RBSE Class 12th 2014 Chemistry-SS-41-2014 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2014 |
| Subject | Chemistry-SS-41-2014 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2014 Chemistry-SS-41-2014
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Rajasthan Board Class 12th Chemistry-SS-41-2014 2014 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014
रसायन विज्ञान
CHEMISTRY
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 56
नोट : समीकरणों को आवश्यक शर्तों सहित संतुलित रूप में लिखिए।
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
No. of Questions — 30 SS—4 — Chem.
No. of Printed Pages — 5
SS—4 —Chem. | SS-554 | [ Turn over
प्रश्न संख्या अंक प्रत्येक प्रश्न
| प्रश्न संख्या | अंक प्रत्येक प्रश्न |
|---|---|
| -3 | - |
| 4-24 | 2 |
| 25-27 | 3 |
| 28-30 | 4 |
Q. Nos. Marks per question
| Q. Nos. | Marks per question |
|---|---|
| -3 | - |
| 4-24 | 2 |
| 25-27 | 3 |
| 28-30 | 4 |
प्रश्न संख्या 2, 27, 28, 29 व 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।
Question Nos. 2, 27, 28, 29 and 30 have internal choices.
1. कोई धातु अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था केवल ऑक्साइड अथवा फ्लुओराइड में ही क्यों प्रदर्शित करती है ?
Why is the highest oxidation state of a metal exhibited in its oxide or fluoride only ?
उत्तर: ऑक्सीजन और फ्लुओरीन अत्यधिक विद्युत-ऋणात्मक तत्व हैं। ये धातु से इलेक्ट्रॉनों को आसानी से ग्रहण कर लेते हैं, जिससे धातु अपनी उच्चतम ऑक्सीकरण अवस्था प्राप्त कर सकती है। ऑक्साइड और फ्लुओराइड में छोटे आकार और उच्च विद्युत-ऋणात्मकता के कारण धातु के सभी संयोजी इलेक्ट्रॉनों का उपयोग संभव होता है।
2. आप एक पद में सोडियम एसिटेट को मेथेन में परिवर्तित कैसे करेंगे ?
How will you convert sodium acetate to methane in one step ?
उत्तर: सोडियम एसिटेट को सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) और कैल्शियम ऑक्साइड (CaO) के मिश्रण के साथ गर्म करने पर मेथेन गैस प्राप्त होती है। यह अभिक्रिया डीकार्बोक्सिलीकरण कहलाती है।
रासायनिक समीकरण: CH₃COONa + NaOH →(CaO, Δ)→ CH₄ + Na₂CO₃
3. आप फिनॉल को बैन्जीन में परिवर्तित कैसे करेंगे ?
How will you convert phenol to benzene ?
उत्तर: फिनॉल को जिंक धूल (Zn dust) के साथ गर्म करने पर बैन्जीन प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया में फिनॉल का हाइड्रॉक्सिल समूह (-OH) हट जाता है और हाइड्रोजन परमाणु जुड़ जाता है।
रासायनिक समीकरण: C₆H₅OH + Zn →(Δ)→ C₆H₆ + ZnO
5क-4कनलकाशा. SS-554
प्रश्न 3 (Page 3)
प्रश्न: जब एथेनॉल की क्रिया सांद्र H₂SO₄ के साथ 443 K पर कराई जाती है, तब मुख्य उत्पाद क्या है?
What is the major product when ethanol is treated with conc. H₂SO₄ at 443 K?
उत्तर: एथीन (Ethene) मुख्य उत्पाद है।
व्याख्या: एथेनॉल का सांद्र H₂SO₄ के साथ 443 K पर निर्जलीकरण (dehydration) होता है, जिससे एथीन बनता है।
अभिक्रिया: CH₃CH₂OH → CH₂=CH₂ + H₂O (सांद्र H₂SO₄, 443 K)
प्रश्न: बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड की फिनॉल के साथ युग्मन अभिक्रिया लिखिए।
Write the coupling reaction of benzene diazonium chloride with phenol.
उत्तर: यह एक युग्मन अभिक्रिया (coupling reaction) है जिसमें p-हाइड्रॉक्सीएज़ोबेन्जीन बनता है।
C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + C₆H₅OH → HO-C₆H₄-N=N-C₆H₅ + HCl
यह अभिक्रिया क्षारीय माध्यम (pH 9-10) में होती है और नारंगी-लाल रंग का उत्पाद देती है।
प्रश्न: (i) ऐलीफैटिक एवं (ii) ऐरोमैटिक प्राथमिक एमीनों की नाइट्रस अम्ल से अभिक्रियाएँ लिखिए।
Write the reactions of (i) aliphatic and (ii) aromatic primary amines with nitrous acid.
उत्तर:
(i) ऐलीफैटिक प्राथमिक एमीन: RNH₂ + HNO₂ → ROH + N₂ + H₂O (नाइट्रोजन गैस निकलती है)
(ii) ऐरोमैटिक प्राथमिक एमीन: C₆H₅NH₂ + HNO₂ + HCl → C₆H₅N₂⁺Cl⁻ + 2H₂O (बेन्जीन डाइएजोनियम क्लोराइड बनता है, जो 0-5°C पर स्थिर होता है)
प्रश्न: ताप दृढ़ बहुलक क्या हैं?
What are thermosetting polymers?
उत्तर: ताप दृढ़ बहुलक (Thermosetting polymers) वे बहुलक होते हैं जो गर्म करने पर स्थायी रूप से कठोर हो जाते हैं और पुनः पिघलाए नहीं जा सकते। ये त्रिविमीय संरचना (cross-linked structure) बनाते हैं। उदाहरण: बैकेलाइट, मेलामाइन-फॉर्मेल्डिहाइड रेज़िन।
प्रश्न: PHBV बहुलक के एकलकों के नाम लिखिए।
Write the names of the monomers of PHBV polymer.
उत्तर: PHBV (Poly-3-hydroxybutyrate-co-3-hydroxyvalerate) के एकलक हैं:
- 3-हाइड्रॉक्सीब्यूटेनोइक अम्ल (3-hydroxybutanoic acid)
- 3-हाइड्रॉक्सीपेन्टेनोइक अम्ल (3-hydroxypentanoic acid)
प्रश्न: नाइलॉन 6,6 किस प्रकार प्राप्त किया जाता है? अभिक्रिया दीजिए।
How is Nylon 6,6 obtained? Give reaction.
उत्तर: नाइलॉन 6,6 हेक्सामेथिलीनडाइएमीन और एडिपिक अम्ल के संघनन बहुलीकरण (condensation polymerization) द्वारा प्राप्त किया जाता है।
अभिक्रिया: n H₂N-(CH₂)₆-NH₂ + n HOOC-(CH₂)₄-COOH → [-NH-(CH₂)₆-NH-CO-(CH₂)₄-CO-]ₙ + (2n-1) H₂O
यह एक संघनन बहुलक है जिसमें एमाइड आबंध (-CO-NH-) बनते हैं।
प्रश्न 4 (SS—4—Chem. SS-554)
-
वह रासायनिक अभिक्रिया लिखिए जिससे ग्लूकोस में कार्बोनिल समूह की उपस्थिति की पुष्टि होती है।
Write that chemical reaction which confirm the presence of carbonyl group in glucose.
