RBSE Class 12th 2016 Drawing-SS-17-2016 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2016 |
| Subject | Drawing-SS-17-2016 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2016 Drawing-SS-17-2016
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Rajasthan Board Class 12th Drawing-SS-17-2016 2016 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2016
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2016
चित्रकला
DRAWING
समय : 3¼ घण्टे | पूर्णांक : 24
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity. - प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
SLNo. : PT TPT | नामांक Roll No.
No. of Questions — 30 S S-7-Drawing
No. of Printed Pages — 7
प्रश्न पत्र को खोलने के लिए T से काटिए।
Tear Here to Open the Question Paper
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प्रश्न संख्या (Question Numbers) और अंक योजना (Marking Scheme)
| प्रश्न संख्या (Q. Nos.) | अंक प्रत्येक प्रश्न (Marks per question) | उत्तर की शब्द सीमा (Word limit of answer) |
|---|---|---|
| -2 | 2 | 0 |
| 3-24 | 2 | 25 |
| 25-27 | 2 | 50 |
| 28-30 | 2 | 50 |
7. प्रश्न क्रमांक 29 और 30 में आंतरिक विकल्प हैं।
There are internal choices in Question Nos. 29 and 30.
प्रश्न (Questions)
1) छः दांत जातक कथा के बारे में बताइये।
Describe the story of "Chhadant Jatak."
2) भारत में प्रागैतिहासिक काल के चित्र किन-किन स्थानों में मिले?
From which places the pre-historic paintings sites found?
3) शाहजहाँ कालीन दो चित्रकारों के नाम बताइये।
Write the name of any two artist of "Shahjahan" Period.
उत्तर (Answers)
1) छः दांत जातक कथा (Chhadant Jatak):
यह कथा बुद्ध के पिछले जन्म की है जब वे एक छः दांतों वाले हाथी (चदंत) थे। इस हाथी की पत्नी ने ईर्ष्या के कारण राजा को इसके दांत लाने का आदेश दिया। राजा के शिकारी ने हाथी को मार दिया और दांत ले गया। बाद में पत्नी को पश्चाताप हुआ। यह कथा त्याग और करुणा का संदेश देती है।
2) प्रागैतिहासिक चित्र स्थल (Pre-historic painting sites in India):
भारत में प्रागैतिहासिक काल के चित्र मुख्यतः निम्नलिखित स्थानों पर मिले हैं:
- भीमबेटका (मध्य प्रदेश)
- सिंहगढ़ (मध्य प्रदेश)
- होशंगाबाद (मध्य प्रदेश)
- कुमाऊँ (उत्तराखंड)
- बुंदेलखंड (उत्तर प्रदेश)
- रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
3) शाहजहाँ कालीन दो चित्रकार (Two artists of Shahjahan period):
शाहजहाँ के शासनकाल के प्रमुख चित्रकार थे:
- बिशनदास
- मनोहर
इनके अलावा गोवर्धन और दौलत भी इस काल के प्रसिद्ध चित्रकार थे।
SS-7-Drawing | [2] | [7] | [2]
प्रश्न 4
भारतमाता' नामक चित्र के चित्रकार का नाम बताइये तथा इन्हीं चित्रकार की किसी एक कृत्ति का नाम लिखिये ?
Who paint the painting "Bharatmata" and also give an example of any one painting of same artist?
उत्तर: 'भारतमाता' चित्र के चित्रकार अवनींद्रनाथ टैगोर हैं। इनकी एक अन्य प्रसिद्ध कृति 'शिव और पार्वती' या 'बुद्ध और सुजाता' है।
प्रश्न 5
प्रागैतिहासिक चित्रों का समय लिखिये |
Write the period of pre historic paintings.
उत्तर: प्रागैतिहासिक चित्रों का समय लगभग 30,000 ईसा पूर्व से 10,000 ईसा पूर्व (पुरापाषाण काल) माना जाता है।
प्रश्न 6
अजन्ता गुफा चित्रों में किस पशु को प्रधानता दी गई है ?
