RBSE Class 12th 2017 -SS-01-2017 Previous Year Papers

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Paper details

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2017
Subject -SS-01-2017
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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RBSE Class 12th 2017 -SS-01-2017

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Rajasthan Board Class 12th -SS-01-2017 2017 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक परीक्षा, 2017
SENIOR SECONDARY EXAMINATION, 2017

हिन्दी (अनिवार्य)

समय : 3¼ घण्टे     पूर्णांक : 80


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें।
  2. सभी प्रश्न करने अनिवार्य हैं।
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में निर्धारित शब्द-सीमा में लिखें।
  4. जिस प्रश्न के आ, ब, स, द, य भाग हैं, उन सभी भागों का हल एक साथ सतत्‌ लिखें।

No. of Questions : 5     No. of Printed Pages : 7

प्रश्न पत्र कोड : SS-0-Hindi(C) 805

खण्ड - क

1. निम्नांकित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द है)

नए युग में विचारों की नई गंगा बहाओ तुम,
कि सब कुछ जो बदल दे ऐसे तूफां में नहाओ तुम।
अगर तुम ठान लो तो आंधियों को मोड़ सकते हो,
अगर तुम ठान लो तो तारे गगन के तोड़ सकते हो।।
अगर तुम ठान लो तो विश्व के इतिहास में अपने-
सुयश का एक नव अध्याय भी तुम जोड़ सकते हो,
तुम्हारे बाहुबल पर विश्व को भारी भरोसा है-
उसी विश्वास को फिर आज जन-जन में जगाओ तुम।
पसीना तुम अगर इसमें अपना मिला दोगे,
करोड़ों दीन-हीनों को नया जीवन दिला दोगे।
तुम्हारी देह के श्रम-सीकरों में शक्ति है इतनी,
कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे।
नया जीवन तुम्हारे हाथ का हल्का इशारा है।
इशारा कर वही इस देश को लहलहाओ तुम।।

(क) यदि भारतीय नवयुवक दृढ़ संकल्प कर लें तो क्या-क्या कर सकते हैं? [2]

यदि भारतीय नवयुवक दृढ़ संकल्प कर लें तो वे आंधियों को मोड़ सकते हैं, आकाश के तारे तोड़ सकते हैं, और विश्व के इतिहास में अपने सुयश का एक नया अध्याय जोड़ सकते हैं। वे अपने बाहुबल से विश्व का विश्वास जगा सकते हैं।

(ख) नवयुवकों से क्या करने का आग्रह किया जा रहा है? [2]

नवयुवकों से आग्रह किया जा रहा है कि वे नए युग में विचारों की नई गंगा बहाएं, बदलाव लाने वाले तूफान में नहाएं, और अपने बाहुबल पर विश्व के भरोसे को जन-जन में जगाएं। वे देश को लहलहाने का इशारा करें।

(ग) युवक यदि परिश्रम करें तो क्या लाभ होगा? [2]

यदि युवक परिश्रम करें तो वे अपने पसीने से करोड़ों दीन-हीनों को नया जीवन दे सकते हैं। उनके श्रम की बूंदों में इतनी शक्ति है कि वे धूल में भी सोने के फूल खिला सकते हैं, अर्थात् अभाव में भी समृद्धि ला सकते हैं।

(घ) 'कहीं भी धूल में तुम फूल सोने के खिला दोगे' पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। [2]

इस पंक्ति का भाव है कि युवकों के श्रम में अपार शक्ति है। वे सबसे कठिन और बंजर परिस्थितियों (धूल) में भी अद्भुत सफलता और समृद्धि (सोने के फूल) उत्पन्न कर सकते हैं। उनके प्रयास से असंभव भी संभव हो जाता है।

2. निम्नांकित अपठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(प्रत्येक प्रश्न के लिए उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द है)

युद्ध और नर-संहारक शस्त्रों की भीषण चोटों से घायल विश्व का हृदय यह स्पष्ट अनुभव कर रहा है कि स्थायी सुख और शान्ति का मार्ग हिंसा में नहीं, अहिंसा में है। आज विश्व के सिर पर युद्ध और अशान्ति के बादल मंडरा रहे हैं। विश्व का एक भी राष्ट्र अपने को पूर्ण सुरक्षित अनुभव नहीं कर रहा है। सर्वत्र भय की भावना व्याप्त हो रही है। सबल राष्ट्र निर्बल राष्ट्रों की स्वतन्त्रता का बलात् अपहरण कर रहे हैं। हिंसा के पथ पर अग्रसर होकर विश्व-विनाश की ओर जा रहा है।