उत्तर: ग्लूकोज में कार्बोनिल समूह की उपस्थिति की पुष्टि निम्नलिखित अभिक्रियाओं द्वारा होती है:
- हाइड्रॉक्सिलामीन से अभिक्रिया: ग्लूकोज हाइड्रॉक्सिलामीन (NH₂OH) से अभिक्रिया करके ऑक्सीम बनाता है, जो कार्बोनिल समूह की उपस्थिति दर्शाता है।
ग्लूकोज + NH₂OH → ग्लूकोज ऑक्सीम + H₂O - हाइड्राजीन से अभिक्रिया: ग्लूकोज हाइड्राजीन (NH₂NH₂) से अभिक्रिया करके हाइड्राजोन बनाता है।
ग्लूकोज + NH₂NH₂ → ग्लूकोज हाइड्राजोन + H₂O - फेनिलहाइड्राजीन से अभिक्रिया: ग्लूकोज फेनिलहाइड्राजीन (C₆H₅NHNH₂) से अभिक्रिया करके फेनिलहाइड्राजोन बनाता है, जो कार्बोनिल समूह की पुष्टि करता है।
ये सभी अभिक्रियाएँ ग्लूकोज में एल्डिहाइड समूह (-CHO) की उपस्थिति को सिद्ध करती हैं।
- हाइड्रॉक्सिलामीन से अभिक्रिया: ग्लूकोज हाइड्रॉक्सिलामीन (NH₂OH) से अभिक्रिया करके ऑक्सीम बनाता है, जो कार्बोनिल समूह की उपस्थिति दर्शाता है।
-
विटामिन A, B, C और D को जल तथा वसा में विलेयता के आधार पर वर्गीकृत कर उनकी तुलना कीजिए।
Classify Vitamins A, B, C and D depending upon their solubility in water and fat and compare them.
उत्तर: विटामिनों को उनकी विलेयता के आधार पर दो वर्गों में बाँटा गया है:
विटामिन वर्ग जल में विलेयता वसा में विलेयता विटामिन A वसा में विलेय अविलेय विलेय विटामिन B जल में विलेय विलेय अविलेय विटामिन C जल में विलेय विलेय अविलेय विटामिन D वसा में विलेय अविलेय विलेय तुलना: विटामिन A और D वसा में विलेय होते हैं, जबकि विटामिन B और C जल में विलेय होते हैं। वसा में विलेय विटामिन शरीर में संचित हो सकते हैं, जबकि जल में विलेय विटामिन शरीर से मूत्र के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं और इन्हें नियमित रूप से लेना आवश्यक होता है।
-
मोनोसेकेराइड क्या होते हैं?
What are monosaccharides?
उत्तर: मोनोसेकेराइड सबसे सरल कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिन्हें जल-अपघटन द्वारा और सरल शर्कराओं में नहीं तोड़ा जा सकता। ये एकल शर्करा इकाई होते हैं। इनका सामान्य सूत्र (CH₂O)ₙ होता है, जहाँ n ≥ 3 होता है। उदाहरण: ग्लूकोज (C₆H₁₂O₆), फ्रक्टोज (C₆H₁₂O₆), गैलेक्टोज (C₆H₁₂O₆)। ये स्वाद में मीठे होते हैं और जल में विलेय होते हैं।
-
हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया लिखिए।
Write Hofmann's bromamide reaction.
उत्तर: हॉफमान ब्रोमेमाइड अभिक्रिया में, एक प्राथमिक एमाइड को ब्रोमीन और क्षार (NaOH या KOH) के साथ अभिकृत करने पर एक प्राथमिक एमीन बनता है जिसमें कार्बन श्रृंखला एक कार्बन कम हो जाती है।
सामान्य अभिक्रिया:
R-CONH₂ + Br₂ + 4NaOH → R-NH₂ + 2NaBr + Na₂CO₃ + 2H₂Oउदाहरण: एसिटामाइड से मेथिलएमीन का निर्माण:
CH₃CONH₂ + Br₂ + 4NaOH → CH₃NH₂ + 2NaBr + Na₂CO₃ + 2H₂Oइस अभिक्रिया में एमाइड से एक कार्बन कम वाला एमीन प्राप्त होता है।
-
क्या होता है जब 1° एवं 2° पृथक ऐल्कोहॉलों का निर्जल क्रोमियम ट्राइऑक्साइड (CrO₃) द्वारा ऑक्सीकरण किया जाता है? रासायनिक समीकरणें लिखिए।
What happens when the 1° and 2° alcohols are oxidised by anhydrous chromium trioxide (CrO₃)? Write chemical equations.
उत्तर: निर्जल क्रोमियम ट्राइऑक्साइड (CrO₃) एक प्रबल ऑक्सीकारक है। यह प्राथमिक और द्वितीयक ऐल्कोहॉलों को ऑक्सीकृत करता है:
- प्राथमिक ऐल्कोहॉल (1°): प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण पहले एल्डिहाइड और फिर कार्बोक्सिलिक अम्ल में होता है।
R-CH₂OH + CrO₃ → R-CHO + H₂O + CrO₂(एल्डिहाइड)
R-CHO + CrO₃ → R-COOH + CrO₂(कार्बोक्सिलिक अम्ल) - द्वितीयक ऐल्कोहॉल (2°): द्वितीयक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण कीटोन में होता है।
R-CHOH-R' + CrO₃ → R-CO-R' + H₂O + CrO₂
उदाहरण:
- एथेनॉल (1°) का ऑक्सीकरण:
CH₃CH₂OH + CrO₃ → CH₃CHO + H₂O + CrO₂(एथेनल) और फिरCH₃CHO + CrO₃ → CH₃COOH + CrO₂(एथेनॉइक अम्ल) - प्रोपेन-2-ऑल (2°) का ऑक्सीकरण:
CH₃CHOHCH₃ + CrO₃ → CH₃COCH₃ + H₂O + CrO₂(प्रोपेनोन)
इस प्रकार, प्राथमिक ऐल्कोहॉल एल्डिहाइड/कार्बोक्सिलिक अम्ल देते हैं, जबकि द्वितीयक ऐल्कोहॉल कीटोन देते हैं।
- प्राथमिक ऐल्कोहॉल (1°): प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण पहले एल्डिहाइड और फिर कार्बोक्सिलिक अम्ल में होता है।
प्रश्न 5. निम्न अभिक्रियाओं की कोटि बताइए :
- (अ) कृत्रिम नाभिकीय क्षय – प्रथम कोटि
- (ब) उच्च दाब पर गैसीय अमोनिया का तप्त Pt सतह पर वियोजन – शून्य कोटि
- (स) एथीन का हाइड्रोजनन – प्रथम कोटि (या छद्म प्रथम कोटि)
- (द) N₂O₅ का अपघटन – प्रथम कोटि
व्याख्या:
- कृत्रिम नाभिकीय क्षय – यह एक प्रथम कोटि की अभिक्रिया है क्योंकि इसकी दर केवल एक अभिकारक (रेडियोधर्मी नाभिक) की सांद्रता पर निर्भर करती है।
- उच्च दाब पर गैसीय अमोनिया का तप्त Pt सतह पर वियोजन – यह शून्य कोटि की अभिक्रिया है क्योंकि उच्च दाब पर Pt सतह पूरी तरह अमोनिया से संतृप्त हो जाती है, जिससे दर सांद्रता पर निर्भर नहीं रहती।
- एथीन का हाइड्रोजनन – यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया है (या छद्म प्रथम कोटि) क्योंकि हाइड्रोजन अधिक मात्रा में ली जाती है, जिससे दर केवल एथीन की सांद्रता पर निर्भर करती है।
- N₂O₅ का अपघटन – यह प्रथम कोटि की अभिक्रिया है क्योंकि इसकी दर N₂O₅ की सांद्रता के समानुपाती होती है।
प्रश्न 6. (अ) सिल्वर परमाणु की मूल अवस्था में पूर्ण भरित 4d-कक्षक (4d¹⁰) हैं, फिर भी यह एक संक्रमण तत्व है। कैसे?
