RBSE Class 12th 2014 Sindhi Sahitya-SS-23-2014 Previous Year Papers

Class 12th students hunting authentic previous year papers for Sindhi Sahitya-SS-23-2014 (2014) land here for a reason: the paper below matches how RBSE assessments are remembered from that year. RBSE Solution does not mix years on one page; each combination gets its own notes.

Skim the overview sections, then work through the scanned pages. Pair this practice with RBSE books and solutions when you need to relearn a concept a question exposed.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2014
Subject Sindhi Sahitya-SS-23-2014
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2014, and subject Sindhi Sahitya-SS-23-2014 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

Turning 2014 papers into insight

One Sindhi Sahitya-SS-23-2014 paper reveals style; several from the same year reveal pattern. After this page, open sibling subjects listed below to see whether marks cluster in certain units.

Keep rough work dated in your notebook. Examiners in Class 12th expect clear numbering even in practice sessions.

RBSE Class 12th 2014 Sindhi Sahitya-SS-23-2014

Scroll through the Previous Year Papers pages for Sindhi Sahitya-SS-23-2014 (2014).

RBSE Class 12th 2014 Sindhi Sahitya-SS-23-2014 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2014 Sindhi Sahitya-SS-23-2014 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2014 Sindhi Sahitya-SS-23-2014 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2014 Sindhi Sahitya-SS-23-2014 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2014 Sindhi Sahitya-SS-23-2014 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2014 Sindhi Sahitya-SS-23-2014 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2014 Sindhi Sahitya-SS-23-2014 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th Sindhi Sahitya-SS-23-2014 2014 solved Previous Year Question Papers

Roll No.  

No. of Questions — 3   SS—23—Sindhi Sah.

No. of Printed Pages — 7

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2014

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2014

SINDHI SAHITYA

समय : 3 घंटे

पूर्णांक : 80


( शागिर्दनि लाइ इम्तहान जा साधारण नियम )

  1. सुवाल करण ज़रूरी आहिनि।
  2. हरहिक सुबाल जे साम्हूं मार्कू डिलल आहिनि।

SS—23—Sindhi Sah.   SS-5523   [ Turn over

प्रश्न पत्र : सिन्धी साहित्य (SS–23)

पृष्ठ 2 का भाग

३. निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और दिए गए प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

कमु या हाज इन्सान लाइ वडी बरकत आहे, जो इन्सान कम में रुधल न आहे, जंहिंजो बदन या मनु कंहिं कार में न आहे, तंहिं लाइ हयातीअ जा डीह काटिणु बि मुसीबत आहे। कम खां सवाइ हुबण बि बिरू थियणु आहे। इन्हीअ जहिड़ो आज़ारू गोल्हियो लभन्दो। कृत खां सबाइ जे माण्हू आहे बि निसतो ऐं फेफो। घणो कमु बि माण्हूअ खे थकाए न छडे। हर कंहिं इन्सान खे विन्दुर खपे, आराम ऐं लुत्फ़ जो सामान खपे। वडी खुदाई नइमत त काम आहे जा ई इन्सान खे तरो ताज़ो थी रखे। काम जहिड़ो टोल त मिठो मेवो आहे।

  1. (क) मथिएं टुकिरे जो सुहिणो सिरो लिखो।

    उत्तर : "काम की बरकत" या "काम और मानव जीवन"

  2. (ख) इन्सान लाइ कमु या हाज छो जरूरी आहे।

    उत्तर : इन्सान लाइ कमु या हाज एथे जरूरी आहे कि काम इन्सान को तरो-ताज़ो रखे था, उसकी जिंदगी में बरकत लावे था, और बेकारी से होण वाली मुसीबतों से बचावे था। काम न करण वाला इन्सान निराश और फेफो (बेकार) बनि वे थो।

  3. (ग) मथिएं टुकिरे जो भाव हिस्से में सारू लिखो।

    उत्तर : इस गद्यांश का भाव यह है कि काम या व्यवसाय मनुष्य के लिए एक बड़ी नेमत (वरदान) है। जो व्यक्ति काम में लगा रहता है, उसका शरीर और मन स्वस्थ रहता है। बेकारी मनुष्य को निराश और बेकार बना देती है। काम मनुष्य को तरोताजा रखता है और जीवन को सार्थक बनाता है।

४. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

  1. (क) उसकी कब तक चली?

