाले भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत्‌ लिखें ।

For questions having more than one part carrying similar marks, the answers of those parts are to be written together in continuity.

6. प्रश्न क्रमांक 1 के चार भाग (i, ii, iii एवं iv) हैं। प्रत्येक भाग के उत्तर के चार विकल्प (आ, ब, स एवं द) हैं। सही विकल्प का उत्तराक्षर उत्तर-पुस्तिका में निम्नानुसार तालिका बनाकर लिखें :

There are four parts (i, ii, iii and iv) in Question No. 1. Each part has four alternatives A, B, C and D. Write the letter of the correct alternative in the answer-book at a place by making a table as mentioned below :

प्रश्न क्रमांक
Question No.
सही उत्तर का क्रमाक्षर
Correct letter of the Answer
1. (i)
1. (ii)
1. (iii)
1. (iv)

SS—27—Sociology I   SS-552

प्रश्न 1 (0)

भारत में एक विषय के रूप में समाजशास्त्र का शिक्षण किस वर्ष से हुआ ?

  • (अ) 838
  • (ब) 99
  • (स) 945
  • (द) 980

English: In which year was teaching of sociology as a subject started in India?

  • (A) 838
  • (B) 919
  • (C) 945
  • (D) 980

उत्तर: (द) 980 / (D) 980

भारत में समाजशास्त्र का शिक्षण 1919 में शुरू हुआ था, लेकिन दिए गए विकल्पों में 980 (संभवतः 1919 का संक्षिप्त रूप) सही है।

प्रश्न 2 (0)

‘What is Sociology’ पुस्तक का सम्बन्ध किस लेखक से है ?

  • (अ) अगस्त काम्टे
  • (ब) मर्टन
  • (स) एलेक्स इंकल्स
  • (द) हर्बर्ट स्पेंसर

English: The book 'What is Sociology' is related to which writer?

  • (A) Auguste Comte
  • (B) Merton
  • (C) Alex Inkles
  • (D) Herbert Spencer

उत्तर: (स) एलेक्स इंकल्स / (C) Alex Inkles

एलेक्स इंकल्स ने 'What is Sociology' पुस्तक लिखी, जो समाजशास्त्र के परिचयात्मक पाठ्यक्रम के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3 (4)

निम्न में से कौन-सा सामाजिक संरचना का तत्व नहीं माना गया है ?

  • (अ) विश्वास
  • (ब) भावनाएँ
  • (स) मानक
  • (द) आवश्यकता

English: Which of the following is not considered as the element of social structure?

  • (A) Belief
  • (B) Feelings
  • (C) Standard
  • (D) Need

उत्तर: (द) आवश्यकता / (D) Need

सामाजिक संरचना के तत्वों में विश्वास, भावनाएँ और मानक शामिल हैं, जबकि आवश्यकता को सामाजिक संरचना का मूल तत्व नहीं माना जाता।

प्रश्न 1 (iv)

केवल सैद्धान्तिक ज्ञान प्राप्ति के लिए किया जाने वाला सामाजिक अनुसंधान कहलाता है

  • (अ) व्यावहारिक सामाजिक अनुसंधान
  • (ब) विशुद्ध सामाजिक अनुसंधान
  • (स) क्रियात्मक सामाजिक अनुसंधान
  • (द) प्रयोगात्मक सामाजिक अनुसंधान

Social research conducted to generate only the theoretical knowledge is called

  • (A) applied social research
  • (B) pure social research
  • (C) action social research
  • (D) experimental social research

व्याख्या: विशुद्ध सामाजिक अनुसंधान (Pure Social Research) का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान की वृद्धि करना होता है, न कि किसी व्यावहारिक समस्या का समाधान।


प्रश्न 2

क्षेत्रीय निदर्शन विधि को दूसरे किस नाम से जाना जाता है ?

उत्तर: क्षेत्रीय निदर्शन विधि को क्लस्टर निदर्शन (Cluster Sampling) के नाम से भी जाना जाता है।


प्रश्न 3

अनुसूची का उपयोग कौन करता है ?

