RBSE Class 12th 2015 Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2015 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2015 |
| Subject | Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2015 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2015 Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2015
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Rajasthan Board Class 12th Music Vocal Or Instrumental-SS-16-2015 2015 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015
संगीत — कण्ठ अथवा वाद्य
(MUSIC — VOCAL OR INSTRUMENTAL)
समय : 3 घण्टे पूर्णांक : 24
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्नपत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
Candidate must first write his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity. - प्रश्न-पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार को त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
SS—6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V & I) | SS-606 | [ Turn over ]
भाग - अ (गायन) / PART - A (VOCAL)
निर्देश: गायन विषय लेने वाले छात्र केवल भाग - अ के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें। सितार, सरोद, वायलिन, दिलरुबा अथवा इसराज, बांसुरी व गिटार विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - ब के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें तथा तबला व पखावज विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - स के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें।
Candidates offering Vocal Music should attempt only the questions of Part - A. Candidates offering Sitar, Sarod, Violin, Dilruba or Israj, Flute and Guitar should attempt only the questions of Part - B and candidates offering Tabla and Pakhawaj should attempt only the questions of Part - C.
निर्देश: उत्तर-पुस्तिका के मुखपृष्ठ पर विषय स्पष्ट रूप से लिखें। Write your subject clearly on the cover page of the answer-book.
-
निम्नलिखित की परिभाषाएँ लिखिए : (1+1+1=3)
- (i) वर्ण (Varna)
- (ii) गमक (Gamak)
- (iii) मुर्च्छना (Murchhana)
Write the definitions of the following :
उत्तर:
(i) वर्ण (Varna): संगीत में वर्ण स्वरों के उच्चारण की चार प्रकार की गतियों को कहते हैं – स्थायी, आरोही, अवरोही और संचारी। ये राग के विस्तार में सहायक होते हैं।
(ii) गमक (Gamak): गमक एक स्वर को दूसरे स्वर से इस प्रकार मिलाने की क्रिया है कि वह कंपित होकर सुंदर लगे। यह अलंकार का एक प्रकार है जो राग के भाव को गहराई प्रदान करता है।
(iii) मुर्च्छना (Murchhana): मुर्च्छना सप्तक के सात स्वरों को क्रमशः एक-एक स्वर से आरंभ करके गाने की प्रक्रिया है। इससे रागों के विभिन्न रूपों का ज्ञान होता है।
-
थाट राग वर्गीकरण को समझाइए। (3)
Explain Thata Raga Vargikaran.
उत्तर: थाट राग वर्गीकरण भारतीय संगीत में रागों को उनके मूल स्वर समूह (थाट) के आधार पर वर्गीकृत करने की पद्धति है। पंडित विष्णु नारायण भातखंडे ने 10 थाटों का प्रतिपादन किया – बिलावल, खमाज, काफी, आसावरी, भैरवी, भैरव, कल्याण, मारवा, पूर्वी और तोड़ी। प्रत्येक थाट में 7 स्वर होते हैं और इन्हीं के आधार पर सभी रागों का निर्माण होता है। यह वर्गीकरण रागों को समझने और सिखाने में सहायक है।
-
भरत के अनुसार जाति गायन को समझाइए। (3)
Explain about Jati Gayan according to Bharat.
उत्तर: भरत मुनि ने अपने ग्रंथ 'नाट्यशास्त्र' में जाति गायन का वर्णन किया है। जातियाँ प्राचीन रागों के मूल रूप हैं, जो ग्राम (षड्ज, मध्यम, गंधार) और मूर्च्छनाओं से उत्पन्न होती हैं। भरत ने 18 जातियों का उल्लेख किया है, जिनमें से 7 शुद्ध और 11 विकृत हैं। प्रत्येक जाति में आरोह, अवरोह, ग्रह, अंश, न्यास, अपन्यास आदि लक्षण होते हैं। यह प्रणाली बाद में राग विकास का आधार बनी।
-
आधुनिक कालीन भारतीय संगीत का संक्षिप्त इतिहास समझाइए। (3)
Explain the history of Indian music of modern period.
