RBSE Class 12th 2016 Hindi Sahitya-SS-21-2016 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2016 |
| Subject | Hindi Sahitya-SS-21-2016 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2016 Hindi Sahitya-SS-21-2016
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Rajasthan Board Class 12th Hindi Sahitya-SS-21-2016 2016 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2016
हिन्दी साहित्य
समय : 3¼ घण्टे
पूर्णांक : 80
SS-21-Hindi Sah. 48
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम प्रश्न-पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
- सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं।
- प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
- जिन प्रश्नों में आंतरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
- उत्तर यथासम्भव निर्धारित शब्द-सीमा में ही सुपाठ्य लिखें।
SS-21-Hindi Sah. [ Turn Over ]
खण्ड - अ
निम्न पद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
(उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द)
विश्व की सम्पूर्ण पीड़ा,
सम्मिलित हो रो रही है,
शुष्क पृथ्वी आँसुओं से,
पाँव अपने धो रही है,
इस धरा पर जो बसी दुनिया
यही अनुरूप उसके -
इस व्यथा से हो न विचलित
नींद सुख की सो रही है,
क्यों धरणि अब तक न गलकर
लीन जलनिधि हो रही है?
देखते क्यों नेत्र कवि के,
भूमि पर जड़ तुल्य जीवन?
तीर पर कैसे रुकूं मैं,
आमंत्रण में निमंत्रण।
-
उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: इस पद्यांश का उचित शीर्षक "विश्व पीड़ा और कवि का आह्वान" या "पीड़ित धरा का क्रंदन" हो सकता है।
-
'क्यों धरणि अब तक न गलकर' पंक्ति में 'धरणि' शब्द का अर्थ लिखिए।
उत्तर: 'धरणि' शब्द का अर्थ है – पृथ्वी या धरती।
-
'शुष्क पृथ्वी आँसुओं से पाँव अपने धो रही है' पंक्ति में प्रयुक्त अलंकार को बताते हुए परिभाषा लिखिए।
उत्तर: इस पंक्ति में मानवीकरण अलंकार है। परिभाषा – जहाँ निर्जीव वस्तुओं या प्रकृति पर मानवीय क्रियाओं का आरोप किया जाए, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है। यहाँ शुष्क पृथ्वी को आँसुओं से पाँव धोते हुए दिखाया गया है, जो मानवीय क्रिया है।
-
'इस धरा पर जो बसी हुई दुनिया है, वह क्या कर रही है? और क्यों? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: इस धरा पर बसी हुई दुनिया सुख की नींद सो रही है। वह इसलिए क्योंकि वह विश्व की पीड़ा और व्यथा से विचलित नहीं होती, अर्थात् वह दूसरों के दुखों के प्रति उदासीन है और अपने सुख में मग्न है।
-
कवि तीर पर क्यों नहीं रुकना चाहता?
उत्तर: कवि तीर पर इसलिए नहीं रुकना चाहता क्योंकि उसे आगे बढ़ने का आमंत्रण मिला है। वह संसार की पीड़ा को देखकर निष्क्रिय नहीं रह सकता, बल्कि वह कुछ करने और बदलाव लाने के लिए प्रेरित है।
SS-2i-Hindi Sah. 48
प्रश्न 2: निम्न गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
(उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द)
समाज में एक ओर जीवन की स्थिरता है और दूसरी ओर परिवर्तनशीलता। समाज जब तक दृढ़तापूर्वक किसी नियम का पालन नहीं करेगा, तब तक उसकी उन्नति नहीं होगी। इसलिए अधिकांश लोगों का विचार कर समाज की एक मर्यादा बना दी जाती है। समाज के सभी व्यक्तियों को उस मर्यादा का पालन करना पड़ता है। चाहे किसी व्यक्ति को कष्ट ही क्यों न हो, किंतु वह समाज की मर्यादा का उल्लंघन नहीं करेगा। यदि वह ऐसा करेगा, तो समाज द्वारा दंडित होगा। अधिक की भलाई का विचार कर हमें एक की भलाई की चिंता छोड़नी ही पड़ती है। परंतु कुछ समय बाद अवस्था विशेष में परिवर्तन होने के कारण समाज में दोष उत्पन्न हो जाते हैं। तब उन दोषों को दूर करने के लिए समाज की मर्यादा भंग करनी पड़ती है और एक नई मर्यादा बनानी पड़ती है। जो लोग समाज को नए पथ का दर्शन कराते हैं, उन्हें कष्ट सहना पड़ता है। सभी तरह के कष्टों को सहकर वे समाज के कल्याण के लिए अपने कार्यों में दृढ़तापूर्वक लगे रहते हैं। अंत में सत्य-निष्ठा के कारण वे समाज के सुधारक कहे जाते हैं।
क) प्रस्तुत गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।
उत्तर: समाज की मर्यादा और परिवर्तन
ख) समाज की उन्नति कब तक नहीं होती है?