सिल्वर (Ag) का परमाणु क्रमांक 47 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Kr] 4d¹⁰ 5s¹ है। यद्यपि मूल अवस्था में 4d-कक्षक पूर्ण भरित (4d¹⁰) है, फिर भी सिल्वर को संक्रमण तत्व माना जाता है क्योंकि:
- सिल्वर अपने यौगिकों में +1 और +2 ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करता है।
- Ag²⁺ आयन में इलेक्ट्रॉनिक विन्यास [Kr] 4d⁹ होता है, जिसमें d-कक्षक अपूर्ण भरित होता है।
- संक्रमण तत्वों की परिभाषा के अनुसार, वे तत्व जिनमें या तो मूल अवस्था में या सामान्य ऑक्सीकरण अवस्था में d-कक्षक अपूर्ण भरित होते हैं, संक्रमण तत्व कहलाते हैं।
- चूँकि Ag अपनी +2 ऑक्सीकरण अवस्था में अपूर्ण d-कक्षक (4d⁹) रखता है, इसलिए इसे संक्रमण तत्व माना जाता है।
(ब) एक्टिनॉयड आकुंचन समझाइए।
एक्टिनॉयड आकुंचन: एक्टिनॉयड श्रेणी (Th से Lr तक) में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणु तथा आयनिक त्रिज्याओं में क्रमिक कमी को एक्टिनॉयड आकुंचन कहते हैं।
कारण: एक्टिनॉयड श्रेणी में 5f-कक्षकों का क्रमिक भराव होता है। 5f-कक्षकों का नाभिक की ओर कमजोर परिरक्षण प्रभाव होता है, जिससे प्रभावी नाभिकीय आवेश (Zeff) बढ़ता है और इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर अधिक आकर्षित होते हैं, जिससे त्रिज्या घटती है।
प्रभाव: एक्टिनॉयड आकुंचन के कारण एक्टिनॉयड तत्वों के रासायनिक गुणों में समानता आती है और इन्हें पृथक करना कठिन हो जाता है।
6. (a) Silver atom has completely filled d-orbitals (4d10) in its ground state, even then it is a transition element. How?
Answer: Silver (Ag) has the electronic configuration [Kr] 4d10 5s1. Although it has a completely filled 4d10 orbital in its ground state, it is still considered a transition element because:
- It forms ions (like Ag+) where the d-orbital becomes partially filled (4d9).
- It exhibits variable oxidation states (e.g., +1, +2) and forms colored compounds.
- It shows catalytic properties and forms complex compounds, which are characteristic of transition elements.
According to IUPAC, transition elements are those which have partially filled d-orbitals in their ground state or in any of their common oxidation states. Silver fulfills this condition in its +2 oxidation state (Ag2+ has 4d9 configuration).
6. (b) Explain actinoid contraction.
Answer: Actinoid contraction refers to the gradual decrease in atomic and ionic radii of actinoid elements (from Actinium to Lawrencium) as the atomic number increases. This occurs because the 5f electrons are poorly shielded, leading to an increase in effective nuclear charge, which pulls the outer electrons closer to the nucleus. The contraction is more pronounced than in lanthanoids due to the weaker shielding effect of 5f orbitals.
7. निम्नलिखित अभिक्रियाओं से प्राप्त उत्पादों का अनुमान लगाइए :
Predict the products of the following reactions:
-
(a) CH3—CH2—Br + AgCN → (aq. alcohol)
Product: CH3—CH2—NC (Ethyl isocyanide) + AgBr
Explanation: AgCN is covalent in nature. The cyanide ion (CN-) is an ambident nucleophile. In the presence of Ag+, the linkage is through the nitrogen atom (since Ag+ binds to carbon), forming isocyanide (alkyl isocyanide) as the major product.
-
(b) CH3—CH2—Br + KNO2 → (aq. alcohol)
Product: CH3—CH2—NO2 (Nitroethane) + KBr
Explanation: KNO2 is ionic. The nitrite ion (NO2-) is also an ambident nucleophile. With K+, the linkage is through the oxygen atom (forming alkyl nitrite) but in aqueous alcohol, the major product is nitroalkane (through carbon linkage) due to the reaction conditions favoring the formation of the more stable nitro compound.
-
(c) CH3—I + Mg → (dry ether)
Product: CH3—Mg—I (Methyl magnesium iodide, a Grignard reagent)
Explanation: In dry ether, alkyl halides react with magnesium metal to form Grignard reagents. The reaction is carried out in anhydrous conditions to prevent decomposition.
प्रश्न 20
(अ) धातुओं के शुद्धिकरण क्षेत्र में उपसहसंयोजन यौगिकों का अनुप्रयोग एक उदाहरण के साथ समझाइए।
(ब) उपसहसंयोजन यौगिक [Ag(NH₃)₂][Ag(CN)₂] का IUPAC नाम लिखिए।
(a) Explain the applications of coordination compounds in the field of metal purification giving an example.
(b) Write the IUPAC name of [Ag(NH₃)₂][Ag(CN)₂] coordination compound.
(अ) धातुओं के शुद्धिकरण में उपसहसंयोजन यौगिकों का अनुप्रयोग:
उपसहसंयोजन यौगिकों का उपयोग धातुओं के शुद्धिकरण में किया जाता है, विशेषकर निकेल (Ni) के शुद्धिकरण में। उदाहरण के लिए, मॉण्ड प्रक्रम (Mond's process) में निकेल को उसकी अशुद्ध अवस्था से शुद्ध करने के लिए कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस के साथ अभिक्रिया कराकर वाष्पशील उपसहसंयोजन यौगिक निकेल टेट्राकार्बोनिल [Ni(CO)₄] बनाया जाता है। इस यौगिक को गर्म करने पर शुद्ध निकेल धातु प्राप्त होती है।
(ब) IUPAC नाम: [Ag(NH₃)₂][Ag(CN)₂] का IUPAC नाम डाइअम्मीनसिल्वर(I) डाइसायनोआर्जेन्टेट(I) है।
प्रश्न 21
द्वि-लवण तथा संकुल में अन्तर समझाते हुए प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए।
Explain the difference between a double-salt and a complex, giving an example in each case.
| द्वि-लवण (Double Salt) | संकुल (Complex) |
|---|---|
| जल में घोलने पर अपने घटक आयनों में पूर्णतः वियोजित हो जाते हैं। | जल में घोलने पर संकुल आयन या अणु बने रहते हैं, पूर्ण वियोजन नहीं होता। |
| उदाहरण: पोटैशियम फिटकरी [K₂SO₄·Al₂(SO₄)₃·24H₂O] | उदाहरण: पोटैशियम फेरोसायनाइड [K₄[Fe(CN)₆]] |
प्रश्न 22
द्वि-अणुक नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया (SN2) तथा एकाण्विक नाभिकरागी प्रतिस्थापन (SN1) अभिक्रिया की क्रियाविधियों में कोई दो अन्तर बताइए।
Describe any two differences between substitution nucleophilic bimolecular (SN2) and substitution nucleophilic unimolecular (SN1) reaction mechanisms.
