RBSE Class 12th 2016 Music Vocal Or Instrumental-SS-16,64,65,66,67,68,69,70-2016 Previous Year Papers

Music Vocal Or Instrumental-SS-16,64,65,66,67,68,69,70-2016 from the 2016 exam year is part of the Class 12th previous year papers archive on RBSE Solution. Many learners start here after finishing the textbook to see how questions were actually framed on the Rajasthan Board of Secondary Education (RBSE) paper.

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2016
Subject Music Vocal Or Instrumental-SS-16,64,65,66,67,68,69,70-2016
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th Music Vocal Or Instrumental-SS-16,64,65,66,67,68,69,70-2016 2016 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2016

SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2016

संगीत-कण्ठ अथवा वाद्य

(MUSIC-VOCAL OR INSTRUMENTAL)

समय : 3¼ घण्टे    पूर्णांक : 24

परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यतः लिखें।
    Candidate must first write his/her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि/अन्तर/विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error/difference/contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated as valid.

SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V&I)    [ Turn Over

भाग - अ (गायन)

PART - A (VOCAL)

1. निम्नलिखित की परिभाषाएँ लिखिए : [1+1+1=3]

  1. ग्राम
  2. अलंकार
  3. ताल

Write the definitions of the following:

  1. Gram
  2. Alankara
  3. Tala

Solution:

  • ग्राम (Gram): संगीत में ग्राम स्वरों के मूल समूह को कहते हैं। यह सप्तक के स्वरों के आधार पर बनता है और इसमें षड्ज, मध्यम और गांधार ग्राम प्रमुख हैं। ग्राम से ही मूर्च्छनाओं और रागों की उत्पत्ति होती है।
  • अलंकार (Alankara): अलंकार स्वरों के विशिष्ट क्रम को कहते हैं जो संगीत में सौंदर्य और सुव्यवस्था लाते हैं। ये स्वरों के आरोह-अवरोह में नियमित पैटर्न होते हैं, जैसे सा रे गा मा, रे गा मा पा आदि।
  • ताल (Tala): ताल संगीत में समय के मापन की एक निश्चित प्रणाली है। इसमें मात्राओं, विभागों और तालियों-खालियों के माध्यम से लयबद्ध चक्र बनाया जाता है। ताल संगीत को लयात्मक संरचना प्रदान करता है।

2. 'घराना' से आप क्या समझते हैं? गायन के किन्हीं दो घरानों की विशेषता लिखिए। [1+2=3]

What do you mean by 'Gharana'? Explain the characteristics of any two vocal Gharanas.

Solution:

घराना (Gharana): घराना संगीत की एक विशेष शैली या परंपरा को कहते हैं जो गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती है। प्रत्येक घराने की अपनी विशिष्ट गायन शैली, राग-प्रस्तुति का ढंग, और तकनीकी विशेषताएँ होती हैं।

दो गायन घरानों की विशेषताएँ:

  • ग्वालियर घराना: यह सबसे प्राचीन घराना है। इसकी विशेषता है सरल, स्पष्ट और सीधी गायन शैली। इसमें स्वरों की स्पष्टता, बोल-बांट का प्रयोग, और मध्य लय में विस्तार पर जोर दिया जाता है। रागों की प्रस्तुति में आलाप, तान और सरगम का संतुलित उपयोग होता है।
  • आगरा घराना: इस घराने की गायन शैली में ठुमरी और ध्रुपद का प्रभाव दिखता है। इसमें गमक, मींड और खटके का प्रचुर प्रयोग होता है। गायन में भावपूर्णता और लयकारी पर विशेष बल दिया जाता है। रागों की प्रस्तुति में देर से आलाप शुरू करके तेज तानों और बोल-तानों का प्रयोग किया जाता है।

गायन विषय लेने वाले छात्र केवल भाग - अ के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें। सितार, सरोद, वायलिन, दिलरुबा अथवा इसराज, बांसुरी व गिटार विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - ब के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें तथा तबला व पखावज विषय के परीक्षार्थी केवल भाग - स के प्रश्नों के ही उत्तर लिखें।

Candidates offering vocal music should attempt only the questions of Part - A. Candidates offering Sitar, Sarod, Violin, Dilruba or Israj, Flute and Guitar should attempt only the questions of Part - B and candidates offering Tabla and Pakhawaj should attempt only the questions of Part - C.

