RBSE Class 12th 2016 Sociology-SS-29-2016 Previous Year Papers
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Paper details
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| Board | RBSE |
|---|---|
| Class | Class 12th |
| Exam year | 2016 |
| Subject | Sociology-SS-29-2016 |
| Resource type | Previous Year Papers |
| Category | RBSE Previous Year Question Papers |
| Website | RBSE Solution |
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RBSE Class 12th 2016 Sociology-SS-29-2016
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Rajasthan Board Class 12th Sociology-SS-29-2016 2016 solved Previous Year Question Papers
उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2016
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2016
समाजशास्त्र
SOCIOLOGY
समय : 3¼ घण्टे पूर्णांक : 80
नामांक / Roll No. : _________________________
SLNo. : _________________________
No. of Questions — 30 S S-29-Sociology
No. of Printed Pages — 7
परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :
- परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्नपत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
Candidate must write first his/her Roll No. on the question paper compulsorily. - सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
All the questions are compulsory. - प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें।
Write the answer to each question in the given answer-book only. - जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
For questions having more than one part, the answers to those parts are to be written together in continuity.
SS-29-Sociology 424 [ Turn Over
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खण्ड - अ / SECTION - A
प्रश्न 5. जनसांख्यिकीय संक्रमण सिद्धान्त क्या है?
What is theory of Demographic Transition?
उत्तर / Answer: जनसांख्यिकीय संक्रमण सिद्धान्त के अनुसार, जनसंख्या में परिवर्तन तीन चरणों में होता है: उच्च जन्म-मृत्यु दर से निम्न जन्म-मृत्यु दर की ओर। यह सिद्धान्त बताता है कि विकासशील देशों में जनसंख्या वृद्धि धीरे-धीरे स्थिर होती है।
प्रश्न 6. अदृश्य-हाथ का नाम किस विद्वान द्वारा दिया गया?
Who coined the name of "the invisible hand"?
उत्तर / Answer: अदृश्य-हाथ (Invisible Hand) की अवधारणा प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एडम स्मिथ (Adam Smith) द्वारा दी गई थी।
प्रश्न 7. (प्रश्न स्पष्ट नहीं है, कृपया पुनः जाँचें।)
(Question not clear, please re-check.)
प्रश्न 8. (प्रश्न स्पष्ट नहीं है, कृपया पुनः जाँचें।)
(Question not clear, please re-check.)
निर्देश / Instructions:
प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी संस्करण में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर / विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को ही सही मानें।
If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.
| खण्ड | प्रश्न संख्या | अंक प्रत्येक | उत्तर की शब्द सीमा |
|---|---|---|---|
| अ (A) | 1-8 | 1 | 10 शब्द |
| ब (B) | 9-14 | 2 | 30 शब्द |
| स (C) | 15-26 | 3 | 45 शब्द |
| द (D) | 27-30 | 6 | 200 शब्द |
प्रश्न क्रमांक 27 से 30 तक में आंतरिक विकल्प हैं।
Question Nos. 27 to 30 have internal choices.
SS-29-Sociology 424
3. राष्ट्रवाद को परिभाषित कीजिए | [ ]
Define Nationalism?
राष्ट्रवाद (Nationalism): राष्ट्रवाद एक राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विचारधारा है जो किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले लोगों में एकता, साझा इतिहास, भाषा, संस्कृति और मूल्यों के प्रति निष्ठा और अपने राष्ट्र के प्रति गर्व की भावना को बढ़ावा देती है। यह राष्ट्र को सर्वोच्च मानता है और उसकी स्वतंत्रता, एकता एवं विकास के लिए कार्य करता है।
4. राष्ट्र-राज्य की अवधारणा से आप क्या समझते है? [ ]
What do you mean by Nation - State?
राष्ट्र-राज्य (Nation-State): राष्ट्र-राज्य एक ऐसी राजनीतिक इकाई है जिसमें एक स्पष्ट भौगोलिक सीमा के भीतर रहने वाले लोग एक समान राष्ट्रीय पहचान (भाषा, संस्कृति, इतिहास) साझा करते हैं और एक संप्रभु सरकार द्वारा शासित होते हैं। इसमें राष्ट्र (सांस्कृतिक एकता) और राज्य (राजनीतिक संगठन) का मेल होता है, जैसे भारत, फ्रांस, जापान।
5. उपनिवेशवाद का अर्थ क्या है? [2]
What is the meaning of colonialism?
