RBSE Class 12th 2013 Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2013 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2013
Subject Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2013
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2013 Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2013

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Rajasthan Board Class 12th Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2013 2013 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2013
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2013

संगीत — कण्ठ अथवा वाद्य
(MUSIC — VOCAL OR INSTRUMENTAL)

समय : 3 घण्टे    पूर्णांक : 24

नामांक : ___________    Roll No. : ___________

SS—6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V & I)

No. of Questions : 8+8+7    No. of Printed Pages : 7


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्नपत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must first write his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

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6. गायन विषय लेने वाले छात्र केवल भाग - अ के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें। सितार, सरोद, वायलिन, दिलरुबा अथवा इसराज, बांसुरी व गिटार विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - ब के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें तथा तबला व पखावज विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - स के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें।

Candidates offering Vocal Music should attempt only the questions of Part - A. Candidates offering Sitar, Sarod, Violin, Dilruba or Esraj, Flute and Guitar should attempt only the questions of Part - B and candidates offering Tabla and Pakhawaj should attempt only the questions of Part- C.

7. उत्तर-पुस्तिका के मुखपृष्ठ पर विषय स्पष्ट रूप से लिखें।

Write your subject clearly on the cover page of the answer-book.


भाग - अ (गायन)

PART - A (VOCAL)

1. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए : खटका, ग्राम, वर्ण।

Write short notes on the following : 1+1+1=3

Khatka, Gram, Varna.

Solution:

  • खटका (Khatka): यह एक अलंकार है जिसमें दो या अधिक स्वरों को तेजी से एक साथ बजाया या गाया जाता है, जिससे संगीत में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न होता है।
  • ग्राम (Gram): प्राचीन भारतीय संगीत में स्वरों के समूह को ग्राम कहा जाता है। मुख्यतः दो ग्राम होते हैं - षड्ज ग्राम और मध्यम ग्राम।
  • वर्ण (Varna): संगीत में वर्ण का अर्थ स्वरों के आरोह-अवरोह के क्रम से है। यह राग के स्वरूप को दर्शाता है और चार प्रकार का होता है - स्थायी, आरोही, अवरोही और संचारी।

2. राग का समय सिद्धान्त उदाहरण सहित लिखें।

Write the time of Raag with example. 3

Solution: राग का समय सिद्धान्त भारतीय संगीत में रागों को दिन और रात के विभिन्न समयों से जोड़ता है। प्रत्येक राग को एक विशेष समय पर गाने या बजाने का विधान है, जिससे उसका प्रभाव अधिक होता है। उदाहरण के लिए, राग भैरवी प्रातःकाल (सुबह 6-9 बजे) गाया जाता है, जबकि राग यमन रात्रि के पहले प्रहर (शाम 6-9 बजे) में गाया जाता है। यह सिद्धान्त स्वरों की प्रकृति और वातावरण पर आधारित है।

3. राग बिहाग का परिचय आरोह, अवरोह तथा पकड़ सहित लिखें।

Give an introduction of Raag Bihag with Aroha, Avaroha & Pakad. 3

Solution: राग बिहाग एक लोकप्रिय राग है जो मध्यम और तीव्र स्वरों के प्रयोग से बनता है। इसका परिचय इस प्रकार है:

  • आरोह (Aroha): सा, ग, म, प, नि, सां (कभी-कभी रे और ध भी प्रयोग होते हैं)
  • अवरोह (Avaroha): सां, नि, ध, प, म, ग, रे, सा
  • पकड़ (Pakad): ग म प नि सां, नि ध प म ग रे सा

यह राग मध्यम और तीव्र स्वरों के मिश्रण से मधुर लगता है और इसे रात्रि के दूसरे प्रहर (रात 9-12 बजे) में गाया जाता है।

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4. निम्न स्वरों को पहचानकर राग का नाम बताइये :

Identify the Raag from the given Swaras & name them :

  1. (i) सा ग म प, नि ध, प, ग म ग
    (Sa Ga Ma Pa, Ni Dha, Pa, Ga Ma Ga)

    राग / Raag: राग बिहाग (Raag Bihag)