(क) विश्व का हृदय क्या अनुभव कर रहा है और क्यों? [2]

विश्व का हृदय यह अनुभव कर रहा है कि स्थायी सुख और शांति का मार्ग हिंसा में नहीं, अहिंसा में है। ऐसा इसलिए क्योंकि युद्ध और नर-संहारक शस्त्रों ने विश्व को घायल कर दिया है, और हिंसा के कारण सर्वत्र भय एवं अशांति व्याप्त है।

(ख) वर्तमान विश्व की क्या स्थिति है? [2]

वर्तमान विश्व की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। विश्व के सिर पर युद्ध और अशांति के बादल मंडरा रहे हैं। कोई भी राष्ट्र पूर्ण सुरक्षित नहीं है, सर्वत्र भय व्याप्त है, और सबल राष्ट्र निर्बल राष्ट्रों की स्वतंत्रता का हनन कर रहे हैं। विश्व हिंसा के पथ पर विनाश की ओर बढ़ रहा है।

3)

आज आवश्यकता इस बात की है कि युद्ध के स्थान पर शान्ति की स्थापना की जाए, शत्रुता के स्थान पर मित्रता के हाथ बढ़ाए जाएं। गाँधीजी ने अहिंसा का मार्ग अपनाकर ही भारत को अंग्रेजों की दासता से मुक्त कराया था। महावीर स्वामी, गौतम बुद्ध और महात्मा ईसा ने भी अहिंसा के द्वारा ही मानव-कल्याण का पथ आलोकित किया था। आज भी हमारा देश इसी अहिंसा की वाणी का सन्देश, शान्ति का देवदूत बनकर भय और संशयग्रस्त संसार को दे रहा है। यही आज की क्षत-विक्षत मानवता की सबसे बड़ी माँग है। हमारा कर्त्तव्य है कि हम अहिंसा के आदर्शों को अपनाकर मानवता के दीप को प्रज्वलित करें। यही आज के युग का परम धर्म है।

प्रश्न:

  1. a) स्थायी सुख और शान्ति कैसे प्राप्त की जा सकती है? [2]
  2. a) विश्व अशान्ति का कारण एवं उसे दूर करने के उपाय बताइए। [2]
  3. स) आज देश को किन बातों की सबसे अधिक आवश्यकता है? [2]
  4. द) देश के प्रति हमारे क्या कर्त्तव्य हैं? [2]

4) खण्ड - ख

निम्न विषयों में से किसी एक पर लगभग 450 शब्दों में सारगर्भित निबन्ध लिखिए : [7]

  1. राष्ट्र के प्रति हमारा दायित्व
  2. बढ़ते वाहन : गिरता स्वास्थ्य
  3. पर्यावरण संरक्षण : जीवन का मूल आधार
  4. बढ़ती महंगाई : दुखद जीवन
  5. कम्प्यूटर शिक्षण की अनिवार्यता

5)

अपने विद्यालय में आयोजित स्वतन्त्रता दिवस" अथवा 'शिक्षक दिवस' पर एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) लिखिए। [4]

स्वयं को कपिल मानते हुए अपने क्षेत्र के पुलिस अधिकारी को मोहल्ले में आए दिन होने वाली चोरियों की शिकायत करते हुए एक पत्र लिखिए। (उत्तर सीमा 100 शब्द) [3]

अथवा

स्वयं को भरतपुर निवासी संजीव मानते हुए भरतपुर के नगर निगम के कार्यकारी अधिकारी को सड़कों पर बढ़ रहे अतिक्रमण को नियन्त्रित करने हेतु पत्र लिखिए। (उत्तर सीमा 100 शब्द)

6) निम्नांकित विषयों में से किसी एक पर आलेख लिखिए : (उत्तर सीमा 80 से 100 शब्द)

  1. बुजुर्गों के प्रति घटता दायित्व बोध
  2. बाल श्रम और उपेक्षित जीवन
  3. स्वच्छता: भारत का सपना

7) निम्नांकित विषयों में से किसी एक विषय पर फीचर लिखिए : (उत्तर सीमा 80 से 100 शब्द)