उत्तर-पुस्तिका के मुखपृष्ठ पर विषय स्पष्ट रूप से लिखें।

Write your subject clearly on the cover page of the answer book.

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3) नाट्यशास्त्र' की संक्षिप्त जानकारी दीजिए । [3]

Give brief knowledge about 'Natyashastra'.

नाट्यशास्त्र भारतीय नाट्य, संगीत और नृत्य का प्राचीनतम ग्रंथ है, जिसकी रचना महर्षि भरत ने की थी। यह लगभग 200 ईसा पूर्व से 200 ईस्वी के बीच लिखा गया माना जाता है। इसमें 36 अध्याय हैं, जिनमें नाट्य, संगीत, नृत्य, रस, अभिनय, मंच-निर्माण आदि का विस्तृत वर्णन है। संगीत के संदर्भ में, इसमें स्वर, राग, ताल, वाद्य यंत्रों और गायन-वादन के नियमों का उल्लेख मिलता है। नाट्यशास्त्र को 'पंचम वेद' भी कहा जाता है।

4) भारतीय संगीत के विकास में पं. विष्णु नारायण भातखंडे के योगदान को लिखिए । [3]

Write the contribution of Pt. Vishnu Narayan Bhatkhande in the development of Indian Music.

पं. विष्णु नारायण भातखंडे (1860-1936) का भारतीय शास्त्रीय संगीत के विकास में अमूल्य योगदान है। उन्होंने संगीत को एक व्यवस्थित और वैज्ञानिक रूप दिया। उनके प्रमुख योगदान निम्नलिखित हैं:

  • राग वर्गीकरण: उन्होंने रागों को 10 थाटों में वर्गीकृत किया, जिससे रागों का अध्ययन सरल हुआ।
  • संगीत ग्रंथों का संकलन: उन्होंने 'हिंदुस्तानी संगीत पद्धति' (6 भाग) और 'क्रमिक पुस्तक मालिका' (6 भाग) जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की।
  • संगीत शिक्षा का प्रसार: उन्होंने लखनऊ में 'मैरिस कॉलेज ऑफ म्यूजिक' (अब भातखंडे संगीत संस्थान) की स्थापना की।
  • स्वरलिपि प्रणाली: उन्होंने एक मानक स्वरलिपि प्रणाली विकसित की, जिससे संगीत को लिखित रूप में संरक्षित किया जा सका।

5) अपने पाठ्यक्रम की किसी राग का संपूर्ण परिचय लिखिए । [3]

Write complete Introduction of any Raga from your Syllabus.

राग भैरवी का संपूर्ण परिचय:

  • थाट: भैरवी
  • जाति: संपूर्ण-संपूर्ण (सातों स्वर)
  • वादी स्वर: म (मध्यम)
  • संवादी स्वर: स (षड्ज)
  • आरोह: स रे ग म प ध नि सां
  • अवरोह: सां नि ध प म ग रे स
  • पकड़: स रे ग म प ध नि सां, सां नि ध प म ग रे स
  • समय: प्रातःकाल (सुबह 4-7 बजे)
  • स्वरूप: यह एक गंभीर और करुण रस प्रधान राग है, जिसमें सभी स्वर शुद्ध लगते हैं।

6) राग पहचानिए - [2½+4½=3]

i) निसाम, मगप, मगरेसा

ii) गरे, गमप मगरे सा

Identify the Raga -

i) NiSa Ma, Ma Ga Pa, Ma Ga Re Sa

ii) GaRe, Ga Ma Pa Ma Ga Re Sa

पहचान:

  • i) राग भैरवी: स्वर समूह 'निसाम, मगप, मगरेसा' राग भैरवी की पकड़ को दर्शाता है, जिसमें नि-सा-म और म-ग-प का प्रयोग होता है।
  • ii) राग भैरवी: स्वर समूह 'गरे, गमप मगरे सा' भी राग भैरवी की विशेषता है, जहाँ ग-रे और ग-म-प-म-ग-रे-सा का वक्र प्रयोग होता है।

स्पष्टीकरण: दोनों स्वर समूह राग भैरवी के आरोह-अवरोह और पकड़ के अनुरूप हैं। भैरवी में कोमल स्वर नहीं होते, सभी स्वर शुद्ध लगते हैं, और यह प्रातःकाल का राग है।

7) उस्ताद फैयाज़ खां की जीवनी लिखिए । [3]

Write the life sketch of Ustad faiyazkhan.

