RBSE Class 12th 2014 History-SS-13-2014 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2014
Subject History-SS-13-2014
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th History-SS-13-2014 2014 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014

इतिहास
(HISTORY)

समय : 3 घण्टे 15 मिनट     पूर्णांक : 80

नामांक (Roll No.) : ____________________

No. of Questions — 30
No. of Printed Pages — 7


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

55–7–3–Hist. SS–553   [ Turn over

खण्ड - अ / Part - A

1. मार्शल ने 1924 में सिन्धुघाटी में उत्खनन के सन्दर्भ में क्या घोषणा की ?

What announcement did John Marshall make in 1924 about excavation in Indus Valley?

उत्तर: जॉन मार्शल ने 1924 में घोषणा की कि सिन्धु घाटी में एक प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं, जो मिस्र और मेसोपोटामिया की सभ्यताओं के समकालीन थी। इस घोषणा ने हड़प्पा सभ्यता को विश्व पटल पर ला खड़ा किया।

Answer: In 1924, John Marshall announced that the remains of an ancient civilization had been found in the Indus Valley, contemporary with the Egyptian and Mesopotamian civilizations. This announcement brought the Harappan civilization to the world stage.

2. उन दो पुरास्थलों का उल्लेख कीजिए जिनके आधार पर पुरातत्वविद् यह मानते हैं कि हड़प्पाई समाज द्वारा कृषि के लिए जल संचय किया जाता था।

Mention two archaeological sites on whose basis the archaeologists believed that Harappan society used to store water for agriculture.

उत्तर: दो पुरास्थल हैं: (1) धोलावीरा (गुजरात) – यहाँ जल संचयन के लिए विशाल जलाशय और नहरें मिली हैं। (2) लोथल (गुजरात) – यहाँ एक विशाल जलाशय और नहर प्रणाली के अवशेष मिले हैं, जो कृषि के लिए जल संचय का प्रमाण देते हैं।

Answer: Two sites are: (1) Dholavira (Gujarat) – large reservoirs and canals for water storage have been found here. (2) Lothal (Gujarat) – remains of a large reservoir and canal system have been found, providing evidence of water storage for agriculture.

3. मौर्य शासकों की राजधानी पाटलिपुत्र का वर्तमान नाम क्या है ?

What is the modern name of Pataliputra, the capital of Maurya emperors?

उत्तर: पाटलिपुत्र का वर्तमान नाम पटना (बिहार) है।

Answer: The modern name of Pataliputra is Patna (Bihar).


प्रश्न संरचना / Question Structure:

खण्ड / Part प्रश्न संख्या / Q. Nos. अंक / Marks शब्द सीमा / Word Limit
A 1 1 10 शब्द / words
B 2-8 2 20 शब्द / words
C 9-26 4 60 शब्द / words
D 27-29 6 200 शब्द / words

7. प्रश्न क्रमांक 30 का उत्तर भारत के रेखा मानचित्र में अंकित कीजिए। यह 5 अंक का है।

Mark the answer of Question No. 30 in the outline map of India. It carries 5 marks.

8. प्रश्न क्रमांक 27, 28 एवं 29 में आंतरिक विकल्प हैं।

There are internal choices in Question Nos. 27, 28 and 29.

4. महाभारत का समालोचनात्मक संस्करण तैयार करने का कार्य कब व किसके नेतृत्व में प्रारम्भ हुआ ?

When and under whose leadership was the task of preparing a critical edition of the Mahabharata started?

महाभारत का समालोचनात्मक संस्करण तैयार करने का कार्य सन् 1919 में भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे के तहत प्रारम्भ हुआ। इसका नेतृत्व प्रसिद्ध विद्वान वी.एस. सुकथनकर ने किया।

5. मंदिर स्थापत्यकला में गर्भगृह एवं शिखर से आप क्या समझते हैं ?

What do you understand about Garbhagriha and Shikhara in the temple sculpture?

गर्भगृह: यह मंदिर का सबसे पवित्र और आंतरिक भाग होता है, जहाँ मुख्य देवता की मूर्ति स्थापित की जाती है। यह अंधकारमय और छोटा कक्ष होता है, जो गर्भ (गुफा) का प्रतीक है।

शिखर: यह मंदिर के गर्भगृह के ऊपर बना ऊँचा और शंक्वाकार या वक्राकार शिखर (टॉवर) होता है। यह मंदिर की सबसे ऊँची संरचना होती है और इसे देवताओं के निवास स्थान का प्रतीक माना जाता है।

6. औपनिवेशिक भारत में स्थापित दो हिल स्टेशनों का उल्लेख कीजिए।

Mention the two hill stations which were established in colonial India.

