RBSE Class 12th 2014 Physics-SS-40-2014 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2014
Subject Physics-SS-40-2014
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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How to practise with this question paper

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Rajasthan Board Class 12th Physics-SS-40-2014 2014 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014

भौतिक विज्ञान
PHYSICS

समय : 3 घण्टे 15 मिनट    पूर्णांक : 56


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करना अनिवार्य है।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

No. of Questions — 30    SS—40—PHY.

No. of Printed Pages — 11

SS—40—Phy.   [SS-5540]   [ Turn over

प्रश्न संख्या एवं अंक विभाजन

प्रश्न संख्या अंक प्रति प्रश्न
1-3 1
4-24 2
25-27 3
28-30 4
Q. Nos. Marks per question
1-3 1
4-24 2
25-27 3
28-30 4

7. प्रश्न संख्या 2 तथा 27 से 30 में आन्तरिक विकल्प हैं।

There are internal choices in Q. Nos. 2 and 27 to 30.

8. परीक्षा में कैलकुलेटर के उपयोग की अनुमति नहीं है।

Use of calculator is not allowed in the examination.


1. एक कार्बन प्रतिरोधक का मान 62 × 100 Ω तथा सह्यता 5% है। इसके वर्ण कोड के नाम क्रम से लिखिए।

A carbon resistor has a value of 62 × 100 Ω with a tolerance of 5%. Write colour code for this resistor in sequence.

हल: प्रतिरोधक का मान = 62 × 100 Ω ± 5%

  • पहला अंक (6) → नीला (Blue)
  • दूसरा अंक (2) → लाल (Red)
  • गुणक (100) → काला (Black)
  • सह्यता (5%) → सुनहरा (Gold)

वर्ण कोड क्रम: नीला, लाल, काला, सुनहरा (Blue, Red, Black, Gold)

2. यदि चुम्बकीय एकल ध्रुवों का अस्तित्व होता तो चुम्बकत्व सम्बन्धी गाउस का नियम क्या रूप ग्रहण करता?

If magnetic monopoles would have existed, how would the Gauss' law of magnetism be modified?

हल: चुम्बकत्व सम्बन्धी गाउस का नियम कहता है कि किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल चुम्बकीय फ्लक्स शून्य होता है, अर्थात ∮ B · dA = 0। यदि चुम्बकीय एकल ध्रुव (मोनोपोल) का अस्तित्व होता, तो यह नियम संशोधित होकर ∮ B · dA = μ0 qm हो जाता, जहाँ qm बंद पृष्ठ के अंदर कुल चुम्बकीय आवेश (मोनोपोल) है। यह विद्युत क्षेत्र के लिए गाउस के नियम के समान होगा।

3. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ किसे कहते हैं? एक उदाहरण दीजिए।

What are diamagnetic substances? Give one example.

हल: प्रतिचुम्बकीय पदार्थ वे पदार्थ होते हैं जो बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर क्षेत्र के विपरीत दिशा में दुर्बल चुम्बकत्व प्रदर्शित करते हैं। इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति (χ) ऋणात्मक होती है। ये बाह्य चुम्बकीय क्षेत्र द्वारा प्रतिकर्षित होते हैं।

उदाहरण: बिस्मथ (Bi), जल (H2O), ताँबा (Cu), सोना (Au), आदि।

4. निम्न चित्र में दो कुंडली AB व CD के बीच एक छड़ चुम्बक NS को तीर की दिशा में चलाने पर किस कुंडली में प्रेरित धारा बायीं ओर से देखने पर वामावर्त्ती होगी ?

उत्तर: कुंडली CD में प्रेरित धारा बायीं ओर से देखने पर वामावर्त्ती (anti-clockwise) होगी।

व्याख्या: जब चुम्बक NS को तीर की दिशा में (दायीं ओर) चलाया जाता है, तो कुंडली CD के पास चुम्बक का उत्तरी ध्रुव (N) आता है। लेन्ज़ के नियम के अनुसार, कुंडली में प्रेरित धारा ऐसी दिशा में होगी जो चुम्बक के प्रभाव का विरोध करे। बायीं ओर से देखने पर, कुंडली CD में वामावर्त्त धारा प्रेरित होगी जो चुम्बक के उत्तरी ध्रुव को प्रतिकर्षित करेगी।

5. 'एम्पियर-मैक्सवेल के नियम' का गणितीय समीकरण लिखिए।

उत्तर: एम्पियर-मैक्सवेल नियम का गणितीय समीकरण:

∮ B · dl = μ₀ (Ic + ε₀ dΦE/dt)

जहाँ:

  • B = चुम्बकीय क्षेत्र
  • dl = पथ अवयव
  • μ₀ = निर्वात की चुम्बकशीलता
  • Ic = चालन धारा
  • ε₀ = निर्वात की विद्युतशीलता
  • E/dt = विद्युत फ्लक्स में परिवर्तन की दर

6. प्राथमिक इन्द्रधनुष तथा द्वितीयक इन्द्रधनुष में बूँद के अन्दर कितनी-कितनी बार पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होता है ?

उत्तर:

  • प्राथमिक इन्द्रधनुष: बूँद के अन्दर एक बार पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होता है।
  • द्वितीयक इन्द्रधनुष: बूँद के अन्दर दो बार पूर्ण आन्तरिक परावर्तन होता है।

व्याख्या: प्राथमिक इन्द्रधनुष में प्रकाश बूँद में प्रवेश करता है, एक बार परावर्तित होता है, और फिर बाहर निकलता है। द्वितीयक इन्द्रधनुष में प्रकाश दो बार परावर्तित होता है, जिससे रंगों का क्रम उल्टा हो जाता है।

7. तरंगाग्र को परिभाषा लिखिए।

उत्तर: तरंगाग्र (Wavefront) वह सतह या बिन्दुपथ है, जिसके सभी बिन्दु एक ही कला (phase) में कम्पन कर रहे होते हैं। दूसरे शब्दों में, किसी तरंग स्रोत से निकलने वाली तरंगों के लिए, समान कला वाले बिन्दुओं को मिलाने वाली सतह को तरंगाग्र कहते हैं।

