RBSE Class 12th 2015 Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 Previous Year Papers

Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 from the 2015 exam year is part of the Class 12th previous year papers archive on RBSE Solution. Many learners start here after finishing the textbook to see how questions were actually framed on the Rajasthan Board of Secondary Education (RBSE) paper.

Treat this question paper as a mock under gentle timing first, then as a marking exercise the second time. The introduction on this page is written only for this subject-and-year pair, not copied from other pages.

Bookmark the link if you coach juniors — the layout stays stable for search engines and classroom sharing.

Paper details

Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.

Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2015
Subject Hindi (Compulsory)-SS-01-2015
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2015, and subject Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 before studying.

RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.

Turning 2015 papers into insight

One Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 paper reveals style; several from the same year reveal pattern. After this page, open sibling subjects listed below to see whether marks cluster in certain units.

Keep rough work dated in your notebook. Examiners in Class 12th expect clear numbering even in practice sessions.

RBSE Class 12th 2015 Hindi (Compulsory)-SS-01-2015

Scroll through the Previous Year Papers pages for Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 (2015).

RBSE Class 12th 2015 Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 Previous Year Papers 0
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 Previous Year Papers 1
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 Previous Year Papers 2
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 Previous Year Papers 3
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 Previous Year Papers 4
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 Previous Year Papers 5
https://rbsesolution.com
RBSE Class 12th 2015 Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 Previous Year Papers 6
https://rbsesolution.com

Rajasthan Board Class 12th Hindi (Compulsory)-SS-01-2015 2015 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015

हिन्दी (अनिवार्य)

समय : 3 घण्टे 15 मिनट    पूर्णांक : 80


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश:

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्द-सीमा में लिखें।
  4. जिस प्रश्न के आ, ब, स, द भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।

प्रश्न पत्र कोड : SS—01—Hindi (C)

प्रश्नों की संख्या : 15    मुद्रित पृष्ठ : 7

नामांक (Roll No.) : ____________________


SS—01—Hindi (C)   [ Turn over ]

खण्ड - a

1. निम्नांकित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

मनमोहिनी प्रकृति की जो गोद में बसा
सुख स्वर्ग-सा जहाँ है, वह देश कौन-सा है?
सींचा हुआ सलोना, वह देश कौन-सा है?
सब अंग में सजे हैं, वह देश कौन-सा है?
जिसमें सुगन्ध वाले, सुन्दर प्रसून प्यारे,
आनन्दमय जहाँ है, वह देश कौन-सा है?
जिसका चरण निरन्तर रत्नेश धो रहा है,
जिसका मुकुट हिमालय, वह देश कौन-सा है?
नदियाँ जहाँ सुधा की धारा बहा रही हैं,
जिसके बड़े रसीले, फल, अन्न, नाज, मेवे,
दिन-रात हँस रहे हैं, वह देश कौन-सा है?
मैदान, गिरि, वनों में हरियालियाँ लहकतीं,
जिसकी अनन्त धन से, धरती भरी पड़ी है,
संसार का शिरोमणि, वह देश कौन-सा है?

(अ) भारत का मुकुट किसे कहा गया है?

कवि ने हिमालय को भारत का मुकुट कहा है। काव्यांश में 'जिसका मुकुट हिमालय' पंक्ति से स्पष्ट है कि हिमालय भारत के सिर पर सुशोभित मुकुट के समान है।

(ब) कवि ने भारतवर्ष की कौन-सी विशेषताएँ बतायी हैं?

कवि ने भारतवर्ष की अनेक विशेषताएँ बताई हैं - यह प्रकृति की गोद में बसा है, यहाँ सुख स्वर्ग-सा है, यहाँ सुगंधित फूल, रसीले फल-अन्न, मेवे हैं, नदियाँ अमृत धारा बहाती हैं, हरियाली लहकती है, और हिमालय इसका मुकुट है।

(स) 'सींचा हुआ सलोना' से क्या तात्पर्य है?