Which animal is repeatedly painted in the Ajanta caves?
उत्तर: अजन्ता गुफा चित्रों में हाथी को प्रधानता दी गई है।
प्रश्न 7
गोलकुण्डा चित्र शैली किससे संबंद्ध है ?
Golkunda school of painting associated with whom?
उत्तर: गोलकुण्डा चित्र शैली कुतुबशाही वंश (गोलकुण्डा सल्तनत) से संबंद्ध है।
प्रश्न 8
कम्पनी शैली के किन्हीं प्रमुख दो चित्रकारों के नाम बताइये ।
Write the any two artists from ‘Company School.’
उत्तर: कम्पनी शैली के दो प्रमुख चित्रकार हैं:
- सेवक राम (Sewak Ram)
- गुलाम अली खान (Ghulam Ali Khan)
प्रश्न 9
गोवर्धनलाल जोशी 'बाबा' के चित्र प्रमुखतः किस विषय पर आधारित है ?
Gowardhan Lal Joshi "Baba"s work mainly based on which subject?
उत्तर: गोवर्धनलाल जोशी 'बाबा' के चित्र प्रमुखतः लोक देवी-देवताओं और राजस्थानी लोक जीवन पर आधारित हैं।
प्रश्न 10
अमृता शेरगिल के किन्हीं दो चित्रों के नाम लिखो।
Write the name of two paintings of "Amrita Shergill".
उत्तर: अमृता शेरगिल के दो प्रसिद्ध चित्रों के नाम हैं:
- तीन कन्याएँ (Three Girls)
- ब्रह्मचारी (Brahmachari)
प्रश्न 11
अकबर ने किन दो चित्रकारों से चित्रकारी करने का अभ्यास किया?
Write the name of the two artists those who taught The Empire Akbar?
उत्तर: अकबर ने निम्नलिखित दो चित्रकारों से चित्रकारी करने का अभ्यास किया:
- अब्दुस समद (Abdus Samad)
- मीर सैयद अली (Mir Sayyid Ali)
प्रश्न 12
राजा रवि वर्मा के किन्हीं दो चित्रों के नाम बताइये।
Write the name of any two paintings of Raja Ravi Verma.
उत्तर: राजा रवि वर्मा के दो प्रसिद्ध चित्रों के नाम हैं:
- शकुंतला (Shakuntala)
- हंस-दमयंती (Hamsa-Damayanti)
प्रश्न 13
"वायनाड़-के-अड़कल" के चित्रों का वर्णन कीजिये।
Describe the paintings of 'Vaynad-K-Adkal'.
उत्तर: "वायनाड़-के-अड़कल" (Wayanad Ke Adkal) चित्रों का संबंध केरल के वायनाड क्षेत्र की आदिवासी चित्रकला से है। ये चित्र मुख्यतः भित्तिचित्र (म्यूरल) के रूप में पाए जाते हैं। इनमें प्रकृति, देवी-देवताओं, और आदिवासी जीवन के दृश्यों को दर्शाया गया है। रंगों का प्रयोग प्राकृतिक होता है, जिसमें लाल, पीला, हरा और सफेद रंग प्रमुख हैं। चित्रों में रेखाएँ स्पष्ट और बोल्ड होती हैं, तथा आकृतियाँ सरल और भावपूर्ण होती हैं। यह शैली तंत्र और मंत्र से प्रभावित मानी जाती है।
प्रश्न 14
"बनी-ठनी" नामक चित्र किस शैली में चित्रित है तथा इस चित्र पर एक संक्षिप्त टिप्पणी कीजिये।
'Bani-thani' painting is associated with which school of painting? Give a brief note on it.