उदाहरण: समतल तरंगाग्र, गोलीय तरंगाग्र, बेलनाकार तरंगाग्र।

प्रश्न 8

8. 0.2 किग्रा द्रव्यमान की गेंद 20 मी/से की चाल से गतिमान है। इसकी दे-ब्रोग्ली तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए। (प्लांक नियतांक h = 6.62 × 10−34 J.s)

A ball of mass 0.2 kg is moving with a speed 20 m/s. Calculate the de Broglie wavelength. (Planck constant h = 6.62 × 10−34 J.s)

हल:

दिया गया है:

  • द्रव्यमान (m) = 0.2 kg
  • चाल (v) = 20 m/s
  • प्लांक नियतांक (h) = 6.62 × 10−34 J.s

दे-ब्रोग्ली तरंगदैर्घ्य का सूत्र:

λ = h / (m × v)

λ = (6.62 × 10−34) / (0.2 × 20)

λ = (6.62 × 10−34) / 4

λ = 1.655 × 10−34 m

उत्तर: दे-ब्रोग्ली तरंगदैर्घ्य = 1.655 × 10−34 मीटर

प्रश्न 9

9. दो धातु की प्लेटों P तथा Q के लिए अंतक विभव V0 तथा आवृत्ति ν के बीच ग्राफ दर्शाए गये हैं। इनमें से किस धातु की देहली तरंगदैर्घ्य एवं कार्य फलन अधिक होगा?

The graph between the stopping potential V0 and frequency ν for two different metal plates P and Q are shown in the figure. Which of the metals has greater threshold wavelength and work function?

ग्राफ: V0 बनाम ν

P और Q के लिए दो सीधी रेखाएँ

हल:

आइंस्टीन के प्रकाश-विद्युत समीकरण के अनुसार:

eV0 = hν − φ

जहाँ φ कार्य फलन है। ग्राफ में, V0 बनाम ν के बीच ढाल h/e (नियत) होता है, और अंत:खंड (ν-अक्ष पर) देहली आवृत्ति ν0 देता है।

  • धातु P के लिए देहली आवृत्ति (ν0P) कम है, इसलिए देहली तरंगदैर्घ्य (λ0P = c/ν0P) अधिक होगा।
  • धातु Q के लिए देहली आवृत्ति (ν0Q) अधिक है, इसलिए देहली तरंगदैर्घ्य कम होगा।
  • कार्य फलन φ = hν0 होता है, इसलिए जिसकी देहली आवृत्ति अधिक होगी, उसका कार्य फलन भी अधिक होगा।

उत्तर: धातु Q की देहली आवृत्ति अधिक है, इसलिए इसका कार्य फलन अधिक होगा। धातु P की देहली आवृत्ति कम है, इसलिए इसकी देहली तरंगदैर्घ्य अधिक होगी।

प्रश्न 10

10. एक रेडियोएक्टिव तत्व का क्षय स्थिरांक 0.693 प्रति मिनट है। इसकी अर्द्ध-आयु तथा औसत आयु क्या होगी?

The decay constant of a radioactive substance is 0.693 per minute. What will be the half-life and mean life of it?

हल:

दिया गया है:

  • क्षय स्थिरांक (λ) = 0.693 प्रति मिनट

अर्द्ध-आयु (T1/2) का सूत्र:

T1/2 = ln(2) / λ = 0.693 / λ

T1/2 = 0.693 / 0.693 = 1 मिनट

औसत आयु (τ) का सूत्र:

τ = 1 / λ

τ = 1 / 0.693 ≈ 1.443 मिनट

उत्तर: अर्द्ध-आयु = 1 मिनट, औसत आयु ≈ 1.443 मिनट

Physics (SS-40-2014) – Page 5

प्रश्न 1 (Question 1)

कोई दो कार्बनिक यौगिक अर्द्धचालकों के नाम लिखिए।

Write the names of any two organic compound semiconductors.

उत्तर / Answer:

  1. एन्थ्रासीन (Anthracene)
  2. नेफ्थालीन (Naphthalene)

प्रश्न 2 (Question 2)

बिन्दु से बिन्दु संचार का एक उदाहरण लिखिए।

Write one example of point to point communication.

उत्तर / Answer: टेलीफोन कॉल (Telephone call) बिन्दु से बिन्दु संचार का एक उदाहरण है।


प्रश्न 3 (Question 3)

व्यापक संचार व्यवस्था का एक ब्लाक आरेख बनाइए।

Sketch a block diagram of a generalised communication system.

उत्तर / Answer: व्यापक संचार व्यवस्था के ब्लॉक आरेख में निम्नलिखित घटक होते हैं:

सूचना स्रोत (Information Source) → प्रेषित्र (Transmitter) → चैनल (Channel) → ग्राही (Receiver) → गंतव्य (Destination)

इसमें सूचना स्रोत संदेश उत्पन्न करता है, प्रेषित्र इसे संचरण के लिए उपयुक्त बनाता है, चैनल संकेत को वहन करता है, ग्राही संकेत को पुनः प्राप्त करता है, और गंतव्य अंतिम उपयोगकर्ता होता है।


प्रश्न 4 (Question 4)

5 × 10⁻⁶ C तथा -3 × 10⁻⁶ C के दो बिन्दु आवेश एक दूसरे से 6 सेमी दूरी पर स्थित हैं। इनको मिलाने वाली रेखा के किस बिन्दु पर विद्युत विभव शून्य होगा?

Two point charges 5 × 10⁻⁶ C and -3 × 10⁻⁶ C are located 6 cm apart. At what point on the line joining these charges the electric potential will be zero?