  1. मोबाइल फोन पर केन्द्रित जीवन
  2. भारत पर आतंकवाद की छाया
  3. सादा जीवन : उच्च विचार की लुप्त होती अवधारणा

खण्ड - ग

(उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द)

8) निम्नांकित पठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास
पृथ्वी घूमती हुई आती है उनके बेचैन परों के पास
जब वे हैं बेसुध
छतों को भी नरम बनाते हुए
दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए
जब वे पेंग भरते हुए चले आते हैं
डाल की तरह लचीले वेग से अक्सर
छतों के खतरनाक किनारों तक-
उस समय गिरने से बचाता है उन्हें
सिर्फ उनके ही रोमांचित शरीर का संगीत
पतंगों की धड़कती ऊंचाइयाँ उन्हें थाम लेती है महज एक धागे के सहारे
पतंगों के साथ वे भी उड़ रहे हैं-
अपने रंक्रो के सहारे

  1. बच्चे जन्म से ही अपने साथ कपास कैसे लाते हैं?

    बच्चे जन्म से ही अपने साथ कोमलता, मासूमियत और संवेदनशीलता लाते हैं, जो कपास के समान मुलायम होती है। यह उनके स्वभाव की सहज कोमलता को दर्शाता है।

  2. “दिशाओं ......... बजाते हुए” पंक्ति से कवि का क्या तात्पर्य है?

    इस पंक्ति में कवि का तात्पर्य है कि बच्चे अपनी कल्पना और उत्साह से चारों दिशाओं में ऐसा आनंद और संगीत भर देते हैं, मानो वे दिशाओं को मृदंग (एक वाद्य) की तरह बजा रहे हों। यह उनकी चंचलता और जीवंतता को दर्शाता है।

  3. बच्चों को छतों से गिरने से कौन बचाता है?

    बच्चों को छतों से गिरने से उनके अपने रोमांचित शरीर का संगीत बचाता है। इसका अर्थ है कि उनकी चंचलता, फुर्ती और शारीरिक सजगता ही उन्हें खतरे से बचाती है।

  4. “पतंगों के ......... उड़ रहे हैं” पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

    इस पंक्ति का आशय है कि बच्चे पतंगों के साथ उड़ने की कल्पना करते हैं। वे अपनी कल्पना के सहारे पतंगों की तरह आकाश में उड़ने का अनुभव करते हैं, जो उनकी स्वतंत्रता और कल्पनाशीलता को दर्शाता है।

अथवा

हरषि राम 82s हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुहाना।।
तुरत बैद तब किन्हीं उपाई। उठि बैठे लछिमन हरबाई।।

9) निम्नांकित पठित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द)

ईश्वर की प्रभुता और श्रीराम के भाई (लक्ष्मण) की प्रशंसा हो रही है। सभी भालू और वानर प्रसन्न हैं। वानर (हनुमान) उसी प्रकार वहाँ पहुँचे जैसे उस समय उन्हें ले आए। यह वृत्तांत सुनकर रावण अत्यंत दुखी हुआ और अपना सिर धुनने लगा। वह व्याकुल होकर कुंभकर्ण के पास गया और विभिन्न प्रयत्नों से उसे जगाया।

अ) हनुमान को आया देखकर श्रीराम के हृदय में क्या भाव जगे?

हनुमान को आया देखकर श्रीराम के हृदय में अत्यधिक प्रसन्नता और आश्वस्ति का भाव जगा। उन्हें लगा कि अब लक्ष्मण की मूर्च्छा दूर होगी और संजीवनी बूटी लाने का कार्य सफल हुआ है।

ब) लक्ष्मण की मूर्च्छा किस प्रकार दूर हुई?

हनुमान संजीवनी बूटी लेकर आए। उस बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण की मूर्च्छा दूर हुई और वे स्वस्थ हो गए।

“हरषे सकल भालु कपि ब्राता' पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

इस पंक्ति का आशय है कि हनुमान के संजीवनी बूटी लेकर आने पर सभी भालू और वानर (कपि) अत्यधिक प्रसन्न हो गए। उनके मन में विजय का विश्वास जाग गया।

रावण किस कारण अपना सिर धुनने लगा?