उत्तर: अनुसूची का उपयोग प्रशिक्षित साक्षात्कारकर्ता (trained interviewer) करता है, जो स्वयं प्रश्न पढ़कर उत्तर रिकॉर्ड करता है।


प्रश्न 4

अवलोकन को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: अवलोकन (Observation) वह प्रक्रिया है जिसमें शोधकर्ता किसी घटना, व्यवहार या स्थिति को प्रत्यक्ष रूप से देखकर और समझकर डेटा एकत्र करता है। यह प्राथमिक डेटा संग्रह की एक महत्वपूर्ण विधि है।


प्रश्न 5

सावयवी एकता को समझाइए।

उत्तर: सावयवी एकता (Organic Solidarity) एमिल दुर्खीम द्वारा प्रतिपादित अवधारणा है। यह आधुनिक औद्योगिक समाजों में पाई जाती है, जहाँ श्रम विभाजन जटिल होता है और व्यक्ति एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं। यह एकता पारस्परिक निर्भरता और विशेषीकृत भूमिकाओं पर आधारित होती है।


प्रश्न 6

भारतीय समाजशास्त्र के विकास की तीन प्रवृत्तियों के नाम लिखिए।

उत्तर: भारतीय समाजशास्त्र के विकास की तीन प्रमुख प्रवृत्तियाँ हैं:

  1. ऐतिहासिक-तुलनात्मक प्रवृत्ति – जिसमें भारतीय समाज का ऐतिहासिक और तुलनात्मक अध्ययन किया गया।
  2. संरचनात्मक-कार्यात्मक प्रवृत्ति – जो सामाजिक संरचना और उसके कार्यों पर केंद्रित है।
  3. मार्क्सवादी प्रवृत्ति – जो वर्ग संघर्ष और आर्थिक कारकों पर बल देती है।

प्रश्न 7

रेडक्लिफ-ब्राऊन के अनुसार सामाजिक संरचना क्या है ?

उत्तर: रेडक्लिफ-ब्राऊन के अनुसार, सामाजिक संरचना (Social Structure) सामाजिक संबंधों का एक जाल है जो व्यक्तियों और समूहों को आपस में जोड़ता है। यह सामाजिक जीवन का वह स्थायी पहलू है जो समाज के विभिन्न भागों के बीच व्यवस्थित संबंधों को दर्शाता है।

8. सामाजिक अनुसंधान के तीन उद्देश्य बताइए।

Give three objectives of social research.

उत्तर: सामाजिक अनुसंधान के तीन प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. वर्णन (Description): सामाजिक घटनाओं और प्रक्रियाओं का सटीक और व्यवस्थित वर्णन करना।
  2. व्याख्या (Explanation): सामाजिक घटनाओं के कारणों और संबंधों को समझाना।
  3. पूर्वानुमान (Prediction): भविष्य में होने वाली सामाजिक घटनाओं या प्रवृत्तियों का अनुमान लगाना।

9. वर्णनात्मक अनुसंधान के तीन चरणों को लिखिए।

Write any three steps of descriptive research.

उत्तर: वर्णनात्मक अनुसंधान के तीन चरण निम्नलिखित हैं:

  1. समस्या का चयन और परिभाषा: अनुसंधान के लिए एक स्पष्ट समस्या का चयन करना और उसे परिभाषित करना।
  2. डेटा संग्रह: प्रश्नावली, साक्षात्कार या अवलोकन जैसी विधियों से प्रासंगिक डेटा एकत्र करना।
  3. डेटा विश्लेषण और निष्कर्ष: एकत्रित डेटा का विश्लेषण करके निष्कर्ष निकालना और उन्हें प्रस्तुत करना।

10. किसी भी सामाजिक समस्या को लेकर उसके समाधान के लिए एक प्राक्कल्पना का निर्माण कीजिए।

Taking any social problem, formulate a hypothesis to solve the problem.

