RBSE Class 12th 2015 Chemistry-SS-41-2015 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2015
Subject Chemistry-SS-41-2015
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Chemistry-SS-41-2015 2015 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015

रसायन विज्ञान
CHEMISTRY

समय : 3 घण्टे 15 मिनट     पूर्णांक : 56

नोट : समीकरणों को आवश्यक शर्तों सहित संतुलित रूप में लिखिए।


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

SS—41—Chem.  |  SS-604  |  [ Turn over

प्रश्न संख्या एवं अंक विभाजन (Marks Distribution)

प्रश्न संख्या (Q. Nos.) अंक प्रति प्रश्न (Marks per question)
1-3 -
4-24 2
25-27 3
28-30 4

नोट: प्रश्न संख्या 2, 27, 28, 29 और 30 में आन्तरिक विकल्प हैं। (Question Nos. 2, 27, 28, 29 and 30 have internal choices.)


प्रश्न 1. फिनॉल की मोललता ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।

Write the formula to calculate the molality of phenol.

उत्तर: मोललता (m) = विलेय के मोलों की संख्या (moles of solute)विलायक का द्रव्यमान किग्रा में (mass of solvent in kg)

या, m = w × 1000M × W जहाँ w = विलेय का द्रव्यमान (ग्राम में), M = विलेय का मोलर द्रव्यमान, W = विलायक का द्रव्यमान (ग्राम में)।

प्रश्न 2. प्रतिरोधकता का SI मात्रक लिखिए।

Write the SI unit of Resistivity.

उत्तर: प्रतिरोधकता का SI मात्रक ओम-मीटर (Ω·m) है।

प्रश्न 3. Mg2+ और Cl आयनों की सीमान्त मोलर चालकता क्रमशः 106.0 S cm² mol⁻¹ तथा 76.3 S cm² mol⁻¹ है। MgCl₂ की सीमान्त मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।

The limiting molar conductivities of Mg2+ and Cl ions are 106.0 S cm² mol⁻¹ and 76.3 S cm² mol⁻¹ respectively. Find the limiting molar conductivity of MgCl₂.

हल: कोलराउश के नियम के अनुसार,

Λ0m (MgCl₂) = λ0Mg²⁺ + 2 × λ0Cl⁻

Λ0m (MgCl₂) = 106.0 + 2 × 76.3

Λ0m (MgCl₂) = 106.0 + 152.6

Λ0m (MgCl₂) = 258.6 S cm² mol⁻¹

प्रश्न 1

Mg2+ और Cl आयनों की सीमांत मोलर चालकताएँ क्रमशः 106.0 S cm² mol⁻¹ और 76.3 S cm² mol⁻¹ हैं। MgCl₂ की सीमांत मोलर चालकता ज्ञात कीजिए।

हल:

कोलराउश के नियम के अनुसार,

Λm°(MgCl₂) = λm°(Mg2+) + 2 × λm°(Cl)

Λm°(MgCl₂) = 106.0 + 2 × 76.3

Λm°(MgCl₂) = 106.0 + 152.6

Λm°(MgCl₂) = 258.6 S cm² mol⁻¹


प्रश्न 2

Ba(N₃)₂ के तापीय अपघटन से क्या होता है? (केवल अभिक्रिया की समीकरण लिखिए)

What happens on thermal decomposition of Ba(N₃)₂? (write only equation of the reaction)

अभिक्रिया समीकरण:

Ba(N₃)₂ →(Δ) Ba + 3N₂

बेरियम एजाइड के तापीय अपघटन से बेरियम धातु और नाइट्रोजन गैस प्राप्त होती है।


प्रश्न 3

C₆H₅—N—CH₂CH₃—CH₂CH₃ का IUPAC नाम लिखिए।

C₆H₅

Write IUPAC name of C₆H₅—N—CH₂CH₃—CH₂CH₃

C₆H₅

IUPAC नाम: N-एथिल-N-फेनिलएथेनामाइन

(यह एक तृतीयक ऐमीन है जिसमें नाइट्रोजन पर दो एथिल समूह और एक फेनिल समूह जुड़े हैं।)


प्रश्न 4

[Cr(H₂O)₄Br₂]Cl के आयनन समावयवी का सूत्र लिखिए।

Write the formula of ionisation isomer of [Cr(H₂O)₄Br₂]Cl.

आयनन समावयवी का सूत्र: [Cr(H₂O)₄BrCl]Br

व्याख्या: आयनन समावयवता में, आयनिक प्रभाज (Cl⁻) और उपसहसंयोजक प्रभाज (Br⁻) आपस में स्थान बदल लेते हैं।


प्रश्न 5

मर्क्यूरी टेट्राथायोसायनेटो-कोबाल्टेट (III) उपसहसंयोजक यौगिक का सूत्र लिखिए।

Write the formula of coordination compound mercury tetrathiocyanato-cobaltate (III).

सूत्र: Hg[Co(SCN)₄]

व्याख्या: इसमें कोबाल्ट (III) केंद्रीय धातु है जो चार थायोसायनेटो लिगैंड से जुड़ा है, और मर्क्यूरी धनायन के रूप में है।

प्रश्न एवं उत्तर (Questions & Answers)

प्रश्न 1

क्या होता है, जब बेंजिन डाइएजोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया पोटेशियम आयोडाइड से कराई जाती है? (केवल अभिक्रिया का समीकरण लिखिए)

What happens when benzene diazonium chloride reacts with potassium iodide? (write only equation of the reaction)

उत्तर / Answer:

बेंजिन डाइएजोनियम क्लोराइड पोटेशियम आयोडाइड से अभिक्रिया करके आयोडोबेंजीन बनाता है।

Benzene diazonium chloride reacts with potassium iodide to form iodobenzene.

