RBSE Class 12th 2015 Agriculture-SS-84-2015 Previous Year Papers

Agriculture-SS-84-2015 from the 2015 exam year is part of the Class 12th previous year papers archive on RBSE Solution. Many learners start here after finishing the textbook to see how questions were actually framed on the Rajasthan Board of Secondary Education (RBSE) paper.

Treat this question paper as a mock under gentle timing first, then as a marking exercise the second time. The introduction on this page is written only for this subject-and-year pair, not copied from other pages.

Bookmark the link if you coach juniors — the layout stays stable for search engines and classroom sharing.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2015
Subject Agriculture-SS-84-2015
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2015, and subject Agriculture-SS-84-2015 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

Turning 2015 papers into insight

One Agriculture-SS-84-2015 paper reveals style; several from the same year reveal pattern. After this page, open sibling subjects listed below to see whether marks cluster in certain units.

Keep rough work dated in your notebook. Examiners in Class 12th expect clear numbering even in practice sessions.

RBSE Class 12th 2015 Agriculture-SS-84-2015

Scroll through the Previous Year Papers pages for Agriculture-SS-84-2015 (2015).

RBSE Class 12th 2015 Agriculture-SS-84-2015 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Agriculture-SS-84-2015 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Agriculture-SS-84-2015 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Agriculture-SS-84-2015 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Agriculture-SS-84-2015 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Agriculture-SS-84-2015 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Agriculture-SS-84-2015 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th Agriculture-SS-84-2015 2015 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015

कृषि विज्ञान
AGRICULTURE

समय : 3 घण्टे    पूर्णांक : 56

No. of Questions — 30    SS—84—AGRICULTURE
No. of Printed Pages — 7


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्नपत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
    Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

SS—84— AGRICULTURE    SS - 6084    [ Turn over ]

पूसा संस्थान द्वारा विकसित सरसों की दो किस्मों के नाम लिखिए |

Write the names of any two varieties of Mustard which are developed by the Pusa Institute.

उत्तर: पूसा संस्थान द्वारा विकसित सरसों की दो किस्में हैं:

  1. पूसा बोल्ड (Pusa Bold)
  2. पूसा जय किसान (Pusa Jai Kisan)

शर्करा वाली दो फसलों के नाम लिखिए |

Write the names of any two sugar crops.

उत्तर: शर्करा वाली दो फसलें हैं:

  1. गन्ना (Sugarcane)
  2. चुकंदर (Sugar Beet)

पौधों में पोटेशियम तत्व की कमी के कोई दो लक्षण लिखिए |

Write any two symptoms of Potassium deficiency in plants.

उत्तर: पौधों में पोटेशियम तत्व की कमी के दो लक्षण:

  1. पुरानी पत्तियों के किनारे और सिरे पीले पड़कर भूरे हो जाते हैं (Leaf scorching or burning at margins and tips of older leaves)।
  2. तने कमजोर हो जाते हैं और पौधे आसानी से गिर जाते हैं (Weak stems and lodging of plants)।

पौधों में क्लोरीन तत्व के कोई दो कार्य लिखिए |

Write any two functions of chlorine element in plants.

उत्तर: पौधों में क्लोरीन तत्व के दो कार्य:

  1. प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया में सहायता करता है (Helps in photosynthesis)।
  2. पौधों में जल एवं आयनों के संतुलन को बनाए रखता है (Maintains water and ion balance in plants)।

गन्ने की फसल में सिंचाई हेतु दो क्रान्तिक अवस्थायें लिखिए |

Give two critical stages of irrigation in Sugarcane.

उत्तर: गन्ने की फसल में सिंचाई हेतु दो क्रान्तिक अवस्थाएँ:

  1. अंकुरण अवस्था (Germination stage) – बुवाई के तुरंत बाद नमी आवश्यक होती है।
  2. गाँठ पड़ने की अवस्था (Tillering stage) – पौधों की वृद्धि के लिए पर्याप्त नमी चाहिए।

गेहूँ की फसल में "आयसोप्रोट्यूरान" खरपतवार नाशी का किस क्रान्तिक अवस्था में प्रयोग किया जाता है ?