उत्तर: "बनी-ठनी" चित्र राजस्थानी चित्रकला की किशनगढ़ शैली से संबंधित है। यह चित्र 18वीं शताब्दी में चित्रित किया गया था। इसमें एक सुंदर स्त्री को दर्शाया गया है, जो अपने श्रृंगार में व्यस्त है। चित्र में नायिका के सौंदर्य, वस्त्राभूषण और भाव-भंगिमा को अत्यंत सूक्ष्मता से उकेरा गया है। इस चित्र की विशेषता है कि इसमें नायिका के चेहरे पर एक विशिष्ट प्रकार का भाव (लज्जा और आत्मविश्वास का मिश्रण) दिखाया गया है। रंगों का प्रयोग संयमित और सजीव है, जिसमें सुनहरा, लाल और नीला रंग प्रमुख हैं। यह चित्र राजस्थानी लघु चित्रकला की उत्कृष्ट कृति माना जाता है।
प्रश्न 15
पहाड़ी चित्र शैली पर प्रकाश डालिये।
Throw light on Pahari-paintings.
उत्तर: पहाड़ी चित्र शैली (Pahari Painting) भारतीय लघु चित्रकला की एक महत्वपूर्ण शैली है, जो 17वीं से 19वीं शताब्दी तक हिमालय की तलहटी में स्थित राज्यों (जैसे बसोली, गुलेर, कांगड़ा, चंबा, मंडी, कुल्लू आदि) में विकसित हुई। इस शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- विषय: मुख्यतः राधा-कृष्ण की लीलाएँ, शिव-पार्वती, रामायण, महाभारत, ऋतुचक्र, और नायिका-भेद के दृश्य।
- रंग: चमकीले और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग, विशेषकर लाल, पीला, नीला, हरा और सफेद।
- रेखाएँ: कोमल, लयात्मक और प्रवाहपूर्ण रेखाएँ, जो आकृतियों में सजीवता लाती हैं।
- प्रकृति चित्रण: पेड़-पौधे, पहाड़, नदियाँ, और बादलों का सुंदर चित्रण।
- मानव आकृतियाँ: स्त्री-पुरुष आकृतियाँ सुडौल, लंबी और सुंदर होती हैं, जिनमें भाव-भंगिमाओं का विशेष ध्यान रखा जाता है।
- प्रमुख केंद्र: बसोली शैली (गहरे रंग, तीखी नाक), गुलेर शैली (कोमल रेखाएँ), और कांगड़ा शैली (सौंदर्य और प्रकृति का सजीव चित्रण) प्रमुख हैं।
पहाड़ी चित्रकला भारतीय कला के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है, जो भक्ति भावना और प्रकृति प्रेम का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है।
6) “शिव का विष पान” नामक चित्र के चित्रकार का नाम बताते हुए इस चित्र का कलात्मक वर्णन कीजिये।
Describe the artistic value of "Shiv ka vish pan" painting and write the name of artist of this painting.
चित्रकार का नाम: इस चित्र के चित्रकार राजा रवि वर्मा हैं।
कलात्मक वर्णन: यह चित्र पौराणिक कथा पर आधारित है जिसमें भगवान शिव विषपान कर रहे हैं। चित्र में शिव का शांत और गंभीर भाव दर्शाया गया है। उनके गले का नीला रंग (नीलकंठ) विष के प्रभाव को दर्शाता है। पार्वती जी का चिंतित भाव और गंगा का शिव के जटाओं से बहना चित्र को जीवंत बनाता है। रंगों का सामंजस्य और प्रकाश-छाया का प्रभाव चित्र की कलात्मकता को बढ़ाता है।
7) भारत के तीन समसामयिक चित्रकारों के नाम बताइये।
Write the name of any three contemporary artists of India.
- एम. एफ. हुसैन (M. F. Husain)
- एस. एच. रज़ा (S. H. Raza)
- त्येब मेहता (Tyeb Mehta)
8) “समुद्र का मान मर्दन करते हुए राम” नामक चित्र का कलात्मक वर्णन कीजिये।
Describe the artistic value of "Samandra ka man mardan karte hua Ram".
