RBSE Class 12th 2016 Hindi (Com)-SS-01-2016 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2016
Subject Hindi (Com)-SS-01-2016
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Hindi (Com)-SS-01-2016 2016 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2016
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2016

हिन्दी (अनिवार्य)

समय : 3¼ घण्टे     पूर्णांक : 80


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्द-सीमा में लिखें।
  4. जिस प्रश्न के अ, ब, स, द भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत् लिखें।

SS—01-Hindi(C) 40     Turn Over

खण्ड - क

अपठित काव्यांश

निम्नांकित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द है)

विचार लो कि मर्त्य हो मृत्यु से डरो कभी,
मरो परन्तु यों मरो कि याद जो करें सभी |
हुई न यों सु-मृत्यु तो वृथा मरे, वृथा जिये,
मरा नहीं वही जो जिया न आपके लिए ।
यही पशु-प्रवृत्ति है कि आप आप ही चरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।।
उसी उदार की कथा सरस्वती बखानती,
उसी उदार से धरा कृतार्थ भाव मानती |
उसी उदार की सदा सजीव कीर्ति कूजती,
तथा उसी उदार को समस्त BS पूजती |
अखण्ड आत्म भाव जो असीम विश्व में भरे,
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे ।।

  1. “विचार लो कि मर्त्य हो”। इसमें कवि का क्या भाव है ? [2]

    कवि का भाव है कि मनुष्य को सदा यह विचार करना चाहिए कि वह नश्वर है, अर्थात् एक दिन उसे मरना है। इसलिए उसे मृत्यु से डरना नहीं चाहिए, बल्कि ऐसा जीवन जीना चाहिए कि मरने के बाद भी लोग उसे याद करें।

  2. पशु प्रवृत्ति क्या बताई गई है ? [2]

    कवि के अनुसार पशु प्रवृत्ति यह है कि प्राणी केवल अपने लिए जीता है, अपने स्वार्थ में लिप्त रहता है और दूसरों के लिए कुछ नहीं करता। यह स्वार्थपरता पशुओं का स्वभाव है, जो केवल अपनी भूख और आवश्यकताओं की पूर्ति में लगे रहते हैं।

  3. “उसी उदार की सदा सजीव कीर्ति कूजती।” सृष्टि में किसकी कीर्ति का प्रसार होता है ? [2]

    सृष्टि में उस उदार व्यक्ति की कीर्ति का प्रसार होता है जो मनुष्यता के लिए, दूसरों के लिए अपना जीवन समर्पित कर देता है। ऐसे महान व्यक्ति की यशोगाथा सदा जीवित रहती है और समस्त संसार उसे आदरपूर्वक याद करता है।

  4. “वही मनुष्य है जो मनुष्य के लिए मरे।” इस पंक्ति में कौनसा भाव निहित है ? [2]

    इस पंक्ति में परोपकार और मानवता के प्रति समर्पण का भाव निहित है। कवि कहता है कि सच्चा मनुष्य वही है जो दूसरे मनुष्यों के कल्याण के लिए अपने प्राणों का बलिदान करने को तैयार रहता है। यह मानवता की सर्वोच्च भावना है।

अपठित गद्यांश

निम्नांकित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द है)

आज हमारी सबसे बड़ी आवश्यकता राष्ट्रीय चरित्र का पुनर्मूल्यांकन है । भारत नारों और बिल्लों पर नहीं रह सकता, उसे जीने के लिए ठोस आधार चाहिए । यह ठोस आधार युवा पीढ़ी को अनुप्राणित किये बिना, राष्ट्र की आत्मा को जगाये बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता । विदेशी-मुद्रा, विदेशी मशीन या विदेशी पूँजी के आयात से त्याग, परिश्रम और अनुशासन के भाव की पूर्ति नहीं की जा सकती, आत्म विश्वास और राष्ट्रीय चरित्र नहीं गढ़ा जा सकता । स्वतन्त्रता के पश्चात हम जिस तेजी से आसानी की ओर भागे उसी कारण आज हमारी कठिनाईयों में वृद्धि हुई है । समस्याओं की चुनौती स्वीकार न करके हम उनका विकल्प खोजने में लगे रहे हैं। आज आवश्यकता एक मनस्वी, राष्ट्र-प्रेमी, स्वावलम्बी और अनुशासित राष्ट्रीय-चरित्र के विकास की है ।