उत्तर: समाज की उन्नति तब तक नहीं होती जब तक वह दृढ़तापूर्वक किसी नियम का पालन नहीं करता। नियमों के पालन से ही समाज में स्थिरता और प्रगति संभव है।
ग) समाज द्वारा किस प्रकार के व्यक्ति की दंडित किया जाता है और क्यों?
उत्तर: समाज द्वारा उस व्यक्ति को दंडित किया जाता है जो समाज की मर्यादा का उल्लंघन करता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि समाज की स्थिरता और भलाई के लिए मर्यादा का पालन आवश्यक है, और उल्लंघन करने वाला व्यक्ति समाज के लिए हानिकारक होता है।
घ) अवस्था विशेष में परिवर्तन से उत्पन्न दोषों को कैसे दूर किया जाता है?
उत्तर: अवस्था विशेष में परिवर्तन से उत्पन्न दोषों को दूर करने के लिए समाज की पुरानी मर्यादा को भंग करके एक नई मर्यादा बनाई जाती है। इस प्रकार समय के अनुसार नियमों में परिवर्तन करके दोषों का निवारण किया जाता है।
ङ) किस प्रकार के लोगों को समाज सुधारक कहा जाता है?
उत्तर: जो लोग समाज को नए पथ का दर्शन कराते हैं और सभी प्रकार के कष्टों को सहकर समाज के कल्याण के लिए दृढ़तापूर्वक कार्य करते हैं, उन्हें सत्य-निष्ठा के कारण समाज सुधारक कहा जाता है।
खण्ड-ब
प्रश्न 3: किसी एक विषय पर लगभग 450 शब्दों में निबंध लिखिए:
- राष्ट्रीय एकता में युवा शक्ति का योगदान
- राष्ट्र निर्माण में नारी की भूमिका
- बेरोजगारी : समस्या और समाधान
- भारतीयता पर अपसंस्कृति का दुष्प्रभाव
4) जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) श्यामगढ़ की ओर से जिले के समस्त प्रधानाचार्यों को कार्यालयी पत्र लिखिए, जिसमें बोर्ड-कक्षाओं में अध्ययनरत कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात हो। [4]
कार्यालयी पत्र
दिनांक: 15 फरवरी 2016
सेवा में,
समस्त प्रधानाचार्य,
राजकीय माध्यमिक विद्यालय,
जिला श्यामगढ़।
विषय: बोर्ड कक्षाओं में कमजोर विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण हेतु।
महोदय,
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) श्यामगढ़ के कार्यालय द्वारा यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि बोर्ड कक्षाओं (कक्षा 10वीं एवं 12वीं) में अध्ययनरत कमजोर विद्यार्थियों को विशेष ध्यान देकर उपचारात्मक शिक्षण प्रदान किया जाए। अतः आपसे अनुरोध है कि अपने-अपने विद्यालयों में ऐसे विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए अतिरिक्त कक्षाओं, अभ्यास सत्रों एवं मार्गदर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित करें। इससे उनकी शैक्षणिक कमजोरियों को दूर कर बोर्ड परीक्षा में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय,
जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक)
श्यामगढ़
अथवा
अपने आपको वार्ड पार्षद कविनगर मानकर जिला पुलिस अधीक्षक, मीरापुर को पत्र लिखिए जिसमें आये दिन असामाजिक तत्वों द्वारा उत्पात मचाकर कानून व्यवस्था भंग करने तथा अशांति उत्पन्न करने का उल्लेख हो। [4]
पत्र
दिनांक: 15 फरवरी 2016
सेवा में,
जिला पुलिस अधीक्षक,
मीरापुर।
विषय: वार्ड कविनगर में असामाजिक तत्वों द्वारा उत्पात एवं कानून व्यवस्था भंग करने की शिकायत।