हल / Solution:

माना कि 5 × 10⁻⁶ C आवेश को मूल बिन्दु (x = 0) पर रखा गया है और -3 × 10⁻⁶ C आवेश को x = 6 cm पर रखा गया है।

माना कि अभीष्ट बिन्दु की दूरी पहले आवेश से x cm है।

विद्युत विभव शून्य होने की स्थिति में:

V = k(5 × 10⁻⁶)/x + k(-3 × 10⁻⁶)/(6 - x) = 0

⇒ 5/x - 3/(6 - x) = 0

⇒ 5(6 - x) = 3x

⇒ 30 - 5x = 3x

⇒ 30 = 8x

⇒ x = 30/8 = 3.75 cm

अतः, पहले आवेश (5 × 10⁻⁶ C) से 3.75 cm की दूरी पर विद्युत विभव शून्य होगा।


प्रश्न 5 (Question 5)

अपवाह वेग के आधार पर ओम के नियम का समीकरण J = σ E प्राप्त कीजिए। (जहाँ संकेतों के सामान्य अर्थ हैं)

Obtain the equation J = σ E of Ohm's law on the basis of drift velocity. (Where symbols carry their usual meanings).

हल / Solution:

माना कि चालक में प्रति एकांक आयतन में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या n है।

अपवाह वेग vd = -eEτ/m, जहाँ e इलेक्ट्रॉन का आवेश, E विद्युत क्षेत्र, τ विश्रांति काल, और m इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान है।

धारा घनत्व J = n e vd = n e (-eEτ/m) = (ne²τ/m) E

चालकता σ = ne²τ/m, अतः J = σ E

यही ओम के नियम का सदिश रूप है।


प्रश्न 6 (Question 6)

दो सेलों के विद्युत वाहक बल E₁ व E₂ तथा आन्तरिक प्रतिरोध क्रमशः r₁ व r₂ हैं। श्रेणीक्रम में जोड़ने पर तुल्य वि० वा० बल तथा तुल्य आन्तरिक प्रतिरोध का मान प्राप्त कीजिए।

Two cells of emfs E₁ and E₂ are connected in series. Their internal resistances are r₁ and r₂ respectively. Compute the equivalent emf and equivalent internal resistance.

हल / Solution:

जब दो सेलों को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है:

तुल्य विद्युत वाहक बल (Equivalent emf):

Eeq = E₁ + E₂

तुल्य आन्तरिक प्रतिरोध (Equivalent internal resistance):

req = r₁ + r₂

यदि सेलों को विपरीत क्रम में जोड़ा जाए, तो Eeq = E₁ - E₂ (यदि E₁ > E₂) होगा, लेकिन प्रश्न में सामान्य श्रेणीक्रम का उल्लेख है, अतः उपरोक्त सूत्र मान्य हैं।

प्रश्न 7

r तथा R त्रिज्या की दो संकेन्द्रीय वृत्ताकार कुंडलियाँ समाक्ष रूप में स्थित हैं। यदि R >> r हो तो कुंडलियों के बीच अन्योन्य प्रेरकत्व ज्ञात कीजिए।

Two concentric circular coils of radii r and R are placed coaxially with centres coinciding. If R >> r then calculate the mutual inductance between the coils.

हल:

माना बड़ी कुंडली (त्रिज्या R) में धारा I प्रवाहित हो रही है। इसके केंद्र पर चुंबकीय क्षेत्र:

B = μ₀I / (2R)

चूँकि R >> r, छोटी कुंडली के क्षेत्रफल पर चुंबकीय क्षेत्र लगभग नियत माना जा सकता है। छोटी कुंडली से संबद्ध चुंबकीय फ्लक्स:

Φ = B × (πr²) = (μ₀I / 2R) × πr²

अन्योन्य प्रेरकत्व M = Φ / I = μ₀πr² / (2R)

अतः अन्योन्य प्रेरकत्व M = μ₀πr² / (2R)

प्रश्न 8

विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम के उन विकिरणों के नाम लिखिए जो:

(क) वातावरण में ओजोन परत द्वारा अवशोषित किये जाते हैं
(ख) उच्च वेग वाले इलेक्ट्रॉनों को धातु लक्ष्य पर बमबारी से उत्पन्न होते हैं
(ग) संचार उपग्रह में प्रयुक्त होते हैं
(घ) लगभग 400 nm से 700 nm तरंगदैर्घ्य परास रखते हैं।

Identify the constituent radiations of electromagnetic spectrum which:
a) is absorbed by ozone layer in the atmosphere
b) is produced by bombarding a metal target by high speed electrons
c) is used in satellite communication
d) has wavelength range between 400 nm to 700 nm.

उत्तर:

  • (क) पराबैंगनी (Ultraviolet) विकिरण – ओजोन परत द्वारा अवशोषित होते हैं।
  • (ख) X-किरणें (X-rays) – उच्च वेग वाले इलेक्ट्रॉनों को धातु लक्ष्य पर बमबारी से उत्पन्न होती हैं।
  • (ग) सूक्ष्म तरंगें (Microwaves) – संचार उपग्रह में प्रयुक्त होती हैं।
  • (घ) दृश्य प्रकाश (Visible light) – तरंगदैर्घ्य परास 400 nm से 700 nm होता है।

प्रश्न 9

सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता को परिभाषित कीजिए। इसका सूत्र लिखिए। यह किस प्रकार प्रभावित होती है, जब:

(क) आपतित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य घटती है?
(ख) अभिदृश्यक लेंस का द्वारक घटता है?

Define resolving power of a microscope. Write its formula. How is it affected when:
a) the wavelength of incident light decreases?
b) the aperture of objective lens decreases?

उत्तर:

परिभाषा: सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता (Resolving Power) दो निकटस्थ बिंदुओं को अलग-अलग देखने की क्षमता है। इसे न्यूनतम कोणीय दूरी के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिस पर दो बिंदु अलग-अलग दिखाई देते हैं।

सूत्र: विभेदन क्षमता = 1 / dmin = (2μ sinθ) / λ

जहाँ μ = माध्यम का अपवर्तनांक, θ = अर्ध-द्वारक कोण, λ = प्रकाश की तरंगदैर्घ्य।

प्रभाव:

  • (क) जब आपतित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य घटती है, तो विभेदन क्षमता बढ़ जाती है (क्योंकि λ का मान घटने पर सूत्र के अनुसार विभेदन क्षमता बढ़ती है)।
  • (ख) जब अभिदृश्यक लेंस का द्वारक घटता है, तो θ का मान घटता है, जिससे विभेदन क्षमता घट जाती है।

प्रश्न 20

सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता को परिभाषित कीजिए। इसका सूत्र लिखिए। यह कैसे बदलेगी, जब:

(a) आपतित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य कम कर दी जाए?

