RBSE Class 12th 2015 Hindi Sahitya-SS-21-2015 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2015 |
| Subject | Hindi Sahitya-SS-21-2015 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2015 Hindi Sahitya-SS-21-2015
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Rajasthan Board Class 12th Hindi Sahitya-SS-21-2015 2015 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015
हिन्दी साहित्य
समय : 3 घंटे 15 मिनट पूर्णांक : 80
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आंतरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- उत्तर यथासम्भव निर्धारित शब्द-सीमा में ही सुपाठ्य लिखें।
प्रश्नों की संख्या : 3 SS-2—Hindi Sah.
मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 7
रोल नंबर : _______________
SS-602 [ Turn over ]
गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द)
दक्षिणा माँग ली अनाधिकार
अंगुष्ठ माँगने का विचार,
वैसे तो पाप कर्म ही था
पर सोचो तो मैं क्या करता,
उन्नीस उसे करना ही था
लेकर कलंक मरना ही था,अंगुष्ठ दक्षिणा में लेकर
बदले में कुछ शिक्षा देकरकहने को है सन्तोष मुझे
पर यह कृत्रिम परितोष मुझेजन्मों-जन्मों तड़पायेगा
नरकों-नरकों घुमवायेगा,
पर मेरी मजबूरी क्या थी
यह कोई समझ न पायेगा |
-
(क) कविता का शीर्षक लिखिए ।
उत्तर: कविता का शीर्षक "एक संतोष" है। यह द्रोणाचार्य की मानसिक व्यथा को दर्शाता है।
-
(ख) “अंगुष्ठ” शब्द का अर्थ लिखिए ।
उत्तर: "अंगुष्ठ" शब्द का अर्थ अंगूठा (पैर का अंगूठा) है। यहाँ यह एकलव्य के दाहिने हाथ के अंगूठे को संदर्भित करता है।
-
(ग) द्रोणाचार्य ने क्या पाप कर्म किया ?
उत्तर: द्रोणाचार्य ने एकलव्य से उसके दाहिने हाथ का अंगूठा दक्षिणा के रूप में माँग लिया। यह पाप कर्म था क्योंकि इससे एकलव्य का धनुर्विद्या का अभ्यास समाप्त हो गया और वह अर्जुन के लिए खतरा नहीं रहा।
-
(घ) द्रोणाचार्य ने संतोष का अनुभव क्यों किया ?
उत्तर: द्रोणाचार्य ने कृत्रिम संतोष का अनुभव किया क्योंकि उन्होंने एकलव्य से अंगूठा लेकर अर्जुन को श्रेष्ठ धनुर्धर बनाए रखने का अपना वचन पूरा किया। लेकिन यह संतोष सच्चा नहीं था, बल्कि अपने कर्तव्य के निर्वाह का बहाना था।
-
(ड) "जन्मों-जन्मों तड़पायेगा, नरकों-नरकों घुमवायेगा" — इन पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है व कैसे ?
उत्तर: इन पंक्तियों में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। इसमें "जन्मों-जन्मों" और "नरकों-नरकों" शब्दों की पुनरावृत्ति से भाव की तीव्रता और गहराई बढ़ गई है। यहाँ पुनरुक्ति से यह दर्शाया गया है कि द्रोणाचार्य को अपने कर्म का पश्चाताप अनंत काल तक सताएगा।
2. निम्न गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द तक)
जीवन के समग्र अनुभव को प्रगाढ़ इच्छाओं के साथ संप्रेषित करने की बेचैनी भवानी प्रसाद मिश्र के कवि को आत्मालीनों, कलाविदों अथवा दार्शनिकों से पृथक् कर, मोक्ष या कलाकारों के बीच नहीं, जीवन के बीच खोलती है। उसके स्वर, भाषा, भाव-बोध-सब जीवन के अंतर्गत उपलब्ध हुए हैं : भाषा-कोश या शास्त्र की नक़ल से नहीं -- जिसे कवि आधुनिक कविता की सबसे बड़ी दुश्चिंता मानता है। पत्थर पर नाम खोद देने की इच्छा इस कवि की नहीं है। यह कवि संपूर्णतः कविता के हाथों विसर्जित है -- यानी संपूर्णत: जीवन के हाथों | उसके काव्य में हवा, नदी और सूर्य निरंतर प्रवाहित होने को चरितार्थ देते हैं। इतनी काव्य-पीढ़ियों से गुज़रकर ताज़े-टटके रह पाने का राज़ क्या यह नहीं है?