| SN2 अभिक्रिया | SN1 अभिक्रिया |
|---|---|
| एक पद में होती है (एक साथ बंध टूटना और बनना)। | दो पदों में होती है (पहले कार्बोधनायक बनता है, फिर नाभिकरागी आक्रमण करता है)। |
| अभिक्रिया की दर दोनों अभिकारकों (एल्किल हैलाइड और नाभिकरागी) पर निर्भर करती है। | अभिक्रिया की दर केवल एल्किल हैलाइड की सांद्रता पर निर्भर करती है। |
प्रश्न 21
एलुमिनियम के निष्कर्षण के लिये वैद्युत अपघटनी सेल का नामांकित चित्र बनाइए एवं इसमें होने वाली सम्पूर्ण अभिक्रिया लिखिए।
अथवा
मंडल परिष्करण प्रक्रम का नामांकित चित्र बनाइए। यह विधि मुख्य रूप से किसमें उपयोगी है ?
Draw labelled diagram of electrolytic cell for the extraction of aluminium and the overall reaction taking place in it.
OR
Draw labelled diagram of Zone refining process. In which this process is useful ?
उत्तर (विकल्प 1 – एलुमिनियम निष्कर्षण सेल)
नामांकित चित्र: वैद्युत अपघटनी सेल में निम्नलिखित भाग होते हैं:
- कैथोड (Cathode): लोहे की टंकी जो ग्रेफाइट से पंक्तिबद्ध होती है (ऋण इलेक्ट्रोड)।
- एनोड (Anode): ग्रेफाइट की छड़ें (धन इलेक्ट्रोड) जो पिघले हुए मिश्रण में डूबी होती हैं।
- विद्युत अपघट्य: पिघला हुआ Al₂O₃ (एलुमिना) + क्रायोलाइट (Na₃AlF₆) + CaF₂ का मिश्रण।
- बाह्य स्रोत: बैटरी से जुड़ा होता है।
सम्पूर्ण अभिक्रिया:
कैथोड पर: Al³⁺ + 3e⁻ → Al (पिघला हुआ एलुमिनियम)
एनोड पर: 2O²⁻ → O₂ + 4e⁻; कार्बन एनोड O₂ से अभिक्रिया कर CO₂ बनाता है: C + O₂ → CO₂
कुल अभिक्रिया: 2Al₂O₃ + 3C → 4Al + 3CO₂
उत्तर (विकल्प 2 – मंडल परिष्करण)
नामांकित चित्र: मंडल परिष्करण प्रक्रम में एक लंबी छड़ (अशुद्ध धातु) को एक गोलाकार तापक (induction coil) से धीरे-धीरे गर्म किया जाता है। तापक छड़ के एक सिरे से दूसरे सिरे तक चलता है, जिससे पिघला हुआ क्षेत्र (molten zone) बनता है और अशुद्धियाँ एक सिरे पर एकत्र हो जाती हैं।
उपयोग: यह विधि मुख्य रूप से अति शुद्ध धातुएँ (जैसे जर्मेनियम, सिलिकॉन, गैलियम) प्राप्त करने में उपयोगी है, विशेषकर अर्धचालक उद्योग में।
प्रश्न 22
किसी अभिक्रिया की अर्धायु क्या है ? प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिये वेग समीकरण से यह पुष्टि कोजिए कि इस अभिक्रिया की अर्धायु अभिक्रियकों की प्रारम्भिक सान्द्रताओं पर निर्भर नहीं होती।
What is half-life period of reaction ? Justify from the rate equation for first order reactions that the half-life period for such reaction is independent of the initial concentrations of the reactants.
उत्तर
अर्धायु काल (Half-life period): किसी अभिक्रिया की अर्धायु वह समय है जिसमें अभिक्रियक की प्रारम्भिक सान्द्रता आधी रह जाती है। इसे t₁/₂ से प्रदर्शित करते हैं।
प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए पुष्टि:
प्रथम कोटि अभिक्रिया का वेग समीकरण है:
k = (2.303/t) log [A]₀/[A]
जहाँ [A]₀ = प्रारम्भिक सान्द्रता, [A] = समय t पर सान्द्रता, k = वेग स्थिरांक।
अर्धायु काल पर, t = t₁/₂ और [A] = [A]₀/2। समीकरण में रखने पर:
k = (2.303/t₁/₂) log ([A]₀ / ([A]₀/2))
k = (2.303/t₁/₂) log 2
k = (2.303 × 0.3010)/t₁/₂
t₁/₂ = 0.693/k
चूँकि k एक स्थिरांक है (दिए गए ताप पर), t₁/₂ का मान [A]₀ पर निर्भर नहीं करता। अतः प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु अभिक्रियकों की प्रारम्भिक सान्द्रता से स्वतंत्र होती है।
23.
(अ) क्या हम CuSO₄ के विलयन को लोहे के पात्र में भण्डारण कर सकते हैं? समझाइए।
(ब) कॉलराऊस का नियम लिखिए एवं एक अनुप्रयोग बताइए।
(a) Can we store CuSO₄ solution in an iron vessel? Explain.
(b) Write Kohlrausch law and give one application of it.
Solution (अ): नहीं, हम CuSO₄ के विलयन को लोहे के पात्र में भण्डारण नहीं कर सकते। क्योंकि लोहा (Fe) ताँबे (Cu) से अधिक अभिक्रियाशील है और CuSO₄ विलयन में Fe, Cu को विस्थापित कर देता है। अभिक्रिया: Fe + CuSO₄ → FeSO₄ + Cu। इससे पात्र में छेद हो जाता है और विलयन दूषित हो जाता है।
Solution (ब): कॉलराऊस का नियम: अनंत तनुता पर किसी विद्युत-अपघट्य की मोलर चालकता, उसके धनायन और ऋणायन की आयनिक चालकताओं के योग के बराबर होती है। Λ°m = λ°+ + λ°−।
एक अनुप्रयोग: दुर्बल विद्युत-अपघट्यों की मोलर चालकता ज्ञात करना, जैसे एसिटिक अम्ल (CH₃COOH) के लिए Λ°m = λ°H⁺ + λ°CH₃COO⁻।
24.
(अ) लोहे के जंग लगने को सम्पूर्ण रासायनिक अभिक्रिया लिखिए।
(ब) डेनियल सेल की सम्पूर्ण अभिक्रिया दीजिए एवं इस सेल के लिए नर्न्स्ट समीकरण का गणितीय रूप लिखिए।
(a) Write the complete chemical reaction of rusting of iron.
(b) Give overall reaction of Daniel cell and write mathematical expression of Nernst equation for it.