अभिक्रिया का समीकरण / Equation of the reaction:

C6H5N2Cl + KI → C6H5I + N2 + KCl


प्रश्न 2

समझाइए कि वल्कनीकृत रबड़ एक प्रत्यास्थ बहुलक होता है।

Explain that vulcanised rubber is an elastomer.

उत्तर / Answer:

वल्कनीकृत रबड़ एक प्रत्यास्थ बहुलक (elastomer) होता है क्योंकि इसमें रबर के अणुओं के बीच सल्फर परमाणुओं द्वारा अनुप्रस्थ-बंध (cross-links) बनाए जाते हैं। ये अनुप्रस्थ-बंध रबर को एक त्रि-आयामी जालिका संरचना प्रदान करते हैं। जब वल्कनीकृत रबड़ पर बल लगाया जाता है, तो यह खिंच जाता है, और बल हटाने पर यह पुनः अपनी मूल आकृति में वापस आ जाता है। यह प्रत्यास्थता का गुण इसे एक प्रत्यास्थ बहुलक बनाता है।

Vulcanised rubber is an elastomer because sulphur atoms form cross-links between the rubber molecules. These cross-links give rubber a three-dimensional network structure. When force is applied, vulcanised rubber stretches, and when the force is removed, it returns to its original shape. This property of elasticity makes it an elastomer.


प्रश्न 3

किसी अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक की इकाई sec-1 है। अभिक्रिया की कोटि क्या होगी?

For a reaction the unit of rate constant is sec-1. What will be the order of reaction?

उत्तर / Answer:

यदि वेग स्थिरांक (k) की इकाई sec-1 है, तो अभिक्रिया की कोटि प्रथम (first order) होगी।

If the unit of rate constant (k) is sec-1, then the order of reaction will be first order.

व्याख्या / Explanation:

प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए वेग = k [A]1, जहाँ k की इकाई समय-1 (जैसे sec-1) होती है।


प्रश्न 4

अभिक्रिया 2A + B → उत्पाद हेतु अवकलन वेग समीकरण लिखिए।

Write differential rate equation for the reaction, 2A + B → product.

उत्तर / Answer:

अभिक्रिया 2A + B → उत्पाद के लिए अवकलन वेग समीकरण निम्न प्रकार लिखा जाता है:

The differential rate equation for the reaction 2A + B → product is written as:

Rate = - (1/2) d[A]/dt = - d[B]/dt = k [A]2 [B]

जहाँ d[A]/dt और d[B]/dt क्रमशः A और B की सांद्रता में परिवर्तन की दर को दर्शाते हैं, और k वेग स्थिरांक है।


प्रश्न 5

H3PO3 की क्षारकता क्या है?

What is the basicity of H3PO3?

उत्तर / Answer:

H3PO3 (फॉस्फोरस अम्ल) की क्षारकता 2 है।

The basicity of H3PO3 (phosphorous acid) is 2.

व्याख्या / Explanation:

H3PO3 में केवल दो हाइड्रोजन परमाणु आयनित होकर H+ आयन दे सकते हैं, जबकि तीसरा हाइड्रोजन सीधे फॉस्फोरस से जुड़ा होता है और आयनित नहीं होता। इसलिए यह द्विक्षारकीय अम्ल (dibasic acid) है।

3. बेन्जोइक अम्ल, 4-मेथिल बेन्जोइक अम्ल एवं 4-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल को अम्लीय सामर्थ्य के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए।

Arrange benzoic acid, 4-methyl benzoic acid and 4-nitrobenzoic acid in increasing order of their acidic strength.

उत्तर: अम्लीय सामर्थ्य का बढ़ता क्रम: 4-मेथिल बेन्जोइक अम्ल < बेन्जोइक अम्ल < 4-नाइट्रोबेन्जोइक अम्ल

Explanation: 4-मेथिल समूह (+I प्रभाव) बेन्जोइक अम्ल की अम्लीयता को कम करता है, जबकि 4-नाइट्रो समूह (-I और -R प्रभाव) अम्लीयता को बढ़ाता है।

4. निस्तापन एवं भर्जन को उदाहरण सहित समझाइए।

Explain calcination and roasting with example.

उत्तर:

  • निस्तापन (Calcination): अयस्क को वायु की अनुपस्थिति में गर्म करना। उदाहरण: ZnCO₃ → ZnO + CO₂ (जिंक कार्बोनेट का अपघटन)।
  • भर्जन (Roasting): अयस्क को वायु की उपस्थिति में गर्म करना। उदाहरण: 2ZnS + 3O₂ → 2ZnO + 2SO₂ (जिंक सल्फाइड का ऑक्सीकरण)।

5. प्रोटीन के विकृतीकरण को एक उदाहरण सहित समझाइए।

Explain denaturation of protein with an example.

उत्तर: प्रोटीन का विकृतीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें प्रोटीन की द्वितीयक, तृतीयक और चतुर्थक संरचना नष्ट हो जाती है, लेकिन प्राथमिक संरचना बनी रहती है। उदाहरण: अंडे को उबालने पर एल्बुमिन प्रोटीन का विकृतीकरण हो जाता है, जिससे अंडे का सफेद भाग ठोस हो जाता है।

6. 400 K तापक्रम पर किसी विलयन का परासरण दाब 0.082 वायुमंडल है तो विलयन की सान्द्रता मोल/लीटर में ज्ञात कीजिए। [R = 0.082 L atm K⁻¹ mol⁻¹]

Osmotic pressure of a solution is 0.082 atm at a temperature of 400 K. Calculate the concentration of solution in mol/litre. [R = 0.082 L atm K⁻¹ mol⁻¹]

हल: परासरण दाब (π) = CRT, जहाँ C = सान्द्रता (mol/L), R = गैस स्थिरांक, T = तापमान (K)

π = 0.082 atm, R = 0.082 L atm K⁻¹ mol⁻¹, T = 400 K

C = π / (RT) = 0.082 / (0.082 × 400) = 0.082 / 32.8 = 0.0025 mol/L

उत्तर: विलयन की सान्द्रता = 0.0025 मोल/लीटर

7. (a) फैराडे के विद्युत अपघटन के द्वितीय नियम को लिखिए।

(b) मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का नामांकित चित्र बनाइए।

(a) Write Faraday's second law of electrolysis. (b) Draw labelled diagram of standard Hydrogen electrode.