(b) अभिदृश्यक लेंस का द्वारक (aperture) कम कर दिया जाए?

परिभाषा: सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता (Resolving Power) दो निकटवर्ती बिंदुओं को अलग-अलग देखने की क्षमता है। इसे न्यूनतम कोणीय दूरी के व्युत्क्रम के रूप में परिभाषित किया जाता है जिस पर दो बिंदु अलग-अलग दिखाई देते हैं।

सूत्र: सूक्ष्मदर्शी की विभेदन क्षमता = \( \frac{2\mu \sin\theta}{\lambda} \), जहाँ \(\mu\) माध्यम का अपवर्तनांक, \(\theta\) अर्ध-द्वारक कोण, और \(\lambda\) प्रकाश की तरंगदैर्ध्य है।

(a) जब तरंगदैर्ध्य (\(\lambda\)) कम की जाती है, तो विभेदन क्षमता बढ़ जाती है (क्योंकि यह \(\lambda\) के व्युत्क्रमानुपाती है)।

(b) जब द्वारक (aperture) कम किया जाता है, तो \(\sin\theta\) का मान घटता है, जिससे विभेदन क्षमता घट जाती है।

प्रश्न 21

6 × 10¹⁴ हर्ट्ज आवृत्ति का एकवर्णीय प्रकाश स्रोत प्रति सेकण्ड 2 × 10⁻³ जूल ऊर्जा उत्सर्जित करता है। स्रोत द्वारा प्रति सेकण्ड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।

A monochromatic light source of frequency 6 × 10¹⁴ Hz is emitting energy at the rate 2 × 10⁻³ J/s. Calculate the number of photons emitted per second by the source.

हल:

दिया गया है: आवृत्ति \( \nu = 6 \times 10^{14} \) Hz, उत्सर्जित ऊर्जा दर \( P = 2 \times 10^{-3} \) J/s

एक फोटॉन की ऊर्जा: \( E = h\nu = (6.63 \times 10^{-34}) \times (6 \times 10^{14}) = 3.978 \times 10^{-19} \) J

प्रति सेकण्ड उत्सर्जित फोटॉनों की संख्या: \( n = \frac{P}{E} = \frac{2 \times 10^{-3}}{3.978 \times 10^{-19}} \approx 5.03 \times 10^{15} \)

उत्तर: लगभग \( 5.03 \times 10^{15} \) फोटॉन प्रति सेकण्ड।

प्रश्न 22

p-n संधि के निर्माण के लिए दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के नाम लिखिए। इसमें ह्रासी क्षेत्र (अवक्षय क्षेत्र) एवं रोधिका विभव को परिभाषित कीजिए।

Write the names of two important processes which occur on formation of p-n junction. Define the 'depletion region' and 'potential barrier' in it.

दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाएँ:

  1. विसरण (Diffusion): p-क्षेत्र से होल और n-क्षेत्र से इलेक्ट्रॉन एक-दूसरे की ओर विसरित होते हैं।
  2. पुनर्संयोजन (Recombination): विसरित इलेक्ट्रॉन और होल संधि के पास पुनर्संयोजित हो जाते हैं।

ह्रासी क्षेत्र (Depletion Region): यह p-n संधि के दोनों ओर का वह क्षेत्र है जहाँ मुक्त आवेश वाहक (इलेक्ट्रॉन और होल) अनुपस्थित होते हैं, केवल स्थिर आयन रह जाते हैं।

रोधिका विभव (Potential Barrier): यह ह्रासी क्षेत्र में स्थिर आयनों के कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्र के विरुद्ध आवेश वाहकों को संधि पार करने के लिए आवश्यक न्यूनतम विभवांतर है।

अथवा / OR

दो सार्वत्रिक तार्किक द्वारों के नाम लिखिए। एकीकृत परिपथ किसे कहते हैं? इसके दो लाभ लिखिए।

Write the names of two universal logic gates. What is integrated circuit? Write two advantages of it.

दो सार्वत्रिक तार्किक द्वार: NAND गेट और NOR गेट।

एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit - IC): यह एक लघु इलेक्ट्रॉनिक परिपथ है जिसमें अनेक अवयव (जैसे ट्रांजिस्टर, डायोड, प्रतिरोधक) एक ही अर्धचालक चिप पर निर्मित होते हैं।

दो लाभ:

  1. आकार में अत्यंत छोटा और हल्का होता है।
  2. विद्युत ऊर्जा की खपत कम होती है और विश्वसनीयता अधिक होती है।

प्रश्न 22

हाइड्रोजन परमाणु को निम्नतम अवस्था में ऊर्जा -3.6 eV है। इस दशा में इलेक्ट्रॉन की गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा ज्ञात करें।

The energy of the electron in the ground state of hydrogen atom is -3.6 eV. Find the kinetic energy and potential energy of electron in this state.

हल:

हाइड्रोजन परमाणु की निम्नतम अवस्था में कुल ऊर्जा (E) = -3.6 eV

बोर मॉडल के अनुसार, कुल ऊर्जा E = गतिज ऊर्जा (K) + स्थितिज ऊर्जा (U)

तथा K = -E और U = 2E

अतः गतिज ऊर्जा K = -(-3.6 eV) = 3.6 eV

स्थितिज ऊर्जा U = 2 × (-3.6 eV) = -7.2 eV

उत्तर: गतिज ऊर्जा = 3.6 eV, स्थितिज ऊर्जा = -7.2 eV

प्रश्न 23

समीकरण R = R₀A¹/³ के आधार पर दर्शाइये कि नाभिकीय द्रव्य का घनत्व लगभग अचर रहता है। (यहाँ R₀ एक नियतांक तथा A द्रव्यमान संख्या है)

From the equation R = R₀A¹/³, show that the nuclear matter density is nearly constant. [Where R₀ is a constant and A is the mass number.]