उत्तर: आधुनिक काल (18वीं शताब्दी से वर्तमान तक) में भारतीय संगीत ने कई महत्वपूर्ण परिवर्तन देखे। इस काल में पंडित विष्णु नारायण भातखंडे और पंडित विष्णु दिगंबर पलुस्कर जैसे विद्वानों ने संगीत को व्यवस्थित किया। भातखंडे ने 10 थाट प्रणाली विकसित की और संगीत शास्त्र को लिपिबद्ध किया। इसी काल में रेडियो, रिकॉर्डिंग और फिल्मों के माध्यम से संगीत का प्रसार हुआ। उस्ताद अलाउद्दीन खान, पंडित रविशंकर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान जैसे कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संगीत को पहचान दिलाई। आज भारतीय संगीत शास्त्रीय, उपशास्त्रीय और लोक संगीत के रूप में समृद्ध है।
SS—6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V & I) | SS-606|
5. अपने पाठ्यक्रम में से किसी एक राग का सम्पूर्ण परिचय आरोह, अवरोह और पकड़ सहित लिखिए।
Describe complete Parichaya of any one Raga with Aaroha, Avaroha and Pakad from your syllabus.
राग भैरवी (Raga Bhairavi)
- थाट (Thaat): भैरवी
- जाति (Jati): संपूर्ण-संपूर्ण (Sampurna-Sampurna)
- वादी (Vadi): म (Madhyam)
- संवादी (Samvadi): स (Shadaj)
- आरोह (Aaroha): स रे ग म प ध नि सां
- अवरोह (Avaroha): सां नि ध प म ग रे स
- पकड़ (Pakad): ग म प ध नि ध प म ग रे स
- समय (Time): प्रातःकाल (Morning)
- स्वर (Swara): सभी स्वर कोमल (All notes are komal except Shadaj and Pancham)
6. निम्न स्वर समुदाय से राग पहचानकर राग का नाम लिखें :
Identify the Raga from given notes & write the names of the Ragas :
-
(i) सां नि ध प ग म ग रे स (Sa Ni Dha Pa Ga Ma Ga Re Sa)
राग का नाम: राग भैरवी (Raga Bhairavi)
व्याख्या: यह स्वर समूह राग भैरवी की पकड़ को दर्शाता है, जिसमें कोमल स्वरों का प्रयोग होता है।
-
(ii) सा म म ग प म प ध प ग म रे स (Sa Ma Ma Ga Pa Ma Pa Dha Pa Ga Ma Re Sa)
राग का नाम: राग भैरवी (Raga Bhairavi)
व्याख्या: यह स्वर समूह भी राग भैरवी के आरोह-अवरोह का एक भाग है, जिसमें मध्यम और पंचम पर बल दिया गया है।
7. बड़े गुलाम अली खां की जीवनी लिखिए।
Write the life sketch of Bade Gulam Ali Khan.
बड़े गुलाम अली खां (Bade Ghulam Ali Khan) (1902-1968) भारतीय शास्त्रीय संगीत के एक महान गायक थे। वे पटियाला घराने से संबंधित थे। उनका जन्म पंजाब के कसूर (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उन्होंने अपने पिता अली बख्श खां और उस्ताद कल्लन खां से संगीत की शिक्षा ली। वे ख्याल, ठुमरी और दादरा गायन के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी आवाज में गहराई और मिठास थी। उन्हें 'तानसेन का अवतार' भी कहा जाता था। उन्हें पद्म भूषण (1962) से सम्मानित किया गया। उनके प्रसिद्ध शिष्यों में उनके पुत्र मुनीर अहमद खां और अन्य शामिल हैं।
8. झपताल को दुगुन सहित लिखिए।
Write Tala Jhaptal with Dugun.