'सींचा हुआ सलोना' का तात्पर्य है कि भारत भूमि सिंचित एवं उपजाऊ है। यहाँ की धरती को नदियों के जल से सींचा गया है, जिससे यह सुंदर, हरी-भरी और मनोहर बनी हुई है।

(द) भारत देश को संसार का शिरोमणि क्यों कहा गया है?

भारत देश को संसार का शिरोमणि इसलिए कहा गया है क्योंकि यह प्राकृतिक सौंदर्य, अनंत धन-संपदा, उपजाऊ भूमि, ऊँचे पर्वतों और पवित्र नदियों से परिपूर्ण है। यह सभी देशों में सर्वश्रेष्ठ एवं गौरवशाली है।


2. निम्नांकित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

देश की सर्वांगीण उन्नति एवं विकास के लिए देशवासियों में स्वदेश-प्रेम का होना परमावश्यक है। जिस देश के नागरिकों में देशहित एवं राष्ट्र-कल्याण की भावना रहती है, वह देश उन्नतिशील होता है। देशप्रेम के पूत-भाव से मण्डित व्यक्ति देशवासियों की हित-साधना में, देशोद्धार में तथा राष्ट्रीय प्रगति में अपना जीवन तक समर्पित कर देता है। हम अपने देश के इतिहास पर दृष्टिपात करें, तो ऐसे देशभक्तों की लम्बी परम्परा मिलती है, जिन्होंने अपना सर्वस्व समर्पण करके स्वदेश-प्रेम का अद्भुत परिचय दिया है। महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी, सरदार भगत सिंह, महारानी लक्ष्मीबाई, लोकमान्य तिलक, महात्मा गाँधी आदि सहस्रों देश-भक्तों के नाम इस दृष्टि से लिए जाते हैं। हमें अपने देश के इतिहास से देश-प्रेम की एक गौरवपूर्ण परम्परा मिलती है और इससे हम देश हितार्थ सर्वस्व न्यौछावर करने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं।

(अ) लेखक के अनुसार कौन-सा देश उन्नतिशील होता है?

लेखक के अनुसार वह देश उन्नतिशील होता है जिसके नागरिकों में देशहित एवं राष्ट्र-कल्याण की भावना रहती है। ऐसे नागरिक देश की सर्वांगीण उन्नति और विकास में योगदान देते हैं।

(ब) "हमें अपने देश के इतिहास से देशप्रेम की एक गौरवपूर्ण परम्परा मिलती है और इससे हम देशहितार्थ सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं" - यह किस प्रकार का वाक्य है, बताते हुए परिभाषा भी लिखें।

यह एक संयुक्त वाक्य है। संयुक्त वाक्य वह होता है जिसमें दो या दो से अधिक स्वतंत्र उपवाक्य किसी समुच्चयबोधक अव्यय (जैसे - और, इसलिए, परंतु आदि) से जुड़े होते हैं। यहाँ 'और' समुच्चयबोधक से दो उपवाक्य जुड़े हैं।

(स) "स्वदेश" शब्द में मूल शब्द व उपसर्ग बताइए।

स्वदेश शब्द में 'सु' उपसर्ग और 'देश' मूल शब्द है। 'सु' उपसर्ग का अर्थ 'अच्छा' या 'अपना' होता है। इस प्रकार स्वदेश का अर्थ 'अपना देश' होता है।

(द) अपठित गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।

गद्यांश का उचित शीर्षक "देशप्रेम का महत्व" या "स्वदेश-प्रेम की गौरवपूर्ण परम्परा" हो सकता है।

खण्ड - ख

प्रश्न 3. निम्न विषयों में से किसी एक पर लगभग 450 शब्दों में सारगर्भित निबन्ध लिखिए :

  1. (क) आजादी के 67 वर्ष : क्या खोया, क्या पाया
  2. (ख) बढ़ते संचार के साधन : सिमटता संसार
  3. (ग) मेरा प्रिय खिलाड़ी
  4. (घ) राजस्थानी लोकगीतों की वह प्रतियोगिता
  5. (ङ) अनुशासन का महत्त्व