हल:

नाभिक की त्रिज्या R = R₀A¹/³, जहाँ R₀ = 1.2 × 10⁻¹⁵ m (लगभग)

नाभिक का आयतन V = (4/3)πR³ = (4/3)π(R₀A¹/³)³ = (4/3)πR₀³A

नाभिक का द्रव्यमान m = A × 1 u = A × 1.66 × 10⁻²⁷ kg (लगभग)

नाभिकीय घनत्व ρ = m/V = (A × 1.66 × 10⁻²⁷) / [(4/3)πR₀³A]

ρ = (1.66 × 10⁻²⁷) / [(4/3)πR₀³]

चूँकि R₀ और अन्य सभी राशियाँ नियत हैं, अतः ρ भी नियत है। यह A पर निर्भर नहीं करता, इसलिए नाभिकीय द्रव्य का घनत्व लगभग अचर रहता है।

प्रश्न 24

माडुलन की आवश्यकता के लिए कोई दो कारण लिखिए।

State any two reasons for necessity of modulation.

उत्तर: माडुलन की आवश्यकता के दो कारण:

  1. एंटीना की ऊँचाई कम करना: निम्न आवृत्ति के संकेतों को प्रेषित करने के लिए बहुत ऊँचे एंटीने की आवश्यकता होती है। माडुलन द्वारा संकेत को उच्च आवृत्ति में बदलने से एंटीना की ऊँचाई व्यावहारिक हो जाती है।
  2. बहुसंकेतन (Multiplexing): विभिन्न संकेतों को विभिन्न वाहक आवृत्तियों पर माडुलित करके एक ही माध्यम से एक साथ प्रेषित किया जा सकता है, जिससे आवृत्ति स्पेक्ट्रम का कुशल उपयोग होता है।

प्रश्न 25

LCR श्रेणी अनुनादी परिपथ में प्रत्यावती धारा का आवृत्ति के साथ परिवर्तन दर्शाने वाला वक्र खींचिए तथा बैण्ड चौड़ाई के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए।

Draw a curve for showing variation in alternating current with frequency in LCR resonant circuit. Hence obtain an expression of bandwidth.

हल:

वक्र: LCR श्रेणी अनुनादी परिपथ में धारा (I) बनाम आवृत्ति (f) का वक्र एक घंटी के आकार का होता है। अनुनाद आवृत्ति f₀ पर धारा अधिकतम (I₀) होती है।

बैण्ड चौड़ाई (Bandwidth) का व्यंजक:

बैण्ड चौड़ाई (Δf) = f₂ - f₁, जहाँ f₁ और f₂ वे आवृत्तियाँ हैं जिन पर धारा का मान अधिकतम धारा का 1/√2 गुना होता है।

अनुनाद आवृत्ति f₀ = 1/(2π√(LC))

बैण्ड चौड़ाई Δf = R/(2πL)

जहाँ R प्रतिरोध, L प्रेरकत्व है।

गुणता कारक Q = f₀/Δf = (1/R)√(L/C)

प्रश्न 26

उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में npn ट्रांजिस्टर का परिपथ आरेख बनाइये, तथा निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र खींचने के लिए कार्यविधि समझाइए।

Draw the circuit diagram of npn transistor in common emitter configuration. Hence describe the working method to obtain output characteristic curve.

हल:

परिपथ आरेख: उभयनिष्ठ उत्सर्जक विन्यास में npn ट्रांजिस्टर का परिपथ आरेख निम्न प्रकार है:

  • आधार (B) और उत्सर्जक (E) के बीच अग्र अभिनति में एक परिवर्ती वोल्टता स्रोत (VBB) और एक धारा सीमित करने वाला प्रतिरोधक (RB) जुड़ा होता है।
  • संग्राहक (C) और उत्सर्जक (E) के बीच पश्च अभिनति में एक परिवर्ती वोल्टता स्रोत (VCC) और एक भार प्रतिरोधक (RC) जुड़ा होता है।
  • आधार धारा (IB) और संग्राहक धारा (IC) को मापने के लिए मिली-एमीटर जुड़े होते हैं।
  • VCE (संग्राहक-उत्सर्जक वोल्टता) मापने के लिए वोल्टमीटर जुड़ा होता है।

निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र प्राप्त करने की कार्यविधि:

  1. आधार धारा IB को एक नियत मान (जैसे 10 μA) पर सेट करें।
  2. VCC को शून्य से धीरे-धीरे बढ़ाएँ और VCE तथा IC के संगत मान नोट करें।
  3. VCE को X-अक्ष पर और IC को Y-अक्ष पर प्लॉट करें। इससे एक वक्र प्राप्त होता है।
  4. IB को दूसरे नियत मान (जैसे 20 μA) पर सेट करें और चरण 2-3 दोहराएँ।
  5. इस प्रकार विभिन्न IB मानों के लिए वक्रों का एक परिवार प्राप्त होता है, जो निर्गत अभिलाक्षणिक वक्र कहलाता है।

27.

प्रश्न: 3 सेमी आकार को कोई वस्तु 40 सेमी वक्रता त्रिज्या के किसी अवतल दर्पण से 30 सेमी दूरी पर स्थित है। दर्पण से प्रतिबिम्ब की दूरी व आकार ज्ञात करें एवं प्रतिबिम्ब की प्रकृति बताइए।

अथवा

यंग के द्वि-झिर्री प्रयोग में झिर्रियों के बीच की दूरी 0.28 mm तथा पर्दे की दूरी 1.4 m है। यदि केन्द्रीय दीप्त फ्रिंज से चौथी दीप्त फ्रिंज की दूरी 2 cm हो तो प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य ज्ञात कीजिए।


English: An object of size 3 cm is placed at 30 cm in front of a concave mirror of radius of curvature 40 cm. Find the distance and size of image from the mirror and describe the nature of the image.