महोदय,
मैं, वार्ड पार्षद कविनगर, आपके ध्यान में लाना चाहता हूँ कि हमारे वार्ड में आये दिन कुछ असामाजिक तत्व उत्पात मचाकर कानून व्यवस्था भंग करते हैं और अशांति उत्पन्न करते हैं। रात्रि के समय शराब पीकर हंगामा करना, आपसी झगड़े करना, तथा आम नागरिकों को परेशान करना आम बात हो गई है। इससे क्षेत्र के निवासियों में भय का वातावरण है। अतः आपसे अनुरोध है कि इस क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाई जाए और दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
धन्यवाद।
भवदीय,
(हस्ताक्षर)
वार्ड पार्षद, कविनगर
5) निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए:
क) जन संचार के माध्यम कौन-कौन से हैं? वर्णन कीजिए। [2]
जन संचार के प्रमुख माध्यम हैं: (1) मुद्रित माध्यम – समाचार पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें। (2) इलेक्ट्रॉनिक माध्यम – रेडियो, टेलीविजन, फिल्म। (3) डिजिटल माध्यम – इंटरनेट, सोशल मीडिया, ब्लॉग। ये माध्यम बड़ी संख्या में लोगों तक सूचना, शिक्षा और मनोरंजन पहुँचाने में सहायक होते हैं।
ख) पत्रकारीय लेखन में समाचार कैसे लिखा जाता है? [2]
पत्रकारीय लेखन में समाचार 'उल्टा पिरामिड' शैली में लिखा जाता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य (क्या, कहाँ, कब, कौन, क्यों) पहले लिखे जाते हैं, फिर कम महत्वपूर्ण विवरण। शीर्षक आकर्षक और संक्षिप्त होता है। भाषा सरल, स्पष्ट और तथ्यात्मक होनी चाहिए।
ग) नाटक को प्रभावी बनाने वाली कौन-कौन-सी बातें हैं? लिखिए। [2]
नाटक को प्रभावी बनाने वाली बातें हैं: (1) संवाद – सजीव और स्वाभाविक हों। (2) पात्र – चरित्र चित्रण सशक्त हो। (3) कथानक – रोचक और संघर्षपूर्ण हो। (4) मंच सज्जा एवं प्रकाश व्यवस्था – वातावरण निर्माण में सहायक। (5) अभिनय – भावपूर्ण और यथार्थवादी हो।
घ) नए और अप्रत्याशित लेखन में कैसी तैयारी होनी चाहिए? [2]
नए और अप्रत्याशित लेखन के लिए तैयारी में शामिल हैं: (1) विषय का गहन अध्ययन और शोध। (2) मौलिक सोच और रचनात्मकता का विकास। (3) भाषा पर पकड़ और शब्द भंडार का विस्तार। (4) विभिन्न विधाओं (कविता, कहानी, निबंध) का अभ्यास। (5) आलोचनात्मक दृष्टिकोण और निरंतर लेखन अभ्यास।
खण्ड - स
6) निम्न पद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: [7]
पद्यांश:
लघु सुरधनु से पंख पसारे-शीतल मलय समीर सहारे।
उड़ते खग जिस ओर मुँह किए-समझ नीड़ निज प्यारा।
बरसाती आँखों के बादल-बनते जहाँ भरे करुणा जल।
लहरें टकराती अनंत की-पाकर जहाँ किनारा।
हेम कुंभ ले उषा स्वेरे-भरती ढुलकाती सुख मेरे।
मदिर ऊँघते रहते जब-जगकर रजनी भर तारा।
सप्रसंग व्याख्या:
संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश हिंदी साहित्य के काव्य संग्रह से लिया गया है। इसमें कवि ने प्रकृति के सौंदर्य और मानव जीवन के गहरे अनुभवों को चित्रित किया है।
प्रसंग: कवि यहाँ पक्षियों के उड़ान, प्रकृति के विभिन्न रूपों और मानवीय भावनाओं के बीच साम्य स्थापित कर रहे हैं। वे बताते हैं कि कैसे छोटे-छोटे पंखों वाले पक्षी शीतल हवा के सहारे उड़ते हैं और अपने घोंसले को प्यारा समझते हैं। साथ ही, बरसाती बादलों और अनंत लहरों के माध्यम से जीवन के दुख और सुख को दर्शाया गया है।