मुझे ख़तरा है कि निरंतर गतिशील काव्य-चेतना और नित्य नूतन अवधारणाओं की तुलना कोई पंत के कथित पल-पल परिवर्तित वेश से न कर ले, क्योंकि पिछले तमाम काव्य-युगों और वादों के बीच मिश्र जी की प्रवाहशीलता और मुक्त संवेदनात्मक काव्य-सर्जना किसी आमंत्रित बदलाव का नहीं, जीवन की अंतर्वाही संगति और सम्यक् बदलाव का नतीजा है।
जब वे कहते हैं कि “मैं कविता नहीं लिखता, कविता मुझे लिखती है” तब भी वे प्रकारांतर से इसी जीवन-प्रवाह की ओर इशारा करते हैं।
-
(क) गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: गद्यांश का उचित शीर्षक है – "भवानी प्रसाद मिश्र का जीवन-प्रवाही काव्य" या "जीवन के बीच कवि"।
-
(ख) “अंतर्वाही” शब्द का अर्थ लिखिए।
उत्तर: “अंतर्वाही” का अर्थ है – भीतर से बहने वाला या आंतरिक प्रवाह वाला। यह जीवन के भीतर निरंतर गतिशील रहने वाली शक्ति को दर्शाता है।
-
(ग) कवि भवानी प्रसाद मिश्र आधुनिक कविता की दुश्चिंता किसे मानते हैं?
उत्तर: कवि भवानी प्रसाद मिश्र आधुनिक कविता की सबसे बड़ी दुश्चिंता भाषा-कोश या शास्त्र की नकल को मानते हैं। उनके अनुसार कविता की भाषा और भाव-बोध जीवन के अंतर्गत उपलब्ध होने चाहिए, न कि किताबी नकल से।
-
(घ) मिश्र जी की काव्य-सर्जना में परिवर्तन किसका परिणाम है?
उत्तर: मिश्र जी की काव्य-सर्जना में परिवर्तन जीवन की अंतर्वाही संगति और सम्यक् बदलाव का परिणाम है। यह किसी आमंत्रित बदलाव का नहीं, बल्कि जीवन के आंतरिक प्रवाह का स्वाभाविक नतीजा है।
-
(ड) “मैं कविता नहीं लिखता, कविता मुझे लिखती है।” इस कथन में किसकी तरफ संकेत किया गया है?
उत्तर: इस कथन में जीवन-प्रवाह की ओर संकेत किया गया है। कवि यह बताना चाहते हैं कि वे स्वयं कविता नहीं रचते, बल्कि जीवन का निरंतर प्रवाह ही उनके माध्यम से कविता को अभिव्यक्त करता है।
खण्ड - ब
3. किसी एक विषय पर लगभग 450 शब्दों में निबंध लिखिए : 8
- स्वच्छता अभियान
- पर्यावरण संरक्षण : प्रदूषण नियंत्रण
- बालक का बचपन बचाओ
- इंटरनेट : ज्ञान की दुनिया
4. कार्यालयी पत्र
अथवा के साथ दो विकल्प:
विकल्प (क): कार्यालय, माध्यमिक शिक्षा, प्रगति प्रदेश, प्रयोगपुर की ओर से राज्य के समस्त जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) के नाम एक कार्यालयी पत्र लिखिए जिसमें माध्यमिक से उच्च माध्यमिक विद्यालय क्रमोन्नति के साथ वैकल्पिक विषयों के खोलने सम्बन्धी प्रस्तावों का उल्लेख हो। 4
विकल्प (ख): जिला शिक्षा अधिकारी, कमलनेर की ओर से जिले के समस्त राजकीय माध्यमिक विद्यालय / उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्यों / प्रधानाध्यापकों को एक पत्र लिखिए जिसमें कक्षा 10 के विद्यार्थियों को गणित, विज्ञान एवं अंग्रेजी विषयों के अध्ययन हेतु उत्कर्ष योजना (कम्प्यूटर सी.डी. द्वारा प्रश्नोत्तर विधि से) को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश हों। 4
5. निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए :
(क) टी.वी. खबरों के विभिन्न चरणों का उल्लेख कीजिए। 2