औपनिवेशिक भारत में स्थापित दो प्रमुख हिल स्टेशन हैं:

  1. शिमला (हिमाचल प्रदेश) – 1819 में अंग्रेजों द्वारा स्थापित।
  2. दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) – 1835 में अंग्रेजों द्वारा स्थापित।

7. जिन्स-ए-कामिल फसल के बारे में बताइए।

What do you know about Jins-i-Kamil crop? Explain.

जिन्स-ए-कामिल (उत्तम फसल) मुगल काल में उन फसलों को कहा जाता था जिनकी पैदावार अधिक होती थी और जिनका बाजार मूल्य ऊँचा था। इनमें मुख्यतः गन्ना, कपास, नील, अफीम, तम्बाकू आदि नकदी फसलें शामिल थीं। इन फसलों पर राज्य द्वारा अधिक कर लगाया जाता था और इन्हें उच्च गुणवत्ता वाली फसल माना जाता था।

8. सत्रहवीं सदी के स्रोत भारत में कितने प्रकार के किसानों का उल्लेख करते हैं ?

How many kinds of peasants are mentioned in the sources of 17th century in India?

सत्रहवीं सदी के स्रोतों में भारत में मुख्यतः दो प्रकार के किसानों का उल्लेख मिलता है:

  1. खुदकाश्त – वे किसान जो अपनी जमीन पर स्वयं खेती करते थे और उनके पास भूमि का स्वामित्व था।
  2. पाहीकाश्त – वे किसान जो दूसरे की जमीन पर बटाई या किराए पर खेती करते थे और उनके पास भूमि का स्वामित्व नहीं था।

9. आइन-ए-अकबरी किसके द्वारा लिखी गई ?

Who wrote Ain-i-Akbari?

आइन-ए-अकबरी अबुल फजल द्वारा लिखी गई थी। यह ग्रंथ अकबर के शासनकाल का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है और 'अकबरनामा' का तीसरा भाग है।

10. सोलहवीं और सत्रहवीं सदी में राज्य द्वारा जंगलों में घुसपैठ के क्या कारण थे ?

What were the causes to intrude into the forest by state in 16th and 17th centuries?

सोलहवीं और सत्रहवीं सदी में राज्य द्वारा जंगलों में घुसपैठ के निम्नलिखित कारण थे:

  1. कृषि विस्तार: बढ़ती जनसंख्या के लिए अधिक कृषि भूमि की आवश्यकता थी, जिसके लिए जंगलों को साफ किया गया।
  2. राजस्व वृद्धि: नई भूमि पर कर लगाकर राज्य के राजस्व में वृद्धि करना।
  3. लकड़ी और संसाधन: निर्माण, जहाज निर्माण और ईंधन के लिए लकड़ी की आवश्यकता।
  4. सैन्य अभियान: विद्रोही जनजातियों को नियंत्रित करने और सुरक्षा मार्ग बनाने के लिए।

11. फतेहपुर सीकरी का बुलंद दरवाजा क्यों और किसने बनाया ?

Why and by whom was the Buland Darwaja of Fatehpur Sikri built?

बुलंद दरवाजा मुगल सम्राट अकबर द्वारा सन् 1601 में बनवाया गया था। इसे गुजरात विजय (दक्षिणी गुजरात) की स्मृति में विजय द्वार के रूप में बनाया गया था। यह फतेहपुर सीकरी में स्थित है और विश्व का सबसे ऊँचा द्वार है।

खण्ड - ब (Part - B)

2. बुद्ध द्वारा गृह त्याग के क्या कारण थे ?

What were the causes that Buddha left the palace?

गौतम बुद्ध द्वारा गृह त्याग के निम्नलिखित प्रमुख कारण थे:

  1. चार दृश्य: राजकुमार सिद्धार्थ ने एक बूढ़े व्यक्ति, एक बीमार व्यक्ति, एक मृत शरीर और एक संन्यासी को देखा, जिससे उन्हें जीवन की दुखद वास्तविकता का एहसास हुआ।
  2. जीवन की अनित्यता: उन्होंने महसूस किया कि जन्म, बुढ़ापा, बीमारी और मृत्यु से कोई नहीं बच सकता।
  3. सत्य की खोज: वे दुखों से मुक्ति और मोक्ष का मार्ग खोजना चाहते थे, जो राजसी सुख-सुविधाओं में संभव नहीं था।
  4. संन्यास की प्रेरणा: संन्यासी को देखकर उनमें वैराग्य की भावना जागृत हुई और उन्होंने सांसारिक बंधनों को त्यागने का निर्णय लिया।

लुम्बिनी एवं कुशीनगर नामक स्थानों का महत्व बताइए।

Write the importance of Lumbini and Kushinagar.