यह चित्र रामायण के प्रसंग पर आधारित है जिसमें भगवान राम समुद्र को क्रोधित करते हुए दिखाए गए हैं। चित्र में राम का आक्रामक भाव और धनुष-बाण की मुद्रा उनके क्रोध को दर्शाती है। समुद्र की लहरों का उफान और आकाश में बादलों का घिरना वातावरण को नाटकीय बनाता है। रंगों का गहरा प्रभाव और रेखाओं की सटीकता चित्र को कलात्मक बनाती है। यह चित्र भारतीय चित्रकला की परंपरा का उत्कृष्ट उदाहरण है।
9) कृपालसिंह शेखावत के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालिये।
Throw light on the personality & creative attitude of "Kripalsingh Shekhawat".
व्यक्तित्व: कृपालसिंह शेखावत राजस्थान के प्रसिद्ध चित्रकार हैं। वे अपनी सादगी और कला के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। उनका व्यक्तित्व विनम्र और गंभीर था।
कृतित्व: उन्होंने मुख्यतः राजस्थानी लोक जीवन, प्रकृति और पौराणिक विषयों पर चित्र बनाए। उनकी कला में पारंपरिक राजस्थानी शैली का प्रभाव स्पष्ट दिखता है। उनके चित्रों में रंगों का सजीव प्रयोग और रेखाओं की सुंदरता विशेष उल्लेखनीय है। वे राजस्थानी चित्रकला के पुनरुत्थान में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कलाकार हैं।
20) प्रागैतिहासिक कालीन चित्रों के प्रमुख उद्देश्य लिखिये।
Underline the main aims of Pre-Historic Art.
- धार्मिक एवं जादुई उद्देश्य: शिकार की सफलता के लिए जादुई अनुष्ठानों में चित्रों का उपयोग किया जाता था।
- संचार का माध्यम: चित्रों के माध्यम से आपसी संवाद और जानकारी का आदान-प्रदान होता था।
- शिक्षण एवं प्रशिक्षण: युवाओं को शिकार और जीवन कौशल सिखाने के लिए चित्रों का उपयोग किया जाता था।
- सौंदर्यबोध की अभिव्यक्ति: मानव के भीतर निहित सौंदर्य की भावना को व्यक्त करना।
- दैनिक जीवन का दस्तावेजीकरण: शिकार, नृत्य और अन्य गतिविधियों को चित्रित करना।
2]) 'मरणासन्न राजकुमारी' नामक चित्र में प्रभाविता कैसे दर्शाई गई है?
In which manner dominance is expressed in painting of "Maranasann Rajkumari"?
इस चित्र में प्रभाविता (dominance) को मुख्य पात्र राजकुमारी के केंद्रीय स्थान और उसके आसपास के वातावरण के माध्यम से दर्शाया गया है। राजकुमारी को चित्र के मध्य में रखा गया है, जो दर्शकों का ध्यान तुरंत उसकी ओर खींचता है। उसके शरीर की मुद्रा और चेहरे के भाव मृत्यु के निकट होने की स्थिति को दर्शाते हैं, जो चित्र में प्रभावशाली तत्व है। चारों ओर के पात्रों और वस्तुओं को छोटा और धुंधला दिखाकर राजकुमारी को प्रमुखता दी गई है। रंगों का विपरीत प्रयोग भी प्रभाविता को बढ़ाता है।
प्रश्न 22
“जगदीश स्वामीनाथन के चित्रों के कलात्मक गुणों पर प्रकाश डालिये।”
Throw light on the art value in the paintings of "Jagdish Swaminathan".