उस्ताद फैयाज़ खां (1886-1950) भारतीय शास्त्रीय संगीत के प्रसिद्ध गायक थे, जो आगरा घराने से संबंधित थे। उनका जन्म आगरा में हुआ था और उन्होंने अपने पिता उस्ताद सुल्तान खां से संगीत की शिक्षा ली। वे अपनी गायकी में बड़े ख्याल, तराना और ठुमरी के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी आवाज़ में गहराई और भावपूर्णता थी, जिससे वे श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उन्होंने कई शिष्यों को संगीत की शिक्षा दी और भारतीय संगीत को समृद्ध किया। उन्हें 'आफताब-ए-मौसीकी' (संगीत का सूर्य) की उपाधि से सम्मानित किया गया।

8) ताल तिलवाड़ा को दुगुन सहित लिखिए । [3]

Write Tala Tilwada with dugun.

ताल तिलवाड़ा 16 मात्राओं का एक ताल है, जिसके 4 विभाग होते हैं (4+4+4+4)। इसके बोल निम्नलिखित हैं:

विभाग 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16
बोल धा धिं धिं धा धा धिं धिं धा धा तिं तिं ता ता धिं धिं धा
ताली/खाली ताली ताली ताली ताली ताली खाली खाली ताली

दुगुन (दोगुनी लय): दुगुन में प्रति मात्रा पर दो बोल बोले जाते हैं, जिससे ताल की गति दोगुनी हो जाती है। तिलवाड़ा के दुगुन के बोल इस प्रकार हैं:

धा धिं | धिं धा | धा धिं | धिं धा | धा तिं | तिं ता | ता धिं | धिं धा ||

(प्रत्येक विभाग में 2 मात्राएँ, कुल 16 मात्राएँ)

भाग - ब / PART - B

(सितार / सरोद / वायलिन / दिलरुबा अथवा इसराज / बांसुरी / गिटार)
(Sitar / Sarod / Violin / Dilruba or Israj / Flute / Guitar)

2. निम्नलिखित की परिभाषाएँ लिखिए : [1+1+1=3]

Write the definitions of the followings :

  1. i) वर्ण (Varna)

    वर्ण संगीत में स्वरों के एक विशिष्ट क्रम को कहते हैं जो किसी राग की पहचान और स्वरूप को निर्धारित करता है। यह राग के आरोह-अवरोह में प्रयुक्त स्वरों का समूह होता है।

    Varna refers to a specific sequence of notes in music that defines the identity and form of a raga. It is the group of notes used in the ascent and descent of a raga.

  2. ii) लय (Laya)

    लय संगीत में समय के नियमित प्रवाह को कहते हैं। यह ताल और गति का आधार है, जो संगीत को एक निश्चित गति और लयबद्धता प्रदान करता है।

    Laya refers to the regular flow of time in music. It is the basis of rhythm and tempo, providing a fixed speed and rhythmic structure to music.

  3. iii) जमजमा (Jamjama)

    जमजमा एक प्रकार का अलंकार या गायन-वादन शैली है जिसमें स्वरों को तीव्र गति से बारी-बारी से बजाया या गाया जाता है, जिससे संगीत में चमक और प्रभाव उत्पन्न होता है।

    Jamjama is a type of ornamentation or style of singing/playing where notes are played or sung alternately at a fast pace, creating brilliance and effect in music.

3. घराना क्या है ? वादन के किन्हीं दो घरानों की विशेषताएँ लिखिए। [4+2=6]

What is Gharana? Write the characteristics of any two Instrumental Gharana.

घराना (Gharana): घराना संगीत की एक विशेष शैली या परंपरा है जो गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती है। यह किसी विशेष परिवार या संगीतकार समूह द्वारा विकसित की गई अद्वितीय वादन या गायन शैली को दर्शाता है।

Gharana is a specific style or tradition of music passed down through generations via the guru-shishya tradition. It represents a unique style of playing or singing developed by a particular family or group of musicians.