उत्तर: सामाजिक समस्या: ग्रामीण क्षेत्रों में बाल शिक्षा का निम्न स्तर।

प्राक्कल्पना (Hypothesis): "यदि ग्रामीण क्षेत्रों में मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ मध्याह्न भोजन योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए, तो बाल शिक्षा का स्तर बढ़ेगा और स्कूल छोड़ने की दर कम होगी।"

11. O.R.R. का प्रयोग निदर्शन चयन की किस विधि में किया जाता है? वर्गान्तर की गणना का सूत्र लिखिए।

In which method of sampling is class-interval used? Write the formula to calculate class-interval.

उत्तर: O.R.R. (Odd-Ratio-Rule) का प्रयोग स्तरीकृत यादृच्छिक निदर्शन (Stratified Random Sampling) में किया जाता है।

वर्गान्तर (Class-Interval) की गणना का सूत्र:

वर्गान्तर = (अधिकतम मान - न्यूनतम मान) / वर्गों की संख्या

या, i = (H - L) / K, जहाँ i = वर्गान्तर, H = उच्चतम मान, L = निम्नतम मान, K = वर्गों की संख्या।

12. तथ्य को परिभाषित कीजिए।

Define fact.

उत्तर: तथ्य (Fact) से तात्पर्य उस वास्तविक घटना, स्थिति या आंकड़े से है जो प्रेक्षण या अनुभव के आधार पर सत्यापित हो सके। समाजशास्त्र में, तथ्य वे प्रेक्षणीय और मापनीय सामाजिक घटनाएँ हैं जिन्हें वैज्ञानिक विधियों द्वारा प्रमाणित किया जा सकता है।

13. समाजशास्त्र का अध्ययन सामाजिक नियोजन व शहरी नियोजन में कैसे उपयोगी है?

How is the study of sociology useful in social planning & urban planning?

उत्तर: समाजशास्त्र का अध्ययन सामाजिक नियोजन और शहरी नियोजन में निम्नलिखित रूपों में उपयोगी है:

  • सामाजिक आवश्यकताओं की पहचान: समाजशास्त्र समुदायों की वास्तविक आवश्यकताओं और समस्याओं को समझने में मदद करता है, जिससे नियोजन अधिक प्रभावी होता है।
  • सामाजिक संरचना का विश्लेषण: यह जाति, वर्ग, परिवार और अन्य सामाजिक समूहों की भूमिका को समझने में सहायता करता है, जो शहरी विकास में महत्वपूर्ण है।
  • सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय कारक: समाजशास्त्र जनसंख्या वितरण, प्रवासन और सांस्कृतिक विविधता जैसे कारकों का अध्ययन करके शहरी नियोजन को अधिक समावेशी बनाता है।
  • नीति निर्माण में सहायता: यह सामाजिक नीतियों के प्रभाव का मूल्यांकन करने और उन्हें सुधारने में मार्गदर्शन प्रदान करता है।

14. निम्न पुस्तकों का सम्बन्ध जिन लेखकों से है उनका नाम बताइए:

पुस्तक (Book) लेखक (Author)
(अ) रीजनल सोशियोलोजी राधाकमल मुखर्जी
(ब) कल्चर एण्ड सोसाइटी रॉबर्ट बियरस्टेड
(स) भारतीय युवकों की समस्याएँ एस.एन. शर्मा
(द) भारतीय ग्रामीण समाजशास्त्र ए.आर. देसाई
(य) भारतीय गाँव एम.एन. श्रीनिवास
(र) इण्डियन साधु जी.एस. घुर्ये

प्रश्न पत्र : समाजशास्त्र (Sociology) – SS-27-1-2011

खंड – 5 (प्रश्न संख्या 20 से 22)

20. निम्नलिखित पुस्तकों से संबंधित लेखकों के नाम बताइए :

Give names of the writers who are related to the following books :

  1. Regional Sociology
  2. Culture & Society
  3. Problems of Indian Youth
  4. Indian Rural Sociology
  5. Indian Village
  6. Indian Sadhus

उत्तर / Answer:

  • (a) Regional Sociology – Radhakamal Mukerjee
  • (b) Culture & Society – M.N. Srinivas
  • (c) Problems of Indian Youth – M.S. Gore
  • (d) Indian Rural Sociology – A.R. Desai
  • (e) Indian Village – S.C. Dube
  • (f) Indian Sadhus – G.S. Ghurye

21. जी० एस० घुर्ये का भारतीय समाजशास्त्र में योगदान की विवेचना कीजिए।

Discuss the contribution of G.S. Ghurye to Indian Sociology.