उत्तर: जगदीश स्वामीनाथन (1928–1994) भारतीय आधुनिक कला के अग्रणी चित्रकार थे। उनके चित्रों के प्रमुख कलात्मक गुण निम्नलिखित हैं:
- अमूर्तता (Abstraction): उन्होंने प्रकृति और मानवीय भावनाओं को अमूर्त रूपों में प्रस्तुत किया।
- रंगों का संयोजन: चमकीले और विपरीत रंगों (जैसे लाल, नीला, पीला) का प्रयोग करके दृश्य प्रभाव उत्पन्न किया।
- प्रतीकात्मकता (Symbolism): उनके चित्रों में पक्षी, पेड़, और ज्यामितीय आकृतियाँ गहरे प्रतीकात्मक अर्थ रखती हैं।
- सादगी और संतुलन: रचना में सादगी के बावजूद दृश्य संतुलन बनाए रखा।
- भारतीयता का समावेश: पश्चिमी आधुनिकता के साथ भारतीय लोक कला और आदिवासी कला के तत्वों का मिश्रण।
इन गुणों के कारण स्वामीनाथन के चित्र भारतीय आधुनिक कला में एक विशिष्ट स्थान रखते हैं।
प्रश्न 23
बौद्ध चित्रकला से सम्बन्धित प्रमुख किन्हीं तीन केन्द्रों के नाम लिखिये।
Write the name of any three places related to Buddhist painting.
उत्तर: बौद्ध चित्रकला से सम्बन्धित तीन प्रमुख केन्द्र निम्नलिखित हैं:
- अजंता (महाराष्ट्र): यहाँ के गुफा चित्र बौद्ध धर्म के जातक कथाओं और बुद्ध के जीवन को दर्शाते हैं।
- बाघ (मध्य प्रदेश): यहाँ के चित्र अजंता के समकालीन हैं और बौद्ध भिक्षुओं के जीवन को चित्रित करते हैं।
- सारनाथ (उत्तर प्रदेश): यह बुद्ध के प्रथम उपदेश का स्थान है, जहाँ चित्रकला के अवशेष मिले हैं।
प्रश्न 24
बौद्ध कालीन चित्रों का विद्वानों ने समय का क्या निर्धारण किया है?
What is the period of Buddhist paintings decided by the archaeologists?
उत्तर: विद्वानों ने बौद्ध कालीन चित्रों का समय निर्धारण लगभग दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से सातवीं शताब्दी ईस्वी तक किया है। विशेष रूप से अजंता के चित्रों को दो चरणों में बाँटा गया है:
- प्रारंभिक चरण: दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पहली शताब्दी ईस्वी (हीनयान काल)।
- उत्तरवर्ती चरण: पाँचवीं से सातवीं शताब्दी ईस्वी (महायान काल)।
यह निर्धारण शैलीगत विश्लेषण, शिलालेखों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर किया गया है।
प्रश्न 25
“बाबर सोन नदी पार करते हुए” नामक चित्र का वर्णन करते हुए अकबर कालीन चित्रों की विशेषताएँ बताइये।
Describe the painting of "Babar cross the Son river" and highlight characteristics of painting of Akbar's period.
उत्तर:
चित्र का वर्णन: "बाबर सोन नदी पार करते हुए" मुगल लघु चित्रकला का एक प्रसिद्ध उदाहरण है। इसमें बाबर को अपने सैनिकों और हाथियों के साथ सोन नदी पार करते हुए दिखाया गया है। चित्र में नदी के पानी में हाथी और घोड़े तैर रहे हैं, और बाबर एक नाव में बैठे हैं। पृष्ठभूमि में पेड़-पौधे और पहाड़ियाँ दिखाई देती हैं। यह चित्र बाबरनामा का एक भाग है।
अकबर कालीन चित्रों की विशेषताएँ:
- यथार्थवाद (Realism): प्रकृति, मानव आकृतियों और घटनाओं को यथासंभव वास्तविक रूप में चित्रित किया गया।
- परिप्रेक्ष्य (Perspective): दूरी और गहराई दिखाने के लिए परिप्रेक्ष्य का प्रयोग किया गया।
- रंगों का समृद्ध प्रयोग: चमकीले और गहरे रंगों (जैसे सोना, लाल, नीला) का प्रयोग।
- विस्तार (Detail): वस्त्रों, आभूषणों, और वास्तुकला में बारीक विवरण।
- फारसी और भारतीय शैली का मिश्रण: फारसी लघु चित्रकला की तकनीक और भारतीय विषयों का सम्मिलन।
- दरबारी और ऐतिहासिक विषय: शाही दरबार, युद्ध, शिकार और ऐतिहासिक घटनाओं का चित्रण।
प्रश्न 26
प्रागैतिहासिक चित्रों की विशेषताएँ बताइये।
Describe the characteristics of pre-historic paintings.