(a) फैराडे का द्वितीय नियम: जब विभिन्न विद्युत अपघट्यों में समान मात्रा में विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो इलेक्ट्रोडों पर मुक्त होने वाले पदार्थों की मात्राएँ उनके रासायनिक तुल्यांकी भारों के समानुपाती होती हैं।

(b) मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड (SHE) का नामांकित चित्र:

        प्लैटिनम तार
            |
        प्लैटिनम फॉइल
            |
        H₂ गैस (1 atm)
            |
        ┌─────────────┐
        │ 1 M H⁺ विलयन │
        └─────────────┘
            |
        H₂ गैस के बुलबुले

नामांकन: प्लैटिनम इलेक्ट्रोड, H₂ गैस (1 atm), 1 M H⁺ विलयन, 25°C तापमान।

प्रश्न 8

अधोलिखित अभिक्रिया को पूर्ण कर इसकी क्रियाविधि समझाइए :

(CH₃)₃CBr + OH⁻ (जलीय) →

Complete the following reaction and explain its mechanism :

(CH₃)₃CBr + OH⁻ (aq) →

पूर्ण अभिक्रिया:

(CH₃)₃CBr + OH⁻ (aq) → (CH₃)₃COH + Br⁻

क्रियाविधि (SN1 तंत्र):

  1. प्रथम चरण (धीमा): (CH₃)₃CBr का आयनन होकर तृतीयक ब्यूटिल कार्बोकैटायन (CH₃)₃C⁺ और Br⁻ आयन बनता है। यह चरण धीमा है क्योंकि इसमें एक स्थायी कार्बोकैटायन बनता है।
  2. द्वितीय चरण (तेज़): कार्बोकैटायन (CH₃)₃C⁺ पर नाभिकस्नेही OH⁻ आयन तीव्रता से आक्रमण करता है, जिससे तृतीयक ब्यूटिल अल्कोहल (CH₃)₃COH बनता है।

कारण: यह SN1 अभिक्रिया है क्योंकि तृतीयक एल्किल हैलाइड होने के कारण कार्बोकैटायन स्थायी होता है, जिससे SN1 क्रियाविधि संभव होती है।

प्रश्न 20

अधोलिखित यौगिकों को उनके बढ़ते हुए क्षारीय सामर्थ्य के क्रम में व्यवस्थित कर कारण स्पष्ट कीजिए :

C₆H₅NH₂, NH₃, C₂H₅NH₂

Arrange the following compounds in increasing order of their basic strength. Explain reason :

C₆H₅NH₂, NH₃, C₂H₅NH₂

बढ़ते क्षारीय सामर्थ्य का क्रम:

C₆H₅NH₂ < NH₃ < C₂H₅NH₂

कारण:

  • C₆H₅NH₂ (एनिलीन): इसमें NH₂ समूह बेंजीन वलय से जुड़ा होता है। बेंजीन वलय में अनुनाद के कारण नाइट्रोजन पर एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म वलय में विस्थानित हो जाता है, जिससे इलेक्ट्रॉन दान करने की क्षमता कम हो जाती है। अतः यह सबसे कम क्षारीय है।
  • NH₃ (अमोनिया): इसमें कोई अनुनाद प्रभाव नहीं होता, केवल +I प्रभाव (हाइड्रोजन का) होता है, जो कमजोर होता है। अतः इसकी क्षारीयता एनिलीन से अधिक लेकिन एथिलेमीन से कम है।
  • C₂H₅NH₂ (एथिलेमीन): इसमें एथिल समूह (+I प्रभाव) नाइट्रोजन पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ाता है, जिससे यह सबसे अधिक क्षारीय होता है।

प्रश्न 2 (i)

योगात्मक तथा संघनन बहुलकीकरण में कोई दो अन्तर लिखिए।

Write any two differences between addition and condensation polymerisation.

क्रम योगात्मक बहुलकीकरण संघनन बहुलकीकरण
1. इसमें कोई उप-उत्पाद (जैसे H₂O, NH₃) नहीं निकलता। इसमें छोटे अणु (जैसे H₂O, NH₃, HCl) उप-उत्पाद के रूप में निकलते हैं।
2. यह केवल द्विबंध युक्त मोनोमरों (जैसे एथिलीन) में होता है। यह दो क्रियात्मक समूहों वाले मोनोमरों (जैसे डाइअमीन और डाइकार्बोक्सिलिक अम्ल) में होता है।

प्रश्न 2 (ii)

(अ) क्लोरीन के गर्म तथा तनु NaOH विलयन से अभिक्रिया की समीकरण लिखिए।

(ब) H₃PO₃ की अपचायक प्रकृति को समझाइए।

अथवा

(अ) क्लोरीन की गर्म तथा तनु NaOH से अभिक्रिया:

3Cl₂ + 6NaOH (गर्म, तनु) → 5NaCl + NaClO₃ + 3H₂O

व्याख्या: यह एक विषमांगी अनुपातिकरण अभिक्रिया है, जिसमें क्लोरीन का ऑक्सीकरण (NaClO₃ में) और अपचयन (NaCl में) दोनों होता है।