लुम्बिनी (Lumbini): यह स्थान नेपाल में स्थित है और यहाँ भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। यह बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।

कुशीनगर (Kushinagar): यह उत्तर प्रदेश में स्थित है और यहाँ भगवान बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। यह भी बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।

मुगल बादशाहों द्वारा इतिवृत्त क्यों तैयार करवाए जाते थे ? लिखिए।

Why were chronicles commissioned by the Mughal emperors ? Explain.

मुगल बादशाहों द्वारा इतिवृत्त (chronicles) निम्नलिखित कारणों से तैयार करवाए जाते थे:

  1. अपने शासनकाल की घटनाओं और उपलब्धियों का दस्तावेजीकरण करना।
  2. अपनी शक्ति और वैभव को प्रदर्शित करना तथा अपने शासन को वैधता प्रदान करना।
  3. भावी पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक अभिलेख संरक्षित करना।
  4. शासन प्रणाली, प्रशासन और नीतियों का विवरण प्रस्तुत करना।

आप 'जात और सवार' से क्या समझते हैं ? स्पष्ट करें।

What do you understand by 'Zat and Sawar' ? Explain.

जात (Zat): यह मुगल साम्राज्य में एक सैन्य अधिकारी की व्यक्तिगत पदवी और वेतन निर्धारित करने की प्रणाली थी। यह उसकी स्थिति और प्रतिष्ठा को दर्शाता था।

सवार (Sawar): यह उस सैन्य अधिकारी द्वारा रखे जाने वाले घुड़सवार सैनिकों की संख्या को इंगित करता था। यह उसकी सैन्य क्षमता और जिम्मेदारी को दर्शाता था।

मुगल प्रशासन में, प्रत्येक मनसबदार को एक जात और सवार रैंक प्रदान की जाती थी, जो उसके वेतन और सैन्य दायित्वों को निर्धारित करती थी।

जोतदारों की स्थिति क्या थी ? वे जमींदारों से किस प्रकार प्रभावशाली होते थे ?

What was the position of Jotdars ? How were they more powerful in comparison to Zamindars ?

जोतदारों की स्थिति: जोतदार वे किसान थे जिनके पास भूमि पर स्थायी अधिकार (जोत) होते थे। वे अपनी भूमि पर खेती करते थे या दूसरों को बटाई पर देते थे।

जमींदारों से प्रभावशाली होने के कारण:

  1. जोतदारों के पास भूमि पर सीधा और स्थायी अधिकार था, जबकि जमींदार केवल राजस्व संग्रह के मध्यस्थ थे।
  2. जोतदार अपनी भूमि पर नियंत्रण रखते थे और उन्हें हटाना कठिन था, जबकि जमींदारों को राज्य द्वारा बदला जा सकता था।
  3. जोतदार स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावशाली थे और उनका गाँव के समाज पर गहरा प्रभाव था।

दक्कन दंगा रिपोर्ट क्या थी ? इसके अनुसार रैयत विद्रोह का क्या कारण था ?

What was the Deccan Riot Report ? According to it give main reason of the revolt of the ryots.

दक्कन दंगा रिपोर्ट: यह 1875 में ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित एक आयोग की रिपोर्ट थी, जिसने पूना और अहमदनगर जिलों में हुए किसान विद्रोहों की जाँच की।

रैयत विद्रोह का मुख्य कारण: इस रिपोर्ट के अनुसार, रैयत विद्रोह का मुख्य कारण साहूकारों द्वारा किसानों का शोषण था। साहूकार उच्च ब्याज दरों पर ऋण देते थे और किसानों की भूमि और संपत्ति को जब्त कर लेते थे, जिससे किसानों में असंतोष और विद्रोह की भावना पैदा हुई।

सोलहवीं एवं सत्रहवीं सदी के प्रारंभ में कृषि इतिहास को जानने के दो स्रोतों का उल्लेख करें।

Describe the two sources for the agrarian history of the sixteenth and early seventeenth centuries.