प्रश्न 4. आपके शहर में स्वच्छता जागरूकता अभियान अथवा आपके विद्यालय में आयोजित ‘हिन्दी-दिवस' पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताएँ विषय पर समाचार पत्र में प्रेषित करने हेतु एक प्रतिवेदन लिखिए। (उत्तर-सीमा 100 शब्द)

प्रश्न 5. विविध माध्यमों के लिए लेखन-स्वरूप, प्रकार और प्रक्रिया से संदर्भित निम्नांकित प्रश्नों में से कोई एक प्रश्न का हल कीजिए : (उत्तर-सीमा 80 से 100 शब्द)

  1. रेडियो और टेलीविजन समाचार की भाषा और शैली की विशेषताएँ लिखिए।
  2. “फीचर” क्या है ? बताते हुए फीचर एवं समाचार में कोई तीन अन्तर लिखिए।
  3. ‘सम्पादकीय’ एवं ‘लेख’ की समानता बताने वाले तत्त्वों का उल्लेख कीजिए।

प्रश्न 6. निम्नांकित विषयों में से किसी एक पर आलेख लिखिए : (उत्तर-सीमा 80 से 100 शब्द)

  1. भ्रष्टाचार
  2. मोबाइल फोन : वरदान या अभिशाप
  3. खाद्य पदार्थों में मिलावट : एक चुनौती

प्रश्न 7. निम्नांकित विषयों में से किसी एक विषय पर फीचर लिखिए :

  1. फिल्म-जगत की शान : अमिताभ बच्चन
  2. रेल दुर्घटना
  3. विद्यालय का खेल-मैदान

पठित काव्यांश पर आधारित प्रश्न

पहला काव्यांश (हरिवंशराय बच्चन)

दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !
हो जाए न पथ में रात कहीं,
मंजिल भी तो है दूर नहीं --
यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है !
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !
बचे प्रत्याशा में होंगे,
नीड़ों से झाँक रहे होंगे --
यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है !
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !
मुझ से मिलने को कौन विकल ?
मैं होऊँ किसके हित चंचल ?
यह प्रश्न शिथिल करता पद को, भरता उर में विहलता है !
दिन जल्दी-जल्दी ढलता है !
  1. (अ) पथिक क्या सोच कर जल्दी-जल्दी चलता है ? (2 अंक)

    पथिक यह सोचकर जल्दी-जल्दी चलता है कि कहीं रास्ते में रात न हो जाए और मंजिल भी दूर नहीं है। वह थका हुआ है, फिर भी समय से पहले मंजिल पर पहुँचने की जल्दी में है।
  2. (ब) “यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है ।” उक्त पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए । (2 अंक)

    इस पंक्ति का आशय है कि चिड़ियों के बच्चे घोंसलों से झाँक रहे हैं और अपने माता-पिता की प्रतीक्षा कर रहे हैं। यह ध्यान चिड़ियों के पंखों में चंचलता भर देता है, अर्थात वे अपने बच्चों के लिए भोजन लेने जल्दी-जल्दी उड़ती हैं।
  3. (स) कवि हरिवंशराय बच्चन के उर में किस बात की विहलता है ? (2 अंक)

    कवि के मन में यह विहलता है कि उनसे मिलने के लिए कोई विकल नहीं है और वे किसी के हित में चंचल नहीं हैं। यह प्रश्न उनके पैरों को शिथिल करता है और हृदय में व्याकुलता भरता है।
  4. (द) बचे नीड़ों में से क्यों झाँक रहे होंगे ? लिखिए । (2 अंक)

    बच्चे (चिड़ियों के) नीड़ों (घोंसलों) से इसलिए झाँक रहे होंगे क्योंकि वे अपने माता-पिता की प्रतीक्षा में हैं। वे भूखे हैं और आशा कर रहे हैं कि उनके माता-पिता उनके लिए भोजन लेकर आएँगे।