झपताल (Jhaptal) 10 मात्राओं का एक ताल है। इसके विभाग इस प्रकार हैं:
- मात्राएँ (Matras): 10
- विभाग (Vibhag): 2+3+2+3
- ताली (Tali): 1 (पहली मात्रा), 3 (चौथी मात्रा), 5 (सातवीं मात्रा)
- खाली (Khali): 2 (दूसरी मात्रा)
दुगुन (Dugun) में झपताल: दुगुन में प्रति मात्रा में दो बोल बोले जाते हैं। उदाहरण:
धिन ना | धि धि ना | ती ना | धि धि ना ||
(यहाँ प्रत्येक विभाग में दो मात्राओं के बोल एक साथ बोले गए हैं।)
भाग-ब (PART - B)
( सितार / सरोद / वायलिन / दिलरूबा अथवा इसराज / बांसुरी / गिटार )
( Sitar / Sarod / Violin / Dilruba or Esraj / Flute / Guitar )
-
निम्नलिखित की परिभाषा लिखिये :
Write the definitions of the following :- गमक (Gamak)
- जमजमा (Jamjama)
- कूंतन (Krintan)
(1+1+1+2=3)
गमक (Gamak): यह एक अलंकार है जिसमें स्वरों को हिलाकर या कंपन करके गाया या बजाया जाता है। यह संगीत में शोभा और रस उत्पन्न करता है।
जमजमा (Jamjama): यह एक प्रकार का आलाप या तान है जिसमें स्वरों को विशेष प्रकार से घुमाकर प्रस्तुत किया जाता है, जिससे संगीत में गहराई आती है।
कूंतन (Krintan): यह एक वादन शैली है जिसमें स्वरों को तीव्र गति से बजाया जाता है, विशेषकर तार वाद्यों में। इसमें स्वरों को एक साथ मिलाकर प्रस्तुत किया जाता है।
-
संधिप्रकाश राग को समझाइए।
Explain the Sandhiprakash Raga. (3)संधिप्रकाश राग वे राग हैं जो संधि काल (सूर्योदय या सूर्यास्त के समय) में गाए या बजाए जाते हैं। इन रागों में कोमल स्वरों का प्रयोग अधिक होता है और ये गंभीर तथा शांत रस प्रदान करते हैं। उदाहरण: राग भैरव (सुबह), राग पूरिया (शाम)। ये राग समय के अनुसार विशेष भाव उत्पन्न करते हैं।
-
मध्यकालीन संगीत के इतिहास की जानकारी दीजिए।
Describe the history of the music of Medieval period. (2)मध्यकालीन संगीत (लगभग 12वीं से 18वीं शताब्दी) में भारतीय संगीत का महत्वपूर्ण विकास हुआ। इस काल में अमीर खुसरो ने ख्याल गायन और सितार जैसे वाद्यों का विकास किया। मुगल काल में संगीत को राजकीय संरक्षण मिला। तानसेन जैसे विद्वानों ने रागों को नया रूप दिया। इस काल में ध्रुपद और ख्याल शैलियाँ प्रमुख रहीं।
-
संगीत में कितने रस होते हैं ? उनके नाम लिखिए।
Write the names of Rasa in music. (2)संगीत में कुल 9 रस होते हैं। उनके नाम हैं:
- शृंगार रस
- हास्य रस
- करुण रस
- रौद्र रस
- वीर रस
- भयानक रस
- वीभत्स रस
- अद्भुत रस
- शांत रस
SS—6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V & I) | SS-606|
प्रश्न 5
अपने वाद्य के विभिन्न अंगों का वर्णन कीजिए।
Describe the different parts of your instrument.
अंक: 3
उत्तर: यह प्रश्न आपके द्वारा चुने गए वाद्य (जैसे सितार, तबला, हारमोनियम, बांसुरी आदि) पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि वाद्य सितार है, तो इसके मुख्य अंग हैं:
- तुंबा (Tumba): सितार का निचला गोलाकार भाग, जो ध्वनि को गूंजने में मदद करता है।
- डांडी (Dandi): लंबी गर्दन, जिस पर फ्रेट (पर्दे) लगे होते हैं।
- पर्दे (Frets): धातु के तार, जो स्वरों को नियंत्रित करते हैं।
- तार (Strings): मुख्य रूप से 7 तार (मध्यम, पंचम, सा, रे, गा, मा, पा) और 11-13 सहायक तार (तरफदार)।
- खूंटी (Pegs): तारों को कसने या ढीला करने के लिए।
- गुरु (Bridge): तारों को सहारा देने वाला भाग।
- जवारी (Jawari): ध्वनि को मधुर बनाने वाला विशेष भाग।
यदि वाद्य तबला है, तो इसके अंग हैं: दायां तबला (दया), बायां तबला (बायां), स्याही (गाब), चमड़ा (पुड़ी), गजरा (बंधन), और लकड़ी का खोल।
प्रश्न 6
तानसेन का जीवन परिचय एवं संगीत में उनका योगदान लिखिए।
Write down the life sketch and contribution of Tansen in the field of music.