    कारण / Reason: यह स्वर समूह राग बिहाग के आरोह-अवरोह में प्रयुक्त होता है, जिसमें गंधार (Ga) और निषाद (Ni) को कोमल तथा मध्यम (Ma) को तीव्र प्रयोग किया जाता है। यहाँ 'नि ध' (Ni Dha) और 'ग म ग' (Ga Ma Ga) का प्रयोग बिहाग की विशेषता दर्शाता है।

  2. (ii) ध प म ग रे सा नि ध नि सा
    (Dha Pa Ma Ga Re Sa Ni Dha Ni Sa)

    राग / Raag: राग भैरवी (Raag Bhairavi)

    कारण / Reason: यह स्वर समूह राग भैरवी के अवरोह का भाग है, जिसमें सभी स्वर कोमल (Re, Ga, Dha, Ni) प्रयुक्त होते हैं। 'ध प म ग रे सा' (Dha Pa Ma Ga Re Sa) और 'नि ध नि सा' (Ni Dha Ni Sa) भैरवी की विशिष्ट प्रयोग शैली को दर्शाता है।

5. किसी राग का छोटा ख्याल स्थाई अन्तरे सहित स्वरबद्ध कीजिए ।

Write the Notation of Chhota Khayal of any Raag with Sthai and Antara.

राग / Raag: राग यमन (Raag Yaman)

ताल / Taal: तीन ताल (Teen Taal) – 16 मात्राएँ

लय / Laya: मध्य लय (Madhya Laya)

स्थाई / Sthai:

सा रे गा मा पा धा नि सा | सा नि धा पा मा गा रे सा ||

गा मा पा धा नि सा रे सा | नि धा पा मा गा रे सा रे सा ||

अन्तरा / Antara:

पा मा गा रे सा नि धा पा | मा गा रे सा नि धा पा मा गा ||

गा मा पा धा नि सा रे सा | नि धा पा मा गा रे सा रे सा ||

नोट / Note: यह एक सामान्य स्वरलिपि है। विद्यार्थी अपने पाठ्यक्रम के अनुसार किसी भी राग का छोटा ख्याल लिख सकते हैं।

6. धमार ताल का परिचय दीजिए एवं दुगुन सहित लिपिबद्ध कीजिए ।

Give the introduction of Tal Dhamar with Dugun.

धमार ताल / Dhamar Taal:

  • मात्राएँ / Matras: 14
  • खण्ड / Vibhag: 4 (5 + 2 + 3 + 4)
  • ताली / Tali: 1 (पहली मात्रा पर), 3 (छठी मात्रा पर), 4 (दसवीं मात्रा पर)
  • खाली / Khali: 2 (आठवीं मात्रा पर)
  • सम / Sam: पहली मात्रा

ठेका / Theka (मूल / Mool):

धा | धा | ता | ता | धा | ता | ता | कता | गदि | गेन | धा | ता | ता | धा ||

दुगुन / Dugun (दुगुनी लय / Double Laya):

धाधा | ताता | धाता | ताकता | गदिगेन | धाता | ताधा ||

धाधा | ताता | धाता | ताकता | गदिगेन | धाता | ताधा ||

नोट / Note: दुगुन में प्रत्येक मात्रा को दो भागों में बाँटा जाता है, जिससे लय दोगुनी हो जाती है। उपरोक्त लिपि में एक लाइन में 14 मात्राएँ पूरी होती हैं।

खंड-ब (सितार / सरोद / वायलिन / दिलरुबा अथवा इसराज / बांसुरी / गिटार)

1. निम्न पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें :

जमजमा – यह एक प्रकार का अलंकार या गायन-वादन शैली है जिसमें स्वरों को एक विशेष क्रम में बजाया या गाया जाता है। इसमें स्वरों का तीव्र और मंद गति से आवर्तन होता है, जिससे संगीत में रोचकता और विविधता आती है।

लय और उसके प्रकार – लय संगीत की गति को कहते हैं। इसके तीन प्रकार हैं: विलम्बित (धीमी), मध्य (मध्यम), और द्रुत (तेज)। लय के बिना संगीत अधूरा माना जाता है।

ताल – ताल समय के नियमित विभाजन को कहते हैं। यह संगीत में लयबद्धता प्रदान करता है। ताल के अंतर्गत मात्राएँ, विभाग, ताली-खाली आदि का निर्धारण होता है।