उपनिवेशवाद (Colonialism): उपनिवेशवाद एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक शक्तिशाली देश (महानगर) किसी कमजोर देश पर राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक नियंत्रण स्थापित करता है, वहाँ अपने नागरिकों को बसाता है, और वहाँ के संसाधनों का दोहन करता है। इसका उद्देश्य उपनिवेश को अपने लाभ के लिए उपयोग करना होता है।
6. संस्कृतिकरण की अवधारणा के जनक कौन थे? [1]
Who coined the concept of Sanskritization?
उत्तर: संस्कृतिकरण की अवधारणा के जनक प्रोफेसर एम. एन. श्रीनिवास (M. N. Srinivas) थे।
7. कानून और न्याय में अंतर बताईये | [ ]
Differentiate between law and justice?
| कानून (Law) | न्याय (Justice) |
|---|---|
| यह राज्य द्वारा बनाए गए नियमों और विनियमों का समूह है। | यह नैतिकता, समानता और निष्पक्षता पर आधारित एक आदर्श अवधारणा है। |
| इसका पालन अनिवार्य है, उल्लंघन पर दंड मिलता है। | यह एक सिद्धांत है, जिसे कानून के माध्यम से प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। |
| कानून लिखित और स्पष्ट होता है। | न्याय अमूर्त और व्याख्या पर निर्भर होता है। |
| उदाहरण: भारतीय दंड संहिता (IPC) | उदाहरण: सभी को समान अवसर देना |
8. विदेशी फर्म द्वारा अपना बाजार बढ़ाने के लिए स्थानीय परम्पराओं के साथ व्यवहार में लाई जाने वाली अवधारणा को किस नाम से जाना जाता है? [ ]
A concept adopted by foreign firm while dealing with local tradition in order to enhance their marketability known as.
उत्तर: इस अवधारणा को ग्लोकलाइज़ेशन (Glocalization) कहा जाता है। इसमें वैश्विक उत्पादों या सेवाओं को स्थानीय संस्कृति, रीति-रिवाजों और आवश्यकताओं के अनुसार ढालकर प्रस्तुत किया जाता है ताकि स्थानीय बाजार में उनकी स्वीकार्यता और बिक्री बढ़ सके।
खण्ड - ब (SECTION - B)
9. भारत में गिरते हुए स्त्री-पुरुष अनुपात के दो सामाजिक कारक बताईये | [2]
Point out any two social factors which decrease the ratio of women - men in India?
भारत में स्त्री-पुरुष अनुपात में गिरावट के दो सामाजिक कारक:
- पुत्र प्राप्ति की इच्छा और कन्या भ्रूण हत्या: समाज में बेटे को वरीयता देने की परंपरा के कारण गर्भ में ही बेटियों को मार दिया जाता है या जन्म के बाद उनकी उपेक्षा की जाती है।
- दहेज प्रथा और महिलाओं के प्रति भेदभाव: दहेज का बोझ और बेटियों को आर्थिक बोझ समझना, साथ ही महिलाओं को शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रखना, जिससे उनकी मृत्यु दर बढ़ जाती है।
0) शिक्षा के पण्यीकरण से आप क्या समझते हैं? [2]
What do you understand by commoditisation of education?
उत्तर: शिक्षा के पण्यीकरण का अर्थ है शिक्षा को एक वस्तु (commodity) के रूप में देखना, जिसे खरीदा और बेचा जा सकता है। इसमें शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान और कौशल विकसित करने के बजाय लाभ कमाना हो जाता है। निजी स्कूल, कोचिंग संस्थान और ऑनलाइन पाठ्यक्रम इसके उदाहरण हैं।
ll) औपनिवेशिक काल में समुद्र तटीय नगर क्यों पसंद किये गये? [2]
Why were coastal cities favoured by the colonial regime?
उत्तर: औपनिवेशिक काल में अंग्रेजों ने समुद्र तटीय नगरों को इसलिए पसंद किया क्योंकि वे व्यापार और प्रशासन के लिए सुविधाजनक थे। समुद्री मार्गों से माल का आयात-निर्यात आसान था, और ये नगर ब्रिटेन से आने वाले जहाजों के लिए प्रवेश द्वार का काम करते थे। मुंबई, चेन्नई और कोलकाता इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
2) समकालीन भारतीय समाज में पश्चिमीकरण से उत्पन्न सामाजिक समस्या का उल्लेख कीजिए। [2]
Explain the social cause emerge due to westernization in contemporary Indian society.
