RBSE Class 12th 2014 Business Studies-SS-31-2014 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2014
Subject Business Studies-SS-31-2014
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2014 Business Studies-SS-31-2014

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Rajasthan Board Class 12th Business Studies-SS-31-2014 2014 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014

व्यवसाय अध्ययन
(BUSINESS STUDIES)

समय : 3 घण्टे   |   पूर्णांक : 80

नामांक : _______________    Roll No. : _______________

No. of Questions — 30   |   Sss—3 Ii—Bus. Studies   |   No. of Printed Pages — 7


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first of all his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.

प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

SS—3—Bus. Studies   |   [SS-553]   |   [ Turn over ]

खण्ड - अ / Section - A

1. “प्रबंध सर्वव्यापी है।'' स्पष्ट कीजिए।

"Management is all pervasive." Explain.

उत्तर: प्रबंध सर्वव्यापी है क्योंकि इसकी आवश्यकता सभी प्रकार के संगठनों (लाभकारी, गैर-लाभकारी, सरकारी, निजी) और सभी स्तरों (उच्च, मध्य, निम्न) पर होती है। चाहे कोई छोटा व्यवसाय हो या बड़ा निगम, प्रबंध के बिना संसाधनों का कुशल उपयोग और लक्ष्यों की प्राप्ति संभव नहीं है। यह हर जगह लागू होता है, इसलिए इसे सर्वव्यापी कहा जाता है।

2. “नियोजन एक मानसिक अभ्यास है।'' कैसे ?

"Planning is a mental exercise." How ?

उत्तर: नियोजन एक मानसिक अभ्यास है क्योंकि यह केवल सोचने, विश्लेषण करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया है। इसमें भविष्य के बारे में अनुमान लगाना, विकल्पों का मूल्यांकन करना और सर्वोत्तम मार्ग चुनना शामिल है। यह कोई शारीरिक कार्य नहीं है, बल्कि बुद्धि और विवेक का उपयोग करके किया जाने वाला मानसिक कार्य है।

3. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को वैधानिक निकाय का दर्जा कब दिया गया ?

When was the Securities and Exchange Board of India (SEBI) given a statutory status ?

उत्तर: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को वैधानिक निकाय का दर्जा वर्ष 1992 में दिया गया था।

4. “उद्यमिता सृजनात्मक गतिविधि है।'' कैसे ?

"Entrepreneurship is a creative activity." How ?

उत्तर: उद्यमिता सृजनात्मक गतिविधि है क्योंकि इसमें नए विचारों, उत्पादों, सेवाओं और व्यवसाय मॉडलों का विकास शामिल है। उद्यमी नवाचार करता है, समस्याओं के नए समाधान ढूंढता है और बाजार में नए अवसर पैदा करता है। यह केवल मौजूदा चीजों की नकल नहीं है, बल्कि कुछ नया और मूल्यवान बनाने की प्रक्रिया है।

ड5--37--305. Studies [58-5537]

प्रश्न 5: वैज्ञानिक प्रबंध में 'गति अध्ययन' कैसे किया जाता है?

How is 'Motion Study' done in scientific management?

उत्तर: वैज्ञानिक प्रबंध में गति अध्ययन (Motion Study) फ्रेडरिक डब्ल्यू. टेलर द्वारा प्रतिपादित एक तकनीक है। इसमें किसी कार्य को करने में लगने वाली शारीरिक गतिविधियों का विश्लेषण किया जाता है। इसके लिए कार्य करते समय कर्मचारी की गतिविधियों को फिल्माया या रिकॉर्ड किया जाता है, फिर अनावश्यक गतियों को हटाकर केवल आवश्यक गतियों को बनाए रखा जाता है। इससे कार्य कुशलता बढ़ती है और समय तथा ऊर्जा की बचत होती है।

प्रश्न 6: कर्मचारियों के चयन में 'बुद्धि परीक्षा' से आशय स्पष्ट कीजिए।

Explain the meaning of 'Intelligence test' in selection of employees.