व्याख्या: कवि कहते हैं कि छोटे पक्षी अपने पंखों को इंद्रधनुष की तरह फैलाकर शीतल मलय पवन के सहारे उड़ते हैं। वे जिस ओर मुँह करके उड़ते हैं, उसे अपना प्यारा घोंसला समझते हैं। बरसाती आँखों के समान बादल करुणा के जल से भरे होते हैं। अनंत की लहरें टकराकर किनारा पाती हैं। सुबह के समय उषा स्वर्ण कलश लेकर मेरे सुख को ढुलकाती है, जबकि रात भर तारे जागते रहते हैं और मदिर (मस्त) लोग ऊँघते रहते हैं। इस प्रकार कवि ने प्रकृति और मानव जीवन के विरोधाभासों को सुंदरता से प्रस्तुत किया है।
प्रश्न 7
अथवा
तोड़ो तोड़ो तोड़ो
ये पत्थर ये पत्थर
ये झूठे बंधन टूटें
तो धरती को हम जानें
सुनते हैं मिट्टी में रस है जिससे उगती दूब है
अपने मन के मैदानों पर व्यापी कैसी ऊब है
आधे आधे गाने
तोड़ो तोड़ो तोड़ो
ये सोने बंजर तोड़ो
ये चरती परती तोड़ो
सब खेत बनाकर छोड़ो
मिट्टी में रस होगा ही जब वह पोसेगी बीज को
हम इसको क्या कर डालें इस अपने मन की खीज को?
गोड़ो गोड़ो गोड़ो
निम्न प्रश्नों के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए:
(क) अब सबु आँखिन्ह बाट हैं फोरा जीव जड़ सबड़ सहाई।।
जिन्हहि निरखि मग साँपिनि बीछी। तजहिं विषम विषु तापस तीछी।।
उपर्युक्त पंक्तियों का काव्य-सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने प्रभु की महिमा का वर्णन किया है। इनमें 'अब सबु आँखिन्ह बाट हैं फोरा' में अनुप्रास अलंकार है। 'जीव जड़' में विरोधाभास तथा 'साँपिनि बीछी' में उपमा अलंकार है। भाषा अवधी मिश्रित ब्रज है, जो सरल एवं प्रवाहपूर्ण है। इन पंक्तियों में भक्ति रस की प्रधानता है तथा चमत्कारपूर्ण वर्णन से काव्य-सौन्दर्य निखर उठा है।
(ख) कहि कहि आवन छबीले मन भावन को,
गहि गहि राखति ही दै दै सनमान को।
उपर्युक्त पंक्तियों का शिल्प सौन्दर्य लिखिए।
उत्तर: प्रस्तुत पंक्तियों में शिल्प सौन्दर्य के अंतर्गत 'कहि कहि', 'गहि गहि', 'दै दै' में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। 'छबीले मन भावन' में अनुप्रास अलंकार है। भाषा ब्रजभाषा है, जो मधुर एवं लयात्मक है। छंद दोहा है, जिसमें 13-11 मात्राओं का विधान है। शब्द-चयन सजीव एवं भावानुकूल है, जिससे श्रृंगार रस की अभिव्यक्ति हुई है।
SS-2—Hindi Sah. 48
खण्ड – स
निम्नलिखित के उत्तर लगभग 40-50 शब्दों में लिखिए:
(क) ‘गीत गाने दो’ कविता का केन्द्रीय भाव लिखिए। [2]
इस कविता का केन्द्रीय भाव मनुष्य की स्वाभाविक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। कवि कहता है कि मनुष्य को अपनी भावनाओं, गीतों और विचारों को बिना किसी बंधन के व्यक्त करने देना चाहिए। कृत्रिम बंधन और दबाव मानवीय स्वभाव को नष्ट कर देते हैं, इसलिए उसे स्वतंत्र रूप से गीत गाने देना चाहिए।
(ख) ‘बालक’ कविता में बच्चे के स्थान पर आप होते और कोई आपसे पूछता कि 'हिमालय किधर है?' तो आप क्या उत्तर देते? अपने शब्दों में लिखिए। [2]
