RBSE Class 12th 2017 -SS-84-2017 Previous Year Papers

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Board RBSE
Class Class 12th
Exam year 2017
Subject -SS-84-2017
Resource type Previous Year Papers
Category RBSE Previous Year Question Papers
Website RBSE Solution

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Rajasthan Board Class 12th -SS-84-2017 2017 solved Previous Year Question Papers

उच्च माध्यमिक पूरक परीक्षा, 2017
SENIOR SECONDARY SUPPLEMENTARY EXAMINATION, 2017

कृषि विज्ञान
AGRICULTURE

समय : 3¼ घण्टे    पूर्णांक : 56

SLNo. :   No. of Questions – 30

नामांक / Roll No. :   No. of Printed Pages – 07


परीक्षार्थियों के लिए सामान्य निर्देश :
GENERAL INSTRUCTIONS TO THE EXAMINEES :

  1. परीक्षार्थी सर्वप्रथम अपने प्रश्न पत्र पर नामांक अनिवार्यत: लिखें |
    Candidate must write first his / her Roll No. on the question paper compulsorily.
  2. सभी प्रश्न हल करने अनिवार्य हैं |
    All the questions are compulsory.
  3. प्रत्येक प्रश्न का उत्तर दी गई उत्तर-पुस्तिका में ही लिखें |
    Write the answer to each question in the given answer-book only.
  4. जिन प्रश्नों में आन्तरिक खण्ड हैं, उन सभी के उत्तर एक साथ ही लिखें।
    For questions having more than one part the answers to those parts are to be written together in continuity.
  5. प्रश्न पत्र के हिन्दी व अंग्रेजी रूपान्तर में किसी प्रकार की त्रुटि / अन्तर /विरोधाभास होने पर हिन्दी भाषा के प्रश्न को सही मानें।
    If there is any error / difference / contradiction in Hindi & English versions of the question paper, the question of Hindi version should be treated valid.

प्रश्न पत्र को खोलने के लिए यहाँ फाड़ें
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SS-84-Agriculture (Supp.)   |   SS-84-Agriculture 30   [ Turn Over

2. टिकाऊ खेती किसे कहते हैं? / What do you mean by sustainable farming?

टिकाऊ खेती (Sustainable farming) एक ऐसी कृषि पद्धति है जो पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ होती है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जैव विविधता का रखरखाव, और भविष्य की पीढ़ियों के लिए उत्पादन क्षमता को बनाए रखना शामिल है।

3. दो नगदी फसलों के नाम लिखिए। / Write the name of any two cash crops.

दो प्रमुख नगदी फसलें (Cash crops) हैं:

  1. गन्ना (Sugarcane)
  2. कपास (Cotton)

4. फसलीय पौधों में नाइट्रोजन तत्व की कमी के कोई दो लक्षण लिखिए। / Write any two symptoms of nitrogen deficiency in crop plants.

फसलीय पौधों में नाइट्रोजन तत्व की कमी के दो प्रमुख लक्षण:

  1. पत्तियों का पीला पड़ना (Chlorosis) - विशेषकर पुरानी पत्तियों में पीलापन दिखाई देता है।
  2. पौधों की वृद्धि रुक जाना (Stunted growth) - पौधे बौने रह जाते हैं और तने पतले हो जाते हैं।

5. फसलों में पोटेशियम तत्व के कोई दो कार्य लिखिए। / Write any two functions of potassium element in crop plants.

फसलों में पोटेशियम तत्व के दो महत्वपूर्ण कार्य:

  1. प्रकाश-संश्लेषण में सहायक - पोटेशियम क्लोरोफिल के निर्माण और प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया को बढ़ावा देता है।
  2. रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना - यह पौधों को रोगों और कीटों से बचाने में मदद करता है तथा तने को मजबूत बनाता है।

6. चने की फसल में सिंचाई हेतु दो क्रान्तिक अवस्थाएँ लिखिए। / Give two critical stages of irrigation in gram crop.