उत्तर: पश्चिमीकरण से उत्पन्न एक प्रमुख सामाजिक समस्या सांस्कृतिक संघर्ष है। पश्चिमी मूल्यों (जैसे व्यक्तिवाद, उपभोक्तावाद) और पारंपरिक भारतीय मूल्यों (जैसे सामूहिकता, परिवारवाद) के बीच टकराव बढ़ा है। इससे पीढ़ीगत अंतर, पारिवारिक विघटन और पहचान का संकट उत्पन्न हुआ है।
3) भारतीय राजनीति में दबाव समूह की महत्वता समझाइये। [2]
Explain the importance of pressure Groups in Indian politics.
उत्तर: दबाव समूह भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे सरकार पर विशिष्ट हितों (जैसे किसान, श्रमिक, व्यापारी) के लिए दबाव डालकर नीति-निर्माण को प्रभावित करते हैं। ये लोकतंत्र में विविध आवाजों को प्रतिनिधित्व देते हैं और सरकार को जवाबदेह बनाते हैं। उदाहरण: भारतीय किसान संघ, ट्रेड यूनियन।
4) भार रहित अर्थव्यवस्था किसे कहते हैं? [2]
What is weightless economy?
उत्तर: भार रहित अर्थव्यवस्था (Weightless Economy) वह अर्थव्यवस्था है जिसमें उत्पादों का भौतिक वजन नहीं होता, बल्कि वे ज्ञान, सूचना और डिजिटल सेवाओं पर आधारित होते हैं। उदाहरण: सॉफ्टवेयर, ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल मीडिया। इसमें उत्पादन की लागत कम होती है और वैश्विक पहुंच आसान होती है।
खण्ड - C
5) भारत के आर्थिक विकास और संवृद्धि में आयु संरचना के महत्व को स्पष्ट कीजिए। [3]
Explain the importance of Age-Structure in Economic Development and growth in India?
उत्तर: आयु संरचना (Age-Structure) का अर्थ है जनसंख्या में विभिन्न आयु वर्गों (बच्चे, युवा, वृद्ध) का वितरण। भारत के आर्थिक विकास में इसका महत्व निम्नलिखित है:
- जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend): भारत में 15-64 वर्ष की कार्यशील आयु की जनसंख्या अधिक है। यदि इन्हें शिक्षा और रोजगार मिले, तो उत्पादकता बढ़ती है और आर्थिक वृद्धि तेज होती है।
- श्रम बल आपूर्ति: युवा जनसंख्या श्रम बल में वृद्धि करती है, जिससे उद्योगों और सेवाओं को सस्ता श्रम मिलता है।
- बचत और निवेश: कार्यशील आयु के लोग अधिक बचत करते हैं, जो पूंजी निर्माण और निवेश में सहायक होता है।
- सामाजिक सुरक्षा पर बोझ: यदि वृद्ध जनसंख्या अधिक हो, तो पेंशन और स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार का खर्च बढ़ता है, जो विकास को धीमा कर सकता है।
इस प्रकार, अनुकूल आयु संरचना (युवा प्रधान) भारत के आर्थिक विकास के लिए एक बड़ा अवसर है।
6) समकालीन भारत में जाति के परिवर्तित स्वरूप की व्याख्या कीजिए। [3]
Define changing pattern of caste in contemporary India.
