RBSE Class 12th 2015 Typewriting Hindi-SS-34-2015 Previous Year Papers
You opened the RBSE Class 12th 2015 Typewriting Hindi-SS-34-2015 Previous Year Papers page — a focused place to read the real previous year question paper for that subject and year. RBSE Solution keeps exam-year sets together so you can practise the same cycle your seniors faced.
Previous year papers reward patience: read instructions, note mark distribution, then attempt questions before peeking at solutions elsewhere on the site. This URL always loads the same free previous year papers content for Typewriting Hindi-SS-34-2015 (2015).
Use the details table to confirm class and year, then scroll to the paper images or PDF below. More subjects from 2015 are linked later on this page.
Paper details
Quick reference for this previous year papers page — confirm board, class, and year & subject before you study.
| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2015 |
| Subject | Typewriting Hindi-SS-34-2015 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
The table summarises this Previous Year Papers resource. Confirm RBSE, Class 12th, year 2015, and subject Typewriting Hindi-SS-34-2015 before studying.
RBSE Solution organises previous year papers so each URL carries chapter-specific guidance — better for students and for search engines than one generic paragraph for the whole class.
How to practise with this question paper
Stage one: read the Typewriting Hindi-SS-34-2015 question paper from 2015 without a timer and highlight command words — explain, prove, calculate, discuss. Stage two: attempt selected questions closed-book. Stage three: compare with solutions or teacher feedback.
Previous Year Papers work best when you log mistakes by topic, not only by question number. That log becomes your revision index before pre-boards.
RBSE Class 12th 2015 Typewriting Hindi-SS-34-2015
Scroll through the Previous Year Papers pages for Typewriting Hindi-SS-34-2015 (2015).
Rajasthan Board Class 12th Typewriting Hindi-SS-34-2015 2015 solved Previous Year Question Papers
नामांक Roll No.
No. of Questions — 3 SS—34—T.W. (Hindi)
No. of Printed Pages — 7
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2015
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2015
हिन्दी टंकण लिपि
( TYPEWRITING HINDI )
समय — 1 घण्टा
पूर्णांक — 40
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
- प्रत्येक कागज के एक तरफ टंकण करें।
- प्रत्येक प्रश्न को नये पृष्ठ से आरम्भ करना है।
- प्रत्येक लाइन के बीच में द्विगुणित अवकाश (Double Spacing) देकर टंकण करना है।
- प्रत्येक प्रश्न के लिए 2 अंक सजावट के निर्धारित है।
निम्नलिखित अवतरण को टंकित कीजिए :
अंक
टंकण- 8
सजावट -- 2
कुल -- 20
न्यायिक अधिकारी पर रहती है
सबकी नजर
राजस्थान में हाल ही में जिन 137 न्यायिक अधिकारियों का चयन हुआ है उनसे राजस्थान की जनता को बहुत अपेक्षाएँ हैं। ये सभी अधिकारी प्रथम श्रेणी न्यायिक अधिकारी के पद को सुशोभित करेंगे जो कि न्याय प्रणाली का प्रवेश द्वार होता है। इसी तरह से अन्य राज्यों में भी न्यायिक अधिकारी नियुक्त होते हैं। प्रवेश द्वार पर आसीन होने के कारण एक न्यायिक अधिकारी को कर्मठ, न्यायप्रिय, कर्त्तव्यनिष्ठ और ईमानदार होना चाहिए।
अब तक जो व्यक्ति समाज में खुले आम बिना रोक-टोक के विचरण करता था, अब इस पद पर सुशोभित होने के बाद उसे अनुशासनबद्ध होना ही होगा। उसे अब समाज में इस तरह रहना होगा जिस प्रकार समुद्र में सीप रहती है, जल में रहने के बावजूद उसके भीतर जल की एक बूंद भी प्रवेश नहीं कर पाती। एक न्यायिक अधिकारी का जीवन उस विधवा स्त्री की तरह होता है कि उसका भाई भी जब उससे मिलने आता है, तो समाज उसे संदेह की दृष्टि से देखता है।
SS—34—T.W. (Hindi) | SS-6034 |
न्यायिक अधिकारी के गुण और कर्तव्य
न्यायिक अधिकारी के लिए केवल कानून में निष्णात होना ही पर्याप्त नहीं है, उसे निष्पक्ष और व्यवहार कुशल भी होना चाहिए। न्याय करने की जो शक्ति उसे मिली है उसका सदुपयोग करना चाहिए। इस शक्ति के कारण न्यायिक अधिकारी को अहंकार से ग्रसित नहीं होना चाहिए। समाज में उसकी प्रतिष्ठा ऐसी होनी चाहिए जिससे उस पर कोई अंगुली नहीं उठा सके।