चने की फसल में सिंचाई के लिए दो क्रान्तिक अवस्थाएँ (Critical stages):

  1. फूल आने की अवस्था (Flowering stage) - इस समय नमी की कमी से फूल झड़ सकते हैं और उपज प्रभावित होती है।
  2. फली भरने की अवस्था (Pod filling stage) - इस अवस्था में पर्याप्त नमी न मिलने पर दाने छोटे रह जाते हैं।

7. जल अपरदन नियंत्रण की चार विधियों के नाम लिखिए। / Mention the name of four methods suggested for control of soil erosion by water.

जल अपरदन (Soil erosion by water) नियंत्रण की चार विधियाँ:

  1. समोच्चरेखीय जुताई (Contour ploughing) - ढलान के समानांतर जुताई करके पानी के बहाव को रोकना।
  2. पट्टीदार खेती (Strip cropping) - विभिन्न फसलों को पट्टियों में उगाकर मिट्टी के कटाव को कम करना।
  3. मल्चिंग (Mulching) - मिट्टी की सतह को पुआल या पत्तियों से ढककर पानी के वेग को कम करना।
  4. बाँध निर्माण (Check dam construction) - छोटे-छोटे बाँध बनाकर पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना।

8. पूर्ण खरपतवार किसे कहते हैं? / What are absolute weeds?

पूर्ण खरपतवार (Absolute weeds) वे खरपतवार हैं जो प्राकृतिक रूप से किसी भी प्रकार की खेती या भूमि पर उग आते हैं और इनका कोई आर्थिक महत्व नहीं होता। ये फसलों के साथ प्रतिस्पर्धा करके उनकी उपज को कम करते हैं। उदाहरण: दूब घास (Cynodon dactylon) और मोथा (Cyperus rotundus)।

प्रश्न 8

कपास की चार उन्नत किस्मों के नाम लिखिए।
Write the name of four improved varieties of cotton.

उत्तर / Answer:

  1. आर.जी. 8 (RG 8)
  2. सुविन (Suvin)
  3. एम.सी.यू. 5 (MCU 5)
  4. लक्ष्मी (Laxmi)

प्रश्न 9

मक्का की संकर किस्मों के लिए बीज की दर प्रति हैक्टर लिखिये।
Write the seed rate for hybrid varieties of Maize (kg/ha).

उत्तर / Answer: मक्का की संकर किस्मों के लिए बीज दर लगभग 20-25 किग्रा प्रति हैक्टर होती है।
Seed rate for hybrid varieties of Maize is approximately 20-25 kg per hectare.

प्रश्न 10

विटामिन "B1" की कमी से होने वाले दो रोगों का नाम लिखिये।
Write name of any two diseases caused by vitamin "B1" deficiency.

उत्तर / Answer:

  1. बेरी-बेरी (Beriberi)
  2. वर्निक-कोर्साकॉफ सिंड्रोम (Wernicke-Korsakoff syndrome)

प्रश्न 11

अधिक शर्करा वाले दो फलों के नाम लिखिये।
Mention the name of two sugar rich fruits.

उत्तर / Answer:

  1. अंगूर (Grapes)
  2. आम (Mango)

प्रश्न 12

कॉट-छॉट के कोई दो उद्देश्य लिखिए।
Write any two objectives of pruning.

उत्तर / Answer:

  1. पौधे के आकार को नियंत्रित करना और उसे वांछित दिशा में बढ़ाना। (To control the shape of the plant and direct its growth.)
  2. रोगग्रस्त या मृत शाखाओं को हटाकर पौधे को स्वस्थ रखना। (To keep the plant healthy by removing diseased or dead branches.)

प्रश्न 13

डिब्बा बन्दी के कोई दो लाभ लिखिए।
Write any two advantages of canning.

उत्तर / Answer:

  1. खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है। (Food items can be preserved for a long time.)
  2. डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का स्वाद और पोषण मूल्य बना रहता है। (The taste and nutritional value of canned foods are retained.)