उत्तर: कर्मचारियों के चयन में बुद्धि परीक्षा (Intelligence Test) एक मनोवैज्ञानिक परीक्षण है जो उम्मीदवार की मानसिक क्षमता, तर्कशक्ति, समस्या-समाधान कौशल, और सीखने की क्षमता को मापता है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि उम्मीदवार कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से नई परिस्थितियों में सीख सकता है और निर्णय ले सकता है। यह परीक्षा विशेष रूप से उन पदों के लिए महत्वपूर्ण है जहाँ बौद्धिक क्षमता की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 7: विपणन के क्षेत्र में निष्पादन माप के कोई दो मानकों के नाम बताइए।

Mention the names of any two gauge performance standards in marketing area.

उत्तर: विपणन के क्षेत्र में निष्पादन माप के दो मानक निम्नलिखित हैं:

  1. बिक्री की मात्रा (Sales Volume): एक निश्चित अवधि में बेचे गए उत्पादों की कुल संख्या या मूल्य।
  2. बाजार हिस्सेदारी (Market Share): किसी कंपनी की कुल बाजार बिक्री में हिस्सेदारी का प्रतिशत।

प्रश्न 8: "समन्वय सोचा समझा कार्य है।" कैसे?

"Coordination is a deliberate function." How?

उत्तर: समन्वय (Coordination) एक सोचा-समझा कार्य है क्योंकि यह स्वतः नहीं होता, बल्कि प्रबंधकों द्वारा जानबूझकर और योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है। प्रबंधक विभिन्न विभागों और कर्मचारियों के कार्यों को एक साथ जोड़ने, उनमें सामंजस्य स्थापित करने और संघर्षों को हल करने के लिए सक्रिय प्रयास करते हैं। यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें संचार, बैठकें, और समन्वय समितियों जैसे साधनों का उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 9: "नियोजन समय नष्ट करने वाली प्रक्रिया है।" समझाइए।

"Planning is a time consuming process." Clarify.

उत्तर: नियोजन (Planning) एक समय नष्ट करने वाली प्रक्रिया है क्योंकि इसमें भविष्य के बारे में सोचना, लक्ष्य निर्धारित करना, विकल्पों का मूल्यांकन करना, और विस्तृत योजनाएँ बनाना शामिल है। इसमें डेटा संग्रह, विश्लेषण, और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय में काफी समय लगता है। हालांकि, यह समय की बर्बादी नहीं है, बल्कि एक आवश्यक निवेश है क्योंकि यह भविष्य में होने वाली गलतियों और अनिश्चितताओं को कम करता है, जिससे लंबे समय में समय और संसाधनों की बचत होती है।

प्रश्न 10: हेनरी फेयोल द्वारा प्रतिपादित 'अनुशासन' के सिद्धान्त को स्पष्ट कीजिए।

Explain the principle of 'Discipline' propounded by Henri Fayol.

उत्तर: हेनरी फेयोल के अनुशासन (Discipline) के सिद्धांत के अनुसार, संगठन में सफलता के लिए सभी स्तरों पर अनुशासन आवश्यक है। अनुशासन का अर्थ है संगठन के नियमों, नीतियों और समझौतों का पालन करना। फेयोल के अनुसार, अनुशासन के लिए आवश्यक है:

  • सभी स्तरों पर अच्छे नेता (Good superiors at all levels)
  • स्पष्ट और न्यायसंगत समझौते (Clear and fair agreements)
  • उल्लंघन पर उचित दंड (Judicious application of penalties)

अनुशासन केवल कर्मचारियों के लिए नहीं, बल्कि प्रबंधकों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यह संगठन में स्थिरता और सुचारू संचालन सुनिश्चित करता है।


खण्ड - ब (Section - B)

प्रश्न 11: एक प्रबंधक के रूप में निजीकरण के कारण व्यवसाय में हो रहे परिवर्तनों को बताइए।

As a manager mention the changes taking place in business due to privatisation.