उत्तर: समकालीन भारत में जाति व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं। पारंपरिक रूप से जाति जन्म पर आधारित, व्यवसाय से जुड़ी और सामाजिक पदानुक्रम वाली थी, लेकिन अब इसका स्वरूप बदल गया है:
- राजनीतिक जातिवाद: जाति अब राजनीतिक पहचान बन गई है। दलित, ओबीसी और अन्य जातियाँ अपने हितों के लिए संगठित होकर वोट बैंक बनाती हैं और आरक्षण की मांग करती हैं।
- आर्थिक परिवर्तन: शहरीकरण और शिक्षा के कारण पारंपरिक जातिगत व्यवसाय कमजोर हुए हैं। कई निचली जातियों के लोग उच्च शिक्षा और नौकरियों में आगे बढ़े हैं, जबकि कुछ उच्च जातियाँ आर्थिक रूप से पिछड़ गई हैं।
- सामाजिक संबंध: अंतरजातीय विवाह और मित्रता बढ़ी है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में जातिगत भेदभाव और छुआछूत अभी भी मौजूद है।
- कानूनी और संवैधानिक बदलाव: संविधान ने जातिगत भेदभाव को समाप्त कर दिया है और अनुसूचित जातियों/जनजातियों के लिए आरक्षण प्रदान किया है, जिससे सामाजिक न्याय को बढ़ावा मिला है।
निष्कर्षतः, जाति अब पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है, लेकिन इसका स्वरूप अधिक लचीला और राजनीतिक हो गया है।
समाजशास्त्र (Sociology) – प्रश्न पत्र 2016 (पृष्ठ 5)
7) जजमानी व्यवस्था किसे कहते है? [3]
What is Jajmani System?
उत्तर: जजमानी व्यवस्था भारतीय ग्रामीण समाज की एक पारंपरिक आर्थिक-सामाजिक प्रणाली है, जिसमें विभिन्न जातियाँ (जैसे बढ़ई, लोहार, नाई, धोबी) एक-दूसरे को वस्तुएँ और सेवाएँ प्रदान करती हैं। यह आपसी निर्भरता और विनिमय पर आधारित होती है, जहाँ सेवाओं का भुगतान नकद के बजाय अनाज या अन्य वस्तुओं के रूप में किया जाता है। यह व्यवस्था गाँव की सामाजिक संरचना को मजबूत बनाती है और जातिगत संबंधों को नियंत्रित करती है।
8) क्या बाजार एक सामाजिक संस्था है? विवेचना कीजिए। [3]
Is market a social institute? Explain.
उत्तर: हाँ, बाजार एक सामाजिक संस्था है। यह केवल वस्तुओं के आदान-प्रदान का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक संबंधों, मूल्यों, मानदंडों और शक्ति संरचनाओं का एक जाल है। बाजार में खरीदार और विक्रेता के बीच संबंध सामाजिक नियमों (जैसे विश्वास, सौदेबाजी, प्रतिस्पर्धा) द्वारा नियंत्रित होते हैं। यह सामाजिक स्तरीकरण, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और आर्थिक असमानता को भी प्रभावित करता है। इस प्रकार, बाजार एक सामाजिक संस्था के रूप में कार्य करता है।
9) उपनिवेश श्रम कानून ने चाय बागानों को किस तरह लाभ पहुँचाया? [3]
In what ways did colonial labour laws benefit the owner's tea plantations?
उत्तर: उपनिवेश श्रम कानूनों (जैसे बागान श्रम अधिनियम) ने चाय बागान मालिकों को कई प्रकार से लाभ पहुँचाया:
- सस्ता श्रम: कानूनों ने मजदूरों को बागानों से भागने से रोका और उन्हें कम मजदूरी पर काम करने के लिए बाध्य किया।
- नियंत्रण: मजदूरों को अनुबंधों के तहत बांधा गया, जिससे वे मालिकों की इच्छा के अधीन रहे।
- शोषण की अनुमति: कानूनों ने लंबे काम के घंटे, खराब रहने की स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को वैध बनाया, जिससे मालिकों का मुनाफा बढ़ा।
20) भारत में सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न स्वरूपों की चर्चा कीजिए। [3]
Explain different forms of social change in India.
उत्तर: भारत में सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न स्वरूप निम्नलिखित हैं:
- संस्कृतिकरण: निम्न जातियाँ उच्च जातियों की रीति-रिवाजों और परंपराओं को अपनाकर अपनी सामाजिक स्थिति सुधारती हैं।
- पश्चिमीकरण: पश्चिमी संस्कृति, शिक्षा, तकनीक और मूल्यों को अपनाने से सामाजिक संरचना में बदलाव आता है।
- आधुनिकीकरण: औद्योगीकरण, शहरीकरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के प्रसार से पारंपरिक समाज में परिवर्तन होता है।
- ग्लोबलाइजेशन: वैश्विक आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभावों से भारतीय समाज में नए बदलाव आते हैं।
2) ग्रामीण भारत के उत्थान में पंचायती राज व्यवस्था की भूमिका को स्पष्ट कीजिए। [3]
Explain the role of Panchayati Raj System in transformation of Rural India.