प्रश्न 14

मृदा उत्पादकता एवं उर्वरता में कोई चार अन्तर लिखिए।
Write any four differences between soil fertility and productivity.

उत्तर / Answer:

क्रमांक मृदा उर्वरता (Soil Fertility) मृदा उत्पादकता (Soil Productivity)
1. यह मृदा में पोषक तत्वों की उपलब्धता को दर्शाती है। यह मृदा की फसल उत्पादन क्षमता को दर्शाती है।
2. यह मृदा का गुणात्मक पहलू है। यह मृदा का मात्रात्मक पहलू है।
3. उर्वर मृदा आवश्यक रूप से उत्पादक नहीं होती। उत्पादक मृदा सदैव उर्वर होती है।
4. यह जलवायु, प्रबंधन आदि पर निर्भर नहीं करती। यह जलवायु, प्रबंधन और तकनीक पर निर्भर करती है।

5. चूना विहीन एवं चूनेदार मरु मृदाओं का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए। [1+1=2]

Describe in brief Non-Calcic and Calcic desert soils.

चूना विहीन मरु मृदा (Non-Calcic Desert Soil): इन मृदाओं में चूने (कैल्शियम कार्बोनेट) की मात्रा बहुत कम या न के बराबर होती है। ये हल्की, बलुई होती हैं और इनमें जल धारण क्षमता कम होती है।

चूनेदार मरु मृदा (Calcic Desert Soil): इन मृदाओं में चूने (कैल्शियम कार्बोनेट) की मात्रा अधिक होती है। ये भारी, दोमट या चिकनी हो सकती हैं और इनमें जल धारण क्षमता अपेक्षाकृत अधिक होती है।

6. केंचुआ खाद के कोई चार महत्व लिखिये। [4 × ½ = 2]

Write any four importance of Vermi compost.

  1. मृदा की उर्वरता और जल धारण क्षमता में वृद्धि करता है।
  2. पौधों को आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करता है।
  3. मृदा में लाभकारी सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाता है।
  4. पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम करता है।

7. 'फव्वारा सेट' का चित्र बनाइये तथा किन्हीं दो भागों को नामांकित कीजिए। [1 + ½ + ½ = 2]

Draw a diagram of Sprinkler set of irrigation and label any two parts.

चित्र: (एक फव्वारा सेट का सरल चित्र जिसमें मुख्य पाइप, शाखा पाइप, और फव्वारा नोजल दिखाया गया है।)

नामांकित भाग:

  1. मुख्य पाइप (Main Pipe): पानी को स्रोत से शाखा पाइपों तक पहुँचाता है।
  2. फव्वारा नोजल (Sprinkler Nozzle): पानी को बूंदों के रूप में फैलाकर खेत में छिड़कता है।

8. खरपतवारों द्वारा होने वाली किन्हीं चार हानियों का वर्णन कीजिये। [4 × ½ = 2]

Describe any four losses caused by weeds.

  1. खरपतवार मुख्य फसल के साथ पानी, प्रकाश और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे फसल की पैदावार कम हो जाती है।
  2. ये फसलों में कीटों और रोगों को आश्रय प्रदान करते हैं, जिससे रोगों का प्रकोप बढ़ता है।
  3. कुछ खरपतवार जहरीले होते हैं और यदि वे फसल के साथ मिल जाएं तो पशुओं या मनुष्यों के लिए हानिकारक हो सकते हैं।
  4. खरपतवारों को हटाने के लिए अतिरिक्त श्रम और धन खर्च करना पड़ता है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है।

9. मानव आहार में विटामिन "सी" का महत्व लिखिए। [2]

Write importance of vitamin "C" in human diet.

विटामिन "सी" (एस्कॉर्बिक अम्ल) मानव आहार में अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, घावों को जल्दी भरने में मदद करता है, हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है, तथा आयरन के अवशोषण में सहायता करता है। इसकी कमी से स्कर्वी रोग हो सकता है।

20. फलोद्यान की स्थापना के समय ध्यान रखने योग्य किन्हीं चार बिन्दुओं का वर्णन कीजिए। [4 × ½ = 2]

Describe any four points are to be considered at the time of establishment of orchard.