उत्तर: टी.वी. खबरों के विभिन्न चरण हैं: (1) समाचार संकलन – विभिन्न स्रोतों से खबरें एकत्र करना, (2) सम्पादन – खबरों को संक्षिप्त एवं प्रभावी बनाना, (3) प्रस्तुतीकरण – एंकर द्वारा खबरों को दर्शकों के सामने रखना, (4) प्रसारण – निर्धारित समय पर खबरों का प्रसारण करना।
(ख) समाचार लेखन में छह ककारों के बारे में संक्षेप में लिखिए। 2
उत्तर: समाचार लेखन में छह ककार (5W + 1H) होते हैं: (1) क्या (What) – घटना क्या है, (2) कब (When) – घटना कब हुई, (3) कहाँ (Where) – घटना कहाँ हुई, (4) कौन (Who) – घटना में कौन शामिल है, (5) क्यों (Why) – घटना क्यों हुई, (6) कैसे (How) – घटना कैसे हुई। ये छह तत्व समाचार को पूर्णता प्रदान करते हैं।
(ग) कविता के सारे घटक परिवेश और संदर्भ से परिचालित होते हैं, कैसे? 2
उत्तर: कविता के सभी घटक जैसे भाषा, शैली, बिम्ब, प्रतीक, छंद आदि उसके परिवेश और संदर्भ से प्रभावित होते हैं। कवि अपने समय की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को कविता में उतारता है। उदाहरण के लिए, छायावादी कविता में प्रकृति और प्रेम के बिम्ब उस युग के रोमांटिक परिवेश को दर्शाते हैं।
(घ) रेडियो नाटक की अवधि और पात्र के बारे में लिखिए। 2
उत्तर: रेडियो नाटक की अवधि सामान्यतः 15 से 30 मिनट तक होती है। इसमें पात्रों की संख्या सीमित (5-10) रखी जाती है क्योंकि श्रोता केवल ध्वनि के माध्यम से ही पात्रों को पहचानते हैं। प्रत्येक पात्र की आवाज़ और संवाद शैली अलग होनी चाहिए ताकि श्रोता आसानी से अंतर कर सकें।
खण्ड - स
6. निम्न पद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
पद्यांश 1:
छलछल थे संध्या के श्रमकण,
आँसू-से गिरते थे प्रतिक्षण ।
मेरी यात्रा पर लेती थी --
नीरवता अनंत अँगड़ाई ।
श्रमित स्वप्न की मधुमाया में,
गहन-विपिन की तरू-छाया में,
पथिक उनींदी श्रुति में किसने-
यह विहाग की तान उठाई ।
सप्रसंग व्याख्या:
संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हिंदी साहित्य के कवि 'सुमित्रानंदन पंत' द्वारा रचित कविता 'संध्या' से लिया गया है।
प्रसंग: इसमें कवि ने संध्या के समय प्रकृति के सौंदर्य और पथिक की मनोदशा का चित्रण किया है। संध्या की बूँदें आँसुओं की तरह गिरती हैं और चारों ओर नीरवता छाई है। थके हुए पथिक को गहन वन की छाया में विहाग राग की मधुर तान सुनाई देती है।
व्याख्या: संध्या के समय ओस की बूँदें (श्रमकण) छलछला रही हैं, जो आँसुओं की तरह प्रतिक्षण गिर रही हैं। मेरी यात्रा पर नीरवता (मौन) अनंत अँगड़ाई ले रही है, अर्थात् चारों ओर गहरा सन्नाटा है। थके हुए स्वप्न की मधुर माया में, गहन वन की वृक्षों की छाया में, पथिक की उनींदी श्रुति (सुनने की शक्ति) में किसी ने विहाग राग की तान उठाई है। यह तान पथिक को मोहित कर देती है।
अथवा
पद्यांश 2:
बानी जगरानी की उदारता बखानी जाइ
ऐसी मति उदित उदार कौन की भई ।
देवता प्रसिद्ध सिद्ध रिषिराज तपवृद्ध कहि
कहि हारे सब कहि न काहू लई ।
भावी भूत बर्तमान जगत बखानत है
“केसोदास' क्यों हू ना बखानी काहू पै गई ।
पति at चारमुख पूत बनें पाँचमुख
नाती बनैं घटमुख deft नई नई ॥