उत्तर: निजीकरण (Privatisation) के कारण व्यवसाय में निम्नलिखित परिवर्तन हो रहे हैं:

  1. प्रतिस्पर्धा में वृद्धि: सरकारी एकाधिकार समाप्त होने से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिससे गुणवत्ता और सेवा में सुधार हुआ है।
  2. दक्षता और लाभप्रदता पर ध्यान: निजी क्षेत्र लाभ कमाने पर केंद्रित होता है, जिससे लागत कम करने और संसाधनों के कुशल उपयोग पर जोर दिया जाता है।
  3. नवाचार और प्रौद्योगिकी: प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
  4. ग्राहक केंद्रित दृष्टिकोण: ग्राहकों की संतुष्टि और उनकी जरूरतों को प्राथमिकता दी जाने लगी है।
  5. वैश्वीकरण: निजीकरण ने भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए प्रेरित किया है।

प्रश्न 12: विशिष्टीकरण के आधार पर कार्यात्मक संगठन एवं प्रभागीय संगठन में अन्तर बताइए।

Mention the difference between functional structure and divisional structure on the basis of specialisation.

उत्तर: विशिष्टीकरण (Specialisation) के आधार पर कार्यात्मक संगठन और प्रभागीय संगठन में निम्नलिखित अंतर हैं:

आधार कार्यात्मक संगठन (Functional Structure) प्रभागीय संगठन (Divisional Structure)
विशिष्टीकरण का आधार कार्यों (जैसे उत्पादन, विपणन, वित्त) के आधार पर विशिष्टीकरण होता है। उत्पादों, सेवाओं या भौगोलिक क्षेत्रों के आधार पर विशिष्टीकरण होता है।
विशेषज्ञता का स्तर प्रत्येक कार्य क्षेत्र में गहन विशेषज्ञता विकसित होती है। प्रत्येक प्रभाग में विभिन्न कार्यों की विशेषज्ञता होती है, लेकिन उत्पाद/क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित होता है।
उदाहरण एक कंपनी में अलग-अलग विभाग: उत्पादन, बिक्री, लेखा। एक कंपनी में अलग-अलग प्रभाग: कार प्रभाग, ट्रक प्रभाग।

3. उद्यमिता विकास में संभाव्यता विश्लेषण के पहलू को चार्ट द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

Show with the help of a chart the aspects of feasibility analysis in entrepreneurship development.

संभाव्यता विश्लेषण के पहलू (Aspects of Feasibility Analysis):

संभाव्यता विश्लेषण
    │
    ├── बाजार संभाव्यता (Market Feasibility)
    ├── तकनीकी संभाव्यता (Technical Feasibility)
    ├── वित्तीय संभाव्यता (Financial Feasibility)
    ├── संगठनात्मक संभाव्यता (Organizational Feasibility)
    └── आर्थिक/सामाजिक संभाव्यता (Economic/Social Feasibility)

4. प्रशिक्षण व विकास में कोई दो अन्तर बताइए।

Mention any two differences between training and development.

क्रम प्रशिक्षण (Training) विकास (Development)
1. यह वर्तमान कार्य से संबंधित कौशल सिखाता है। यह भविष्य के कार्यों के लिए समग्र क्षमता बढ़ाता है।
2. इसका उद्देश्य अल्पकालिक प्रदर्शन सुधारना है। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक व्यक्तिगत विकास है।

5. औपचारिक सम्प्रेषण के निम्न तंत्रों को चार्ट द्वारा प्रदर्शित कीजिए :

i) चक्र (Wheel)   ii) बिलोम ए (Inverted V)

Show the following networks of formal communication through a chart:

i) चक्र तंत्र (Wheel Network):

        A
       /|\
      / | \
     B--C--D
        |
        E
(केंद्रीय व्यक्ति C से सभी जुड़े हैं)

ii) बिलोम ए तंत्र (Inverted V Network):

        A
       / \
      B   C
     /     \
    D       E
(संचार ऊपर से नीचे की ओर शाखाबद्ध होता है)

6. एक उद्यमी के रूप में विनिमय सम्बन्धों के विकास हेतु आप किस तरह योगदान प्रदान करेंगे?