(ब) H₃PO₃ (फॉस्फोरस अम्ल) की अपचायक प्रकृति:

H₃PO₃ एक प्रबल अपचायक है क्योंकि इसमें फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्था +3 होती है, जो आसानी से +5 (H₃PO₄) में ऑक्सीकृत हो सकती है। यह AgNO₃, CuSO₄ आदि को अपचयित करता है।

उदाहरण: H₃PO₃ + 2AgNO₃ + H₂O → H₃PO₄ + 2Ag + 2HNO₃

प्रश्न 21 (a) – क्लोरीन की ठंडे व तनु NaOH से अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।

समीकरण:

Cl2 + 2NaOH (ठंडा, तनु) → NaCl + NaOCl + H2O

(सोडियम क्लोराइड + सोडियम हाइपोक्लोराइट + जल)

प्रश्न 21 (b) – H3PO3 के अपचायक गुण को समझाइए।

H3PO3 (फॉस्फोरस अम्ल) में फॉस्फोरस की ऑक्सीकरण अवस्था +3 होती है। यह आसानी से +5 ऑक्सीकरण अवस्था (H3PO4) में ऑक्सीकृत हो सकता है, इसलिए यह एक प्रबल अपचायक है। उदाहरण:

H3PO3 + 2AgNO3 + H2O → H3PO4 + 2Ag + 2HNO3


वैकल्पिक प्रश्न 21 (a) – क्लोरीन की गर्म व सांद्र NaOH से अभिक्रिया का समीकरण लिखिए।

समीकरण:

3Cl2 + 6NaOH (गर्म, सांद्र) → 5NaCl + NaClO3 + 3H2O

(सोडियम क्लोराइड + सोडियम क्लोरेट + जल)

वैकल्पिक प्रश्न 21 (b) – PCl5 के सभी पाँच बंध समतुल्य क्यों नहीं हैं? समझाइए।

PCl5 की संरचना त्रिकोणीय द्विपिरामिडीय (trigonal bipyramidal) होती है। इसमें तीन अक्षीय (axial) बंध और दो भूमध्यरेखीय (equatorial) बंध होते हैं। अक्षीय बंधों की लंबाई (अधिक) भूमध्यरेखीय बंधों से भिन्न होती है, इसलिए सभी पाँच P–Cl बंध समतुल्य नहीं होते।


प्रश्न 22 – प्रथम कोटि अभिक्रिया की अर्धायु काल 10 सेकंड है, तो इसके वेग स्थिरांक की गणना कीजिए।

दिया गया है: अर्धायु काल (t1/2) = 10 सेकंड

प्रथम कोटि अभिक्रिया के लिए सूत्र:

k = 0.693 / t1/2

गणना:

k = 0.693 / 10

k = 0.0693 सेकंड-1

उत्तर: वेग स्थिरांक (k) = 0.0693 s-1

प्रश्न 23

संयोजकता बंध सिद्धान्त के आधार पर समझाइए कि [Ni(CN)4]2- एक निम्न प्रचक्रण संकुल आयन है।

Explain on the basis of valence bond theory that [Ni(CN)4]2- is a low spin complex ion.

हल:

संयोजकता बंध सिद्धान्त के अनुसार:

  1. Ni की परमाणु संख्या 28 है। Ni2+ आयन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Ar] 3d8 4s0 4p0 है।
  2. CN- एक प्रबल क्षेत्र लिगैंड है, जो 3d कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन कराता है।
  3. इस प्रकार, Ni2+ के 3d कक्षकों में 8 इलेक्ट्रॉन चार युग्मों में व्यवस्थित हो जाते हैं, जिससे एक d कक्षक खाली रह जाता है।
  4. Ni2+ आयन dsp2 संकरण प्रदर्शित करता है, जिसमें एक 3d, एक 4s और दो 4p कक्षक संकरित होते हैं।
  5. चार CN- लिगैंड इन dsp2 संकरित कक्षकों से जुड़कर एक वर्ग समतलीय संरचना बनाते हैं।
  6. चूँकि सभी इलेक्ट्रॉन युग्मित हैं, अतः यह एक निम्न प्रचक्रण संकुल है (प्रचक्रण = 0)।

निष्कर्ष: [Ni(CN)4]2- एक निम्न प्रचक्रण संकुल आयन है क्योंकि इसमें कोई अयुग्मित इलेक्ट्रॉन नहीं है।

प्रश्न 24

निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं को पूर्ण कीजिए:

Complete the following chemical reactions:

  1. (a) CH3 - CH2 - Cl + KCN → ?

    उत्तर: CH3 - CH2 - Cl + KCN → CH3 - CH2 - CN + KCl

    (यह एक नाभिकस्नेही प्रतिस्थापन अभिक्रिया है, जिसमें CN- Cl- को प्रतिस्थापित करता है।)

  2. (b) CH3 - CH = CH2 + HI → ?

    उत्तर: CH3 - CH = CH2 + HI → CH3 - CHI - CH3 (2-आयोडोप्रोपेन)

    (यह मार्कोवनिकोव नियम के अनुसार योगज अभिक्रिया है, जहाँ HI का H अधिक हाइड्रोजन वाले कार्बन से जुड़ता है।)

  3. (c) CH3 - CH2 - OH + NaBr + H2SO4 → ?

    उत्तर: CH3 - CH2 - OH + NaBr + H2SO4 → CH3 - CH2 - Br + NaHSO4 + H2O

    (यह अल्कोहल का ब्रोमाइड में रूपांतरण है, जहाँ H2SO4 अम्लीय माध्यम प्रदान करता है।)

25.