अंक: 3
उत्तर: तानसेन (लगभग 1500-1586) भारतीय शास्त्रीय संगीत के महानतम संगीतकारों में से एक थे। उनका जन्म ग्वालियर के पास बेहटा गाँव में हुआ था। उनके पिता मकरंद पांडे एक कवि थे। तानसेन ने स्वामी हरिदास और मुहम्मद गौस से संगीत की शिक्षा ली। वे मुगल सम्राट अकबर के दरबार में नवरत्नों में से एक थे।
योगदान:
- उन्होंने कई रागों की रचना की, जैसे राग मियाँ मल्हार, मियाँ तोड़ी, मियाँ सारंग आदि।
- वे ध्रुपद गायन शैली के प्रसिद्ध गायक थे।
- उन्होंने हिंदी और ब्रजभाषा में कई रचनाएँ लिखीं।
- उनके संगीत ने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत को समृद्ध किया।
प्रश्न 7
14 मात्रा की ताल को मात्रा, बोल व ठेका सहित लिखिए।
Write down Tala of fourteen beats with Matra, Bol and Theka.
अंक: 3
उत्तर: 14 मात्रा की ताल ध्रुव ताल या आदि ताल हो सकती है। यहाँ ध्रुव ताल का उदाहरण दिया गया है:
| मात्रा | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 | 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| बोल | धा | धा | धा | ति | धा | धा | धा | ति | धा | धा | धा | ति | धा | धा |
| ठेका | धा | धा | धा | ति | धा | धा | धा | ति | धा | धा | धा | ति | धा | धा |
विभाग: 4+4+4+2 (चार विभाग)
ताली/खाली: पहली ताली (सम), दूसरी ताली (5वीं मात्रा), तीसरी ताली (9वीं मात्रा), चौथी खाली (13वीं मात्रा)।
प्रश्न 8
दिए गए स्वरों से राग पहचानिए:
(i) निसा, गमप, गमग, रे सा
(ii) गमध-प, गमरे-सा
Identify the Raga from given Swaras:
(i) Ni Sa, Ga Ma Pa, Ga Ma Ga, Re Sa
(ii) Ga Ma Dha - Pa, Ga Ma Re - Sa
अंक: 3
उत्तर:
(i) राग भूपाली (Raga Bhupali): स्वर समूह "निसा, गमप, गमग, रे सा" राग भूपाली के आरोह-अवरोह का संकेत देता है। भूपाली में आरोह में रे और प पर जोर होता है, और अवरोह में ग, म, प, ध, नि, सा का प्रयोग होता है। यहाँ दिए गए स्वर अवरोह के समान हैं।
(ii) राग यमन (Raga Yaman): स्वर समूह "गमध-प, गमरे-सा" राग यमन के वाक्यांश हैं। यमन में तीव्र मध्यम (म#) का प्रयोग होता है, और यहाँ "गमध" में म ध पर तीव्र मध्यम का संकेत है। "गमरे-सा" अवरोह में यमन की विशेषता दर्शाता है।
प्रश्न 9
अपने पाठ्यक्रम में से किसी एक राग का सम्पूर्ण परिचय लिखिए।
Describe the complete Raga Parichaya of any one Raga from your syllabus.