As an entrepreneur how will you contribute in developing exchange relationship?

एक उद्यमी के रूप में विनिमय सम्बन्धों के विकास हेतु मैं निम्नलिखित तरीकों से योगदान दूंगा:

  • विश्वास निर्माण: गुणवत्तापूर्ण उत्पाद और समय पर सेवा प्रदान करके ग्राहकों और आपूर्तिकर्ताओं का विश्वास जीतना।
  • पारस्परिक लाभ: ऐसे सौदे करना जो दोनों पक्षों (खरीदार और विक्रेता) के लिए लाभदायक हों।
  • सूचना साझाकरण: बाजार की जानकारी और फीडबैक साझा करके संबंधों को मजबूत बनाना।
  • दीर्घकालिक साझेदारी: अल्पकालिक लाभ के बजाय दीर्घकालिक सहयोग पर ध्यान देना।

7. व्यावसायिक क्रियाओं पर आर्थिक पर्यावरण के प्रभाव को स्पष्ट कीजिए।

Explain the effect of economic environment on business activities.

आर्थिक पर्यावरण का व्यावसायिक क्रियाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है:

  • मांग पर प्रभाव: आय स्तर और मुद्रास्फीति के कारण उत्पादों की मांग बढ़ या घट सकती है।
  • लागत पर प्रभाव: कच्चे माल की कीमतें, ब्याज दरें और मजदूरी उत्पादन लागत को प्रभावित करती हैं।
  • निवेश पर प्रभाव: आर्थिक नीतियां (जैसे कर दरें) निवेश निर्णयों को प्रभावित करती हैं।
  • रोजगार पर प्रभाव: आर्थिक मंदी में रोजगार घटता है, जबकि वृद्धि में बढ़ता है।

8. वितरण के 'शून्य स्तरीय माध्यम' को चार्ट द्वारा प्रदर्शित कीजिए।

Show with the help of a chart 'zero level channel' of distribution.

शून्य स्तरीय माध्यम (Zero Level Channel) - प्रत्यक्ष वितरण:

उत्पादक (Producer) ────────────→ उपभोक्ता (Consumer)
        (कोई बिचौलिया नहीं)

इसमें उत्पादक सीधे उपभोक्ता को उत्पाद बेचता है, जैसे किसान द्वारा सब्जी सीधे बेचना या ऑनलाइन स्टोर से सीधी खरीद।

खण्ड - स (Section - C)

20. चालू सम्पत्तियों के उदाहरण तरलता क्रम में बताइए।

Mention the examples of current assets in order of liquidity.

उत्तर: चालू सम्पत्तियों को तरलता (Liquidity) के क्रम में निम्नानुसार व्यवस्थित किया जाता है, अर्थात जो सबसे अधिक तरल (आसानी से नकदी में बदलने योग्य) होती है, उसे पहले रखा जाता है:

  1. नकद एवं बैंक शेष (Cash and Bank Balance) – सबसे अधिक तरल।
  2. विपणन योग्य प्रतिभूतियाँ (Marketable Securities) – जैसे शेयर, डिबेंचर जिन्हें तुरंत बेचा जा सके।
  3. प्राप्य विपत्र (Bills Receivable) – अल्पकालिक विपत्र जो जल्द देय हों।
  4. देनदार (Debtors) – जिनसे शीघ्र भुगतान प्राप्त होने की संभावना हो।
  5. स्टॉक/इन्वेंटरी (Stock/Inventory) – कच्चा माल, कार्य-प्रगति, तैयार माल (सबसे कम तरल)।

21. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत विवाद निवारण एजेंसी के रूप में राष्ट्रीय कमीशन की भूमिका को समझाइए।

Explain the role of 'National Commission' as a redressal agency under the Consumer Protection Act.