(अ) षट्कोणीय क्रिस्टल तंत्र हेतु अक्षीय कोणों के मान लिखिए।

षट्कोणीय क्रिस्टल तंत्र में अक्षीय कोणों के मान: α = β = 90°, γ = 120° होते हैं।

(ब) सिलिकन में बोरॉन अपमिश्रित करने पर किस प्रकार का अर्धचालक प्राप्त होता है ? समझाइए।

सिलिकॉन में बोरॉन (तीन संयोजी इलेक्ट्रॉन) अपमिश्रित करने पर p-प्रकार का अर्धचालक प्राप्त होता है। बोरॉन में सिलिकॉन से एक इलेक्ट्रॉन कम होता है, जिससे एक 'होल' (छिद्र) उत्पन्न होता है, जो धारा प्रवाह में सहायक होता है।

26.

(अ) लैन्थेनॉयड आकुंचन किसे कहते हैं ?

लैन्थेनॉयड श्रेणी (Ce से Lu) में परमाणु क्रमांक बढ़ने पर परमाणु एवं आयनिक त्रिज्याओं में क्रमिक कमी को लैन्थेनॉयड आकुंचन कहते हैं। यह 4f-कक्षकों के खराब परिरक्षण प्रभाव के कारण होता है।

(ब) अंतराकाशी यौगिक किसे कहते हैं ? एक उदाहरण दीजिए।

अंतराकाशी यौगिक वे यौगिक होते हैं जिनमें छोटे परमाणु (जैसे H, B, C, N) संक्रमण धातुओं के क्रिस्टल जालक के रिक्त स्थानों (अंतराकाशी) में समाविष्ट हो जाते हैं। उदाहरण: टंगस्टन कार्बाइड (WC) या आयरन नाइट्राइड (Fe₃N)।

(स) M²⁺ (जलीय) आयन (Z = 29) के लिए 'प्रचक्रण मात्र' चुम्बकीय आघूर्ण की गणना कीजिए।

Z = 29 (Cu) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: [Ar] 3d¹⁰ 4s¹
Cu²⁺ (M²⁺) के लिए: [Ar] 3d⁹
अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या (n) = 1
प्रचक्रण मात्र चुम्बकीय आघूर्ण (μ) = √[n(n+2)] = √[1(1+2)] = √3 = 1.73 B.M.

27.

(अ) अस्वापक पीड़ाहारी किसे कहते हैं? एक उदाहरण लिखिए।

उत्तर: अस्वापक पीड़ाहारी (Non-narcotic analgesics) वे दर्दनाशक होते हैं जो नींद नहीं लाते और मस्तिष्क पर निरोधात्मक प्रभाव नहीं डालते। ये केवल दर्द को कम करते हैं। उदाहरण: एस्पिरिन (Aspirin) या पैरासिटामोल (Paracetamol)।

(ब) ठण्डे पेय एवं खाद्य पदार्थों में ही कृत्रिम मधुरक एस्पार्टम का उपयोग क्यों किया जाता है?

उत्तर: एस्पार्टम (Aspartame) एक कृत्रिम मधुरक है जो गर्म करने पर अपनी मिठास खो देता है और विघटित हो जाता है। इसलिए इसका उपयोग केवल ठण्डे पेय एवं खाद्य पदार्थों में किया जाता है, गर्म पदार्थों में नहीं।

(स) पूतिरोधी व रोगाणुनाशी में कोई एक अंतर लिखिए।

उत्तर: पूतिरोधी (Antiseptics) को शरीर के ऊतकों पर सुरक्षित रूप से लगाया जा सकता है (जैसे डेटॉल), जबकि रोगाणुनाशी (Disinfectants) का उपयोग केवल निर्जीव वस्तुओं (जैसे फर्श, उपकरण) पर किया जाता है क्योंकि ये शरीर के लिए हानिकारक होते हैं।


अथवा

(अ) ऋणायनी अपमार्जक किसे कहते हैं? एक उदाहरण लिखिए।

उत्तर: ऋणायनी अपमार्जक (Anionic detergents) वे अपमार्जक होते हैं जिनमें अपमार्जक अणु का बड़ा भाग ऋणावेशित (anion) होता है। उदाहरण: सोडियम लॉरिल सल्फेट (Sodium lauryl sulphate)।

(ब) खाद्य पदार्थों में रसायन क्यों मिलाये जाते हैं? कोई दो कारण लिखिए।

उत्तर: खाद्य पदार्थों में रसायन मिलाने के दो कारण:

  1. खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक खराब होने से बचाना (परिरक्षक के रूप में)।
  2. स्वाद, रंग या बनावट में सुधार करना (जैसे मधुरक, रंग, स्वाद बढ़ाने वाले)।

(स) विस्तृत स्पेक्ट्रम व संकीर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिजीवाणु में कोई एक अंतर लिखिए।

उत्तर: विस्तृत स्पेक्ट्रम प्रतिजीवाणु (Broad-spectrum antibiotics) अनेक प्रकार के जीवाणुओं (ग्राम-धनात्मक और ग्राम-ऋणात्मक दोनों) के विरुद्ध प्रभावी होते हैं (जैसे एम्पीसिलीन), जबकि संकीर्ण स्पेक्ट्रम प्रतिजीवाणु (Narrow-spectrum antibiotics) केवल एक विशिष्ट प्रकार के जीवाणु पर ही प्रभावी होते हैं (जैसे पेनिसिलीन)।


English Version

(a) What are non-narcotic analgesics? Write an example.

Answer: Non-narcotic analgesics are pain relievers that do not induce sleep and do not have a depressant effect on the brain. They only reduce pain. Example: Aspirin or Paracetamol.

(b) Why is artificial sweetening agent, Aspartame used only in soft drinks and cold foods?