Solution (अ): लोहे के जंग लगने की सम्पूर्ण रासायनिक अभिक्रिया:
4Fe + 3O₂ + 2xH₂O → 2Fe₂O₃·xH₂O (जंग)। यह एक रेडॉक्स अभिक्रिया है जिसमें लोहा ऑक्सीकृत होता है और ऑक्सीजन अपचयित होती है।
Solution (ब): डेनियल सेल की सम्पूर्ण अभिक्रिया: Zn(s) + Cu²⁺(aq) → Zn²⁺(aq) + Cu(s)।
नर्न्स्ट समीकरण का गणितीय रूप:
Ecell = E°cell − (RT/nF) ln Q
या Ecell = E°cell − (0.0591/n) log [Zn²⁺]/[Cu²⁺] (25°C पर)।
25.
(अ) यह मानते हुए कि परमाणु एक दूसरे के संपर्क में हैं, सरल घनीय धातु के क्रिस्टल में संकुलन क्षमता की गणना कीजिए।
(ब) आयनिक ठोसों की प्रकृति के आधार पर फ्रेंकेल दोष एवं शॉटको दोष की तुलना कीजिए।
Solution (अ): सरल घनीय (Simple Cubic) क्रिस्टल में प्रति एकक कोष्ठिका में 1 परमाणु होता है। यदि परमाणु त्रिज्या r है और कोर लंबाई a = 2r, तो परमाणु का आयतन = (4/3)πr³ और एकक कोष्ठिका का आयतन = a³ = (2r)³ = 8r³।
संकुलन क्षमता = (परमाणु का आयतन / एकक कोष्ठिका का आयतन) × 100 = [(4/3)πr³ / 8r³] × 100 = (π/6) × 100 ≈ 52.36%।
Solution (ब): फ्रेंकेल दोष में एक आयन अपने स्थान से हटकर अंतराकाशी स्थान में चला जाता है, जिससे रिक्तिका और अंतराकाशी दोष उत्पन्न होते हैं। यह दोष कम समन्वय संख्या वाले आयनिक ठोसों में होता है, जैसे AgCl, ZnS। शॉटको दोष में धनायन और ऋणायन दोनों अपने स्थान से हट जाते हैं, जिससे रिक्तिकाएँ बनती हैं। यह दोष उच्च समन्वय संख्या वाले ठोसों में होता है, जैसे NaCl, KCl। फ्रेंकेल दोष में घनत्व नहीं बदलता, जबकि शॉटको दोष में घनत्व घटता है।
प्रश्न 26
(क) यह मानते हुए कि परमाणु एक-दूसरे को स्पर्श कर रहे हैं, साधारण घनीय धातु क्रिस्टल के लिए पैकिंग दक्षता की गणना कीजिए।
हल: साधारण घनीय (Simple Cubic) जालक में प्रति एकक कोष्ठिका में 1 परमाणु होता है।
- एकक कोष्ठिका के किनारे की लंबाई = a = 2r (जहाँ r = परमाणु की त्रिज्या)
- एकक कोष्ठिका का आयतन = a³ = (2r)³ = 8r³
- एक परमाणु का आयतन = (4/3)πr³
- पैकिंग दक्षता = (एक परमाणु का आयतन / एकक कोष्ठिका का आयतन) × 100
- = [(4/3)πr³ / 8r³] × 100 = (π/6) × 100 = 52.36%
अतः साधारण घनीय क्रिस्टल की पैकिंग दक्षता 52.36% होती है।
(ख) आयनिक ठोसों की प्रकृति के आधार पर फ्रेंकेल दोष की तुलना शॉट्की दोष से कीजिए।
| क्र. | फ्रेंकेल दोष | शॉट्की दोष |
|---|---|---|
| 1. | इसमें छोटा आयन (सामान्यतः धनायन) अपने स्थान से हटकर अंतराकाशी स्थान में चला जाता है। | इसमें समान संख्या में धनायन और ऋणायन क्रिस्टल से हट जाते हैं, जिससे रिक्तियाँ बनती हैं। |
| 2. | क्रिस्टल का घनत्व अपरिवर्तित रहता है। | क्रिस्टल का घनत्व कम हो जाता है। |
| 3. | यह उन यौगिकों में पाया जाता है जहाँ धनायन और ऋणायन के आकार में बड़ा अंतर होता है (जैसे ZnS, AgCl)। | यह उन यौगिकों में पाया जाता है जहाँ धनायन और ऋणायन के आकार लगभग समान होते हैं (जैसे NaCl, KCl)। |
| 4. | क्रिस्टल की विद्युत चालकता बढ़ जाती है। | क्रिस्टल की विद्युत चालकता पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। |
(ग) जल वाष्प दाब का क्या होगा यदि एक चम्मच चीनी उसमें डाल दी जाए?
हल: जब जल में चीनी (एक अवाष्पशील विलेय) डाली जाती है, तो जल का वाष्प दाब कम हो जाता है। ऐसा राउल्ट के नियम के अनुसार होता है, क्योंकि विलेय के अणु विलायक के अणुओं के वाष्पीकरण में बाधा डालते हैं।
(घ) वृहदणुओं के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए कौन-सा अणुसंख्य गुणधर्म उपयुक्त है?
हल: वृहदणुओं (मैक्रोमॉलिक्यूल्स) के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने के लिए परासरण दाब (Osmotic Pressure) सबसे उपयुक्त अणुसंख्य गुणधर्म है। इसका कारण यह है कि परासरण दाब का मान बहुत कम सांद्रता पर भी मापा जा सकता है, जो वृहदणुओं के लिए आवश्यक है।
(ङ) क्या क्वथनांक का उन्नयन समान होगा यदि 0.1 मोल सोडियम क्लोराइड या 0.1 मोल चीनी को 1 लीटर जल में विलेय किया जाए? समझाइए।
हल: नहीं, क्वथनांक का उन्नयन समान नहीं होगा।
- चीनी (C₁₂H₂₂O₁₁) एक अवाष्पशील अविधुत-अपघट्य है, जो जल में वियोजित नहीं होती। अतः 0.1 मोल चीनी देने पर विलयन में कणों की संख्या = 0.1 मोल।
- सोडियम क्लोराइड (NaCl) एक प्रबल विद्युत-अपघट्य है, जो जल में पूर्णतः वियोजित होकर Na⁺ और Cl⁻ आयन देता है। अतः 0.1 मोल NaCl देने पर विलयन में कणों की संख्या = 0.1 × 2 = 0.2 मोल।
- क्वथनांक का उन्नयन (ΔTb) विलयन में कणों की संख्या पर निर्भर करता है। चूँकि NaCl अधिक कण देता है, इसलिए इसका क्वथनांक उन्नयन चीनी की तुलना में अधिक होगा।
(च) क्या हम स्थिर-क्वाथी मिश्रण के यौगिकों को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक कर सकते हैं? समझाइए।
हल: नहीं, हम स्थिर-क्वाथी मिश्रण (एज़ियोट्रोप) के यौगिकों को प्रभाजी आसवन द्वारा पृथक नहीं कर सकते।
कारण: स्थिर-क्वाथी मिश्रण वह मिश्रण होता है जिसका संघटन आसवन के दौरान अपरिवर्तित रहता है और इसका क्वथनांक स्थिर होता है। प्रभाजी आसवन में मिश्रण को उनके क्वथनांकों में अंतर के आधार पर पृथक किया जाता है, लेकिन एज़ियोट्रोप में दोनों घटक एक साथ समान अनुपात में वाष्पित होते हैं, जिससे पृथक्करण संभव नहीं होता।
(i) What happens to vapour pressure of water if a tablespoon of sugar is added to it?