यदि मैं बच्चे के स्थान पर होता, तो मैं कहता कि हिमालय वहाँ है जहाँ बादल छूते हैं, जहाँ बर्फ चमकती है और जहाँ से गंगा निकलती है। मैं अपनी कल्पना से उत्तर देता, न कि भूगोल की किताब के अनुसार। बच्चे की सहज और मासूम कल्पना ही उसका सच्चा उत्तर होता।
खण्ड – द
निम्न गद्यांशों में से किसी एक की सप्रसंग व्याख्या कीजिए: [7]
प्रथम गद्यांश: “बालक के मुख पर विलक्षण रंगों का परिवर्तन हो रहा था, हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई की झलक आँखों में दीख रही थी। कुछ खाँसकर, गला साफ कर नकली पर्दे के हट जाने पर स्वयं विस्मित होकर बालक ने धीरे से कहा, 'लड्डू'। पिता और अध्यापक निराश हो गए। इतने समय तक मेरा विश्वास घुट रहा था। अब मैंने सुख की साँस भरी। उन सबने बालक की प्रवृत्तियों का गला घोंटने में कुछ उठा नहीं रखा था। पर बालक बच गया। उसके बचने की आशा है क्योंकि वह 'लड्डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर था, भरे काठ की अलमारी की सिर दुखाने वाली खड़खड़ाहट नहीं।”
सन्दर्भ: यह गद्यांश 'बालक' नामक पाठ से लिया गया है, जिसमें बालक की स्वाभाविक प्रवृत्तियों और कृत्रिम शिक्षा प्रणाली के संघर्ष को दर्शाया गया है।
प्रसंग: बालक को एक परीक्षा में 'लड्डू' शब्द बोलने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा था, लेकिन वह अपनी स्वाभाविकता के कारण वही शब्द बोलता है जो उसके मन में था।
व्याख्या: बालक के चेहरे पर अलग-अलग भाव आ रहे थे, उसके हृदय में कृत्रिम और स्वाभाविक भावों की लड़ाई चल रही थी। खाँसकर और गला साफ करके, जैसे ही नकली पर्दा हटा, वह स्वयं चकित होकर बोल उठा 'लड्डू'। पिता और अध्यापक निराश हुए, लेकिन लेखक को सुख मिला क्योंकि बालक की स्वाभाविकता बच गई। 'लड्डू' की पुकार जीवित वृक्ष के हरे पत्तों की मधुर ध्वनि के समान थी, न कि बेजान लकड़ी की खड़खड़ाहट के समान। इससे स्पष्ट है कि बालक की स्वाभाविक अभिव्यक्ति ही सच्ची और सुंदर है।
द्वितीय गद्यांश: “ये लोग आधुनिक भारत के नए 'शरणार्थी' हैं, जिन्हें औद्योगीकरण के झंझावात ने अपनी घर जमीन से उखाड़कर हमेशा के लिए निर्वासित कर दिया है। प्रकृति और इतिहास के बीच यह गहरा अंतर है। बाढ़ या भूकम्प के कारण लोग अपना घरबार छोड़कर कुछ अरसे के लिए ज़रुर बाहर चले जाते हैं, किंतु आफत टलते ही वे दोबारा अपने जाने-पहचाने परिवेश में लौट भी आते हैं। किन्तु विकास और प्रगति के नाम पर जब इतिहास लोगों को उन्मूलित करता है, तो वे फिर कभी अपने घर वापस नहीं लौट सकते। आधुनिक औद्योगिकरण की आँधी में सिर्फ मनुष्य ही नहीं उखड़ता, बल्कि उसका परिवेश और आवास स्थल भी हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं।”
सन्दर्भ: यह गद्यांश 'आधुनिक भारत के नए शरणार्थी' विषय पर आधारित पाठ से लिया गया है, जो औद्योगीकरण के दुष्प्रभावों को उजागर करता है।