Answer: Aspartame loses its sweetness and decomposes when heated. Therefore, it is used only in cold drinks and cold foods, not in hot foods.

(c) Write any one difference between antiseptics and disinfectants.

Answer: Antiseptics can be safely applied to living tissues (e.g., Dettol), whereas disinfectants are used only on non-living objects (e.g., floors, instruments) as they are harmful to the body.

प्रश्न 28

(अ) एन्जाइम उत्प्रेरण किसे कहते हैं? एक उदाहरण लिखिए।

एन्जाइम उत्प्रेरण वह प्रक्रिया है जिसमें एन्जाइम (जैविक उत्प्रेरक) रासायनिक अभिक्रिया की दर को बढ़ाते हैं, बिना स्वयं परिवर्तित हुए। यह जीवों में होने वाली जैव रासायनिक अभिक्रियाओं को तीव्र करता है।

उदाहरण: यूरेज एन्जाइम यूरिया को अमोनिया और कार्बन डाइऑक्साइड में विघटित करता है।

(ब) दूध किस प्रकार का इमल्शन है? समझाइए।

दूध तेल-में-जल (O/W) प्रकार का इमल्शन है। इसमें वसा की बूंदें (तेल) जल में फैली होती हैं। दूध में कैसिइन और लैक्टोज जैसे पदार्थ स्थायीकरण का कार्य करते हैं, जिससे वसा की बूंदें एकत्रित नहीं होतीं।

(स) वैद्युतकण संचलन को नामांकित चित्र सहित समझाइए।

वैद्युतकण संचलन (Electrophoresis) वह प्रक्रिया है जिसमें कोलॉइडी कण विद्युत क्षेत्र में अपने आवेश के अनुसार गति करते हैं। धनावेशित कण कैथोड की ओर और ऋणावेशित कण एनोड की ओर जाते हैं।

नामांकित चित्र:

      (+) एनोड ——— [कोलॉइडी कण] ——— कैथोड (-)
                (ऋणावेशित कण एनोड की ओर)
    

चित्र में: विद्युत क्षेत्र में कोलॉइडी कणों का विस्थापन दर्शाया गया है।


अथवा

(अ) उत्प्रेरक की वरणात्मकता किसे कहते हैं? उदाहरण लिखिए।

उत्प्रेरक की वरणात्मकता का अर्थ है कि एक विशेष उत्प्रेरक केवल एक विशिष्ट अभिक्रिया को तीव्र करता है, जबकि अन्य संभावित अभिक्रियाओं को प्रभावित नहीं करता।

उदाहरण: CO और H₂ के मिश्रण से मेथनॉल बनाने के लिए ZnO/Cr₂O₃ उत्प्रेरक का उपयोग किया जाता है, जबकि Ni उत्प्रेरक मीथेन बनाता है।

(ब) जलयोजित फेरिक ऑक्साइड एवं आर्सनियस सल्फाइड सॉल को मिश्रित करने पर क्या होता है?

जलयोजित फेरिक ऑक्साइड (Fe₂O₃·xH₂O) धनावेशित सॉल है, जबकि आर्सनियस सल्फाइड (As₂S₃) ऋणावेशित सॉल है। इन्हें मिश्रित करने पर परस्पर आवेश उदासीनीकरण के कारण स्कंदन (Coagulation) होता है, और दोनों सॉल अवक्षेपित हो जाते हैं।

(स) टिन्डल प्रभाव को नामांकित चित्र सहित समझाइए।

टिन्डल प्रभाव वह घटना है जिसमें कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन होता है, जिससे प्रकाश का मार्ग दिखाई देता है। यह कोलॉइडी विलयनों की पहचान का एक महत्वपूर्ण गुण है।

नामांकित चित्र:

      प्रकाश स्रोत → [कोलॉइडी विलयन] → प्रकीर्णित प्रकाश (दृश्य मार्ग)
    

चित्र में: प्रकाश किरण कोलॉइडी कणों से टकराकर प्रकीर्णित होती है, जिससे एक चमकीला मार्ग बनता है।


अंग्रेजी खंड

(a) What is anionic detergent? Write an example.

Anionic detergent is a synthetic detergent where the hydrophilic part of the molecule carries a negative charge (anion). It is effective in hard water and used for cleaning.

Example: Sodium lauryl sulfate (C₁₂H₂₅OSO₃Na).

(b) Why are chemicals added to food? Write any two reasons.

Chemicals are added to food for the following reasons:

  1. Preservation: To prevent spoilage by microorganisms (e.g., sodium benzoate).
  2. Enhancement of taste and appearance: To improve flavor, color, or texture (e.g., monosodium glutamate).

(c) Write any one difference between broad spectrum and narrow spectrum antibiotics.

Broad Spectrum Antibiotics Narrow Spectrum Antibiotics
Effective against a wide range of bacteria (both Gram-positive and Gram-negative). Effective against a specific group of bacteria (e.g., only Gram-positive).