At which critical stage is the "Isoproturan" weedicide used in wheat crop?

उत्तर: गेहूँ की फसल में "आयसोप्रोट्यूरान" खरपतवार नाशी का प्रयोग बुवाई के 30-35 दिन बाद (जब फसल 3-4 पत्तियों की अवस्था में हो) क्रान्तिक अवस्था में किया जाता है।


धान की चार उन्नत किस्मों के नाम बताइए |

Write four improved varieties of Paddy.

उत्तर: धान की चार उन्नत किस्में:

  1. पूसा बासमती-1 (Pusa Basmati-1)
  2. आई.आर.-64 (IR-64)
  3. जया (Jaya)
  4. पंत धान-4 (Pant Dhan-4)

प्रश्न 8

कैल्सियम की कमी से उत्पन्न दो रोगों के नाम लिखिए।

Write the names of two diseases due to the deficiency of Calcium.

उत्तर: कैल्सियम की कमी से उत्पन्न दो प्रमुख रोग हैं:

  1. फूल के सिरे का सड़न (Blossom end rot) – टमाटर, मिर्च आदि में।
  2. पत्ती का मुड़ना या झुलसना (Leaf curl or tip burn) – पत्तागोभी, ब्रोकोली आदि में।

प्रश्न 9

बाजरा के हरित बाली रोग के कोई दो लक्षण लिखिए।

Write any two symptoms of green ear disease of pearl millet.

उत्तर: बाजरा के हरित बाली रोग (Green ear disease) के दो प्रमुख लक्षण:

  1. बाली के स्थान पर हरी पत्तियों का गुच्छा (हरित बाली) बन जाता है, जो सामान्य दाने नहीं बनाता।
  2. प्रभावित पौधे बौने रह जाते हैं और उनमें अधिक शाखाएँ निकलती हैं, जिससे पौधा झाड़ीनुमा दिखता है।

प्रश्न 10

विटामिन डी के दो कार्य लिखिए।

Write any two functions of Vitamin D.

उत्तर: विटामिन डी के दो प्रमुख कार्य:

  1. यह शरीर में कैल्सियम और फॉस्फोरस के अवशोषण में सहायता करता है, जिससे हड्डियाँ मजबूत बनती हैं।
  2. यह प्रतिरक्षा तंत्र (immune system) को मजबूत करता है और कोशिका वृद्धि को नियंत्रित करता है।

प्रश्न 11

हरियाली से आप क्या समझते हैं?

What do you understand by Lawn?

उत्तर: हरियाली (Lawn) से तात्पर्य घर या बगीचे के आस-पास घास से ढके हुए समतल भू-भाग से है, जिसे नियमित रूप से काटकर साफ-सुथरा रखा जाता है। यह सौंदर्यीकरण और मनोरंजन के लिए उपयोगी होता है।


प्रश्न 12

अलंकृत उद्यान बनाने की कौन-कौन सी शैली हैं?

Which styles are used for ornamental gardening?

उत्तर: अलंकृत उद्यान बनाने की प्रमुख शैलियाँ:

  1. औपचारिक शैली (Formal style): इसमें सममिति (symmetry) और ज्यामितीय आकृतियों का प्रयोग होता है।
  2. अनौपचारिक शैली (Informal style): इसमें प्राकृतिक रूप दिया जाता है, जैसे घुमावदार रास्ते और असमान पौधे।
  3. मुक्त शैली (Free style): इसमें औपचारिक और अनौपचारिक दोनों का मिश्रण होता है।

प्रश्न 13

अंतरा-शस्यन से आप क्या समझते हैं?

What do you understand by Interculture?

उत्तर: अंतरा-शस्यन (Interculture) से तात्पर्य फसलों के बीच की जगह में खरपतवार नियंत्रण, मिट्टी को भुरभुरा बनाने और वायु संचार के लिए की जाने वाली क्रियाओं (जैसे निराई, गुड़ाई) से है। इससे फसल की वृद्धि बेहतर होती है।


प्रश्न 14

मृदा संरचना (Soil structure) किसे कहते हैं? मृदा संरचना को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?

