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Paper details
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| Board |
RBSE |
| Class |
Class 12th |
| Exam year |
2014 |
| Subject |
Shorthand Hindi-SS-32-2014 |
| Resource type |
Previous Year Papers |
| Category |
RBSE Previous Year Question Papers |
| Website |
RBSE Solution |
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How to practise with this question paper
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RBSE Class 12th 2014 Shorthand Hindi-SS-32-2014
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Rajasthan Board Class 12th Shorthand Hindi-SS-32-2014 2014 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014
हिन्दी शीघ्रलिपि (SHORTHAND HINDI)
समय: 3½ घण्टे पूर्णांक: 40
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश:
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- तीनों खण्ड एक ही बैठक में लिखाये जायें।
- प्रथम एवं द्वितीय खण्डों तथा द्वितीय एवं तृतीय खण्डों के बीच में 5-5 मिनट का मध्यान्तर दिया जाये।
- तीनों खण्डों के संकेत लिपि श्रुतलेखों के हिन्दी अक्षरीकरण के लिए 2½ घंटे का समय दिया जाए।
- केवल निम्न विराम-चिह्न ही लगाएं: पूर्ण विराम, अर्द्ध-विराम और प्रश्न-चिह्न एवं कोष्ठक।
- संकेत लिपि पेन्सिल से लिखा जाए तथा उसका अनुवाद हिन्दी में टंकण यंत्र / कम्प्यूटर से ही टंकित किया जाय। हाथ से लिखा मान्य नहीं होगा।
- संकेत लिपि में लिखा हुआ श्रुतलेख उत्तर-पुस्तिका के साथ नत्थी कर दिया जाए।
- संकेत लिपि के 20% अंक रखे गये हैं।
- खण्ड प्रथम 4 मिनट, खण्ड द्वितीय 5 मिनट तथा खण्ड तृतीय 7 मिनट लिखवाने के रखे गए हैं। प्रत्येक खण्ड 80 शब्द प्रति मिनट की गति से बोला जाय।
SS—32—SH. HD. (Hindi) SS-5532 [ Turn over ]
प्रथम खण्ड
(इसे 80 शब्द प्रति मिनट की गति से लिखाया जाए।)
गौवर्धन प्रसाद बोहरा एण्ड कम्पनी
(कपड़े के थोक व्यापारी एवं कमीशन एजेन्ट)
पत्र क्रमांक 774
बिहारी पोल,
फोन नं० 08277258
SER हाऊस रोड,
अहमदाबाद (गुजरात)
सेवा में,
सर्व श्री अन्जना एण्ड कम्पनी,
बड़ी सड़क, औद्योगिक क्षेत्र,
रतलाम (मध्य प्रदेश)
गोपनीय
विषय : आर्थिक स्थिति की जानकारी के क्रम में
प्रिय महोदय,
आपका पत्र / संख्या सी/3/17 दिनांक 5.2.3 का प्राप्त हुआ, इसके लिए अनेकानेक धन्यवाद। आपने हमारे ही शहर के मैसर्स श्री भैरलाल विजय एण्ड कम्पनी, कपड़े के थोक व्यापारी, कपड़ा बाजार, रतलाम की आर्थिक स्थिति के बारे में हमसे जानकारी प्राप्त करनी चाही है। इस सम्बन्ध में हमारा आपसे निवेदन है कि उक्त फर्म अपने शहर में पिछले 70 वर्षों से स्थापित है। हमारा इस फर्म से पिछले 40 वर्षों से व्यापारिक सम्बन्ध है। यह शहर की प्रतिष्ठित फर्मों में से एक है।
भवदीय,
गौवर्धन प्रसाद बोहरा एण्ड कम्पनी
SS—32—SH. HD. (Hindi) SS-5532
द्वितीय खण्ड
(इसे प्रति मिनट 80 शब्दों की गति से लिखाए)
पत्र 1: व्यापारिक संदर्भ पत्र
इस फर्म द्वारा हमेशा रोकड़ी छूट ली जाती है। इनका चैक कभी भी अप्रतिष्ठित नहीं हुआ है। निर्धारित समय से पूर्व भुगतान करना इनकी आदत में है। व्यापारिक एवं गैर व्यापारिक संस्थाओं में इस फर्म की प्रतिष्ठा बनी हुई है।
अतः हमारी राय में इस फर्म द्वारा उधार माल के क्रय का अनुबन्ध कर इस फर्म को 0-5 लाख रुपये तक का माल आसानी से उधार दे सकते हैं फिर भी इस सम्बंध में हमारी किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी नहीं होगी।
कृपया आप इस सूचना-पत्र को गोपनीय ही रखना। आप चाहे तो यह भी निवेदन है कि इनसे सम्बंधित जानकारी इनके बैंक पंजाब नेशनल बैंक कपड़ा बाजार शाखा से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। जिससे आपको इस फर्म से पूर्ण विश्वास हो सके।
हम हैं आपके
गौवर्धन प्रसाद बोहरा एण्ड कम्पनी के लिए
(राजेन्द्र कुमार)
साझेदार
पुनश्च: आपके शहर में ही मैसर्स पाटीदार क्लॉथ मर्चेन्ट मैगा मार्ट माल से भी जानकारी कर सकते हैं।
पत्र 2: कार्यालयी पत्र
कार्यालय प्रधानाचार्य, राज० उच्च० माध्यमिक विद्यालय रतनगढ़ (भोपाल)
पत्रांक: 93/203
दिनांक: 03 दिसम्बर 203
सेवा में,
मान्यवर महोदय,
निदेशक महोदय,
माध्यमिक शिक्षा
भोपाल
उपनिदेशक (माध्यमिक)
उप/निदेशक कार्यालय
भोपाल
विषय: नये विषय की स्वीकृति के सम्बंध में।
उपरोक्त विषयान्तर्गत विनम्र निवेदन है कि पिछले वर्ष 20-2 में इस विद्यालय को...