2. आधुनिक भारतीय संगीत का इतिहास संक्षेप में लिखें।

आधुनिक भारतीय संगीत का इतिहास 19वीं शताब्दी से प्रारंभ होता है। इस काल में पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे और पंडित विष्णु दिगम्बर पलुस्कर जैसे विद्वानों ने संगीत को व्यवस्थित रूप दिया। भातखण्डे ने रागों का वर्गीकरण किया और संगीत शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम तैयार किया। पलुस्कर ने संगीत को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य किया। 20वीं शताब्दी में रेडियो, टेलीविजन और फिल्मों के माध्यम से संगीत का प्रसार हुआ। आज भारतीय संगीत शास्त्रीय, उपशास्त्रीय और लोक संगीत के रूप में विश्वभर में प्रसिद्ध है।

3. राग केदार का पूर्ण परिचय दीजिए।

राग केदार – यह एक प्रमुख शास्त्रीय राग है जो कल्याण थाट से उत्पन्न होता है। इसका स्वरूप गंभीर और मधुर है।

  • थाट: कल्याण
  • जाति: औड़व-संपूर्ण (आरोह में 5, अवरोह में 7 स्वर)
  • आरोह: सा म ग प ध नि सां
  • अवरोह: सां नि ध प म ग रे सा
  • वादी स्वर: म (मध्यम)
  • संवादी स्वर: सा (षड्ज)
  • समय: रात्रि का द्वितीय प्रहर
  • पकड़: म ग प ध प म ग रे सा

इस राग में तीव्र मध्यम का प्रयोग होता है और यह भक्ति रस प्रधान है। राग केदार का वातावरण शांत और गंभीर होता है।

4. अपने वाद्य का चित्र बनाकर उसके अंगों का वर्णन कीजिए।

Describe your instrument & its parts with sketch.

उत्तर: यह प्रश्न छात्र द्वारा चुने गए वाद्य पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि वाद्य हारमोनियम है, तो इसके प्रमुख अंग हैं:

  • की-बोर्ड (Keyboard): स्वरों को बजाने के लिए सफेद और काले कीज़।
  • बेलो (Bellows): हवा भरने के लिए पीछे का भाग, जिसे हाथ से दबाया जाता है।
  • रीड्स (Reeds): ध्वनि उत्पन्न करने वाली धातु की पत्तियाँ।
  • स्टॉप्स (Stops): ध्वनि की तीव्रता और स्वर को नियंत्रित करने वाले बटन।
  • बॉडी (Body): लकड़ी का ढाँचा जो सभी अंगों को संभालता है।

(चित्र में हारमोनियम का सामने का दृश्य बनाकर उपरोक्त अंगों को लेबल करें।)

5. निम्न स्वरों को पहचान कर राग का नाम बताइए:

(i) गमपनिसांनिधमगरेसा

(ii) गमपमगमगरेसा।

Identify the Raag from the given Swars & name them:

(i) GaMaPaNi Sa Ni Dha MaGa ReSa

(ii) Ga Ma Pa Ma Ga Ma Ga Re Sa.

उत्तर:

  • (i) राग यमन (Raag Yaman): स्वर समूह "गमपनिसांनिधमगरेसा" राग यमन के आरोह-अवरोह का संकेत है। इसमें तीव्र मध्यम (म) और शुद्ध सभी स्वर हैं।
  • (ii) राग भूपाली (Raag Bhupali): स्वर समूह "गमपमगमगरेसा" राग भूपाली के स्वरों को दर्शाता है, जिसमें केवल पाँच स्वर (सा, रे, ग, प, ध) प्रयोग होते हैं और मध्यम (म) वर्जित है।

6. किसी राग में मसीतखानी गत की स्थाई लिखें।

Write Sthai of Masitkhani gat in any Raag.

उत्तर: मसीतखानी गत एक ध्रुपद शैली की रचना है जो मध्य लय में बजाई जाती है। उदाहरण के लिए, राग यमन में मसीतखानी गत की स्थाई:

स्थाई: सा रे गा मा पा धा नी सां | सां नी धा पा मा गा रे सा ||

(यह गत चार ताल (तीन ताल) में निबद्ध होती है और इसमें मीड़, खटका, आदि अलंकारों का प्रयोग होता है।)

7. तानसेन का जीवन परिचय लिखें।

Write the life history of Tansen.