सबसे महत्वपूर्ण सुझाव यह है कि न्यायिक अधिकारी को कभी भी क्रोधित नहीं होना चाहिए। मुकदमें की सुनवाई करते समय कई बार ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं कि वातावरण दूषित होने लगता है। कई बार वकील आक्रोशित होकर ऐसे तर्क प्रस्तुत कर देते हैं कि धैर्य जवाब देने लगता है। लेकिन न्यायिक अधिकारी को संयमित रहना चाहिए। उसे वातावरण को सहज बनाने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।
बहुधा यह भी देखा जाता है कि न्यायिक अधिकारी अपनी कुर्सी पर बैठ कर ज्ञान का प्रदर्शन करने लगता है। वे यह दिखाने का प्रयास करते हैं कि विवादित विषय के संबंध में उन्हें पूर्ण कानूनी जानकारी है। उन्हें मौन रहकर पक्ष विपक्ष के तर्क सुनने चाहिए। उनकी क्रिया ऐसी नहीं लगनी चाहिए कि उनका झुकाव किसी एक पक्ष की ओर है।
वैसे तो प्रत्येक व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह ईमानदार रहे लेकिन वर्तमान समय में, जबकि भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होती जा रही हैं, ईमानदारी एक "विशिष्ट गुण" बन कर रह गई है।
ईमानदारी और न्यायिक अधिकारी के कर्तव्य
ईमानदारी के संबंध में बहुत बढ़-चढ़कर बातें की जाती हैं। कोई भी सहजता से ईमानदारी पर भाषण देने लगता है लेकिन व्यक्ति को ईमानदार उस समय होना चाहिए जब वह अकेला हो और उसको पकड़े जाने का भय नहीं हो। व्यक्ति की नियत किसी भी स्थिति में खराब नहीं होना चाहिए। जहाँ तक सम्भव हो सके उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों में घुलने-मिलने से बचना चाहिए। इसका तात्पर्य यह नहीं कि परिवार के साथ किसी सार्वजनिक स्थल पर न जाय परन्तु उसे बीजक का भुगतान करने में सचेत रहना चाहिए। कई बार उसे कृतज्ञ करने का प्रयास किया जाएगा किन्तु विनम्रता से ऐसे प्रस्तावों को अस्वीकार कर देना चाहिए।
न्यायालयों में मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है। इस ओर भी उन्हें ध्यान देना होगा। न्यायालयों का प्रशासन अपने हाथों में रखना होगा। पत्रावलियों की आदेश पत्रक लिखने के लिए उसे पाठक पर आश्रित नहीं रहना चाहिए। सभी पत्रावलियों पर आदेश अपनी हस्तलिपि में ही लिखना चाहिए। तारीख पेशी देने का निमंत्रण भी उसे पाठक के हाथ में नहीं देना चाहिए। प्राय: यह भी देखा जाता है कि न्यायिक अधिकारी बैठक कक्ष में बैठे रहते हैं। यह उचित नहीं है। नियत समय पर न्यायालय में बैठना एवं केवल मुकदमों की चर्चा करना ही न्यायिक अधिकारी का कार्य है।
वकीलों का तर्क-वितर्क बड़े ही ध्यान से सुन कर न्याय करना चाहिए। न्याय करते समय न्यायिक अधिकारी को अपना-पराया, जाति-पाति, धर्म एवं राजनीति आदि को परे रखकर न्याय करना चाहिए। थोड़ी सी-भी चूक नुकसान देय हो सकती है।
SS—34—T.W. (Hindi) | SS-6034 |
2. निम्नलिखित पत्र को यथोचित रूप देकर टंकित कीजिए :
अंक
- टंकण – 8
- सजावट – 2
- कुल – 10
प्राचार्य कार्यालय,
उच्च माध्यमिक विद्यालय, जबलपुर
पत्र संख्या: जब/2014/73
दिनांक: 4-2-2014
प्रिय श्री माथुर साहब,
सादर प्रणाम। मैं मेरे कार्यालय के पत्र सं० जब/2014/477 दिनांक 07-08-2014 की ओर आकर्षित करते हुए यह बतलाना चाहता हूँ कि इस विद्यालय में टंकण एवं कम्प्यूटर का विषय शीघ्रातिशीघ्र खुलवाने की अनुमति प्रदान करें, जिससे छात्रों को सुविधा मिल सके एवं विद्यालय में छात्रों की संख्या बढ़ जाएगी, क्योंकि समय में इसकी सर्वाधिक मांग है।
महोदय, हमारे विद्यालय में टंकण एवं कम्प्यूटर विषय के लिए अलग-अलग पर्याप्त मात्रा में कक्षा-कक्ष एवं उपस्कर आदि भी उपलब्ध हैं। पाँच कम्प्यूटर, पाँच-पाँच हिन्दी एवं अंग्रेजी टंकण यंत्र भी इस शहर का एक भामाशाह विद्यालय को देने के लिए तैयार है।
भवदीय,
प्राचार्य
नोट: यह पत्र एक औपचारिक पत्र है जिसमें टंकण एवं कम्प्यूटर विषय खोलने की अनुमति माँगी गई है। पत्र को सही प्रारूप (प्रेषक का पता, दिनांक, विषय, अभिवादन, मुख्य भाग, समापन और हस्ताक्षर) में टंकित किया जाना चाहिए। सजावट के लिए उचित मार्जिन, पैराग्राफ संरेखण और स्पष्ट फॉन्ट का उपयोग करें।
Page content could not be transcribed.
3. निम्नलिखित सारणी को यथोचित रूप देकर टंकित कीजिए :
| क्रम सं० | विवरण | कुल खर्च | अनुपात | 300 इकाई | 400 इकाई |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | प्रत्यक्ष सामग्री | 98,000 | 3:8 | 54,000 | 44,000 |
| 2 | प्रत्यक्ष व्यय | 36,000 | 1:2 | 2,000 | 24,000 |
| 3 | भंडार खर्च | 39,600 | 3:8 | 10,800 | 28,800 |
| 4 | संयंत्र | 7,600 | 3:8 | 4,800 | 2,800 |
| 5 | मूल्य ह्रास | 8,800 | 3:8 | 2,400 | 6,400 |
| 6 | जल श्रम कल्याण | 6,000 | 1:2 | 2,000 | 4,000 |
| 7 | कारखाना व्यय | 8,000 | — | — | 24,000 |
| 8 | विक्रय व्यय | 27,000 | — | — | 36,000 |
| 9 | कुल व्यय | 3,000 | — | — | 2,80,000 |
| 10 | प्रति इकाई | — | — | 436.67 | 700 |
रामानन्द एंड कम्पनी — लागत विवरण पत्रक