SS—32—SH. HD. (Hindi) SS-5532
प्रश्न 4
निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
सो मा० विद्यालय में // क्रमोन्नत कर कला वर्ग, वाणिज्य वर्ग एवं विज्ञान वर्ग खोलने की स्वीकृति प्रदान की थी।
इस विद्यालय में कक्षा XI एवं XII में कला वर्ग में राजनीति विज्ञान, हिन्दी ऐच्छिक एवं अर्थशास्त्र विषय का संचालन हो रहा है। इस वर्ष रतनगढ़ को तहसील बनाने के कारण व आस-पास के गाँवों में उ० मा० विद्यालय नहीं होने से इस विद्यालय में कला वर्ग में इतिहास विषय खोलने की मांग बढ़ती जा रही है।
इसी के साथ-साथ वाणिज्य विषय में भी ऐच्छिक विषय के अन्तर्गत केवल अर्थशास्त्र विषय का संचालन हो रहा है। छात्रों द्वारा हिन्दी टंकण एवं अंग्रेजी टंकण विषय खुलवाने हेतु भी बार-बार आग्रह किया जा रहा है।
इस सम्पूर्ण क्षेत्र में 80 KM जबलपुर में विज्ञान है। अन्य किसी भी नजदीक के विद्यालय में विज्ञान विषय नहीं होने से काफी संख्या में छात्र-छात्राओं को मजबूरन कला अथवा वाणिज्य वर्ग लेना पड़ रहा है। आए दिन अभिभावक व ग्रामीण जन विज्ञान विषय खुलवाने हेतु आग्रह करते रहे हैं।
इस सन्दर्भ में निवेदन है कि यदि आप उक्त विषयों को खुलवाने की स्वीकृति प्रदान कर सके तो इस विद्यालय के पास भौतिक संसाधनों में भवन, कक्षा कक्ष, प्रयोगशालाएँ (भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं जीव विज्ञान) एवं फर्नीचर भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
(क) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
उत्तर: विद्यालय में नए विषयों के संचालन हेतु प्रार्थना पत्र
(ख) विद्यालय में किन-किन विषयों को खोलने की मांग की गई है?
उत्तर: विद्यालय में निम्नलिखित विषयों को खोलने की मांग की गई है:
- कला वर्ग में इतिहास विषय
- वाणिज्य वर्ग में हिन्दी टंकण एवं अंग्रेजी टंकण विषय
- विज्ञान वर्ग (पूर्ण रूप से)
(ग) विद्यालय में किन भौतिक संसाधनों की उपलब्धता बताई गई है?
उत्तर: विद्यालय में निम्नलिखित भौतिक संसाधन उपलब्ध बताए गए हैं:
- भवन एवं कक्षा कक्ष
- प्रयोगशालाएँ (भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान एवं जीव विज्ञान)
- फर्नीचर पर्याप्त मात्रा में
(घ) विज्ञान विषय न होने से क्या समस्या उत्पन्न हो रही है?