OR

In Young's double-slit experiment, the slots are separated by 0.28 mm and the screen is placed 1.4 m away. If the distance between the central bright fringe and the fourth bright fringe is 2 cm, determine the wavelength of light used in the experiment.

हल (अवतल दर्पण वाला भाग):

दिया गया है:

  • वस्तु का आकार (ho) = 3 cm
  • वस्तु की दूरी (u) = -30 cm (दर्पण के सामने, अतः ऋणात्मक)
  • वक्रता त्रिज्या (R) = -40 cm (अवतल दर्पण के लिए ऋणात्मक)
  • फोकस दूरी (f) = R/2 = -20 cm

दर्पण सूत्र: 1/f = 1/v + 1/u

1/(-20) = 1/v + 1/(-30)

⇒ -1/20 = 1/v - 1/30

⇒ 1/v = -1/20 + 1/30 = (-3 + 2)/60 = -1/60

⇒ v = -60 cm

प्रतिबिम्ब की दूरी: दर्पण से 60 cm आगे (वास्तविक प्रतिबिम्ब)

आवर्धन (m): m = -v/u = -(-60)/(-30) = -2

प्रतिबिम्ब का आकार (hi): hi = m × ho = -2 × 3 = -6 cm (उल्टा, बड़ा)

प्रकृति: वास्तविक, उल्टा, तथा वस्तु से बड़ा (आवर्धित)

उत्तर: प्रतिबिम्ब की दूरी = 60 cm (दर्पण के सामने), आकार = 6 cm (उल्टा), प्रकृति = वास्तविक एवं उल्टा।

हल (यंग के प्रयोग वाला भाग):

दिया गया है:

  • झिर्रियों के बीच की दूरी (d) = 0.28 mm = 0.28 × 10-3 m
  • पर्दे की दूरी (D) = 1.4 m
  • चौथी दीप्त फ्रिंज की दूरी (x4) = 2 cm = 0.02 m
  • फ्रिंज क्रमांक (n) = 4

सूत्र: xn = nλD / d

⇒ λ = (xn × d) / (n × D)

λ = (0.02 × 0.28 × 10-3) / (4 × 1.4)

λ = (5.6 × 10-6) / (5.6) = 1 × 10-6 m = 1000 nm

उत्तर: प्रयुक्त प्रकाश की तरंगदैर्घ्य = 1000 nm (या 10-6 m)।

28.

प्रश्न: विद्युत फ्लक्स की परिभाषा लिखिए। गाउस के नियम द्वारा किसी एक समान रूप से आवेशित अनन्त विस्तार के सीधे तार के कारण किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक प्राप्त कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।

अथवा

विद्युत धारिता की परिभाषा लिखिए। एक समान्तर प्लेट संधारित्र को प्लेटों के बीच K परावैद्युतांक का माध्यम भरा हुआ है। इसकी धारिता का व्यंजक प्राप्त कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।

हल (विद्युत फ्लक्स एवं गाउस नियम वाला भाग):

विद्युत फ्लक्स की परिभाषा: किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की कुल संख्या को विद्युत फ्लक्स कहते हैं। इसे ΦE से दर्शाते हैं। गणितीय रूप में, ΦE = ∫ E · dA, जहाँ E विद्युत क्षेत्र तथा dA क्षेत्रफल अल्पांश है।

गाउस का नियम: किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ के अंदर स्थित कुल आवेश का 1/ε0 गुना होता है।

अनन्त लम्बाई के सीधे आवेशित तार के कारण विद्युत क्षेत्र:

  • माना एक अनन्त लम्बाई का सीधा तार है जिस पर एकसमान रैखिक आवेश घनत्व λ है।
  • हम तार से r दूरी पर स्थित बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र ज्ञात करना चाहते हैं।
  • गाउसीय पृष्ठ: तार के चारों ओर r त्रिज्या तथा L लम्बाई का एक बेलनाकार पृष्ठ लेते हैं।
  • बेलन के वक्र पृष्ठ से गुजरने वाला फ्लक्स = E × (2πrL) (क्योंकि E तथा dA एक ही दिशा में हैं)।
  • बेलन के सिरों से फ्लक्स शून्य है (E तथा dA परस्पर लम्बवत हैं)।
  • गाउस के नियम से: E × (2πrL) = (λL)/ε0
  • ⇒ E = λ / (2πε0r)

व्यंजक: E = λ / (2πε0r) (जहाँ r तार से बिन्दु की दूरी है)

चित्र: (एक सीधी रेखा तार, उसके चारों ओर संकेंद्रित वृत्ताकार विद्युत क्षेत्र रेखाएँ, तथा बेलनाकार गाउसीय पृष्ठ का चित्र बनाएँ)

उत्तर: विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = λ/(2πε0r) होती है, जो दूरी के व्युत्क्रमानुपाती होती है।

हल (विद्युत धारिता एवं संधारित्र वाला भाग):

विद्युत धारिता की परिभाषा: किसी चालक को दिए गए आवेश Q तथा उसके विभव V के अनुपात को विद्युत धारिता कहते हैं। C = Q/V। इसका SI मात्रक फैरड (F) है।

समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता (परावैद्युत माध्यम सहित):

  • माना दो समान्तर प्लेटों के बीच की दूरी d तथा प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A है।
  • प्लेटों के बीच K परावैद्युतांक का माध्यम भरा है।
  • प्लेटों पर आवेश ±Q होने पर, प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E = σ/(Kε0) = Q/(AKε0)
  • प्लेटों के बीच विभवांतर V = E × d = Qd/(AKε0)
  • धारिता C = Q/V = Q / [Qd/(AKε0)] = (Kε0A)/d

व्यंजक: C = Kε0A / d

चित्र: (दो समान्तर प्लेटें, उनके बीच परावैद्युत माध्यम, तथा प्लेटों पर आवेश +Q और -Q दर्शाते हुए चित्र बनाएँ)