दूसरा काव्यांश (तुलसीदास) – अथवा

किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट,
चाकर, चपल नट, चोर, चार, चेटकी ।
पेट को पढ़त, गुन गढ़त, चढ़त गिरि,
अटत गहन-गन अहन अखेटकी ॥
ऊँचे-नीचे करम, धरम-अधरम करि,
पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी ।
“तुलसी” बुझाइ एक राम घनस्याम ही तें,
आगि बढ़वागितें बड़ी है आगि पेट की ॥
  1. (अ) तुलसी के अनुसार बड़वाग्नि से बड़ी आग कौन-सी है तथा इसका शमन कैसे किया जा सकता है ? (2 अंक)

    तुलसीदास के अनुसार बड़वाग्नि (समुद्र की आग) से भी बड़ी आग पेट की आग (भूख) है। इसका शमन केवल भगवान राम (घनश्याम) की कृपा से ही किया जा सकता है, अर्थात ईश्वर की शरण में जाकर ही भूख की पीड़ा से मुक्ति मिल सकती है।
  2. (ब) लोगों को पेट भरने के लिए कौन-कौन से कार्य करने पड़ते हैं ? (2 अंक)

    लोगों को पेट भरने के लिए अनेक प्रकार के कार्य करने पड़ते हैं – कारीगरी, खेती, व्यापार, भीख माँगना, भाटगीरी, नौकरी, नट का काम, चोरी, जासूसी, चेटकी (जादूगरी) आदि। वे पढ़ते हैं, गुण सीखते हैं, पहाड़ चढ़ते हैं और जंगलों में भटकते हैं।
  3. (स) “पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी” – तुलसीदास ने इस पंक्ति में समाज की किस विवशता को उजागर किया है ? कारण भी लिखिए । (2 अंक)

    इस पंक्ति में तुलसीदास ने समाज की उस विवशता को उजागर किया है जहाँ लोग भूख से बचने के लिए अपने बेटे-बेटियों तक को बेचने पर मजबूर हो जाते हैं। इसका कारण अत्यधिक गरीबी और भूख की पीड़ा है, जो मनुष्य को नैतिकता और मानवता के सभी बंधनों से मुक्त कर देती है।
  4. (द) “तुलसी बुझाइ एक राम घनस्याम ही तें” पंक्ति का आशय समझाइए । (2 अंक)

    इस पंक्ति का आशय है कि तुलसीदास के अनुसार पेट की आग (भूख) को केवल भगवान राम (घनश्याम) की शरण में जाकर ही शांत किया जा सकता है। अर्थात ईश्वर की भक्ति और कृपा से ही मनुष्य भूख और गरीबी की पीड़ा से मुक्त हो सकता है।

प्रश्न 9

निम्नांकित पठित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

कविता एक खेल है बच्चों के बहाने, बाहर-भीतर
यह घर, वह घर, सब घर एक कर देने के माने
बच्चा ही जाने ।

(अ) उपर्युक्त पंक्तियों में कवि द्वारा वर्णित भावों को समझाइए।

इन पंक्तियों में कवि कहता है कि कविता बच्चों के खेल के समान है। जैसे बच्चे खेल-खेल में घर-बाहर की सीमाएँ मिटा देते हैं, वैसे ही कविता भी मनुष्य के भीतर और बाहर के भेद को समाप्त कर सबको एक कर देती है। यह भाव केवल एक बच्चा ही समझ सकता है।

(ब) उपर्युक्त काव्यांश की शिल्पगत विशेषताएँ बताइए।

इस काव्यांश की शिल्पगत विशेषताएँ हैं: (1) सरल और सहज भाषा का प्रयोग, (2) लयात्मकता और छंद का अभाव (मुक्त छंद), (3) बिंबात्मकता – 'बच्चों के बहाने', 'घर' जैसे शब्दों से भाव चित्रित होते हैं, (4) व्यंजना शक्ति का प्रयोग – 'सब घर एक कर देने' में गहरा अर्थ छिपा है।


अथवा

ममता के बादल की मँडराती कोमलता --
भीतर पिराती है,
कमजोर और अक्षम अब हो गई है आत्मा यह,
छटपटाती छाती को भवितव्यता डराती है,
बहलाती, सहलाती, आत्मीयता बरदाश्त नहीं होती है ।