  1. राष्ट्रीय जागरण के लिए क्या आवश्यक है ? [2]

    राष्ट्रीय जागरण के लिए युवा पीढ़ी को अनुप्राणित करना और राष्ट्र की आत्मा को जगाना आवश्यक है। इसके बिना ठोस आधार प्राप्त नहीं किया जा सकता। साथ ही त्याग, परिश्रम, अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय चरित्र का विकास भी आवश्यक है।

  2. “स्वतंत्रता के पश्चात हम जिस तेजी से आसानी की ओर भागे उसी कारण आज हमारी कठिनाइयों में वृद्धि हुई है।” इस वाक्य को सरल वाक्य में बदलिए। [2]

    स्वतंत्रता के बाद आसानी की ओर तेजी से भागने के कारण आज हमारी कठिनाइयाँ बढ़ गई हैं।

  3. “स्वावलम्बी” शब्द के मूल शब्द, उपसर्ग और प्रत्यय बताइए। [2]

    • मूल शब्द: अवलम्ब (आधार)
    • उपसर्ग: सु (स्व = सु + अवलम्ब)
    • प्रत्यय: ई (स्वावलम्ब + ई = स्वावलम्बी)
  4. उपयुक्त शीर्षक लिखिए। [2]

    राष्ट्रीय चरित्र का पुनर्मूल्यांकन या राष्ट्रीय जागरण की आवश्यकता

खण्ड - ख

3. निम्न विषयों में से किसी एक पर लगभग 450 शब्दों में सारगर्भित निबन्ध लिखिए : [7]

  • अ) राजस्थान के पर्यटन स्थल |
  • ब) कन्या भ्रूण हत्या-मानवता पर एक कलंक |
  • स) राजस्थान में शिक्षा की वर्तमान स्थिति |
  • द) निरक्षरता एक अभिशाप |
  • य) बढ़ती मंहगाई : घटता जीवन स्तर |

4. अपने शहर में ध्वनि विस्तारक यन्त्र के अनुचित प्रयोग “अथवा' प्रदेश में आरक्षण आन्दोलन से जनता को जो असुविधाएँ हुई, उसे ध्यान में रखकर समाचार-पत्र हेतु एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) लिखिए | [4]

(उत्तर सीमा - 00 शब्द)

5. अपने जिले के जिला कलेक्टर को एक पत्र लिखिए जिसमें अनावृष्टि एवं सूखे के कारण खरीफ की फसल नष्ट होने पर किसानों को राज्य सरकार से मुआवजा दिलवाने की मांग की गई हो । पत्र निर्धारित प्रारूप में लिखिए | [3]

(उत्तर सीमा - 00 शब्द)

अथवा

प्रधानाचार्य, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, चौरु की ओर से निदेशक, माध्यमिक शिक्षा राजस्थान, बीकानेर को एक पत्र लिखें, जिसमें व्याख्याता के रिक्त पदों को भरने की मांग की गई हो जिससे उच्च माध्यमिक स्तर का शिक्षण सुचारु रूप से चल सके | कार्यालयी पत्र निर्धारित प्रारुप में लिखिए | [3]

(उत्तर सीमा - 00 शब्द)

6. निम्नांकित विषयों में से किसी एक पर आलेख लिखिए : [4]

(उत्तर सीमा 80 से 00 शब्द)

  • अ) निःशुल्क कन्या शिक्षण |
  • ब) किसानों की आत्महत्या |
  • स) खाद्य संकट |

7. निम्नांकित विषयों में से किसी एक विषय पर फीचर लिखिए : [4]

  • अ) शहर में बढ़ता प्रदूषण |
  • ब) नयी पीढ़ी के खोते संस्कार |
  • स) दूरदर्शन और अपसंस्कृति |

SS-01-Hindi(C) 40 [ Turn Over ]

खण्ड -ग

8) निम्नांकित पठित काव्यांश को ध्यान पूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द है ।)