उत्तर: परावैद्युत माध्यम सहित समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता C = Kε0A/d होती है।

प्रश्न 29

विद्युत फ्लक्स की परिभाषा दीजिए। गॉस के नियम का उपयोग करके अनन्त लम्बाई के एकसमान आवेशित सीधे तार के कारण किसी बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता का व्यंजक प्राप्त कीजिए। आवश्यक चित्र बनाइए।

अथवा

विद्युत धारिता की परिभाषा दीजिए। एक समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता का व्यंजक व्युत्पन्न कीजिए जिसमें प्लेटों के बीच के स्थान में परावैद्युतांक K का कोई परावैद्युत माध्यम भरा हो। आवश्यक चित्र बनाइए।

हल (पहला विकल्प)

विद्युत फ्लक्स (Electric Flux): किसी बन्द पृष्ठ से गुजरने वाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं की कुल संख्या को विद्युत फ्लक्स कहते हैं। इसे ΦE से प्रदर्शित करते हैं।

ΦE = ∮ E · dA

अनन्त लम्बाई के एकसमान आवेशित सीधे तार के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता:

माना एक अनन्त लम्बाई का सीधा तार है जिस पर एकसमान रैखिक आवेश घनत्व λ है। हमें तार से r दूरी पर स्थित बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र ज्ञात करना है।

गॉसियन पृष्ठ: तार के चारों ओर r त्रिज्या तथा l लम्बाई का एक बेलनाकार पृष्ठ लेते हैं।

गॉस के नियमानुसार: ∮ E · dA = qin / ε₀

बेलनाकार पृष्ठ के वक्र पृष्ठ पर E नियत तथा dA के समान्तर है, जबकि सिरों पर E, dA के लम्बवत है, अतः वहाँ फ्लक्स शून्य होगा।

∴ ∮ E · dA = E × (2πrl)

तथा qin = λl

अतः E × 2πrl = λl / ε₀

E = λ / (2πε₀r)

यह अभीष्ट व्यंजक है। विद्युत क्षेत्र की दिशा त्रिज्यतः बाहर की ओर (धनात्मक आवेश के लिए) होती है।

[चित्र: एक अनन्त लम्बाई का सीधा तार जिस पर λ रैखिक आवेश घनत्व है। तार के चारों ओर r त्रिज्या तथा l लम्बाई का बेलनाकार गॉसियन पृष्ठ दर्शाया गया है। बिन्दु P पर विद्युत क्षेत्र E त्रिज्यतः बाहर की ओर दर्शाया गया है।]

हल (दूसरा विकल्प)

विद्युत धारिता (Electric Capacity): किसी चालक को दिए गए आवेश Q तथा उसके विभव V के अनुपात को विद्युत धारिता कहते हैं। C = Q/V

समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता (परावैद्युत माध्यम सहित):

माना दो समान्तर प्लेटों में प्रत्येक का क्षेत्रफल A है तथा उनके बीच की दूरी d है। प्लेटों के बीच K परावैद्युतांक का माध्यम भरा है।

प्लेटों पर आवेश +Q तथा -Q है। प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र:

E = σ / (Kε₀) = Q / (AKε₀)

प्लेटों के बीच विभवान्तर: V = E × d = Qd / (AKε₀)

अतः धारिता: C = Q/V = Q / [Qd / (AKε₀)]

C = Kε₀A / d

यह अभीष्ट व्यंजक है। यदि माध्यम वायु (K=1) हो, तो C₀ = ε₀A / d

[चित्र: दो समान्तर धातु की प्लेटें जिनके बीच K परावैद्युतांक का माध्यम भरा है। प्लेटों पर +Q तथा -Q आवेश दर्शाया गया है। प्लेटों के बीच एकसमान विद्युत क्षेत्र E दर्शाया गया है।]

प्रश्न 30

दो सीधे समान्तर धारावाही चालकों के बीच प्रति इकाई लम्बाई पर बल का व्यंजक प्राप्त कीजिए। किस अवस्था में यह बल आकर्षण तथा प्रतिकर्षण का होता है? विद्युत धारा के मानक मात्रक की परिभाषा लिखिए।

अथवा

एक इलेक्ट्रॉन v चाल से r त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा कर रहा है। इसका चुम्बकीय आघूर्ण तथा कोणीय संवेग का अनुपात (जाइरोमैग्नेटिक अनुपात) का व्यंजक प्राप्त कीजिए। बोर मैग्नेटॉन किसे कहते हैं? इसका मान लिखिए।

हल (पहला विकल्प)

दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच बल:

माना दो अनन्त लम्बाई के समान्तर चालकों में क्रमशः I₁ तथा I₂ धाराएँ प्रवाहित हो रही हैं तथा उनके बीच की दूरी d है।

पहले चालक के कारण दूसरे चालक की स्थिति पर चुम्बकीय क्षेत्र: B₁ = μ₀I₁ / (2πd)

दूसरे चालक पर लगने वाला बल: F = I₂ × l × B₁

प्रति इकाई लम्बाई पर बल: F/l = I₂ × B₁ = I₂ × (μ₀I₁ / 2πd)

F/l = μ₀I₁I₂ / (2πd)

आकर्षण तथा प्रतिकर्षण की स्थिति:

  • यदि दोनों चालकों में धारा एक ही दिशा में प्रवाहित हो रही है, तो बल आकर्षण का होता है।
  • यदि धाराएँ विपरीत दिशा में प्रवाहित हो रही हैं, तो बल प्रतिकर्षण का होता है।

विद्युत धारा का मानक मात्रक (एम्पियर) की परिभाषा: यदि दो अनन्त लम्बाई के सीधे समान्तर चालकों में समान धारा प्रवाहित हो तथा वे निर्वात में 1 मीटर की दूरी पर रखे हों, तो प्रति मीटर लम्बाई पर उनके बीच लगने वाला बल 2 × 10⁻⁷ न्यूटन हो, तो प्रत्येक चालक में प्रवाहित धारा का मान 1 एम्पियर होता है।