  1. भूमि का चयन: उपजाऊ, जल निकासी वाली और उपयुक्त पी.एच. वाली भूमि का चयन करना चाहिए।
  2. जलवायु: चुने गए फलों की प्रजातियों के अनुकूल जलवायु (तापमान, वर्षा) का ध्यान रखना चाहिए।
  3. पौधों का चयन: रोगरहित, प्रमाणित और उन्नत किस्म के पौधों का चयन करना चाहिए।
  4. रोपण दूरी: पौधों के बीच उचित दूरी रखनी चाहिए ताकि उन्हें पर्याप्त प्रकाश और पोषण मिल सके।

2. गृह-वाटिका के लाभ लिखिए। (कोई आठ) [2]

Write the advantages of kitchen gardening. (any eight)

  1. ताजी, पौष्टिक और रसायन मुक्त सब्जियां प्राप्त होती हैं।
  2. परिवार के खर्च में कमी आती है।
  3. खाली समय का सदुपयोग होता है।
  4. पर्यावरण शुद्ध रहता है।
  5. शारीरिक व्यायाम मिलता है।
  6. मिट्टी और प्रकृति से जुड़ाव बढ़ता है।
  7. बच्चों को कृषि संबंधी ज्ञान मिलता है।
  8. मानसिक शांति मिलती है।

22. "टी" कलिकायन का नामांकित चित्र बनाकर वर्णन कीजिए। [1+1=2]

Explain the 'T' budding with the help of Labelled diagram.

चित्र: (एक शाखा पर 'T' आकार का चीरा लगाकर उसमें कली डालने का चित्र।)

वर्णन: 'टी' कलिकायन एक प्रकार का कलम विधि है। इसमें प्रवर्धित किए जाने वाले पौधे (स्टॉक) की छाल पर 'T' आकार का चीरा लगाया जाता है। फिर वांछित किस्म (सॉयन) से एक कली (आंख) को छाल सहित निकालकर इस चीरे में डाल दिया जाता है। इसके बाद इसे प्लास्टिक की पट्टी से बांध दिया जाता है। कुछ समय बाद कली स्टॉक से जुड़ जाती है और नया पौधा तैयार हो जाता है।

23. सांकुर डाली (सॉयन) का चुनाव करते समय क्या-क्या सावधानियाँ आवश्यक हैं। (कोई चार) [4 × ½ = 2]

Write any four precautions taken at the time of selection of scion.

  1. सॉयन स्वस्थ, रोगरहित और कीटमुक्त पौधे से लेना चाहिए।
  2. सॉयन अच्छी तरह से परिपक्व (एक वर्ष पुरानी) शाखा से लेना चाहिए।
  3. सॉयन में कम से कम 2-3 स्वस्थ कलियाँ (आंखें) होनी चाहिए।
  4. सॉयन को तेज धूप और हवा से बचाकर नमी में रखना चाहिए ताकि वह सूखे नहीं।

24) जैम बनाने की विधि का संक्षेप में वर्णन कीजिए। [2]

Describe in brief the method of JAM preparation.

जैम बनाने की विधि: जैम बनाने के लिए सबसे पहले फलों को अच्छी तरह धोकर छील लिया जाता है और बीज निकाल दिए जाते हैं। फिर फलों के टुकड़ों को पानी में उबालकर नरम किया जाता है। इसमें बराबर मात्रा में चीनी मिलाकर गाढ़ा होने तक पकाया जाता है। पकाते समय लगातार चलाते रहना चाहिए ताकि जले नहीं। जब मिश्रण गाढ़ा हो जाए और चम्मच से लेने पर टपकने की बजाय थोड़ा जमने लगे, तब इसे ठंडा करके साफ, सूखे जार में भर दिया जाता है।

25) बगीचे में पौधे लगाने की कोई तीन विधियों का वर्णन कीजिए। [1+1+1=3]

Describe any three planting methods of orchard.