दो वादन घरानों की विशेषताएँ (Characteristics of two Instrumental Gharanas):

  1. मैहर घराना (Maihar Gharana):

    • इस घराने की स्थापना उस्ताद अलाउद्दीन खान ने की थी।
    • इसमें सितार और सरोद वादन पर विशेष बल दिया जाता है।
    • वादन में गायकी अंग (गायन शैली) का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
    • रागों की सुंदर और भावपूर्ण प्रस्तुति पर जोर दिया जाता है।
    • तानों और अलंकारों का प्रचुर प्रयोग होता है।
  2. जयपुर घराना (Jaipur Gharana):

    • इस घराने की स्थापना उस्ताद अल्लादिया खान ने की थी।
    • यह मुख्यतः सितार वादन के लिए प्रसिद्ध है।
    • वादन में झाला (तेज गति का अंतिम भाग) का विशेष महत्व है।
    • स्वरों की स्पष्टता और ताल के साथ सटीक समन्वय पर बल दिया जाता है।
    • रागों की गंभीर और गहन प्रस्तुति इसकी विशेषता है।

4. प्राचीन भारतीय संगीत के इतिहास की जानकारी दीजिए। [2]

Describe the history of the music in Ancient Period.

प्राचीन भारतीय संगीत का इतिहास वैदिक काल से प्रारंभ होता है। वेदों में सामगान (सामवेद) का उल्लेख मिलता है, जो संगीत का प्रारंभिक रूप था। इस काल में संगीत मुख्यतः धार्मिक अनुष्ठानों और यज्ञों में प्रयोग होता था। बाद में, नाट्यशास्त्र (भरतमुनि द्वारा रचित) में संगीत के सिद्धांतों, स्वरों, तालों और रागों का विस्तृत वर्णन मिलता है। प्राचीन काल में संगीत को 'गंधर्व वेद' के नाम से भी जाना जाता था और यह नृत्य एवं नाटक के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ था। इस काल में सप्तक (सात स्वरों) की अवधारणा विकसित हुई और विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्रों (तंतु, सुषिर, अवनद्ध, घन) का प्रचलन हुआ।

The history of ancient Indian music begins from the Vedic period. The Samaveda mentions Samagan (chanting), which was an early form of music. During this period, music was primarily used in religious rituals and sacrifices. Later, the Natyashastra (composed by Bharata Muni) provides a detailed description of the principles of music, notes, rhythms, and ragas. In ancient times, music was also known as 'Gandharva Veda' and was integrally linked with dance and drama. The concept of the octave (seven notes) was developed during this period, and various types of musical instruments (string, wind, percussion, solid) were in use.

5. आधुनिक भारतीय संगीत का संक्षिप्त इतिहास समझाइये। [2]

Explain the history of Indian Music in Modern Period.

आधुनिक भारतीय संगीत का इतिहास 18वीं शताब्दी के बाद से प्रारंभ होता है। इस काल में मुगल साम्राज्य के पतन के बाद भी संगीत को राजकीय संरक्षण मिलता रहा। 19वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन के दौरान संगीत में कई बदलाव आए। इस काल में घराना प्रणाली का विकास हुआ और विभिन्न घरानों (जैसे ग्वालियर, आगरा, जयपुर, मैहर आदि) ने अपनी विशिष्ट शैलियाँ विकसित कीं। 20वीं शताब्दी में विश्वविद्यालयों और संगीत संस्थानों की स्थापना के साथ संगीत का व्यवस्थित शिक्षण प्रारंभ हुआ। रेडियो, टेलीविजन और रिकॉर्डिंग तकनीक के आगमन ने संगीत को जन-जन तक पहुँचाया। आधुनिक काल में शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ फिल्म संगीत और लोक संगीत का भी विकास हुआ। प्रसिद्ध संगीतकारों जैसे पंडित रविशंकर, उस्ताद बिस्मिल्लाह खान, पंडित भीमसेन जोशी आदि ने भारतीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।

The history of modern Indian music begins from the 18th century onwards. During this period, even after the decline of the Mughal Empire, music continued to receive royal patronage. In the 19th century, during British rule, many changes occurred in music. The Gharana system developed during this period, and various gharanas (such as Gwalior, Agra, Jaipur, Maihar, etc.) developed their distinct styles. In the 20th century, with the establishment of universities and music institutions, systematic teaching of music began. The advent of radio, television, and recording technology brought music to the masses. In the modern period, along with classical music, film music and folk music also developed. Renowned musicians like Pandit Ravi Shankar, Ustad Bismillah Khan, Pandit Bhimsen Joshi, etc., gave Indian music international recognition.