What is soil structure? In how many parts can soil structure be divided?

उत्तर: मृदा संरचना (Soil structure) से तात्पर्य मृदा के कणों (रेत, गाद, मिट्टी) के आपस में जुड़कर बनाए गए समूहों (aggregates) की व्यवस्था से है।

मृदा संरचना को मुख्यतः चार भागों में बाँटा जा सकता है:

  1. दानेदार (Granular): छोटे-छोटे गोल दाने, जो कृषि के लिए सर्वोत्तम होते हैं।
  2. खंडीय (Blocky): कोणीय या गोलाकार खंड।
  3. स्तंभीय (Prismatic/Columnar): लंबवत स्तंभ, जो जल निकासी को प्रभावित करते हैं।
  4. प्लेटी (Platy): पतली चपटी परतें, जो जल और जड़ों के प्रवेश में बाधा डालती हैं।

प्रश्न 20 से 23 (भाग 4)

प्रश्न 20

राजस्थान में पायी जाने वाली “मरु नदीय मृदाओं” का संक्षेप में वर्णन कीजिये।

Describe in brief the "Desert Riverine Soil" found in Rajasthan.

उत्तर: मरु नदीय मृदाएँ राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में नदियों के किनारे पाई जाती हैं। ये मृदाएँ नदियों द्वारा लाए गए निक्षेपों से बनी होती हैं और इनमें बालू, गाद एवं मिट्टी का मिश्रण पाया जाता है। ये मृदाएँ सामान्यतः उपजाऊ होती हैं तथा इनमें जल धारण क्षमता अपेक्षाकृत अधिक होती है। ये लूनी, घग्घर आदि नदियों के किनारे पाई जाती हैं।

प्रश्न 21

“हरी खाद” के कोई चार लाभ लिखिए।

Write any four merits of "Green Manuring".

उत्तर: हरी खाद के चार लाभ निम्नलिखित हैं:

  1. मृदा में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है, जिससे मृदा की उर्वरता में वृद्धि होती है।
  2. मृदा की जल धारण क्षमता में सुधार होता है।
  3. मृदा में सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ती है, जो पोषक तत्वों के चक्रण में सहायक होते हैं।
  4. यह मृदा अपरदन को रोकने में सहायक होती है तथा खरपतवारों की वृद्धि को नियंत्रित करती है।

प्रश्न 22

नहरों द्वारा सिंचाई के कोई दो लाभ एवं दो हानियाँ लिखिए।

Write any two merits & two demerits of Canal Irrigation.

उत्तर:

लाभ:

  1. नहर सिंचाई से बड़े क्षेत्र में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति होती है।
  2. इससे भूजल स्तर में वृद्धि होती है तथा सिंचाई की लागत कम होती है।

हानियाँ:

  1. नहरों में जल रिसाव से भूमि में जलभराव एवं लवणता की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  2. नहरों के निर्माण एवं रखरखाव पर अधिक व्यय होता है।

प्रश्न 23

सिंचाई की थाला विधि का चित्र बनाइये एवं इस विधि का वर्णन कीजिए।

Draw a diagram and describe the Basin method of irrigation.

उत्तर: थाला विधि में पेड़ या फसल के चारों ओर मिट्टी का घेरा बनाकर एक थाला (बेसिन) बनाया जाता है। इसमें पानी भरकर सिंचाई की जाती है। यह विधि फलदार वृक्षों एवं सब्जियों के लिए उपयुक्त है।

चित्र: (एक वर्गाकार या गोलाकार थाला जिसके चारों ओर मिट्टी की मेड़ बनी हो, तथा बीच में पौधा या पेड़ दर्शाया गया हो।)

(चित्र में एक वर्गाकार या गोलाकार क्षेत्र दिखाया गया है जिसके चारों ओर मिट्टी की मेड़ (बाउंड्री) बनी है। इस क्षेत्र के मध्य में एक पौधा या पेड़ है, और क्षेत्र के अंदर पानी भरा हुआ दर्शाया गया है।)

24. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए :

Write short notes on the following :

  1. निजी उद्यान (Private Garden) – यह एक व्यक्तिगत या पारिवारिक उपयोग के लिए बनाया गया उद्यान है, जिसमें फूल, फल, सब्जियाँ और सजावटी पौधे लगाए जाते हैं। इसका रखरखाव मालिक स्वयं करता है और यह आमतौर पर घर के आस-पास स्थित होता है।
  2. सार्वजनिक उद्यान (Public Garden) – यह सरकार या स्थानीय निकाय द्वारा जनता के मनोरंजन और शिक्षा के लिए बनाया गया उद्यान है। इसमें विभिन्न प्रकार के पौधे, फव्वारे, बैठने की व्यवस्था और खेल के मैदान होते हैं। यह सभी के लिए खुला रहता है।

उत्तर (Answer): निजी उद्यान व्यक्तिगत उपयोग के लिए होता है, जबकि सार्वजनिक उद्यान सामुदायिक उपयोग के लिए होता है।

25. खरपतवारों के विस्तार की छ: विधियों का वर्णन कीजिए।

Explain the six methods of dissemination of weeds.

उत्तर (Answer): खरपतवारों के विस्तार की छ: विधियाँ निम्नलिखित हैं:

  1. वायु द्वारा (Wind): हल्के बीज हवा के साथ दूर-दूर तक फैल जाते हैं।
  2. जल द्वारा (Water): बीज नदी, नहर या वर्षा के पानी के साथ बहकर नए स्थानों पर पहुँचते हैं।
  3. जंतु द्वारा (Animals): पशु-पक्षियों के शरीर या मल के माध्यम से बीज फैलते हैं।
  4. मानव द्वारा (Human): कृषि उपकरणों, वाहनों या फसलों के साथ बीज मिलकर फैलते हैं।
  5. यांत्रिक विधि (Mechanical): कृषि मशीनों और औजारों के माध्यम से बीज एक खेत से दूसरे खेत में जाते हैं।
  6. प्राकृतिक विस्फोट (Explosive): कुछ पौधों के फल पकने पर फटते हैं और बीज चारों ओर बिखर जाते हैं।

26. अस्थाई फल परिरक्षण क्या है? अस्थाई फल परिरक्षण की दो विधियों का वर्णन कीजिए।

What is temporary fruit preservation? Describe two methods of temporary fruit preservation.

अथवा (OR)

फल परिरक्षण क्या है? इसके मुख्य सिद्धान्त लिखिए।

What is fruit preservation? Write major principles of fruit preservation.

उत्तर (Answer):

अस्थाई फल परिरक्षण (Temporary Fruit Preservation): यह फलों को कम समय के लिए खराब होने से बचाने की विधि है, जिसमें फलों को ठंडे स्थान पर रखा जाता है या चीनी/नमक का उपयोग किया जाता है।

दो विधियाँ:

  1. प्रशीतन (Refrigeration): फलों को 0-5°C तापमान पर रखकर उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाई जाती है।
  2. चीनी परिरक्षण (Sugar Preservation): फलों को चीनी की चाशनी में डुबोकर रखा जाता है, जिससे सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रुक जाती है।

अथवा (OR):

फल परिरक्षण (Fruit Preservation): फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने की प्रक्रिया है।

मुख्य सिद्धान्त:

  1. सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकना।
  2. एंजाइमों की क्रिया को निष्क्रिय करना।
  3. नमी की मात्रा को कम करना।
  4. तापमान को नियंत्रित करना।
  5. रासायनिक परिरक्षकों का उपयोग।
  6. वायु की अनुपस्थिति (वैक्यूम पैकिंग)।

27. केचप क्या है? केचप बनाने की विधि का वर्णन कीजिए।

What is ketchup? Describe the method of making ketchup.

अथवा (OR)

जैम को परिभाषित कीजिए। जैम बनाने की विधि का वर्णन लिखिए।

Define jam. Describe the method of making jam.