सचमुच मुझे दंड दो कि हो जाऊँ
पाताली stat की गुहाओं में विवरों में
धुएँ के बादलों में
बिलकुल मैं लापता
लापता कि वहाँ भी तो तुम्हारा ही सहारा है II
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है
या मेरा जो होता-सा लगता है होता-सा संभव है
सभी वह तुम्हारे ही कारण के कार्यों का घेरा है, कार्यों का वैभव है
अब तक तो जिन्दगी में जो कुछ था, जो कुछ है
सहर्ष स्वीकारा है
इसलिए कि जो कुछ भी मेरा है
वह तुम्हें प्यारा है ।

  1. कवि दण्ड क्यों पाना चाहता है ? [2]

    कवि दण्ड इसलिए पाना चाहता है क्योंकि वह अपने अहंकार या अपराधबोध से मुक्त होना चाहता है। वह पूरी तरह से ईश्वर में समर्पित होकर अपने अस्तित्व को मिटाना चाहता है, ताकि वह पूर्णतः ईश्वर के सहारे रह सके।

  2. कवि दण्ड रुप में कहाँ रहने को उद्यत होता है ? [2]

    कवि दण्ड रूप में पाताल की गुहाओं, विवरों और धुएँ के बादलों में रहने को उद्यत होता है। वह वहाँ भी पूरी तरह लापता हो जाना चाहता है, क्योंकि उसे विश्वास है कि वहाँ भी ईश्वर का ही सहारा है।

  3. कवि जीवन की समस्त सुखद-दुःखद स्थितियों को क्यों स्वीकार करता है ? [2]

    कवि जीवन की सभी सुखद और दुःखद स्थितियों को सहर्ष स्वीकार करता है क्योंकि उसका मानना है कि जो कुछ भी उसका है, वह ईश्वर को प्यारा है। वह ईश्वर की इच्छा को सर्वोपरि मानता है और हर परिस्थिति को ईश्वर की कृपा समझता है।

  4. “वह तुम्हारे ही कारण कार्यों का घेरा है ।” - इसका आशय बताइए । [2]

    इस पंक्ति का आशय है कि कवि के जीवन में जो कुछ भी है, वह सब ईश्वर के कारण ही है। उसके सभी कार्य और उनके परिणाम ईश्वर की इच्छा से ही घटित होते हैं। कवि अपने अस्तित्व को ईश्वर के कार्यों का एक हिस्सा मानता है।


अथवा

खेती न किसान को, भिखारी को न भीख, बलि,
बनिक को बनिज, न चाकर को चाकरी ।
जीविका बिहीन लोग सीद्यमान सोच बस,
एक एकन उल, कहाँ जाई, का करी ?
वेद हूँ पुरान कही, लोकहूँ विलोकिअत,
साँकरे पै, राम ! रावरें कृपा करी |
दारिद-दसानन दबाई अत, दीन बन्धु !
दुरित-दहन देखि तुलसी हहाकरी ।।

  1. विभिन्न वर्गों के लोग किस कारण दुःखी थे ? [2]

    विभिन्न वर्गों के लोग अपनी-अपनी जीविका के साधनों से वंचित होने के कारण दुःखी थे। किसान के पास खेती नहीं थी, भिखारी को भीख नहीं मिलती थी, व्यापारी को व्यापार नहीं था, और नौकर को नौकरी नहीं मिलती थी।

  2. जीविका-विहीन लोग अपना दुःख किस प्रकार व्यक्त करते हैं ? [2]

    जीविका-विहीन लोग अत्यधिक चिंता से ग्रस्त होकर एक-दूसरे से पूछते हैं कि वे कहाँ जाएँ और क्या करें। वे अपनी विवशता और असहायता को इस प्रकार व्यक्त करते हैं कि उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है।

  3. तुलसी ने गरीबी की उपमा किससे और क्यों की थी ? [2]

    तुलसी ने गरीबी की उपमा रावण (दसानन) से की थी। उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि जिस प्रकार रावण ने लंका पर अत्याचार किया था, उसी प्रकार गरीबी भी मनुष्य को पीड़ित करती है और उसे दबा देती है। गरीबी को रावण के समान दुःखदायी बताया गया है।