SS-6,63,64,65,66,67,68,69,70—Music (V&I) 43

प्रश्न 5

अपने वाद्य के अंगों का सचित्र वर्णन कीजिए। [3]

Describe the Parts of your instrument with Diagram.

उत्तर: यह प्रश्न आपके द्वारा चुने गए वाद्य (जैसे सितार, तबला, हारमोनियम, वायलिन आदि) पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, यदि वाद्य सितार है, तो इसके प्रमुख अंग निम्नलिखित हैं:

  • तुंबा (Tumba): सितार का निचला गोलाकार भाग, जो ध्वनि को गूंजने में सहायक होता है।
  • डांडी (Dandi): लंबी लकड़ी की पट्टी जिसमें तार और फ्रेट लगे होते हैं।
  • पेट (Pet): तुंबा और डांडी के बीच का भाग।
  • तार (Strings): मुख्य रूप से 7 तार (मध्यम, पंचम, गांधार, षडज, तार सप्तक के तार) और 11-13 सहायक तार (तरफदार)।
  • फ्रेट (Frets): धातु के टुकड़े जो स्वरों को निर्धारित करते हैं।
  • खूंटी (Khunti): तारों को कसने और ढीला करने के लिए खूंटे।
  • गुरदा (Gurda): तारों को सहारा देने वाला पुल।
  • जवारी (Jawari): ध्वनि को मधुर बनाने वाला विशेष भाग।

(चित्र के लिए वाद्य का एक सरल रेखाचित्र बनाकर अंगों को नामांकित करें।)

प्रश्न 6

उस्ताद अलाउद्दीन खां की जीवनी लिखिए। [3]

Write the life sketch of Ustad Alauddin Khan.

उत्तर: उस्ताद अलाउद्दीन खां (1862-1972) भारतीय शास्त्रीय संगीत के महान संगीतज्ञ और मैहर घराने के संस्थापक थे।

  • जन्म: 1862 में बंगाल के शिबपुर गांव में हुआ।
  • गुरु: उन्होंने उस्ताद वजीर खां (रामपुर घराना) से सीखा।
  • विशेषता: वे सितार, सरोद, वायलिन और ध्रुपद-ख्याल गायन में निपुण थे।
  • योगदान: उन्होंने रागों में नए प्रयोग किए और "मैहर घराने" की स्थापना की।
  • शिष्य: पंडित रविशंकर, उस्ताद अली अकबर खां, पंडित निखिल बनर्जी जैसे प्रसिद्ध शिष्य।
  • सम्मान: 1958 में पद्म भूषण, 1971 में पद्म विभूषण से सम्मानित।
  • निधन: 6 सितंबर 1972 को मैहर में हुआ।

प्रश्न 7

ताल धमार को दुगुन सहित लिखिए। [3]

Write Tala Dhamar with Dugun.

उत्तर: ताल धमार में 14 मात्राएँ होती हैं, जिनके 3 विभाग होते हैं: 5 + 5 + 4। ताली-खाली का क्रम: ताली (1), खाली (6), ताली (11)।

धमार ताल का स्वरूप:

मात्रा 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14
बोल धा धा धा ता ता ता धा धा धा ता ता धा धा धा
ताली/खाली ताली खाली ताली

दुगुन (Dugun): दुगुन में प्रति मात्रा में दो बोल बोले जाते हैं। धमार का दुगुन इस प्रकार है:

धाधा धाधा ताता ताता | ताधा धाधा ताता ताता | धाधा धाधा ||

(नोट: दुगुन में 14 मात्राओं में 28 बोल होते हैं।)