सोलहवीं और सत्रहवीं सदी के प्रारंभ में कृषि इतिहास के दो प्रमुख स्रोत हैं:

  1. आइन-ए-अकबरी: अबुल फजल द्वारा लिखित यह ग्रंथ अकबर के शासनकाल का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है। इसमें भू-राजस्व प्रणाली, फसलों, कृषि उत्पादन और भूमि माप के बारे में जानकारी मिलती है।
  2. फरमान और दस्तावेज: मुगल काल के शाही फरमान, राजस्व रिकॉर्ड और स्थानीय दस्तावेज कृषि प्रथाओं, भूमि स्वामित्व और कराधान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

खण्ड - स (Part - C)

नगर योजना बनाते समय आप मोहनजोदड़ो नगर योजना की कौन-सी चार विशेषताओं का उपयोग करेंगे ?

While making a city plan which four salient features of Mohanjodaro city plan would you like to utilize ?

मोहनजोदड़ो नगर योजना की निम्नलिखित चार विशेषताओं का उपयोग किया जा सकता है:

  1. ग्रिड प्रणाली (Grid System): शहर की सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जिससे यातायात सुगम और व्यवस्थित होता था।
  2. उन्नत जल निकासी प्रणाली (Advanced Drainage System): हर घर से जुड़ी ढकी हुई नालियाँ और मुख्य नालियाँ शहर को साफ-सुथरा रखती थीं।
  3. सार्वजनिक स्नानागार (Great Bath): यह एक बड़ा सार्वजनिक स्नानागार था, जो सामुदायिक स्वच्छता और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयोग होता था।
  4. योजनाबद्ध आवासीय क्षेत्र (Planned Residential Areas): मकान ईंटों से बने होते थे और उनमें आंगन, कमरे और कुएँ होते थे, जो सुव्यवस्थित जीवन का संकेत देते हैं।

खंड – द (Section – D)

20. इतिहासकार किसी ग्रंथ का विश्लेषण करते समय किन पहलुओं पर विचार करते हैं ?

On which elements do historians notice when they analyse texts ?

उत्तर: इतिहासकार किसी ग्रंथ का विश्लेषण करते समय निम्नलिखित पहलुओं पर विचार करते हैं:

  • ग्रंथ के लेखक का परिचय और उसकी पृष्ठभूमि
  • ग्रंथ की रचना का काल और स्थान
  • ग्रंथ का उद्देश्य और लक्षित पाठक वर्ग
  • ग्रंथ में प्रयुक्त भाषा और शैली
  • ग्रंथ में वर्णित घटनाओं की प्रामाणिकता और स्रोत
  • ग्रंथ में व्यक्त विचारधारा और पूर्वाग्रह
  • ग्रंथ की ऐतिहासिक संदर्भ में प्रासंगिकता

21. 20वीं सदी के राष्ट्रवादी आन्दोलन को 1857 के घटनाक्रम से क्या प्रेरणा मिल रही थी ? स्पष्ट कीजिए।

What inspiration did the National Movement get in the twentieth century from the incidents of the revolt of 1857 ? Explain.

उत्तर: 20वीं सदी के राष्ट्रवादी आन्दोलन को 1857 के विद्रोह से निम्नलिखित प्रेरणाएँ मिलीं:

  • एकता का संदेश: 1857 के विद्रोह में विभिन्न वर्गों, जातियों और क्षेत्रों के लोगों ने एक साथ भाग लिया, जिसने राष्ट्रीय एकता की भावना को बल दिया।
  • स्वतंत्रता की चेतना: इस विद्रोह ने यह सिद्ध किया कि भारतीय जनता विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष कर सकती है।
  • बलिदान की परंपरा: 1857 के शहीदों जैसे रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, बहादुर शाह जफर आदि के बलिदान ने राष्ट्रवादियों को प्रेरित किया।
  • सैन्य संगठन का महत्व: विद्रोह ने सैन्य शक्ति के महत्व को रेखांकित किया, जिसने बाद में आई.एन.ए. जैसे आंदोलनों को प्रेरित किया।
  • राष्ट्रीय गौरव: 1857 के विद्रोह को 'प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' के रूप में देखा गया, जिसने राष्ट्रीय गौरव को जागृत किया।

22. 18वीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में औपनिवेशिक सरकार ने नगरों के लिए मानचित्र तैयार करने पर ध्यान क्यों दिया ?

Why was Colonial Government keen on mapping for cities in early years of 18th century ?