उत्तर: विज्ञान विषय न होने से काफी संख्या में छात्र-छात्राओं को मजबूरन कला अथवा वाणिज्य वर्ग लेना पड़ रहा है, जबकि वे विज्ञान पढ़ना चाहते हैं।
(ङ) रतनगढ़ को तहसील बनाने का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर: रतनगढ़ को तहसील बनाने के कारण तथा आस-पास के गाँवों में उच्च माध्यमिक विद्यालय न होने से इस विद्यालय में कला वर्ग में इतिहास विषय खोलने की मांग बढ़ गई है।
तृतीय खण्ड
(इसे 80 शब्द प्रति मिनट की गति से लिखाया जाए।)
मुक्ति का माधुर्य
हमारा जीवन प्रेम, शांति, माधुर्य और आनन्द से परिपूर्ण है और अगर परिपूर्ण नहीं लगता तो परिपूर्ण बनाया जा सकता है। और जीवन में एक अनुपम संगीत की संभावना है। प्रेम की रसधार छलकती रहे, शान्ति की वीणा बजती रहे और आनन्द का अमृत निर्झरित रहे, तो जीवन से बढ़कर न कोई मन्दिर है, न कोई अनुष्ठान और न कोई स्वर्ग है। मौसम इतना सुहावना है, बादलों से आसमान आच्छादित है। यह सभी किसानों व भौरों को प्रसन्न करता है। बादलों के घिर आने के बावजूद आसमान से न तो सूरज खोया है न चांद खोया है और न कोटि-कोटि तारे।
व्याख्या: यह गद्यांश जीवन में प्रेम, शांति और आनन्द के महत्व को दर्शाता है। लेखक कहता है कि जीवन को परिपूर्ण बनाया जा सकता है यदि उसमें प्रेम, शांति और आनन्द का समावेश हो। प्रकृति का वर्णन करते हुए बताया गया है कि बादलों के होने पर भी सूरज, चाँद और तारे अपनी जगह पर हैं, जो जीवन की निरंतरता और स्थिरता का प्रतीक है।
— पृष्ठ 5 का अंत —
SS—32—SH. HD. (Hindi) SS-5532
विलुप्त / हुए है | मेघावली के कारण सूरज और चांद, आसमान से बरसने वाला अनंत प्रकाश आच्छादिन भले ही हो / जायें लेकिन वह विलुप्त नहीं हो सकता । जीवन का प्रेम, उसकी शान्ति, उसका माधुर्य और उसका आनन्द // आवृत्त हो सकता है, आच्छादित हो सकता है, लेकिन समाप्त नहीं हो सकता ।
समझ और सजगता का / अभाव होने के कारण जीवन का संगीत विलुप्त हो गया है, जीवन का आनन्द समाप्त प्राय: हो गया है, जीवन / का माधुर्य हमारे हाथ से छूट गया है । मेंरे देखे, जीवन में रस है, भावों का रस; क्यों / कि जीवन कोई व्यापार नहीं है और न ही यह व्यवहार या कर्तव्य है । जीवन का अस्तित्व इससे और // आगे भी है । यदि जीवन से आनन्द का संगीत निष्पन्न होता हुआ नजर नहीं आता तो इसका दोष / उन अंगुलियों का है, जो बांसुरी पर ढंग से सध नहीं पाई ।
अगर कृष्ण की बांसुरी से वह / संगीत और वे स्वर-लहरियाँ ईजाद हो सकती हैं, जिससे सारा विश्व आलोड़ित हो जाये, तो हमारे जीवन / में भी वे स्वर-लहरियाँ क्यों नहीं प्रस्फुटित हो सकती ?
मनुष्य के पास जीवन को आनन्दमय बनाने की कला // नहीं है । यह बड़े ताज्जुब की बात है कि ठेठ बाहर से आदमी अपनी आत्म-शान्ति, अपनी आत्म-मुक्ति / के लिए भारत तक पहुँच रहा है, लेकिन भारत का आदमी अनजान, बेखबर बना हुआ है । मनुष्य / के हाथ में उसका अपना भाग्य नहीं रहा, इसलिए मनुष्य भगवान भरोसे हो गया है ।' भारत भाग्य विधाता' / विधाता ही भारत
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रब का भाग्य है। मनुष्य का जीवन पर भरोसा नहीं रहा। नतीजतन यहाँ का मनुष्य जीवन के आनन्द, उसकी शान्ति और उसके माधुर्य से वंचित है।
गंगा के किनारे बैठा व्यक्ति ही मैल से सना हो, तो आश्चर्य होना स्वाभाविक है। अगर नहाने का प्रयास भी किया जाता है, तो भी पशु की तरह, एक हाथी की तरह। हाथी कितना भी नहा ले, लेकिन बाहर आते ही पीठ पर मिट्टी ही उड़ेलेगा। ऐसे ही हम सुबह-शाम अपने पापों को धोने का इंतजाम कर लेते हैं, लेकिन वे इंतजाम कोरे इंतजाम भर रह जाते हैं। पाप पूरे धुल नहीं पाते और पापों की परत, पापों की काई और चढ़ जाती है।
धर्म-कर्म-मन्दिर-परमात्मा ये सब तो दूर की बातें हैं। आदमी का न तो धर्म के प्रति लगाव है और न पाप-पुण्य, स्वर्ग-नरक या परमात्मा के प्रति ही उसका जुड़ाव है। उसका लगाव तो धन और यश के प्रति है। इसलिए वह मेहनत करता है।
SS—32—SH. HD. (Hindi) SS-5532