29. (a) अधोलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए :

  1. यौगिक: CH ≡ C – CH₂ – OH
    IUPAC नाम: प्रोप-2-इन-1-ऑल (Prop-2-yn-1-ol)
  2. यौगिक: Hg | CH₃ – CH – CH₂ – OH
    (स्पष्टीकरण: यहाँ Hg संभवतः ग्लिसरॉल का संक्षिप्त रूप है, अर्थात CH₂OH–CHOH–CH₂OH)
    IUPAC नाम: प्रोपेन-1,2,3-ट्राइऑल (Propane-1,2,3-triol) [सामान्य नाम: ग्लिसरॉल]

(ब) निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए :

  1. फीनॉल की CS₂ की उपस्थिति में ब्रोमीन के साथ अभिक्रिया:

    फीनॉल + Br₂ (CS₂ में, कम ताप) → o-ब्रोमोफीनॉल + p-ब्रोमोफीनॉल + HBr

    समीकरण: C₆H₅OH + Br₂ (CS₂, 273 K) → o-BrC₆H₄OH + p-BrC₆H₄OH + HBr

  2. एथेनॉल को Cu की उपस्थिति में 573 K ताप पर गरम करने पर:

    एथेनॉल (C₂H₅OH) को Cu उत्प्रेरक की उपस्थिति में 573 K पर गर्म करने पर निर्जलीकरण होता है और एथीन (C₂H₄) बनता है।

    समीकरण: C₂H₅OH → (Cu, 573 K) → C₂H₄ + H₂O

अथवा

(अ) अधोलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए :

  1. यौगिक: CH₃ – O – CH – CH₃
    (स्पष्टीकरण: यह एक ईथर है, जहाँ O दो कार्बन समूहों से जुड़ा है)
    IUPAC नाम: 1-मेथॉक्सीएथेन (1-Methoxyethane) [सामान्य नाम: एथिल मिथाइल ईथर]
  2. यौगिक: CH₃ – CH – CH₂ – OH
    (स्पष्टीकरण: यह एक एल्कोहॉल है जिसमें मिथाइल समूह दूसरे कार्बन पर है)
    IUPAC नाम: 2-मिथाइलप्रोपेन-1-ऑल (2-Methylpropan-1-ol) [सामान्य नाम: आइसोब्यूटिल एल्कोहॉल]

प्रश्न (a): उत्प्रेरक की चयनात्मकता (Selectivity of catalyst) क्या है? उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तर: उत्प्रेरक की चयनात्मकता का अर्थ है कि एक ही अभिकारक से विभिन्न उत्प्रेरकों का उपयोग करके अलग-अलग उत्पाद प्राप्त किए जा सकते हैं।

उदाहरण: कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और हाइड्रोजन (H₂) से:

  • Cu उत्प्रेरक से मेथनॉल (CH₃OH) बनता है।
  • Ni उत्प्रेरक से मीथेन (CH₄) बनता है।

प्रश्न (b): जब हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड सॉल को आर्सेनियस सल्फाइड सॉल के साथ मिलाया जाता है तो क्या होता है?

उत्तर: हाइड्रेटेड फेरिक ऑक्साइड सॉल (Fe₂O₃·xH₂O) धनावेशित होता है, जबकि आर्सेनियस सल्फाइड सॉल (As₂S₃) ऋणावेशित होता है। इन्हें मिलाने पर विपरीत आवेशों के कारण परस्पर उदासीनीकरण होता है और सॉल का स्कंदन (coagulation) हो जाता है, जिससे अवक्षेप बनता है।

प्रश्न (c): टिंडल प्रभाव (Tyndall effect) को नामांकित चित्र सहित समझाइए।

उत्तर: टिंडल प्रभाव वह घटना है जिसमें कोलॉइडी कणों द्वारा प्रकाश का प्रकीर्णन (scattering) होता है, जिससे प्रकाश का मार्ग दिखाई देने लगता है।

नामांकित चित्र:

        प्रकाश स्रोत
            |
            v
    [लेंस] → संकेंद्रित प्रकाश किरण
            |
            v
    +-----------------------+
    |   कोलॉइडी विलयन      |
    |   (जैसे दूध या स्टार्च) |
    +-----------------------+
            |
            v
    प्रकीर्णित प्रकाश (दिखाई देने वाला मार्ग)
  

व्याख्या: जब प्रकाश की एक किरण कोलॉइडी विलयन से गुजरती है, तो कोलॉइडी कण (आकार 1-100 nm) प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं। यह प्रभाव कोलॉइडी विलयनों की पहचान के लिए उपयोग किया जाता है। उदाहरण: दूध में प्रकाश डालने पर प्रकाश का मार्ग दिखाई देना।

(ब) निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए :

  1. फीनॉल का HNO₃ के साथ
  2. फीनॉल का यशद रज के साथ

(a) Write IUPAC names of the following compounds :

  1. CH₃–CH=CH–CH₂–OH
  2. CH₂–CH–CH₂
    OH OH OH

(b) Write equations of the following chemical reactions :

  1. Phenol reacts with Br₂ in presence of CS₂
  2. Ethanol is heated at 573 K in presence of Cu

(1+1)+(1+1)=4


OR

(a) Write IUPAC names of the following compounds :

  1. CH₃–O–CH–CH₃
    CH₃
  2. CH₃–CH–CH₃
    CH₃

प्रश्न 30

(अ) निम्नलिखित रासायनिक अभिक्रियाओं के समीकरण लिखिए:

  1. फीनॉल का सांद्र HNO3 से अभिक्रिया
  2. फीनॉल का जिंक धूल से अभिक्रिया

(i) फीनॉल + सांद्र HNO3:

C6H5OH + 3HNO3 (सांद्र) → C6H2(NO2)3OH (पिक्रिक अम्ल) + 3H2O

(ii) फीनॉल + जिंक धूल:

C6H5OH + Zn → C6H6 (बेंजीन) + ZnO

(ब) रोजेनमुण्ड अपचयन पर टिप्पणी लिखिए।

रोजेनमुण्ड अपचयन: यह एक विशिष्ट अपचयन अभिक्रिया है जिसमें एसिड क्लोराइड को Pd/BaSO4 उत्प्रेरक की उपस्थिति में H2 गैस द्वारा अपचयित करके एल्डिहाइड प्राप्त किया जाता है। इस अभिक्रिया में उत्प्रेरक को आंशिक रूप से विषाक्त (poisoned) किया जाता है ताकि एल्डिहाइड का आगे अपचयन न हो सके।

सामान्य समीकरण: RCOCl + H2 → (Pd/BaSO4) → RCHO + HCl

(स) फ्लोरोऐसीटिक अम्ल, क्लोरोऐसीटिक अम्ल की तुलना में अधिक अम्लीय है। क्यों?