    उत्तर : (यह प्रश्न अधूरा है, संभवतः किसी पाठ या घटना के संदर्भ में है। पूर्ण संदर्भ के अभाव में सटीक उत्तर नहीं दिया जा सकता।)

  2. (ख) स्लासिने गो ओश ०८०९० ६-४०३७/ ६ सी लीस (iii)

    उत्तर : (यह प्रश्न अस्पष्ट है। कृपया स्पष्ट पाठ प्रदान करें।)

  3. (ग) डब ओल पीएस (iv)

    उत्तर : (यह प्रश्न अस्पष्ट है। कृपया स्पष्ट पाठ प्रदान करें।)

— पृष्ठ २ समाप्त —

2. ھيٺين مان ڪنھن ھڪ موضوع تي مضمون لکو (اٽڪل 200 اکرن ۾):

  1. مونھنجو من پسند ليکڪ
  2. ڀارت ۾ ٻولين جو آئيندو
  3. نوجوان ٽھيءَ ۾ بند ٿيل موبائيل فون جو استعمال
  4. ٽيلي تعليم جا فائدا

نوٽ: مٿين چئن عنوانن مان ڪنھن ھڪ تي مضمون لکڻو آھي. ھر مضمون ۾ تعارف، موضوع جي وضاحت، نتيجو ۽ ذاتي رايو شامل ھجڻ گھرجي. مثال طور:

مونھنجو من پسند ليکڪ: سنڌي ادب جا مشھور ليکڪ جيئن شيخ اياز، استاد بخاري، يا ڊاڪٽر نبي بخش بلوچ. انھن جي لکڻين جي خوبين، انھن جي ادبي خدمتن ۽ پنھنجي زندگيءَ تي اثر بابت لکو.

3. فيس معافيءَ لاءِ پرنسپال کي درخواست لکو

يا

پنھنجي ڀاءُ جي شاديءَ تي شريڪ ٿيڻ لاءِ دوست کي نياپو لکو.

درخواست جو نمونو:

خدمت ۾،
پرنسپال صاحب،
[اسڪول جو نالو]،
[شھر جو نالو].

موضوع: فيس معافيءَ جي درخواست

جناب عالي،

باجواز گذارش آھي ته مان [ڪلاس] جو شاگرد [پنھنجو نالو] آھيان. منهنجي والد صاحب جي آمدني گھٽ آھي ۽ خانداني حالتون خراب آھن. مھرباني ڪري منهنجي فيس معاف ڪري ڏيو.

شڪريو،

[شاگرد جو نالو]

تاريخ: [تاريخ]

4. چوپائيءَ جو مطلب لکي ۽ مثال لکو

چوپائي: سنڌي شاعريءَ جي ھڪ صنف آھي جنھن ۾ چار سٽون ھونديون آھن. ھر سٽ ۾ ھڪ جھڙو وزن ۽ قافيو ھوندو آھي. چوپائي عام طور تي اخلاقي، مذھبي يا رومانوي موضوعن تي لکي ويندي آھي.

مثال:

سچ چئي سڀاڻي سک، ڪوڙ چئي ڪڏھن نه سک
سچ جي واٽ تي ھل، سک جو سامان مل

وضاحت: ھن چوپائي ۾ سچ ڳالھائڻ جي اھميت بيان ڪئي وئي آھي. سچ ڳالھائڻ سان سک ملندو آھي جڏھن ته ڪوڙ ڳالھائڻ سان ڪڏھن به سک نه ملندو آھي.

5. दोहे ऐं सोरठे में अंतर बुधाईदें हिकु हिकु मिसालु लिखो।

दोहा और सोरठा में अंतर:

  • दोहा: यह एक अर्धसम मात्रिक छंद है। इसमें पहले और तीसरे चरण में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं। दोहे के अंत में गुरु-लघु (गुरु लघु) का प्रयोग होता है।
  • सोरठा: यह भी अर्धसम मात्रिक छंद है, लेकिन इसमें पहले और तीसरे चरण में 11-11 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। सोरठा के अंत में लघु-गुरु (लघु गुरु) का प्रयोग होता है।

उदाहरण:

दोहा:
"रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून।।"
(यहाँ पहले चरण में 13, दूसरे में 11, तीसरे में 13, चौथे में 11 मात्राएँ हैं।)

सोरठा:
"जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करी सज्जन चित्त।
बूँद अनेक जलधार, बिनसै एकहि पत्त।।"
(यहाँ पहले चरण में 11, दूसरे में 13, तीसरे में 11, चौथे में 13 मात्राएँ हैं।)

6. हेठियनि मां किनि बि पंजनि सुवालनि जा मुख्तिसर में जवाब लिखो:

  1. (i) काश ! लेख जी मूल सिख्या कहिडी आहे ?