उत्तर: पंचायती राज व्यवस्था ग्रामीण भारत के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है:
- स्थानीय शासन: यह गाँव स्तर पर लोकतांत्रिक शासन प्रदान करती है, जिससे ग्रामीण अपने मुद्दों का समाधान स्वयं कर सकते हैं।
- विकास कार्य: पंचायतें सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में सहायक होती हैं।
- सशक्तिकरण: यह महिलाओं और पिछड़े वर्गों को राजनीतिक भागीदारी का अवसर देती है, जिससे सामाजिक समानता बढ़ती है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था: पंचायतें कृषि, लघु उद्योग और रोजगार योजनाओं को बढ़ावा देकर आर्थिक उत्थान में योगदान करती हैं।
22) संविदा खेती के समाजशास्त्रीय महत्व को स्पष्ट कीजिए। [3]
Explain the sociological significance of contract farming?
उत्तर: संविदा खेती का समाजशास्त्रीय महत्व निम्नलिखित है:
- सामाजिक संबंधों में बदलाव: यह किसानों और कंपनियों के बीच नए आर्थिक संबंध बनाती है, जिससे पारंपरिक जमींदार-किसान संबंध प्रभावित होते हैं।
- ग्रामीण स्तरीकरण: बड़े किसान अधिक लाभ उठाते हैं, जबकि छोटे किसान हाशिए पर चले जाते हैं, जिससे असमानता बढ़ती है।
- सांस्कृतिक प्रभाव: नई फसलों और तकनीकों को अपनाने से ग्रामीण जीवनशैली और मूल्यों में परिवर्तन आता है।
- श्रम संबंध: यह मजदूरों के रोजगार और मजदूरी दरों को प्रभावित करती है, जिससे सामाजिक गतिशीलता बदलती है।
23) हरित क्रांति से उत्पन्न कोई दो सामाजिक समस्याओं का उल्लेख कीजिए। [3]
Describe any two social problems occurred by green revolution.
उत्तर: हरित क्रांति से उत्पन्न दो प्रमुख सामाजिक समस्याएँ निम्नलिखित हैं:
- आर्थिक असमानता: बड़े किसानों ने उन्नत बीज, उर्वरक और मशीनरी का अधिक लाभ उठाया, जबकि छोटे और सीमांत किसान पीछे रह गए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आय असमानता बढ़ी।
- सामाजिक विस्थापन: मशीनीकरण के कारण कृषि श्रमिकों की मांग घटी, जिससे बेरोजगारी बढ़ी और ग्रामीण श्रमिक शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए।
24) बहुराष्ट्रीय निगम क्या है? [3]
What are transnational corporation?
उत्तर: बहुराष्ट्रीय निगम (Transnational Corporation) वे बड़ी कंपनियाँ हैं जो एक से अधिक देशों में अपने कार्यों का संचालन करती हैं। इनका मुख्यालय एक देश में होता है, लेकिन ये अन्य देशों में उत्पादन, विपणन और वितरण करती हैं। ये वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और स्थानीय समाजों पर आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रभाव डालती हैं। उदाहरण: माइक्रोसॉफ्ट, कोका-कोला, टाटा समूह।
25) सुधारवादी एवं क्रान्तिकारी आंदोलनों के मध्य अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Explain the difference between Reformist movements and Revolutionary movements.
सुधारवादी आंदोलन (Reformist Movements): ये आंदोलन मौजूदा सामाजिक व्यवस्था में आंशिक परिवर्तन लाने पर जोर देते हैं। ये व्यवस्था को पूरी तरह बदलने के बजाय उसमें सुधार करना चाहते हैं। उदाहरण: महिला शिक्षा आंदोलन, छुआछूत विरोधी आंदोलन।
क्रान्तिकारी आंदोलन (Revolutionary Movements): ये आंदोलन मौजूदा सामाजिक, राजनीतिक या आर्थिक व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने का प्रयास करते हैं। ये एक नई व्यवस्था स्थापित करना चाहते हैं। उदाहरण: फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति।
मुख्य अंतर: सुधारवादी आंदोलन व्यवस्था के भीतर बदलाव चाहते हैं, जबकि क्रान्तिकारी आंदोलन व्यवस्था को ही बदलना चाहते हैं। सुधारवादी धीरे-धीरे बदलाव लाते हैं, जबकि क्रान्तिकारी तीव्र और व्यापक परिवर्तन चाहते हैं।
26) किस तरह नए कृषक आन्दोलन को नया सामाजिक आन्दोलन कहा गया?