उत्तर: तानसेन (लगभग 1500-1586) भारतीय शास्त्रीय संगीत के महानतम संगीतकारों में से एक थे। उनका जन्म ग्वालियर के पास बेहटा गाँव में हुआ था। उनके बचपन का नाम रामतनु था। वे संगीत गुरु स्वामी हरिदास और मुहम्मद गौस के शिष्य थे। तानसेन को अकबर के नवरत्नों में से एक माना जाता है। उन्होंने राग दीपक, राग मेघ मल्हार जैसे रागों की रचना की और उन्हें गाने की अद्भुत क्षमता थी। उनकी रचनाएँ ध्रुपद शैली में हैं। उनका निधन आगरा में हुआ और उनकी समाधि ग्वालियर में स्थित है।

8. राग बिहाग व केदार की तुलना कीजिए।

Compare Raag Bihag with Kedar.

उत्तर: राग बिहाग और राग केदार दोनों ही संपूर्ण-संपूर्ण (सात स्वर) राग हैं, लेकिन इनमें अंतर है:

विशेषता राग बिहाग राग केदार
थाट बिलावल थाट कल्याण थाट
आरोह-अवरोह सा ग म प ध नि सां (आरोह में ग और नि पर जोर) सा रे ग म प ध नि सां (सभी स्वर शुद्ध, म तीव्र)
वादी स्वर ग (गंधार) प (पंचम)
संवादी स्वर नि (निषाद) सा (षड्ज)
प्रकृति गंभीर और शांत उज्ज्वल और गंभीर
समय रात्रि का दूसरा प्रहर रात्रि का पहला प्रहर

निष्कर्ष: राग बिहाग में गंधार और निषाद पर विशेष बल दिया जाता है, जबकि राग केदार में तीव्र मध्यम और पंचम प्रमुख हैं। दोनों रागों का वातावरण भिन्न होता है।

भाग - स (तबला / पखावज)

PART - C (Tabla / Pakhawaj)

  1. झपताल तथा सूलताल में तुलना कीजिए।

    Compare Jhaptal with Sultal.

    तुलना:

    • झपताल: इसमें 10 मात्राएँ होती हैं। इसके विभाग 2, 3, 2, 3 मात्राओं के होते हैं। ताली 1, 3, 8 पर और खाली 6 पर होती है। बोल: धिन ना धि धिन ना तीट किट धिन ना।
    • सूलताल: इसमें 10 मात्राएँ होती हैं। इसके विभाग 2, 2, 2, 2, 2 मात्राओं के होते हैं। ताली 1, 3, 5, 7, 9 पर और खाली नहीं होती। बोल: धा धा धिन ता किट धा धिन ता तीट किट।

    मुख्य अंतर: झपताल में खाली (6) होती है जबकि सूलताल में खाली नहीं होती। दोनों की मात्रा संख्या समान (10) है लेकिन विभाग और बोल भिन्न हैं।

  2. धमार ताल की दुगुन एवं चौगुन को लिपिबद्ध कीजिए।

    Write Dugun & Chaugun of Dhamar Taal.

    धमार ताल: 14 मात्राएँ, विभाग 5, 2, 3, 4 मात्राओं के। ताली 1, 6, 11 पर और खाली 13 पर।

    दुगुन (दोगुनी गति): प्रति मात्रा में दो बोल। उदाहरण: धा धा ते ते किट किट धा धा ते ते किट किट धा धा ते ते किट किट धा धा ते ते किट किट (14 मात्राओं में 28 बोल)।

    चौगुन (चौगुनी गति): प्रति मात्रा में चार बोल। उदाहरण: धा धा ते ते किट किट धा धा ते ते किट किट धा धा ते ते किट किट धा धा ते ते किट किट (14 मात्राओं में 56 बोल)।

  3. तबला मिलाने की विधि समझाइये।

    Describe the method of Tabla tuning.