  4. इस काव्यांश में किस स्थिति पर करुणा व्यक्त हुआ था ? [2]

    इस काव्यांश में समाज में व्याप्त भयानक गरीबी और बेरोजगारी की स्थिति पर करुणा व्यक्त हुई है। तुलसीदास जी लोगों की दयनीय दशा को देखकर विलाप करते हैं और ईश्वर से उनकी रक्षा की प्रार्थना करते हैं।

पठित काव्यांश पर आधारित प्रश्न

पहला काव्यांश:

'फ़ितरत का कायम है तवाज़ुन आलमे-हुस्नो-इश्क में भी
उसको उतना ही पाते हैं खुद को जितना खो ले हैं'

अ) प्रस्तुत पंक्तियों में कवि द्वारा वर्णित भावों को समझाइए। [2]

कवि कहते हैं कि प्रेम और सौंदर्य के संसार में भी संतुलन बना रहता है। जितना हम स्वयं को खोते हैं, उतना ही हम अपने प्रिय को पाते हैं। अर्थात् प्रेम में आत्म-समर्पण से ही सच्ची प्राप्ति होती है।

ब) प्रस्तुत काव्यांश की शिल्पगत विशेषताएँ बताइए। [2]

इस काव्यांश में उर्दू-फारसी शब्दावली का प्रयोग है। 'फ़ितरत', 'तवाज़ुन', 'आलमे-हुस्नो-इश्क' जैसे शब्द भाषा को गहराई प्रदान करते हैं। छंद मुक्त है और भावों की अभिव्यक्ति सहज एवं प्रभावशाली है।

दूसरा काव्यांश (अथवा):

मैं निज उर के सम लिए फिरता हूँ,
मैं निज उर के उपहार लिए फिरता हूँ,
है यह अपूर्ण संसार न मुझ को भाता
मैं तो एक संसार लिए फिरता हूँ।

अ) उपर्युक्त पंक्तियों में कवि द्वारा वर्णित भावों को समझाइए। [2]

कवि कहते हैं कि वे अपने हृदय के समान और उपहार लिए फिरते हैं। यह संसार उन्हें अपूर्ण लगता है, इसलिए वे अपने भीतर ही एक पूर्ण संसार बसाए फिरते हैं। यह आत्म-संतोष और आंतरिक सौंदर्य की ओर संकेत करता है।

ब) उपर्युक्त काव्यांश की शिल्पगत विशेषताएँ बताइए। [2]

इस काव्यांश में पुनरुक्ति प्रभाव (जैसे 'मैं निज उर के...') का सुंदर प्रयोग है। भाषा सरल एवं भावपूर्ण है। 'अपूर्ण संसार' और 'एक संसार' के माध्यम से विरोधाभास अलंकार भी दिखता है।

पठित कविताओं की विषय-वस्तु से संबंधित प्रश्न

(किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 30 शब्द है।) [2×1½=3]

  1. "तितलियों की इतनी नाजुक दुनियाँ।" - यह किसके लिए कहा गया है?

    यह पंक्ति 'तितलियों' के लिए कही गई है, जो कोमलता, नाजुकता और क्षणभंगुरता का प्रतीक हैं। कवि ने तितलियों की दुनिया को अत्यंत नाजुक बताया है।

  2. "अट्टालिका नहीं है रे आंतक-भवन।" बादल राग की इस पंक्ति में भाव क्या है?

    इस पंक्ति में कवि कहते हैं कि यह कोई ऊँची अट्टालिका (महल) नहीं, बल्कि आतंक का घर है। यह सत्ता के दमनकारी स्वरूप और भय के वातावरण को व्यक्त करता है।

  3. "स्टील या लाल खड़िया चाक मल दी हो किसीने।" उषा कविता की इन पंक्तियों का आशय स्पष्ट कीजिए।

    इन पंक्तियों में कवि ने सूर्योदय के समय आकाश में फैले लाल रंग की तुलना स्टील या लाल खड़िया चाक से की है। यह प्राकृतिक सौंदर्य का सजीव चित्रण है।