उत्तर: 18वीं शताब्दी के प्रारंभिक वर्षों में औपनिवेशिक सरकार ने नगरों के मानचित्र तैयार करने पर निम्नलिखित कारणों से ध्यान दिया:

  • प्रशासनिक नियंत्रण: मानचित्रों के माध्यम से नगरों की भौगोलिक संरचना को समझकर प्रशासनिक नियंत्रण को सुदृढ़ किया जा सकता था।
  • सैन्य रणनीति: मानचित्रों से सैन्य अभियानों की योजना बनाने और विद्रोहों को दबाने में सहायता मिलती थी।
  • कर संग्रह: नगरों के मानचित्रों से भूमि और संपत्ति का सर्वेक्षण कर कर संग्रह को सुव्यवस्थित किया जा सकता था।
  • शहरी नियोजन: औपनिवेशिक सरकार नगरों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार विकसित करना चाहती थी, जिसके लिए मानचित्र आवश्यक थे।
  • संसाधनों का दोहन: मानचित्रों से नगरों के प्राकृतिक और आर्थिक संसाधनों की पहचान कर उनका दोहन किया जा सकता था।

23. भारतीय संविधान निर्माण से पहले के वर्ष काफी उथल-पुथल वाले थे। क्यों ?

The years immediately preceding the making of the Constitution of India had been exceptionally tumultuous. Why ?

उत्तर: भारतीय संविधान निर्माण से पहले के वर्ष निम्नलिखित कारणों से उथल-पुथल वाले थे:

  • द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव: युद्ध के कारण भारत में आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई थी।
  • भारत का विभाजन: 1947 में देश के विभाजन के कारण सांप्रदायिक दंगे, साम्प्रदायिक हिंसा और लाखों लोगों का विस्थापन हुआ।
  • रियासतों का एकीकरण: देशी रियासतों को भारत में शामिल करने की प्रक्रिया में कई कठिनाइयाँ आईं।
  • सामाजिक-आर्थिक समस्याएँ: गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा और सामाजिक असमानता जैसी समस्याएँ विकराल थीं।
  • राजनीतिक अस्थिरता: अंतरिम सरकार के कार्यकाल में राजनीतिक मतभेद और संघर्ष बने रहे।

24. बर्नियर ने भारत में जो देखा उसकी तुलना यूरोप से की। इसका मूल्यांकन कीजिए।

Evaluate the comparison between India and Europe, what he saw when Bernier travelled in India.

उत्तर: फ्रांसीसी यात्री फ्रांस्वा बर्नियर (1656-1668) ने भारत और यूरोप की तुलना करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:

  • भूमि स्वामित्व: बर्नियर ने भारत में निजी भूमि स्वामित्व की कमी को देखा, जबकि यूरोप में यह प्रचलित था। उन्होंने इसे भारत की आर्थिक पिछड़ेपन का कारण बताया।
  • शहरी विकास: उन्होंने भारतीय शहरों की तुलना यूरोपीय शहरों से की और पाया कि भारतीय शहरों में सार्वजनिक सुविधाओं का अभाव था।
  • व्यापार और वाणिज्य: बर्नियर ने भारत में व्यापार की सीमित प्रकृति पर टिप्पणी की, जबकि यूरोप में व्यापार अधिक विकसित था।
  • राजनीतिक संरचना: उन्होंने मुगल साम्राज्य की निरंकुशता की तुलना यूरोपीय राजतंत्रों से की।

मूल्यांकन: बर्नियर की तुलना में पूर्वाग्रह थे, क्योंकि वह यूरोपीय दृष्टिकोण से भारत को देखते थे। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक और सामाजिक विशिष्टताओं को नजरअंदाज किया। फिर भी, उनका वर्णन 17वीं शताब्दी के भारत को समझने में महत्वपूर्ण है।

25. विजयनगर के शासकों ने वर्षा जल संचय के क्या कार्य किए ? वर्णन करें।

Describe the work made to store rain water by the emperors of Vijayanagara.

उत्तर: विजयनगर साम्राज्य के शासकों ने वर्षा जल संचय के लिए निम्नलिखित कार्य किए:

  • तालाबों का निर्माण: राजधानी विजयनगर और अन्य क्षेत्रों में बड़े-बड़े तालाब बनाए गए, जैसे कमलपुरा तालाब।
  • जलाशयों का निर्माण: पहाड़ियों और ऊँचाई वाले स्थानों पर जलाशय बनाए गए, जो वर्षा जल को संग्रहीत करते थे।
  • नहर प्रणाली: तुंगभद्रा नदी से नहरें निकालकर खेतों और जलाशयों तक पानी पहुँचाया गया।
  • बाँध और मेड़: नदियों और नालों पर बाँध और मेड़ बनाकर पानी को रोका गया।
  • कुंड और बावड़ियाँ: शहरों और गाँवों में कुंड और बावड़ियाँ बनाई गईं, जो भूजल स्तर को बनाए रखने में सहायक थीं।

इन प्रयासों से विजयनगर साम्राज्य में जल संसाधनों का कुशल प्रबंधन हुआ और कृषि को बढ़ावा मिला।

26. अभिलेख आज भी इतिहास की जानकारी के महत्वपूर्ण साधन हैं। स्पष्ट कीजिए।

The inscriptions are most important source of history even today. Clarify.