उत्तर: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (1986) के अंतर्गत त्रिस्तरीय विवाद निवारण तंत्र है, जिसमें राष्ट्रीय आयोग (National Commission) सर्वोच्च स्तर पर कार्य करता है। इसकी भूमिका निम्नलिखित है:

  • अपीलीय प्राधिकारी: यह राज्य आयोग के आदेशों के विरुद्ध अपील सुनता है।
  • मूल अधिकारिता: यह उन शिकायतों को सुनता है जिनमें माल या सेवा का मूल्य ₹1 करोड़ से अधिक हो।
  • पर्यवेक्षीय भूमिका: यह राज्य और जिला आयोगों के कार्यों की निगरानी करता है तथा उनके आदेशों को रद्द या संशोधित कर सकता है।
  • अंतिम निर्णय: इसके निर्णय के विरुद्ध केवल उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकती है।

22. प्रबन्ध के 'सामाजिक उद्देश्य' को स्पष्ट कीजिए।

Explain the 'social objective' of management.

उत्तर: प्रबंधन के सामाजिक उद्देश्य का तात्पर्य है कि संगठन को केवल लाभ कमाने पर ध्यान न देकर समाज के कल्याण के लिए भी कार्य करना चाहिए। इसमें शामिल हैं:

  • गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उचित मूल्य पर उपलब्ध कराना।
  • पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण।
  • रोजगार के अवसर सृजित करना।
  • सामुदायिक विकास कार्यक्रमों में भागीदारी (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य)।
  • करों का समय पर भुगतान करके राष्ट्रीय आय में योगदान देना।

23. हेनरी फेयोल के 'सोपान श्रृंखला' को स्पष्ट कीजिए।

Explain Henri Fayol's scalar chain.

उत्तर: हेनरी फेयोल के अनुसार, सोपान श्रृंखला (Scalar Chain) वह श्रृंखला है जो किसी संगठन में सर्वोच्च पद से लेकर निम्नतम पद तक अधिकार की रेखा को दर्शाती है। यह संचार और आदेशों के प्रवाह का मार्ग निर्धारित करती है।

  • सिद्धांत: प्रत्येक कर्मचारी को अपने तत्काल वरिष्ठ से आदेश लेना चाहिए और अपने तत्काल अधीनस्थ को आदेश देना चाहिए।
  • गंगा पुल (Gang Plank): फेयोल ने यह भी कहा कि यदि दो विभागों के कर्मचारियों को शीघ्र संवाद करना हो, तो वे सीधे संवाद कर सकते हैं, बशर्ते उनके वरिष्ठों को इसकी जानकारी हो। इससे समय की बचत होती है।

24. नियंत्रण में 'तरलता अनुपात' एवं 'शोधन क्षमता अनुपात' को किन्हीं दो उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए।

Explain 'Liquidity ratio' and 'Solvency ratio' in control through any two examples.

उत्तर: नियंत्रण में वित्तीय अनुपातों का उपयोग कंपनी की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए किया जाता है।

तरलता अनुपात (Liquidity Ratio): यह कंपनी की अल्पकालिक देनदारियों को चुकाने की क्षमता को मापता है।

  • उदाहरण 1: चालू अनुपात (Current Ratio) = चालू सम्पत्तियाँ / चालू देनदारियाँ। आदर्श अनुपात 2:1 है।
  • उदाहरण 2: त्वरित अनुपात (Quick Ratio) = (चालू सम्पत्तियाँ - स्टॉक) / चालू देनदारियाँ। आदर्श अनुपात 1:1 है।

शोधन क्षमता अनुपात (Solvency Ratio): यह कंपनी की दीर्घकालिक देनदारियों को चुकाने की क्षमता को मापता है।

  • उदाहरण 1: ऋण-समता अनुपात (Debt-Equity Ratio) = कुल ऋण / कुल समता (शेयरधारकों का कोष)।
  • उदाहरण 2: ब्याज भुगतान क्षमता अनुपात (Interest Coverage Ratio) = EBIT / ब्याज व्यय।

25. “ऋण-समता अनुपात” की गणना किस प्रकार की जाती है?

How is the 'debt-equity ratio' calculated?