(अ) उपर्युक्त पंक्तियों में कवि द्वारा वर्णित भावों को समझाइए।

इन पंक्तियों में कवि ममता की कोमलता को बादल की मँडराती छाया के समान बताता है जो भीतर पीड़ा देती है। आत्मा कमजोर हो गई है और भविष्य का भय छाती को डराता है। आत्मीयता का स्नेह सहन नहीं होता, क्योंकि वह बहलाने और सहलाने के बावजूद पीड़ा देता है।

(ब) उपर्युक्त काव्यांश के शिल्प-सौन्दर्य को लिखिए।

इस काव्यांश के शिल्प-सौन्दर्य की विशेषताएँ हैं: (1) प्रतीकात्मकता – 'ममता के बादल' में ममता को बादल के रूप में चित्रित किया गया है, (2) अनुप्रास अलंकार – 'मँडराती', 'पिराती', 'डराती' में 'र' और 'त' ध्वनियों की पुनरावृत्ति, (3) भाव-व्यंजना – गहरे मनोभावों को सहज शब्दों में व्यक्त किया गया है, (4) लयात्मकता – पंक्तियों में एक विशेष लय है।


प्रश्न 10

पठित कविताओं की विषय-वस्तु से सम्बन्धित दिए गए तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 30 शब्द है)

(अ) “हम समर्थ शक्तिवान, हम एक दुर्बल को लाएँगे, एक बंद कमरे में” “कैमरे में बंद अपाहिज” कविता की प्रस्तुत पंक्ति में कवि का कौन-सा भाव व्यंजित हुआ है?

इन पंक्तियों में कवि का व्यंग्यात्मक भाव व्यंजित हुआ है। वह समाज के तथाकथित शक्तिशाली लोगों पर कटाक्ष करता है जो दुर्बल व्यक्ति को एक बंद कमरे में कैद करके अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहते हैं, जो वास्तव में क्रूरता है।

(ब) “जादू टूटता है इस उषा का अब सूर्योदय हो रहा है” 'उषा' कविता की प्रस्तुत पंक्ति में 'जादू टूटता है' का आशय स्पष्ट कीजिए।

'जादू टूटता है' का आशय है कि रात्रि का मोहक और रहस्यमयी वातावरण समाप्त हो रहा है। उषा के आगमन के साथ ही अंधकार का जादू टूट जाता है और सूर्योदय होने लगता है, जो नई शुरुआत का प्रतीक है।

(स) “हम हों या किस्मत हो हमारी दोनों को इक ही काम मिला
किस्मत हमको रो लेवे है हम किस्मत को रो ले हैं”
फ़िराक गोरखपुरी की इन पंक्तियों के भाव को स्पष्ट कीजिए।

इन पंक्तियों में कवि कहता है कि मनुष्य और उसकी किस्मत दोनों का काम एक ही है – एक-दूसरे को रुलाना। किस्मत मनुष्य को रुलाती है और मनुष्य भी अपनी किस्मत को रोता है। यह जीवन की विडंबना और दुखद स्थिति को दर्शाता है।

निम्नांकित पठित गद्यांश को पढ़ कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 40 शब्द है)

शहरों की तुलना में गाँव में और भी हालत खराब होती थी। जहाँ जुताई होनी चाहिए वहाँ खेतों की मिट्टी सूख कर पत्थर हो जाती, फिर उसमें पपड़ी पड़ कर जमीन फटने लगती, लू ऐसी कि चलते-चलते आदमी आधे रास्ते में लू खाकर गिर पड़े। ढोर-ढंगर प्यास के मारे मरने लगते हैं लेकिन बारिश का कहीं नामनिशान नहीं, ऐसे में पूजा-पाठ, कथा-विधान सब करके लोग जब हार जाते तब अंतिम उपाय के रूप में निकलती यह इंदरसेना। वर्षा के बादलों के स्वामी हैं इंद्र और इंद्र की सेना टोली बाँध कर कीचड़ में लथपथ निकलती, पुकारते हुए मेघों को, पानी माँगते हुए प्यासे गलों और सूखे खेतों के लिए। पानी की आशा पर जैसे सारा जीवन आकर टिक गया हो। बस एक बात मेरे समझ में नहीं आती थी कि जब चारों ओर पानी की इतनी कमी है तो लोग घर में इतनी कठिनाई से इकट्ठा करके रखा हुआ पानी बाल्टी भर-भर कर इन पर क्यों फेंकते हैं। कैसी निर्मम बरबादी है पानी की।