प्रसंग: लेखक औद्योगीकरण के कारण विस्थापित हुए लोगों की दुर्दशा का वर्णन कर रहे हैं, जो अपनी जमीन और घर से हमेशा के लिए वंचित हो जाते हैं।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि ये लोग आधुनिक भारत के नए शरणार्थी हैं, जिन्हें औद्योगीकरण की आँधी ने अपनी जमीन से उखाड़कर स्थायी रूप से निर्वासित कर दिया है। प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़, भूकम्प) में लोग अस्थायी रूप से विस्थापित होते हैं और बाद में लौट आते हैं, लेकिन विकास और प्रगति के नाम पर इतिहास द्वारा किया गया विस्थापन स्थायी होता है। औद्योगीकरण की आँधी में न केवल मनुष्य, बल्कि उसका पूरा परिवेश और आवास स्थल भी नष्ट हो जाता है, जिससे वापस लौटना असंभव हो जाता है।
खण्ड – इ
निम्न में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लिखिए: (2×2=4) (उत्तर-सीमा लगभग 50 शब्द)
(क) “महाराज! -- जब से शंकर भगवान हम लोगन क छोड़ के हियाँ चले आए, गाँव भर पानी न पिहिस। अउर तब तक न पी जब तक भगवान गाँव न चलि हैं। अब हम लोगन के प्रान आप के हाथ में I” मुखिया की बात कहने की शैली कैसी थी तथा लेखक ब्रज मोहन व्यास की क्या प्रतिक्रिया रही? लिखिए।
मुखिया की बात कहने की शैली अत्यंत विनम्र, भावुक और आग्रहपूर्ण थी। वह गाँव की समस्या को भगवान शंकर के जाने से जोड़कर लेखक से पानी की व्यवस्था करने का अनुरोध कर रहा था। लेखक ब्रज मोहन व्यास की प्रतिक्रिया सहानुभूतिपूर्ण थी; वे गाँव वालों की भावना को समझ गए और उनकी मदद करने का निर्णय लिया।
(ख) “यास्सेर अराफात का व्यक्तित्व सहजता, सरलता तथा सेवाभाव से ओतप्रोत था।” ‘गाँधी, नेहरू और यास्सेर अराफात’ पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
यास्सेर अराफात का व्यक्तित्व अत्यंत सहज और सरल था। वे फिलिस्तीनी शरणार्थियों के बीच रहते थे, उनके दुख-दर्द को समझते थे और उनकी सेवा में तत्पर रहते थे। उनकी वेशभूषा और रहन-सहन सादा था, और वे हमेशा अपने लोगों के अधिकारों के लिए संघर्षरत रहे। उनका सेवाभाव ही उन्हें एक महान नेता बनाता था।
(ग) “प्रेम के लिए किसी भी निश्चित व्यक्ति, समय और स्थिति का होना आवश्यक नहीं है।” ‘दूसरा देवदास’ कहानी के आधार पर उपर्युक्त पंक्ति को स्पष्ट कीजिए।
‘दूसरा देवदास’ कहानी में प्रेम को किसी निश्चित व्यक्ति, समय या स्थिति से बंधा नहीं दिखाया गया। कहानी का नायक विभिन्न परिस्थितियों में अलग-अलग लोगों से प्रेम करता है, जो दर्शाता है कि प्रेम एक स्वाभाविक भावना है जो बिना किसी शर्त के उत्पन्न हो सकता है। यह किसी एक व्यक्ति या समय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं का परिणाम है।
खण्ड – ई
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ या राम विलास शर्मा का साहित्यिक परिचय लगभग 100 शब्दों में लिखिए। [4]
सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’: अज्ञेय हिंदी साहित्य के प्रयोगवादी और नई कविता के प्रमुख कवि थे। उनका जन्म 1911 में हुआ। वे कवि, उपन्यासकार, कहानीकार और निबंधकार थे। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – ‘हरी घास पर क्षण भर’, ‘बावरा अहेरी’, ‘शेखर: एक जीवनी’ (उपन्यास), ‘अपने-अपने अजनबी’ आदि।