उत्तर: अभिलेख आज भी इतिहास के महत्वपूर्ण साधन हैं, क्योंकि:

  • प्रामाणिकता: अभिलेख समकालीन स्रोत हैं, जो घटनाओं के समय ही लिखे गए थे, इसलिए इनमें परिवर्तन की संभावना कम होती है।
  • राजनीतिक जानकारी: अभिलेखों से राजाओं के शासनकाल, विजयों, प्रशासनिक व्यवस्था और कर प्रणाली की जानकारी मिलती है।
  • सामाजिक और आर्थिक जीवन: इनसे समाज की संरचना, जाति व्यवस्था, व्यापार, कृषि और आर्थिक गतिविधियों का पता चलता है।
  • धार्मिक और सांस्कृतिक जानकारी: अभिलेखों में मंदिरों, दान, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक परंपराओं का वर्णन मिलता है।
  • भाषा और लिपि का विकास: अभिलेख विभिन्न भाषाओं और लिपियों में मिलते हैं, जो भाषाई विकास को समझने में सहायक होते हैं।
  • भौगोलिक जानकारी: अभिलेखों में स्थानों, सीमाओं और मार्गों का उल्लेख मिलता है, जो ऐतिहासिक भूगोल के अध्ययन में सहायक है।

इस प्रकार, अभिलेख इतिहास के अध्ययन का एक विश्वसनीय और बहुआयामी स्रोत हैं।

खण्ड - द

Part - D

27. असहयोग आन्दोलन के कारणों का मूल्यांकन कीजिए।

अथवा

भारत छोड़ो आन्दोलन का क्या महत्व है?

Evaluate the causes of Non-cooperation Movement. 6

OR

What is the importance of Quit India Movement? 6

उत्तर (असहयोग आन्दोलन के कारण): असहयोग आन्दोलन (1920-22) के प्रमुख कारण थे:

  • रौलट एक्ट (1919) और जलियाँवाला बाग हत्याकांड (1919) से उत्पन्न आक्रोश।
  • खिलाफत आन्दोलन का समर्थन, जिसने हिन्दू-मुस्लिम एकता को बल दिया।
  • मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों (1919) से असंतोष, जो भारतीयों की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे।
  • आर्थिक शोषण और ब्रिटिश नीतियों के प्रति बढ़ता असंतोष।
  • गाँधी जी के नेतृत्व में अहिंसक प्रतिरोध की रणनीति।

मूल्यांकन: यह आन्दोलन जन-जागरण का प्रतीक था, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को व्यापक जनाधार दिया। हालाँकि, चौरी-चौरा कांड (1922) के बाद इसे वापस ले लिया गया, लेकिन इसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी।

अथवा (भारत छोड़ो आन्दोलन का महत्व): भारत छोड़ो आन्दोलन (1942) का महत्व:

  • यह एक जन-आन्दोलन था जिसमें सभी वर्गों ने भाग लिया।
  • इसने ब्रिटिश शासन को यह स्पष्ट कर दिया कि भारत में उनका शासन अब टिकाऊ नहीं है।
  • इस आन्दोलन ने स्वतंत्रता की माँग को अंतिम रूप दे दिया और 1947 में स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त किया।
  • यह आन्दोलन अहिंसक प्रतिरोध का एक ऐतिहासिक उदाहरण है।

28. आपके अनुसार भारत विभाजन के लिए कौन-सी परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं? उल्लेख कीजिए।

अथवा

मौखिक इतिहास से विभाजन को हम कैसे समझ सकते हैं?