Answer: When sugar (a non-volatile solute) is added to water, the vapour pressure of water decreases. According to Raoult's law, the presence of solute particles reduces the number of solvent molecules at the surface, thereby lowering the vapour pressure.
(ii) Which colligative property is preferred for the molar mass determination of macromolecules?
Answer: Osmotic pressure is the preferred colligative property for the determination of molar mass of macromolecules. This is because osmotic pressure can be measured accurately even at very low concentrations, which is essential for macromolecules that have very high molar masses.
26. (a) Will the elevation in boiling point be same if 0.1 mole of sodium chloride or 0.1 mole of sugar is dissolved in 1 L of water?
Answer: No, the elevation in boiling point will not be the same. Sodium chloride (NaCl) dissociates into two ions (Na⁺ and Cl⁻) in water, giving 0.2 moles of particles, while sugar (a non-electrolyte) does not dissociate and gives only 0.1 mole of particles. Since boiling point elevation depends on the number of solute particles, NaCl will cause a greater elevation than sugar.
26. (b) Can we separate the compounds of an azeotropic mixture by fractional distillation? Explain.
Answer: No, the compounds of an azeotropic mixture cannot be separated by fractional distillation. An azeotrope is a mixture of two or more liquids that boils at a constant temperature and has the same composition in the liquid and vapor phases. Therefore, fractional distillation does not change the composition, making separation impossible by simple distillation.
27. निम्न को समझाइए :
(अ) पूतिरोधी (Antiseptic) – ये ऐसे रसायन हैं जो सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं या उन्हें नष्ट करते हैं, लेकिन जीवित ऊतकों पर सुरक्षित रूप से लगाए जा सकते हैं। उदाहरण: डेटॉल, आयोडीन टिंक्चर।
(ब) कृत्रिम मधुरक (Artificial Sweetener) – ये ऐसे रासायनिक यौगिक हैं जो मीठा स्वाद प्रदान करते हैं लेकिन इनमें कैलोरी नहीं होती या बहुत कम होती है। उदाहरण: सैकरीन, एस्पार्टेम।
(स) प्रति-अम्ल (Antacid) – ये ऐसे पदार्थ हैं जो आमाशय में अतिरिक्त अम्ल को उदासीन करके अम्लता से राहत देते हैं। उदाहरण: मैग्नीशियम हाइड्रॉक्साइड, एल्युमिनियम हाइड्रॉक्साइड।
अथवा
(अ) विसंक्रामी (Disinfectant) – ये ऐसे रसायन हैं जो सूक्ष्मजीवों को नष्ट करते हैं, लेकिन ये जीवित ऊतकों पर उपयोग के लिए सुरक्षित नहीं होते; इनका उपयोग निर्जीव वस्तुओं पर किया जाता है। उदाहरण: फिनोल, ब्लीचिंग पाउडर।
(ब) खाद्य परिरक्षक (Food Preservative) – ये ऐसे पदार्थ हैं जो खाद्य पदार्थों को सूक्ष्मजीवों द्वारा खराब होने से बचाते हैं और उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाते हैं। उदाहरण: सोडियम बेंजोएट, सोडियम मेटाबाइसल्फाइट।
(स) प्रशांतक (Tranquilizer) – ये ऐसी दवाएं हैं जो चिंता, तनाव और मानसिक अशांति को कम करती हैं और मस्तिष्क को शांत करती हैं। उदाहरण: डायजेपाम, लोराजेपाम।
Explain the following:
-
(a) Antiseptics
Antiseptics are chemical substances that kill or inhibit the growth of microorganisms on living tissues (e.g., skin, wounds). They are safe to apply on the body. Examples include hydrogen peroxide, iodine solution, and dettol.
-
(b) Artificial sweetening agents
Artificial sweetening agents are synthetic compounds that provide sweetness without adding significant calories. They are used as sugar substitutes, especially for diabetic patients. Examples include saccharin, aspartame, and sucralose.
-
(c) Antacids
Antacids are mild bases that neutralize excess hydrochloric acid in the stomach, providing relief from acidity and heartburn. Common examples include magnesium hydroxide (milk of magnesia) and aluminum hydroxide.
OR
-
(a) Disinfectants
Disinfectants are chemical agents that destroy harmful microorganisms on inanimate objects (e.g., floors, instruments). They are stronger than antiseptics and are not safe for living tissues. Examples include phenol (carbolic acid) and chlorine compounds.
-
(b) Food preservatives
Food preservatives are substances added to food to prevent spoilage caused by microorganisms, oxidation, or chemical changes. They help extend shelf life. Examples include sodium benzoate, sodium metabisulfite, and vinegar.
-
(c) Tranquilizers
Tranquilizers are drugs that reduce anxiety, tension, and mental stress by depressing the central nervous system. They are used to treat mental disorders. Examples include diazepam (Valium) and chlordiazepoxide (Librium).
28. (अ) सोने का कोलाइडी सॉल बनाने की विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
विधि (Bredig's Arc Method): सोने के कोलाइडी सॉल को Bredig's आर्क विधि द्वारा बनाया जाता है।
प्रक्रिया: दो सोने के इलेक्ट्रोडों को आसुत जल (जिसमें थोड़ा KOH मिला हो) में डुबोया जाता है। इलेक्ट्रोडों के बीच विद्युत आर्क (spark) उत्पन्न की जाती है। आर्क की उच्च ऊष्मा से सोना वाष्पित होकर छोटे-छोटे कणों में बदल जाता है, जो जल में फैलकर कोलाइडी सॉल बनाते हैं। KOH स्थायीकरण (stabilization) में सहायता करता है।
(चित्र: दो सोने की छड़ों को पानी में डुबोकर उनके बीच विद्युत आर्क दिखाया गया है।)
(ब) सॉल एवं जैल में क्या अन्तर है?
| सॉल (Sol) | जैल (Gel) |
|---|---|
| द्रव अवस्था में ठोस कणों का कोलाइडी विलयन (जैसे, दूध, रक्त) | अर्ध-ठोस अवस्था जिसमें द्रव ठोस जालक में बंद होता है (जैसे, जेली, पनीर) |
| प्रवाही (fluid) होता है | प्रवाही नहीं होता, अपना आकार बनाए रखता है |
| उदाहरण: सोने का सॉल, स्टार्च का सॉल | उदाहरण: सिलिका जैल, अगर-अगर |
(स) स्कंदन किसे कहते हैं? समझाइए।
स्कंदन (Coagulation): कोलाइडी कणों के एकत्रित होकर बड़े कणों में बदलने और अवक्षेपित होने की प्रक्रिया को स्कंदन कहते हैं।
समझाइए: कोलाइडी कणों पर समान आवेश होता है, जो उन्हें एक-दूसरे से दूर रखता है। जब इनमें विपरीत आवेश वाले आयन (जैसे, इलेक्ट्रोलाइट) मिलाए जाते हैं, तो आवेश उदासीन हो जाता है। कण आपस में जुड़कर बड़े कण बनाते हैं और नीचे बैठ जाते हैं। उदाहरण: दूध में नींबू का रस मिलाने पर दूध का फटना (स्कंदन)।
अथवा
(अ) वैद्युत अपघट्य की अतिरिक्त मात्रा की अशुद्धियाँ वाले कोलाइडी विलयन के शुद्धिकरण की विधि का चित्र सहित वर्णन कीजिए।
विधि (Dialysis): कोलाइडी विलयन से अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइट (वैद्युत अपघट्य) को हटाने के लिए डायलिसिस का उपयोग किया जाता है।
प्रक्रिया: कोलाइडी विलयन को एक अर्ध-पारगम्य झिल्ली (जैसे, सेलोफेन या पशु मूत्राशय) से बने थैले में रखा जाता है। इस थैले को शुद्ध जल से भरे बर्तन में डुबोया जाता है। छोटे आयन (इलेक्ट्रोलाइट) झिल्ली के छिद्रों से बाहर जल में चले जाते हैं, जबकि बड़े कोलाइडी कण अंदर रह जाते हैं। जल को बार-बार बदलने से शुद्धिकरण पूरा होता है।
(चित्र: एक बर्तन में पानी, उसमें डूबा हुआ अर्ध-पारगम्य झिल्ली का थैला जिसमें कोलाइडी विलयन है, और बाहर जा रहे छोटे आयन दिखाए गए हैं।)
(ब) व्हिट (Witt) एवं फोम में क्या अन्तर है?