उत्तर: ऋण-समता अनुपात (Debt-Equity Ratio) एक शोधन क्षमता अनुपात है जो कंपनी के वित्तीय उत्तोलन को दर्शाता है। इसकी गणना निम्न सूत्र से की जाती है:

ऋण-समता अनुपात = कुल ऋण (बाह्य ऋण) / शेयरधारकों का कोष (समता)

  • कुल ऋण: इसमें दीर्घकालिक ऋण, डिबेंचर, बैंक ऋण आदि शामिल हैं।
  • शेयरधारकों का कोष: इसमें समता अंश पूंजी, प्रतिधारित आय, आरक्षित निधि आदि शामिल हैं।

उदाहरण: यदि किसी कंपनी का कुल ऋण ₹10,00,000 और शेयरधारकों का कोष ₹20,00,000 है, तो अनुपात = 10,00,000 / 20,00,000 = 0.5:1 होगा।

26. एक प्रबंधक के रूप में चयन प्रक्रिया के महत्वपूर्ण दो चरणों को बताइए।

As a manager mention two important steps in the process of selection.

उत्तर: चयन प्रक्रिया (Selection Process) में उपयुक्त उम्मीदवारों का चुनाव किया जाता है। एक प्रबंधक के रूप में दो महत्वपूर्ण चरण निम्नलिखित हैं:

  1. साक्षात्कार (Interview): यह एक औपचारिक बातचीत है जिसमें उम्मीदवार के ज्ञान, कौशल, व्यक्तित्व और नौकरी के प्रति अनुकूलता का मूल्यांकन किया जाता है। यह चरण उम्मीदवार को संगठन के बारे में जानकारी देने का भी अवसर प्रदान करता है।
  2. संदर्भ जांच (Reference Check): इसमें उम्मीदवार द्वारा दिए गए संदर्भों (पूर्व नियोक्ता, शिक्षक आदि) से संपर्क करके उसकी पृष्ठभूमि, कार्य अनुभव और चरित्र की पुष्टि की जाती है। इससे नियुक्ति में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होती है।

26. सेबी के सुरक्षात्मक कार्य बताइए।

Mention protective functions of SEBI.

सेबी (SEBI) के सुरक्षात्मक कार्य निम्नलिखित हैं:

  1. निवेशकों के हितों की रक्षा करना और उन्हें धोखाधड़ी से बचाना।
  2. प्रतिभूति बाजार में अनुचित व्यापार प्रथाओं (जैसे इनसाइडर ट्रेडिंग) को रोकना।
  3. निवेशकों को शिक्षित करना और उन्हें बाजार के बारे में जागरूक करना।
  4. बाजार में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और गलत सूचना के प्रसार को रोकना।
  5. निवेशकों की शिकायतों के निवारण के लिए तंत्र स्थापित करना।
  6. बाजार मध्यस्थों (जैसे ब्रोकर, डीलर) के आचरण को विनियमित करना।

27. नियोजन में 'प्रक्रिया' को स्पष्ट कीजिए।

Explain 'Procedure' in planning.

नियोजन में प्रक्रिया (Procedure) का अर्थ: प्रक्रिया एक विशिष्ट कार्य को करने के लिए निर्धारित चरणों की एक श्रृंखला है। यह बताती है कि किसी कार्य को किस क्रम में और कैसे किया जाना चाहिए।

प्रक्रिया की विशेषताएँ:

  • यह कार्य करने की एक निश्चित विधि है।
  • यह समय और संसाधनों की बचत करती है।
  • यह कार्यों में एकरूपता और मानकीकरण लाती है।
  • यह नियोजन का एक महत्वपूर्ण तत्व है जो नीतियों को लागू करने में मदद करता है।

खण्ड - द (Section - D)

28. एक प्रबंधक के रूप में किसी व्यावसायिक उद्यम में विकेन्द्रीकरण के महत्व को समझाइए।

अथवा

एक प्रबंधक के रूप में किसी व्यावसायिक उद्यम में अधिकार अन्तरण के महत्व को समझाइए।

As a manager explain the importance of decentralisation in a business enterprise.