Narrate the responsible circumstances which led to the partition of India according to you. 6

OR

How can we understand the partition of India from oral history? 3+3

उत्तर (भारत विभाजन के लिए उत्तरदायी परिस्थितियाँ): भारत विभाजन के लिए निम्नलिखित परिस्थितियाँ उत्तरदायी थीं:

  • साम्प्रदायिक राजनीति का उदय: मुस्लिम लीग ने दो-राष्ट्र सिद्धांत को बढ़ावा दिया, जिसमें कहा गया कि हिन्दू और मुस्लिम अलग-अलग राष्ट्र हैं।
  • ब्रिटिश नीति: अंग्रेजों ने 'फूट डालो और राज करो' की नीति अपनाई, जिसने साम्प्रदायिकता को बढ़ावा दिया।
  • स्वतंत्रता की माँग में तेजी: 1940 के दशक में स्वतंत्रता की माँग तीव्र हुई, लेकिन कांग्रेस और लीग के बीच मतभेद बढ़ते गए।
  • साम्प्रदायिक दंगे: 1946-47 में हुए दंगों ने विभाजन की आवश्यकता को बल दिया।
  • माउंटबेटन योजना: 3 जून 1947 की योजना के तहत विभाजन को अंतिम रूप दिया गया।

अथवा (मौखिक इतिहास से विभाजन को समझना): मौखिक इतिहास विभाजन को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके माध्यम से:

  • हम विभाजन के दौरान लोगों की व्यक्तिगत पीड़ा, विस्थापन और हिंसा के अनुभवों को जान सकते हैं।
  • यह आधिकारिक दस्तावेजों से परे जाकर आम लोगों की भावनाओं और संघर्षों को उजागर करता है।
  • मौखिक इतिहास विभाजन के सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभावों को समझने में मदद करता है, जैसे कि पहचान का संकट और स्मृति का निर्माण।

29. भक्ति आन्दोलन की मुख्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

अथवा

निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए:

  1. अलवार और शैव परम्परा
  2. कबीर
  3. खानकाह और सिलसिला
  4. भक्ति आन्दोलन में महान और लघु परम्पराएँ

उत्तर (भक्ति आन्दोलन की मुख्य विशेषताएँ): भक्ति आन्दोलन (लगभग 7वीं से 17वीं शताब्दी) की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • एकेश्वरवाद पर बल: भक्ति आन्दोलन ने एक ईश्वर की उपासना पर जोर दिया, चाहे वह राम, कृष्ण, शिव या अल्लाह के रूप में हो।
  • जाति-पाति का विरोध: इसने जाति व्यवस्था और सामाजिक भेदभाव का विरोध किया, सभी को समान माना।
  • सरल भाषा का प्रयोग: संतों ने संस्कृत के बजाय स्थानीय भाषाओं (जैसे हिंदी, मराठी, तमिल) में रचनाएँ कीं, जिससे आम जनता तक पहुँच बनी।
  • प्रेम और समर्पण: भक्ति का मार्ग प्रेम, समर्पण और ईश्वर के प्रति अनन्य भक्ति पर आधारित था, न कि कर्मकांडों पर।
  • सामाजिक सुधार: इसने सती प्रथा, बाल विवाह और मूर्ति पूजा जैसी कुरीतियों का विरोध किया।
  • सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता: भक्ति संतों ने हिन्दू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया और धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया।

अथवा (टिप्पणियाँ):

i) अलवार और शैव परम्परा: अलवार (वैष्णव) और शैव (शिव के उपासक) संत दक्षिण भारत में 6वीं-9वीं शताब्दी में सक्रिय थे। अलवारों ने विष्णु की भक्ति पर जोर दिया, जबकि शैवों ने शिव की। इन्होंने मंदिरों और भक्ति गीतों के माध्यम से भक्ति को लोकप्रिय बनाया।

ii) कबीर: कबीर (15वीं शताब्दी) एक निर्गुण भक्ति संत थे। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम एकता, मूर्ति पूजा के विरोध और ईश्वर के प्रति प्रेम पर बल दिया। उनकी रचनाएँ 'बीजक' में संग्रहित हैं।

iii) खानकाह और सिलसिला: खानकाह सूफी संतों के आश्रम थे, जहाँ शिक्षा और ध्यान दिया जाता था। सिलसिला सूफी परम्पराओं की श्रृंखला थी, जैसे चिश्ती, सुहरावर्दी। इन्होंने इस्लाम के प्रचार और सामाजिक सेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

iv) भक्ति आन्दोलन में महान और लघु परम्पराएँ: महान परम्परा में संस्कृत ग्रंथों और मंदिरों पर आधारित भक्ति शामिल थी, जबकि लघु परम्परा में स्थानीय भाषाओं और लोक रीति-रिवाजों पर आधारित भक्ति थी। दोनों ने मिलकर भक्ति को व्यापक बनाया।

प्रश्न 29 (भाग 1)

प्रश्न 29. भक्ति आंदोलन की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (6 अंक)