| व्हिट (Witt - यहाँ 'Whitt' या 'Witt' का अर्थ 'फोम' से भिन्न कोलाइडी अवस्था) | फोम (Foam) |
|---|---|
| यह एक प्रकार का कोलाइडी विलयन है जिसमें गैस द्रव में फैली होती है (जैसे, झाग) | फोम भी गैस का द्रव या ठोस में कोलाइडी फैलाव है |
| सामान्यतः 'व्हिट' शब्द का प्रयोग कम होता है; इसे 'फोम' का ही एक रूप माना जाता है | उदाहरण: शेविंग क्रीम (द्रव में गैस), स्टायरोफोम (ठोस में गैस) |
| उदाहरण: बीयर का झाग | फोम में गैस के बुलबुले अधिक स्थायी होते हैं |
नोट: प्रश्न में 'Whitt' संभवतः 'Foam' का ही पर्याय है, अंतर स्पष्ट करने के लिए ऊपर तालिका दी गई है।
(स) पेप्टन किसे कहते हैं? समझाइए।
पेप्टन (Peptization): ताजा अवक्षेपित अवक्षेप को उपयुक्त इलेक्ट्रोलाइट (पेप्टाइजिंग एजेंट) की उपस्थिति में कोलाइडी विलयन में बदलने की प्रक्रिया को पेप्टन कहते हैं।
समझाइए: जब किसी अवक्षेप (जैसे, Fe(OH)₃) में थोड़ी मात्रा में उपयुक्त इलेक्ट्रोलाइट (जैसे, FeCl₃) मिलाया जाता है और हिलाया जाता है, तो अवक्षेप के कण आवेश ग्रहण करके एक-दूसरे से अलग हो जाते हैं और कोलाइडी विलयन बनाते हैं। यह स्कंदन के विपरीत प्रक्रिया है।
प्रश्न 29 (a)
गोल्ड कोलॉइडी विलयन (Gold Colloidal Sol) के निर्माण की विधि का वर्णन चित्र सहित कीजिए।
अथवा
अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइट युक्त कोलॉइडी विलयन के शुद्धिकरण की विधि का वर्णन चित्र सहित कीजिए।
गोल्ड कोलॉइडी विलयन निर्माण विधि (ब्रेडिग की आर्क विधि):
- सोने के दो तारों को आसुत जल में डुबोया जाता है।
- तारों के बीच विद्युत आर्क (चिंगारी) उत्पन्न की जाती है।
- आर्क के कारण सोने के कण वाष्पित होकर जल में संघनित हो जाते हैं, जिससे लाल या बैंगनी रंग का गोल्ड सॉल बनता है।
- जल में थोड़ा KOH या K₂CO₃ मिलाकर स्थायित्व बढ़ाया जाता है।
चित्र: (चित्र में दो सोने के तार, जल में डूबे हुए, बीच में विद्युत आर्क दिखाया गया है।)
अथवा - कोलॉइडी विलयन का शुद्धिकरण (डायलिसिस विधि):
- अतिरिक्त इलेक्ट्रोलाइट युक्त कोलॉइडी विलयन को एक अर्ध-पारगम्य झिल्ली (जैसे सेलोफेन या पशु मूत्राशय) में रखा जाता है।
- इस थैली को शुद्ध जल से भरे बर्तन में डुबोया जाता है।
- छोटे इलेक्ट्रोलाइट कण झिल्ली से बाहर जल में फैल जाते हैं, जबकि बड़े कोलॉइडी कण अंदर रह जाते हैं।
- जल को बार-बार बदलकर शुद्धिकरण पूरा किया जाता है।
चित्र: (चित्र में अर्ध-पारगम्य झिल्ली की थैली, कोलॉइडी विलयन, और बाहर शुद्ध जल दिखाया गया है।)
प्रश्न 29 (b)
सॉल और जेल में क्या अंतर है?
अथवा
एरोसोल और फोम में क्या अंतर है?
सॉल और जेल में अंतर:
| सॉल (Sol) | जेल (Gel) |
|---|---|
| द्रव में ठोस कणों का परिक्षेपण | ठोस में द्रव का परिक्षेपण |
| द्रव की तरह बहता है | अर्ध-ठोस, बहता नहीं |
| उदाहरण: पेंट, दूध | उदाहरण: जेली, पनीर |
एरोसोल और फोम में अंतर:
| एरोसोल (Aerosol) | फोम (Foam) |
|---|---|
| गैस में ठोस या द्रव कणों का परिक्षेपण | द्रव या ठोस में गैस का परिक्षेपण |
| उदाहरण: धुआँ, कोहरा | उदाहरण: शेविंग क्रीम, फोम रबर |
प्रश्न 29 (c)
स्कंदन (Coagulation) क्या है? समझाइए।
अथवा
पेप्टीकरण (Peptization) क्या है? समझाइए।
स्कंदन (Coagulation): कोलॉइडी कणों के एकत्रित होकर अवक्षेपित होने की प्रक्रिया को स्कंदन कहते हैं। यह इलेक्ट्रोलाइट मिलाने, ताप बढ़ाने या विद्युत क्षेत्र लगाने से होता है। उदाहरण: दूध का दही जमना।
पेप्टीकरण (Peptization): ताजा अवक्षेप को इलेक्ट्रोलाइट (पेप्टीकारक) मिलाकर कोलॉइडी विलयन में बदलने की प्रक्रिया को पेप्टीकरण कहते हैं। उदाहरण: Fe(OH)₃ के अवक्षेप में FeCl₃ मिलाकर लाल रंग का कोलॉइडी विलयन बनाना।
प्रश्न 30 (a)
फॉस्फोरस के चार ऑक्सी अम्लों के रासायनिक सूत्र लिखिए।
फॉस्फोरस के चार ऑक्सी अम्लों के रासायनिक सूत्र:
- हाइपोफॉस्फोरस अम्ल (Hypophosphorous acid) – H₃PO₂
- फॉस्फोरस अम्ल (Phosphorous acid) – H₃PO₃
- ऑर्थोफॉस्फोरिक अम्ल (Orthophosphoric acid) – H₃PO₄
- पाइरोफॉस्फोरिक अम्ल (Pyrophosphoric acid) – H₄P₂O₇
प्रश्न 30 (b)
उत्कृष्ट गैस समूह का सामान्य इलेक्ट्रॉन विन्यास लिखिए। चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंब (MRI) में इस समूह का कौन-सा तत्व उपयोगी है?