Why are new farmer's movement termed as new social movement?
नए कृषक आंदोलनों को 'नया सामाजिक आंदोलन' (New Social Movement) इसलिए कहा गया क्योंकि ये पारंपरिक किसान आंदोलनों से भिन्न थे। इनकी विशेषताएँ:
- मुद्दे: ये केवल भूमि या फसल मूल्य तक सीमित नहीं थे, बल्कि पर्यावरण, जल संसाधन, वैश्वीकरण के प्रभाव, और किसानों की सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों को भी उठाते थे।
- संगठन: ये आंदोलन राजनीतिक दलों से स्वतंत्र थे और इनमें गैर-पारंपरिक नेतृत्व एवं सहभागिता देखी गई।
- रणनीति: इनमें प्रदर्शन, रैलियाँ, और मीडिया का प्रभावी उपयोग किया गया, जो पारंपरिक आंदोलनों से अलग था।
- पहचान: ये आंदोलन किसानों की एक नई सामूहिक पहचान बनाने में सफल रहे, जो सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक-सांस्कृतिक भी थी।
इस प्रकार, नए कृषक आंदोलनों को 'नया सामाजिक आंदोलन' कहा गया क्योंकि ये पारंपरिक वर्ग-आधारित आंदोलनों से हटकर व्यापक सामाजिक मुद्दों और पहचान पर केंद्रित थे।
खण्ड - द (SECTION - D)
27) विषमता के सामाजिक स्वरूप की व्याख्या कीजिए।
Discuss the social aspect of Inequality?
विषमता के सामाजिक स्वरूप का अर्थ है कि समाज में लोगों के बीच असमानता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से निर्मित होती है। इसके प्रमुख पहलू:
- जाति व्यवस्था: भारत में जाति के आधार पर लोगों को सामाजिक रूप से ऊँच-नीच का दर्जा दिया जाता है, जो विषमता का एक प्रमुख स्रोत है।
- लिंग असमानता: पुरुषों और महिलाओं के बीच सामाजिक अवसरों, अधिकारों और प्रतिष्ठा में अंतर पाया जाता है।
- वर्ग विभाजन: धन, शिक्षा और व्यवसाय के आधार पर समाज में ऊपरी, मध्य और निचले वर्ग बनते हैं, जो सामाजिक विषमता को जन्म देते हैं।
- सामाजिक बहिष्कार: कुछ समूहों को संसाधनों, अवसरों और सामाजिक संबंधों से बाहर रखा जाता है, जैसे दलितों के साथ भेदभाव।
सामाजिक विषमता समाज में शक्ति, प्रतिष्ठा और अवसरों के असमान वितरण से उत्पन्न होती है और यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती रहती है।
अथवा
सामाजिक स्तरीकरण के प्रकार्यों का उल्लेख कीजिए।
Explain the function of social stratification?
सामाजिक स्तरीकरण समाज को विभिन्न स्तरों (तबकों) में बाँटने की प्रक्रिया है। इसके प्रमुख प्रकार्य (कार्य) निम्नलिखित हैं:
- सामाजिक व्यवस्था बनाए रखना: स्तरीकरण समाज में एक पदानुक्रम स्थापित करता है, जिससे व्यवस्था और नियंत्रण बना रहता है।
- भूमिकाओं का विभाजन: यह विभिन्न कार्यों को लोगों को सौंपता है, जैसे शासक, शिक्षक, मजदूर आदि, जिससे समाज सुचारू रूप से चलता है।
- प्रतिभा और योग्यता का चयन: यह सुनिश्चित करता है कि सबसे योग्य लोग सबसे महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हों (कार्यात्मक सिद्धांत के अनुसार)।
- सामाजिक एकीकरण: विभिन्न स्तरों के लोग एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं, जिससे सामाजिक एकता बनी रहती है।
- सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण: उच्च वर्ग अक्सर सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं के संरक्षक के रूप में कार्य करता है।
हालाँकि, स्तरीकरण के नकारात्मक कार्य भी हैं, जैसे असमानता को बढ़ावा देना और सामाजिक संघर्ष उत्पन्न करना।
28) आधुनिक समाज में पथनिरपेक्षीकरण प्रक्रिया से आप क्या समझते हैं?