निम्न प्रश्नों में से किन्हीं चार के उत्तर (प्रत्येक को) लगभग 50 शब्दों में लिखिए: [4×2=8] “सूरदास प्रतिशोध का नहीं बल्कि पुनर्निर्माण का ही दूसरा नाम है।” ‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ को दृष्टि में रखते हुए सूरदास की चारित्रिक विशेषताओं को लिखिए। सूरदास का चरित्र प्रतिशोध की भावना से परे, पुनर्निर्माण और क्षमा का प्रतीक है। वे दयालु, सहनशील और परोपकारी हैं। अपनी आँखें खोने के बाद भी वे समाज के प्रति समर्पित रहते हैं। उनमें आत्मविश्वास और संघर्ष करने की अदम्य इच्छाशक्ति है। वे किसी से बदला नहीं लेते, बल्कि अपने जीवन को नए सिरे से बनाने में विश्वास रखते हैं। “आरोहण’ कहानी लेखन में निहित कहानीकार का चिंतन क्या रहा है? स्पष्ट कीजिए। ‘आरोहण’ कहानी में लेखक का चिंतन मानवीय संघर्ष और आत्मोत्थान पर केंद्रित है। कहानीकार ने दिखाया है कि कठिनाइयों के बावजूद मनुष्य अपने प्रयासों से ऊपर उठ सकता है। यह कहानी जीवन में निरंतर आगे बढ़ने और आत्मविश्वास बनाए रखने की प्रेरणा देती है। लेखक का मानना है कि सच्ची सफलता बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि आंतरिक शक्ति से मिलती है। “अब तो ठीक है, इसी तरह मैं भी आ बैठा मौत की इस पीठ पर, उसी की जिसने मेरा सब कुछ निगल लिया था।” भूप सिंह के वक्तव्य के पीछे कही गयी गिद्ध और चिड़िया की कहानी कौनसी है? लिखिए। गिद्ध और चिड़िया की कहानी में एक गिद्ध एक चिड़िया को खा जाता है, लेकिन बाद में चिड़िया के बच्चे गिद्ध को मार डालते हैं। यह कहानी भूप सिंह के जीवन से जुड़ी है, जहाँ उन्होंने अपने परिवार को खो दिया था। वे मौत की पीठ पर बैठकर उसी दुख को सहन कर रहे हैं, जैसे चिड़िया ने गिद्ध के साथ किया। यह प्रतिशोध और पीड़ा का प्रतीक है। ‘अपना मालवा (खाऊ उजाडू सभ्यता में)’ पाठ, लेखक की पर्यावरण सम्बन्धी चिंता का यथार्थ चित्र प्रस्तुत करता है। पठित-पाठ के आधार पर लिखिए। ‘अपना मालवा’ पाठ में लेखक ने पर्यावरण के प्रति अपनी चिंता को स्पष्ट किया है। वे बताते हैं कि आधुनिक सभ्यता ने प्रकृति को नष्ट कर दिया है। पेड़ों की कटाई, जल स्रोतों का सूखना और प्रदूषण से ग्रामीण जीवन प्रभावित हुआ है। लेखक का मानना है कि मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए पर्यावरण का विनाश कर रहा है, जो भविष्य के लिए खतरनाक है। ‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ की वर्तमान समय में प्रासंगिकता क्या है? अपने विचार लिखिए। ‘सूरदास की झोंपड़ी’ पाठ आज भी प्रासंगिक है क्योंकि यह मानवीय मूल्यों और संघर्ष की कहानी है। वर्तमान समय में जहाँ लोग प्रतिशोध और स्वार्थ में लिप्त हैं, वहीं सूरदास का क्षमा और पुनर्निर्माण का संदेश महत्वपूर्ण है। यह पाठ हमें सिखाता है कि कठिनाइयों में भी धैर्य और सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए। यह समाज में सहानुभूति और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। “बिस्कोहर की माटी” आत्मकथांश में लेखक ने ग्रामीण प्राकृतिक सुषमा और सम्पदा का सुन्दर वर्णन किया है। पठित पाठ के आधार इसे अपने शब्दों में लिखिए। (उत्तर-सीमा लगभग 25 शब्द) [6] लेखक ने बिस्कोहर की माटी में हरे-भरे खेत, नदियों का कलरव, फूलों की सुगंध और ग्रामीण जीवन की सादगी का सुंदर चित्रण किया है, जो प्राकृतिक सम्पदा से भरपूर है।खण्ड - य