OR

As a manager explain the importance of delegation in a business enterprise.

विकेन्द्रीकरण (Decentralisation) का महत्व:

  1. त्वरित निर्णय: निचले स्तर पर अधिकार होने से निर्णय जल्दी लिए जा सकते हैं।
  2. प्रबंधकीय विकास: अधीनस्थों को निर्णय लेने का अवसर मिलता है, जिससे उनका कौशल विकसित होता है।
  3. प्रबंधकों पर बोझ कम: शीर्ष प्रबंधकों को रणनीतिक कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का समय मिलता है।
  4. प्रेरणा में वृद्धि: अधीनस्थों को जिम्मेदारी मिलने से वे अधिक प्रेरित होते हैं।
  5. बेहतर नियंत्रण: छोटी इकाइयों पर नियंत्रण आसान और प्रभावी होता है।
  6. विविधता प्रबंधन: विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुसार निर्णय लिए जा सकते हैं।

अधिकार अन्तरण (Delegation) का महत्व:

  1. कार्य कुशलता: कार्यों का उचित वितरण होने से संगठन की दक्षता बढ़ती है।
  2. प्रबंधकीय विकास: अधीनस्थों को नए कौशल सीखने का अवसर मिलता है।
  3. प्रेरणा: जिम्मेदारी मिलने से कर्मचारियों का मनोबल बढ़ता है।
  4. विशेषज्ञता का उपयोग: विशेषज्ञों को उनके क्षेत्र में निर्णय लेने की स्वतंत्रता मिलती है।
  5. शीर्ष प्रबंधन को राहत: वरिष्ठ प्रबंधक महत्वपूर्ण कार्यों पर ध्यान दे सकते हैं।
  6. निरंतरता: प्रबंधक की अनुपस्थिति में भी कार्य जारी रहता है।

29. निर्देशन में पर्यवेक्षण के महत्व के किन्हीं छः बिन्दुओं को स्पष्ट कीजिए।

अथवा

संगठन में प्रभावी संप्रेषण की सांकेतिक बाधाओं को स्पष्ट कीजिए।

Explain any six points of importance of supervision in direction.

OR

Explain the semantic barriers of effective communication in organisation.

पर्यवेक्षण (Supervision) के महत्व के छः बिन्दु:

  1. कार्य की निगरानी: पर्यवेक्षक यह सुनिश्चित करता है कि कार्य योजना के अनुसार हो रहा है।
  2. मार्गदर्शन: कर्मचारियों को कार्य करने का सही तरीका बताया जाता है।
  3. प्रेरणा: पर्यवेक्षक कर्मचारियों को प्रोत्साहित करके उनका मनोबल बढ़ाता है।
  4. समन्वय: विभिन्न कर्मचारियों के कार्यों में समन्वय स्थापित करता है।
  5. नियंत्रण: कार्य की प्रगति की जाँच करके विचलन को सुधारता है।
  6. प्रतिक्रिया: कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के बारे में प्रतिक्रिया प्रदान करता है।

सांकेतिक बाधाएँ (Semantic Barriers):

  1. भाषा की बाधा: अलग-अलग भाषाएँ या बोलियाँ संप्रेषण को कठिन बनाती हैं।
  2. शब्दों के अर्थ में भिन्नता: एक ही शब्द के अलग-अलग अर्थ हो सकते हैं (जैसे 'बैंक' का अर्थ नदी किनारा या वित्तीय संस्थान)।
  3. तकनीकी शब्दावली: विशेषज्ञ शब्दों का उपयोग सामान्य कर्मचारियों के लिए समझना मुश्किल होता है।
  4. अस्पष्ट अभिव्यक्ति: स्पष्ट रूप से न बताने से गलतफहमी होती है।
  5. अनुवाद की समस्या: एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद करने पर अर्थ बदल सकता है।
  6. पूर्वाग्रह: शब्दों के प्रति व्यक्तिगत धारणाएँ संप्रेषण को प्रभावित करती हैं।

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