What do you understand by secularisation process in modern society?
पथनिरपेक्षीकरण (Secularisation) वह प्रक्रिया है जिसमें धर्म का सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक जीवन पर प्रभाव कम होता जाता है। आधुनिक समाज में इसके प्रमुख पहलू:
- धर्म का निजीकरण: धर्म सार्वजनिक जीवन से हटकर व्यक्तिगत मामला बन जाता है।
- राज्य का धर्मनिरपेक्ष होना: राज्य किसी एक धर्म को संरक्षण नहीं देता और सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण रखता है।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: लोग घटनाओं की व्याख्या धार्मिक कारणों के बजाय वैज्ञानिक और तर्कसंगत आधार पर करने लगते हैं।
- सामाजिक संस्थाओं का धर्मनिरपेक्ष होना: शिक्षा, विधि, चिकित्सा जैसी संस्थाएँ धार्मिक नियंत्रण से मुक्त हो जाती हैं।
आधुनिक समाज में पथनिरपेक्षीकरण एक सतत प्रक्रिया है, जो औद्योगीकरण, शहरीकरण और शिक्षा के प्रसार से तेज हुई है।
अथवा
भारत विश्व में सबसे अधिक सामाजिक-सांस्कृतिक विभिन्नता वाला राष्ट्र है, विवेचना कीजिए।
India is socially and culturally one of most diverse countries of the world, Explain?
भारत में अत्यधिक सामाजिक-सांस्कृतिक विविधता पाई जाती है, जो इसे विश्व का सबसे विविध राष्ट्र बनाती है। इसके प्रमुख आयाम:
- धार्मिक विविधता: हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन आदि सभी प्रमुख धर्म यहाँ पाए जाते हैं।
- भाषाई विविधता: भारत में 22 अनुसूचित भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ बोली जाती हैं।
- जातीय विविधता: विभिन्न जातियाँ, उपजातियाँ और जनजातियाँ यहाँ निवास करती हैं, जिनकी अपनी अलग परंपराएँ हैं।
- सांस्कृतिक विविधता: त्योहार, रीति-रिवाज, खान-पान, वेशभूषा और कला में भारी भिन्नता है।
- भौगोलिक विविधता: विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों (पहाड़, मैदान, तट) में अलग-अलग सामाजिक-सांस्कृतिक विशेषताएँ विकसित हुई हैं।
यह विविधता भारत की पहचान है, लेकिन इसके साथ ही सामाजिक समरसता और एकता बनाए रखना एक चुनौती भी है।
प्रश्न 29
1982 की मुम्बई टेक्सटाईल मिल में “हड़ताल खतम” करवाने वालों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। [6]
अथवा
खान श्रमिकों को कौन से खतरे व मुसीबतों का सामना करना पड़ता है?
Examine the role played by strike breakers in Bombay Textile strike of 1982.
OR
What are the dangers and risks faced by mine workers?
उत्तर (विकल्प 1 – हड़ताल तोड़ने वालों की भूमिका)
1982 की मुम्बई टेक्सटाईल मिल हड़ताल भारतीय श्रम इतिहास की सबसे लंबी हड़तालों में से एक थी, जो लगभग 18 महीने चली। हड़ताल तोड़ने वाले (strike breakers) वे श्रमिक थे जो हड़ताल के दौरान काम पर लौट आए या मिल मालिकों द्वारा नए सिरे से भर्ती किए गए। उनकी भूमिका विवादास्पद रही:
- मिल मालिकों का समर्थन: मिल मालिकों ने हड़ताल तोड़ने वालों को काम पर रखकर उत्पादन जारी रखा और हड़ताल को कमजोर किया।
- श्रमिक आंदोलन को कमजोर करना: इन श्रमिकों की उपस्थिति ने हड़ताल की एकता को भंग किया और अंततः हड़ताल को समाप्त करने में मदद की।
- सामाजिक और आर्थिक दबाव: कई हड़ताल तोड़ने वाले गरीबी और परिवार की जिम्मेदारियों के कारण मजबूर थे, जिससे उन्हें हड़ताल का विरोध करना पड़ा।
कुल मिलाकर, हड़ताल तोड़ने वालों ने मिल मालिकों के पक्ष में काम किया और हड़ताल की विफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे मुम्बई की कपड़ा मिलों का पतन हुआ।
उत्तर (विकल्प 2 – खान श्रमिकों के खतरे)