उत्तर: प्रागैतिहासिक चित्रों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- प्राकृतिक रंगों का प्रयोग: लाल, पीले, काले और सफेद रंगों का उपयोग, जो खनिजों और वनस्पतियों से प्राप्त किए गए।
- पशुओं का चित्रण: मुख्यतः शिकार किए जाने वाले जानवरों (बाइसन, हिरण, घोड़ा, बैल) को चित्रित किया गया।
- मानव आकृतियाँ: सरल और शैलीबद्ध मानव आकृतियाँ, प्रायः शिकार या नृत्य करते हुए।
- गुफाओं और चट्टानों पर चित्रण: ये चित्र गुफाओं की दीवारों और छतों पर बनाए गए।
- प्रतीकात्मकता: कई चित्र जादू-टोने या धार्मिक अनुष्ठानों से संबंधित माने जाते हैं।
- सादगी और शक्ति: रेखाएँ सरल लेकिन प्रभावशाली होती हैं, जो जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को दर्शाती हैं।
प्रश्न 27
“राजा - सावंत सिंह (नागरीदास) का समय किशनगढ़ कला की दृष्टि से महत्वपूर्ण था।” वर्णन कीजिये।
Describe the importance of "Raja Sawant Singh (Nagaridas) period in reference to art of Kishangarh."
उत्तर: राजा सावंत सिंह (1699–1764), जिन्हें नागरीदास के नाम से भी जाना जाता है, किशनगढ़ शैली के संरक्षक और स्वयं एक कवि थे। उनके शासनकाल (1748–1764) को किशनगढ़ कला का स्वर्ण काल माना जाता है। इसका महत्व निम्नलिखित कारणों से है:
- राधा-कृष्ण भक्ति का चित्रण: सावंत सिंह स्वयं कृष्ण भक्त थे और उन्होंने राधा-कृष्ण के प्रेम को चित्रों में उतारने पर जोर दिया।
- बानी-ठानी (राधा) का चित्र: इस काल में बनी "बानी-ठानी" नामक चित्र किशनगढ़ शैली का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण है, जिसमें राधा को अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण रूप में दर्शाया गया है।
- निहाल चंद का योगदान: इस काल के प्रसिद्ध चित्रकार निहाल चंद ने अनेक उत्कृष्ट कृतियाँ बनाईं, जिनमें भावनाओं की गहराई और रंगों का सुंदर संयोजन देखने को मिलता है।
- शैलीगत विशेषताएँ: लंबी आँखें, नुकीली नाक, पतली कमर, और पारदर्शी वस्त्रों का चित्रण इस शैली की पहचान बना।
- साहित्य और कला का समन्वय: सावंत सिंह ने अपनी कविताओं को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त किया, जिससे कला और साहित्य का अद्भुत मेल हुआ।
इस प्रकार, राजा सावंत सिंह का समय किशनगढ़ कला को एक विशिष्ट पहचान और उच्च स्तर प्रदान करने में महत्वपूर्ण रहा।
प्रश्न 28
अजन्ता गुफा चित्रों की विषय-वस्तु एवं संयोजनात्मक पक्ष पर विस्तृत प्रकाश डालिये।
Throw light on subjective and compositional approach of Ajanta caves painting.