सप्रसंग व्याख्या:
संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश 'केशवदास' द्वारा रचित 'रामचंद्रिका' से लिया गया है।
प्रसंग: इसमें कवि ने सरस्वती (वाणी) की उदारता का वर्णन करते हुए कहा है कि उनकी उदारता का बखान करना असंभव है।
व्याख्या: जगत की रानी सरस्वती (वाणी) की उदारता का बखान किया जा सकता है, परंतु ऐसी उदार बुद्धि किसी में नहीं हुई। देवता, सिद्ध, ऋषिराज और तपस्वी सबने उनकी महिमा कही, परंतु कोई उसे पूरी तरह नहीं कह सका। भूत, भविष्य और वर्तमान जगत का वर्णन करते हुए कवि केशवदास कहते हैं कि यह उदारता किसी पर नहीं गई। पति चार मुख वाले (ब्रह्मा) हैं, पुत्र पाँच मुख वाले (शिव) हैं, और पोता घटमुख (गणेश) है, यह नई-नई बातें हैं।
7. निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए :
(क) "बरसाती आँखों के बादल-बनते जहाँ भरे करुणा जल ।
लहरें टकराती अनंत की पाकर जहाँ किनारा ।"
उपर्युक्त पंक्तियों के काव्य-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: इन पंक्तियों में काव्य-सौन्दर्य के अनेक तत्व विद्यमान हैं। भाव-सौन्दर्य: इसमें करुणा और अनंतता का गहरा भाव व्यक्त हुआ है। शब्द-सौन्दर्य: 'बरसाती आँखों' और 'करुणा जल' जैसे शब्द-चित्र अत्यंत मार्मिक हैं। अलंकार: 'बादल-बनते' में रूपक अलंकार है। प्रतीक: 'अनंत की लहरें' और 'किनारा' जीवन के रहस्य को दर्शाते हैं। भाषा में लयात्मकता और चित्रात्मकता है, जो पाठक को भाव-विभोर कर देती है।
(ख) "गंगा के जल में
अपनी एक टाँग पर खड़ा है यह शहर
अपनी दूसरी टाँग से
बिल्कुल बेखबर"
उपर्युक्त पंक्तियों में शिल्प-सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: इन पंक्तियों में शिल्प-सौन्दर्य के अनेक पक्ष उभरकर आए हैं। बिम्ब-विधान: 'गंगा के जल में एक टाँग पर खड़ा शहर' का बिम्ब अत्यंत सजीव और मौलिक है। व्यंजना: शहर का एक टाँग से बेखबर होना आधुनिक जीवन की विसंगति को व्यंजित करता है। भाषा-शिल्प: सरल, सहज और प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग किया गया है। लय: पंक्तियों में स्वाभाविक लय है जो कथ्य को प्रभावी बनाती है। यह शिल्प पाठक को सोचने पर विवश करता है।
निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 40 - 50 शब्दों में लिखिए :
(क) “कि अब जब आगे कोई हाथ फैलाता है
पच्चीस पैसे एक चाय या दो रोटी के लिए
तो जान लेता हूँ
मेरे सामने एक ईमानदार आदमी, औरत या बच्चा खड़ा है।”
इन पंक्तियों के प्रकाश में ‘काम’ कविता का मर्म खोलिए।
उत्तर: इन पंक्तियों में कवि ने समाज के उन गरीब, ईमानदार लोगों की पीड़ा को उजागर किया है जो भूख और अभाव के कारण भीख माँगने को मजबूर हैं। ‘काम’ कविता का मर्म यह है कि काम (श्रम) ही मनुष्य की गरिमा है, परंतु जब समाज में काम का अभाव होता है तो ईमानदार व्यक्ति भी याचक बन जाता है। कवि इस विडंबना को दर्शाता है कि मजबूरी में माँगना भी ईमानदारी का प्रतीक हो सकता है।
(ख) “दुख ही जीवन की कथा रही।” पंक्ति निराला की गहरी पीड़ा को व्यक्त करती है। इस सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त कीजिए।