    लेख "काश!" जी मूल सिख्या आहे: मनुष्य को जीवन में कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। लेख में दिखाया गया है कि अहंकार के कारण मनुष्य अपने प्रियजनों को खो देता है और पछताता है।

  2. (ii) हिकु बियो विरहाडो' कहाणीअ में लेखक मुख्य संदेश कहिडो feat आहे ?

    कहाणी "हिकु बियो विरहाडो" में लेखक जो मुख्य संदेश दियो आहे: प्रेम और विरह के बीच का संघर्ष। यह कहानी दर्शाती है कि सच्चा प्रेम समय और दूरी की परवाह नहीं करता, बल्कि विरह में भी प्रेमी अपने प्रिय की याद में जीवित रहता है।

  3. (iii) 'इअमुंहिंजो caer’ लेख जी लेखिका जो नालो लिखी बुधायो त संदसि लेख में कहिड़ी सिख्या डिनल आहे ?

    लेख "इअमुंहिंजो caer" जी लेखिका: पोपटी हीरानन्दाणी। इस लेख में दी गई सिख्या: मनुष्य को अपने जीवन में सादगी और ईमानदारी अपनानी चाहिए। लेखिका ने बताया है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि आत्मसंतोष में है।

  4. (iv) 'केसीनो' लेख में पोपटी हीरानन्दाणीअ छा बुधायो आहे ?

    लेख "केसीनो" में पोपटी हीरानन्दाणी ने बतायो आहे: केसीनो (एक प्रकार का फूल) के माध्यम से जीवन की नश्वरता और सौंदर्य का संदेश दिया गया है। लेखिका ने दिखाया है कि जैसे केसीनो का फूल जल्दी मुरझा जाता है, वैसे ही मानव जीवन भी क्षणभंगुर है, इसलिए इसे सार्थक ढंग से जीना चाहिए।

  5. (v) “हर धर्म सुठाई सेखारे, थो सच जो रस्तो San’ कविता जो उनवानु छा आहे Hes शाइर जी कविता आहे ?

    इस कविता का उनवानु (शीर्षक): "हर धर्म सुठाई सेखारे"। यह कविता शाह अब्दुल लतीफ भिट्टाई जी कविता आहे। शाह साहब ने इस कविता में सत्य के मार्ग पर चलने का संदेश दिया है और बताया है कि सभी धर्मों का सार एक ही है - सत्य का पालन करना।

  6. (vi) “छा कंदियसि' नज़्म में दुखायल छा जो इज़हार Hat आहे ?

    नज़्म "छा कंदियसि" में दुखायल (दुखी) व्यक्ति के मन की पीड़ा और अकेलेपन का इज़हार (अभिव्यक्ति) किया गया है। शायर ने दिखाया है कि जब कोई व्यक्ति अपने प्रिय से बिछड़ जाता है, तो उसका दिल टूट जाता है और वह अकेलापन महसूस करता है।

  7. (vii) काज़ी कादन पहिंजे कलामनि में छा जो पैग़ामु डिनो आहे ?

    काज़ी कादन पहिंजे कलामनि (कविताओं) में प्रेम, भाईचारा और मानवता का पैग़ामु (संदेश) दियो आहे। उन्होंने अपनी रचनाओं में समाज में व्याप्त बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों को एकता और सद्भावना से रहने की प्रेरणा दी।

  8. (viii) डा. एल. एच. हीरानंदाणीअ जी तइलीमी लियाकत कहिड़ी हुई ?

    डा. एल. एच. हीरानंदाणी जी तइलीमी लियाकत (शैक्षिक योग्यता) हुई: वे एक प्रसिद्ध विद्वान और शिक्षाविद थे। उन्होंने सिंधी भाषा और साहित्य में गहन अध्ययन किया और कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। उनकी शिक्षा और शोध कार्य ने सिंधी साहित्य को समृद्ध किया।

प्रश्न 7

‘सा नाविल’ जे मुख्य किरदार जो चरित्र चित्रणु करियो।

उत्तर: ‘सा नाविल’ (साहित्यिक कृति) का मुख्य पात्र एक संघर्षशील, आदर्शवादी और समाज सुधारक के रूप में चित्रित किया गया है। वह अपने सिद्धांतों पर अडिग रहता है और समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाता है। उसका चरित्र साहस, त्याग और मानवता के प्रति प्रेम को दर्शाता है। लेखक ने उसे एक जीवंत और यथार्थवादी रूप में प्रस्तुत किया है, जो पाठकों को प्रेरित करता है।