अंक: 2
उत्तर: यहाँ राग भूपाली का सम्पूर्ण परिचय दिया गया है:
- राग: भूपाली (Bhoopali)
- थाट: कल्याण
- जाति: औडव-औडव (आरोह और अवरोह में 5-5 स्वर)
- आरोह: सा रे ग प ध सां
- अवरोह: सां ध प ग रे सा
- वादी स्वर: ग (गंधार)
- संवादी स्वर: ध (धैवत)
- समय: रात्रि का प्रथम प्रहर (शाम 6-9 बजे)
- पकड़: ग रे ग प ध प ग रे सा
- विशेषता: इसमें म (मध्यम) और नि (निषाद) वर्जित हैं। यह एक शांत और गंभीर राग है, जो भक्ति रस को व्यक्त करता है।
भाग - स (तबला / पखावज)
PART - C (Tabla / Pakhawaj)
-
एकताल व चौताल का तुलनात्मक विवरण दीजिए।
Give the comparison of Ektal & Chautal. 2
उत्तर: एकताल और चौताल की तुलना इस प्रकार है:
- एकताल: 12 मात्राओं की ताल है। इसमें 6 खंड होते हैं, प्रत्येक खंड में 2-2 मात्राएँ होती हैं। इसके बोल हैं: धिं धिं धागे तिरकिट तू ना कत ता धागे तिरकिट धिं ना। इसका ताली-खाली क्रम: 1 (ताली), 2 (खाली), 3 (ताली), 4 (खाली), 5 (ताली), 6 (खाली) है।
- चौताल: 12 मात्राओं की ताल है। इसमें 4 खंड होते हैं, प्रत्येक खंड में 3-3 मात्राएँ होती हैं। इसके बोल हैं: धा धा धिं ता किट धा धिं ता किट धा धिं ता किट। इसका ताली-खाली क्रम: 1 (ताली), 2 (खाली), 3 (ताली), 4 (खाली) है।
मुख्य अंतर: एकताल में 6 खंड (2-2 मात्राओं के) होते हैं जबकि चौताल में 4 खंड (3-3 मात्राओं के) होते हैं। दोनों की मात्रा संख्या समान (12) है लेकिन विभाजन और बोल भिन्न हैं।
-
लय किसे कहते हैं? लयकारी के वर्गीकरण को समझाइए।
What is Laya? Explain the classification of Layakari. 2
उत्तर: लय संगीत में समय के नियमित अंतराल को कहते हैं। यह गति का माप है।
लयकारी के वर्गीकरण:
- दुगुन: मूल लय से दोगुनी गति। एक मात्रा में दो बोल बोले जाते हैं।
- तिगुन: मूल लय से तीन गुनी गति। एक मात्रा में तीन बोल बोले जाते हैं।
- चौगुन: मूल लय से चार गुनी गति। एक मात्रा में चार बोल बोले जाते हैं।
- आड़ी: मूल लय से डेढ़ गुनी गति। दो मात्राओं में तीन बोल बोले जाते हैं।
- कुवाड़ी: मूल लय से सवा गुनी गति। चार मात्राओं में पाँच बोल बोले जाते हैं।
-
प्राचीन व मध्यकालीन भारतीय संगीत के इतिहास को समझाइए।
Explain the history of Indian music from ancient & medieval period. 6
उत्तर: भारतीय संगीत का इतिहास अत्यंत प्राचीन है।
प्राचीन काल (वैदिक काल से गुप्त काल तक):
- वैदिक काल में सामवेद का गायन हुआ, जिसमें स्वरों का प्रयोग था।
- नाट्यशास्त्र (भरत मुनि) में राग, ताल और वाद्यों का वर्णन मिलता है।
- गुप्त काल में संगीत का विकास हुआ और जाति गायन प्रचलित हुआ।
- प्राचीन काल में मार्ग संगीत (शास्त्रीय) और देशी संगीत (लोक) का भेद था।
मध्यकालीन काल (दिल्ली सल्तनत से मुगल काल तक):
- 13वीं शताब्दी में अमीर खुसरो ने ख्याल, तराना और कई रागों का विकास किया।
- मुगल काल में तानसेन (अकबर के दरबारी) ने राग दरबारी, मियाँ मल्हार आदि बनाए।
- इस काल में हिंदुस्तानी संगीत का स्वरूप स्पष्ट हुआ और घराना प्रथा शुरू हुई।
- मध्यकाल में ध्रुपद, ख्याल, ठुमरी आदि गायन शैलियों का विकास हुआ।
इस प्रकार प्राचीन काल से मध्यकाल तक भारतीय संगीत ने निरंतर विकास किया और आज के स्वरूप तक पहुँचा।
-