रावण को जब पता चला कि हनुमान संजीवनी बूटी लेकर आ गए हैं और लक्ष्मण स्वस्थ हो गए हैं, तब वह अत्यधिक दुखी और व्याकुल हो गया। इसी कारण वह अपना सिर धुनने लगा।

निम्नांकित पठित काव्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द)

प्रात नभ था बहुत नीला शंख जैसे
भोर का नभ
राख से लीपा हुआ चौका
(अभी गीला पड़ा है)
बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से
कि जैसे धुल गई हो

अ) उपर्युक्त पंक्तियों में कवि शमशेर बहादुर सिंह द्वारा वर्णित भाव को समझाइए।

कवि ने प्रातःकाल के आकाश का सुंदर चित्रण किया है। नीला आकाश शंख जैसा लगता है। भोर का आकाश राख से लीपे हुए गीले चौके जैसा है। काली सिल पर लाल केसर का प्रभाव ऐसा है मानो वह धुल गई हो। यह प्रकृति के सौंदर्य का अद्भुत वर्णन है।

ब) उपर्युक्त काव्यांश के शिल्प सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।

इस काव्यांश में बिम्ब विधान अत्यंत सजीव है। 'शंख जैसे', 'राख से लीपा हुआ चौका', 'काली सिल' आदि बिम्ब दृश्य सौंदर्य को उभारते हैं। भाषा में चित्रात्मकता और सहजता है। 'अभी गीला पड़ा है' कोष्ठक में देकर कवि ने ताजगी का भाव व्यक्त किया है।

अथवा

बार-बार गर्जन
वर्षण है मूसलाधार,
हृदय थाम लेता संसार,
सुन-सुन घोर वज्र-हुंकार।

अ) उपर्युक्त पंक्तियों में कवि निराला द्वारा वर्णित भाव को समझाइए।

कवि निराला ने प्रकृति के उग्र रूप का वर्णन किया है। बादलों की बार-बार गर्जना और मूसलाधार वर्षा से संसार भयभीत हो जाता है। वज्र की घोर गर्जना सुनकर सबका हृदय थम जाता है। यह प्रकृति की भयावहता को दर्शाता है।

ब) उपर्युक्त काव्यांश के शिल्प सौन्दर्य पर प्रकाश डालिए।

इस काव्यांश में ध्वन्यात्मकता और लयात्मकता प्रमुख है। 'गर्जन', 'वर्षण', 'वज्र-हुंकार' शब्दों से भयानक रस की उत्पत्ति हुई है। छोटी-छोटी पंक्तियों में तीव्रता और गति का भाव है। भाषा में ओज और प्रभावोत्पादकता है।

पठित कविताओं की विषय-वस्तु से सम्बन्धित दिए तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए : (उत्तर सीमा 20 से 30 शब्द)

अ) “कैमरे में बंद अपाहिज कविता किस सामाजिक उद्देश्य की पूर्ति को दर्शाती है? क्या वास्तव में वह सामाजिक उद्देश्य की पूर्ति करती है? स्पष्ट कीजिए।

यह कविता विकलांगों के प्रति समाज की संवेदनहीनता को उजागर करती है। यह दर्शाती है कि मीडिया उन्हें केवल दर्शकों के मनोरंजन का साधन बनाता है, न कि वास्तविक सहायता का। वास्तव में यह सामाजिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं करती, बल्कि उनकी पीड़ा को भुनाती है।

ब) “देख आइने में चाँद उतर आया 2’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

इस पंक्ति में कवि कहता है कि आइने में देखने पर ऐसा प्रतीत होता है मानो चाँद उसमें उतर आया हो। यह नायिका के मुख की सुंदरता का वर्णन है, जो चाँद के समान आकर्षक और चमकीला है।

स) “भाषा को सहलियत से बरतना' कथन का तात्पर्य समझाइए।

इस कथन का तात्पर्य है कि भाषा का प्रयोग सरलता और सहजता से करना चाहिए। कवि को भाषा पर पूर्ण अधिकार होना चाहिए ताकि वह अपने भावों को बिना किसी कठिनाई के व्यक्त कर सके। भाषा को बोझिल नहीं बनाना चाहिए।

निम्नांकित पठित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(उत्तर सीमा 20 से 40 शब्द)