उत्तर (Answer):

केचप (Ketchup): यह टमाटर से बना एक गाढ़ा, मसालेदार सॉस है, जिसे भोजन के साथ परोसा जाता है।

केचप बनाने की विधि:

  1. पके टमाटरों को धोकर छीलें और गूदा निकालें।
  2. गूदे को उबालें और छानकर बीज अलग करें।
  3. इसमें चीनी, नमक, सिरका और मसाले (जैसे लौंग, दालचीनी) मिलाएँ।
  4. मिश्रण को गाढ़ा होने तक पकाएँ।
  5. गर्म होने पर स्टेरलाइज़्ड बोतलों में भरें और सील करें।

अथवा (OR):

जैम (Jam): यह फलों के गूदे और चीनी को पकाकर बनाया गया गाढ़ा उत्पाद है, जिसमें फल के टुकड़े बने रहते हैं।

जैम बनाने की विधि:

  1. पके फलों (जैसे स्ट्रॉबेरी, आम) को धोकर छोटे टुकड़ों में काटें।
  2. फलों में बराबर मात्रा में चीनी मिलाएँ और रात भर रखें।
  3. मिश्रण को धीमी आँच पर पकाएँ, बीच-बीच में हिलाते रहें।
  4. जब मिश्रण गाढ़ा हो जाए और चम्मच पर लेप बनने लगे, तो उतार लें।
  5. गर्म जैम को स्टेरलाइज़्ड जार में भरें और ढक्कन लगाएँ।

प्रश्न 27 (क) केचप क्या है? केचप तैयार करने की विधि समझाइए। (1+2=3)

केचप: केचप एक गाढ़ा, मसालेदार और स्वादिष्ट उत्पाद है जो टमाटर के गूदे या प्यूरी को चीनी, सिरका, नमक और मसालों के साथ पकाकर बनाया जाता है। इसका उपयोग सॉस के रूप में किया जाता है।

केचप तैयार करने की विधि:

  1. टमाटर का चयन और धुलाई: पके, लाल और स्वस्थ टमाटरों का चयन करें। उन्हें अच्छी तरह धो लें।
  2. गूदा निकालना: टमाटरों को छोटे टुकड़ों में काटकर उबालें और छलनी से छानकर गूदा (प्यूरी) अलग कर लें।
  3. पकाना: टमाटर के गूदे को एक बड़े बर्तन में डालकर धीमी आंच पर गाढ़ा होने तक पकाएं।
  4. मसाले और चीनी मिलाना: इसमें स्वादानुसार चीनी, नमक, सिरका, लौंग, दालचीनी, काली मिर्च और अदरक का पेस्ट मिलाएं।
  5. गाढ़ा करना: मिश्रण को तब तक पकाएं जब तक यह वांछित गाढ़ापन प्राप्त न कर ले।
  6. पैकेजिंग: गर्म केचप को साफ, सूखी और निष्फल बोतलों में भरकर सील कर दें।

प्रश्न 27 (ख) जैम की परिभाषा दीजिए। जैम बनाने की विधि लिखिए। (1+2=3)

जैम: जैम एक फल संरक्षित उत्पाद है जिसमें फलों के गूदे या टुकड़ों को चीनी के साथ गाढ़ा होने तक पकाया जाता है। इसमें फल का प्राकृतिक स्वाद और रंग बना रहता है।

जैम बनाने की विधि:

  1. फलों का चयन: पके, ताजे और रसीले फल (जैसे स्ट्रॉबेरी, आम, सेब) चुनें।
  2. फल तैयार करना: फलों को धोकर छीलें, बीज निकालें और छोटे टुकड़ों में काट लें।
  3. पकाना: फलों के टुकड़ों को चीनी (लगभग 1:1 अनुपात) के साथ एक बर्तन में डालकर धीमी आंच पर पकाएं।
  4. गाढ़ापन जांचना: मिश्रण को तब तक पकाएं जब तक यह गाढ़ा न हो जाए और चम्मच से लेने पर टपकने के बजाय एक साथ चिपके।
  5. पैकेजिंग: गर्म जैम को साफ, सूखी और निष्फल जार में भरकर तुरंत सील कर दें।