हल (दूसरा विकल्प)

जाइरोमैग्नेटिक अनुपात (Gyromagnetic Ratio):

एक इलेक्ट्रॉन v चाल से r त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा कर रहा है।

इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग: L = mvr

इलेक्ट्रॉन के परिक्रमण का आवर्तकाल: T = 2πr / v

इलेक्ट्रॉन के कारण उत्पन्न धारा: I = e / T = ev / (2πr)

चुम्बकीय आघूर्ण: M = I × A = (ev / 2πr) × (πr²) = evr / 2

जाइरोमैग्नेटिक अनुपात: M/L = (evr/2) / (mvr) = e / (2m)

M/L = e / (2m)

बोर मैग्नेटॉन (Bohr Magneton): हाइड्रोजन परमाणु की प्रथम कक्षा में इलेक्ट्रॉन के परिक्रमण के कारण उत्पन्न चुम्बकीय आघूर्ण को बोर मैग्नेटॉन कहते हैं।

बोर मैग्नेटॉन का मान: μB = eh / (4πm) = 9.27 × 10⁻²⁴ J/T

प्रश्न 31

अपवर्ती दूरदर्शी का एक नामांकित किरण आरेख बनाइए। इसकी आवर्धन क्षमता का व्यंजक प्राप्त कीजिए। परावर्ती दूरदर्शी की तुलना में अपवर्ती दूरदर्शी की दो मुख्य कमियाँ लिखिए।

अथवा

एकल झिर्री विवर्तन प्रतिरूप में उत्पन्न फ्रिंजों की तीव्रता वितरण का तुलनात्मक ग्राफ खींचिए। केन्द्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई का व्यंजक प्राप्त कीजिए। यदि झिर्री की चौड़ाई दुगनी कर दी जाए तो केन्द्रीय उच्चिष्ठ की चौड़ाई पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

हल (पहला विकल्प)

अपवर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख:

[चित्र: एक खगोलीय अपवर्ती दूरदर्शी का किरण आरेख जिसमें अभिदृश्यक लेंस (O) तथा नेत्रिका लेंस (E) दर्शाए गए हैं। दूर की वस्तु से आने वाली समान्तर किरणें अभिदृश्यक पर आपतित होती हैं तथा इसके द्वारा वास्तविक प्रतिबिम्ब बनाती हैं। यह प्रतिबिम्ब नेत्रिका के फोकस पर बनता है तथा नेत्रिका द्वारा आभासी, सीधा तथा बड़ा प्रतिबिम्ब बनता है।]

आवर्धन क्षमता का व्यंजक:

जब प्रतिबिम्ब अनन्त पर बनता है (सामान्य समायोजन):

M = f₀ / fₑ

जहाँ f₀ = अभिदृश्यक की फोकस दूरी, fₑ = नेत्रिका की फोकस दूरी

जब प्रतिबिम्ब स्पष

Refractive Telescope

Question: Draw a labelled ray diagram of a refractive telescope. Deduce an expression of magnifying power of it. Write two main limitations of a refracting type telescope over a reflecting type telescope.

Ray Diagram

A labelled ray diagram of a refracting telescope shows two convex lenses: an objective lens (large focal length, large aperture) and an eyepiece lens (small focal length, small aperture). Parallel rays from a distant object enter the objective, which forms a real, inverted, and diminished image at its focal plane. The eyepiece is placed so that this image lies at its focal point, producing a final virtual, inverted, and magnified image at infinity.

Magnifying Power (M)

Magnifying power is defined as the ratio of the angle subtended by the final image at the eye to the angle subtended by the object at the eye when viewed directly.

For a telescope in normal adjustment (final image at infinity):

M = fo / fe

Where:

  • fo = focal length of the objective lens
  • fe = focal length of the eyepiece lens

Derivation: Let α be the angle subtended by the object at the objective and β be the angle subtended by the final image at the eye. For small angles, tan α ≈ α and tan β ≈ β. From the ray diagram, α = h / fo and β = h / fe, where h is the height of the intermediate image. Thus, M = β/α = (h/fe) / (h/fo) = fo/fe.

Two Main Limitations of Refracting Telescope over Reflecting Telescope

  1. Chromatic Aberration: Refracting telescopes suffer from chromatic aberration because different colours of light are refracted by different amounts, causing coloured fringes around the image. Reflecting telescopes use mirrors, which do not cause chromatic aberration.
  2. Spherical Aberration and Large Size: It is difficult and expensive to make large, flawless lenses for refracting telescopes. Large lenses are heavy and can sag under their own weight. Reflecting telescopes can have much larger mirrors that are easier to support, providing better light-gathering power and resolution.

Single Slit Diffraction

Question: Draw a graph to show the relative intensity distribution for a single slit diffraction pattern. Obtain the expression for the width of central maxima. If slit width is doubled then what is the effect on width of central maxima?

Relative Intensity Distribution Graph

The graph of relative intensity (I/I0) versus sin θ for a single slit diffraction pattern shows a central bright maximum (highest intensity) flanked by alternating secondary maxima (much lower intensity) and minima (zero intensity). The central maximum is twice as wide as the secondary maxima.

Expression for Width of Central Maxima

For a single slit of width a, the condition for the first minimum (dark fringe) on either side of the central maximum is given by:

a sin θ = λ

Where λ is the wavelength of light and θ is the angular position of the first minimum.

For small angles, sin θ ≈ θ, so θ = λ / a.

The angular width of the central maximum is the angle between the first minima on either side:

Angular width = 2θ = 2λ / a

If the screen is at a distance D from the slit, the linear width (W) of the central maximum is:

W = 2D tan θ ≈ 2Dθ = 2Dλ / a

Effect of Doubling Slit Width

If the slit width a is doubled (a' = 2a), then the angular width of the central maximum becomes:

Angular width' = 2λ / (2a) = λ / a

Thus, the width of the central maximum is halved when the slit width is doubled.