बगीचे में पौधे लगाने की तीन विधियाँ:

  1. वर्गाकार विधि (Square Method): इसमें पौधों को एक वर्ग के कोनों पर लगाया जाता है। पंक्तियाँ एक-दूसरे से समकोण पर होती हैं। यह सबसे सामान्य विधि है जिसमें अंतर-फसल लेना आसान होता है।
  2. आयताकार विधि (Rectangular Method): इसमें पंक्तियों के बीच की दूरी अधिक और पौधों के बीच की दूरी कम रखी जाती है। इससे पंक्तियों के बीच खेती करना सुविधाजनक होता है।
  3. त्रिकोणीय विधि (Triangular Method): इसमें पौधों को एक समबाहु त्रिभुज के कोनों पर लगाया जाता है। इस विधि में प्रति हेक्टेयर अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं और भूमि का अधिकतम उपयोग होता है।

26) खरपतवार नियंत्रण के छः निरोधी उपाय लिखिए। [6 × ½ = 3]

Write Six preventive measures of weed control.

खरपतवार नियंत्रण के छः निरोधी उपाय:

  1. खेत में केवल प्रमाणित और स्वच्छ बीजों का ही प्रयोग करें।
  2. खाद और गोबर को अच्छी तरह सड़ाकर ही खेत में डालें।
  3. सिंचाई के पानी में खरपतवार के बीज न हों, इसका ध्यान रखें।
  4. खेत की मेड़ों और आसपास के क्षेत्रों को खरपतवार मुक्त रखें।
  5. फसल कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई करें ताकि खरपतवार के बीज नष्ट हो जाएं।
  6. खरपतवार के बीज बनने से पहले ही उन्हें नष्ट कर दें।

अथवा

खरपतवार के गुणन की किन्हीं तीन विधियों का वर्णन कीजिए। [3×1=3]

Describe any three methods of Weed Multiplication.

खरपतवार गुणन की तीन विधियाँ:

  1. बीज द्वारा गुणन: अधिकांश खरपतवार बीजों द्वारा फैलते हैं। ये बीज हवा, पानी, जानवरों और कृषि उपकरणों के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचते हैं।
  2. प्रकंद (Rhizome) द्वारा गुणन: कुछ खरपतवार जैसे दूब घास भूमिगत तनों (प्रकंद) द्वारा फैलते हैं। ये प्रकंद जमीन के अंदर फैलकर नए पौधे बनाते हैं।
  3. मूल कलिकाएँ (Root Buds) द्वारा गुणन: कुछ खरपतवारों की जड़ों पर कलिकाएँ होती हैं जो नए पौधे बनाती हैं। जुताई करने पर जड़ों के टुकड़े भी नए पौधे बना सकते हैं।

27) फल परिरक्षण क्या है? इसके मुख्य दो सिद्धांत लिखिए। [1+2=3]

What is Fruit preservation? Write two major principles of Fruit preservation.

फल परिरक्षण: फलों को लंबे समय तक खराब होने से बचाने की प्रक्रिया को फल परिरक्षण कहते हैं। इसका उद्देश्य फलों के पोषक तत्वों और स्वाद को सुरक्षित रखना है।

दो मुख्य सिद्धांत:

  1. सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकना: फलों को खराब करने वाले बैक्टीरिया, फफूंद और यीस्ट को नष्ट करना या उनकी वृद्धि को रोकना। यह गर्मी देकर (पाश्चुरीकरण), ठंडा करके या रसायनों द्वारा किया जाता है।
  2. एंजाइमों की क्रिया रोकना: फलों में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एंजाइम पकने और सड़ने की प्रक्रिया को तेज करते हैं। इन एंजाइमों को निष्क्रिय करने के लिए फलों को गर्म किया जाता है या अम्लीय माध्यम में रखा जाता है।

अथवा

स्थाई फल परिरक्षण क्या है? स्थाई फल परिरक्षण की दो विधियों का वर्णन कीजिए। [1+2=3]

What is permanent fruit preservation? Describe two methods of permanent fruit preservation.