प्रश्न 8

स्वर समुदाय से राग पहचानिए - [3]

i) सा ग म प ध प

ii) मं प ध प, म म रे सा

Identify the Raga from given Notes -

i) Sa Ga Ma Pa Dha Pa

ii) Ma Pa Dha Pa, Ma Ma Re Sa

उत्तर:

i) सा ग म प ध प: यह स्वर समूह राग यमन (कल्याण थाट) का संकेत देता है। राग यमन में आरोह में तीव्र मध्यम (म) और अवरोह में शुद्ध मध्यम का प्रयोग होता है, लेकिन यहाँ दिए गए स्वरों में तीव्र मध्यम का संकेत है। वैकल्पिक रूप से यह राग भूपाली (कल्याण थाट) भी हो सकता है, जिसमें ग और ध स्वर प्रमुख होते हैं।

ii) मं प ध प, म म रे सा: यह स्वर समूह राग भैरवी (भैरवी थाट) का संकेत देता है। इसमें कोमल रे (रे), कोमल ध (ध), और शुद्ध म (म) का प्रयोग है, जो भैरवी की विशेषता है।

(नोट: सटीक पहचान के लिए पूर्ण स्वर विस्तार और चलन आवश्यक है।)

प्रश्न 9

अपने पाठ्यक्रम से किसी एक राग का संपूर्ण परिचय लिखिए। [2]

Write the complete Introduction of any Raga from your syllabus.

उत्तर: उदाहरण के लिए राग भूपाली का परिचय:

  • थाट: कल्याण
  • जाति: औडव-औडव (आरोह-अवरोह में 5-5 स्वर)
  • आरोह: सा रे ग प ध सां
  • अवरोह: सां ध प ग रे सा
  • वादी स्वर: ग (गांधार)
  • संवादी स्वर: ध (धैवत)
  • समय: रात्रि का प्रथम प्रहर (6-9 बजे)
  • पकड़: ग रे ग प ध प ग रे सा
  • विशेषता: इसमें मध्यम (म) और निषाद (नि) वर्जित हैं। यह एक गंभीर और शांत राग है, जो भक्ति रस प्रधान है।

भाग - स (तबला / पखावज)

PART - C (Tabla / Pakhawaj)

निम्नलिखित की परिभाषाएँ लिखिए : [1+1=2]

  1. i) जड़ब (Jarab)

    जड़ब (Jarab): तबले या पखावज में बजाया जाने वाला एक प्रकार का बोल या वादन शैली है, जिसमें उंगलियों या हथेली के किनारे से त्वरित और स्पष्ट ध्वनि उत्पन्न की जाती है। यह मुख्यतः ताल के लयात्मक सौंदर्य को बढ़ाने के लिए प्रयोग किया जाता है।

  2. ii) पेशकार (Peshkara)

    पेशकार (Peshkara): पखावज वादन की एक प्रमुख और प्रारंभिक रचना है, जो ताल के विस्तार और लयात्मक प्रदर्शन के लिए बजाई जाती है। इसमें विभिन्न बोलों (जैसे धा, तिन, ना, कट, गदी, गेन) का क्रमबद्ध प्रयोग होता है और यह वादन की शुरुआत में प्रस्तुत की जाती है।

झपताल व सूलताल का तुलनात्मक विवरण दीजिए | [2]

झपताल और सूलताल का तुलनात्मक विवरण:

क्र. विशेषता झपताल सूलताल
1 मात्राएँ 10 मात्राएँ 10 मात्राएँ
2 विभाग 2+3+2+3 (4 विभाग) 2+2+2+2+2 (5 विभाग)
3 ताली-खाली ताली: 1, 3, 6, 8; खाली: 10 ताली: 1, 3, 5, 7, 9; खाली: कोई नहीं
4 सम पहली मात्रा पर पहली मात्रा पर
5 प्रयोग ख्याल, ध्रुपद, ठुमरी ध्रुपद, पखावज वादन

निष्कर्ष: दोनों ताल 10 मात्राओं के हैं, लेकिन विभागों की संख्या और ताली-खाली के वितरण में भिन्नता है। झपताल में खाली होती है जबकि सूलताल में नहीं।

प्राचीन व आधुनिक कालीन भारतीय संगीत के इतिहास को समझाइये | [6]

प्राचीन कालीन भारतीय संगीत का इतिहास:

  • वैदिक काल (लगभग 1500-500 ई.पू.): संगीत की उत्पत्ति वेदों से मानी जाती है। सामवेद में गायन का विस्तृत वर्णन मिलता है। तीन स्वर (उदात्त, अनुदात्त, स्वरित) और सात स्वर (षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद) का उल्लेख है।
  • रामायण-महाभारत काल: संगीत का प्रयोग धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में होता था। वीणा, मृदंग आदि वाद्यों का वर्णन मिलता है।
  • गुप्त काल (320-550 ई.): संगीत का स्वर्ण युग। भरतमुनि का 'नाट्यशास्त्र' रचा गया, जिसमें राग, ताल, वाद्य आदि का विस्तृत विवरण है।
  • मध्यकाल (12वीं-18वीं शताब्दी): मुगल काल में हिंदुस्तानी संगीत का विकास। अमीर खुसरो (ख्याल, तराना, सितार) और तानसेन (ध्रुपद) का योगदान।

आधुनिक कालीन भारतीय संगीत का इतिहास:

  • 19वीं शताब्दी: ब्रिटिश शासन में संगीत का संरक्षण घटा, लेकिन रियासतों में जारी रहा। विष्णु नारायण भातखंडे ने हिंदुस्तानी संगीत का वैज्ञानिक वर्गीकरण किया (10 थाट प्रणाली)।
  • 20वीं शताब्दी: स्वतंत्रता के बाद संगीत का संस्थागत विकास। आकाशवाणी, दूरदर्शन, संगीत नाटक अकादमी की स्थापना। विश्वविद्यालयों में संगीत शिक्षा।
  • आधुनिक युग: फिल्म संगीत, पॉप, रॉक, फ्यूजन का उदय। पंडित रविशंकर (सितार), उस्ताद अमजद अली खान (सरोद), हरिप्रसाद चौरसिया (बांसुरी) जैसे कलाकारों ने अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।

निष्कर्ष: प्राचीन काल में संगीत धार्मिक और शास्त्रीय रूप में विकसित हुआ, जबकि आधुनिक काल में यह लोकप्रिय और वैश्विक बना।

बारह (12) मात्रा की दो तालों का विवरण, ठेका सहित लिखिए | [2+2=4]

ताल 1: एकताल (12 मात्राएँ)

  • मात्राएँ: 12
  • विभाग: 6 (2+2+2+2+2+2)
  • ताली-खाली: ताली: 1, 3, 5, 7, 9, 11; खाली: कोई नहीं
  • सम: पहली मात्रा पर
  • ठेका (बोल): धिं धिं धागे तिरकिट तू ना कट ता धागे तिरकिट धिं ना

ताल 2: चौताल (12 मात्राएँ)

  • मात्राएँ: 12
  • विभाग: 6 (2+2+2+2+2+2)
  • ताली-खाली: ताली: 1, 5, 9, 11; खाली: 3, 7
  • सम: पहली मात्रा पर
  • ठेका (बोल): धा धा तिन ता किट धा धा तिन ता किट धा धा

नोट: दोनों ताल 12 मात्राओं के हैं, लेकिन एकताल में सभी विभागों पर ताली होती है, जबकि चौताल में दो खाली विभाग हैं।

5) निम्नलिखित बोलों से ताल पहचानकर उनका नाम लिखिए :

Identify tala from the given Bols and write their names :

  • i) | Ta Dhin Dhin Dha
    ताल का नाम / Tala Name: त्रिताल (Trital / Teental)
  • ii) | Tin Na
    ताल का नाम / Tala Name: रूपक ताल (Rupak Tala)

व्याख्या / Explanation:

i) बोल "Ta Dhin Dhin Dha" त्रिताल (16 मात्राओं) के पहले विभाग (4 मात्राएँ) का एक सामान्य स्वरूप है। त्रिताल में 4 विभाग होते हैं: Dha Dhin Dhin Dha | Dha Dhin Dhin Dha | Dha Tin Tin Ta | Ta Dhin Dhin Dha।

ii) बोल "Tin Na" रूपक ताल (7 मात्राओं) के दूसरे और तीसरे विभाग (Tin Na) का संकेत है। रूपक ताल में 3 विभाग होते हैं: Tin Tin Na | Tin Na | Dhin Na।

6) ताल तिलवाड़ा एवं त्रिताल को दुगुन व चौगुन सहित लिखिए |

Write Tala Tilwada & Tritala with Dugun & Chaugun.