पठित गद्यांश पर आधारित प्रश्न

गद्यांश: सेवक धर्म में हनुमान जी से स्पर्द्धा करने वाली भक्तिन किसी अंजना पुत्री न होकर एक अनाम हान्या गोपालिका की कन्या है - नाम है लछमिन अर्थात् लक्ष्मी। पर जैसे मेरे नाम की विशालता मेरे लिए दुर्वह है, वैसे ही लक्ष्मी की समृद्धि भक्तिन के कपाल की कुंचित रेखाओं में नहीं बँध सकी। वैसे तो जीवन में प्रायः सभी को अपने-अपने नाम का विरोधाभास लेकर जीना पड़ता है, पर भक्तिन बहुत समझदार है, क्योंकि वह अपना समृद्धि-सूचक नाम किसी को बताती नहीं। केवल जब नौकरी की खोज में आई थी, तब ईमानदारी का परिचय देने के लिए उसने शेष इतिवृत्त के साथ यह भी बता दिया। पर इस प्रार्थना के साथ कि मैं कभी नाम का उपयोग न करूँ। उपनाम रखने की प्रतिभा होती, तो मैं सबसे पहले उसका प्रयोग अपने ऊपर करती, इस तथ्य को वह देहातिन क्या जाने, इसी से जब मैंने कंठी माला देखकर उसका नया नामकरण किया तब वह भक्तिन-जैसे कवित्वहीन नाम पाकर भी गद्गद हो उठी।

  1. भक्तिन को हनुमान जी से स्पर्द्धा करने वाली किस प्रकार बतलाया गया है? [2]

    लेखिका ने भक्तिन को सेवक धर्म में हनुमान जी से स्पर्द्धा करने वाली बताया है। हनुमान जी अंजना पुत्र हैं, जबकि भक्तिन एक अनाम गोपालिका की पुत्री है। उसका नाम लछमिन (लक्ष्मी) है, पर वह अपने नाम के विपरीत अत्यंत गरीब है। फिर भी वह सेवा भाव में हनुमान जी के समान है।

  2. "जीवन में कभी-कभी अपने नाम का विरोधाभास लेकर जीना पड़ता है।" इस कथन का आशय अपने शब्दों द्वारा समझाइए। [2]

    इस कथन का आशय है कि अक्सर व्यक्ति का नाम उसके वास्तविक स्वरूप या परिस्थितियों से मेल नहीं खाता। जैसे भक्तिन का नाम लक्ष्मी (समृद्धि की देवी) है, पर वह अत्यंत गरीब है। ऐसे में व्यक्ति को अपने नाम के विपरीत जीवन जीना पड़ता है, जो एक विरोधाभास है।

  3. लक्ष्मी अपना नाम भक्तिन पाकर गद्गद क्यों हो उठी? [2]

    लक्ष्मी (भक्तिन) अपना नाम 'भक्तिन' पाकर गद्गद हो उठी क्योंकि यह नाम उसकी सेवा भावना और धार्मिक प्रवृत्ति को दर्शाता है। उसका पिछला नाम 'लक्ष्मी' उसकी गरीबी के कारण विरोधाभासी था, जबकि 'भक्तिन' नाम उसके व्यक्तित्व के अनुरूप था। इससे उसे पहचान और सम्मान मिला।

प्रश्न 1: भारतीय कला और सौन्दर्यशास्त्र पर आधारित

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

  1. a) भारतीय सौन्दर्यशास्त्र में कितने और कौन-कौन से रस वर्णित हैं? [2]

    भारतीय सौन्दर्यशास्त्र में आठ प्रमुख रस वर्णित हैं: शृंगार, वीर, करुण, अद्भुत, हास्य, भयानक, बीभत्स और रौद्र। कुछ आचार्यों ने शांत रस को भी नवाँ रस माना है।

  2. ब) भारतीय कलाओं में करुणा किस पर व्यक्त की जाती है? [2]

    भारतीय कलाओं में करुणा अक्सर सद्व्यक्तियों (अच्छे लोगों) के लिए व्यक्त की जाती है और कभी-कभार दुष्टों के लिए भी। रामायण और महाभारत में करुणा प्रायः पात्रों के प्रति दिखाई जाती है।

  3. स) चार्ली चैपलिन की फिल्मों में भारतीय रस सिद्धान्त के विपरीत किसका सामंजस्य है? [2]