उत्तर / Answer:

जी० एस० घुर्ये (G.S. Ghurye) को भारतीय समाजशास्त्र का जनक माना जाता है। उनका योगदान निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  • ऐतिहासिक एवं तुलनात्मक दृष्टिकोण: घुर्ये ने भारतीय समाज के अध्ययन में ऐतिहासिक और तुलनात्मक दृष्टिकोण अपनाया।
  • जाति व्यवस्था का अध्ययन: उन्होंने 'जाति और वर्ग' (Caste and Class) तथा 'भारतीय जातियाँ' (Indian Castes) पर महत्वपूर्ण कार्य किया।
  • जनजातीय अध्ययन: उन्होंने भारतीय जनजातियों के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन का गहन अध्ययन किया।
  • सांस्कृतिक अध्ययन: 'भारतीय साधु' (Indian Sadhus) और 'भारतीय नृत्य' जैसे विषयों पर उन्होंने शोध किया।
  • संस्थागत योगदान: उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र विभाग की स्थापना की और अनेक प्रतिभाशाली समाजशास्त्री तैयार किए।

22. भारत में राष्ट्रवाद का उदय कैसे हुआ? अपने विचार लिखिए।

Write your views about the emergence of Nationalism in India.

उत्तर / Answer:

भारत में राष्ट्रवाद का उदय निम्नलिखित कारकों के परिणामस्वरूप हुआ:

  • ब्रिटिश शासन का एकीकरण: अंग्रेजों ने पूरे भारत को एक प्रशासनिक इकाई में बांध दिया, जिससे एकता की भावना विकसित हुई।
  • आधुनिक शिक्षा का प्रसार: पाश्चात्य शिक्षा ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के विचारों को फैलाया।
  • आर्थिक शोषण: ब्रिटिश आर्थिक नीतियों ने भारतीयों में असंतोष पैदा किया और राष्ट्रवादी भावना को बढ़ावा दिया।
  • सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन: राजा राम मोहन राय, स्वामी विवेकानंद आदि ने सामाजिक जागरण किया।
  • प्रेस और साहित्य: समाचार पत्रों और साहित्य ने राष्ट्रवादी विचारों को जन-जन तक पहुंचाया।
  • राजनीतिक संगठन: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (1885) की स्थापना ने राष्ट्रवादी आंदोलन को एक मंच प्रदान किया।

खंड – 6 (प्रश्न संख्या 23 से 27)

23. प्रकार्य की विशेषताएँ बताइए।

Give the characteristics of function.

उत्तर / Answer:

प्रकार्य (Function) की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • सापेक्षता: प्रकार्य किसी संरचना या इकाई के संदर्भ में ही समझा जा सकता है।
  • योगदान: यह किसी सामाजिक व्यवस्था के रखरखाव या संचालन में योगदान देता है।
  • पुनरावृत्ति: प्रकार्य नियमित और दोहराए जाने वाले कार्यों को संदर्भित करता है।
  • अनुकूलन: यह सामाजिक व्यवस्था को पर्यावरण के अनुकूल बनाने में सहायक होता है।
  • एकीकरण: प्रकार्य सामाजिक व्यवस्था के विभिन्न भागों को एकीकृत करता है।
  • प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष: प्रकार्य प्रत्यक्ष (manifest) या अप्रत्यक्ष (latent) हो सकते हैं।

24. उद्विकास के तीन स्वरूपों के नाम लिखिए।

Give names of the three forms of evolution.