(अ) बारिश नहीं होने पर गाँव की हालत कैसी होती थी?

बारिश न होने पर गाँव की हालत बहुत खराब होती थी। खेतों की मिट्टी सूखकर पत्थर जैसी हो जाती, जमीन फटने लगती और लू चलती थी। पशु प्यास से मरने लगते थे और लोग लू लगने से गिर पड़ते थे।

(ब) गाँव में बारिश होने के लिए अंतिम उपाय कौन-सा किया जाता था?

गाँव में बारिश के लिए अंतिम उपाय 'इंदरसेना' निकालना होता था। लोग टोली बनाकर कीचड़ में लथपथ होकर इंद्र को पुकारते हुए निकलते थे और पानी माँगते थे। इस दौरान लोग उन पर बाल्टी भर-भर कर पानी फेंकते थे।

(स) “कैसी निर्मम बरबादी है पानी की।” लेखक ने किस संदर्भ में यह बात कही है? लिखिए।

लेखक ने यह बात इंदरसेना के संदर्भ में कही है। जब चारों ओर पानी की भारी कमी थी, तब लोग घर में कठिनाई से इकट्ठा किया हुआ पानी बाल्टी भर-भर कर इंदरसेना पर फेंकते थे। लेखक को यह पानी की निर्मम बरबादी लगती थी।


अथवा

किंतु, रात में फिर पहलवान की ढोलक की आवाज प्रतिदिन की भाँति सुनाई पड़ी। लोगों की हिम्मत दुगुनी बढ़ गई। संतप्त पिता-माताओं ने कहा, -- "दोनों पहलवान बेटे मर गए पर पहलवान की हिम्मत तो देखो, डेढ़ हाथ का कलेजा है!" चार-पाँच दिनों के बाद एक रात को ढोलक की आवाज सुनाई नहीं पड़ी। ढोलक नहीं बोली। पहलवान के कुछ दिलेर, किन्तु रुग्ण शिष्यों ने प्रातःकाल जाकर देखा -- पहलवान की लाश पड़ी है। आँसू पोंछते हुए एक ने कहा, -- "गुरु जी कहा करते थे कि जब मैं मरूँ तो चिता पर मुझे चित नहीं, पेट के बल सुलाना। मैं जिन्दगी में कभी 'पीठ' नहीं हुआ और चिता सुलगाने के समय ढोलक बजा देना।"

(अ) “डेढ़ हाथ का कलेजा” का आशय स्पष्ट कीजिए।

'डेढ़ हाथ का कलेजा' का आशय है बहुत बड़ा साहस और हिम्मत। यह कहावत उस व्यक्ति के लिए प्रयोग की जाती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस नहीं खोता। यहाँ लोग पहलवान के साहस की प्रशंसा कर रहे हैं।

(ब) “मैं जिन्दगी में कभी 'पीठ' नहीं हुआ।” प्रस्तुत कथन से लुट्टन सिंह पहलवान का कौन-सा भाव प्रकट होता है?

इस कथन से लुट्टन सिंह पहलवान का अदम्य साहस और हार न मानने का भाव प्रकट होता है। वह जीवन में कभी पीठ नहीं दिखाते थे, अर्थात वह कभी पराजित नहीं हुए। वह हमेशा सीना तानकर मुकाबला करते थे और कभी पीठ नहीं दिखाते थे।

(स) मरने से पूर्व पहलवान ने अपने शिष्यों के सामने अपने कौन-से विचार प्रकट किये?