    चार्ली चैपलिन की फिल्मों में करुणा और हास्य का सामंजस्य है, जो भारतीय रस सिद्धान्त के विपरीत है। भारतीय परम्परा में करुणा का हास्य में बदल जाना स्वीकार नहीं किया गया है, जबकि चैपलिन अपने ऊपर हँसने और दूसरों में भी वैसा भाव पैदा करने की शक्ति रखते हैं।

प्रश्न 2: पठित गद्य पाठ की विषय-वस्तु पर आधारित

निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर दीजिए (प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द):

  1. a) "शिरीष के फूल" के माध्यम से लेखक ने संघर्षशीलता एवं जिजीविषा की जो व्यंजना की है, उसे स्पष्ट कीजिए।

    लेखक ने शिरीष के फूल को संघर्षशीलता और जिजीविषा का प्रतीक बताया है। शिरीष का पेड़ गर्मी, धूप और प्रतिकूल परिस्थितियों में भी खिलता है और अपनी सुंदरता बनाए रखता है। यह मनुष्य को सिखाता है कि कठिनाइयों के बावजूद जीवन में आगे बढ़ते रहना चाहिए और हार नहीं माननी चाहिए।

  2. ब) "नमक" कहानी की मूल संवेदना क्या है? स्पष्ट कीजिए।

    "नमक" कहानी की मूल संवेदना मानवीय रिश्तों की गहराई और सामाजिक यथार्थ को दर्शाना है। कहानी में नमक के माध्यम से जीवन की कड़वाहट और मिठास को दिखाया गया है। यह बताती है कि कैसे छोटी-छोटी चीजें जीवन में बड़ा अर्थ रखती हैं और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावित करती हैं।

  3. स) "यह भी सच है कि यथा प्रजा तथा राजा" इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।

    इस कथन का आशय है कि जैसी प्रजा होती है, वैसा ही राजा होता है। यह एक सामाजिक सत्य को व्यक्त करता है कि शासक और प्रजा का आपसी संबंध होता है। यदि प्रजा अच्छी है तो राजा भी अच्छा होगा और यदि प्रजा बुरी है तो राजा भी बुरा होगा। यह एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।

  4. द) जाति-प्रथा से समाज को क्या आर्थिक हानि होती है?

    जाति-प्रथा से समाज को कई आर्थिक हानियाँ होती हैं। यह व्यवसायों को जाति के आधार पर बाँट देती है, जिससे प्रतिभा और क्षमता का सही उपयोग नहीं हो पाता। निचली जातियों को उच्च शिक्षा और अच्छे व्यवसायों से वंचित रखा जाता है, जिससे उनकी आर्थिक प्रगति रुक जाती है। इससे समाज में आर्थिक असमानता बढ़ती है और राष्ट्रीय विकास प्रभावित होता है।

खण्ड - घ

3) पाठों की विषय-वस्तु पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए : [2×3=6]

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 40 से 60 शब्द है।)

  1. “सिल्वर वैडिंग” कहानी के माध्यम से कहानीकार ने क्या संदेश व्यंजित किया है?

    इस कहानी के माध्यम से कहानीकार ने यह संदेश दिया है कि वैवाहिक जीवन में आपसी समझ, सहनशीलता और प्रेम का होना अत्यंत आवश्यक है। रजत जयंती (25 वर्ष) के अवसर पर पति-पत्नी के बीच आई कड़वाहट और गलतफहमियाँ दूर होती हैं और वे एक-दूसरे के प्रति अपने कर्तव्यों और भावनाओं को समझते हैं। कहानीकार ने दिखाया है कि समय के साथ रिश्तों में परिपक्वता आती है और सच्चा प्रेम ही जीवन को सार्थक बनाता है।

  2. जूझ आत्मकथात्मक अंश की मूल संवेदना स्पष्ट कीजिए।

    ‘जूझ’ आत्मकथात्मक अंश की मूल संवेदना संघर्ष और आत्मविश्वास से जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा है। लेखक आनंद यादव ने अपने बाल्यकाल की कठिनाइयों, गरीबी और शिक्षा के प्रति लगन को दर्शाया है। वे पढ़ाई के लिए किताबें जुटाने, समय निकालने और परिवार की आर्थिक स्थिति से जूझते हुए भी अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ते। यह अंश बताता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत से हर बाधा को पार किया जा सकता है।

  3. पुरातत्त्ववेताओं ने किस भवन को देखकर उसे कालेज आफ प्रीस्टस माना है?