उत्तर: यह पंक्ति निराला के जीवन की कटु सच्चाई को दर्शाती है। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से अनेक दुखों का सामना किया—पत्नी, पुत्री और पिता की मृत्यु, आर्थिक तंगी, और सामाजिक उपेक्षा। यह पंक्ति उनकी गहरी पीड़ा और निराशा को व्यक्त करती है, लेकिन साथ ही उनके संघर्षशील स्वभाव को भी दर्शाती है। निराला के लिए दुख जीवन का अभिन्न अंग था, जिसने उनकी रचनाओं को गहराई और संवेदनशीलता प्रदान की।
खण्ड - द
निम्न गद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए :
गद्यांश 1: “साहित्य का पांचजन्य समर भूमि में उदासीनता का राग नहीं सुनाता। वह मनुष्य को भाग्य के सहारे बैठने और पिंजड़े में पंख फड़फड़ाने की प्रेरणा नहीं देता। इस तरह की प्रेरणा देने वालों के वह पंख कतर देता है। वह कायरों और पराभव-प्रेमियों को ललकारता हुआ एक बार उन्हें भी समरभूमि के लिए बुलावा देता है।
कहा भी है -- “क्लीबानां धाष्टर्यजननमुत्साह: शूर मानिनाम्।” भरत मुनि से लेकर भारतेंदु तक चली आती हुई हमारे साहित्य की यह गौरवशाली परंपरा है। इसके सामने निरुद्देश्य कला, विकृति, काम-वासनाएँ, अहंकार और व्यक्तिवाद, निराशा और पराजय के सिद्धान्त वैसे ही नहीं ठहरते जैसे सूर्य के सामने अंधकार।”
सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश हिंदी साहित्य के उस आलोचनात्मक दृष्टिकोण को प्रस्तुत करता है जो साहित्य को समाज और राष्ट्र के प्रति जागरूक करने वाला मानता है। यह साहित्य के सक्रिय और संघर्षशील स्वरूप पर बल देता है।
व्याख्या: लेखक कहता है कि सच्चा साहित्य (पांचजन्य) युद्धभूमि में उदासीनता का संदेश नहीं देता। वह मनुष्य को भाग्य के भरोसे बैठने या कैद में पंख फड़फड़ाने (निष्क्रिय रहने) की प्रेरणा नहीं देता। ऐसी प्रेरणा देने वालों के पंख वह काट देता है, अर्थात उनकी नकारात्मकता को समाप्त कर देता है। साहित्य कायरों और पराजय को स्वीकार करने वालों को ललकारता है और उन्हें संघर्ष के लिए आमंत्रित करता है।
लेखक संस्कृत श्लोक का उद्धरण देता है कि उत्साह कायरों में साहस और वीरों में अभिमान पैदा करता है। भरतमुनि से लेकर भारतेंदु तक यही साहित्य की गौरवशाली परंपरा रही है। इस परंपरा के सामने निरुद्देश्य कला, विकृति, कामवासना, अहंकार, व्यक्तिवाद, निराशा और पराजय के सिद्धांत टिक नहीं सकते, जैसे सूर्य के सामने अंधकार नहीं टिकता।
गद्यांश 2: “ज्यों-ज्यों मैं सयाना होता गया, त्यों-त्यों हिंदी के नूतन साहित्य की ओर मेरा झुकाव बढ़ता गया। क्वीन्स कालेज में पढ़ते समय स्वर्गीय बा० रामकृष्ण वर्मा मेरे पिता जी के सहपाठियों में थे। भारत जीवन प्रेस की पुस्तकें प्राय: मेरे यहाँ आया करती थीं पर अब पिता जी उन पुस्तकों को छिपाकर रखने लगे। उन्हें डर हुआ कि कहीं मेरा चित्त स्कूल की पढ़ाई से हट न जाए मैं बिगड़ न जाऊँ। उन दिनों केदारनाथ जी पाठक ने एक हिंदी पुस्तकालय खोला था। मैं वहाँ से पुस्तकें ला-लाकर पढ़ा करता।”
सप्रसंग व्याख्या:
प्रसंग: प्रस्तुत गद्यांश एक आत्मकथात्मक संस्मरण है जिसमें लेखक अपने बाल्यकाल में हिंदी साहित्य के प्रति बढ़ते रुझान का वर्णन करता है। यह उस समय के सामाजिक और पारिवारिक परिवेश को भी दर्शाता है।
व्याख्या: लेखक बताता है कि जैसे-जैसे वह बड़ा (सयाना) होता गया, वैसे-वैसे उसका झुकाव नए हिंदी साहित्य की ओर बढ़ता गया। क्वीन्स कॉलेज में पढ़ते समय स्वर्गीय बाबू रामकृष्ण वर्मा, जो उसके पिता के सहपाठी थे, का उल्लेख करता है। पहले भारत जीवन प्रेस की पुस्तकें घर आती थीं, लेकिन बाद में पिता उन्हें छिपाने लगे क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं लेखक का ध्यान स्कूल की पढ़ाई से न हट जाए और वह बिगड़ न जाए। उन दिनों केदारनाथ जी पाठक ने एक हिंदी पुस्तकालय खोला था, जहाँ से लेखक पुस्तकें लाकर पढ़ता था। यह गद्यांश लेखक की हिंदी साहित्य के प्रति गहरी रुचि और उस समय की शैक्षिक चिंताओं को दर्शाता है।
0. निम्न में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
(उत्तर सीमा लगभग 50 शब्द) 2×2=4
(क) “आज का कबूतर अच्छा है कल के मोर से, आज का पैसा अच्छा है कल की मोहर से। आँखों देखा ढेला अच्छा ही होना चाहिए, लाखों की तेज पिंड से।” कथन का आशय – “सुमिरिनी के मनके” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस कथन का आशय है कि वर्तमान में उपलब्ध वस्तु भविष्य की अनिश्चित वस्तु से श्रेष्ठ है। लेखक कहते हैं कि आज का छोटा लाभ कल के बड़े लाभ से अच्छा है। हमें वर्तमान में जो मिला है, उसी में संतोष करना चाहिए, क्योंकि भविष्य अनिश्चित है। यह व्यावहारिक जीवन का सिद्धांत है।
(ख) “मैं तो केवल निमित्त मात्र था। अरुण के पीछे सूर्य था।” – व्यास जी के इस कथन का आशय क्या है? इससे उनके चरित्र की किस विशेषता का परिचय मिलता है? “कच्चा चिट्ठा” पाठ के आधार पर लिखिए।
उत्तर: व्यास जी का आशय है कि वे स्वयं को केवल एक माध्यम मानते थे, असली शक्ति अरुण (सूर्य) में थी। इससे उनके चरित्र की विनम्रता और निस्वार्थता का पता चलता है। वे अपनी सफलता का श्रेय दूसरों को देते हैं और स्वयं को गौण मानते हैं, जो एक महान व्यक्तित्व की पहचान है।
(ग) “ओरे, मैं उन दिनों कितना काम कर लेता था। कभी थकता ही नहीं था।” इस कथन में गांधीजी की किस विशेषता का वर्णन मिलता है? समझाइए।
उत्तर: इस कथन में गांधीजी की अथक परिश्रमशीलता और ऊर्जा का वर्णन मिलता है। वे अपने युवा दिनों में बिना थके अत्यधिक काम कर लेते थे। यह उनके समर्पण, अनुशासन और कार्य के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को दर्शाता है, जो उनके जीवन की एक प्रमुख विशेषता थी।
1. मलिक मुहम्मद जायसी या पंडित चन्द्रधर शर्मा गुलेरी का साहित्यिक परिचय लगभग 80 शब्दों में लिखिए।
उत्तर (मलिक मुहम्मद जायसी): मलिक मुहम्मद जायसी हिंदी साहित्य के भक्तिकालीन निर्गुण प्रेमाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि हैं। इनका जन्म 1520 ई. के आसपास जायस (उत्तर प्रदेश) में हुआ। इनकी प्रसिद्ध रचना ‘पद्मावत’ है, जो अलाउद्दीन खिलजी और रानी पद्मिनी की प्रेम कथा पर आधारित है। इनकी भाषा अवधी है और इन्होंने सूफी प्रेम काव्य की परंपरा को समृद्ध किया।