मरने से पूर्व पहलवान ने अपने शिष्यों से कहा था कि जब वह मरें तो उन्हें चिता पर चित नहीं, बल्कि पेट के बल सुलाएँ, क्योंकि वह जीवन में कभी पीठ नहीं हुए। साथ ही, चिता सुलगाने के समय ढोलक बजाने का भी निर्देश दिया था।

खण्ड - क

2. पठित गद्य विषय-वस्तु पर आधारित निम्नलिखित चार प्रश्नों में से तीन के उत्तर दीजिए : 3×3=9

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द है)

(अ) “प्रकृति ने महादेवी वर्मा को अधिक देहाती बना दिया किन्तु स्वयं शहर की हवा से दूर रही।” इस वाक्य की सत्यता सिद्ध कीजिए।

यह कथन सत्य है क्योंकि महादेवी वर्मा का जीवन प्रकृति के निकट रहा। वे प्रकृति के बीच रहकर सादगीपूर्ण जीवन जीती थीं, जिससे वे देहाती लगती थीं। लेकिन उनकी रचनाओं में शहरी सभ्यता की आलोचना और प्रकृति के प्रति प्रेम झलकता है। वे स्वयं शहर की कृत्रिमता से दूर रहीं, जबकि उनकी कविताएँ शहरी पाठकों को भी प्रभावित करती थीं।

(ब) “बाज़ार-दर्शन” निबन्ध के आधार पर “बाज़ार के जादू” को स्पष्ट करते हुए इससे बचने के उपाय लिखिए।

बाज़ार का जादू उसकी चमक-दमक, विज्ञापनों और आकर्षक वस्तुओं से मोहित करने की क्षमता है। यह व्यक्ति को अनावश्यक वस्तुएँ खरीदने के लिए प्रेरित करता है। इससे बचने के उपाय हैं: आवश्यकता और इच्छा में अंतर समझना, बजट बनाना, विज्ञापनों के प्रभाव में न आना, और संयमित जीवन जीना।

(स) “हाय, वह अवधूत आज कहाँ है!” “शिरीष के फूल” निबंध के आधार पर बताइए कि उपर्युक्त वाक्य किसके लिए व क्यों कहा गया है।

यह वाक्य शिरीष के फूल के लिए कहा गया है। लेखक हजारीप्रसाद द्विवेदी ने शिरीष के फूल को अवधूत (संन्यासी) कहा है क्योंकि यह फूल बिना किसी मोह के, स्वच्छ और निर्लिप्त रहता है। यह संसार के मोह-माया से दूर रहता है, इसलिए लेखक को उसकी याद आती है।

(द) “आर्थिक पहलू से भी जाति प्रथा हानिकारक प्रथा है।” क्या आप इस दृष्टिकोण से सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।

हाँ, मैं इस दृष्टिकोण से सहमत हूँ। जाति प्रथा आर्थिक रूप से हानिकारक है क्योंकि यह व्यवसायों को जन्म पर आधारित करती है, जिससे प्रतिभा और क्षमता का विकास अवरुद्ध होता है। यह आर्थिक असमानता को बढ़ावा देती है, निचली जातियों को उच्च आय वाले व्यवसायों से वंचित करती है, और समाज में संसाधनों का असमान वितरण करती है।

खण्ड - ख

3. पाठों की विषय-वस्तु पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से दो के उत्तर दीजिए : 2×3=6

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द है)

(अ) “सिल्वर वैडिंग” कहानी का कथानक आधुनिक पाश्चात्य संस्कृति के अन्धानुकरण एवं बदलते मानवीय मूल्यों पर आधारित है। इस कथन की सोदाहरण विवेचना कीजिए।

यह कथन सत्य है। कहानी में यशोधर बाबू अपने बच्चों की पाश्चात्य संस्कृति के अन्धानुकरण से दुखी हैं। उदाहरण के लिए, उनके बेटे-बहू सिल्वर वैडिंग समारोह में पश्चिमी शैली अपनाते हैं, जिसमें पारिवारिक मूल्यों की उपेक्षा होती है। बच्चे माता-पिता को सम्मान नहीं देते, जो बदलते मानवीय मूल्यों को दर्शाता है।

(ब) वसंत पाटिल से दोस्ती होने के बाद लेखक के व्यवहार में कौन-से परिवर्तन हुए?