    पुरातत्त्ववेताओं ने सिंधु घाटी सभ्यता के मोहनजोदड़ो में स्थित एक विशाल भवन को देखकर उसे ‘कालेज ऑफ प्रीस्टस’ (पुरोहितों का महाविद्यालय) माना है। यह भवन अपनी भव्यता, विशाल कक्षों और विशेष वास्तुशिल्प के कारण एक शैक्षणिक या धार्मिक संस्थान प्रतीत होता है, जहाँ पुरोहित या विद्वान रहते और शिक्षा ग्रहण करते थे।

4) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो का उत्तर दीजिए : [2×1½=3]

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर-सीमा 20 से 30 शब्द है।)

  1. प्रकृति ही तो ऐसा वरदान है जिसका कोई सानी नहीं। ऐन फ्रैंक के इस कथन को “डायरी के पन्ने” अध्याय के आधार पर समझाइए।

    ऐन फ्रैंक के अनुसार, प्रकृति मनुष्य को शांति और सुकून देती है। छिपने के स्थान पर बंद जीवन में वह पेड़, आसमान और पक्षियों को देखकर आश्वस्त होती है। प्रकृति उसके लिए एक अमूल्य वरदान है जो कृत्रिम चीजों से कहीं श्रेष्ठ है।

  2. पुरातत्त्ववेता सिन्धु-घाटी सभ्यता को तर सभ्यता क्यों कहते हैं? स्पष्ट कीजिए।

    पुरातत्त्ववेता सिंधु-घाटी सभ्यता को ‘तर सभ्यता’ इसलिए कहते हैं क्योंकि यह सभ्यता सिंधु नदी के किनारे बसी थी और यहाँ की मिट्टी उपजाऊ थी। ‘तर’ का अर्थ नदी के किनारे की भूमि होता है, जहाँ कृषि और व्यापार सुगम था, जिससे यह सभ्यता विकसित हुई।

  3. लेखक आनन्द यादव के छात्र-जीवन से क्या-क्या शिक्षा मिलती है?

    लेखक आनंद यादव के छात्र-जीवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा के प्रति समर्पण और निरंतर प्रयास से सफलता प्राप्त की जा सकती है। आत्मविश्वास, मेहनत और लगन से जीवन की हर बाधा को पार किया जा सकता है।

5) विषय-वस्तु पर आधारित दिए गए दो प्रश्नों में से किसी एक निबंधात्मक प्रश्न का उत्तर दीजिए : [1×3=3]

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर सीमा 40 से 60 शब्द है।)

  1. यशोधर बाबू अपने बच्चों से क्या अपेक्षा रखते थे? “सिल्वर वैडिंग” के आधार पर बताइए।

    यशोधर बाबू अपने बच्चों से यह अपेक्षा रखते थे कि वे उनकी भावनाओं और परंपराओं का सम्मान करें। वे चाहते थे कि बच्चे उनके रजत जयंती समारोह में शामिल हों और पारिवारिक एकता बनाए रखें। लेकिन बच्चों की आधुनिक सोच और व्यस्तता के कारण यह अपेक्षा पूरी नहीं हो पाती, जिससे यशोधर बाबू को गहरी पीड़ा होती है।

  2. “कई बार कोई रहस्यमयी ताक़त हम दोनो को पीछे की तरफ खींचती है।” ऐन फ्रैंक ने इस कथन से किस प्रसंग का उल्लेख किया है?

    ऐन फ्रैंक ने इस कथन से उस प्रसंग का उल्लेख किया है जब वह और पीटर छिपने के स्थान पर एक-दूसरे के करीब आते हैं। वे दोनों एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं, लेकिन उनके बीच की दूरी और परिस्थितियाँ उन्हें पीछे खींचती हैं। यह रहस्यमयी ताकत उनके मन की उलझन और डर को दर्शाती है।


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