    तबला मिलाने की विधि:

    1. दायाँ तबला (दया): इसे सुर में मिलाने के लिए हथौड़ी से घड़े के किनारे पर हल्की चोट करें। ऊपर से नीचे की ओर चोट करने से सुर ऊँचा होता है और नीचे से ऊपर की ओर चोट करने से सुर नीचा होता है।
    2. बायाँ तबला (बायाँ): इसे मिलाने के लिए घड़े के बीच में गीला मैदा (आटा) लगाकर सुखाएँ। फिर हथौड़ी से घड़े के किनारे पर चोट करके सुर को समायोजित करें।
    3. समन्वय: दोनों तबलों को एक साथ बजाकर सुनें कि वे एक-दूसरे के साथ मेल खाते हैं या नहीं। आवश्यकतानुसार सुर को ठीक करें।
  4. तिलवाड़ा का परिचय व बोलों की चौगुन लिपिबद्ध कीजिए।

    Write the introduction of Teelwara and Chaugun of Bol.

    तिलवाड़ा का परिचय: तिलवाड़ा एक 16 मात्राओं का ताल है। इसके विभाग 4, 4, 4, 4 मात्राओं के होते हैं। ताली 1, 5, 9, 13 पर और खाली नहीं होती। बोल: धा धिन तिन ता तीट किट धिन तिन ता तीट किट धिन तिन ता।

    चौगुन (चौगुनी गति): प्रति मात्रा में चार बोल। उदाहरण: धा धा धा धा धिन धिन धिन धिन तिन तिन तिन तिन ता ता ता ता (16 मात्राओं में 64 बोल)।

  5. एकताल में दो टुकड़े लिखें।

    Write two Tukdas in Ektal.

    एकताल: 12 मात्राएँ, विभाग 2, 2, 2, 2, 2, 2 मात्राओं के। ताली 1, 5, 9, 11 पर और खाली 3, 7 पर।

    टुकड़ा 1: धा धिन धा धा तीट किट धा धिन धा धा तीट किट (12 मात्राएँ)

    टुकड़ा 2: धा तीट किट धा धिन धा तीट किट धा धिन धा (12 मात्राएँ)

SS—6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V & I)

प्रश्न 6

हबीबुद्दीन खाँ अथवा अहमद जान थिरकवा का जीवन परिचय लिखिए।

Write the life history of Habibuddeen Khan or Ahmad Jaan Thirkwa. (3 अंक)

हबीबुद्दीन खाँ का जीवन परिचय

हबीबुद्दीन खाँ (1899-1978) भारत के प्रसिद्ध सितार वादक थे। उनका जन्म मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे मैहर घराने के संगीतकार थे और उस्ताद अलाउद्दीन खाँ के शिष्य थे। उन्होंने सितार वादन में नई तकनीकों का विकास किया और अनेक शिष्यों को प्रशिक्षित किया। उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे सम्मान प्राप्त हुए।


अहमद जान थिरकवा का जीवन परिचय

अहमद जान थिरकवा (1910-1975) प्रसिद्ध तबला वादक थे। उनका जन्म हैदराबाद, सिंध (अब पाकिस्तान) में हुआ था। वे दिल्ली घराने के तबला वादक थे और उस्ताद नाथू खाँ के शिष्य थे। उन्होंने तबला वादन में 'थिरकवा' शैली को लोकप्रिय बनाया। उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

प्रश्न 7

दादरा ताल में दो लग्गी स्वरबद्ध कीजिए।

Write Dadra Taal with two Laggi notation. (4 अंक)

दादरा ताल का परिचय

दादरा ताल 6 मात्राओं का ताल है। इसके दो विभाग होते हैं, प्रत्येक में 3 मात्राएँ। ताली 1ली मात्रा पर और खाली 4थी मात्रा पर होती है।

ताल संकेत: धा धि ना | धा ति ना ||

पहली लग्गी (Laggi 1)

मात्रा 1 2 3 4 5 6
बोल धा गे ना धा ते ना
ताली/खाली ताली खाली

दूसरी लग्गी (Laggi 2)

मात्रा 1 2 3 4 5 6
बोल धा धि ना धा तिन ना
ताली/खाली ताली खाली

नोट: लग्गी में बोलों को ताल के अनुसार बदला जा सकता है। उपरोक्त दो लग्गियाँ दादरा ताल के मूल ढाँचे पर आधारित हैं।