स्थाई फल परिरक्षण: फलों को लंबे समय (महीनों या वर्षों) तक सुरक्षित रखने की प्रक्रिया को स्थाई फल परिरक्षण कहते हैं। इसमें फलों को इस प्रकार संसाधित किया जाता है कि वे कमरे के तापमान पर भी खराब न हों।

दो विधियाँ:

  1. डिब्बाबंदी (Canning): फलों को साफ करके चीनी की चाशनी में पकाया जाता है और फिर वायुरोधी डिब्बों में भरकर सील कर दिया जाता है। डिब्बों को उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है जिससे सभी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं।
  2. सुखाना (Drying): फलों से पानी की मात्रा निकालकर उन्हें सुखाया जाता है। पानी की कमी के कारण सूक्ष्मजीव नहीं पनप पाते। किशमिश, खुबानी और अंजीर इसके उदाहरण हैं।

28) i) सिंचाई के किन्हीं दो सतही जल स्रोतों का वर्णन कीजिए। [1+1=2]

i) Describe any two surface water sources of irrigation.

सिंचाई के दो सतही जल स्रोत:

  1. नदियाँ (Rivers): नदियाँ सिंचाई का प्रमुख सतही जल स्रोत हैं। नदियों से नहरों के माध्यम से पानी खेतों तक पहुंचाया जाता है। यह स्रोत विश्वसनीय और बड़े क्षेत्रों की सिंचाई के लिए उपयुक्त है।
  2. तालाब (Ponds): तालाब वर्षा के पानी को संग्रह करने के प्राकृतिक या कृत्रिम स्रोत हैं। छोटे क्षेत्रों की सिंचाई के लिए तालाबों का पानी उपयोगी होता है, विशेषकर वर्षा के बाद के महीनों में।

ii) सिंचाई की किन्हीं दो विधियों का वर्णन कीजिए। [1+1=2]

ii) Describe any two methods of irrigation.

सिंचाई की दो विधियाँ:

  1. बाढ़ सिंचाई (Flood Irrigation): इस विधि में खेत को पूरी तरह पानी से भर दिया जाता है। पानी खेत की सतह पर बहता है और मिट्टी में रिसता है। यह विधि सरल और सस्ती है लेकिन इसमें पानी की अधिक खपत होती है।
  2. ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation): इस विधि में पानी बूंद-बूंद करके सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है। पाइपों के माध्यम से पानी की छोटी-छोटी बूंदें निकलती हैं। यह जल-कुशल विधि है और पानी की बचत करती है।

प्रश्न 29

बाजरा की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए।

  1. बुवाई का समय
  2. पौधे से पौधे व लाइन से लाइन की दूरी
  3. दो उन्नत किस्में
  4. N, P, K की मात्रा (कि.ग्राम/हैक्टर)

अथवा

सरसों की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए।

  1. बुवाई का समय
  2. पौधे से पौधे व लाइन से लाइन की दूरी
  3. दो उन्नत किस्में
  4. N, P, K की मात्रा (कि.ग्राम/हैक्टर)

For scientific cultivation of 'BAJRA' crop explain the following points:

  1. Sowing Time
  2. Spacing
  3. Two improved varieties
  4. Quantity of N, P and K (kg/ha).

OR

For scientific cultivation of mustard crop explain the following points:

  1. Sowing Time
  2. Spacing
  3. Two improved varieties
  4. Quantity of N, P and K (kg/ha).

उत्तर (बाजरा के लिए):