उत्तर:
विषय-वस्तु (Subjective Approach): अजन्ता गुफा चित्रों की विषय-वस्तु मुख्यतः बौद्ध धर्म से संबंधित है। इनमें भगवान बुद्ध के जीवन की विभिन्न घटनाओं (जातक कथाओं) का चित्रण किया गया है। इनमें बुद्ध के पूर्व जन्मों की कहानियाँ, उनके त्याग, दान, करुणा और मानवीय मूल्यों को दर्शाया गया है। इसके अलावा, इन चित्रों में तत्कालीन सामाजिक जीवन, राजसी ठाठ-बाट, नृत्य-संगीत, और प्रकृति के दृश्य भी प्रमुखता से उभरकर आते हैं।
संयोजनात्मक पक्ष (Compositional Approach): संयोजन की दृष्टि से अजन्ता के चित्र अत्यंत उच्च कोटि के हैं। इनमें निम्नलिखित विशेषताएँ देखने को मिलती हैं:
- एकल रेखा चित्रण: चित्रों में रेखाओं का प्रवाह बहुत सुंदर और लयबद्ध है।
- प्राकृतिक रंगों का प्रयोग: लाल, पीला, नीला, हरा और सफेद जैसे प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया गया है।
- भाव-भंगिमाएँ: पात्रों के चेहरे के भाव और शारीरिक मुद्राएँ अत्यंत जीवंत और अभिव्यंजक हैं।
- दृष्टिकोण: चित्रों में त्रि-आयामी प्रभाव उत्पन्न करने के लिए दृष्टिकोण का कुशल प्रयोग किया गया है।
- आकृतियों का समूहन: विभिन्न आकृतियों को इस प्रकार व्यवस्थित किया गया है कि वे कहानी को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें।
प्रश्न 29
बंगाल चित्र शैली की विशेषताओं का वर्णन कीजिये।
Describe the main characteristics of Bengal school of paintings.
उत्तर:
बंगाल चित्र शैली की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- राष्ट्रीय चेतना: इस शैली का उद्देश्य भारतीय कला को पुनर्जीवित करना और पश्चिमी प्रभाव को कम करना था।
- प्राचीन भारतीय कला से प्रेरणा: इसमें अजन्ता, मुगल और राजपूत चित्रकला शैलियों का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
- कोमल रेखाएँ: चित्रों में रेखाएँ कोमल, लयबद्ध और प्रवाहमयी होती हैं।
- जल रंग का प्रयोग: इस शैली में मुख्यतः जल रंग (वॉश तकनीक) का प्रयोग किया जाता है, जिससे चित्रों में एक पारदर्शी और मुलायम प्रभाव उत्पन्न होता है।
- विषय-वस्तु: चित्रों में पौराणिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक विषयों को प्राथमिकता दी गई है।
- भारतीयता का भाव: इन चित्रों में भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिकता की गहरी झलक मिलती है।
अथवा / OR
“अवनीन्द्रनाथ टैगोर के बंगाल चित्र शैली में योगदान का विस्तृत उल्लेख कीजिये।”
Describe the contribution of "Avanindra Nath Taigor" in Bengal School.
उत्तर:
अवनीन्द्रनाथ टैगोर को बंगाल चित्र शैली का जनक माना जाता है। उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा:
- शैली का प्रवर्तन: उन्होंने पश्चिमी यथार्थवादी शैली के विरोध में भारतीय परंपरा पर आधारित एक नई शैली का सूत्रपात किया, जिसे बाद में 'बंगाल स्कूल' के नाम से जाना गया।
- प्राचीन कला का पुनरुद्धार: उन्होंने अजन्ता, मुगल और राजपूत चित्रकला का गहन अध्ययन किया और उनकी तकनीकों को अपने चित्रों में आत्मसात किया।
- वॉश तकनीक का विकास: उन्होंने जल रंग की 'वॉश' तकनीक को विकसित किया, जिसमें पारदर्शी रंगों की कई परतें चढ़ाकर एक अलौकिक प्रभाव उत्पन्न किया जाता है।
- प्रसिद्ध चित्र: उनकी प्रसिद्ध कृतियों में 'भारत माता', 'शाहजहाँ की मृत्यु', 'उमर खय्याम' और 'बुद्ध और सुजाता' शामिल हैं।
- शिष्यों का निर्माण: उन्होंने नंदलाल बोस, असित कुमार हालदार, मुकुल चंद्र दे जैसे अनेक प्रतिभाशाली शिष्य तैयार किए, जिन्होंने इस शैली को आगे बढ़ाया।
प्रश्न 30
यामिनीराय के प्रमुख चित्रों का विवेचन कीजिये।
Describe the main paintings of "Yamini Ray".