अथवा

अझो नाविल जो थोरे में सारुलिखी समालोचना करियो।

उत्तर: ‘अझो नाविल’ एक सामाजिक यथार्थवादी कृति है जो मध्यम वर्ग के जीवन संघर्षों को उजागर करती है। इसमें पात्रों का मनोवैज्ञानिक चित्रण सशक्त है। कथा में गति और रोचकता है, परंतु कुछ स्थानों पर घटनाओं का विकास अत्यधिक तीव्र लगता है। भाषा सरल और प्रवाहपूर्ण है, जो पाठक को बांधे रखती है। कुल मिलाकर यह एक प्रभावशाली उपन्यास है जो समाज के यथार्थ को बेबाकी से प्रस्तुत करता है।

प्रश्न 8

अल फा फेप हवालो खोले समुझायो:

  1. “इन्सान खे कहिंजो बेशुकरो थियणु न जुगाए।”
  2. “आहिनि त घर में कुत्तो शींहु थींदो आहे।”

उत्तर:

  1. “इन्सान खे कहिंजो बेशुकरो थियणु न जुगाए” – इस कथन का अर्थ है कि मनुष्य को कभी भी किसी का अहसान नहीं भूलना चाहिए। यह कृतज्ञता और नैतिकता का संदेश देता है कि दूसरों के उपकार को याद रखना और उसका सम्मान करना मानवीय गुण है।
  2. “आहिनि त घर में कुत्तो शींहु थींदो आहे” – इसका तात्पर्य है कि जब अवसर मिलता है, तो साधारण व्यक्ति भी शक्तिशाली बन सकता है। यह कहावत परिस्थितियों के अनुसार व्यक्ति के बदलने और सामर्थ्य प्राप्त करने की ओर संकेत करती है।

प्रश्न 9

“मुम्बई हिक नज़र में” लेख में तारीख़ी पसमंजर सां समाजी चित्र पिणु चिटियल आहे लेख जे आधार ते मुख्तसर में लिखो।

उत्तर: “मुम्बई हिक नज़र में” लेख में लेखक ने मुंबई शहर के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में सामाजिक चित्र को उकेरा है। इसमें शहर के विकास, विविध संस्कृतियों के संगम, और आर्थिक-सामाजिक विषमताओं का वर्णन है। लेखक ने मुंबई को एक ऐसे महानगर के रूप में प्रस्तुत किया है जहाँ अमीरी-गरीबी का अंतर स्पष्ट दिखता है, फिर भी यह सपनों और अवसरों का शहर है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में ब्रिटिश काल से लेकर आधुनिक समय तक के सामाजिक बदलावों को संक्षेप में दर्शाया गया है।

अथवा

“हिक बियो बिरहाडो” कहाणीअ जो सारु थोरे में लिखो।

उत्तर: “हिक बियो बिरहाडो” कहानी एक ऐसे व्यक्ति की कथा है जो अपने जीवन में एक बार फिर से वियोग का सामना करता है। यह प्रेम, विरह और पुनर्मिलन की भावनाओं को दर्शाती है। कहानी का नायक पहले वियोग के बाद दूसरे वियोग में भी उसी पीड़ा को महसूस करता है, परंतु इस बार वह अधिक परिपक्व और संयमित है। कहानी मानवीय संवेदनाओं और जीवन के उतार-चढ़ाव को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।

प्रश्न 11:

परसराम ज़िया जे शइर अखड़ियूं जो थोरे में सारू लिखो।

उत्तर: परसराम ज़िया सिंधी साहित्य के एक प्रसिद्ध शायर हैं। उनकी शायरी में प्रेम, दर्द, और सामाजिक चेतना के विषय मिलते हैं। उनकी अखड़ियों (शेरों) में सरलता और गहराई दोनों हैं। वे सिंधी भाषा के लोकप्रिय शायरों में गिने जाते हैं।

प्रश्न 12:

"वाझाए त डिस" शइर जो थोरे में सार लिखो।

उत्तर: "वाझाए त डिस" एक प्रसिद्ध सिंधी शायरी है जिसमें शायर कहता है कि जब तक तुम देखोगे नहीं, तब तक तुम्हें पता नहीं चलेगा। यह शायरी दृष्टि और अनुभव के महत्व को दर्शाती है।

प्रश्न 13:

को बि हिकु हवालो खोले समुझायो:

  1. "तड़फदें होंअ कींअ गुज़ारीदियसि सदा, रात थी पबंदी सियारे जी वडी।"
  2. "वतन जे लाइ जान घोरी पोइ fa थोरी, सिंध्युनि जान न घोरी, बतनु घोरे आया।"

व्याख्या:

(i) इस शेर में शायर कहता है कि मैं तड़पता हुआ कैसे गुज़ारूं सदा, रात भर सियार (गीदड़) की तरह बंदी हूँ। यह प्रेमी की व्याकुलता और अकेलेपन को दर्शाता है।

(ii) इस शेर में शायर कहता है कि वतन के लिए जान घोड़ी पर डाली, सिंध के लोगों की जान न घोड़ी, बल्कि वतन घोड़े पर आया। यह देशभक्ति और बलिदान की भावना को व्यक्त करता है।

प्रश्न 14:

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

  1. सिंधी साहित्य में परसराम ज़िया का योगदान बताइए।
  2. "वाझाए त डिस" शायरी का मुख्य संदेश क्या है?

उत्तर:

(a) परसराम ज़िया ने सिंधी शायरी को नई ऊंचाइयां दीं। उनकी रचनाओं में प्रेम, दर्द, और सामाजिक मुद्दों पर गहरी पकड़ है। उन्होंने सिंधी भाषा को समृद्ध किया।

(b) "वाझाए त डिस" का मुख्य संदेश यह है कि बिना देखे और अनुभव किए किसी चीज़ का सही ज्ञान नहीं हो सकता। यह दृष्टि और अनुभव के महत्व पर जोर देती है।

प्रश्न 15:

निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:

  1. परसराम ज़िया किस भाषा के शायर हैं?
    • (क) हिंदी
    • (ख) सिंधी
    • (ग) उर्दू
    • (घ) पंजाबी

    सही उत्तर: (ख) सिंधी

  2. "वाझाए त डिस" शायरी का मुख्य विषय क्या है?
    • (क) प्रेम
    • (ख) देशभक्ति
    • (ग) दृष्टि और अनुभव
    • (घ) दर्द

    सही उत्तर: (ग) दृष्टि और अनुभव

हेठियनि सुवालनि जा ज़वाब लगभग 20 लफ्ज़नि में लिखो:

  1. (i) 'अझो' नाविल जे लेखक जो नालो लिखो।

    लेखक: श्री हीरो शेख (अथवा हीरो शेख) 'अझो' नाविल जे लेखक आहे.

  2. (ii) खिलनाणीअ जो मौत कहिड़े शख्स कयो।

    खिलनाणीअ जो मौत श्री मोहन सिंह (अथवा मोहन सिंह) शख्स कयो.

  3. (iii) श्री झमूं छुगाणी जी तव्हा कहिड़ी कहाणी पहिंजे दसी किताब में पढ़ी आहे?

    श्री झमूं छुगाणी जी तव्हा "सिंधी साहित्य जी तारीख" (अथवा "सिंधी साहित्य जी तारीख") किताब में पढ़ी आहे.

  4. (iv) 'सुहिणो शाहु लतीफु' नाटक में जीवन जे कहिड़ें पहलूअ जो चित्रणु कयलु आहे?

    'सुहिणो शाहु लतीफु' नाटक में शाह लतीफ जी जीवन जे आध्यात्मिक पहलूअ (अथवा आध्यात्मिक पहलू) जो चित्रणु कयलु आहे.

  5. (v) तव्हां दर्सी किताब में बलदेब मटलाणी जो कहिड़ों लेख पढ़ियो आहे?

    तव्हां दर्सी किताब में बलदेब मटलाणी जो "सिंधी साहित्य जी तारीख" (अथवा "सिंधी साहित्य जी तारीख") लेख पढ़ियो आहे.

कहिं हिक नज़्म जो AR में सारु लिखो:

  1. (i) सौदागरु

    नज़्म "सौदागरु" में एक सौदागर जी कहाणी बयान कयल आहे, जो अपने व्यापार में सफलता हासिल करे था. नज़्म में जीवन जे संघर्ष और सफलता जे पहलूअ जो चित्रणु कयलु आहे.

  2. (ii) सिंधु ऐं सिंधी

    नज़्म "सिंधु ऐं सिंधी" में सिंधु नदी और सिंधी संस्कृति जे संबंध जो वर्णनु कयलु आहे. नज़्म में सिंधु नदी जी महत्ता और सिंधी समाज पर तिस जो प्रभाव दर्शायलु आहे.