खान श्रमिकों को अनेक खतरों और मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, जिनमें प्रमुख हैं:
- शारीरिक खतरे: भूस्खलन, गैस रिसाव, विस्फोट, और मशीनरी दुर्घटनाएँ।
- स्वास्थ्य समस्याएँ: धूल और रसायनों के कारण फेफड़ों के रोग (जैसे सिलिकोसिस), सुनने की क्षमता में कमी, और त्वचा संक्रमण।
- मानसिक तनाव: अंधेरे, सीमित स्थान और लंबे समय तक काम करने से मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
- सामाजिक और आर्थिक समस्याएँ: कम मजदूरी, असुरक्षित रोजगार, और परिवार से दूर रहना।
इन खतरों के बावजूद, खान श्रमिक अक्सर गरीबी और रोजगार के अभाव में यह काम करने को मजबूर होते हैं।
प्रश्न 30
भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों की वृद्धि के कारण बताइए। [6]
अथवा
बेनेडिक्ट एंडरसन द्वारा प्रतिपादित काल्पनिक समुदाय अवधारणा का भारतीय परिप्रेक्ष्य में परीक्षण कीजिए।
What are the reasons for the growth of Indian newspapers?
OR
Discuss the concept of imagined community as given by Benedict Anderson. Also examine it in Indian context.
उत्तर (विकल्प 1 – भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों की वृद्धि के कारण)
भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों की वृद्धि के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- साक्षरता दर में वृद्धि: स्वतंत्रता के बाद शिक्षा के प्रसार से अधिक लोग पढ़ने लिखने में सक्षम हुए, जिससे स्थानीय भाषाओं के समाचार पत्रों की मांग बढ़ी।
- क्षेत्रीय पहचान और भाषाई आंदोलन: राज्यों के गठन और भाषाई पहचान के विकास ने लोगों को अपनी मातृभाषा में समाचार पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
- सस्ती मुद्रण तकनीक: डिजिटल प्रिंटिंग और सस्ते कागज ने समाचार पत्रों को कम कीमत पर उपलब्ध कराया।
- विज्ञापन और व्यावसायिक विस्तार: स्थानीय व्यवसायों और सरकारी विज्ञापनों ने इन पत्रों को आर्थिक रूप से मजबूत किया।
- राजनीतिक जागरूकता: लोकतंत्र में राजनीतिक भागीदारी ने लोगों को समाचार पत्रों पर निर्भर बनाया, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
इन कारणों से हिंदी, मराठी, तमिल, बंगाली आदि भाषाओं के समाचार पत्रों का प्रसार तेजी से हुआ।
उत्तर (विकल्प 2 – काल्पनिक समुदाय की अवधारणा)
बेनेडिक्ट एंडरसन ने अपनी पुस्तक "इमेजिन्ड कम्युनिटीज" (1983) में राष्ट्रवाद की व्याख्या की। उनके अनुसार, राष्ट्र एक काल्पनिक समुदाय (imagined community) है, क्योंकि:
- राष्ट्र के सभी सदस्य एक-दूसरे को नहीं जानते, फिर भी वे एक समुदाय की कल्पना करते हैं।
- यह कल्पना मुद्रण पूंजीवाद (print capitalism) और समाचार पत्रों के माध्यम से फैलती है, जो एक साझा भाषा और संस्कृति का निर्माण करते हैं।
- राष्ट्र सीमित और संप्रभु होता है, लेकिन इसकी एकता काल्पनिक होती है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य:
- भारत में विविध भाषाओं, धर्मों और संस्कृतियों के बावजूद, स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रीय आंदोलन ने एक काल्पनिक समुदाय का निर्माण किया।
- समाचार पत्रों और साहित्य ने हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में राष्ट्रीय चेतना फैलाई।
- हालांकि, भारत में क्षेत्रीय पहचान और भाषाई विविधता के कारण यह काल्पनिक समुदाय कभी-कभी तनावपूर्ण भी रहा है, जैसे भाषाई आंदोलन और अलगाववादी मांगें।
इस प्रकार, एंडरसन की अवधारणा भारत में राष्ट्रवाद की जटिलता को समझने में सहायक है।
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