चौदह (14) मात्रा की दो तालों का विवरण ठेका सहित लिखिए।
Describe two talas of fourteen (14) beats with Theka. 2+2=4
उत्तर: 14 मात्राओं की दो प्रमुख तालें हैं:
1. ध्रुपद ताल (चौताल का एक प्रकार):
- मात्राएँ: 14
- खंड: 4 (3+4+3+4)
- ठेका: धा धा धिं ता किट धा धिं ता किट धा धिं ता किट
- ताली-खाली: 1 (ताली), 2 (खाली), 3 (ताली), 4 (खाली)
2. आड़ा चौताल:
- मात्राएँ: 14
- खंड: 4 (3+4+3+4)
- ठेका: धा धिं ता किट धा धिं ता किट धा धिं ता किट
- ताली-खाली: 1 (ताली), 2 (खाली), 3 (ताली), 4 (खाली)
दोनों तालों में 14 मात्राएँ होती हैं और इनका प्रयोग ध्रुपद गायन में होता है।
-
निम्नलिखित बोलों से ताल पहचानकर उनका नाम लिखिए:
Identify Tala from the given Bols and write the name of Tala: 3
-
| धा तिन ना
0
उत्तर: तीनताल (Tintal)
स्पष्टीकरण: तीनताल के बोल "धा तिन ना" से शुरू होते हैं और यह 16 मात्राओं की ताल है।
-
| धिन ना
0
उत्तर: एकताल (Ektal)
स्पष्टीकरण: एकताल के बोल "धिन ना" से शुरू होते हैं और यह 12 मात्राओं की ताल है।
-
SS-606 | 55-6,63,64,65,66,67,68,69,70--शघञ्जअंट (ए & I)
प्रश्न 6
झपताल एवं सूलताल को दुगुन व चौगुन सहित लिखिए।
Write Tala Jhaptal & Sooltal with Dugun & Chaugun.
झपताल (Jhaptal)
- मात्राएँ: 10
- विभाग: 2+3+2+3
- ताली-खाली: ताली 1, 3; खाली 2
- बोल: धी ना | धी धी ना | ती ना | धी धी ना |
दुगुन (Dugun) - दोगुनी गति
धी ना धी धी ना ती ना धी धी ना | धी ना धी धी ना ती ना धी धी ना ||
चौगुन (Chaugun) - चौगुनी गति
धी ना धी धी ना ती ना धी धी ना धी ना धी धी ना ती ना धी धी ना | धी ना धी धी ना ती ना धी धी ना धी ना धी धी ना ती ना धी धी ना ||
सूलताल (Sooltal)
- मात्राएँ: 10
- विभाग: 2+2+2+2+2
- ताली-खाली: ताली 1, 2, 3, 4; खाली 5
- बोल: धा धा | धिं ता | तिट कट | गदी गीना | धा धा |
दुगुन (Dugun)
धा धा धिं ता तिट कट गदी गीना धा धा | धा धा धिं ता तिट कट गदी गीना धा धा ||
चौगुन (Chaugun)
धा धा धिं ता तिट कट गदी गीना धा धा धा धा धिं ता तिट कट गदी गीना धा धा | धा धा धिं ता तिट कट गदी गीना धा धा धा धा धिं ता तिट कट गदी गीना धा धा ||
प्रश्न 7
अपने पाठ्यक्रम में से किसी एक तबला वादक का जीवन परिचय एवं योगदान लिखिए।
Write the life sketch and contribution of one tabla player from your syllabus.
उस्ताद अल्लारखा (Ustad Allarakha)
जीवन परिचय: उस्ताद अल्लारखा का जन्म 29 अप्रैल 1919 को पंजाब के फगवाड़ा में हुआ। वे तबले के प्रसिद्ध वादक थे और पंजाब घराने से संबंधित थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता से प्राप्त की और बाद में उस्ताद कादिर बख्श के शिष्य बने।
योगदान: उस्ताद अल्लारखा ने तबले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने सितार वादक पंडित रविशंकर के साथ मिलकर भारतीय शास्त्रीय संगीत को विश्वभर में लोकप्रिय बनाया। उनकी वादन शैली में तेज़ लयकारी और स्पष्ट बोलों की विशेषता थी। उन्हें पद्मश्री (1977) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके पुत्र उस्ताद ज़ाकिर हुसैन भी विश्वप्रसिद्ध तबला वादक हैं।
SS—6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V & I) | SS-606 | 6 | 4