यहाँ मुझे ज्ञात होता है कि बाज़ार को सार्थकता भी वही मनुष्य देता है जो जानता है कि वह क्या चाहता है। और जो नहीं जानते कि वे क्या चाहते हैं, अपनी 'पर्चेज़िंग पावर' के गर्व में अपने पैसे से केवल एक विनाशक शक्ति -शैतानी शक्ति, व्यंग्य की शक्ति ही बाज़ार को देते हैं। न तो वे बाज़ार से लाभ उठा सकते हैं, न उस बाज़ार को सच्चा लाभ दे सकते हैं। वे लोग बाज़ार का बाज़ारुपन बढ़ाते है। जिसका मतलब है कि कपट बढ़ाते हैं। कपट की बढ़ती का अर्थ परस्पर में सद्भाव की घटी। इस सद्भाव के हास पर आदमी आपस में भाई-भाई और सुहद और पड़ोसी फिर रह ही नहीं जाते हैं और आपस में कोरे ग्राहक और बेचक की तरह व्यवहार करते है। मानो दोनों एक दूसरे को ठगने की घात में हों। एक की हानि में दूसरे को अपना लाभ दीखता है और यह बाज़ार का, बल्कि इतिहास का; सत्य माना जाता है ऐसे बाज़ार को बीच में लेकर लोगों में आवश्यकताओं का आदान-प्रदान नहीं होता; बल्कि शोषण होने लगता है तब कपट सफल होता है, निष्कपट शिकार होता है।

  1. बाज़ार को विनाशक शैतानी शक्ति कौन देता है? [2]

    जो लोग यह नहीं जानते कि वे क्या चाहते हैं, वे अपनी 'पर्चेज़िंग पावर' के गर्व में अपने पैसे से बाज़ार को विनाशक शैतानी शक्ति देते हैं।

  2. बाज़ार से लाभ कौन उठा सकते हैं, बताइए। [2]

    जो मनुष्य जानता है कि वह क्या चाहता है, वही बाज़ार से लाभ उठा सकता है और बाज़ार को सच्चा लाभ दे सकता है।

  3. बाज़ार में शोषण कब होने लगता है? [2]

    जब लोगों में आवश्यकताओं का आदान-प्रदान नहीं होता, बल्कि कपट सफल होता है और निष्कपट शिकार होता है, तब बाज़ार में शोषण होने लगता है।


अथवा

जाति-प्रथा के पोषक, जीवन, शारीरिक-सुरक्षा तथा संपत्ति के अधिकार की स्वतन्त्रता को तो स्वीकार कर लेंगे, परंतु मनुष्य के सक्षम एवं प्रभावशाली प्रयोग की स्वतन्त्रता देने के लिए जल्दी तैयार नहीं होंगे, क्योंकि इस प्रकार की स्वतन्त्रता का अर्थ होगा अपना व्यवसाय चुनने की स्वतन्त्रता किसी को नहीं है, तो उसका अर्थ उसे दासता' में जकड़कर रखना होगा, क्योंकि 'दासता' केवल कानूनी पराधीनता को ही नहीं कहा जा सकता। “area में वह स्थिति भी सम्मिलित है जिससे कुछ व्यक्तियों को दूसरे लोगों के द्वारा निर्धारित व्यवहार एवं कर्त्तव्यों का पालन करने के लिए विवश होना पड़ता है। यह स्थिति कानूनी पराधीनता न होने पर भी पाई जा सकती है। उदाहरणार्थ, जाति प्रथा कि तरह ऐसे वर्ग होना संभव है, जहाँ कुछ लोगों को अपनी इच्छा के विरुद्ध पेशे अपनाने पड़ते हैं।

  1. जाति प्रथा के पोषक किस बात को स्वीकार करते हैं? [2]

    जाति प्रथा के पोषक जीवन, शारीरिक-सुरक्षा तथा संपत्ति के अधिकार की स्वतन्त्रता को स्वीकार करते हैं, परंतु मनुष्य के सक्षम एवं प्रभावशाली प्रयोग की स्वतन्त्रता देने के लिए तैयार नहीं होते।

  2. दूसरों के द्वारा निर्धारित कर्त्तव्य करने की मजबूरी से क्या दुष्परिणाम संभव हैं? [2]

    इस मजबूरी से व्यक्ति को अपनी इच्छा के विरुद्ध पेशे अपनाने पड़ते हैं, जो दासता की स्थिति उत्पन्न करता है। इससे व्यक्ति की स्वतन्त्रता समाप्त हो जाती है और वह दूसरों के निर्धारित व्यवहार एवं कर्त्तव्यों का पालन करने को विवश होता है।