  1. बुवाई का समय: बाजरा की बुवाई का सर्वोत्तम समय जुलाई का प्रथम सप्ताह है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में मानसून आने के तुरंत बाद बुवाई करनी चाहिए।
  2. दूरी: पंक्ति से पंक्ति की दूरी 45-50 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10-15 सेमी रखनी चाहिए।
  3. दो उन्नत किस्में: राज 171 (Rajasthan 171) और एमपी 7797 (MP 7797) बाजरा की दो उन्नत किस्में हैं।
  4. उर्वरक मात्रा (N, P, K): नाइट्रोजन (N) 60-80 किग्रा/हेक्टेयर, फास्फोरस (P) 30-40 किग्रा/हेक्टेयर और पोटाश (K) 20-30 किग्रा/हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए।

उत्तर (सरसों के लिए):

  1. बुवाई का समय: सरसों की बुवाई का उपयुक्त समय अक्टूबर का प्रथम पखवाड़ा है।
  2. दूरी: पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30-45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10-15 सेमी रखनी चाहिए।
  3. दो उन्नत किस्में: राजस्थान सरसों-1 (Rajasthan Mustard-1) और पूसा बोल्ड (Pusa Bold) सरसों की दो उन्नत किस्में हैं।
  4. उर्वरक मात्रा (N, P, K): नाइट्रोजन (N) 60-80 किग्रा/हेक्टेयर, फास्फोरस (P) 30-40 किग्रा/हेक्टेयर और पोटाश (K) 20-30 किग्रा/हेक्टेयर की दर से प्रयोग करना चाहिए।

प्रश्न 30

पपीता की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए :

  1. चार उन्नत किस्मों के नाम
  2. आद्रगलन रोग का निदान
  3. पौधा रोपण
  4. पपेन तैयार करना

अथवा

टमाटर की वैज्ञानिक खेती हेतु निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डालिए :

  1. खाद एवं उर्वरक
  2. सिंचाई
  3. चार उन्नत किस्मों के नाम
  4. उपज प्रति हैक्टर

For scientific cultivation of Papaya. Explain the following points:

  1. Name of four improved varieties.
  2. Control of Damping off Disease.
  3. Plantation.
  4. Processing of Papain.

OR

For scientific cultivation of Tomato. Explain the following points:

  1. Manure and Fertilizer.
  2. Irrigation.
  3. Name of four improved varieties.
  4. Yield per hectare.

उत्तर (पपीता के लिए):

  1. चार उन्नत किस्में: पूसा ड्वार्फ, पूसा जाइंट, कोइल, रेड लेडी।
  2. आद्रगलन रोग का निदान: यह रोग पौधशाला में अधिक नमी के कारण होता है। निदान हेतु बीज को कवकनाशी (जैसे कैप्टान) से उपचारित करें, जल निकासी उचित रखें, और प्रभावित पौधों को हटा दें।
  3. पौधा रोपण: पौधों को 2×2 मीटर की दूरी पर गड्ढों में रोपें। गड्ढों में पहले गोबर की खाद और मिट्टी भरें। रोपण वर्षा ऋतु या फरवरी-मार्च में करें।
  4. पपेन तैयार करना: कच्चे फलों पर चीरा लगाकर दूध निकाला जाता है, फिर इसे सुखाकर पाउडर बनाया जाता है। यह पपेन एंजाइम के रूप में उपयोग होता है।

उत्तर (टमाटर के लिए):

  1. खाद एवं उर्वरक: गोबर की खाद 20-25 टन प्रति हैक्टर डालें। रासायनिक उर्वरकों में नाइट्रोजन 100 किग्रा, फास्फोरस 80 किग्रा, पोटाश 60 किग्रा प्रति हैक्टर दें।
  2. सिंचाई: रोपण के तुरंत बाद सिंचाई करें। फिर 7-10 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें। फूल आने और फल बनने के समय नमी बनाए रखें।
  3. चार उन्नत किस्में: पूसा रूबी, पूसा गौरव, पूसा शीतल, अर्का विकास।
  4. उपज प्रति हैक्टर: उन्नत किस्मों से 400-500 क्विंटल प्रति हैक्टर तक उपज प्राप्त होती है।