उत्तर:
यामिनी राय (1887-1972) एक प्रसिद्ध भारतीय चित्रकार थे, जिन्होंने बंगाल शैली में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके प्रमुख चित्रों का विवेचन इस प्रकार है:
- कृष्ण और बलराम: इस चित्र में भगवान कृष्ण और बलराम को बाल रूप में दर्शाया गया है। इसमें रेखाओं की सफाई और रंगों का साहसिक प्रयोग देखने को मिलता है।
- राधा और कृष्ण: यह उनकी सबसे प्रसिद्ध कृतियों में से एक है। इसमें राधा और कृष्ण के प्रेम को अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण ढंग से चित्रित किया गया है।
- कटहल: यह एक स्थिर जीवन चित्र है, जिसमें उन्होंने कटहल को बड़ी ही कलात्मकता से प्रस्तुत किया है। यह चित्र उनकी शैली की सादगी और प्रभावशालीता को दर्शाता है।
- बंगाल की लोक कला से प्रभाव: उनके चित्रों में बंगाल की लोक कला (जैसे कालीघाट पेंटिंग) का स्पष्ट प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने सादे रंगों और मजबूत रेखाओं का प्रयोग किया।
- शैलीगत विशेषताएँ: उनके चित्रों में आकृतियाँ सरल, स्पष्ट और सीधी होती हैं। वे पारंपरिक भारतीय कला और आधुनिकता का एक अनूठा संगम प्रस्तुत करते हैं।
अथवा / OR
राजस्थान के समकालीन चित्रकारों के रचनात्मक कार्यों पर प्रकाश डालिये।
Throw light on the creative approach of contemporary artist of Rajasthan.
उत्तर:
राजस्थान के समकालीन चित्रकारों ने अपनी रचनात्मकता से भारतीय कला जगत में एक विशिष्ट स्थान बनाया है। उनके रचनात्मक कार्यों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- परंपरा और आधुनिकता का समन्वय: इन चित्रकारों ने राजस्थानी लोक कला और मिनिएचर पेंटिंग की पारंपरिक शैलियों को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ जोड़ा है।
- विषय-वस्तु: उनके चित्रों में राजस्थान की संस्कृति, लोक जीवन, त्योहार, रेगिस्तानी परिदृश्य, और सामाजिक मुद्दे प्रमुखता से उभरकर आते हैं।
- रंगों का प्रयोग: राजस्थानी चित्रकार अपने चित्रों में चटकीले और जीवंत रंगों (लाल, पीला, नीला, हरा) का प्रयोग करते हैं, जो राजस्थान की जीवंतता को दर्शाते हैं।
- प्रमुख चित्रकार: इस श्रेणी में रामगोपाल विजयवर्गीय, कृष्णा कुमार शर्मा, गुलाम मोहम्मद शेख, और ज्योति भट्ट जैसे कलाकारों का नाम उल्लेखनीय है।
- नवीन प्रयोग: इन कलाकारों ने न केवल पारंपरिक माध्यमों (जल रंग, टेम्पेरा) बल्कि नए माध्यमों (एक्रेलिक, मिश्रित मीडिया) में भी प्रयोग किए हैं।