उत्तर: भक्ति आंदोलन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

  • ईश्वर के प्रति प्रेम और भक्ति पर बल: इस आंदोलन ने कर्मकांडों और बाह्य आडंबरों के स्थान पर ईश्वर के प्रति सच्चे प्रेम और समर्पण को महत्व दिया।
  • एकेश्वरवाद: भक्ति संतों ने एक ही निराकार ईश्वर की उपासना पर जोर दिया, चाहे वह राम, कृष्ण, शिव या अल्लाह के रूप में हो।
  • जाति-पाति का विरोध: इस आंदोलन ने जाति, वर्ण और ऊँच-नीच के भेदभाव को खारिज करते हुए सभी मनुष्यों को समान माना।
  • सामाजिक समानता: भक्ति संतों ने स्त्री-पुरुष, अमीर-गरीब सभी को एक समान समझा और सभी के लिए मोक्ष के द्वार खोल दिए।
  • स्थानीय भाषाओं का प्रयोग: संस्कृत के स्थान पर हिंदी, मराठी, तमिल, कन्नड़ आदि स्थानीय भाषाओं में रचनाएँ की गईं, जिससे आम जनता तक संदेश आसानी से पहुँचा।
  • गुरु का महत्व: आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए गुरु को अत्यंत आवश्यक माना गया। गुरु की कृपा से ही ईश्वर की प्राप्ति संभव थी।
  • मूर्तिपूजा और तीर्थाटन का विरोध: अधिकांश भक्ति संतों ने मूर्तिपूजा, तीर्थाटन और व्रत-उपवास जैसी बाहरी क्रियाओं का विरोध किया।
  • भजन-कीर्तन और संगीत: भक्ति आंदोलन में भजन, कीर्तन और नृत्य के माध्यम से ईश्वर की उपासना को प्रमुख स्थान दिया गया।

प्रश्न 29 (भाग 2) - वैकल्पिक प्रश्न

अथवा

निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए: (3+3 अंक)

  1. वीर शैव परंपरा
  2. कबीर
  3. खानकाहें और सिलसिले
  4. भक्ति आंदोलन में महान और लघु परंपराएँ

उत्तर:

i) वीर शैव परंपरा

वीर शैव परंपरा (लिंगायत संप्रदाय) की स्थापना 12वीं शताब्दी में कर्नाटक में बसवन्ना ने की थी। इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं: यह शिव की उपासना पर बल देता है, जाति-पाति और वर्ण व्यवस्था का कड़ा विरोध करता है, स्त्रियों को समान अधिकार देता है, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन करता है, और मूर्तिपूजा तथा तीर्थाटन को अस्वीकार करता है। इस संप्रदाय के अनुयायी 'इष्टलिंग' (शिव का प्रतीक) धारण करते हैं।

ii) कबीर

कबीर (15वीं शताब्दी) भक्ति आंदोलन के सबसे प्रभावशाली संत कवि थे। वे काशी में एक जुलाहा परिवार में पैदा हुए। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश दिया और दोनों धर्मों के बाह्य आडंबरों (मूर्तिपूजा, रोजा, नमाज) का विरोध किया। उन्होंने 'राम' को निराकार ईश्वर के रूप में माना। उनकी रचनाएँ 'बीजक' में संग्रहित हैं और वे साखी, सबद और रमैनी शैली में लिखी गई हैं।

प्रश्न 30

प्रश्न 30. भारत के रेखा मानचित्र में निम्नलिखित स्थलों को अंकित कीजिए: (5 अंक)

  1. विजयनगर
  2. कलकत्ता
  3. लोथल
  4. कलिंग
  5. आगरा

उत्तर: (मानचित्र में अंकित करने हेतु स्थानों की सूची)

  • विजयनगर: दक्षिण भारत में, वर्तमान कर्नाटक राज्य के हम्पी क्षेत्र में स्थित।
  • कलकत्ता (कोलकाता): पूर्वी भारत में, पश्चिम बंगाल राज्य में, हुगली नदी के तट पर स्थित।
  • लोथल: पश्चिमी भारत में, गुजरात राज्य के अहमदाबाद जिले में, साबरमती नदी के तट पर स्थित (सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख स्थल)।
  • कलिंग: पूर्वी भारत में, वर्तमान ओडिशा राज्य के तटीय क्षेत्र में स्थित।
  • आगरा: उत्तर भारत में, उत्तर प्रदेश राज्य में, यमुना नदी के तट पर स्थित।

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014

Subject : HISTORY

INDIA (Before Independence)

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