  3. स्वतन्त्रता और ‘area’ में अन्तर को स्पष्ट कीजिए। [2]

    स्वतन्त्रता का अर्थ है अपनी इच्छा से कार्य करने की स्वतन्त्रता, जबकि 'area' (यहाँ 'दासता' का संदर्भ) में वह स्थिति सम्मिलित है जिसमें व्यक्ति दूसरों द्वारा निर्धारित व्यवहार एवं कर्त्तव्यों का पालन करने को विवश होता है, भले ही वह कानूनी रूप से स्वतन्त्र हो।

खण्ड - ग

2) पठित गद्य पाठों की विषय वस्तु पर आधारित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर दीजिए :

(उत्तर सीमा 40 से 60 शब्द)

  1. काले मेघा पानी दे के आधार पर बताइए कि जीवन में त्याग और दान का क्या महत्त्व है? [3]

    इस पाठ के अनुसार, त्याग और दान जीवन को सार्थक बनाते हैं। त्याग से मनुष्य में संवेदनशीलता और परोपकार की भावना जागृत होती है। दान देने से न केवल दूसरों का भला होता है, बल्कि देने वाले को भी आत्मिक सुख और संतोष की प्राप्ति होती है। ये मानवीय मूल्य समाज में प्रेम और एकता को बढ़ावा देते हैं।

  2. "उसने क्षत्रिय का काम किया" राजा साहब ने ये शब्द किसके लिए और क्यों कहे हैं? पहलवान की ढोलक पाठ के आधार पर बताइए। [3]

    राजा साहब ने ये शब्द पहलवान के लिए कहे। पहलवान ने अपनी जान की परवाह किए बिना गाँव को बाढ़ से बचाने के लिए नदी में कूदकर ढोलक को बचाया। उसके इस साहसिक और निस्वार्थ कार्य को देखकर राजा साहब ने उसे क्षत्रिय (योद्धा) की उपमा दी, क्योंकि उसने वीरता और कर्तव्य का परिचय दिया।

  3. सफ़िया के भाई ने नमक की पुड़िया ले जाने से क्यों मना कर दिया? [3]

    सफ़िया का भाई इसलिए मना करता है क्योंकि वह जानता है कि नमक की पुड़िया ले जाने का मतलब है कि वे किसी गरीब या जरूरतमंद की मदद कर रहे हैं। उसे डर है कि ऐसा करने से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो जाएगी और वे स्वयं अभाव में जीने को मजबूर हो जाएंगे। यह उसकी मजबूरी और चिंता को दर्शाता है।

  4. शिरीष के फूल नामक निबन्ध से हमें क्या शिक्षा मिलती है? [3]

    इस निबंध से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें जीवन में कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों का सामना धैर्य और साहस के साथ करना चाहिए। शिरीष के फूल की तरह हमें भी प्रतिकूल वातावरण में भी खिले रहना सीखना चाहिए। यह हमें संघर्षशील और दृढ़ रहने की प्रेरणा देता है।

3) पठित काव्य की विषय वस्तु पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से दो प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

(उत्तर सीमा 40 से 60 शब्द)

  1. सिल्वर वैडिंग का कथानक आधुनिक-पाश्चात्य संस्कृति के अन्धानुकरण एवं बदलते मानवीय मूल्यों पर आधारित है। कथन को स्पष्ट कीजिए। [3]

    यह कथन सत्य है। इस कहानी में यशोधर बाबू का परिवार पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण करता है। वे अपनी माँ को अकेला छोड़कर होटल में पार्टी करने जाते हैं, जो बदलते मानवीय मूल्यों को दर्शाता है। पश्चिमी रीति-रिवाजों को अपनाने की होड़ में वे अपने पारिवारिक और सांस्कृतिक मूल्यों को भूलते जा रहे हैं, जो समाज के लिए चिंता का विषय है।

  2. लेखक आनंद यादव संघर्ष करके जीवन को उत्कृष्ट बनाता है। आप इससे कहाँ तक सहमत हैं? जूझ उपन्यास के आधार पर स्पष्ट कीजिए। [3]

    मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ। 'जूझ' उपन्यास में आनंद यादव ने अत्यंत गरीबी और विपरीत परिस्थितियों में भी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने घर के काम, मजदूरी और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाकर अपने जीवन को संवारा। उनका यह संघर्ष ही उन्हें एक सफल लेखक और एक उत्कृष्ट इंसान बनाता है। संघर्ष ही जीवन को सार्थक और ऊँचा उठाता है।

  3. अतीत में दबे पाँव पाठ के आधार पर सिन्धु सभ्यता के नगर नियोजन का वर्णन कीजिए। [3]

    सिंधु सभ्यता का नगर नियोजन अत्यंत विकसित था। नगर दो भागों में बंटे थे - ऊपरी दुर्ग और निचला नगर। सड़कें सीधी और एक-दूसरे को काटती थीं। घर पक्की ईंटों के बने होते थे और उनमें नहाने के कमरे तथा नालियाँ होती थीं। जल निकासी की उन्नत व्यवस्था थी, जो उनकी सभ्यता और सुव्यवस्था को दर्शाती है।

4) निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं दो का उत्तर दीजिए :

(उत्तर सीमा 20 से 30 शब्द)

  1. ऐन फ्रैंक ने अपनी डायरी गुड़िया किट्टी को संबोधित करके क्यों लिखी? [2]

    ऐन ने अपनी डायरी को एक सच्ची सहेली (गुड़िया किट्टी) मानकर लिखा, क्योंकि उसके पास अपने मन की बात कहने के लिए कोई और नहीं था। वह अपने विचारों और भावनाओं को बिना किसी डर के साझा करना चाहती थी।

  2. मुअनजो-दड़ो की खुदाई में प्राप्त इमारतों, अन्य स्थलों एवं वस्तुओं का सामान्य परिचय दीजिए। [2]

    यहाँ से विशाल स्नानागार, अन्नागार, सभागार जैसी इमारतें मिली हैं। इसके अलावा पशुपति नाथ की मुहर, कांस्य की नर्तकी की मूर्ति, मिट्टी के खिलौने और विभिन्न प्रकार के बर्तन प्राप्त हुए हैं, जो उनकी समृद्ध संस्कृति के प्रमाण हैं।

  3. लेखक आनन्द यादव ने पाठशाला में नाम लिखवाने के लिए क्या-क्या उपाय किए? [2]

    लेखक ने पहले अपने पिता से पढ़ने की इच्छा जताई, लेकिन वे नहीं माने। फिर उसने अपनी माँ से मदद माँगी। जब वहाँ से भी निराशा मिली, तो उसने स्वयं ही स्कूल जाकर हेडमास्टर से नाम लिखवाने की गुहार लगाई और अंत में सफलता पाई।

5) विषय वस्तु पर आधारित दिए गए दो प्रश्नों में से किसी एक निबंधात्मक प्रश्न का उत्तर दीजिए :

(उत्तर सीमा 40 से 60 शब्द)

  1. डायरी के पन्ने के आधार पर औरतों की शिक्षा और उनके मानवाधिकारों के बारे में ऐन के विचारों को अपने शब्दों में लिखिए। [3]

    ऐन फ्रैंक का मानना था कि महिलाओं को पुरुषों के समान शिक्षा और अधिकार मिलने चाहिए। वह इस बात से सहमत नहीं थी कि महिलाओं का काम केवल घर संभालना और बच्चे पैदा करना है। उसके अनुसार, महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने और अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा अधिकार है। वह महिलाओं के लिए समानता और स्वतंत्रता की पक्षधर थी।

  2. नयी पीढ़ी और नवीन जीवन मूल्य, पुरानी पीढ़ी और प्राचीन जीवन मूल्य : इन दोनों के मध्य सदैव टकराहट चलती रहती है। सिल्वर वैडिंग पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए। [3]

    यह कथन 'सिल्वर वैडिंग' पाठ में स्पष्ट दिखता है। यशोधर बाबू और उनकी पत्नी पुरानी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पारिवारिक मूल्यों और परंपराओं को महत्व देते हैं। वहीं, उनके बेटे और बहू नई पीढ़ी हैं, जो पश्चिमी संस्कृति और आधुनिक जीवनशैली को अपनाना चाहते हैं। यही कारण है कि वे अपनी माँ को अकेला छोड़कर होटल में पार्टी करने चले जाते हैं, जिससे पीढ़ियों के बीच मूल्यों का टकराव उजागर होता है।