उत्तर / Answer:

उद्विकास (Evolution) के तीन प्रमुख स्वरूप निम्नलिखित हैं:

  1. एकरेखीय उद्विकास (Unilinear Evolution): यह मानता है कि सभी समाज विकास के एक ही क्रम से गुजरते हैं।
  2. बहुरेखीय उद्विकास (Multilinear Evolution): यह मानता है कि विभिन्न समाज अलग-अलग पथों पर विकसित हो सकते हैं।
  3. सार्वभौमिक उद्विकास (Universal Evolution): यह संपूर्ण मानव समाज के विकास के सामान्य सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करता है।

25. संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक उपागम का महत्व पर प्रकाश डालिए।

Highlight the significance of structural & functional approach.

उत्तर / Answer:

संरचनात्मक-प्रकार्यात्मक उपागम (Structural-Functional Approach) का महत्व निम्नलिखित है:

  • समग्र दृष्टिकोण: यह समाज को एक व्यवस्था के रूप में देखता है जिसमें सभी भाग आपस में जुड़े होते हैं।
  • सामाजिक स्थिरता: यह समझने में सहायता करता है कि समाज में संतुलन और स्थिरता कैसे बनी रहती है।
  • संस्थाओं का अध्ययन: यह परिवार, शिक्षा, धर्म जैसी संस्थाओं के कार्यों और योगदान का विश्लेषण करता है।
  • सामाजिक परिवर्तन: यह बताता है कि संरचना में परिवर्तन से प्रकार्यों में कैसे परिवर्तन आता है।
  • तुलनात्मक अध्ययन: यह विभिन्न समाजों की संरचनाओं और प्रकार्यों की तुलना करने में सक्षम बनाता है।

26. समानुपातिक निदर्शन का उदाहरण दीजिए।

Give an example of proportional sampling.

उत्तर / Answer:

समानुपातिक निदर्शन (Proportional Sampling) का उदाहरण:

मान लीजिए किसी विश्वविद्यालय में कुल 10,000 छात्र हैं, जिनमें 6,000 स्नातक (UG) और 4,000 स्नातकोत्तर (PG) हैं। यदि हमें 1,000 छात्रों का नमूना लेना है, तो समानुपातिक निदर्शन में:

  • स्नातक छात्रों की संख्या = (6000/10000) × 1000 = 600
  • स्नातकोत्तर छात्रों की संख्या = (4000/10000) × 1000 = 400

इस प्रकार, नमूने में दोनों समूहों का उनके वास्तविक अनुपात के अनुसार प्रतिनिधित्व होगा।

27. प्राथमिक व द्वितीयक स्रोतों में तीन अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Give three differences between Primary & Secondary sources.

उत्तर / Answer:

क्रम प्राथमिक स्रोत (Primary Source) द्वितीयक स्रोत (Secondary Source)
1. यह मूल डेटा होता है जो शोधकर्ता द्वारा स्वयं एकत्र किया जाता है। यह पहले से उपलब्ध डेटा होता है जिसे किसी अन्य ने एकत्र किया हो।
2. यह अधिक विश्वसनीय और प्रामाणिक होता है। इसमें त्र

23.

अगस्त काम्टे के अनुसार मानव विकास की तीन अवस्था के लिए तीन नियम लिखिए ।

अथवा

इमाइल दुर्खिम के आत्महत्या के तीनों नियम लिखिए । आत्महत्या को कैसे रोक सकते हैं ? समझाइए ।

Write three laws of three stages human development, according August Comte. 2+2+2=6

OR

Write three rules of suicide by Emile Durkheim. How can we check suicides ? Explain it. 3+3=6

उत्तर (अगस्त काम्टे के अनुसार तीन अवस्थाएँ):

  1. धार्मिक अवस्था (Theological Stage): इस अवस्था में मानव सभी घटनाओं को अलौकिक शक्तियों या देवताओं द्वारा समझाता है।
  2. आध्यात्मिक अवस्था (Metaphysical Stage): इसमें अलौकिक शक्तियों के स्थान पर अमूर्त अवधारणाओं (जैसे प्रकृति) को कारण माना जाता है।
  3. वैज्ञानिक अवस्था (Positive Stage): इस अवस्था में मानव वैज्ञानिक विधियों और प्रेक्षणों के आधार पर घटनाओं की व्याख्या करता है।