प्रश्न 28. सिंचाई के चार सतही जल स्रोतों का वर्णन कीजिए। (1+1+1+1=4)

सिंचाई के चार प्रमुख सतही जल स्रोत निम्नलिखित हैं:

  1. नदियाँ: नदियाँ सतही जल का सबसे बड़ा स्रोत हैं। इनसे नहरों के माध्यम से खेतों तक पानी पहुँचाया जाता है। यह स्रोत मानसून और हिमपात पर निर्भर करता है।
  2. नहरें: नहरें कृत्रिम जलमार्ग हैं जो नदियों, बांधों या जलाशयों से पानी ले जाती हैं। ये सिंचाई का एक नियंत्रित और कुशल साधन हैं।
  3. तालाब: तालाब छोटे जलाशय होते हैं जो वर्षा जल को संग्रहित करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ये सिंचाई का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं, विशेषकर छोटे खेतों के लिए।
  4. झीलें: झीलें प्राकृतिक या कृत्रिम जल निकाय हैं जो बड़ी मात्रा में पानी संग्रहित करती हैं। इनका उपयोग नहरों और पाइपलाइनों के माध्यम से सिंचाई के लिए किया जाता है।

प्रश्न 29. चने की वैज्ञानिक खेती का निम्नलिखित बिन्दुओं में वर्णन कीजिए: (1+1+1+1=4)

  1. भूमि: चने की खेती के लिए दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है जिसमें जल निकासी अच्छी हो। मिट्टी का pH मान 6.0 से 7.5 के बीच होना चाहिए।
  2. चार उन्नत किस्में: चने की चार उन्नत किस्में हैं - राजस्थान चना-1 (RC-1), राजस्थान चना-2 (RC-2), देशी चना (Desi), और कबूली चना (Kabuli)।
  3. बुवाई का समय: चने की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से नवंबर माह है। रबी मौसम में बुवाई की जाती है।
  4. बीज की मात्रा: चने की बुवाई के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 60-80 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। बीज की मात्रा किस्म और बुवाई विधि पर निर्भर करती है।

अथवा

प्रश्न 29. कपास की वैज्ञानिक खेती का निम्नलिखित बिन्दुओं में वर्णन कीजिए: (1+1+1+1=4)

  1. जलवायु: कपास की खेती के लिए गर्म और आर्द्र जलवायु उपयुक्त होती है। इसके लिए 20°C से 30°C तापमान और 50-100 सेमी वार्षिक वर्षा आवश्यक है। पकने के समय शुष्क मौसम चाहिए।
  2. चार अमेरिकन किस्में: कपास की चार अमेरिकन किस्में हैं - एच-777 (H-777), एच-1226 (H-1226), आरएच-1 (RH-1), और आरएच-2 (RH-2)। ये किस्में अधिक उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधी होती हैं।
  3. खाद तथा उर्वरक: कपास की फसल के लिए 80-100 किग्रा नाइट्रोजन, 40-60 किग्रा फास्फोरस और 40-60 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर देना चाहिए। गोबर की खाद 10-15 टन प्रति हेक्टेयर डालना लाभदायक होता है।
  4. बुवाई का समय: कपास की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय मई से जून माह है। खरीफ मौसम में बुवाई की जाती है।

प्रश्न 30

अमरूद की खेती का वर्णन निम्न बिन्दुओं के आधार पर कीजिए :

  1. जलवायु
  2. चार उन्नत किस्में
  3. सिंचाई
  4. प्रवर्धन

अथवा

सेवन्ती या गुलदाउदी की खेती का निम्न बिन्दुओं के आधार पर वर्णन कीजिए :

  1. चार उन्नत किस्में
  2. प्रवर्धन
  3. खाद एवं उर्वरक
  4. उद्यानिक क्रियाएँ

Describe the cultivation of Guava on the basis of the following points :