उत्कृष्ट गैसों का सामान्य इलेक्ट्रॉन विन्यास: ns² np⁶ (जहाँ n = 2 से 6 तक, हीलियम को छोड़कर जिसका विन्यास 1s² है)।
MRI में उपयोगी तत्व: ज़ेनॉन (Xe) का उपयोग चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंब (MRI) में कंट्रास्ट एजेंट के रूप में किया जाता है।
प्रश्न 30 (c)
C₂H₅OH को PCl₃ एवं PCl₅ के साथ पृथक-पृथक रासायनिक अभिक्रियाएँ लिखिए।
PCl₃ के साथ अभिक्रिया:
3C₂H₅OH + PCl₃ → 3C₂H₅Cl + H₃PO₃
(एथिल अल्कोहल + फॉस्फोरस ट्राइक्लोराइड → एथिल क्लोराइड + फॉस्फोरस अम्ल)
PCl₅ के साथ अभिक्रिया:
C₂H₅OH + PCl₅ → C₂H₅Cl + POCl₃ + HCl
(एथिल अल्कोहल + फॉस्फोरस पेंटाक्लोराइड → एथिल क्लोराइड + फॉस्फोरस ऑक्सीक्लोराइड + हाइड्रोजन क्लोराइड)
प्रश्न 3
(क) सल्फर के चार ऑक्सी अम्लों के रासायनिक सूत्र लिखिए।
सल्फर के चार ऑक्सी अम्लों के रासायनिक सूत्र निम्नलिखित हैं:
- सल्फ्यूरस अम्ल: H₂SO₃
- सल्फ्यूरिक अम्ल: H₂SO₄
- पाइरोसल्फ्यूरिक अम्ल: H₂S₂O₇
- परॉक्सीमोनोसल्फ्यूरिक अम्ल (कैरो का अम्ल): H₂SO₅
(ख) केल्कोजेन समूह का सामान्य इलेक्ट्रॉन विन्यास लिखिए। एप्सम लवण का रासायनिक सूत्र लिखिए।
केल्कोजेन समूह (समूह 16) का सामान्य इलेक्ट्रॉन विन्यास: ns²np⁴
एप्सम लवण का रासायनिक सूत्र: MgSO₄·7H₂O (मैग्नीशियम सल्फेट हेप्टाहाइड्रेट)
(ग) अमोनिया एक लुइस क्षारक की तरह व्यवहार करता है। समझाइए।
अमोनिया (NH₃) में नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकल इलेक्ट्रॉन युग्म (lone pair) उपस्थित होता है। लुइस क्षारक वह पदार्थ है जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान कर सकता है। अमोनिया अपने इस एकल इलेक्ट्रॉन युग्म को दान करके अन्य अणुओं या आयनों (जैसे H⁺) के साथ सहसंयोजक बंध बनाता है, इसलिए यह लुइस क्षारक की तरह व्यवहार करता है।
OR (वैकल्पिक प्रश्न)
(a) Write the chemical formulae of four oxy acids of chlorine.
The chemical formulae of four oxy acids of chlorine are:
- Hypochlorous acid: HClO
- Chlorous acid: HClO₂
- Chloric acid: HClO₃
- Perchloric acid: HClO₄
(b) Write the general electronic configuration of noble gas group. Which element of this group is useful in magnetic resonance imaging (MRI)?
General electronic configuration of noble gas group (Group 18): ns²np⁶ (except Helium which is 1s²)
Element useful in MRI: Xenon (Xe) is used in magnetic resonance imaging (MRI) as a contrast agent.
(c) Write the chemical reactions of C₂H₅OH with PCl₃ and PCl₅ separately.
Reaction with PCl₃:
3C₂H₅OH + PCl₃ → 3C₂H₅Cl + H₃PO₃
(Ethanol reacts with phosphorus trichloride to give ethyl chloride and phosphorous acid)
Reaction with PCl₅:
C₂H₅OH + PCl₅ → C₂H₅Cl + POCl₃ + HCl
(Ethanol reacts with phosphorus pentachloride to give ethyl chloride, phosphoryl chloride, and hydrogen chloride)
30. उचित उदाहरण के साथ निम्न को समझाइए :
(अ) रोजेनमुंड अपचयन (Rosenmund reduction)
यह एक विशिष्ट अपचयन अभिक्रिया है जिसमें एसिड क्लोराइड को Pd/BaSO₄ उत्प्रेरक की उपस्थिति में H₂ गैस द्वारा अपचयित कर एल्डिहाइड प्राप्त किया जाता है। इस अभिक्रिया में उत्प्रेरक को आंशिक रूप से विषाक्त (poisoned) किया जाता है ताकि आगे अपचयन रुक जाए।
उदाहरण:
बेंज़ॉयल क्लोराइड (C₆H₅COCl) + H₂ → (Pd/BaSO₄) → बेंज़ैल्डिहाइड (C₆H₅CHO) + HCl
समीकरण: RCOCl + H₂ → (Pd/BaSO₄) → RCHO + HCl
(ब) गाटरमान-काॉख अभिक्रिया (Gatterman-Koch reaction)
इस अभिक्रिया में बेंज़ीन या इसके व्युत्पन्नों को कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोजन क्लोराइड (HCl) गैस के मिश्रण से एल्युमिनियम क्लोराइड (AlCl₃) और क्यूप्रस क्लोराइड (CuCl) की उपस्थिति में अभिकृत कर बेंज़ैल्डिहाइड प्राप्त किया जाता है।
उदाहरण:
बेंज़ीन (C₆H₆) + CO + HCl → (AlCl₃/CuCl) → बेंज़ैल्डिहाइड (C₆H₅CHO)
समीकरण: C₆H₆ + CO + HCl → (AlCl₃/CuCl) → C₆H₅CHO
अथवा
(अ) क्लीमेन्सन अपचयन (Clemmensen reduction)
इस अभिक्रिया में कीटोन या एल्डिहाइड के कार्बोनिल समूह को जिंक-अमलगम (Zn-Hg) और सांद्र HCl की उपस्थिति में अपचयित कर एल्केन प्राप्त किया जाता है। यह अभिक्रिया अम्लीय माध्यम में होती है।
उदाहरण:
एसीटोफीनोन (C₆H₅COCH₃) + Zn(Hg)/HCl → एथिलबेंज़ीन (C₆H₅CH₂CH₃)
समीकरण: RCOCH₃ + Zn(Hg)/HCl → RCH₂CH₃
(ब) स्टीफेन अभिक्रिया (Stephen reaction)
इस अभिक्रिया में नाइट्राइल (RCN) को स्टैनस क्लोराइड (SnCl₂) और HCl की उपस्थिति में अपचयित कर एल्डिहाइड प्राप्त किया जाता है। यह अभिक्रिया एल्डिहाइड के निर्माण के लिए उपयोगी है।
उदाहरण:
बेंज़ोनाइट्राइल (C₆H₅CN) + SnCl₂/HCl → बेंज़ैल्डिहाइड (C₆H₅CHO)
समीकरण: RCN + SnCl₂/HCl → RCHO
(2+2 = 4 अंक)