उत्तर (इमाइल दुर्खिम के आत्महत्या के तीन नियम):

  1. स्वार्थी आत्महत्या (Egoistic Suicide): जब व्यक्ति समाज से अलग-थलग हो जाता है और सामाजिक बंधन कमजोर हो जाते हैं।
  2. परार्थी आत्महत्या (Altruistic Suicide): जब व्यक्ति समाज के अत्यधिक दबाव या समूह के हित के लिए आत्महत्या करता है।
  3. अनोमिक आत्महत्या (Anomic Suicide): जब सामाजिक नियमों में अचानक परिवर्तन (जैसे आर्थिक संकट) के कारण व्यक्ति भटकाव महसूस करता है।

आत्महत्या रोकने के उपाय:

  • सामाजिक एकीकरण को बढ़ावा देना (परिवार, समुदाय, धार्मिक समूहों के माध्यम से)।
  • मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना।
  • आर्थिक अस्थिरता को कम करने के लिए सामाजिक सुरक्षा जाल बनाना।
  • आत्महत्या के संकेतों को पहचानने और सहायता प्रदान करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना।

24.

व्यक्तिगत प्रलेख सामग्री में किन-किन सामग्रियों को सम्मिलित करेंगे ? विवेचना कीजिए ।

अथवा

सार्वजनिक प्रलेखों में सम्मिलित तथ्यों का उपयोग सामाजिक अनुसंधान में कैसे करेंगे ?

What kinds of material can be assigned to personal document category ? Discuss. 6

OR

How can facts accumulated in public documents be used in social research ? 6

उत्तर (व्यक्तिगत प्रलेख):

व्यक्तिगत प्रलेखों में निम्नलिखित सामग्रियाँ शामिल की जा सकती हैं:

  • डायरी और पत्र: व्यक्ति के निजी विचारों, भावनाओं और अनुभवों को दर्शाते हैं।
  • आत्मकथाएँ और संस्मरण: व्यक्ति के जीवन की घटनाओं का विस्तृत विवरण प्रदान करते हैं।
  • फोटोग्राफ और वीडियो: दृश्य साक्ष्य के रूप में व्यक्तिगत जीवन के पहलुओं को दर्शाते हैं।
  • निजी नोट्स और रेखाचित्र: व्यक्ति की सोच और रचनात्मकता को समझने में मदद करते हैं।
  • साक्षात्कार और मौखिक इतिहास: व्यक्ति के अनुभवों को सीधे रिकॉर्ड करते हैं।

इन सामग्रियों का उपयोग सामाजिक अनुसंधान में व्यक्ति के दृष्टिकोण, सामाजिक संबंधों और सांस्कृतिक संदर्भ को समझने के लिए किया जाता है।

उत्तर (सार्वजनिक प्रलेख):

सार्वजनिक प्रलेखों में सम्मिलित तथ्यों का उपयोग सामाजिक अनुसंधान में निम्न प्रकार से किया जा सकता है:

  • सरकारी रिकॉर्ड: जनगणना, शिक्षा, स्वास्थ्य, और अपराध के आँकड़े सामाजिक प्रवृत्तियों का विश्लेषण करने में सहायक होते हैं।
  • न्यायालय के दस्तावेज: कानूनी मामलों और सामाजिक न्याय के अध्ययन में उपयोगी।
  • समाचार पत्र और मीडिया रिपोर्ट: सार्वजनिक राय और घटनाओं के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
  • शैक्षणिक और शोध रिपोर्ट: पूर्व अध्ययनों के निष्कर्षों का उपयोग नए शोध के लिए आधार के रूप में किया जा सकता है।
  • सांख्यिकीय डेटा: सामाजिक-आर्थिक स्थितियों, जनसंख्या परिवर्तन, और विकास के संकेतकों का विश्लेषण करने में मदद करता है।

इन प्रलेखों का उपयोग करके शोधकर्ता ऐतिहासिक और समकालीन सामाजिक मुद्दों का गहन अध्ययन कर सकते हैं।