खण्ड - य
2. निम्न प्रश्नों में से किन्हीं चार के उत्तर प्रत्येक लगभग 50 शब्दों में लिखिए : 4×2=8
(क) ‘गीर ठंडा किया होता, तो दुश्मनों का कलेजा कैसे ठंडा होता?’ इस कथन के आधार पर सूरदास की मनः स्थिति का वर्णन कीजिए।
उत्तर: सूरदास की मनः स्थिति क्रोध और प्रतिशोध से भरी हुई थी। वे अपने शत्रुओं को सबक सिखाना चाहते थे। उनका मानना था कि यदि वे अपना गुस्सा शांत कर लेते, तो दुश्मनों को उनकी शक्ति का अहसास नहीं होता। यह उनके उग्र स्वभाव और अपमान सहन न करने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।
(ख) “एकाएक जैसे सफेद हो गया रंगीन स्क्रीन।” प्रस्तुत कथन का आशय “आरोहण” पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस कथन का आशय है कि पर्वतारोहण के दौरान अचानक मौसम बदल गया और चारों ओर बर्फबारी होने लगी। रंगीन दृश्य एकाएक सफेद हो गया। यह प्रकृति के अप्रत्याशित रूप और पर्वतारोहियों के सामने आने वाली कठिनाइयों को दर्शाता है, जहाँ सब कुछ बर्फ से ढक जाता है।
(ग) “प्रकृति सजीव नारी बन गई।” इस कथन के संदर्भ में “बिस्कोहर की माटी” की प्राकृतिक छटा की विवेचना कीजिए।
उत्तर: इस कथन में बिस्कोहर की प्रकृति को एक जीवंत नारी के रूप में चित्रित किया गया है। यहाँ की हरियाली, फूल, पेड़-पौधे और नदियाँ मानो सजीव हो उठी हैं। प्रकृति की सुंदरता और कोमलता को नारी के रूप में देखा गया है, जो अपनी ममता और सौंदर्य से मन मोह लेती है।
(घ) मिठुआ के प्रश्न – “और जो कोई सौ लाख बार लगा दे?” का उत्तर सूरदास ने किस प्रकार दिया? सूरदास का उत्तर किस विशेषता को दर्शाता है?
उत्तर: सूरदास ने उत्तर दिया कि यदि कोई सौ लाख बार लगा दे, तो वह उसे भी माफ कर देगा। यह उत्तर सूरदास की उदारता और क्षमाशीलता को दर्शाता है। वे अपने शत्रुओं के प्रति भी दया भाव रखते थे और बदला लेने के बजाय क्षमा करना पसंद करते थे।
(ङ) हमारी आज की सभ्यता इन नदियों को अपने गंदे पानी के नाले बना रही है। क्यों और कैसे? “अपना मालवा उजाड़ सभ्यता में” – पाठ के आधार पर समझाइए।
उत्तर: आज की सभ्यता ने नदियों को गंदे पानी के नाले में बदल दिया है क्योंकि हम कारखानों, घरों और शहरों का कचरा और गंदा पानी बिना उपचार के नदियों में बहा देते हैं। इससे नदियाँ प्रदूषित हो गई हैं और उनका जल पीने योग्य नहीं रहा। यह हमारी लापरवाही और विकास की अंधी दौड़ का परिणाम है।
3. “संगीत, गंध, बच्चे-बिसनाथ के लिए सबसे बड़े सेतु हैं, काल, इतिहास को पार करने के।” प्रस्तुत कथन के आधार पर बताइए कि बिसनाथ का संबंध गंध से किस प्रकार जुड़ा हुआ था।
उत्तर: बिसनाथ का गंध से गहरा संबंध था क्योंकि वे एक सुगंधित तेल के व्यापारी थे। वे विभिन्न प्रकार की सुगंधों को पहचानते और उनका व्यापार करते थे। गंध उनके लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि अतीत और इतिहास को जोड़ने का माध्यम थी। हर गंध उन्हें बचपन, पुरानी यादों और बीते समय से जोड़ती थी, जिससे वे समय और इतिहास को पार कर पाते थे।