वसंत पाटिल से दोस्ती के बाद लेखक के व्यवहार में कई परिवर्तन हुए। वह अधिक मिलनसार और खुशमिजाज हो गया। उसने गाँव की संस्कृति और परंपराओं को समझना शुरू किया। वह पहले की तुलना में अधिक साहसी और आत्मनिर्भर बना, और गाँव के लोगों से जुड़ाव महसूस करने लगा।

(स) मुअनजो-दड़ो के प्रसिद्ध पुराने बौद्ध-स्तूप की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

मुअनजो-दड़ो का बौद्ध-स्तूप प्राचीन सभ्यता का अद्भुत नमूना है। इसकी विशेषताएँ हैं: यह ईंटों से निर्मित है, इसका आकार गोलाकार है, और इसके चारों ओर सीढ़ियाँ हैं। यह स्तूप धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयोग होता था। इसकी वास्तुकला उस समय की उन्नत तकनीक को दर्शाती है।

4. निम्नलिखित प्रश्नों में से दो का उत्तर दीजिए : 2×1½=3

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 30 शब्द है)

(अ) कविता के प्रति लगाव बढ़ने के बाद लेखक को अकेलापन क्यों अच्छा लगने लगा?

कविता के प्रति लगाव बढ़ने पर लेखक को अकेलापन अच्छा लगने लगा क्योंकि वह एकांत में कविता की रचना और चिंतन में डूब सकता था, जिससे उसे आत्मिक शांति मिलती थी।

(ब) मुअनजो-दड़ो का अर्थ बताते हुए इसके बारे में जो धारणा व्यक्त की गई है उसे बताइए।

मुअनजो-दड़ो का अर्थ है “मृतकों का टीला”। इसके बारे में धारणा है कि यह सिंधु घाटी सभ्यता का एक प्रमुख नगर था, जो लगभग 2500 ईसा पूर्व बसा था और बाढ़ या आक्रमण से नष्ट हुआ।

(स) “मौत के खिलाफ मनुष्य” नामक किताब में 'ऐन' ने औरतों की स्थिति के बारे में जो पढ़ा उसे लिखिए।

ऐन ने पढ़ा कि औरतों को शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक अवसरों में असमानता का सामना करना पड़ता है। उन्हें समाज में कम अधिकार मिलते हैं और वे पुरुषों की तुलना में अधिक शोषित होती हैं।

5. विषय-वस्तु पर आधारित दिए गए दो प्रश्नों में से किसी एक निबन्धात्मक प्रश्न का उत्तर दीजिए : 1×3=8

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द है)

(अ) “वह खुशहाली भी कैसी जो अपनों में परायापन पैदा करे।” यशोधर बाबू की इस सोच के कौन से कारण थे? लिखिए।

यशोधर बाबू की इस सोच के कारण थे: उनके बच्चे पाश्चात्य संस्कृति के अन्धानुकरण में पारिवारिक मूल्यों को भूल गए थे। वे माता-पिता को सम्मान नहीं देते थे और उनकी भावनाओं की उपेक्षा करते थे। आर्थिक समृद्धि के बावजूद परिवार में दूरियाँ बढ़ गई थीं, जिससे यशोधर बाबू को लगता था कि यह खुशहाली नकली है।

(ब) “डायरी के पन्ने” पाठ के आधार पर 'ऐन' के प्रकृति प्रेम का वर्णन कीजिए।

ऐन का प्रकृति प्रेम उसकी डायरी में स्पष्ट झलकता है। वह पेड़-पौधों, फूलों और पक्षियों से गहरा लगाव रखती थी। वह प्रकृति की सुंदरता में आत्मिक शांति पाती थी और युद्ध के समय भी प्रकृति के बीच समय बिताना पसंद करती थी। वह प्रकृति को जीवन का स्रोत मानती थी।