फ्लोरोऐसीटिक अम्ल (FCH2COOH) क्लोरोऐसीटिक अम्ल (ClCH2COOH) से अधिक अम्लीय होता है क्योंकि फ्लोरीन परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता (electronegativity) क्लोरीन से अधिक होती है। फ्लोरीन का प्रबल -I प्रभाव (प्रेरणिक प्रभाव) कार्बोक्सिल समूह के O-H बंध को अधिक ध्रुवीकृत करता है, जिससे H+ आयन का निष्कासन आसान हो जाता है। इस प्रकार, फ्लोरोऐसीटिक अम्ल अधिक प्रबल अम्ल है।

(द) कार्बोक्सिलेट आयन की अनुनादी संरचनाएँ बनाइए।

कार्बोक्सिलेट आयन (RCOO) की दो अनुनादी संरचनाएँ होती हैं:

संरचना 1: R—C(=O)—O (जहाँ ऋणावेश एक ऑक्सीजन पर स्थित है)

संरचना 2: R—C(O) = O (जहाँ ऋणावेश दूसरी ऑक्सीजन पर स्थित है)

ये दोनों संरचनाएँ अनुनाद के कारण समतुल्य होती हैं, जिससे कार्बोक्सिलेट आयन स्थायित्व प्राप्त करता है।


अथवा

(ब) वोल्फ-किश्नर अपचयन पर टिप्पणी लिखिए।

वोल्फ-किश्नर अपचयन: यह एक अपचयन अभिक्रिया है जिसमें कीटोन या एल्डिहाइड के कार्बोनिल समूह (C=O) को हाइड्राजीन (NH2NH2) और प्रबल क्षार (जैसे KOH) की उपस्थिति में अपचयित करके मेथिलीन समूह (CH2) में परिवर्तित किया जाता है।

सामान्य समीकरण: R2C=O + NH2NH2 → (KOH, Δ) → R2CH2 + N2 + H2O

(स) कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक लगभग समान अणुभार वाले ऐल्डिहाइडों तथा कीटोनों से उच्च होते हैं, क्यों?

कार्बोक्सिलिक अम्लों के क्वथनांक समान अणुभार वाले ऐल्डिहाइडों और कीटोनों से अधिक होते हैं क्योंकि कार्बोक्सिलिक अम्लों में प्रबल अंतराआण्विक हाइड्रोजन बंध (intermolecular hydrogen bonding) पाया जाता है। ये अम्ल द्वितय (dimer) बनाते हैं, जिससे अणुओं के बीच आकर्षण बल बढ़ जाता है और क्वथनांक उच्च हो जाता है। ऐल्डिहाइड और कीटोन में केवल दुर्बल द्विध्रुव-द्विध्रुव अंतःक्रिया होती है, जो कम प्रबल होती है।

(द) एथेनॉइक अम्ल की वाष्प प्रावस्था में बनने वाले द्वितय की संरचना बनाइए।

एथेनॉइक अम्ल (CH3COOH) वाष्प प्रावस्था में द्वितय (dimer) बनाता है, जिसमें दो अणु दो हाइड्रोजन बंधों द्वारा जुड़े होते हैं। संरचना निम्न प्रकार है:

CH3—C(=O)—O—H ··· O—C(=O)—CH3

जहाँ दो अणुओं के बीच दो हाइड्रोजन बंध (H···O) बनते हैं, जिससे एक चक्रीय संरचना (cyclic structure) प्राप्त होती है।

Chemistry (SS-41-2015) – Page 15

(a) Write a note on Wolff-Kishner reduction.

Solution: Wolff-Kishner reduction is a chemical reaction used to convert a carbonyl group (C=O) in aldehydes or ketones into a methylene group (CH₂). The reaction involves treating the carbonyl compound with hydrazine (NH₂NH₂) in the presence of a strong base like KOH or NaOH, typically in a high-boiling solvent such as ethylene glycol, under heat. The mechanism proceeds through the formation of a hydrazone intermediate, which then decomposes to release nitrogen gas and form the reduced hydrocarbon. This method is particularly useful for reducing carbonyl groups in compounds that are sensitive to acidic conditions, as it avoids the use of strong acids.

(b) Boiling point of carboxylic acids are higher than aldehydes and ketones of comparable molecular masses. Why?

Solution: Carboxylic acids have significantly higher boiling points than aldehydes and ketones of comparable molecular masses due to the presence of strong intermolecular hydrogen bonding. In carboxylic acids, the -COOH group can form dimers through two hydrogen bonds between the carbonyl oxygen and the hydroxyl hydrogen of two molecules. This dimerization effectively doubles the molecular weight and requires more energy to break these bonds during vaporization. In contrast, aldehydes and ketones only have dipole-dipole interactions and weaker hydrogen bonding (since they lack a hydrogen atom directly bonded to oxygen in the carbonyl group), resulting in lower boiling points.

(c) Draw the dimer structure of ethanoic acid in vapour state.

Solution: In the vapour state, ethanoic acid (acetic acid) forms a cyclic dimer through two intermolecular hydrogen bonds. The structure can be represented as:

        O---H---O
       //         \\
    CH₃-C         C-CH₃
       \\         //
        O---H---O
        

Here, two ethanoic acid molecules are linked by two hydrogen bonds between the carbonyl oxygen of one molecule and the hydroxyl hydrogen of the other, forming a stable eight-membered ring. This dimerization is responsible for the high boiling point of ethanoic acid.

SS—41—Chem. SS-604