ताल तिलवाड़ा (Tala Tilwada)

मात्राएँ: 16
विभाग: 4 (4+4+4+4)
ताली-खाली: ताली 1, 5, 13; खाली 9

बोल: Dha | Dhin | Dhin | Dha | Dha | Dhin | Dhin | Dha | Dha | Tin | Tin | Ta | Ta | Dhin | Dhin | Dha

दुगुन (Dugun - दोगुनी गति): प्रति मात्रा में दो बोल बोले जाते हैं।
DhaDha | DhinDhin | DhinDhin | DhaDha | DhaDha | DhinDhin | DhinDhin | DhaDha | DhaDha | TinTin | TinTin | TaTa | TaTa | DhinDhin | DhinDhin | DhaDha

चौगुन (Chaugun - चौगुनी गति): प्रति मात्रा में चार बोल बोले जाते हैं।
DhaDhaDhaDha | DhinDhinDhinDhin | DhinDhinDhinDhin | DhaDhaDhaDha | DhaDhaDhaDha | DhinDhinDhinDhin | DhinDhinDhinDhin | DhaDhaDhaDha | DhaDhaDhaDha | TinTinTinTin | TinTinTinTin | TaTaTaTa | TaTaTaTa | DhinDhinDhinDhin | DhinDhinDhinDhin | DhaDhaDhaDha

ताल त्रिताल (Tala Trital / Teental)

मात्राएँ: 16
विभाग: 4 (4+4+4+4)
ताली-खाली: ताली 1, 5, 13; खाली 9

बोल: Dha | Dhin | Dhin | Dha | Dha | Dhin | Dhin | Dha | Dha | Tin | Tin | Ta | Ta | Dhin | Dhin | Dha

दुगुन (Dugun):
DhaDha | DhinDhin | DhinDhin | DhaDha | DhaDha | DhinDhin | DhinDhin | DhaDha | DhaDha | TinTin | TinTin | TaTa | TaTa | DhinDhin | DhinDhin | DhaDha

चौगुन (Chaugun):
DhaDhaDhaDha | DhinDhinDhinDhin | DhinDhinDhinDhin | DhaDhaDhaDha | DhaDhaDhaDha | DhinDhinDhinDhin | DhinDhinDhinDhin | DhaDhaDhaDha | DhaDhaDhaDha | TinTinTinTin | TinTinTinTin | TaTaTaTa | TaTaTaTa | DhinDhinDhinDhin | DhinDhinDhinDhin | DhaDhaDhaDha

7) अहमद जान थिरकवा का जीवन परिचय एवं योगदान लिखिए |

Write the life sketch & contribution of Ahmed Jaan Thirakwa.

जीवन परिचय (Life Sketch): अहमद जान थिरकवा (Ahmed Jaan Thirakwa) का जन्म 1892 ई. में मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था। वे एक प्रसिद्ध तबला वादक थे और उन्होंने तबला वादन में अद्वितीय योगदान दिया। उनके पिता का नाम मियाँ कादिर बख्श था, जो स्वयं एक तबला वादक थे। अहमद जान ने अपने पिता से तबला सीखना शुरू किया और बाद में उस्ताद मुन्ने खाँ से शिक्षा प्राप्त की। वे फर्रुखाबाद घराने के प्रमुख कलाकार थे।

योगदान (Contribution): अहमद जान थिरकवा को तबला वादन में "बोल-बांट" और "लयकारी" के लिए जाना जाता है। उन्होंने तबले पर जटिल लयबद्ध रचनाएँ प्रस्तुत कीं और तालों के प्रदर्शन में नए आयाम स्थापित किए। वे अपनी तेज़ और सटीक उंगलियों की चाल के लिए प्रसिद्ध थे। उन्होंने कई शिष्यों को तबला सिखाया और भारतीय शास्त्रीय संगीत में तबले के महत्व को बढ़ाया। उनका निधन 1976 ई. में हुआ, लेकिन उनकी कला आज भी तबला वादकों के लिए प्रेरणा स्रोत है।