  1. Climate
  2. Four improved varieties
  3. Irrigation
  4. Propagation

OR

Describe the cultivation of Chrysanthemum on the basis of the following points :

  1. Four improved varieties
  2. Propagation
  3. Fertilizer and manure
  4. Horticultural activities

अमरूद की खेती का वर्णन

1. जलवायु (Climate): अमरूद उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु का फल है। यह 15°C से 35°C तापमान में अच्छी तरह उगता है। पाले से नुकसान होता है, इसलिए पाले से बचाव आवश्यक है। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भी इसकी खेती की जा सकती है, परन्तु फूल आने के समय शुष्क मौसम लाभदायक होता है।

2. चार उन्नत किस्में (Four improved varieties):

  • लखनऊ-49 (सरदार): अधिक उपज देने वाली, बड़े फल वाली किस्म।
  • अलाहाबाद सफेदा: सफेद गूदा, मीठा स्वाद, अच्छी गुणवत्ता।
  • हिसार सफेदा: अधिक उपज, रोग प्रतिरोधी।
  • बीबीसी-1 (बंगलौर): लाल गूदा, अच्छी किस्म।

3. सिंचाई (Irrigation): अमरूद के पौधों को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। गर्मियों में 7-10 दिन के अंतराल पर और सर्दियों में 15-20 दिन के अंतराल पर सिंचाई करनी चाहिए। फूल आने और फल लगने के समय पर्याप्त नमी आवश्यक है। ड्रिप सिंचाई से जल की बचत होती है।

4. प्रवर्धन (Propagation): अमरूद का प्रवर्धन प्रायः बीज द्वारा किया जाता है, परन्तु उन्नत किस्मों के लिए कलम (cutting) या गूटी (layering) विधि अपनाई जाती है। वाणिज्यिक खेती में गूटी विधि अधिक प्रचलित है। तने की कलम (stem cutting) भी सफल होती है।

सेवन्ती (गुलदाउदी) की खेती का वर्णन

1. चार उन्नत किस्में (Four improved varieties):

  • पूर्णिमा: सफेद रंग, बड़े फूल, अधिक उपज।
  • राजहंस: पीले रंग के फूल, अच्छी गुणवत्ता।
  • शारदा: गुलाबी रंग, मध्यम आकार के फूल।
  • स्नोबॉल: सफेद गोलाकार फूल, सजावटी।

2. प्रवर्धन (Propagation): गुलदाउदी का प्रवर्धन मुख्यतः कलम (cutting) द्वारा किया जाता है। तने की कलम (5-7 सेमी लंबी) को रेत या मिट्टी में लगाया जाता है। जड़ निकलने में 2-3 सप्ताह लगते हैं। बीज द्वारा भी प्रवर्धन संभव है, परन्तु कलम विधि अधिक प्रचलित है।

3. खाद एवं उर्वरक (Fertilizer and manure): रोपण के समय गोबर की सड़ी खाद (20-25 टन प्रति हेक्टेयर) डालनी चाहिए। रासायनिक उर्वरकों में नाइट्रोजन (100 किग्रा/हे.), फास्फोरस (50 किग्रा/हे.) और पोटाश (50 किग्रा/हे.) का प्रयोग करना चाहिए। नाइट्रोजन की आधी मात्रा रोपण के समय और शेष दो बार (30 और 60 दिन बाद) देनी चाहिए।

4. उद्यानिक क्रियाएँ (Horticultural activities): इनमें निराई-गुड़ाई, खरपतवार नियंत्रण, पिंचिंग (शीर्ष काटना), डिस्बडिंग (अतिरिक्त कलियाँ हटाना) और स्टेकिंग (सहारा देना) शामिल हैं। पिंचिंग से पार्श्व शाखाएँ बढ़ती हैं और अधिक फूल आते हैं। डिस्बडिंग से बड़े फूल प्राप्त होते हैं। रोगों (जैसे पाउडरी मिल्ड्यू) और कीटों (जैसे एफिड) का नियंत्रण आवश्यक है।